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कर्मधारय समास – परिभाषा, पहचान और उदाहरण (Karmadharaya Samas – Descriptive Compound) | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 30 JUNE 2026

क्या आप जानते हैं कि 'नीलकमल' का अर्थ सिर्फ़ 'नीला कमल' नहीं है, बल्कि यह विशेषण और विशेष्य का एक सुंदर मेल है? 'नील' (विशेषण) + 'कमल' (विशेष्य) – 'नीला कमल' – यहाँ दोनों पद मिलकर एक विशेषण-विशेष्य संबंध बनाते हैं। हिंदी व्याकरण में ऐसे समास जिनमें पहला पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य – या दोनों पद मिलकर किसी उपमा या विशेषण-विशेष्य संबंध को दर्शाते हैं – कर्मधारय समास (Karmadharaya Compound) कहलाते हैं। 'कर्मधारय' का अर्थ है – 'कर्म' (विशेषण) + 'धारय' (धारण करने वाला) – यानी 'जो विशेषण को धारण करे'। कर्मधारय समास चार प्रकार के होते हैं – विशेषण-विशेष्य, उपमान-उपमेय, उपमित-समास, और द्विगु (संख्यावाचक) – प्रत्येक का अपना अलग स्वरूप और पहचान है। इस पोस्ट में हम कर्मधारय समास को विस्तार से समझेंगे – उसकी परिभाषा, चारों प्रकार, पहचान के नियम, उदाहरण, विग्रह, और वाक्यों में प्रयोग – ताकि आप किसी भी कर्मधारय समास को पहचान सकें और उसका सही विग्रह कर सकें। यह पोस्ट कक्षा 8‑9 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 8-9 | CBSE एवं UP Board



1. कर्मधारय समास – परिभाषा एवं परिचय

कर्मधारय समास (Karmadharaya Compound) वह समास है जिसमें पहला पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य – अर्थात विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है – और विग्रह में 'रूप', 'समान', 'सदृश' आदि शब्द भी आ सकते हैं।

कर्मधारय समास की सरल परिभाषा: “जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य हो, या दोनों पद मिलकर उपमा या विशेषण-विशेष्य संबंध दर्शाते हों, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।”

उदाहरण –
  • नील” + “कमल” = “नीलकमल” – (नीला कमल – विशेषण-विशेष्य)
  • महा” + “राजा” = “महाराजा” – (बड़ा राजा – विशेषण-विशेष्य)
  • चंद्र” + “मुख” = “चंद्रमुख” – (चंद्र के समान मुख – उपमान-उपमेय)

कर्मधारय समास में दोनों पद मिलकर एक नया अर्थ देते हैं – यह संज्ञा या विशेषण बन सकता है। कर्मधारय समास को विशेषण-विशेष्य समास भी कहा जाता है – क्योंकि इसमें विशेषण और विशेष्य का संबंध प्रमुख होता है।

2. कर्मधारय समास के चार प्रकार – विशेषण-विशेष्य, उपमान-उपमेय, उपमित, द्विगु

कर्मधारय समास चार प्रकार के होते हैं –

1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास (Adjective-Noun): जहाँ पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य हो – “नील” + “कमल” = “नीलकमल” (नीला कमल)
“महा” + “राजा” = “महाराजा” (बड़ा राजा)

2. उपमान-उपमेय कर्मधारय समास (Metaphorical): जहाँ पहला पद उपमान (जिससे तुलना की जाए) और दूसरा पद उपमेय (जिसकी तुलना की जाए) हो – विग्रह में 'समान', 'तुल्य', 'सदृश' आते हैं।
“चंद्र” + “मुख” = “चंद्रमुख” (चंद्र के समान मुख)
“विद्या” + “धन” = “विद्याधन” (विद्या ही धन है)

3. उपमित कर्मधारय समास (Metaphorical – उपमित): जहाँ उपमान और उपमेय का मेल 'मित' शब्द के साथ हो – “सिंह” + “बालक” = “सिंहबालक” (सिंह के समान बालक) – पर 'उपमित' में विग्रह में 'सदृश' या 'तुल्य' आता है।
“पुत्र” + “वत्स” = “पुत्रवत्स” (पुत्र के समान वत्स) – पर प्रचलित नहीं

4. द्विगु कर्मधारय समास (Numerical – द्विगु): जहाँ पहला पद संख्या बताता है – “त्रि” + “लोक” = “त्रिलोक” (तीन लोक)
“पंच” + “वटी” = “पंचवटी” (पाँच वट वृक्षों वाली जगह)
ध्यान दें: द्विगु समास भी कर्मधारय का ही एक भेद है – संख्यावाचक विशेषण + विशेष्य

ट्रिक – याद रखें:विशेषण-विशेष्य – नीला कमल (नीलकमल); उपमान-उपमेय – चंद्र सा मुख (चंद्रमुख); उपमित – सिंह सा बालक (सिंहबालक); द्विगु – तीन लोक (त्रिलोक) – ये चार – कर्मधारय समास के मुख्य प्रकार। विग्रह में विशेषण या उपमा देखो – प्रकार पहचानो।”

3. कर्मधारय समास – उदाहरण तालिका

कर्मधारय समास के सभी चार प्रकारों के उदाहरण –

प्रकार समास शब्द विग्रह
विशेषण-विशेष्यनीलकमलनीला कमल
विशेषण-विशेष्यमहाराजाबड़ा राजा
विशेषण-विशेष्यश्वेतांबरसफेद वस्त्र
विशेषण-विशेष्यसुंदरीसुंदर स्त्री
उपमान-उपमेयचंद्रमुखचंद्र के समान मुख
उपमान-उपमेयविद्याधनविद्या ही धन है
उपमान-उपमेयज्ञानरूपीज्ञान के रूप में
उपमान-उपमेयकमलनेत्रकमल के समान नेत्र
उपमितसिंहबालकसिंह के समान बालक
उपमितशशिमुखशशि (चंद्र) के समान मुख
द्विगुत्रिलोकतीन लोक
द्विगुपंचवटीपाँच वट वृक्षों वाली जगह
द्विगुसप्तपर्णीसात पत्तों वाला
द्विगुचतुर्युगचार युग
ध्यान दें –
  • विशेषण-विशेष्य – सबसे सरल और प्रचलित – 'नीलकमल', 'महाराजा' – ये सीधे विशेषण-विशेष्य संबंध दिखाते हैं।
  • उपमान-उपमेय – विग्रह में 'समान', 'तुल्य', 'सदृश' आते हैं – 'चंद्रमुख' (चंद्र के समान मुख)।
  • उपमित – उपमान + उपमेय का मेल – 'सिंहबालक' (सिंह के समान बालक)।
  • द्विगु – पहला पद संख्या बताता है – 'त्रिलोक' (तीन लोक) – यह भी कर्मधारय का ही भेद है।

4. कर्मधारय और अन्य समासों में अंतर

कर्मधारय समास को तत्पुरुष और बहुव्रीहि से भ्रमित किया जा सकता है – आइए अंतर समझते हैं –

कर्मधारय समास तत्पुरुष समास बहुव्रीहि समास
विशेषण-विशेष्य – “नीलकमल” (नीला कमल) कारक संबंध – “राजपुत्र” (राजा का पुत्र) अन्य का बोध – “पीतअंबर” (पीला वस्त्र पहनने वाला – विष्णु)
विग्रह में विशेषण – “नीला कमल” विग्रह में कारक चिह्न – “राजा का पुत्र” विग्रह में अन्य पद – “पीला वस्त्र पहनने वाला”
उदाहरण – नीलकमल, महाराजा उदाहरण – राजपुत्र, गंगाजल उदाहरण – पीतांबर, दशानन
ट्रिक – याद रखें:कर्मधारय – विशेषण-विशेष्य (नीलकमल – नीला कमल); तत्पुरुष – कारक संबंध (राजपुत्र – राजा का पुत्र); बहुव्रीहि – अन्य का बोध (पीतांबर – पीला वस्त्र पहनने वाला)। विग्रह में विशेषण हो – कर्मधारय; कारक चिह्न हो – तत्पुरुष; अन्य पद हो – बहुव्रीहि।”

5. वाक्यों में कर्मधारय समास का प्रयोग

कर्मधारय समास युक्त शब्दों का सही अर्थ समझना और उन्हें वाक्यों में प्रयोग करना आवश्यक है –

  • नीलकमल (नील + कमल):नीलकमल बहुत सुंदर है।” – (नीला कमल – विशेषण-विशेष्य)
  • महाराजा (महा + राजा):महाराजा आ रहे हैं।” – (बड़ा राजा – विशेषण-विशेष्य)
  • चंद्रमुख (चंद्र + मुख):चंद्रमुख सीता बहुत सुंदर हैं।” – (चंद्र के समान मुख – उपमान-उपमेय)
  • विद्याधन (विद्या + धन):विद्याधन सबसे बड़ा धन है।” – (विद्या ही धन है – उपमान-उपमेय)
  • त्रिलोक (त्रि + लोक):त्रिलोक में एक ही ईश्वर है।” – (तीन लोक – द्विगु)
  • सिंहबालक (सिंह + बालक):सिंहबालक बहुत बहादुर है।” – (सिंह के समान बालक – उपमित)


हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “नीलकमल” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: नीलकमल = नील + कमल – विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास
व्याख्या: ‘नील’ (विशेषण) + ‘कमल’ (विशेष्य) – ‘नीला कमल’ – विग्रह में विशेषण-विशेष्य संबंध है – यह कर्मधारय समास है।
उदाहरण 2
प्रश्न: “महाराजा” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: महाराजा = महा + राजा – विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास
व्याख्या: ‘महा’ (विशेषण) + ‘राजा’ (विशेष्य) – ‘बड़ा राजा’ – विग्रह में विशेषण-विशेष्य संबंध है – यह कर्मधारय समास है।
उदाहरण 3
प्रश्न: “चंद्रमुख” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: चंद्रमुख = चंद्र + मुख – उपमान-उपमेय कर्मधारय समास
व्याख्या: ‘चंद्र’ (उपमान) + ‘मुख’ (उपमेय) – ‘चंद्र के समान मुख’ – विग्रह में 'समान' आया – यह उपमान-उपमेय कर्मधारय समास है।
उदाहरण 4
प्रश्न: “त्रिलोक” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: त्रिलोक = त्रि + लोक – द्विगु कर्मधारय समास
व्याख्या: ‘त्रि’ (संख्या) + ‘लोक’ (विशेष्य) – ‘तीन लोक’ – पहला पद संख्या बताता है – यह द्विगु कर्मधारय समास है।
उदाहरण 5
प्रश्न: “सिंहबालक” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: सिंहबालक = सिंह + बालक – उपमित कर्मधारय समास
व्याख्या: ‘सिंह’ (उपमान) + ‘बालक’ (उपमेय) – ‘सिंह के समान बालक’ – यह उपमित कर्मधारय समास है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“श्वेतांबर” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: श्वेतांबर = श्वेत + अंबर – विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास ('सफेद वस्त्र')
प्रश्न 2
“विद्याधन” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: विद्याधन = विद्या + धन – उपमान-उपमेय कर्मधारय समास ('विद्या ही धन है')
प्रश्न 3
“पंचवटी” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: पंचवटी = पंच + वटी – द्विगु कर्मधारय समास ('पाँच वट वृक्षों वाली जगह')
प्रश्न 4
“कमलनेत्र” – इस शब्द का विग्रह करें और समास का प्रकार बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: कमलनेत्र = कमल + नेत्र – उपमान-उपमेय कर्मधारय समास ('कमल के समान नेत्र')
प्रश्न 5
“कर्मधारय समास” और “तत्पुरुष समास” में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य संबंध होता है (नीलकमल – नीला कमल), जबकि तत्पुरुष में कारक संबंध होता है (राजपुत्र – राजा का पुत्र)।

कर्मधारय समास की समझ क्यों ज़रूरी है?

कर्मधारय समास हिंदी भाषा को सुंदर, सटीक और प्रभावी बनाता है – 'नीला कमल' की जगह 'नीलकमल' कहना अधिक सुरुचिपूर्ण है। यह समास विशेषण-विशेष्य और उपमा पर आधारित है – इसलिए यह काव्य और साहित्य में बहुत प्रयुक्त होता है – 'चंद्रमुख', 'कमलनेत्र', 'सिंहबालक' – ये सभी साहित्यिक शब्द हैं। इस पोस्ट में हमने  समास परिभाषा और  तत्पुरुष समास के साथ कर्मधारय समास के चारों प्रकारों – विशेषण-विशेष्य, उपमान-उपमेय, उपमित, और द्विगु – को उनके नियमों, उदाहरणों, और पहचान के साथ विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी कर्मधारय समास युक्त शब्द का विग्रह कर सकते हैं और उसका सही प्रकार बता सकते हैं।

अभ्यास से ही कर्मधारय समास की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक भाषा में कर्मधारय समास युक्त शब्दों पर ध्यान दें – 'नीलकमल', 'महाराजा', 'चंद्रमुख', 'त्रिलोक', 'सिंहबालक' – इनका विग्रह करें और देखें कि विग्रह में विशेषण-विशेष्य, उपमा, या संख्या का कौन-सा संबंध है। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।

📝 कर्मधारय समास अभ्यास – कक्षा 8-9

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 30 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक शब्द का विग्रह करना है और बताना है कि वह कर्मधारय समास है या नहीं। कर्मधारय समास वाले शब्दों में प्रकार (विशेषण-विशेष्य, उपमान-उपमेय, उपमित, द्विगु) पहचानना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

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