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मेरे संग की औरतें (Mere Sang Ki Auraten) – मृदुला गर्ग (कृतिका) – नारी शक्ति और पारिवारिक संस्मरण | कक्षा 9 | GPN

📚 कक्षा: 9 | 📖 पुस्तक: कृतिका | ✍️ लेखिका: मृदुला गर्ग | 📝 प्रकार: संस्मरणात्मक रेखाचित्र | ⭐⭐⭐ बहुत महत्वपूर्ण


📌 अनुक्रमणिका

इस पाठ को गहराई से समझने के लिए छात्र कक्षा 9 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. लेखिका परिचय

📝 मृदुला गर्ग का जीवन परिचय

मृदुला गर्ग का जन्म 25 अक्टूबर 1938 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता श्री बी.पी. जैन और माता श्रीमती रविकांता थीं। बचपन में ही उनके पिता का दिल्ली स्थानांतरण हो गया, जिससे उनका पूरा परिवार दिल्ली आ गया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। सन् 1960 से 1963 तक उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध इंद्रप्रस्थ कॉलेज और जानकी देवी कॉलेज में अध्यापन किया।

मृदुला गर्ग ने 32 वर्ष की आयु में साहित्य लेखन प्रारंभ किया। उनकी पहली कहानी "रूकावट" 1971 में कमलेश्वर जी के संपादन में 'सारिका' पत्रिका में प्रकाशित हुई। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, व्यंग्य और यात्रा-वृत्तांत सहित 20 से अधिक पुस्तकों की रचना की है। उनके प्रमुख उपन्यास हैं – 'उसके हिस्से की धूप', 'वंशज', 'चितकोबरा', 'अनित्य', 'मैं और मैं', 'कठगुलाब', 'मिलजुल मन'। कहानी संग्रहों में 'कितनी कैदें', 'टुकड़ा टुकड़ा आदमी', 'डैफोडिल जल रहे हैं', 'शहर के नाम' आदि प्रमुख हैं।

उनकी रचनाओं का अंग्रेजी, जर्मन, जापानी, चेक सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उन्हें हिंदी अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान (1988), उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण (1999), 'कठगुलाब' के लिए व्यास सम्मान (2004) तथा 'मिलजुल मन' उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (2013) से सम्मानित किया गया है।

📖 पाठ की पृष्ठभूमि

'मेरे संग की औरतें' मृदुला गर्ग द्वारा रचित एक संस्मरणात्मक रेखाचित्र है। इसमें लेखिका ने अपने परिवार की चार पीढ़ियों की महिलाओं – परदादी, दादी, नानी, माँ और बहनों – के व्यक्तित्व, विचारों और जीवन जीने के तरीकों पर गहराई से प्रकाश डाला है। यह पाठ दर्शाता है कि किस तरह पारंपरिक ढाँचे में रहते हुए भी ये महिलाएँ अपनी सोच और कार्यों से लीक से हटकर जीवन जीती हैं और समाज में बदलाव लाती हैं।

🎯 पाठ का महत्व

बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से लेखिका की नानी, माँ और बहनों के व्यक्तित्व की विशेषताएँ, परदादी द्वारा लड़की पैदा होने की मन्नत माँगने के कारण, चोर प्रसंग के माध्यम से सहजता से व्यवहार परिवर्तन, लेखिका के शिक्षा के प्रति प्रयास तथा पाठ में वर्णित महिलाओं की स्वतंत्र सोच पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

2. सरल सारांश

मृदुला गर्ग का यह संस्मरण उनके परिवार की महिलाओं की कहानी है। लेखिका की नानी पारंपरिक, अनपढ़ और परदानशीं महिला थीं, जिनके पति शादी के तुरंत बाद बैरिस्ट्री पढ़ने विलायत चले गए थे। कैंब्रिज से डिग्री लेकर लौटने पर उन्होंने विलायती रीति-रिवाज अपना लिए, पर नानी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने अपनी जीवन-शैली में कोई बदलाव नहीं किया। मृत्यु से पहले उन्होंने अपने पति के मित्र स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा से मिलने की इच्छा जताई और उनसे अपनी बेटी की शादी किसी स्वतंत्रता सेनानी से करने का आग्रह किया। इस प्रकार लेखिका की माँ का विवाह एक ऐसे युवक से हुआ, जिसे आई.सी.एस. परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया था।

लेखिका की माँ बहुत नाजुक और सुंदर थीं। वे खादी की साड़ी पहनती थीं, जो उनके लिए बहुत भारी होती थी। वे घर-गृहस्थी के कामों में रुचि नहीं लेती थीं, बल्कि उनका अधिकांश समय किताबें पढ़ने, साहित्य-चर्चा और संगीत सुनने में बीतता था। इसके बावजूद परिवार के सभी सदस्य उनका बहुत आदर करते थे। उनके आदर के दो मुख्य कारण थे – वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और किसी की बात दूसरे से नहीं कहती थीं।

लेखिका की परदादी को लीक से हटकर चलने का शौक था। उन्होंने मंदिर में जाकर मन्नत माँगी कि उनकी पतोहू का पहला बच्चा लड़की हो। यह बात सुनकर सब चकित रह गए। उनकी इस मन्नत के बाद एक नहीं, पाँच कन्याओं का जन्म हुआ। एक बार जब घर के सभी लोग बारात में गए हुए थे, तब एक चोर हवेली में घुस आया। परदादी उस कमरे में सो रही थीं। उनकी नींद खुली तो उन्होंने चोर से पानी माँगा। चोर ने उनके लिए कुएँ से पानी लाकर दिया। उन्होंने आधा पानी स्वयं पिया और आधा चोर को पिलाते हुए कहा – "अब हम एक लोटे से पानी पीकर माँ-बेटे हुए। अब तू चाहे चोरी कर या खेती।" इस सहज व्यवहार से चोर का हृदय परिवर्तन हो गया और उसने चोरी छोड़कर खेती करना शुरू कर दिया।

लेखिका और उनकी बहनों पर इन महिलाओं का गहरा प्रभाव पड़ा। सभी बहनें स्वतंत्र विचारों वाली थीं। बड़ी बहन मंजुल भगत लेखिका बनीं। लेखिका स्वयं (मृदुला गर्ग) ने भी लेखन किया। उनकी बहन रेणु का स्वभाव बिल्कुल अलग था – वह गाड़ी में बैठने से इनकार कर देती थी, बी.ए. करने के महत्व पर सवाल उठाती थी। चित्रा को पढ़ाने में अधिक रुचि थी और उन्होंने एक नजर में ही वर चुन लिया। अचला ने पिता की पसंद से शादी की, पर बाद में लिखना शुरू कर दिया।

लेखिका ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कर्नाटक के छोटे से कस्बे बागलकोट में जहाँ उनके बच्चों के लिए कोई अच्छा स्कूल नहीं था, उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से अंग्रेजी-हिंदी-कन्नड़ तीन भाषाओं में पढ़ाने वाला एक प्राइमरी स्कूल खोला, जिसे बाद में सरकार से मान्यता भी मिली।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 प्रमुख बिंदु

  • लेखिका की नानी – पारंपरिक, अनपढ़, परदानशीं परंतु आजाद ख्याल। उन्होंने बेटी की शादी स्वतंत्रता सेनानी से करवाई।
  • लेखिका की माँ – नाजुक, सुंदर, साहित्य-संगीत प्रेमी, सत्यवादी और गोपनीयता की रक्षक। घर-गृहस्थी से दूर रहकर भी सबके आदर की पात्र।
  • लेखिका की परदादी – लीक से हटकर चलने वाली। पहले बच्चे के रूप में लड़की की मन्नत माँगना और चोर को सहजता से सुधार देना।
  • चोर प्रसंग – सहजता और मानवीय व्यवहार से हृदय परिवर्तन की मिसाल।
  • लेखिका की बहनें – रेणु की विचित्र स्वतंत्रता, चित्रा का आत्म-निर्णय, अचला का लेखन, मंजुल और मृदुला का साहित्य-सृजन।
  • शिक्षा का जन्मसिद्ध अधिकार – लेखिका द्वारा कर्नाटक में स्कूल खोलने का प्रयास।

📌 मूलभाव / Theme

यह पाठ बताता है कि परंपरा के ढाँचे में रहते हुए भी स्त्रियाँ अपनी सोच और कार्यों से स्वतंत्रता पा सकती हैं। लेखिका ने अपनी चार पीढ़ियों की महिलाओं के माध्यम से यह दिखाया है कि सच्ची आज़ादी बाहरी दबावों में जीने की नहीं, बल्कि अपने ढंग से जीने की है। नानी ने पति की विलायती जीवनशैली को न अपनाकर, माँ ने घरेलू भूमिकाओं से अलग हटकर, परदादी ने लड़की की मन्नत माँगकर और चोर को सहजता से सुधारकर, और बहनों ने अपने अनूठे निर्णयों से यह सिद्ध किया कि स्त्री का आत्म-सम्मान और आत्म-निर्णय ही सबसे बड़ी पूँजी है।

4. पात्र चित्रण

👵 नानी

व्यक्तित्व: पारंपरिक, अनपढ़, परदानशीं लेकिन आजाद ख्याल। उनके पति विलायत जाकर बैरिस्टर बने और विलायती रीति-रिवाज अपनाए, पर नानी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने अपने जीवन को अपने ढंग से जीया।

देशभक्ति: अंतिम समय में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा से मिलकर अपनी बेटी की शादी किसी स्वतंत्रता सेनानी से करने की इच्छा जताई। यह उनके मन में सुलगती स्वतंत्रता की भावना को दर्शाता है।

👩 माँ

रूप-रंग: नाजुक और सुंदर। लेखिका ने उन्हें 'पारिजात' कहा है।

स्वभाव: वे घर-गृहस्थी और बच्चों के लालन-पालन में रुचि नहीं लेती थीं। उनका अधिकांश समय किताबें पढ़ने, साहित्य-चर्चा और संगीत सुनने में बीतता था।

विशेषताएँ: वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और किसी की गोपनीय बात को दूसरे पर जाहिर नहीं होने देती थीं। इन दो गुणों के कारण उन्हें घर में आदर और बाहर मित्र मिलते थे। उनके व्यक्तित्व का इतना प्रभाव था कि लोग हर ठोस काम में उनकी राय लेते और उसका पालन करते थे।

👵 परदादी

साहसी और स्वतंत्र: उन्हें लीक से हटकर चलने का शौक था। उन्होंने मंदिर में जाकर मन्नत माँगी कि उनकी पतोहू का पहला बच्चा लड़की हो – यह उस समय के समाज में क्रांतिकारी सोच थी।

सहज व्यवहार: चोर के प्रसंग में उन्होंने डराने-धमकाने या पुलिस में देने के बजाय उससे पानी पीकर उसे अपना 'बेटा' बना लिया। उनके इस सहज और मानवीय व्यवहार ने चोर का हृदय परिवर्तन कर दिया।

👧 बहनें

मंजुल भगत (रानी): सबसे बड़ी बहन, लेखिका।

मृदुला गर्ग (उमा): लेखिका स्वयं।

चित्रा (गौरी): तीसरी बहन। उन्हें खुद पढ़ने से ज्यादा दूसरों को पढ़ाने में रुचि थी। उनके शिष्यों के अंक उनसे अधिक आते थे। उन्होंने एक नजर में ही वर चुन लिया और उसी से शादी की।

रेणु: चौथी बहन। बहुत स्वतंत्र विचारों वाली। गरमी में स्कूल से पैदल लौटना, गाड़ी में बैठने से इनकार करना, बी.ए. करने के महत्व पर सवाल उठाना – उनका स्वभाव बिल्कुल अलग था। वह सच बोलने में माँ से भी दो कदम आगे थीं।

अचला: सबसे छोटी बहन। अर्थशास्त्र और पत्रकारिता में पढ़ाई की। पिता की पसंद से शादी की, पर बाद में अंग्रेजी में लिखना शुरू किया।

राजीव: भाई, जो हिंदी में लिखते हैं।

अन्य अध्यायों को पढ़ने के लिए छात्र कक्षा 10 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 10 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
परदानशींपरदा करने वाली, घूँघट में रहने वालीनानी परदानशीं औरत थीं, पर उनके विचार आजाद थे।
बैरिस्ट्रीवकालत की पढ़ाईनाना बैरिस्ट्री पढ़ने विलायत चले गए थे।
विलायतविदेश (विशेषकर इंग्लैंड)वे विलायत से डिग्री लेकर लौटे।
फ़रमाबरदारआज्ञाकारी, हुक्म मानने वालानानी अपनी बेटी की शादी साहबों के फ़रमाबरदार से नहीं करना चाहती थीं।
परिकथापरी-कथा, कहानीनाना की रज़ामंदी एक रोमांचक परिकथा थी।
तिलिस्मजादू, मायाउस कहानी का तिलिस्म और गाढ़ा हो गया।
पारिजातकल्पवृक्ष, एक प्रकार का दिव्य वृक्षमाँ पारिजात से कम जादुई नहीं लगती थीं।
सनकदीवानगी, अजीब सी आदतउन दो सनकी बुढ़ियों के बीच अच्छी फ़ेंसी थी।
अपरिग्रहसंग्रह न करना, जमा न करनाजैन समाज में अपरिग्रह का बहुत महत्व है।
बदस्तूरयथावत, जैसे का तैसामैं बदस्तूर रोती रही।
मुहर्रमीशोकाकुल, दुखीहमारी सूरतें मुहर्रमी नजर आ रही थीं।
कयामतीप्रलयकारी, भयंकरउस कयामती बारिश के बाद सब ठप्प हो गया।
बशर्तेंशर्त के साथ, अगर ऐसा होस्कूल खुलेगा बशर्तें आप यकीन दिलाएँ।
इसरारआग्रह, ज़िदमैंने अपना इसरार जारी रखा।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

प्रश्न 1: लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं?

लेखिका अपनी नानी से अनेक कारणों से प्रभावित थीं – (1) नानी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से मिलकर यह इच्छा प्रकट की थी कि उनकी बेटी की शादी किसी स्वतंत्रता सेनानी से हो, न कि अंग्रेजों के आज्ञाकारी से। (2) जीवनभर परदे में रहने वाली नानी ने एक पर-पुरुष से मिलने का साहस किया। (3) उनके मन में देश की स्वतंत्रता के लिए गहरा जुनून था। (4) वे निजी जीवन में आजाद-ख्याल थीं और अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीती थीं। इन सभी कारणों से नानी के व्यक्तित्व ने लेखिका को प्रभावित किया।

प्रश्न 2: लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?

लेखिका की नानी ने आज़ादी के आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उनके पति अंग्रेजों के भक्त थे और साहबों की तरह जीवन जीते थे, लेकिन नानी ने कभी अंग्रेजियत को स्वीकार नहीं किया। उनकी सबसे बड़ी भागीदारी यह थी कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी एक स्वतंत्रता सेनानी से करवाई, जिससे उनकी आने वाली पीढ़ियाँ अंग्रेज-भक्तों के प्रभाव से मुक्त हो सकें।

प्रश्न 3 (क): लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।

लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ थीं – (1) वे बहुत नाजुक और सुंदर थीं, लेखिका ने उन्हें 'पारिजात' कहा है। (2) वे खादी की साड़ी पहनती थीं और गांधीजी के सिद्धांतों का पालन करती थीं। (3) उन्हें पुस्तकें पढ़ने, साहित्य-चर्चा और संगीत सुनने का शौक था। (4) वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं। (5) वे किसी की गोपनीय बात दूसरे से नहीं कहती थीं। इन दो गुणों के कारण उन्हें घर में आदर और बाहर मित्र मिलते थे। (6) वे आम भारतीय माँ की तरह बच्चों को लाड़-प्यार नहीं करती थीं और न ही घर-गृहस्थी के कामों में रुचि लेती थीं।

प्रश्न 3 (ख): लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।

लेखिका की दादी के घर का माहौल अत्यंत स्वतंत्र और उदार था। घर में कोई भी किसी के निजी जीवन में दखल नहीं देता था। सभी को अपने विचार रखने और अपने ढंग से जीने की छूट थी। एक ओर नाना अंग्रेजों के प्रशंसक थे, दूसरी ओर नानी के मन में स्वतंत्रता का जुनून था। परदादी ने पहले बच्चे के रूप में लड़की की मन्नत माँगी तो सब चकित रह गए, पर किसी ने उनका विरोध नहीं किया। माँ घर-गृहस्थी से दूर रहती थीं, फिर भी सब उनका आदर करते थे। घर में ऐसा माहौल था जहाँ विरोधी विचारों के बावजूद सब एक साथ सुखपूर्वक रहते थे।

प्रश्न 4: आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी?

परदादी ने पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत कई कारणों से माँगी होगी – (1) वे स्वयं लीक से हटकर चलने वाली महिला थीं, इसलिए परंपरा के विपरीत काम करना उन्हें अच्छा लगता था। (2) उनके मन में लड़का-लड़की का कोई भेद नहीं था। (3) हो सकता है कि उन्हें लगता हो कि परिवार में लड़कियों की कमी है या लड़कियों के प्रति समाज का नजरिया बदलना चाहिए। (4) वे यह दिखाना चाहती थीं कि बेटियाँ भी बेटों की तरह ही परिवार की शान होती हैं।

प्रश्न 5: डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है – पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।

यह बात पाठ के चोर-प्रसंग से स्पष्ट होती है। जब चोर लेखिका की परदादी के कमरे में घुसा, तो उन्होंने न तो उसे पकड़ा, न पिटवाया और न ही उसे डांटा-डपटा। उन्होंने बड़ी सहजता से उससे पानी लाने को कहा, उसके लाए पानी को पिया और उसे भी पिलाया। फिर उन्होंने कहा – "अब हम माँ-बेटे हुए, तू चाहे चोरी कर या खेती।" उनके इस मानवीय और सहज व्यवहार ने चोर का हृदय परिवर्तन कर दिया और उसने चोरी छोड़कर खेती करना शुरू कर दिया। यदि वे उसके साथ बुरा व्यवहार करतीं, तो वह और अधिक कटु हो सकता था।

प्रश्न 6: ‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है’ – इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

जब लेखिका कर्नाटक के छोटे से कस्बे बागलकोट में रहने लगीं, वहाँ उनके बच्चों के लिए कोई अच्छा स्कूल नहीं था। उन्होंने पहले कैथोलिक बिशप से स्कूल खोलने का आग्रह किया, लेकिन वे असफल रहीं। तब उन्होंने स्वयं ही यह बीड़ा उठाया। स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने अंग्रेजी-हिंदी-कन्नड़ तीन भाषाओं में पढ़ाने वाला एक प्राइमरी स्कूल खोला और कर्नाटक सरकार से उसे मान्यता दिलवाई। उनके अपने बच्चे और अन्य अधिकारियों के बच्चे उसी स्कूल में पढ़े और बाद में अलग-अलग शहरों के अच्छे स्कूलों में दाखिला पाया।

प्रश्न 7: पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है?

पाठ के अनुसार, वे इंसान अधिक श्रद्धा भाव से देखे जाते हैं जो सत्यवादी, ईमानदार और निजता का सम्मान करने वाले होते हैं। लेखिका की माँ को इसी कारण सबका आदर मिलता था – वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और किसी की बात दूसरे से नहीं कहती थीं। इसके अलावा, जो लोग अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहते हैं और परंपरा के बंधनों से मुक्त होकर जीते हैं, वे भी श्रद्धा के पात्र बनते हैं – जैसे नानी, परदादी और लेखिका की बहनें।

प्रश्न 8: ‘सच, अकेलेपन का मजा ही कुछ और है’ – इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

यह कथन लेखिका की बहन रेणु के संदर्भ में आया है। एक दिन भारी बारिश के बाद स्कूल की बस नहीं आई, तो रेणु अकेली पैदल ही दो मील चलकर स्कूल गई। स्कूल बंद था, पर वह खाली लौट आई। लेखिका सोचती हैं कि उस दिन रेणु ने अकेलेपन का जो मज़ा लिया होगा – जगह-जगह पानी से भरे सुनसान शहर में अकेले अपनी मंजिल की ओर बढ़ना – वह अद्भुत रहा होगा। इससे रेणु के स्वतंत्र और साहसी व्यक्तित्व का पता चलता है। वह दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अकेले ही अपने रास्ते चलने को तैयार रहती थी। लेखिका स्वयं भी अपने जीवन में ऐसे ही अकेलेपन का सुख भोगती हैं – लेखन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4-5 अंक)

प्रश्न 9: ‘मेरे संग की औरतें’ पाठ में लेखिका ने चार पीढ़ियों की महिलाओं का चित्रण किया है। उन महिलाओं की जीवन-दृष्टि पर प्रकाश डालिए।

लेखिका ने इस पाठ में अपनी चार पीढ़ियों की महिलाओं – परदादी, नानी, माँ और बहनों – के माध्यम से भारतीय स्त्री की उस यात्रा को चित्रित किया है जो परंपरा के बंधनों में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाती है।

परदादी: वे लीक से हटकर चलने वाली महिला थीं। उन्होंने पहले बच्चे के रूप में लड़की की मन्नत माँगी और चोर को डांट-डपट के बजाय सहजता से सुधार दिया। उनका जीवन-दर्शन था – सबके साथ मानवीय व्यवहार करो और परंपराओं के नाम पर किसी का भला-बुरा मत करो।

नानी: वे पारंपरिक, अनपढ़ और परदानशीं थीं, लेकिन उनके मन में देश की आज़ादी का गहरा जुनून था। उन्होंने अपनी बेटी की शादी स्वतंत्रता सेनानी से करवाकर यह दिखाया कि सच्ची आज़ादी सिर्फ देश की नहीं, बल्कि अपनी सोच की भी होती है।

माँ: वे साहित्य और संगीत प्रेमी, सत्यवादी और गोपनीयता की रक्षक थीं। उन्होंने कभी घर-गृहस्थी और बच्चों के लालन-पालन में रुचि नहीं ली, फिर भी सब उनका आदर करते थे। उनका जीवन-दर्शन था – स्वयं के प्रति सच्चे रहो और किसी के निजी जीवन में दखल मत दो।

बहनें: सभी बहनों ने अपने-अपने ढंग से स्वतंत्रता को परिभाषित किया। रेणु ने सामंतवादी प्रतीकों (गाड़ी) को ठुकराया, चित्रा ने एक नजर में वर चुनकर आत्म-निर्णय का अधिकार प्रयोग किया, अचला ने पिता की पसंद से शादी करके भी लेखन जारी रखा। लेखिका और उनकी बड़ी बहन ने साहित्य-लेखन से अपनी पहचान बनाई।

इस प्रकार, इन चार पीढ़ियों की महिलाओं की जीवन-दृष्टि एक ही सूत्र में बंधी है – स्वतंत्र चिंतन, आत्म-सम्मान और अपने ढंग से जीने का साहस।

प्रश्न 10: लेखिका के परिवार में महिलाओं की किन विशेषताओं ने उन्हें और उनकी बहनों को प्रभावित किया? वर्णन कीजिए।

लेखिका के परिवार में महिलाओं की अनेक विशेषताओं ने उन्हें और उनकी बहनों को प्रभावित किया –

स्वतंत्र चिंतन: परदादी ने पहले बच्चे के रूप में लड़की की मन्नत माँगी, नानी ने अपनी बेटी की शादी स्वतंत्रता सेनानी से करवाई। इस स्वतंत्र सोच का प्रभाव लेखिका और उनकी बहनों पर पड़ा, जिन्होंने बिना किसी हीन-भावना के अपने जीवन के निर्णय स्वयं लिए।

सत्यनिष्ठा: लेखिका की माँ कभी झूठ नहीं बोलती थीं। रेणु तो सच बोलने में उनसे भी दो कदम आगे थीं। इस सत्यनिष्ठा ने सभी बहनों को प्रभावित किया और वे जीवन में सच्चाई को सर्वोपरि मानती थीं।

गोपनीयता का सम्मान: माँ किसी की बात दूसरे से नहीं कहती थीं। इस कारण परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते थे। बहनों ने भी यह गुण सीखा कि दूसरों की निजता का सम्मान करना चाहिए।

सहजता: परदादी ने चोर के साथ सहज मानवीय व्यवहार करके उसे सुधार दिया। यह सहजता बहनों में भी थी – वे दिखावे से दूर रहती थीं और जैसा थीं, वैसा ही जीती थीं।

आत्म-निर्णय की क्षमता: चित्रा ने एक नजर में वर चुन लिया और रेणु ने बी.ए. न करने का निर्णय लिया। लेखिका ने शादी के बाद भी अपने लेखन को जारी रखा। इन सबमें पूर्वज महिलाओं के आत्म-निर्णय की क्षमता का प्रभाव था।

साहस: नानी ने जीवनभर परदे में रहकर भी एक पर-पुरुष से मिलने का साहस किया। लेखिका ने कर्नाटक में अकेले स्कूल खोलने का साहस किया।

इन सभी गुणों के कारण लेखिका और उनकी बहनों में आत्म-विश्वास और स्वतंत्रता का भाव जागृत हुआ और वे सभी अपने-अपने क्षेत्रों में सफल हुईं।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय

  • लेखिका की नानी के व्यक्तित्व की विशेषताएँ और आज़ादी के आंदोलन में उनकी भागीदारी
  • लेखिका की माँ की विशेषताएँ और उनके आदर के कारण
  • परदादी का चरित्र-चित्रण – लड़की की मन्नत और चोर-प्रसंग
  • चोर-प्रसंग के माध्यम से सहजता से व्यवहार परिवर्तन का संदेश
  • लेखिका की बहनों के व्यक्तित्व की विविधता और स्वतंत्र सोच
  • लेखिका के शिक्षा के प्रति प्रयास – कर्नाटक में स्कूल खोलना
  • 'अकेलेपन का मजा' – रेणु के चरित्र के संदर्भ में

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखिका – मृदुला गर्ग (जन्म 1938, कोलकाता)
  • प्रमुख कृतियाँ – 'कठगुलाब', 'चितकोबरा', 'उसके हिस्से की धूप', 'मिलजुल मन'
  • सम्मान – साहित्य अकादमी पुरस्कार (2013), व्यास सम्मान (2004)
  • परदादी की मन्नत – पहले बच्चे के रूप में लड़की हो
  • नानी का आग्रह – बेटी की शादी स्वतंत्रता सेनानी से करवाना
  • माँ के गुण – सत्यवादिता, गोपनीयता का सम्मान
  • रेणु की विशेषता – गाड़ी में बैठने से इनकार, बी.ए. न करने की जिद
  • चित्रा की विशेषता – एक नजर में वर चुनना
  • लेखिका का योगदान – कर्नाटक में स्कूल खोलना

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

“मेरी नानी, पारंपरिक, अनपढ़, परदानशीं औरत थीं, पर निजी जीवन में काफी आजाद-ख्याल रही होंगी।”

“वचन दीजिए कि मेरी लड़की के लिए वर आप तय करेंगे। मेरे पति तो साहब हैं और मैं नहीं चाहती मेरी बेटी की शादी, साहबों के फरमाबरदार से हो।”

“अब हम एक लोटे से पानी पीकर माँ-बेटे हुए। अब तू चाहे चोरी कर, चाहे खेती।”

“सच, अकेलेपन का मजा ही कुछ और है।”

“हम सभी विश्वास करती रही होंगी कि मर्द बदलने से कोई प्रयोजन सिद्ध नहीं होता।”

9. हब लिंक



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