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प्रमुख छंद (Major Chhand Types) | Hindi Grammar | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 14 JULY 2026

कक्षा ११ की वार्षिक काव्य-प्रतियोगिता में मैं जज था – एक छात्र ने अपनी रचना पढ़ी – "झूम-झूम बादल गरजे, सावन का मौसम आया।" दूसरे ने पढ़ा – "विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।" तीसरे ने सुनाया – "तरुवर फल नहीं खात, मृदु हृदय बहुत दीन।" मैंने सोचा – तीनों की रचनाएँ सुंदर थीं – पर उनकी लय और गति बिल्कुल अलग थी। पहली में मात्रिक छंद की सरल लय थी – दूसरी में वर्णिक छंद की परिष्कृत सटीकता – और तीसरी में शिखरिणी की मधुर गति। तब मुझे समझ आया – छंद की दुनिया बहुत विस्तृत है – और कक्षा 11-12 में हर छात्र को प्रमुख छंदों का पूरा ज्ञान होना चाहिए – मात्रिक भी और वर्णिक भी – ताकि वे किसी भी काव्य-पंक्ति को पहचान सकें, उसकी लय समझ सकें, और अपनी रचना को सटीक, लयबद्ध और साहित्यिक बना सकें। इस पोस्ट में हम कक्षा 11-12 के स्तर पर प्रमुख छंदमात्रिक (दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, बरवै, उल्लाला) और वर्णिक (शिखरिणी, वसंततिलका, मन्दाक्रान्ता, हरिणी, पृथ्वी) – सभी को तुलनात्मक अध्ययन, विस्तृत नियम, और उदाहरण के साथ समझेंगे – ताकि आप किसी भी काव्य-पंक्ति में छंद को तुरंत पहचान सकें और अपनी भाषा को साहित्यिक, परिष्कृत और प्रभावशाली बना सकें – जो बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 11-12 | CBSE एवं UP Board



1. प्रमुख छंद – एक नज़र में पूरा परिवार

प्रमुख छंद – वे छंद जो हिंदी और संस्कृत साहित्य में सबसे अधिक प्रयुक्त होते हैं – और जिनकी जानकारी कक्षा 11-12 के स्तर पर अत्यंत आवश्यक है – प्रमुख छंद कहलाते हैं। इनमें मात्रिक और वर्णिक – दोनों प्रकार के छंद आते हैं – और इन्हें पहचानना बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है – क्योंकि काव्य-खंड में छंद-पहचान के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

प्रमुख छंद – सूची –
  • मात्रिक छंद: दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, बरवै, उल्लाला
  • वर्णिक छंद: शिखरिणी, वसंततिलका, मन्दाक्रान्ता, हरिणी, पृथ्वी

इन 11 छंदों की पूरी समझ कक्षा 11-12 के स्तर पर अपेक्षित है – और हम इन्हें आगे विस्तार से देखेंगे।

क्यों ज़रूरी हैं ये छंद? – ये काव्य-सौंदर्य का आधार हैं – और बोर्ड परीक्षा में इनसे संबंधित 2-5 अंकों के प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं – इसलिए इन्हें अच्छी तरह से समझना चाहिए।

2. प्रमुख मात्रिक छंद – दोहा, चौपाई, सोरठा

दोहा – पहली और तीसरी पंक्ति में 13, दूसरी और चौथी में 11 मात्राएँ – तुक दूसरी और चौथी पंक्ति में – उदा. "जो रहे सो जाए, जो जाए सो रहे" – यह कबीर, तुलसी, रहीम का प्रिय छंद है। चौपाई – प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ – तुक सभी पंक्तियों में – उदा. "रघुपति राघव राजाराम" – यह अवधी काव्य (रामचरितमानस) का प्रमुख छंद है। सोरठा – दोहा का उल्टा – पहली और तीसरी में 11, दूसरी और चौथी में 13 मात्राएँ – उदा. "जो जनि जाने कौन" – यह भी भक्ति-काव्य में प्रयुक्त।

छंद प्रकार मात्राएँ तुक उदाहरण
दोहा मात्रिक 13+11 दूसरी-चौथी “जो रहे सो जाए, जो जाए सो रहे”
चौपाई मात्रिक 16 सभी “रघुपति राघव राजाराम”
सोरठा मात्रिक 11+13 पहली-तीसरी “जो जनि जाने कौन”
दोहा-चौपाई-सोरठा याद रखने की ट्रिक –
  • दोहा = 13+11 – तुक दूसरी-चौथी
  • चौपाई = 16 – तुक सभी
  • सोरठा = 11+13 – दोहा का उल्टा

3. अन्य मात्रिक छंद – रोला, बरवै, और उल्लाला

रोला – प्रत्येक पंक्ति में 24 मात्राएँ – 12+12 के विराम से – उदा. "मन मोरा, रन बिचारा" – यह वीर रस में अधिक प्रयुक्त होता है। बरवै – प्रत्येक पंक्ति में 8 मात्राएँ – छोटा और सरल छंद – उदा. "सब सुखी, सब निरोगी" – यह लोकगीतों में अधिक मिलता है। उल्लाला – प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ – पर चौपाई से अलग – उदा. "चलत मधुबन अति मृदु" – यह छंद भी भक्ति-काव्य में मिलता है।

छंद मात्राएँ विशेषता उदाहरण
रोला 24 (12+12) वीर रस में प्रयुक्त “मन मोरा, रन बिचारा”
बरवै 8 छोटा, सरल “सब सुखी, सब निरोगी”
उल्लाला 16 चौपाई से भिन्न “चलत मधुबन अति मृदु”

4. प्रमुख वर्णिक छंद – शिखरिणी, वसंततिलका

शिखरिणी – 17 वर्ण – क्रम: जगण, जगण, तगण, गुरु, लघु, गुरु (ल-ग-ल, ल-ग-ल, ग-ल-ग, ग, ल, ग) – यह अत्यंत लयबद्ध और मधुर छंद है – उदा. "तरुवर फल नहीं खात" – यह वीर, श्रृंगार, और करुण रस में प्रयुक्त होता है। वसंततिलका – 14 वर्ण – क्रम: तगण, तगण, जगण, गुरु, गुरु (ग-ल-ग, ग-ल-ग, ल-ग-ल, ग, ग) – उदा. "तारा-गणों से जगमग है यह आकाश" – यह संस्कृत और हिंदी दोनों में प्रचलित है।

छंद वर्ण गण क्रम उदाहरण
शिखरिणी 17 जगण-जगण-तगण-ग-ल-ग “तरुवर फल नहीं खात”
वसंततिलका 14 तगण-तगण-जगण-ग-ग “तारा-गणों से जगमग है”

5. अन्य वर्णिक छंद – मन्दाक्रान्ता, हरिणी, पृथ्वी

मन्दाक्रान्ता – 17 वर्ण – क्रम: जगण × 4 + स-ल-ग – यह संस्कृत का प्रसिद्ध छंद है – उदा. "शैल-शिखर पर खड़ा वीर" हरिणी – 16 वर्ण – क्रम: स-ल-ग, ल-ग-ल, ल-ग-ल, स-ल-ग – उदा. "मुक्त-हृदय से निकले" पृथ्वी – 18 वर्ण – क्रम: गुरु, लघु, गुरु, गुरु, लघु, गुरु – उदा. "पृथ्वी-तल पर सब सुखी"

छंद वर्ण गण क्रम उदाहरण
मन्दाक्रान्ता 17 जगण×4+स-ल-ग “शैल-शिखर पर खड़ा वीर”
हरिणी 16 स-ल-ग, ल-ग-ल×2, स-ल-ग “मुक्त-हृदय से निकले”
पृथ्वी 18 ग-ल-ग, ग-ल-ग, ग-ल-ग “पृथ्वी-तल पर सब सुखी”

6. सभी प्रमुख छंदों की तुलनात्मक तालिका

सभी 11 प्रमुख छंद – एक नज़र में:

छंद प्रकार गणना मात्रा/वर्ण उदाहरण
दोहा मात्रिक 13+11 मात्राएँ “जो रहे सो जाए”
चौपाई मात्रिक 16 मात्राएँ “रघुपति राघव”
सोरठा मात्रिक 11+13 मात्राएँ “जो जनि जाने”
रोला मात्रिक 12+12 मात्राएँ “मन मोरा”
बरवै मात्रिक 8 मात्राएँ “सब सुखी”
उल्लाला मात्रिक 16 मात्राएँ “चलत मधुबन”
शिखरिणी वर्णिक जगण×2+तगण+ग+ल+ग 17 वर्ण “तरुवर फल”
वसंततिलका वर्णिक तगण×2+जगण+ग+ग 14 वर्ण “तारा-गणों”
मन्दाक्रान्ता वर्णिक जगण×4+स-ल-ग 17 वर्ण “शैल-शिखर”
हरिणी वर्णिक स-ल-ग+ल-ग-ल×2+स-ल-ग 16 वर्ण “मुक्त-हृदय”
पृथ्वी वर्णिक ग-ल-ग×3 18 वर्ण “पृथ्वी-तल”

7. छंद पहचान की ट्रिक्स और बोर्ड परीक्षा सुझाव

छंद पहचानने की सुपर ट्रिक्स – खासकर कक्षा 11-12 के लिए:

  • ट्रिक 1 – मात्रिक vs वर्णिक – पहली पहचान: अगर पंक्ति में मात्राएँ गिन रहे हैं – तो मात्रिक – अगर वर्ण – तो वर्णिक – यह सबसे बुनियादी अंतर है।
  • ट्रिक 2 – दोहा vs सोरठा: दोहा = 13+11 – सोरठा = 11+13 – 'दो' = 13 (पहले बड़ा) – 'सो' = 11 (पहले छोटा) – यह ट्रिक याद रखें!
  • ट्रिक 3 – चौपाई vs रोला: चौपाई = 16 (हर पंक्ति में) – रोला = 24 (12+12 का विराम) – चौपाई सरल – रोला थोड़ा जटिल।
  • ट्रिक 4 – शिखरिणी vs वसंततिलका: शिखरिणी = 17 वर्ण – वसंततिलका = 14 वर्ण – 'शिखर' = ऊँचा (17) – 'वसंत' = छोटा (14) – याद रखें!
  • ट्रिक 5 – मन्दाक्रान्ता vs हरिणी: दोनों 16-17 वर्ण – पर गण क्रम अलग – मन्दाक्रान्ता में जगण अधिक (4 बार) – हरिणी में स-ल-ग – ध्यान से देखें।
बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष सुझाव –
  • छंद पहचान के प्रश्नों में मात्राएँ/वर्ण गिनें – यही सबसे सुरक्षित तरीका है।
  • दोहा और सोरठा – तुक का ध्यान रखें – दोहे में दूसरी-चौथी – सोरठे में पहली-तीसरी।
  • शिखरिणी और वसंततिलका – वर्ण संख्या याद रखें – 17 और 14 – यही मूल अंतर है।
  • अभ्यास से ही छंद-पहचान मजबूत होती है – रोज़ 5-10 पंक्तियाँ पढ़ें और छंद पहचानें।


हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “रघुपति राघव राजाराम” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: चौपाई – 16 मात्राएँ – प्रत्येक पंक्ति में – यह चौपाई का मूल लक्षण है।
उदाहरण 2
प्रश्न: “शैल-शिखर पर खड़ा वीर” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: मन्दाक्रान्ता – 17 वर्ण – जगण-जगण-जगण-जगण-स-ल-ग का क्रम – वर्णिक छंद।
उदाहरण 3
प्रश्न: “जो रहे सो जाए, जो जाए सो रहे” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: दोहा – पहली पंक्ति में 13 मात्राएँ – दूसरी में 11 – यह दोहे का लक्षण है – मात्रिक छंद।
उदाहरण 4
प्रश्न: “मुक्त-हृदय से निकले” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: हरिणी – 16 वर्ण – स-ल-ग, ल-ग-ल, ल-ग-ल, स-ल-ग का क्रम – वर्णिक छंद।
उदाहरण 5
प्रश्न: “सब सुखी, सब निरोगी” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: बरवै – प्रत्येक पंक्ति में 8 मात्राएँ – छोटा और सरल मात्रिक छंद।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“तारा-गणों से जगमग है” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: वसंततिलका – 14 वर्ण – तगण-तगण-जगण-ग-ग का क्रम – वर्णिक छंद।
प्रश्न 2
“मन मोरा, रन बिचारा” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: रोला – 24 मात्राएँ (12+12) – मात्रिक छंद।
प्रश्न 3
“तरुवर फल नहीं खात” – यह किस छंद का उदाहरण है?
उत्तर देखें
उत्तर: शिखरिणी – 17 वर्ण – जगण-जगण-तगण-ग-ल-ग का क्रम – वर्णिक छंद।
प्रश्न 4
दोहा और सोरठा में मुख्य अंतर क्या है? (एक वाक्य में)
उत्तर देखें
उत्तर: दोहे में 13+11 मात्राएँ – सोरठे में 11+13 – दोनों मात्रिक छंद हैं – पर क्रम उल्टा।
प्रश्न 5
चौपाई और उल्लाला में क्या समानता है? (एक वाक्य में)
उत्तर देखें
उत्तर: दोनों में 16 मात्राएँ होती हैं – पर चौपाई अवधी का प्रमुख छंद है – उल्लाला भिन्न है।

प्रमुख छंद – काव्य-सौंदर्य का आधार, परीक्षा की कुंजी

प्रमुख छंद हिंदी और संस्कृत साहित्य की आत्मा हैं – ये कविता को लय, गति और संगीतमयता देते हैं – दोहा, चौपाई, शिखरिणी, वसंततिलका – ये सभी अमर छंद हैं – जिनमें हज़ारों कवियों ने अपनी रचनाएँ लिखी हैं। 'जो रहे सो जाए' – दोहा – 'रघुपति राघव' – चौपाई – 'तरुवर फल' – शिखरिणी – हर छंद की अपनी लय – हर छंद का अपना सौंदर्य – यही छंद-शास्त्र का जादू है। इस पोस्ट में हमने  छंद और  मात्रिक छंद की बुनियाद पर 11 प्रमुख छंदों – मात्रिक (दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, बरवै, उल्लाला) और वर्णिक (शिखरिणी, वसंततिलका, मन्दाक्रान्ता, हरिणी, पृथ्वी) – की पूरी समझ, तुलनात्मक अध्ययन, और पहचान की ट्रिक्स – को विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी काव्य-पंक्ति में छंद को तुरंत पहचान सकते हैं और अपनी भाषा को साहित्यिक, परिष्कृत और प्रभावशाली बना सकते हैं – जो बोर्ड परीक्षा और जीवन दोनों में काम आएगा।

याद रखें – जितना अधिक आप कविता पढ़ेंगे और छंदों को पहचानने का अभ्यास करेंगे – उतनी ही अच्छी आपकी समझ होगी। काव्य-पाठ करें – मात्राएँ/वर्ण गिनें – छंद को महसूस करें – और अपनी भाषा को सटीक, परिष्कृत और यादगार बनाएँ – यह कौशल आपको जीवन भर काम आएगा – चाहे साहित्य हो, परीक्षा हो, या उच्च-स्तरीय अभिव्यक्ति – हर जगह लयबद्ध और प्रभावशाली भाषा आपकी पहचान बनेगी।

📝 प्रमुख छंद अभ्यास – कक्षा 11-12

इस वर्कशीट में 30 काव्य-पंक्तियाँ दी गई हैं – जिनमें आपको मात्राएँ/वर्ण गिनने हैं – और बताना है कि वे दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, बरवै, उल्लाला, शिखरिणी, वसंततिलका, मन्दाक्रान्ता, हरिणी, या पृथ्वी में से किस छंद का उदाहरण हैं – साथ ही मात्रिक और वर्णिक छंदों के अंतर पर आधारित प्रश्न भी हैं।

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