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प्रमुख उपसर्ग (Major Prefixes) | Hindi Grammar | GPN

प्रमुख उपसर्गों का ज्ञान हिंदी भाषा की शक्ति को बढ़ाता है। ये छोटे-छोटे शब्दांश हमारी शब्दावली को इतना विस्तृत बना देते हैं कि एक ही मूल शब्द से दसियों नए शब्द बनाए जा सकते हैं। जैसे "ज्ञान" से "अज्ञान", "विज्ञान", "प्रज्ञान" - यह सब संभव है प्रमुख उपसर्गों की वजह से।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 6–7 (प्रमुख उपसर्ग) | कक्षा 8–9 (सभी उपसर्ग) | कक्षा 10–12 (विशेष प्रयोग)


1. प्रमुख उपसर्गों का परिचय

उपसर्गों को "शब्दों के जादूगर" कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। ये वो छोटे टुकड़े हैं जो किसी साधारण शब्द को विशेष बना देते हैं। जैसे "हार" एक सामान्य शब्द है, लेकिन "उपहार" लगते ही यह विशेष हो जाता है। "विजय" और "पराजय" में "वि" और "परा" उपसर्गों ने पूरा अर्थ ही बदल दिया।

आइए एक रोचक उदाहरण से समझते हैं। "भाव" शब्द लीजिए - भावना का आधार। अब इसमें अलग-अलग उपसर्ग लगाइए: "प्रभाव" (प्र + भाव), "संभाव" (सम् + भाव), "अनुभाव" (अनु + भाव), "विभाव" (वि + भाव)। हर बार नया अर्थ, नई दिशा! यही है प्रमुख उपसर्गों का चमत्कार। कक्षा 6-7 में हम उन 15-20 मुख्य उपसर्गों को सीखेंगे जो 80% शब्दों में प्रयुक्त होते हैं।

2. प्रमुख उपसर्ग क्या हैं?

परिभाषा: प्रमुख उपसर्ग वे अधिक प्रयुक्त होने वाले उपसर्ग हैं जिनसे अधिकांश सामान्य शब्द बनते हैं। ये संस्कृत भाषा से हिंदी में आए हैं और व्याकरणिक दृष्टि से मानक माने जाते हैं। इनकी संख्या सीमित है पर प्रयोग असीमित।

3. प्रमुख उपसर्गों की विशेषताएँ

प्रमुख उपसर्गों को पहचानने और याद रखने के लिए कुछ खास बातें जानना ज़रूरी है। ये वो तरीके हैं जिनसे आप परीक्षा में किसी भी शब्द में उपसर्ग ढूँढ सकते हैं।

  • आवृत्ति: प्रमुख उपसर्ग सबसे अधिक बार प्रयोग होने वाले होते हैं (जैसे अ, सु, प्र, परि)।
  • बहुमुखी प्रयोग: एक ही उपसर्ग कई तरह के शब्दों के साथ लग सकता है (जैसे "अ" - असत्य, अधर्म, अज्ञान)।
  • स्पष्ट अर्थ: प्रत्येक प्रमुख उपसर्ग का निश्चित अर्थ होता है जो हमेशा समान रहता है।
  • संस्कृत मूल: ये सभी संस्कृत भाषा से लिए गए हैं और हिंदी में अपरिवर्तित रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  • शब्द-निर्माण क्षमता: इनसे सैकड़ों शब्द बनाए जा सकते हैं, इसलिए ये "प्रमुख" कहलाते हैं।

4. प्रमुख उपसर्गों का वर्गीकरण

प्रमुख उपसर्गों को उनके अर्थ और प्रयोग के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। यह वर्गीकरण आपको उपसर्गों को याद रखने और समझने में मदद करेगा।

क्रम श्रेणी प्रमुख उदाहरण मुख्य अर्थ
1 नकारात्मक/विपरीतार्थक अ, नि, अन्, दुर् नहीं, विपरीत, अभाव
2 सकारात्मक/शुभार्थक सु, शुभ, श्री अच्छा, शुभ, मंगल
3 दिशा/स्थान बोधक प्र, परा, अप, अधि आगे, पीछे, ऊपर, नीचे
4 मात्रा/संबंध बोधक सह, उप, अति, निर् साथ, निकट, अधिक, बाहर

5. 15 प्रमुख उपसर्गों के उदाहरण

यहाँ 15 सबसे महत्वपूर्ण उपसर्ग दिए जा रहे हैं जो कक्षा 6-7 के पाठ्यक्रम में शामिल हैं और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • 1. अ (नकारात्मक): अ + सत्य = असत्य, अ + धर्म = अधर्म, अ + ज्ञान = अज्ञान
  • 2. सु (शुभ/अच्छा): सु + जन = सुजन, सु + लेख = सुलेख, सु + गंध = सुगंध
  • 3. दुः (बुरा/कठिन): दुः + ख = दुःख, दुः + बल = दुर्बल, दुः + आचार = दुराचार
  • 4. प्र (आगे/श्रेष्ठ): प्र + काश = प्रकाश, प्र + गति = प्रगति, प्र + भात = प्रभात
  • 5. परि (चारों ओर): परि + भ्रमण = परिभ्रमण, परि + वार = परिवार, परि + धान = परिधान
  • 6. अप (नीचे/हीन): अप + मान = अपमान, अप + कार = अपकार, अप + धा = अपधा
  • 7. अनु (पीछे/समान): अनु + गामी = अनुगामी, अनु + सरण = अनुसरण, अनु + भव = अनुभव
  • 8. अधि (ऊपर/प्रधान): अधि + कार = अधिकार, अधि + पति = अधिपति, अधि + भार = अधिभार
  • 9. अभि (सम्मुख/प्रति): अभि + मान = अभिमान, अभि + यान = अभियान, अभि + नंदन = अभिनंदन
  • 10. उप (निकट/छोटा): उप + नगर = उपनगर, उप + हार = उपहार, उप + कथा = उपकथा
  • 11. नि (बिना/नहीं): नि + दय = निदय, नि + रर्थ = निरर्थ, नि + भय = निभय
  • 12. वि (विशेष/अलग): वि + शेष = विशेष, वि + नोद = विनोद, वि + कास = विकास
  • 13. सम् (संयुक्त/पूर्ण): सम् + योग = संयोग, सम् + चय = संचय, सम् + मान = सम्मान
  • 14. अव (नीचे/ह्रास): अव + तरण = अवतरण, अव + सर = अवसर, अव + गति = अवगति
  • 15. निर् (बाहर/रहित): निर् + आधार = निराधार, निर् + भय = निर्भय, निर् + जन = निर्जन

6. प्रमुख उपसर्गों का वाक्यों में प्रयोग

उपसर्गों को केवल याद करना ही काफी नहीं है, उनका सही प्रयोग करना भी ज़रूरी है। नीचे दिए गए वाक्यों में देखिए कि कैसे एक ही उपसर्ग अलग-अलग संदर्भों में प्रयुक्त होता है।

प्रयोग का नियम: उपसर्ग लगाते समय ध्यान रखें कि कुछ उपसर्ग मूल शब्द के पहले अक्षर के अनुसार अपना रूप बदल लेते हैं (संधि)। जैसे "सम्" उपसर्ग "क, च, ट, त, प" से पहले "सं" बन जाता है: सम् + चय = संचय, सम् + तोष = संतोष।

वाक्य प्रयोग:
1. हमें सत्य से दूर रहना चाहिए। (अ + सत्य)
2. सुलेख प्रतियोगिता में राम ने प्रथम पुरस्कार जीता। (सु + लेख)
3. सूर्य का प्रकाश सबके लिए समान है। (प्र + काश)
4. हमें अनुशासन में रहना चाहिए। (अनु + शासन)
5. यह उपहार मेरे दादाजी का है। (उप + हार)
6. निर्भय होकर सच बोलो। (निर् + भय)
7. सम्मान सभी की इच्छा होती है। (सम् + मान)
8. विनोद के बिना जीवन नीरस है। (वि + नोद)
9. अतिवृष्टि से बाढ़ आ गई। (अति + वृष्टि)
10. परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। (परि + वार)

7. प्रमुख उपसर्गों में सामान्य गलतियाँ

प्रमुख उपसर्ग सीखते समय छात्र कुछ खास गलतियाँ करते हैं जिनसे परीक्षा में अंक कटते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

  • समान उपसर्ग भ्रम: "अ" और "अन्" दोनों नकारात्मक हैं, पर "अन्" स्वर से शुरू होने वाले शब्दों से पहले आता है (अन + आवश्यक = अनावश्यक)।
  • वर्तनी भूल: "दुः" और "दुर्" में भ्रम - "दुःख" सही है, "दुर्बल" सही है। "दुः" के बाद व्यंजन आए तो "दुर्" बन जाता है।
  • संधि अनदेखी: "सम् + तोष = संतोष" लिखना चाहिए, "समतोष" नहीं। यह एक सामान्य गलती है।
  • अर्थ भ्रम: "प्र" का अर्थ सिर्फ "आगे" नहीं, "श्रेष्ठ" भी है (प्रधान, प्रमुख)।
  • गलत योजना: "अ + लिखित" लिखकर "अलिखित" बनाना गलत है, सही है "अ + लिखा = अलिखा" (यद्यपि "अलिखित" भी प्रचलित है)।
  • अंग्रेजी मिश्रण: "सब + वे" लिखकर "सबवे" (subway) बनाना - यह हिंदी उपसर्ग नहीं है।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "दुर्" उपसर्ग "दुः" का ही रूपांतर है जो व्यंजन से शुरू होने वाले शब्दों से पहले आता है (दुः + आचार = दुराचार नहीं, दुराचार में "दुर्" है)।
  • रिक्त स्थान हेतु: "वह _____मानी व्यक्ति है" - यहाँ "अभि" उपसर्ग उचित होगा क्योंकि "अभिमानी" बनेगा।
  • एक-शब्द उत्तर: "जो कभी न मरे" का एक शब्द है "अमर" - यहाँ "अ" उपसर्ग है (अ + मर)।
  • विशेष तथ्य: "सु" और "दुः" विपरीतार्थक उपसर्ग हैं - सुजन (अच्छा व्यक्ति) vs दुर्जन (बुरा व्यक्ति)।
  • तुलना हेतु: संस्कृत के 22 उपसर्ग हिंदी में प्रचलित हैं, पर कक्षा 6-7 के लिए 15 प्रमुख उपसर्ग ही पर्याप्त हैं।
  • याद रखने की ट्रिक: "अ सु दुः प्र परि, अप अनु अधि अभि, उप नि वि सम् अव निर्" - यह क्रम याद रखें।

9. 🎯 प्रमुख उपसर्ग - समझ की जाँच

नीचे दिए गए 10 प्रश्न प्रमुख उपसर्गों की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न सीधे परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं और आपकी तैयारी को मज़बूत करेंगे।

1. "अनावश्यक" शब्द में कौन-सा उपसर्ग है और मूल शब्द क्या है?

उत्तर: उपसर्ग: अन् (अन् का रूप "अन")
मूल शब्द: आवश्यक
अन् + आवश्यक = अनावश्यक (जरूरी नहीं)
विशेष: "अन्" उपसर्ग स्वर से शुरू होने वाले शब्दों से पहले "अन" बन जाता है।

2. "संचय" और "सम्मान" में "सम्" उपसर्ग के दो अलग-अलग रूप क्यों हैं?

उत्तर: संधि नियम के कारण:
- सम् + चय = संचय ("च" व्यंजन है इसलिए "सम्" का "सं" रूप)
- सम् + मान = सम्मान ("म" से पहले "सम्" का "सम्" रूप, और दो "म" मिलकर "म्म" बनते हैं)
यह वर्णमाला के वर्गों के अनुसार परिवर्तन है।

3. "दुर्गंध" और "दुःख" में "दुः" उपसर्ग के अलग-अलग रूप क्यों हैं?

उत्तर: "दुः" उपसर्ग का रूप परिवर्तन:
- दुः + ख = दुःख (ख व्यंजन है पर "दुः" अपने मूल रूप में रहता है क्योंकि यह विशेष नियम है)
- दुः + गंध = दुर्गंध ("ग" व्यंजन से पहले "दुः" का "दुर्" रूप हो जाता है)
सामान्य नियम: व्यंजन से पहले "दुर्", स्वर से पहले "दुः" (पर कुछ अपवाद हैं)।

4. "प्र" और "परा" दोनों उपसर्गों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: मुख्य अंतर:
प्र: आगे/श्रेष्ठ का भाव - प्रकाश (आगे काश/फैलना), प्रगति (आगे गति)
परा: पीछे/पराजय का भाव - पराजय (पीछे हटना/हार), पराभव (पतन/हार)
दिलचस्प बात: "प्रकाश" और "पराकाष्ठा" में दोनों का अलग-अलग प्रयोग देखें।

5. "अधिपति" और "उपनगर" में "अधि" और "उप" उपसर्गों के अर्थ में क्या अंतर है?

उत्तर: अर्थ भिन्नता:
अधि: ऊपर/प्रधान का भाव - अधिपति (ऊपर वाला/मालिक), अधिकार (ऊपर का हक)
उप: निकट/छोटा/सहायक का भाव - उपनगर (नगर के निकट), उपहार (हार के समान/निकट)
सरल भाषा में: अधि = बड़ा/मुख्य, उप = छोटा/सहायक।

6. "निराधार" और "निःस्वार्थ" में "निर्" उपसर्ग के दो रूप क्यों?

उत्तर: स्वर-व्यंजन नियम:
- निर् + आधार = निराधार ("आ" स्वर से पहले "निर्" अपने मूल रूप में)
- निः + स्वार्थ = निःस्वार्थ ("स्व" व्यंजन से पहले "निर्" का "निः" रूप)
नियम: "निर्" उपसर्ग स्वर से पहले "निर्" रहता है, व्यंजन से पहले "निः" बन जाता है।

7. "सुगंध" और "शुभकामना" में "सु" और "शुभ" उपसर्गों में क्या संबंध है?

उत्तर: दोनों सकारात्मक अर्थ देते हैं:
सु: सामान्य अच्छाई - सुगंध (अच्छी गंध), सुजन (अच्छा व्यक्ति)
शुभ: विशेष/मंगलमय अच्छाई - शुभकामना (मंगल भावना), शुभारंभ (शुभ शुरुआत)
"शुभ" का प्रयोग विशेष अवसरों/शुभ कार्यों के लिए होता है, "सु" सामान्य है।

8. क्या "परिधान" और "परिवार" में एक ही उपसर्ग "परि" है? दोनों में अंतर समझाइए।

उत्तर: हाँ, दोनों में "परि" उपसर्ग है पर अर्थ भिन्न:
- परि + धान = परिधान (चारों ओर धारण करना/वस्त्र)
- परि + वार = परिवार (चारों ओर घेरना/घेरे में रहने वाले)
"परि" का मूल अर्थ "चारों ओर" है जो दोनों में है, पर संदर्भ अलग है।

9. "अभियान" और "अनुयान" में "अभि" और "अनु" उपसर्गों के अर्थ अंतर को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: दिशा का अंतर:
अभि: सम्मुख/प्रति - अभियान (सम्मुख जाना/अभियान), अभिमुख (सम्मुख)
अनु: पीछे/अनुसरण - अनुयान (पीछे जाना), अनुगामी (पीछे चलने वाला)
सरल: अभि = सामने की ओर, अनु = पीछे की ओर।

10. "विजय" और "पराजय" में उपसर्ग क्या दर्शाते हैं? ये विपरीतार्थक कैसे हैं?

उत्तर: विपरीतार्थक उपसर्गों का सुंदर उदाहरण:
- वि + जय = विजय (विशेष/सच्ची जीत)
- परा + जय = पराजय (पीछे हटना/हार)
"वि" (विशेष/श्रेष्ठ) और "परा" (पीछे/पराभव) विपरीत अर्थ देते हैं। यही उपसर्गों की शक्ति है - एक ही मूल शब्द "जय" से दो विपरीत शब्द।

10. सारांश

प्रमुख उपसर्ग हिंदी भाषा के वे स्तंभ हैं जिन पर शब्द-भवन खड़ा है। हमने सीखा कि 15-20 प्रमुख उपसर्ग (अ, सु, दुः, प्र, परि, अप, अनु, अधि, अभि, उप, नि, वि, सम्, अव, निर्) अधिकांश शब्दों के निर्माण में प्रयुक्त होते हैं। इनमें से प्रत्येक का एक निश्चित अर्थ होता है और ये संस्कृत से हिंदी में आए हैं। इन उपसर्गों को सही प्रयोग करने के लिए संधि नियमों का ज्ञान आवश्यक है। कक्षा 6-7 के स्तर पर इन उपसर्गों को पहचानना, उनके अर्थ जानना और सही शब्द बनाना सीखना ही पर्याप्त है।

11. संबंधित विषय संकेत

प्रमुख उपसर्गों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद अब अगला कदम है: उपसर्ग से शब्द निर्माण जहाँ हम सीखेंगे कि कैसे इन उपसर्गों का प्रयोग करके नए-नए शब्द बनाए जाते हैं।

इससे पहले वाला टॉपिक भी देखें: उपसर्ग की परिभाषा

📝 प्रमुख उपसर्ग - अभ्यास कार्यपत्रक

इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको उपसर्ग पहचानने, उनके अर्थ समझने और नए शब्द बनाने के अभ्यास मिलेंगे।

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