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अनौपचारिक पत्र व अभ्यास प्रश्न (Informal Letter Worksheet) | Hindi Grammar | GPN

✉️ अनौपचारिक पत्र लेखन ● कक्षा 6-7 ● CBSE पैटर्न
नीचे दिए गए सभी 20 प्रश्न NCERT एवं CBSE बोर्ड कक्षा 6-7 के पाठ्यक्रम पर आधारित हैं। प्रत्येक पत्र का उत्तर सही प्रारूप — स्थान, दिनांक, संबोधन, विषयवस्तु, समापन एवं हस्ताक्षर — सहित दिया गया है। पहले स्वयं लिखें, फिर उत्तर जाँचें।


📮 अनौपचारिक पत्र लेखन — 20 प्रश्न

1. अपने मित्र/सहेली को जन्मदिन की पार्टी में आमंत्रित करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

42, आनंद नगर
आगरा, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 15 नवंबर, 2024

प्रिय मित्र रोहन,

सप्रेम नमस्कार।

कल ही तुम्हारा पत्र मिला, जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारी सभी परीक्षाएँ अच्छी रहीं। आज मैं तुम्हें एक बहुत ही खुशखबरी देने के लिए पत्र लिख रहा हूँ।

इस आगामी 20 नवंबर को मेरा जन्मदिन है। अब मैं 12 वर्ष का हो जाऊँगा। इस अवसर पर मेरे घर पर एक छोटी-सी पार्टी का आयोजन किया गया है। पार्टी शाम 6 बजे से शुरू होगी। इसमें केक काटना, खाना और बहुत सारे खेल शामिल हैं।

तुम्हारा आना इस पार्टी को और भी खास बना देगा। कृपया अपने माता-जी से अनुमति लेकर अवश्य पधारें। हम सब मिलकर खूब मस्ती करेंगे। पिता जी ने नए खिलौने भी लाए हैं। माँ ने तुम्हारे लिए विशेष पकवान बनाने का वादा किया है।

आशा है तुम अवश्य आओगे। अपने आने की सूचना पहले दे देना ताकि मैं स्टेशन पर तुम्हें लेने आ सकूँ।

तुम्हारा प्रिय मित्र,
आर्यन शर्मा

पता: रोहन वर्मा, 15/7, शास्त्री नगर, दिल्ली-110052
2. ग्रीष्मावकाश में अपने नानी-नाना के घर बिताए समय के बारे में मित्र को पत्र लिखिए।
उत्तर:

विजय नगर, कानपुर
दिनांक: 10 जुलाई, 2024

प्रिय सखी अंजली,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हारा पत्र मिला और यह जानकर अच्छा लगा कि तुमने अपनी गर्मी की छुट्टियाँ बहुत आनंद से बिताईं। मैं भी तुम्हें अपनी छुट्टियों के बारे में बताना चाहती हूँ।

इस बार मैं अपने नानी-नाना के घर गाँव गई थी। यह मेरे लिए बहुत ही नया और रोमांचक अनुभव था। नानी का घर हरियाली के बीच में है। चारों ओर खेत हैं, जिनमें गेहूँ और गन्ने की फसल लहलहा रही थी।

वहाँ मैंने बहुत कुछ सीखा। नानी ने मुझे गाय का दूध दुहना सिखाया। नाना रोज सुबह मुझे खेतों की सैर कराते थे। वहाँ मैंने तरह-तरह के पक्षी देखे। मैंने वहाँ आम, लीची और जामुन खूब खाए।

सबसे अच्छा यह रहा कि वहाँ मेरी उम्र की एक सहेली राधा मिली। हम दोनों रोज साथ खेलते, घूमते। उसने मुझे कबड्डी खेलना सिखाया और मैंने उसे अंग्रेजी पढ़ना सिखाया।

नानी के घर से लौटते समय मेरा मन बहुत भारी हुआ। नानी ने मेरे लिए घी, आचार और अपने हाथों से बनी मुरब्बा दिया। अब जब भी मैं वह खाती हूँ, नानी-नाना की याद आती है।

तुम्हारी प्रिय सखी,
श्रुति

पता: अंजली सिंह, 5/112, मालवीय नगर, लखनऊ
3. बीमार मित्र को शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

सरस्वती विहार, जयपुर
दिनांक: 5 अगस्त, 2024

प्रिय मित्र विवेक,

सप्रेम नमस्कार।

मुझे अभी अभी रोहन के पास से तुम्हारे बीमार होने का समाचार मिला। यह सुनकर मुझे बहुत दुःख हुआ। मैं तुरंत तुमसे मिलने आना चाहता था, परंतु पिता जी शहर से बाहर हैं, इसलिए नहीं आ पा रहा हूँ।

तुम्हारे बुखार का कारण डेंगू बताया जा रहा है। कृपया डॉक्टर साहब की सलाह का पूरा-पूरा पालन करो। समय पर दवाई लो और पूरा आराम करो। मैंने सुना है कि डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं, इसलिए पपीते के पत्तों का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है।

तुम चिंता मत करो। हमारी कक्षा का सारा गृहकार्य मैं प्रतिदिन नोट करके तुम्हारे बड़े भाई को दे दूँगा। तुम बस जल्दी ठीक हो जाओ। हम सब तुम्हारी शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

अगले सप्ताह तक मैं अवश्य तुमसे मिलने आऊँगा। तब तक अपना ख्याल रखना।

तुम्हारा मित्र,
अभिषेक चौधरी

पता: विवेक शर्मा, 22/8, आदर्श नगर, जयपुर-302001
4. अपने छोटे भाई को परीक्षा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

गुरुकुल आवासीय विद्यालय
ऋषिकेश, उत्तराखंड
दिनांक: 28 फरवरी, 2024

प्रिय अनुज आदित्य,

स्नेहाशीष।

कल माँ का फोन आया, उन्होंने बताया कि तुम वार्षिक परीक्षा को लेकर बहुत घबरा रहे हो। यह सुनकर मुझे हँसी भी आई और चिंता भी हुई। तुम इतने समझदार होकर परीक्षा से डरते हो?

देखो आदित्य, परीक्षा कोई युद्ध नहीं है। यह तो साल भर तुमने जो पढ़ा है, उसे दिखाने का एक अवसर मात्र है। तुम नियमित पढ़ते हो, अपना कार्य समय पर करते हो, फिर डर किस बात का?

मैं तुम्हें कुछ सुझाव देना चाहता हूँ। सबसे पहले, अपना समय सारणी बनाओ। कठिन विषयों को सुबह के समय पढ़ो जब मस्तिष्क ताजा होता है। बीच-बीच में थोड़ा विश्राम भी लो। खूब पानी पियो और हल्का भोजन करो।

रटने की कोशिश मत करो, बल्कि चीजों को समझने की कोशिश करो। गणित के सूत्र और विज्ञान के सिद्धांत समझ में आ जाएँगे तो कभी नहीं भूलोगे। पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र हल करके देखो, इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात — पर्याप्त नींद लो। रात भर जागकर पढ़ने का कोई लाभ नहीं है। सुबह जल्दी उठो, थोड़ा व्यायाम करो, फिर पढ़ो।

मुझे पूरा विश्वास है कि तुम बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होगे। पिता जी को तुमसे बहुत आशा है। अपना ध्यान रखो। अगले महीने मैं घर आ रहा हूँ, तब तुम्हारे साथ खूब घूमेंगे।

तुम्हारा बड़ा भाई,
शिवम

पता: आदित्य सिंह, 112/5, प्रीतम नगर, इलाहाबाद
5. अपने दादा-दादी को उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

केन्द्रीय विद्यालय, छात्रावास
भोपाल, मध्य प्रदेश
दिनांक: 12 सितंबर, 2024

परम पूज्य दादाजी एवं दादीजी,

चरण स्पर्श।

आप दोनों का पत्र मिला। यह जानकर मन को बहुत सुकून मिला कि आप दोनों स्वस्थ हैं। मैं यहाँ छात्रावास में ठीक हूँ और अपना ध्यान रख रहा हूँ।

दादाजी, आपने लिखा है कि आपकी तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं रह रही है। कृपया अपना पूरा ध्यान रखें। आप जो दवाई ले रहे हैं, उसे समय पर लेते रहें। सुबह टहलने अवश्य जाएँ। डॉक्टर ने मना किया है तो चाय-कॉफी कम करें।

दादीजी, आप तो जानती ही हैं कि दादाजी बिना बताए मीठा बहुत खा लेते हैं। कृपया उन पर नजर रखें! मैंने सुना है कि इस बार दिवाली पर हम सब गाँव आ रहे हैं। मुझे बहुत प्रतीक्षा है उन दिनों की। आपके हाथ के पकौड़े, गुलाब जामुन, कचौड़ी — सबकी याद आ रही है।

मेरी परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी हैं। सभी विषयों में मैंने अच्छा किया है। गणित में तो मुझे पूरे अंक मिलने की उम्मीद है। अगले महीने मेरे परिणाम आएँगे, फिर मैं आपको विस्तार से बताऊँगा।

पिता जी से बात हुई? वह कह रहे थे कि आप दोनों को लेने दिल्ली जाएँगे। कृपया अपना पूरा ध्यान रखें। जल्द ही फिर पत्र लिखूँगा।

आपका दोहित्र,
आरव

पता: श्री महावीर प्रसाद गुप्ता, मोहल्ला-सर्राफा, झाँसी
6. अपनी बड़ी बहन को उसकी शादी की सालगिरह पर बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर:

महर्षि विद्या मंदिर
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 20 अक्टूबर, 2024

प्यारी दीदी,

स्नेहाशीष।

आशा है तुम और जीजाजी दोनों स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। आज अचानक याद आया कि 25 अक्टूबर को तुम्हारी शादी की पहली सालगिरह है। इस शुभ अवसर पर मैं तुम दोनों को हार्दिक बधाई देता हूँ।

ठीक एक साल पहले जब तुम विदा हुई थीं, उस दिन मुझे बहुत दुःख हुआ था। लगा था अब घर कितना सूना हो जाएगा। लेकिन अब देखती हूँ, तुम तो और भी करीब आ गई हो। हर सप्ताह तुम्हारा फोन आता है, तुम हमेशा मेरी पढ़ाई-लिखाई का ध्यान रखती हो।

जीजाजी बहुत अच्छे हैं। वह तुम्हारा पूरा ध्यान रखते हैं, यह देखकर मुझे बहुत खुशी होती है। उनसे कहना, दीदी को कभी कोई कमी महसूस न होने दें।

मैंने तुम दोनों के लिए एक छोटा-सा उपहार भेजा है। यह मेरे हाथ से बनाया हुआ एक ग्रीटिंग कार्ड है। आशा है तुम्हें पसंद आएगा। अगली बार जब तुम घर आओ, तो हम सब मिलकर यह सालगिरह मनाएँगे।

माँ-पिता जी को मेरा प्रणाम कहना। छोटू को बहुत प्यार।

तुम्हारी प्यारी बहन,
अंशिका

पता: श्रीमती प्रिया सिंह, 8/71, सेक्टर-15, नोएडा
7. अपने मित्र को विद्यालय में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी का वर्णन करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

सरस्वती शिशु मंदिर
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
दिनांक: 18 नवंबर, 2024

प्रिय मित्र निशांत,

सप्रेम नमस्कार।

आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। आज मैं तुम्हें अपने विद्यालय में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी के बारे में बताने के लिए पत्र लिख रहा हूँ। यह प्रदर्शनी 15 नवंबर को आयोजित की गई थी, जिसमें मैंने भी भाग लिया।

इस वर्ष हमारे विद्यालय की विज्ञान प्रदर्शनी बहुत भव्य रही। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों ने भाग लिया। लगभग 50 से अधिक मॉडल प्रदर्शित किए गए। विषय था — 'जलवायु परिवर्तन और हमारा भविष्य'।

मैंने अपने तीन मित्रों के साथ मिलकर 'वर्षा जल संचयन' का मॉडल बनाया था। हमने दिखाया कि कैसे घर की छत से वर्षा के पानी को सीधे भूमिगत टैंक में एकत्र किया जा सकता है। हमारे मॉडल को सभी ने बहुत सराहा।

सबसे अच्छा मॉडल कक्षा 11 के आयुष का था — उसने 'सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई प्रणाली' बनाई थी। उसे प्रथम पुरस्कार मिला। द्वितीय पुरस्कार कक्षा 9 की प्रियंका को मिला, जिसने 'ई-कचरे से खिलौने' बनाने का मॉडल प्रस्तुत किया।

प्रदर्शनी देखने मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. एसके शर्मा आए। उन्होंने हम सब का उत्साहवर्धन किया और विज्ञान के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं के बारे में बताया।

काश तुम भी यहाँ होते! अगले वर्ष तुम भी अपने विद्यालय की प्रदर्शनी में भाग लेना। यह अनुभव वाकई बहुत अद्भुत होता है।

तुम्हारा मित्र,
अभिनव

पता: निशांत तिवारी, 3/12, सिविल लाइंस, कानपुर
8. अपने माता-पिता को छात्रावास में अपनी दिनचर्या के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

जवाहर नवोदय विद्यालय
रीवा, मध्य प्रदेश
दिनांक: 25 जुलाई, 2024

आदरणीय पिता जी एवं माँ जी,

चरण स्पर्श।

सप्ताह में दो बार बात तो होती है, परंतु मन नहीं भरता। इसलिए आज विस्तार से पत्र लिख रहा हूँ। आशा है आप दोनों स्वस्थ होंगे और अपना ध्यान रख रहे होंगे।

आपने पूछा था कि यहाँ छात्रावास में मेरी दिनचर्या कैसी है। तो बता दूँ, सुबह 5:30 बजे उठ जाता हूँ। प्रार्थना सभा 6:15 बजे होती है, जिसमें सभी छात्रों का जाना अनिवार्य है। सभा के बाद 7 से 8 बजे तक स्वाध्याय का समय होता है।

नाश्ते के बाद 9 बजे कक्षाएँ शुरू होती हैं। दोपहर 1 बजे भोजनावकाश होता है। यहाँ का भोजन घर जैसा तो नहीं, परंतु स्वच्छ और पौष्टिक है। मैं जूठन भी नहीं करता, जैसा माँ जी ने सिखाया था।

शाम 4 से 6 बजे तक खेलकूद का समय होता है। मैं क्रिकेट टीम का सदस्य हूँ। पिछले सप्ताह हमारे विद्यालय और आर्मी पब्लिक स्कूल के बीच मैच हुआ, जिसमें हम विजयी रहे। मैंने 3 विकेट लिए थे।

रात 8 से 10 बजे तक फिर पढ़ाई होती है। 10:30 बजे सभी को सोना अनिवार्य है। वार्डन सर बहुत सख्त हैं, परंतु बड़े दयालु भी हैं। पिछले सप्ताह मुझे तेज बुखार हुआ था, उन्होंने स्वयं दवा दिलवाई और रात भर मेरे कमरे में आकर पूछते रहे।

पिता जी, यहाँ की पढ़ाई का स्तर बहुत अच्छा है। गणित और विज्ञान के शिक्षक बहुत अनुभवी हैं। मैंने पिछले मासिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। आप दोनों को गर्व होगा यह जानकर।

छोटू को बहुत प्यार। उसे मेरा संदेश देना कि वह मेरी साइकिल का ध्यान रखे। जल्द ही फिर पत्र लिखूँगा।

आपका सुपुत्र,
अर्पित

पता: श्री रमेश चंद्र शर्मा, 44/7, आवास विकास कॉलोनी, बरेली
9. अपने चचेरे भाई को उसके जन्मदिन पर पुस्तक भेंट भेजने की सूचना देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

112, शक्ति नगर
जबलपुर, मध्य प्रदेश
दिनांक: 8 दिसंबर, 2024

प्यारे चचेरे भाई विकास,

ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद।

कल ही चाची जी का फोन आया, उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर को तुम्हारा जन्मदिन है। अब तो तुम 13 वर्ष के हो जाओगे। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई, लेकिन थोड़ा यह भी अचरज हुआ कि तुम इतने बड़े कैसे हो गए! अभी कल की बात लगती है जब हम दोनों नानी के घर में तकिए की लड़ाई लड़ा करते थे।

मैं तुम्हारे लिए एक विशेष उपहार भेज रहा हूँ — पंचतंत्र की कहानियों की एक सचित्र पुस्तक। मुझे पता है तुम्हें कहानियाँ पढ़ने का बहुत शौक है। यह पुस्तक बहुत रोचक है, इसमें जानवरों की कहानियों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाए गए हैं। मैंने इसे स्वयं पढ़ा है, इसलिए तुम्हें भेज रहा हूँ।

आशा है तुम यह पुस्तक पढ़ोगे और अपने मित्रों को भी पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करोगे। पढ़ने की आदत जीवन की सबसे अच्छी आदतों में से एक है। पिता जी कहते हैं — 'पुस्तकें सच्ची मित्र होती हैं।'

तुम अपना ध्यान रखना, मन लगाकर पढ़ाई करना। अगले महीने शायद मैं गाँव आ रहा हूँ, तब हम दोनों खूब खेलेंगे। चाचा-चाची जी को मेरा प्रणाम कहना।

तुम्हारा बड़ा भाई,
आयुष

पता: विकास शुक्ला, ग्राम + पोस्ट — बम्हौरी, जिला — सतना
10. अपने मित्र को पुस्तकालय की सदस्यता लेने की सलाह देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
उदयपुर, राजस्थान
दिनांक: 5 सितंबर, 2024

प्रिय मित्र करण,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हारा पत्र मिला। तुमने लिखा है कि तुम्हें पढ़ने का बहुत शौक है, परंतु नई पुस्तकें खरीदना महँगा हो जाता है। मैं तुम्हें इस समस्या का बहुत अच्छा समाधान बताने जा रहा हूँ।

तुमने कभी पुस्तकालय की सदस्यता लेने के बारे में सोचा है? मैं स्वयं पिछले दो वर्षों से नगर निगम पुस्तकालय का सदस्य हूँ। यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा निर्णय रहा है।

यहाँ मात्र 100 रुपए की वार्षिक सदस्यता पर हजारों पुस्तकें उपलब्ध हैं। कहानियाँ, उपन्यास, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, जीवनी — हर विषय की पुस्तकें हैं। आप एक बार में तीन पुस्तकें 15 दिनों के लिए घर ले जा सकते हैं।

पुस्तकालय में एक पृथक बाल-अनुभाग भी है, जहाँ बच्चों के लिए विशेष रूप से चित्रों वाली रोचक पुस्तकें हैं। यहाँ शांत वातावरण में बैठकर पढ़ने की भी सुविधा है। मैं अक्सर शाम को वहाँ जाता हूँ और दो-तीन घंटे पढ़ता हूँ।

इससे न केवल मेरा ज्ञान बढ़ा है, बल्कि मेरी हिंदी और अंग्रेजी पढ़ने की गति भी तेज हुई है। मैंने अब तक सैकड़ों पुस्तकें पढ़ ली हैं। मेरे प्रिय लेखक हैं — प्रेमचंद, धर्मवीर भारती, और एनिड ब्लाइटन।

तुम भी अपने शहर के किसी पुस्तकालय की सदस्यता अवश्य लो। यदि तुम चाहो तो मैं अपने पुस्तकालय के बारे में और जानकारी भेज सकता हूँ। आशा है तुम मेरी सलाह मानोगे।

तुम्हारा मित्र,
साहिल

पता: करण राठौड़, 7/45, सिंधी कॉलोनी, अजमेर
11. अपने छोटे भाई-बहन को सड़क सुरक्षा के नियम समझाते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

साईं निवास, 3/112
नासिक, महाराष्ट्र
दिनांक: 15 जनवरी, 2024

प्यारी छोटी बहन अंजलि,

ढेर सारा प्यार।

आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगी। माँ ने बताया कि अब तुम रोज साइकिल से स्कूल जाती हो। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई कि तुम इतनी आत्मनिर्भर बन रही हो। लेकिन साथ ही थोड़ी चिंता भी होती है।

इसलिए आज मैं तुम्हें कुछ सड़क सुरक्षा के नियम याद दिलाना चाहता हूँ। ये नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं और इनका पालन करना तुम्हारी सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम — सड़क पार करते समय हमेशा जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करो। यदि ट्रैफिक लाइट हो तो हरी बत्ती का इंतजार करो। दोनों ओर ध्यान से देखो, फिर ही सड़क पार करो।

दूसरा नियम — साइकिल चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनो। चाहे कितनी भी जल्दी क्यों न हो, हेलमेट मत भूलना। यह तुम्हारे सिर की सुरक्षा करता है।

तीसरा नियम — साइकिल के आगे और पीछे रिफ्लेक्टर अवश्य लगवाओ। रात में या धुंध के मौसम में यह बहुत काम आते हैं। साइकिल की घंटी भी ठीक रखो।

चौथा नियम — कभी भी तेज गति से साइकिल मत चलाओ। अपनी गति पर नियंत्रण रखो। अचानक मोड़ मत लो। पीछे देखे बिना मत मुड़ो।

पाँचवाँ नियम — अंजलि, कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के वाहन में नहीं बैठना। चाहे वह कितना भी मीठा क्यों न बोले। यह बहुत महत्वपूर्ण नियम है।

मुझे पता है तुम बहुत समझदार हो और सभी नियमों का पालन करोगी। पिता जी से कहना, वह तुम्हारे साथ एक बार सड़क सुरक्षा का अभ्यास कर लें।

तुम्हारा बड़ा भाई,
मोहित

पता: कु. अंजलि शर्मा, 45/9, शास्त्री नगर, जयपुर
12. अपने मित्र को धन्यवाद पत्र लिखिए जिसने बीमारी के समय तुम्हारी मदद की।
उत्तर:

222/5, आर्य नगर
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 28 अगस्त, 2024

प्रिय मित्र सूरज,

सप्रेम नमस्कार।

मैं पूरी तरह स्वस्थ हो गया हूँ और आज से विद्यालय भी जाने लगा हूँ। डॉक्टर ने कहा है कि अब पूरी तरह खतरा टल गया है। इस अवसर पर मैं तुम्हें विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूँ।

पिछले सप्ताह जब मुझे अचानक तेज बुखार आया और माता-पिता घर पर नहीं थे, तुमने ही मुझे अस्पताल पहुँचाया। तुम्हारी त्वरित सूझबूझ के कारण ही मेरा समय पर इलाज हो सका। डॉक्टर ने कहा कि यदि एक घंटा और देर हो जाती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

तुमने तीन दिन तक प्रतिदिन अस्पताल आकर मेरी कॉपियाँ दीं, मेरे लिए दवाई लाई, और मेरा हौसला बढ़ाया। तुम्हारे कारण ही मैं जल्दी ठीक हो सका। सच्चा मित्र वही होता है जो मुसीबत के समय काम आए। तुमने यह सिद्ध कर दिखाया।

मेरे माता-पिता भी तुम्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं। पिता जी कह रहे हैं कि इस शनिवार को तुम हमारे घर भोजन पर अवश्य आओ। माँ ने तुम्हारे लिए विशेष पकवान बनाने की योजना बनाई है।

आशा है हमारी यह मित्रता जीवनभर बनी रहेगी।

तुम्हारा आभारी मित्र,
शिवम

पता: सूरज कुमार, 8/112, गांधी नगर, अलीगढ़
13. अपने मित्र को अपने प्रिय खिलाड़ी के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

केन्द्रीय विद्यालय, छात्रावास
देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक: 10 अक्टूबर, 2024

प्रिय मित्र यश,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हारा पत्र मिला। तुमने पूछा है कि मेरा प्रिय खिलाड़ी कौन है। मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि मेरे प्रिय खिलाड़ी हैं — नीरज चोपड़ा।

नीरज चोपड़ा भारत के सबसे युवा और सफल एथलीटों में से एक हैं। वह भाला फेंक खेलते हैं। तुम्हें याद होगा, पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। यह ओलंपिक में भारत का एथलेटिक्स में पहला स्वर्ण पदक था।

नीरज चोपड़ा हरियाणा के एक छोटे से गाँव पानीपत से आते हैं। उनके पिता किसान थे। बचपन में वह मोटे थे, इसलिए परिवार ने उन्हें वजन कम करने के लिए खेलने भेजा। धीरे-धीरे भाला फेंक में उनकी रुचि बढ़ी। आज वह विश्व के नंबर एक भाला फेंक खिलाड़ी हैं।

मैं नीरज चोपड़ा को इसलिए पसंद करता हूँ क्योंकि उन्होंने साबित किया है कि छोटे गाँव का लड़का भी बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा कर सकता है। उनकी कहानी हमें सिखाती है — मेहनत, लगन और समर्पण से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

नीरज चोपड़ा बहुत विनम्र और सरल स्वभाव के हैं। ओलंपिक जीतने के बाद भी वह जमीन से जुड़े रहे। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया।

मैं भी नीरज चोपड़ा की तरह अपने देश का नाम रोशन करना चाहता हूँ। हो सकता है कि मैं एथलीट न बन पाऊँ, लेकिन अपने क्षेत्र में जरूर कुछ बड़ा करना चाहता हूँ।

तुम्हारा प्रिय मित्र कौन है? मुझे भी लिखो।

तुम्हारा मित्र,
आर्यन

पता: यश गर्ग, 12/7, मॉडल टाउन, लुधियाना
14. अपने मित्र को त्योहार (दीपावली/होली) की शुभकामनाएँ देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

5/115, सेक्टर-21
चंडीगढ़
दिनांक: 12 नवंबर, 2024

प्रिय मित्र अभिनव,

सप्रेम नमस्कार।

दीपावली का पवित्र पर्व निकट आ रहा है। इस शुभ अवसर पर मैं तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।

दीपावली रोशनी का त्योहार है। यह हमें सिखाता है कि सत्य की हमेशा जीत होती है, असत्य पराजित होता है। अंधकार पर प्रकाश की, बुराई पर अच्छाई की विजय होती है।

इस बार दीपावली पर मैं तुम्हें एक विशेष बात बताना चाहता हूँ। हमने इस बार घर पर 'हरित दीपावली' मनाने का निर्णय लिया है। इसका मतलब है — पटाखों से दूरी, और दीयों से नजदीकी।

पिता जी ने समझाया कि पटाखों से केवल प्रदूषण फैलता है, ध्वनि प्रदूषण होता है, गरीब लोग परेशान होते हैं, और आवारा पशु त्रस्त हो जाते हैं। इसलिए इस बार हम केवल मिट्टी के दीये जलाएँगे, रंगोली बनाएँगे, मिठाइयाँ बाँटेंगे और परिवार के साथ समय बिताएँगे।

मैं तुम्हें भी सुझाव देना चाहता हूँ — इस दीपावली पर पटाखों से दूरी बनाओ। तुम भी 'हरित दीपावली' मनाओ। यह पर्यावरण के लिए अच्छा है, और स्वास्थ्य के लिए भी।

आशा है तुम मेरी बात समझोगे। तुम्हारे माता-पिता को मेरा प्रणाम।

तुम्हारा मित्र,
देवांश

पता: अभिनव शर्मा, 22/8, सेक्टर-17, पंचकूला
15. अपनी छोटी बहन को परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर:

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज
छात्रावास, कोटा
दिनांक: 20 मार्च, 2024

प्यारी छोटी बहन अंशिका,

ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद।

आज सुबह ही पिता जी का फोन आया। उन्होंने बताया कि तुमने पाँचवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने तुरंत अपने सभी मित्रों को यह गर्व की बात बताई।

मुझे याद है जब तुम पहली कक्षा में थीं, तुम्हें गिनती लिखने में बहुत परेशानी होती थी। मैं तुम्हें रोज समझाता था, और तुम बहुत मेहनत करती थीं। आज वही तुमने इतना बड़ा मुकाम हासिल किया है। यह तुम्हारी मेहनत और लगन का ही परिणाम है।

दीदी, तुमने साबित कर दिया कि लगन और परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। तुम मेरे लिए प्रेरणा हो। मैं भी तुमसे प्रेरणा लेकर अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई में और मेहनत करूँगा।

मैंने तुम्हारे लिए एक विशेष उपहार भेजा है — एक डायरी और कलम का सेट। आशा है तुम्हें पसंद आएगा। अगले सप्ताह मैं घर आ रहा हूँ, तब तुम्हें अपने हाथों से यह उपहार दूँगा और तुम्हारी पसंद की चॉकलेट भी लाऊँगा।

इसी तरह मेहनत करती रहो। हम सबको तुम पर गर्व है।

तुम्हारा बड़ा भाई,
अर्जुन

पता: कु. अंशिका सिंह, 112/5, आवास विकास कॉलोनी, बरेली
16. अपने मित्र को अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव का वर्णन करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

सरस्वती विद्या मंदिर
मेरठ, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 5 दिसंबर, 2024

प्रिय मित्र विवेक,

सप्रेम नमस्कार।

आशा है तुम स्वस्थ होगे। आज मैं तुम्हें अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव के बारे में बताने जा रहा हूँ, जो कल बड़े धूमधाम से मनाया गया।

वार्षिकोत्सव हमारे विद्यालय का सबसे बड़ा त्योहार है। इस बार यह 4 दिसंबर को आयोजित किया गया। कार्यक्रम शाम 5 बजे शुरू हुआ। पूरा विद्यालय रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. आरके शर्मा जी आए। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना से हुई। फिर प्रधानाचार्य जी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और विद्यालय की उपलब्धियों के बारे में बताया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला बहुत ही मनमोहक रही। कक्षा 1 के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने 'सर्व धर्म समभाव' पर नृत्य प्रस्तुत किया, देखते ही बनता था। कक्षा 6 के छात्रों ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' पर लघु नाटिका प्रस्तुत की। इसमें मैंने भी अभिनय किया था।

सबसे अधिक तालियाँ कक्षा 9 की प्रियंका को मिलीं, जिसने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में मेधावी छात्रों को पुरस्कार वितरित किए गए। मुझे गणित में प्रथम आने पर प्रशस्ति पत्र और पदक मिला।

रात 9 बजे कार्यक्रम समाप्त हुआ। सभी को प्रसाद वितरित किया गया। मन बहुत प्रसन्न है। काश तुम भी यहाँ होते! अगले वर्ष तुम भी अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव में अवश्य भाग लेना।

तुम्हारा मित्र,
रोहित

पता: विवेक तिवारी, 7/45, शास्त्री नगर, मेरठ
17. अपने मित्र को गर्मी की छुट्टियों में पहाड़ों की यात्रा का वर्णन करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

112, शक्ति विहार
रोहतक, हरियाणा
दिनांक: 15 जून, 2024

प्रिय मित्र अनुज,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हारा पत्र मिला। तुमने पूछा था कि मैंने गर्मी की छुट्टियाँ कैसे बिताईं। मैं तुम्हें अपनी अद्भुत यात्रा के बारे में बताना चाहता हूँ।

इस बार हम सब मनाली गए थे। यह हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत पहाड़ी इलाका है। हम चंडीगढ़ से बस द्वारा गए। रास्ते में पहाड़ों की सुंदरता देखते ही बनती थी। चारों ओर हरियाली, ऊँचे-ऊँचे देवदार के पेड़, और बहती नदियाँ — मन मोह लेने वाला दृश्य था।

हमने सोलंग वैली में स्नो प्वाइंट देखा। मैंने पहली बार बर्फ छुआ। बहुत ठंडी थी, पर बहुत मज़ा आया। हमने वहाँ आइस स्केटिंग भी की। मैं गिरता-पड़ता सीख ही गया।

हम रोहतांग दर्रे तक गए। यह समुद्र तल से लगभग 13,000 फीट की ऊँचाई पर है। वहाँ साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था, लेकिन नज़ारा अविस्मरणीय था। चारों ओर बर्फ ही बर्फ, मानो कोई सफेद चादर बिछी हो।

वहाँ हमने मनाली के प्रसिद्ध हिडिम्बा मंदिर के दर्शन किए। यह लकड़ी से बना 500 वर्ष पुराना मंदिर है। हमने वसिष्ठ गाँव भी देखा, जहाँ गर्म पानी के कुंड हैं।

सबसे अच्छा लगा वहाँ का शांत वातावरण। भीड़-भाड़ नहीं, शोर-शराबा नहीं। बस ठंडी हवा और प्रकृति की सुंदरता। मन करता था वहीं रुक जाएँ।

मैं तुम्हारे लिए वहाँ से एक चाबी का गुच्छा लाया हूँ। अगले सप्ताह जब तुम्हारे घर आऊँगा तो दूँगा। आशा है अगली बार तुम भी हमारे साथ चलोगे।

तुम्हारा मित्र,
सचिन

पता: अनुज गुप्ता, 5/21, सेक्टर-7, करनाल
18. अपने मित्र को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

42, आनंद विहार
वाराणसी, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 5 जुलाई, 2024

प्रिय मित्र अभय,

सप्रेम नमस्कार।

आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। आज मैं तुमसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर बात करना चाहता हूँ — पर्यावरण संरक्षण।

पिछले सप्ताह हमारे विद्यालय में 'विश्व पर्यावरण दिवस' मनाया गया। इस अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। वक्ता ने बताया कि हमारी पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियाँ सूख रही हैं, और वायु प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि साँस लेना भी मुश्किल हो रहा है।

यह सुनकर मुझे बहुत चिंता हुई। हमने सोचा — क्या हम कुछ कर सकते हैं? तो हमने कुछ छोटे-छोटे प्रयास शुरू किए।

पहला — हमने अपने घर पर प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया। अब हम कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करते हैं।

दूसरा — हमने घर की छत पर किचन गार्डन बनाया है। वहाँ हमने टमाटर, मिर्च, पुदीना और धनिया लगाया है। अब हम ताजी सब्जियाँ घर पर ही उगाते हैं।

तीसरा — हम पानी की एक-एक बूँद बचाते हैं। ब्रश करते समय नल बंद रखते हैं, नहाने के पानी से पौधों को सींचते हैं।

चौथा — मैंने अपने जन्मदिन पर पटाखे नहीं जलाए, बल्कि स्कूल के बगीचे में 10 पौधे लगाए।

अभय, मैं तुम्हें भी प्रोत्साहित करना चाहता हूँ। कृपया तुम भी पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ छोटे-छोटे प्रयास शुरू करो। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो निश्चित रूप से बदलाव ला सकते हैं।

तुम्हारा मित्र,
आदित्य

पता: अभय शुक्ला, 8/112, महमूरगंज, वाराणसी
19. अपने मित्र को अपने प्रिय शिक्षक के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

डीएवी पब्लिक स्कूल
पटना, बिहार
दिनांक: 15 सितंबर, 2024

प्रिय मित्र सौरभ,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हारा पत्र मिला। तुमने पूछा था कि मेरे प्रिय शिक्षक कौन हैं और क्यों। आज मैं तुम्हें उनके बारे में बताने जा रहा हूँ।

मेरे प्रिय शिक्षक हैं — हमारे हिंदी के श्री शर्मा जी। वह हमें कक्षा 7 में पढ़ाते हैं। शर्मा सर बहुत ही सरल स्वभाव के हैं। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है।

शर्मा सर हमें केवल पाठ्यपुस्तक ही नहीं पढ़ाते, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण सबक भी सिखाते हैं। वह कहते हैं — 'शिक्षा का अर्थ केवल परीक्षा पास करना नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना है।'

उनकी सबसे अच्छी बात यह है कि वह कभी किसी छात्र पर चिल्लाते नहीं। यदि कोई छात्र गलती करता है, तो प्यार से समझाते हैं। वह कहते हैं — 'गलती करना मानव का स्वभाव है, लेकिन उस गलती से सीखना समझदारी है।'

पिछले महीने जब मैं बीमार था और एक सप्ताह स्कूल नहीं आ सका, तो शर्मा सर स्वयं मेरे घर आए और सारा पाठ समझा गए। मेरे माता-पिता बहुत प्रभावित हुए।

शर्मा सर हमें कहानियाँ सुनाते हैं — प्रेमचंद, तेनालीराम, अकबर-बीरबल। उनकी कहानियाँ इतनी रोचक होती हैं कि पूरी कक्षा मंत्रमुग्ध हो जाती है। उन्होंने ही मुझमें पढ़ने और लिखने की आदत विकसित की।

मैं भी बड़ा होकर शर्मा सर की तरह एक अच्छा शिक्षक बनना चाहता हूँ। एक शिक्षक ही समाज का निर्माण करता है। गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है — 'गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः...'

तुम भी अपने प्रिय शिक्षक के बारे में लिखो।

तुम्हारा मित्र,
कुणाल

पता: सौरभ कुमार, 12/7, राजेंद्र नगर, पटना
20. अपने मित्र को अपने नए पालतू जानवर के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर:

7/112, सेक्टर-9
नोएडा, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 20 फरवरी, 2024

प्रिय मित्र अर्पित,

सप्रेम नमस्कार।

तुम्हें याद है, पिछले महीने मैंने बताया था कि पिता जी मेरे लिए एक पालतू जानवर लाने वाले हैं। तो आज मैं तुम्हें उसकी पूरी कहानी बताता हूँ।

पिछले रविवार को पिता जी मुझे पशु बाजार ले गए। वहाँ बहुत सारे जानवर थे — कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, तोता, मछली। मैं बहुत देर तक सोचता रहा, समझ नहीं आ रहा था कि किसे चुनूँ।

तभी मेरी नजर एक छोटे से सफेद पिल्ले पर पड़ी। वह बिल्कुल छोटा-सा, रुई के गोले जैसा। उसकी आँखें बहुत प्यारी थीं। जैसे ही मैंने उसे देखा, वह दौड़कर मेरे पास आया और मेरे पैरों से लिपट गया। मुझे लगा — यही है!

हमने उसे घर ले लिया। अब वह हमारे परिवार का सदस्य है। हमने उसका नाम 'टॉमी' रखा है। टॉमी अभी तीन महीने का है। उसका रंग बर्फ जैसा सफेद है, और उसके कान लटकते हुए हैं।

टॉमी बहुत ही समझदार है। उसे अपने नाम की पुकार सुनाई देती है। वह सुबह मुझे जगाने आता है। मैं स्कूल जाता हूँ तो दरवाजे तक छोड़ने आता है, और लौटने पर सबसे पहले दौड़कर मिलता है।

माँ पहले कहती थीं — घर गंदा होगा, परेशानी होगी। लेकिन अब वह भी टॉमी को बहुत प्यार करती हैं। रोज उसे दूध देती हैं, नहलाती हैं। पिता जी उसे शाम को पार्क ले जाते हैं।

टॉमी ने हमें सिखाया कि प्यार बिना शर्त होता है। वह किसी बात की शिकायत नहीं करता, बस अपना प्यार लुटाता है।

अर्पित, तुम एक बार टॉमी से मिलने जरूर आओ। मुझे पता है तुम्हें वह बहुत पसंद आएगा।

तुम्हारा मित्र,
श्रेयस

पता: अर्पित मिश्रा, 5/115, सेक्टर-15, गाजियाबाद


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