सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 17 JUNE 2026
सोचिए, आप किसी से कहते हैं – “मैं अपना काम खुद करूँगा।” इस वाक्य में ‘अपना’ शब्द किसी और को नहीं, बल्कि स्वयं को दर्शाता है। यह बताता है कि काम करने वाला व्यक्ति वही है, जिसका ‘अपना’ कहा जा रहा है। हिंदी व्याकरण में ऐसे शब्दों को निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun) कहते हैं। ये सर्वनाम स्वयं, अपना, अपने, आप जैसे शब्द होते हैं जो वाक्य के कर्ता की ओर वापस संकेत करते हैं। इस पोस्ट में हम निजवाचक सर्वनाम की परिभाषा, उसके रूप, पहचान के नियम, उदाहरण और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 5‑6 के छात्रों के लिए बनाई गई है।
✅ अनुशंसित: कक्षा 5-6 | CBSE एवं UP Board
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1. निजवाचक सर्वनाम – परिभाषा एवं परिचय
निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun) वे सर्वनाम हैं जो वाक्य के कर्ता की ओर वापस संकेत करते हैं। ये सर्वनाम बताते हैं कि क्रिया कर्ता द्वारा स्वयं पर की गई है या कर्ता का अपना कोई गुण, वस्तु या संबंध है।
उदाहरण –
- “राम अपना काम स्वयं करता है।” – यहाँ ‘अपना’ और ‘स्वयं’ निजवाचक सर्वनाम हैं।
- “सीता आप घर जाएगी।” – यहाँ ‘आप’ का प्रयोग निजवाचक (स्वयं) के रूप में हुआ है।
- “मैं अपनी किताब लाया हूँ।” – ‘अपनी’ निजवाचक सर्वनाम है।
निजवाचक सर्वनाम की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह कर्ता और कर्म में एकता दर्शाता है – कर्ता ही वह है जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़ता है।
2. निजवाचक सर्वनाम के प्रकार और रूप
निजवाचक सर्वनाम तीन मुख्य रूपों में आते हैं –
“सीता ने स्वयं खाना बनाया।”
यह कर्ता के साथ ‘स्वयं’ कहकर उसके स्वतंत्र होने को दर्शाता है।
2. अपना, अपनी, अपने – (संबंध रूप में): “अपना काम करो।”
“अपनी माँ से प्यार करो।”
“अपने पिता का सम्मान करो।”
यह कर्ता के स्वामित्व या संबंध को दर्शाता है।
3. आप – (सम्मान या स्वयं): “आप जाइए, मैं आता हूँ।” (सम्मान – मध्यम पुरुष)
“तुम आप जानो।” (स्वयं – निजवाचक)
‘आप’ का प्रयोग कभी मध्यम पुरुष (सम्मान) में और कभी निजवाचक के रूप में होता है।
| निजवाचक रूप | प्रयोग | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वयं | कर्ता के साथ – स्वतंत्रता दर्शाने के लिए | "स्वयं करके दिखाओ।" |
| अपना/अपनी/अपने | स्वामित्व या संबंध दर्शाने के लिए | "अपनी गलती मानो।" |
| आप | स्वयं के लिए (निजवाचक) | "तुम आप चले जाओ।" |
3. निजवाचक सर्वनाम का वाक्यों में प्रयोग – तालिका
निजवाचक सर्वनाम को विभिन्न पुरुषों और वचनों में इस प्रकार प्रयोग किया जाता है –
| पुरुष | एकवचन | बहुवचन | उदाहरण (एकवचन) | उदाहरण (बहुवचन) |
|---|---|---|---|---|
| उत्तम पुरुष | मैं – अपना | हम – अपना | "मैं अपना काम करूँगा।" | "हम अपना काम करेंगे।" |
| मध्यम पुरुष | तू/तुम – अपना | तुम – अपना | "तुम अपना काम करो।" | "तुम अपना काम करो।" |
| अन्य पुरुष | वह – अपना | वे – अपना | "वह अपना काम करता है।" | "वे अपना काम करते हैं।" |
- निजवाचक सर्वनाम ‘अपना’ का रूप लिंग और वचन के अनुसार बदलता है – “अपना काम” (पुल्लिंग, एकवचन), “अपनी किताब” (स्त्रीलिंग, एकवचन), “अपने लड़के” (पुल्लिंग, बहुवचन)।
- ‘स्वयं’ का प्रयोग सभी लिंगों और वचनों में समान रहता है – “स्वयं आया”, “स्वयं आई”, “स्वयं आए”।
4. पुरुषवाचक और निजवाचक में अंतर
पुरुषवाचक और निजवाचक सर्वनाम – दोनों का प्रयोग अक्सर भ्रमित करता है। आइए अंतर समझते हैं –
| पुरुषवाचक सर्वनाम | निजवाचक सर्वनाम |
|---|---|
| कर्ता, श्रोता या अन्य को दर्शाता है – मैं, तुम, वह, हम, आप, वे | कर्ता स्वयं को दर्शाता है – अपना, स्वयं, आप |
| कर्ता और कर्म भिन्न हो सकते हैं – “मैं तुम्हारी किताब लाया।” (मैं ≠ तुम) | कर्ता और कर्म एक होते हैं – “अपनी किताब लाया।” (किताब अपनी है) |
| वाक्य के बिना भी चल सकता है – “राम आया।” | वाक्य का अर्थ इसके बिना अधूरा रहता है – “अपना काम करो” (अपना न हो तो अधूरा) |
5. सामान्य त्रुटियाँ और शुद्ध रूप
निजवाचक सर्वनाम के प्रयोग में कुछ सामान्य गलतियाँ होती हैं –
| अशुद्ध प्रयोग | शुद्ध प्रयोग | त्रुटि |
|---|---|---|
| मैं अपनी माँ से मिला। | मैं अपनी माँ से मिला। | सही है – ‘अपनी’ माँ (स्त्रीलिंग) के साथ |
| राम अपना किताब पढ़ता है। | राम अपनी किताब पढ़ता है। | ‘किताब’ स्त्रीलिंग – ‘अपना’ गलत, ‘अपनी’ सही |
| सीता ने स्वयम खाना बनाया। | सीता ने स्वयं खाना बनाया। | ‘स्वयम’ गलत – ‘स्वयं’ सही वर्तनी |
| हम अपना काम करता है। | हम अपना काम करते हैं। | ‘हम’ बहुवचन – क्रिया ‘करते हैं’ सही |
| तुम आप जाओ। | तुम आप जाओ। | सही है – ‘आप’ निजवाचक (स्वयं) के रूप में |
हल सहित उदाहरण (5)
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व्याख्या: ‘अपना’ स्वामित्व दर्शाता है (राम का काम), ‘स्वयं’ कर्ता (राम) की ओर वापस संकेत करता है – दोनों निजवाचक सर्वनाम हैं।
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व्याख्या: ‘अपनी’ सीता के स्वामित्व को दर्शाता है – यह कर्ता (सीता) की ओर वापस संकेत करता है।
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व्याख्या: यह बताता है कि काम करने वाला ‘मैं’ ही हूँ – कोई और नहीं – यह निजवाचक सर्वनाम है।
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व्याख्या: ‘आप’ श्रोता को दर्शाता है (सम्मान), ‘अपना’ श्रोता के स्वामित्व को दर्शाता है – दोनों अलग-अलग प्रकार के सर्वनाम हैं।
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व्याख्या: ‘अपनी’ ने ‘उसकी’ का काम किया है – यह निजवाचक सर्वनाम है जो कर्ता की गलती को दर्शाता है।
अभ्यास प्रश्न (5)
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निजवाचक सर्वनाम की समझ क्यों ज़रूरी है?
निजवाचक सर्वनाम हिंदी व्याकरण का वह खूबसूरत हिस्सा है जो हमें स्वयं की ओर देखना सिखाता है – शाब्दिक और लाक्षणिक दोनों अर्थों में। इसके प्रयोग से हम यह स्पष्ट कर पाते हैं कि कोई काम किसके लिए किया जा रहा है, या किसी चीज़ का स्वामी कौन है। इस पोस्ट में हमने पुरुषवाचक सर्वनाम और संकेतवाचक सर्वनाम के साथ निजवाचक सर्वनाम के अंतर को भी स्पष्ट किया है।
अभ्यास से ही निजवाचक सर्वनाम की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक बातचीत में 'अपना', 'स्वयं', 'आप' के प्रयोग पर ध्यान दें – इनके लिंग, वचन और संदर्भ के अनुसार सही रूप का चयन करें।
📝 निजवाचक सर्वनाम अभ्यास – कक्षा 5-6
इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको बताना है कि प्रत्येक वाक्य में कौन-सा निजवाचक सर्वनाम है और वह किस संज्ञा/सर्वनाम की ओर वापस संकेत कर रहा है। साथ ही, कुछ वाक्यों में गलत 'अपना/अपनी/अपने' को शुद्ध करना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।
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