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उपसर्ग से शब्द निर्माण (Word Formation using Prefixes) | Hindi Grammar | GPN

उपसर्ग से शब्द निर्माण सीखना हिंदी भाषा के खजाने की चाबी पाने जैसा है। जब आप जान जाते हैं कि कैसे उपसर्गों का प्रयोग करके नए शब्द बनाए जाते हैं, तो आपकी शब्दावली स्वयं ही विस्तृत होने लगती है। यह कौशल न सिर्फ परीक्षा में, बल्कि रोजमर्रा की लेखन व बोलचाल में भी आपको प्रभावी बनाता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 7–8 (शब्द निर्माण) | कक्षा 9–10 (उन्नत प्रयोग) | कक्षा 11–12 (साहित्यिक प्रयोग)


1. उपसर्ग से शब्द निर्माण का परिचय

शब्द निर्माण की कला वह कौशल है जो भाषा को जीवंत रखती है। जैसे एक कुम्हार मिट्टी से विभिन्न आकार के बर्तन बनाता है, वैसे ही उपसर्ग मूल शब्दों से अलग-अलग अर्थ वाले नए शब्द गढ़ते हैं। "ज्ञान" एक मूल शब्द है, पर "विज्ञान", "अज्ञान", "प्रज्ञान", "अवज्ञान" - ये सब अलग-अलग उपसर्गों से बने नए शब्द हैं।

सोचिए, यदि आपको "भाव" शब्द दिया जाए और कहा जाए इससे पाँच अलग-अलग शब्द बनाइए। उपसर्ग की सहायता से आप तुरंत बना सकते हैं: प्रभाव, संभाव, अनुभाव, विभाव, अभिभाव। हर शब्द का अर्थ अलग, हर शब्द की उपयोगिता अलग। यही है उपसर्ग से शब्द निर्माण की शक्ति। कक्षा 7-8 में हम सीखेंगे कि कैसे नियमित रूप से उपसर्ग लगाकर सार्थक शब्द बनाए जाते हैं।

2. उपसर्ग से शब्द निर्माण क्या है?

परिभाषा: उपसर्ग से शब्द निर्माण वह व्याकरणिक प्रक्रिया है जिसमें किसी मूल शब्द के पूर्व उपयुक्त उपसर्ग जोड़कर नए सार्थक शब्द बनाए जाते हैं। इस प्रक्रिया में उपसर्ग मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन, विस्तार या विपरीतकरण लाता है।

3. शब्द निर्माण के मुख्य नियम

उपसर्ग से शब्द बनाते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है। ये नियम गलत शब्द निर्माण से बचाते हैं और परीक्षा में अंक सुनिश्चित करते हैं।

  • सार्थकता नियम: उपसर्ग लगाने पर बना शब्द सार्थक होना चाहिए (अ + लाल = अलाल ❌, अ + सत्य = असत्य ✅)।
  • संधि नियम: उपसर्ग और मूल शब्द के बीच संधि का ध्यान रखें (सम् + चय = संचय ✅, सम् + तोष = संतोष ✅)।
  • अर्थ संगति: उपसर्ग का अर्थ मूल शब्द के साथ मेल खाना चाहिए (सु + जन = सुजन ✅, दुः + जन = दुर्जन ✅)।
  • विपरीतार्थकता: कुछ उपसर्ग विपरीत अर्थ देते हैं (सुगंध × दुर्गंध, विजय × पराजय)।
  • रूप परिवर्तन: कुछ उपसर्ग मूल शब्द के प्रथम अक्षर के अनुसार रूप बदल लेते हैं (निर् + आधार = निराधार, निः + संदेह = निःसंदेह)।

4. शब्द निर्माण के प्रकार

उपसर्ग से शब्द निर्माण को उसके उद्देश्य और परिणाम के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। यह वर्गीकरण आपको समझने में मदद करेगा कि किस उद्देश्य से कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त होता है।

क्रम निर्माण प्रकार उद्देश्य उदाहरण
1 विपरीतार्थक निर्माण विपरीत अर्थ वाला शब्द बनाना सत्य → असत्य, ज्ञान → अज्ञान
2 गुणवाचक निर्माण विशेष गुण दर्शाना जन → सुजन, गंध → सुगंध
3 संबंध बोधक निर्माण संबंध/स्थान दर्शाना नगर → उपनगर, कार → अधिकार
4 क्रियात्मक निर्माण क्रिया का विशेष रूप दर्शाना गमन → प्रगमन, यान → अभियान

5. शब्द निर्माण के व्यावहारिक उदाहरण

नीचे कुछ मूल शब्द दिए गए हैं और दिखाया गया है कि कैसे अलग-अलग उपसर्ग लगाकर उनसे नए शब्द बनाए जाते हैं। ये उदाहरण कक्षा 7-8 के स्तर के अनुरूप हैं।

मूल शब्द: ज्ञान
• अ + ज्ञान = अज्ञान (नकारात्मक)
• वि + ज्ञान = विज्ञान (विशेष ज्ञान)
• प्र + ज्ञान = प्रज्ञान (प्रकाशित ज्ञान)
• सु + ज्ञान = सुज्ञान (अच्छा ज्ञान)
• अव + ज्ञान = अवज्ञान (अपमानजनक ज्ञान)

मूल शब्द: गति
• प्र + गति = प्रगति (आगे की गति)
• सं + गति = संगति (साथ की गति)
• वि + गति = विगति (विपरीत गति)
• अनु + गति = अनुगति (पीछे की गति)
• अ + गति = अगति (गति का अभाव)

मूल शब्द: कार
• अधि + कार = अधिकार (ऊपर का हक)
• अनु + कार = अनुकार (पीछे किया गया)
• वि + कार = विकार (बिगड़ा हुआ)
• प्रति + कार = प्रतिकार (विरुद्ध कार्य)
• सं + कार = संकार (साथ किया गया)

6. शब्द निर्माण की व्यावहारिक विधि

उपसर्ग से शब्द बनाने की एक व्यवस्थित विधि है जिसका पालन करके आप सही शब्द निर्माण कर सकते हैं। यह विधि तीन चरणों में पूरी होती है।

शब्द निर्माण की तीन-चरणीय विधि:
1. मूल शब्द चुनना: सबसे पहले वह मूल शब्द चुनें जिससे नया शब्द बनाना है।
2. उपयुक्त उपसर्ग चुनना: वांछित अर्थ के अनुसार सही उपसर्ग चुनें।
3. संधि/योजना करना: उपसर्ग और मूल शब्द को संधि नियमों के अनुसार जोड़ें।

उदाहरण: "मान" से "सम्मान" बनाना
1. मूल शब्द: मान
2. उपयुक्त उपसर्ग: सम् (साथ/पूर्ण का भाव)
3. संधि: सम् + मान = सम्मान (दो 'म' मिलकर 'म्म' बनते हैं)
परिणाम: सम्मान = पूर्ण आदर

7. शब्द निर्माण में सामान्य गलतियाँ

शब्द निर्माण करते समय छात्र कुछ विशेष गलतियाँ करते हैं जो परीक्षा में अंक कटने का कारण बनती हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

  • असार्थक शब्द निर्माण: बिना सोचे-समझे उपसर्ग लगा देना (जैसे अ + पुस्तक = अपुस्तक ❌ - यह कोई सार्थक शब्द नहीं है)।
  • संधि की अवहेलना: संधि नियमों को नज़रअंदाज करना (सम् + तोष = समतोष ❌, सही है संतोष ✅)।
  • गलत उपसर्ग चुनना: अर्थ के अनुसार गलत उपसर्ग चुनना (दुः + भाग्य = दुर्भाग्य ✅, सु + भाग्य = सुभाग्य ✅, पर सु + भाग्य ≠ सुभाग्य जैसा गलत)।
  • वर्तनी भूल: उपसर्ग के रूप परिवर्तन को न समझना (निर् + अंत = निरंतर ✅, नि + अंत = निअंत ❌)।
  • अंग्रेजी-हिंदी मिश्रण: अंग्रेजी शब्दों पर हिंदी उपसर्ग लगाना (सु + पेन = सुपेन ❌ - यह हिंदी शब्द नहीं है)।
  • प्रत्यय भ्रम: उपसर्ग और प्रत्यय में भ्रम (सुंदरता में "ता" प्रत्यय है, उपसर्ग नहीं)।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए" प्रश्न में सबसे पहले देखें कि मूल शब्द स्वर से शुरू हो रहा है या व्यंजन से - इससे उपसर्ग का रूप निर्धारित होगा।
  • रिक्त स्थान हेतु: "वह _____ जन है" - संदर्भ देखकर तय करें: यदि अच्छा तो "सुजन", यदि बुरा तो "दुर्जन"।
  • एक-शब्द उत्तर: "जो कभी न मरे" = "अमर" (अ + मर) - यहाँ "अ" उपसर्ग ने नकारात्मकता दी है।
  • विशेष तथ्य: कुछ शब्दों में दो उपसर्ग भी हो सकते हैं: अनुपस्थित (अनु + अप + स्थित), अभ्युदय (अभि + उद् + अय)।
  • तुलना हेतु: संस्कृत में "उपसर्ग" को "प्रत्यय" के विपरीत "पूर्वसर्ग" कहते हैं क्योंकि यह शब्द के पूर्व लगता है।
  • याद रखने की ट्रिक: "अ-नि-दुर्" नकारात्मक, "सु-शुभ" सकारात्मक, "प्र-अनु" दिशा बोधक - यह वर्गीकरण शब्द निर्माण में मदद करेगा।

9. 🎯 उपसर्ग से शब्द निर्माण - समझ की जाँच

नीचे दिए गए 10 प्रश्न शब्द निर्माण की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न व्यावहारिक हैं और आपको वास्तविक परिस्थितियों में शब्द निर्माण करना सिखाएँगे।

1. "मृत्यु" शब्द से ऐसा शब्द बनाइए जिसका अर्थ "मृत्यु का भय न हो" हो।

उत्तर: निर् + मृत्यु = निर्मृत्यु
या अ + मृत्यु = अमृत्यु (मृत्यु रहित)
दोनों सही हैं, पर "निर्मृत्यु" अधिक सटीक है क्योंकि "निर्" भय/संदेह रहित का भाव देता है।

2. "धन" शब्द में उपसर्ग लगाकर तीन अलग-अलग अर्थ वाले शब्द बनाइए।

उत्तर:
1. सु + धन = सुधन (अच्छा धन/धनवान)
2. दुर् + धन = दुर्धन (बुरा धन/दरिद्र)
3. अ + धन = अधन (धनहीन/गरीब)
तीनों के अर्थ अलग-अलग हैं और सभी सार्थक शब्द हैं।

3. "भाग्य" से "सुभाग्य" बनाने में कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है और क्यों "सुभाग्य" नहीं "सुभाग्य"?

उत्तर: उपसर्ग: सु (शुभ/अच्छा)
सु + भाग्य = सुभाग्य (अच्छा भाग्य)
यह "सुभाग्य" नहीं है क्योंकि "सु" उपसर्ग "भ" व्यंजन से पहले आया है और संधि नियम के अनुसार इसे "सु" ही रहना चाहिए। "सुभाग्य" गलत वर्तनी होगी।

4. "स्थित" से "अनुपस्थित" बनाने में कितने उपसर्ग हैं? शब्द निर्माण की प्रक्रिया समझाइए।

उत्तर: दो उपसर्ग हैं:
1. अनु (निकटता/अनुसरण)
2. अप (दूर/अभाव)
शब्द निर्माण प्रक्रिया: अनु + अप + स्थित = अनुपस्थित
पहले "अप" उपसर्ग "स्थित" से जुड़ा: अप + स्थित = उपस्थित (दूर स्थित)
फिर "अनु" उपसर्ग जुड़ा: अनु + उपस्थित = अनुपस्थित (सामने न होना)
यह दो उपसर्गों वाला जटिल शब्द निर्माण है।

5. "काल" शब्द से चार ऐसे शब्द बनाइए जिनमें अलग-अलग उपसर्ग हों और सभी के अर्थ अलग हों।

उत्तर:
1. प्र + काल = प्रकाल (बड़ा समय/युग)
2. सु + काल = सुकाल (अच्छा समय/समृद्धि)
3. दुः + काल = दुःकाल (बुरा समय/अकाल)
4. वि + काल = विकाल (विपरीत समय/असमय)
5. (अतिरिक्त) अ + काल = अकाल (समय न होना/अनावृष्टि)
हर शब्द का अर्थ पूरी तरह अलग है।

6. "मान" शब्द से "सम्मान" और "अपमान" बनाने में कौन-से उपसर्ग हैं और ये विपरीतार्थक कैसे हैं?

उत्तर:
- सम् + मान = सम्मान (साथ/पूर्ण आदर)
- अप + मान = अपमान (दूर/नीचा आदर)
विपरीतार्थकता: "सम्" और "अप" विपरीत अर्थ देते हैं।
"सम्" = साथ/पूर्ण (सकारात्मक)
"अप" = दूर/नीचे (नकारात्मक)
इस तरह एक ही मूल शब्द से दो विपरीत अर्थ वाले शब्द बने।

7. क्या "अ" उपसर्ग हमेशा नकारात्मक अर्थ देता है? "अमर" और "असत्य" के उदाहरण से समझाइए।

उत्तर: "अ" उपसर्ग का प्रमुख अर्थ नकारात्मक है, पर यह हमेशा नहीं:
1. अ + मर = अमर (मरना नहीं) → यहाँ "अ" ने मृत्यु का अभाव दिखाया, जो सकारात्मक है।
2. अ + सत्य = असत्य (सत्य नहीं) → यहाँ "अ" ने सत्य का अभाव दिखाया, जो नकारात्मक है।
निष्कर्ष: "अ" उपसर्ग किसी गुण/क्रिया का अभाव दर्शाता है, जो संदर्भ के अनुसार सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है।

8. "गमन" से "प्रगमन" और "अनुगमन" बनाने में उपसर्गों ने अर्थ में क्या अंतर लाया?

उत्तर: मूल अर्थ भिन्नता:
- प्र + गमन = प्रगमन (आगे बढ़ना/उन्नति)
- अनु + गमन = अनुगमन (पीछे चलना/अनुसरण)
"प्र" उपसर्ग ने आगे बढ़ने/श्रेष्ठता का भाव दिया।
"अनु" उपसर्ग ने पीछे चलने/अनुकरण का भाव दिया।
दोनों "गमन" (जाना) से बने हैं, पर दिशा/उद्देश्य भिन्न है।

9. "हार" से "उपहार" कैसे बना? क्या "हार" और "उपहार" का कोई संबंध है?

उत्तर: शब्द निर्माण: उप + हार = उपहार
संबंध: "हार" मूल रूप से फूलों की माला है जो सम्मान/प्रेम का प्रतीक है।
"उप" उपसर्ग ने "निकट/समान" का भाव दिया।
इस प्रकार "उपहार" = हार के समान/निकट (सम्मान/प्रेम का प्रतीक)।
हाँ, दोनों का संबंध है - दोनों सम्मान/प्रेम व्यक्त करने के साधन हैं, पर "उपहार" अधिक व्यापक अर्थ रखता है।

10. एक मूल शब्द चुनकर दिखाइए कि कैसे अलग-अलग उपसर्गों से पूरी तरह भिन्न अर्थ वाले शब्द बन सकते हैं।

उत्तर: मूल शब्द: "भव" (होना/अस्तित्व)

विभिन्न उपसर्गों से बने शब्द:
1. सं + भव = संभव (हो सकना) → संभावना
2. अ + भव = अभव (न होना) → अस्तित्वहीन
3. उद् + भव = उद्भव (ऊपर होना) → उत्पत्ति
4. प्र + भव = प्रभव (श्रेष्ठ होना) → प्रभुत्व
5. परि + भव = परिभव (चारों ओर होना) → आधिपत्य

हर शब्द का अर्थ पूरी तरह अलग है, सभी एक ही मूल शब्द "भव" से बने हैं। यह उपसर्गों की शब्द-निर्माण शक्ति को दर्शाता है।

10. सारांश

उपसर्ग से शब्द निर्माण हिंदी व्याकरण का वह व्यावहारिक पक्ष है जो भाषा को गतिशील और रचनात्मक बनाता है। हमने सीखा कि कैसे उपयुक्त उपसर्ग चुनकर, संधि नियमों का पालन करके, और अर्थ संगति बनाए रखकर मूल शब्दों से नए सार्थक शब्द गढ़े जाते हैं। यह कौशल न सिर्फ परीक्षा में उपयोगी है, बल्कि दैनिक लेखन और संवाद में भी हमारी अभिव्यक्ति को समृद्ध करता है। कक्षा 7-8 के स्तर पर शब्द निर्माण के बुनियादी नियम सीख लेने से भविष्य में जटिल शब्दों को भी आसानी से समझा जा सकता है।

11. संबंधित विषय संकेत

उपसर्ग से शब्द निर्माण के बाद अगला तार्किक कदम है: अव्यय

📝 उपसर्ग से शब्द निर्माण - अभ्यास कार्यपत्रक

इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको विभिन्न मूल शब्दों से उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाने के अभ्यास मिलेंगे।

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