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उपसर्ग की परिभाषा (Definition of Prefixes) | Hindi Grammar | GPN

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सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 26 JUNE 2026

क्या आपको पता है कि 'आदर' और 'अपमान' – इन दोनों में 'मान' शब्द है, पर अर्थ बिल्कुल विपरीत है? 'आ' और 'अप' – ये दो छोटे-छोटे अक्षर पूरे शब्द का अर्थ बदल देते हैं! हिंदी व्याकरण में ऐसे अक्षर या शब्द जो किसी मूल शब्द के पहले जुड़कर उसका अर्थ बदलते हैं या उसमें विशेषता लाते हैं, उपसर्ग (Prefix) कहलाते हैं। 'उपसर्ग' का अर्थ है – 'उप' (पास/साथ) + 'सर्ग' (निर्माण) – यानी 'जो शब्द के पास लगकर नया शब्द बनाए'। संस्कृत, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपसर्ग शब्द-निर्माण का एक बहुत महत्वपूर्ण साधन है – 'प्र' + 'योग' = 'प्रयोग', 'अ' + 'भाव' = 'अभाव'। इस पोस्ट में हम उपसर्ग की परिभाषा, उसके प्रकार, पहचान के नियम, उदाहरण, और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 6‑7 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 6-7 | CBSE एवं UP Board



1. उपसर्ग क्या है? – परिभाषा एवं परिचय

उपसर्ग (Prefix) वह शब्दांश या अक्षर है जो किसी मूल शब्द के पहले जुड़कर उसका अर्थ बदलता है या उसमें विशेषता जोड़ता है। यह शब्द-निर्माण का एक प्रमुख साधन है – ‘प्र’ + ‘योग’ = ‘प्रयोग’, ‘अ’ + ‘भाव’ = ‘अभाव’।

उपसर्ग की सरल परिभाषा: “जो शब्दांश किसी मूल शब्द के आरम्भ में जुड़कर उसका अर्थ बदल दे या विशेषता उत्पन्न कर दे, उसे उपसर्ग कहते हैं।”

उदाहरण –
  • “अ” + “भाव” = “अभाव” – (भाव = होना, अभाव = न होना – अर्थ बदल गया।)
  • “प्र” + “योग” = “प्रयोग” – (योग = जुड़ना, प्रयोग = उपयोग – अर्थ में सूक्ष्मता आ गई।)
  • “सु” + “दर्शन” = “सुदर्शन” – (दर्शन = देखना, सुदर्शन = अच्छी तरह देखना – अर्थ बदला।)
  • “नि” + “रोग” = “निरोग” – (रोग = बीमारी, निरोग = बिना बीमारी – विशेषता आ गई।)

उपसर्ग अपरिवर्तनीय होते हैं – वे हमेशा मूल शब्द के आरम्भ में ही लगते हैं और उनका अपना एक निश्चित अर्थ होता है। उपसर्ग जुड़ने से नया शब्द बनता है – और कई बार यह नया शब्द पूरी तरह अलग अर्थ देता है।

2. उपसर्ग और मूल शब्द का संबंध

उपसर्ग का संबंध मूल शब्द (Root Word) से होता है – मूल शब्द वह है जिसके साथ उपसर्ग जुड़ता है। मूल शब्द स्वतंत्र भी हो सकता है और अस्वतंत्र भी।

  • स्वतंत्र मूल शब्द: “कर्म” – “सु + कर्म = सुकर्म” (अच्छा काम)
    “यश” – “अ + यश = अयश” (अपयश / बदनामी)
  • अस्वतंत्र मूल शब्द: “ज्ञ” – “अ + ज्ञ = अज्ञ” (न जानने वाला)
    “नाश” – “वि + नाश = विनाश” (नष्ट होना)
    यहाँ ‘ज्ञ’ और ‘नाश’ अकेले नहीं आते – पर उपसर्ग जुड़ने पर नए शब्द बनते हैं।
उपसर्ग मूल शब्द नया शब्द अर्थ
अभावअभावन होना / कमी
प्रयोगप्रयोगउपयोग / प्रयोग
सुदर्शनसुदर्शनअच्छी तरह देखना
निरोगनिरोगबिना बीमारी
विनाशविनाशनष्ट होना
ध्यान दें –
  • उपसर्ग हमेशा मूल शब्द के पहले लगता है – “अभाव” (अ + भाव) – ‘भावअ’ गलत है।
  • उपसर्ग लगने पर मूल शब्द का अर्थ या तो बदल जाता है (जैसे – भाव → अभाव) या उसमें सूक्ष्मता आ जाती है (जैसे – योग → प्रयोग)।

3. उपसर्ग के प्रकार – एक नज़र में

हिंदी व्याकरण में उपसर्ग मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –

1. संस्कृत के उपसर्ग: ये संस्कृत भाषा से आए हैं – ये सबसे अधिक प्रचलित हैं।
उदाहरण: अ, अनु, अप, अभि, अव, आ, उत्, उप, दुस्, नि, निर्, पर, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु, आदि।
“अ + भाव = अभाव”, “प्र + योग = प्रयोग”

2. हिंदी के उपसर्ग: ये हिंदी भाषा में प्रचलित हैं – प्रायः अवधी, ब्रज आदि से आए।
उदाहरण: चौ, अध, अ, भर, बिन, बिना, मत, न, जी, ला, सु, कु, अक्क, आदि।
“चौ + पहर = चौपहर”, “अध + पका = अधपका”

3. उर्दू/फ़ारसी के उपसर्ग: ये उर्दू/फ़ारसी भाषा से आए हैं – हिंदी में बहुत प्रयुक्त होते हैं।
उदाहरण: बद, बे, ना, कम, खुश, हर, ला, गैर, आदि।
“बे + ईमान = बेईमान”, “ना + इंसाफ = नाइंसाफ”

इन तीनों प्रकार के उपसर्गों को हम आने वाली पोस्ट में विस्तार से समझेंगे। अभी के लिए इतना याद रखें कि उपसर्ग शब्द के आरम्भ में लगता है और उसका अर्थ बदलता है।

4. उपसर्ग और प्रत्यय में अंतर

उपसर्ग और प्रत्यय – दोनों शब्द-निर्माण के साधन हैं, पर इनमें मूल अंतर है –

उपसर्ग (Prefix) प्रत्यय (Suffix)
मूल शब्द के आरम्भ में लगता है – “अ + भाव = अभाव” मूल शब्द के अंत में लगता है – “पढ़ + ाई = पढ़ाई”
मूल शब्द का अर्थ बदलता है – “भाव” → “अभाव” (न होना) मूल शब्द के रूप या श्रेणी में परिवर्तन करता है – “पढ़” (क्रिया) → “पढ़ाई” (संज्ञा)
उदाहरण – “अ, प्र, सु, वि, नि” उदाहरण – “आ, ई, ता, त्व, पन”
ट्रिक – याद रखें: “उपसर्ग – आगे लगे (शुरू में); प्रत्यय – पीछे लगे (अंत में)। 'अभाव' – अ (उपसर्ग) + भाव; 'पढ़ाई' – पढ़ (मूल) + ई (प्रत्यय)। आगे का अर्थ बदले, पीछे का रूप बदले।”

5. वाक्यों में उपसर्ग का सही प्रयोग

उपसर्ग स्वयं वाक्य में अलग से नहीं आते – वे शब्दों के भाग बनकर आते हैं। पर उपसर्ग युक्त शब्दों का सही अर्थ समझना और उन्हें सही संदर्भ में प्रयोग करना ज़रूरी है –

  • अभाव (अ + भाव): “इस वर्ष अभाव में फसल खराब हुई।” – (कमी / न होना)
  • प्रयोग (प्र + योग): “इस औषधि का प्रयोग करो।” – (उपयोग)
  • सुदर्शन (सु + दर्शन): “सुदर्शन चक्र विष्णु जी का अस्त्र है।” – (अच्छी तरह देखने वाला)
  • निरोग (नि + रोग): “हर व्यक्ति को निरोग रहना चाहिए।” – (बिना बीमारी)
  • विनाश (वि + नाश): “अनुशासनहीनता से विनाश होता है।” – (नष्ट होना)

महत्वपूर्ण: उपसर्गों का सही अर्थ समझना आवश्यक है – क्योंकि गलत अर्थ से पूरे वाक्य का भाव बदल सकता है। “अभाव” (कमी) बनाम “भाव” (होना) – अंतर स्पष्ट है।



हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “अभाव” – इस शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द अलग-अलग करें।
उत्तर देखें
उत्तर: उपसर्ग – ‘अ’, मूल शब्द – ‘भाव’
व्याख्या: ‘अ’ उपसर्ग है – ‘अ’ + ‘भाव’ = अभाव – 'अ' ने 'भाव' (होना) को 'अभाव' (न होना) में बदल दिया – अर्थ में परिवर्तन हुआ।
उदाहरण 2
प्रश्न: “प्रयोग” – इस शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: उपसर्ग – ‘प्र’, मूल शब्द – ‘योग’
व्याख्या: ‘प्र’ + ‘योग’ = प्रयोग – ‘प्र’ ने ‘योग’ (जुड़ना) में सूक्ष्मता ला दी – ‘प्रयोग’ का अर्थ ‘उपयोग’ है।
उदाहरण 3
प्रश्न: “विनाश” – इस शब्द में कौन-सा उपसर्ग है?
उत्तर देखें
उत्तर: ‘वि’
व्याख्या: ‘वि’ + ‘नाश’ = विनाश – ‘वि’ ने ‘नाश’ (नष्ट होना) को और अधिक स्पष्ट किया – यह संस्कृत का उपसर्ग है।
उदाहरण 4
प्रश्न: “बेईमान” – इस शब्द में कौन-सा उपसर्ग है और किस भाषा से आया है?
उत्तर देखें
उत्तर: ‘बे’ – उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग
व्याख्या: ‘बे’ + ‘ईमान’ = बेईमान – ‘बे’ का अर्थ है ‘बिना’ – बेईमान = बिना ईमान का – यह उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग है।
उदाहरण 5
प्रश्न: “सुदर्शन” और “दर्शन” – इन दोनों में क्या अंतर है?
उत्तर देखें
उत्तर: ‘सुदर्शन’ – ‘सु’ (अच्छा) + ‘दर्शन’ – अच्छी तरह देखना; ‘दर्शन’ – सामान्य देखना
व्याख्या: ‘सु’ उपसर्ग ने ‘दर्शन’ में विशेषता (अच्छा) जोड़ी है – यह संस्कृत का उपसर्ग है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“अयश” – इस शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द अलग-अलग करें।
उत्तर देखें
उत्तर: उपसर्ग – ‘अ’, मूल शब्द – ‘यश’ (‘अ’ + ‘यश’ = अयश – बदनामी)
प्रश्न 2
“निरोग” – इस शब्द में कौन-सा उपसर्ग है और इसका क्या अर्थ है?
उत्तर देखें
उत्तर: ‘नि’ – निरोग = बिना बीमारी (नि + रोग)
प्रश्न 3
“अधपका” – इस शब्द में कौन-सा उपसर्ग है और किस प्रकार का है?
उत्तर देखें
उत्तर: ‘अध’ – हिंदी उपसर्ग – अधपका = कच्चा / आधा पका
प्रश्न 4
“नाइंसाफ” – इस शब्द में उपसर्ग बताएँ और उसका अर्थ लिखें।
उत्तर देखें
उत्तर: ‘ना’ – उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग – नाइंसाफ = अन्यायी (ना + इंसाफ)
प्रश्न 5
“सुकर्म” – इस शब्द का अर्थ क्या है? उपसर्ग और मूल शब्द अलग करें।
उत्तर देखें
उत्तर: सुकर्म = अच्छा कर्म – उपसर्ग – ‘सु’, मूल – ‘कर्म’ (‘सु’ + ‘कर्म’)

उपसर्ग की समझ क्यों ज़रूरी है?

उपसर्ग हिंदी भाषा के शब्द-भंडार को विस्तार देने का एक बहुत प्रभावी साधन है – एक छोटा सा उपसर्ग मूल शब्द का अर्थ बदल सकता है और एक नया शब्द बना सकता है। बिना उपसर्गों के हम 'अभाव', 'प्रयोग', 'विनाश', 'निरोग' जैसे सैकड़ों शब्द नहीं बना सकते। इस पोस्ट में हमने  प्रत्यय और  संज्ञा के साथ उपसर्ग के अंतर को स्पष्ट किया है – अब आप किसी भी शब्द में उपसर्ग को आसानी से पहचान सकते हैं।

अभ्यास से ही उपसर्ग की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक भाषा में उपसर्ग युक्त शब्दों पर ध्यान दें – 'अभाव', 'प्रयोग', 'सुदर्शन', 'निरोग', 'बेईमान' – इनमें कौन-सा उपसर्ग है और उसने मूल शब्द का अर्थ कैसे बदला है – यह समझने की कोशिश करें। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।

📝 उपसर्ग पहचान अभ्यास – कक्षा 6-7

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 30 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक शब्द में उपसर्ग और मूल शब्द को अलग-अलग करना है और बताना है कि उपसर्ग किस प्रकार (संस्कृत, हिंदी, या उर्दू/फ़ारसी) का है। साथ ही, कुछ मूल शब्दों में उचित उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाने हैं। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

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उत्तर कुंजी सहित • CBSE एवं UP Board पाठ्यक्रम के अनुरूप



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