सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 30 JUNE 2026
एक दिन मेरे छात्र ने मुझसे पूछा – "सर, 'राम-लक्ष्मण' और 'राम' + 'लक्ष्मण' – इन दोनों में क्या फर्क है? दोनों में तो राम और लक्ष्मण हैं!" मैंने कहा – "बेटा, 'राम-लक्ष्मण' में दोनों प्रधान हैं – एक दूसरे पर आश्रित नहीं – दोनों का अपना अलग अस्तित्व है – और इन्हें 'और' से जोड़ा गया है। यही तो द्वंद्व समास (Dvandva Compound) की पहचान है – जिस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में 'और' चिह्न आता है। हिंदी व्याकरण में द्वंद्व समास वह है जिसमें दोनों पदों का समान महत्व होता है – 'राम-लक्ष्मण' (राम और लक्ष्मण), 'माता-पिता' (माता और पिता), 'सुख-दुख' (सुख और दुख)। द्वंद्व समास दो प्रकार का होता है – इतरेतर द्वंद्व (जहाँ दोनों पद अलग-अलग रहते हैं) और समाहार द्वंद्व (जहाँ दोनों पद मिलकर एक समूह बनाते हैं)। इस पोस्ट में हम द्वंद्व समास को विस्तार से समझेंगे – उसकी परिभाषा, दोनों प्रकार, पहचान के नियम, उदाहरण, विग्रह, और वाक्यों में प्रयोग – ताकि आप किसी भी द्वंद्व समास को पहचान सकें और उसका सही विग्रह कर सकें। यह पोस्ट कक्षा 8‑9 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।
✅ अनुशंसित: कक्षा 8-9 | CBSE एवं UP Board
(किसी भी विषय पर सीधे जाने के लिए क्लिक करें)
1. द्वंद्व समास – परिभाषा एवं परिचय
द्वंद्व समास (Dvandva Compound) वह समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं – अर्थात दोनों का अपना अलग-अलग अस्तित्व है – और विग्रह करने पर दोनों के बीच 'और' चिह्न आता है। 'द्वंद्व' का अर्थ है – 'जोड़ा' या 'युग्म' – यानी जिस समास में दो चीज़ों का जोड़ा हो।
उदाहरण –
- “राम” + “लक्ष्मण” = “राम-लक्ष्मण” – (राम और लक्ष्मण)
- “माता” + “पिता” = “माता-पिता” – (माता और पिता)
- “सुख” + “दुख” = “सुख-दुख” – (सुख और दुख)
द्वंद्व समास में दोनों पद का महत्व बराबर होता है – 'राम-लक्ष्मण' में 'राम' और 'लक्ष्मण' दोनों प्रधान हैं – कोई दूसरे पर आश्रित नहीं है। विग्रह में 'और' चिह्न सबसे स्पष्ट पहचान है – 'राम और लक्ष्मण'।
2. द्वंद्व समास के दो प्रकार – इतरेतर और समाहार
द्वंद्व समास दो प्रकार के होते हैं –
उदाहरण: “राम” + “लक्ष्मण” = “राम-लक्ष्मण” (राम और लक्ष्मण – दोनों अलग-अलग)
“माता” + “पिता” = “माता-पिता” (माता और पिता – दोनों अलग-अलग)
“सुख” + “दुख” = “सुख-दुख” (सुख और दुख – दोनों अलग-अलग)
इतरेतर का अर्थ है – 'परस्पर' – यानी दोनों आपस में अलग-अलग हैं।
2. समाहार द्वंद्व समास (Collective Dvandva): जब दोनों पद मिलकर एक समूह बनाते हैं – और विग्रह में 'और' नहीं, बल्कि 'समूह' या 'युग्म' का भाव होता है – और परिणाम एकवचन होता है।
उदाहरण: “अक्ष” (आँख) + “पक्ष” (पंख) – पर 'अक्षपक्ष' नहीं – “पाणि” + “पाद” = “पाणिपाद” (हाथ-पैर – एक समूह)
“शीत” + “उष्ण” = “शीतोष्ण” (शीत और उष्ण – एक साथ – मौसम)
समाहार का अर्थ है – 'समावेश' – यानी दोनों मिलकर एक हो जाते हैं।
ट्रिक – याद रखें: “इतरेतर – अलग-अलग (राम-लक्ष्मण); समाहार – एक साथ (पाणिपाद – हाथ-पैर)। विग्रह में 'और' हो – इतरेतर; 'समूह' का भाव हो – समाहार। द्वंद्व समास के ये दो प्रकार – पहचानो और याद रखो।”
3. द्वंद्व समास – उदाहरण तालिका
द्वंद्व समास के दोनों प्रकारों के उदाहरण –
| प्रकार | समास शब्द | विग्रह |
|---|---|---|
| इतरेतर | राम-लक्ष्मण | राम और लक्ष्मण |
| इतरेतर | माता-पिता | माता और पिता |
| इतरेतर | सुख-दुख | सुख और दुख |
| इतरेतर | देव-दानव | देव और दानव |
| इतरेतर | दिन-रात | दिन और रात |
| इतरेतर | सत्य-असत्य | सत्य और असत्य |
| इतरेतर | गंगा-यमुना | गंगा और यमुना |
| समाहार | पाणिपाद | हाथ-पैर (समूह) |
| समाहार | शीतोष्ण | शीत और उष्ण (एक साथ) |
| समाहार | चंद्र-सूर्य | चंद्र और सूर्य (एक समूह) |
| समाहार | हरि-हर | हरि और हर (एक साथ – विष्णु-शिव) |
| समाहार | सीता-राम | सीता और राम (एक युग्म) |
- इतरेतर – दोनों पद अलग-अलग रहते हैं – विग्रह में 'और' आता है – 'राम-लक्ष्मण' (राम और लक्ष्मण)।
- समाहार – दोनों पद मिलकर एक समूह बनाते हैं – विग्रह में 'समूह' या 'युग्म' का भाव होता है – 'पाणिपाद' (हाथ-पैर – एक समूह)।
- इतरेतर द्वंद्व बहुवचन होता है – 'राम और लक्ष्मण आए' (बहुवचन); समाहार द्वंद्व एकवचन होता है – 'पाणिपाद शिथिल हो गया' (एकवचन)।
4. द्वंद्व और अन्य समासों में अंतर
द्वंद्व समास को तत्पुरुष और कर्मधारय से भ्रमित किया जा सकता है – आइए अंतर समझते हैं –
| द्वंद्व समास | तत्पुरुष समास | कर्मधारय समास |
|---|---|---|
| दोनों पद प्रधान – “राम-लक्ष्मण” | दूसरा पद प्रधान – “राजपुत्र” | विशेषण-विशेष्य – “नीलकमल” |
| विग्रह में 'और' – “राम और लक्ष्मण” | विग्रह में कारक चिह्न – “राजा का पुत्र” | विग्रह में विशेषण – “नीला कमल” |
| उदाहरण – राम-लक्ष्मण, माता-पिता | उदाहरण – राजपुत्र, गंगाजल | उदाहरण – नीलकमल, महाराजा |
5. वाक्यों में द्वंद्व समास का प्रयोग
द्वंद्व समास युक्त शब्दों का सही अर्थ समझना और उन्हें वाक्यों में प्रयोग करना आवश्यक है –
- राम-लक्ष्मण (राम + लक्ष्मण): “राम-लक्ष्मण वन गए।” – (राम और लक्ष्मण – इतरेतर द्वंद्व)
- माता-पिता (माता + पिता): “माता-पिता का सम्मान करो।” – (माता और पिता – इतरेतर द्वंद्व)
- सुख-दुख (सुख + दुख): “सुख-दुख जीवन का अंग है।” – (सुख और दुख – इतरेतर द्वंद्व)
- पाणिपाद (पाणि + पाद): “पाणिपाद ठंड से सुन्न हो गए।” – (हाथ-पैर – समाहार द्वंद्व – एक समूह)
- शीतोष्ण (शीत + उष्ण): “शीतोष्ण जलवायु में फसल अच्छी होती है।” – (शीत और उष्ण – एक साथ – समाहार द्वंद्व)
हल सहित उदाहरण (5)
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘राम’ + ‘लक्ष्मण’ – दोनों प्रधान हैं – विग्रह में ‘और’ आया है – यह इतरेतर द्वंद्व समास है।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘माता’ + ‘पिता’ – दोनों प्रधान हैं – विग्रह में ‘और’ आया है – यह इतरेतर द्वंद्व समास है।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘पाणि’ (हाथ) + ‘पाद’ (पैर) – दोनों मिलकर एक समूह बनाते हैं – विग्रह में 'और' नहीं, 'समूह' का भाव है – यह समाहार द्वंद्व समास है।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘सुख’ + ‘दुख’ – दोनों प्रधान हैं – विग्रह में ‘और’ आया है – यह इतरेतर द्वंद्व समास है।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘शीत’ + ‘उष्ण’ – दोनों मिलकर एक मौसम/अवस्था बनाते हैं – यह समाहार द्वंद्व समास है।
अभ्यास प्रश्न (5)
उत्तर देखें
उत्तर देखें
उत्तर देखें
उत्तर देखें
उत्तर देखें
- वर्कशीट मास्टर हब – इंटरैक्टिव अभ्यास पत्रिकाएँ उत्तर कुंजी सहित – हर विषय के लिए।
- हिंदी व्याकरण हब – सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण – परिभाषा, उदाहरण, अभ्यास, सब कुछ एक स्थान पर।
- English Grammar Hub – Complete English grammar topics with practice worksheets for every concept.
- गणित हब – गणित की चरणबद्ध शिक्षा – अभ्यास और समाधान हर कक्षा के लिए।
- GPN नॉलेज हब – पढ़ने की तकनीक, परीक्षा रणनीतियाँ और सफलता के लिए मार्गदर्शन।
द्वंद्व समास की समझ क्यों ज़रूरी है?
द्वंद्व समास हिंदी भाषा को संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावी बनाता है – 'राम और लक्ष्मण' की जगह 'राम-लक्ष्मण' कहना अधिक आसान है। यह समास समान महत्व वाले दो शब्दों को एक साथ लाता है – 'माता-पिता', 'सुख-दुख', 'दिन-रात' – इन सभी में दोनों का महत्व बराबर है। इस पोस्ट में हमने समास परिभाषा और कर्मधारय समास के साथ द्वंद्व समास के दोनों प्रकारों – इतरेतर और समाहार – को उनके नियमों, उदाहरणों, और पहचान के साथ विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी द्वंद्व समास युक्त शब्द का विग्रह कर सकते हैं और उसका सही प्रकार बता सकते हैं।
अभ्यास से ही द्वंद्व समास की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक भाषा में द्वंद्व समास युक्त शब्दों पर ध्यान दें – 'राम-लक्ष्मण', 'माता-पिता', 'सुख-दुख', 'पाणिपाद', 'शीतोष्ण' – इनका विग्रह करें और देखें कि विग्रह में 'और' आ रहा है या 'समूह' का भाव है। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।
📝 द्वंद्व समास अभ्यास – कक्षा 8-9
इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 30 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक शब्द का विग्रह करना है और बताना है कि वह द्वंद्व समास है या नहीं। द्वंद्व समास वाले शब्दों में प्रकार (इतरेतर या समाहार) पहचानना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।
📖 वर्कशीट खोलें »उत्तर कुंजी सहित • CBSE एवं UP Board पाठ्यक्रम के अनुरूप