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वर्णिक छंद (Varnik Chhand) | Hindi Grammar | GPN

क्या आपने कभी सवैया, कवित्त या द्रुतविलंबित जैसे छंदों के नाम सुने हैं? ये वर्णिक छंद हैं जहाँ वर्णों की गणना होती है, मात्राओं की नहीं। जब कविता में हर पंक्ति के वर्ण गिने जाते हैं और उनका एक निश्चित क्रम होता है, तो वह वर्णिक छंद कहलाता है। यह संस्कृत काव्य की देन है जो हिंदी में भी अपनी पहचान बनाए हुए है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 10–11 (परिचय) | कक्षा 11–12 (अभ्यास) | स्नातक स्तर (उच्च स्तर प्रयोग)


1. वर्णिक छंद: वर्णों का समूहन

वर्णिक छंद वह छंद है जिसमें वर्णों की संख्या और उनके क्रम (गण) का नियम होता है। इसमें मात्राओं की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि वर्णों की संख्या और उनका विशेष क्रम (गुरु-लघु का क्रम) महत्वपूर्ण होता है। वर्णिक छंद संस्कृत काव्य की देन है और हिंदी में भी इसका व्यापक प्रयोग हुआ है। जब आप "कवित्त" या "सवैया" पढ़ते हैं, तो उनमें वर्णों का एक निश्चित समूहन होता है - यही वर्णिक छंद है।

ऐतिहासिक संदर्भ देखें: केशवदास, बिहारी, भूषण, घनानंद जैसे रीतिकालीन कवियों ने वर्णिक छंदों का भरपूर प्रयोग किया है। बिहारी के दोहे वास्तव में सवैया छंद में हैं जिनमें वर्णों का विशेष क्रम है। जब आप "सतसैया के दोहरा, ज्यों नावक के तीर। देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर॥" पढ़ते हैं, तो यह सवैया छंद है जिसमें प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं। एक रोचक तथ्य: वर्णिक छंद संस्कृत प्रभावित छंद हैं और इनमें 'गण' की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं और वर्णिक छंद गणों में ही बंधे होते हैं।

2. वर्णिक छंद की परिभाषा

परिभाषा: वर्णिक छंद वह छंद है जिसमें वर्णों की संख्या निश्चित होती है और उनका क्रम (गुरु-लघु का क्रम) भी निश्चित होता है। इसमें मात्राओं की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, केवल वर्णों की संख्या और उनके क्रम (गण) का ध्यान रखा जाता है। वर्णिक छंद में प्रत्येक चरण वर्णों के गणों में विभाजित होता है।

3. वर्णिक छंद की विशेषताएँ

वर्णिक छंद की मुख्य पहचान और विशेषताएँ:

  • वर्ण गणना: इसमें वर्णों की गिनती की जाती है, मात्राओं की नहीं।
  • गणों में विभाजन: वर्ण तीन-तीन के समूहों (गणों) में बंटे होते हैं।
  • गुरु-लघु क्रम: गुरु (दीर्घ) और लघु (ह्रस्व) का निश्चित क्रम होता है।
  • संस्कृत प्रभाव: संस्कृत काव्य से प्रभावित और लिया गया छंद।
  • कठिनाई: मात्रिक छंद की तुलना में रचना में अधिक कठिन।
  • औपचारिकता: शास्त्रीय और औपचारिक काव्य में अधिक प्रयोग।

4. वर्ण और गण की अवधारणा

वर्णिक छंद को समझने के लिए वर्ण और गण की अवधारणा जानना जरूरी है:

क्रम गण वर्ण क्रम प्रतीक उदाहरण
1 यगण लघु-गुरु-गुरु U— — कमला, रमण
2 मगण गुरु-गुरु-गुरु — — — रामाय, काव्य
3 तगण गुरु-लघु-लघु — U U कविता, नगरी
4 रगण गुरु-लघु-गुरु — U — राधिका, माधव
5 जगण लघु-गुरु-लघु U — U विद्या, कल्याण
6 भगण गुरु-गुरु-लघु — — U गोपाल, देवता
7 नगण लघु-लघु-लघु U U U मनुज, चतुर
8 सगण लघु-लघु-गुरु U U — कमल, सुमन

5. प्रमुख वर्णिक छंद और उनके नियम

वर्णिक छंद के मुख्य प्रकार और उनके नियम:

क्रम छंद वर्ण गण/क्रम चरण प्रसिद्ध उदाहरण
1 सवैया 31 निश्चित गण क्रम 4 सतसैया के दोहरा... (बिहारी)
2 कवित्त 31 गण क्रम में भिन्नता 4 कवित्त केशव के भनै... (केशवदास)
3 द्रुतविलंबित 24 12+12 वर्ण 2 प्रेम की परिभाषा बतलाना...
4 मंदाक्रांता 17 विशिष्ट गण क्रम 4 मेघदूत में प्रयुक्त
5 शार्दूलविक्रीडित 19 विशिष्ट गण क्रम 4 संस्कृत श्लोकों में
6 इंद्रवज्रा 11 निश्चित गण क्रम 4 वैदिक छंद

6. विस्तृत उदाहरण और विश्लेषण

आइए प्रमुख वर्णिक छंदों को विस्तार से समझें:

1. सवैया:

  • उदाहरण: "सतसैया के दोहरा, ज्यों नावक के तीर।
    देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर॥" (बिहारी)
  • वर्ण विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 31 वर्ण
  • गण क्रम: भगण, भगण, रगण, गुरु (— — U | — — U | — U — | —)

2. कवित्त:

  • उदाहरण: "कवित्त केशव के भनै, सुनो सबै मन लाइ।
    बिहारी बिचारि कहत, सुजान समुझि सुनाइ॥"
  • वर्ण विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 31 वर्ण
  • विशेषता: सवैया से मिलता-जुलता, पर गण क्रम में भिन्नता

3. द्रुतविलंबित:

  • उदाहरण: "प्रेम की परिभाषा बतलाना, कठिन है बड़ा काम।
    जिसको समझे वही जाने, प्रेम है अनुपम धाम॥"
  • वर्ण विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 24 वर्ण (12+12)
  • गण क्रम: दो खंडों में विभाजित

7. गण पहचान की विधि

वर्णिक छंद में गणों की पहचान कैसे करें:

1. वर्णों को तीन-तीन के समूह में बाँटें
2. प्रत्येक वर्ण के लिए गुरु-लघु निर्धारित करें:
   • ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) = लघु (U)
   • दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) = गुरु (—)
3. तीन वर्णों के क्रम से गण पहचानें:
   • U— — = यगण
   • — — — = मगण
   • —UU = तगण
   • —U— = रगण
   • U—U = जगण
   • ——U = भगण
   • UUU = नगण
   • UU— = सगण

एक उदाहरण से समझें: "राम" शब्द में - रा (दीर्घ = —) + म (व्यंजन, पिछले स्वर से जुड़ा = कोई मूल्य नहीं) = केवल एक वर्ण 'रा' जो गुरु है। लेकिन गण में तीन वर्ण होने चाहिए, इसलिए "रामाय" जैसे शब्द लेने पड़ते हैं जिसमें रा (—) + मा (—) + य (अर्ध स्वर, लघु माना जा सकता है) = — — U जो भगण है।

8. सामान्य भ्रम और सावधानियाँ

छात्र अक्सर इन बातों में भ्रमित होते हैं और परीक्षा में गलतियाँ कर बैठते हैं:

  • वर्णिक और मात्रिक में भ्रम: वर्णिक में वर्ण गिने जाते हैं, मात्रिक में मात्राएँ।
  • सवैया और कवित्त में अंतर: दोनों में 31 वर्ण, पर गण क्रम में भिन्नता।
  • गुरु-लघु का गलत निर्धारण: ह्रस्व स्वर = लघु, दीर्घ स्वर = गुरु।
  • गण पहचान में त्रुटि: तीन वर्णों के क्रम को गलत पढ़ना।
  • व्यंजन की स्थिति: व्यंजन अपने से पहले के स्वर से जुड़ा होता है, अलग वर्ण नहीं।
  • संयुक्ताक्षर: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र को एक वर्ण माना जाता है।

9. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • वर्णिक छंद को 'वर्णवृत्त' भी कहते हैं।
  • सवैया सबसे प्रसिद्ध वर्णिक छंद है जिसका प्रयोग बिहारी, केशवदास ने किया।
  • गणों की संख्या 8 मानी जाती है जिन्हें 'अष्टगण' कहते हैं।
  • पिंगल ऋषि ने गणों का विस्तृत वर्णन किया है।
  • वर्णिक छंद मुख्यतः संस्कृत और प्राकृत भाषाओं से हिंदी में आए हैं।
  • रीतिकाल में वर्णिक छंदों का विशेष प्रयोग हुआ।
  • द्रुतविलंबित छंद आधुनिक हिंदी कविता में भी प्रयोग होता है।
  • वर्णिक छंदों का ज्ञान संस्कृत साहित्य पढ़ने के लिए भी आवश्यक है।
  • कुछ वर्णिक छंद विशेष रसों के लिए उपयुक्त माने गए हैं।

10. 🎯 वर्णिक छंद चुनौती

नीचे दिए गए 10 प्रश्नों में वर्णिक छंदों की पहचान करें:

1. "सतसैया के दोहरा, ज्यों नावक के तीर" - यह किस वर्णिक छंद का उदाहरण है?

उत्तर: सवैया - यह बिहारी का सवैया है जिसमें प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं।

2. वर्णिक छंद और मात्रिक छंद में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर: वर्णिक छंद में वर्णों की गिनती होती है जबकि मात्रिक छंद में मात्राओं की गिनती होती है।

3. सवैया छंद में एक चरण में कितने वर्ण होते हैं?

उत्तर: सवैया छंद में एक चरण में 31 वर्ण होते हैं।

4. "कवित्त केशव के भनै, सुनो सबै मन लाइ" - यह किस छंद का उदाहरण है?

उत्तर: कवित्त - यह केशवदास का कवित्त है।

5. गण किसे कहते हैं और कितने गण होते हैं?

उत्तर: गण तीन वर्णों का समूह होता है। मुख्य रूप से 8 गण होते हैं जिन्हें अष्टगण कहते हैं।

6. द्रुतविलंबित छंद में एक चरण में कितने वर्ण होते हैं?

उत्तर: द्रुतविलंबित छंद में एक चरण में 24 वर्ण होते हैं जो 12+12 के दो खंडों में बंटे होते हैं।

7. यगण का वर्ण क्रम क्या होता है?

उत्तर: यगण का वर्ण क्रम होता है: लघु-गुरु-गुरु (U— —)।

8. "प्रेम की परिभाषा बतलाना" - यह किस छंद का उदाहरण है?

उत्तर: द्रुतविलंबित - यह द्रुतविलंबित छंद का उदाहरण है।

9. वर्णिक छंद मुख्यतः किस काल में प्रचलित थे?

उत्तर: वर्णिक छंद मुख्यतः रीतिकाल में प्रचलित थे।

10. गुरु और लघु वर्ण में क्या अंतर है?

उत्तर: गुरु वर्ण दीर्घ स्वर वाला होता है (आ, ई, ऊ आदि) और लघु वर्ण ह्रस्व स्वर वाला होता है (अ, इ, उ आदि)।

11. सारांश

वर्णिक छंद काव्य की वह विधा है जो वर्णों की गणना और उनके निश्चित क्रम पर आधारित है। सवैया, कवित्त, द्रुतविलंबित जैसे वर्णिक छंदों ने हिंदी काव्य को एक विशिष्ट शास्त्रीय रूप प्रदान किया है। गणों की अवधारणा, वर्णों का समूहन और गुरु-लघु का निश्चित क्रम - ये तीनों वर्णिक छंद की मूलभूत विशेषताएँ हैं। ये छंद न केवल काव्य को संरचना प्रदान करते हैं बल्कि उसे एक गंभीर और शास्त्रीय रूप भी देते हैं। वर्णिक छंदों का अध्ययन हमें संस्कृत काव्य परंपरा से जोड़ता है और भाषा की गहराइयों तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त करता है।

12. संबंधित विषय संकेत

इस विषय के बाद आगे पढ़ें: कक्षा 11-12 • प्रमुख छंद (Major Meters)

📝 वर्णिक छंद अभ्यास कार्यपत्रक

वर्णिक छंद से संबंधित वर्कशीट।

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