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द्वंद्व समास (Dvandva Samas) | GPN

द्वंद्व समास वह प्रकार है जहाँ दोनों पद प्रधान और समान महत्व के होते हैं, और उनके बीच 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' जैसे योजक शब्दों का भाव छिपा रहता है। 'माता-पिता', 'राम-लक्ष्मण', 'सुख-दुःख' जैसे शब्द-युग्म इसी समास के प्रतीक हैं। यह समास चीज़ों को जोड़कर एक समूह या विकल्प का बोध कराता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 8–9 (परिचय व अभ्यास) | कक्षा 9–10 (उच्च स्तर प्रयोग)


1. द्वंद्व समास का परिचय

जब आप "माता-पिता" कहते हैं, तो आपका मतलब होता है "माता और पिता" दोनों। यहाँ न तो सिर्फ माता प्रधान है, न सिर्फ पिता। दोनों का अलग-अलग लेकिन बराबर का महत्व है। ठीक यही द्वंद्व समास की पहचान है। यह समास दो (या अधिक) चीज़ों को एक साथ जोड़ देता है, चाहे वे एक दूसरे के पूरक हों (जैसे दिन-रात), विरोधी हों (जैसे हार-जीत) या फिर विकल्प हों (जैसे एक-आध)। इसका नाम 'द्वंद्व' ही इसके द्वैत (दो) के भाव को दर्शाता है। यह समास भाषा को संपन्न बनाता है और हमें एक ही शब्द-युग्म में बहुत कुछ कहने की क्षमता देता है।

हमारी बोलचाल में यह समास इतना घुला-मिला है कि हम अक्सर इस पर ध्यान नहीं देते। "फल-सब्ज़ी ले आना", "छोटे-बड़े सभी आए थे", "पानी-वानी का इंतज़ाम करो" – ये सभी द्वंद्व समास के उदाहरण हैं। यह समास चीज़ों की जोड़ी बनाने में माहिर है।

2. परिभाषा

परिभाषा: वह समास जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं तथा उनके बीच योजक शब्दों ('और', 'अथवा', 'या', 'तथा', 'एवं') का लोप होता है, द्वंद्व समास कहलाता है। इस समास में दोनों पदों के अलग-अलग अर्थ महत्वपूर्ण होते हैं और समस्त पद द्विवचन या बहुवचन का बोध कराता है।

3. मुख्य बिंदु / पहचान

द्वंद्व समास को पहचानना बहुत सरल है। इन विशेषताओं को याद रखें:

  • दोनों पद प्रधान: यह सबसे बड़ी और निर्णायक पहचान है। तत्पुरुष में दूसरा पद, अव्ययीभाव में पहला पद प्रधान होता है, लेकिन द्वंद्व में कोई गौण पद नहीं होता, दोनों मुख्य हैं।
  • योजक शब्द का लोप: दोनों पदों के बीच 'और', 'या', 'तथा' जैसा कोई योजक (समुच्चयबोधक) शब्द हटा दिया जाता है। विग्रह करते समय यह शब्द वापस जुड़ जाता है।
  • बहुवचन या समूह का बोध: द्वंद्व समास से बना शब्द प्रायः बहुवचन या कम से कम दो चीज़ों के समूह का अर्थ देता है। 'माता-पिता' से दो व्यक्तियों का बोध होता है।
  • विपरीतार्थक या समानार्थक शब्दों का जोड़: अक्सर विपरीत अर्थ वाले (हार-जीत, लाभ-हानि) या समान श्रेणी के शब्द (नृत्य-गान, चावल-दाल) जोड़े जाते हैं।
  • हाइफ़न (-) का प्रयोग: लिखित भाषा में दोनों पदों के बीच हाइफ़न (-) लगाया जा सकता है (जैसे सुख-दुःख), हालाँकि यह अनिवार्य नहीं है।

4. द्वंद्व समास के प्रमुख प्रकार

योजक शब्द के भाव के आधार पर द्वंद्व समास के दो मुख्य प्रकार माने जाते हैं:

क्रम प्रकार का नाम योजक शब्द / भाव उदाहरण विग्रह
1 इतरेतर द्वंद्व (समुच्चयबोधक) 'और', 'तथा', 'एवं'
(दोनों का सम्मिलित भाव)
माता-पिता, राम-लक्ष्मण, फल-फूल माता और पिता, राम और लक्ष्मण, फल और फूल
2 वैकल्पिक द्वंद्व 'अथवा', 'या', 'कि'
(दो में से एक का भाव)
एक-आध, सुबह-शाम, जीवन-मरण एक अथवा आध, सुबह या शाम, जीवन अथवा मरण

नोट: 'इतरेतर' का अर्थ है 'एक दूसरे' या 'पारस्परिक'। इस प्रकार में दोनों पद मिलकर एक समग्रता बनाते हैं। वैकल्पिक द्वंद्व में विकल्प का भाव रहता है।

5. उदाहरण

विभिन्न संदर्भों में द्वंद्व समास के उदाहरण:

  • पारिवारिक संबंध: भाई-बहन, चाचा-ताऊ, दादा-दादी।
  • विपरीतार्थक: अंधेर-उजाला, ऊँच-नीच, आना-जाना, हँसी-खुशी।
  • दैनिक उपयोग: कपड़े-लत्ते, खाना-पीना, कमरा-कोठा, किताब-कॉपी।
  • प्रकृति व समय: दिन-रात, सूरज-चाँद, धूप-छाँव, ऋतु-बसंत।
  • दार्शनिक/जीवन: धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य, यश-अपयश, जन्म-मरण।
  • संख्या व परिमाण: दो-चार, चार-पाँच, थोड़ा-बहुत।

6. वाक्य में प्रयोग

द्वंद्व समास से बने शब्द-युग्म वाक्य में प्रायः बहुवचन संज्ञा की तरह प्रयुक्त होते हैं, इसलिए इनके साथ बहुवचन की क्रिया का प्रयोग होता है। हालाँकि, यदि युग्म किसी एक इकाई या अवधारणा का बोध कराए (जैसे 'रामायण-महाभारत हमारे ग्रंथ हैं'), तो भी बहुवचन ही लगेगा। कभी-कभी ये विशेषण की भूमिका में भी आते हैं।

उदाहरण (बहुवचन क्रिया): "सभी माता-पिता अपने बच्चों का भला चाहते हैं।"
उदाहरण (विशेषण): "यह घड़ी-मोबाइल की दुकान है।" (यहाँ 'घड़ी-मोबाइल' विशेषण का काम कर रहा है)

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ

द्वंद्व को अन्य समासों से, खासकर अव्ययीभाव की पुनरुक्ति से अलग पहचानना महत्वपूर्ण है:

  • द्वंद्व vs तत्पुरुष/कर्मधारय: तत्पुरुष/कर्मधारय में एक पद गौण होता है। 'राजपुत्र' में 'पुत्र' प्रधान है, 'राजा' गौण। 'द्वंद्व' में ऐसा नहीं है। 'राम-लक्ष्मण' में दोनों प्रधान हैं।
  • द्वंद्व vs अव्ययीभाव की पुनरुक्ति: यह सबसे बड़ा भ्रम है। 'घर-घर' (हर घर में) अव्ययीभाव है क्योंकि यह एक अव्यय (क्रिया विशेषण) बन गया है और इसका अर्थ 'हर घर' है। जबकि 'घर-बार' (घर और सम्पत्ति) द्वंद्व है क्योंकि दो अलग चीज़ों का योग है। पुनरुक्ति (एक शब्द की दोहराई) से बने अव्ययीभाव में अर्थ बदल जाता है, द्वंद्व में नहीं।
  • 'और' का भाव ही कसौटी: किसी भी समस्त पद का विग्रह करें। अगर विग्रह में 'और', 'या', 'तथा' जुड़ता है और दोनों पदों का अर्थ सुरक्षित रहता है, तो निश्चित रूप से वह द्वंद्व समास है।
  • तीन या अधिक पद: द्वंद्व समास दो से अधिक पदों का भी हो सकता है, जैसे 'राम, लक्ष्मण और सीता' को 'राम-लक्ष्मण-सीता'। लेकिन प्रायः दो पदों वाले उदाहरण ही पाठ्यक्रम में आते हैं।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • द्वंद्व समास की परिभाषा में "दोनों पद प्रधान" और "योजक शब्दों का लोप" – ये दोनों बिंदु अवश्य लिखें।
  • MCQ में अक्सर पूछा जाता है: "'माता-पिता' किस समास का उदाहरण है?" द्वंद्व समास सही उत्तर होगा। इसके अलावा सुख-दुःख, हार-जीत, दाल-रोटी भी सामान्य उदाहरण हैं।
  • विग्रह करते समय याद रखें: द्वंद्व के विग्रह में 'और' या 'अथवा' अवश्य जुड़ेगा। अगर विग्रह में 'का', 'से', 'में' या 'है जो' आता है, तो वह द्वंद्व नहीं है।
  • द्वंद्व समास के दोनों प्रकारों (इतरेतर और वैकल्पिक) के नाम याद रखने आवश्यक नहीं, लेकिन यदि पूछा जाए तो उदाहरण सहित बता सकते हैं।

9. 🎯 द्वंद्व समास आधारित चुनौती

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देकर देखें कि आप इस समास को कितना समझ पाए हैं।

1. "सुख-दुःख" शब्द का विग्रह कीजिए और बताइए कि यह द्वंद्व समास का कौन-सा प्रकार है?

उत्तर: विग्रह: सुख और दुःख। चूँकि इसमें 'और' योजक शब्द लुप्त हुआ है और दोनों पद प्रधान हैं, यह इतरेतर द्वंद्व समास है।

2. "घर-घर" और "घर-द्वार" – इन दोनों में क्या अंतर है? कौन-सा द्वंद्व है और कौन-सा नहीं?

उत्तर:
घर-घर: विग्रह - प्रत्येक घर में। यह एक ही शब्द की पुनरुक्ति है और इसका अर्थ बदलकर 'हर घर' हो गया है। यह एक अव्यय (क्रिया विशेषण) बन गया है, इसलिए यह अव्ययीभाव समास है, द्वंद्व नहीं।
घर-द्वार: विग्रह - घर और द्वार। दो अलग-अलग चीज़ें जुड़ी हैं और दोनों प्रधान हैं। अतः यह द्वंद्व समास है।

3. "एक-आध" शब्द में कौन-सा योजक शब्द लुप्त हुआ है? इस आधार पर यह द्वंद्व का कौन-सा प्रकार है?

उत्तर: लुप्त योजक शब्द है "अथवा" या "या"। विग्रह: एक अथवा आध। चूँकि इसमें विकल्प का भाव है, यह वैकल्पिक द्वंद्व समास है।

4. क्या "चौराहा" (चार राहों का मिलन) शब्द द्वंद्व समास है? कारण बताइए।

उत्तर: नहीं, "चौराहा" द्वंद्व समास नहीं है। इसका विग्रह है 'चार राहों का समूह'। यहाँ 'चार' (विशेषण) और 'राह' (विशेष्य) का संबंध है, दोनों पद प्रधान नहीं हैं। इसमें 'और' का भाव भी नहीं है। यह तत्पुरुष या कर्मधारय समास है।

5. "फल-फूल" और "फलाहार" – इनमें से कौन-सा शब्द द्वंद्व समास है? दोनों का विग्रह करके अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
फल-फूल: विग्रह - फल और फूल। दोनों पद प्रधान, 'और' लुप्त। अतः यह द्वंद्व समास है।
फलाहार: विग्रह - फल का आहार। यहाँ 'फल' गौण है, 'आहार' प्रधान है। 'का' विभक्ति लुप्त हुई है। अतः यह तत्पुरुष समास (संबंध भेद) है।

6. "तिरंगा" (तीन रंगों वाला झंडा) क्या द्वंद्व समास है? यदि नहीं, तो क्यों?

उत्तर: नहीं, "तिरंगा" द्वंद्व समास नहीं है। इसका विग्रह 'तीन रंगों वाला' है। यहाँ 'तीन' विशेषण है और 'रंग' विशेष्य है, और मिलकर यह एक तीसरी वस्तु (झंडा) का बोध करा रहा है। यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।

7. "धूप-छाँव" शब्द का विग्रह 'धूप और छाँव' है। इस आधार पर बताइए कि इस समस्त पद के साथ वाक्य में एकवचन क्रिया आएगी या बहुवचन?

उत्तर: बहुवचन क्रिया आएगी। चूँकि द्वंद्व समास से बना पद दो या अधिक चीज़ों का बोध कराता है, इसके साथ बहुवचन क्रिया का प्रयोग होता है।
उदाहरण: "जीवन में धूप-छाँव दोनों हैं।" (बहुवचन)

8. "रामायण-महाभारत" किस समास का उदाहरण है? क्या इसे द्वंद्व माना जाएगा?

उत्तर: हाँ, यह द्वंद्व समास का उदाहरण है। विग्रह: रामायण और महाभारत। दोनों ग्रंथ प्रधान हैं और उनके बीच 'और' योजक शब्द लुप्त हुआ है। यह इतरेतर द्वंद्व है।

9. "सुबह-शाम" शब्द में वैकल्पिक द्वंद्व का भाव कैसे है? इसका प्रयोग करते हुए एक वाक्य बनाइए जो विकल्प का भाव दर्शाए।

उत्तर: "सुबह-शाम" में वैकल्पिक द्वंद्व का भाव है क्योंकि इसका अर्थ 'सुबह या शाम' (दोनों में से कोई एक समय) हो सकता है।
वाक्य: "आप सुबह-शाम कभी भी आ सकते हैं।" (यहाँ विकल्प का भाव स्पष्ट है)

10. आप अपने दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले तीन ऐसे शब्द-युग्म लिखिए जो द्वंद्व समास के हों और उनका विग्रह भी कीजिए।

उत्तर: (उदाहरण स्वरूप)
1. किताब-कॉपी: विग्रह - किताब और कॉपी।
2. आना-जाना: विग्रह - आना और जाना।
3. चाय-पानी: विग्रह - चाय और पानी।

10. सारांश

द्वंद्व समास की पहचान उसकी सहभागिता और समानता के भाव में है। यह वह समास है जहाँ दोनों (या सभी) पद प्रधान होते हैं और उनके बीच 'और', 'अथवा' जैसे योजक शब्दों का लोप होता है। 'माता-पिता', 'सुख-दुःख', 'हार-जीत' जैसे शब्द इसकी जीवंतता के उदाहरण हैं। इसे अन्य समासों से अलग करने का सबसे सरल तरीका यह है कि देखें कि क्या दोनों पदों का अपना-अपना महत्व है और क्या विग्रह में कोई योजक शब्द जुड़ता है। यह समास भाषा को समृद्ध बनाता है और एक साथ कई अवधारणाओं को व्यक्त करने की क्षमता देता है।

11. संबंधित विषय संकेत

समास के सबसे रचनात्मक और चुनौतीपूर्ण भेद को समझने के लिए आगे बढ़ें: कक्षा 9-10 • बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)

📝 द्वंद्व समास - अभ्यास कार्यपत्रक

द्वंद्व समास की पहचान, प्रकार और विग्रह पर आधारित विस्तृत अभ्यास प्रश्न।

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