📘 पाठ – तताँरा-वामीरो कथा | कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श) | GPN
📚 कक्षा: 10 | 📖 पुस्तक: स्पर्श भाग 2 | ✍️ लेखक: लोककथा | 📝 प्रकार: प्रेम कथा | ⭐⭐⭐ बहुत महत्वपूर्ण
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
- 7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय
यह पाठ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की लोककथा पर आधारित है। यह कथा निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है। इस कथा के माध्यम से निकोबार द्वीप समूह की संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक व्यवस्था को दर्शाया गया है।
📖 पाठ की पृष्ठभूमि
'तताँरा-वामीरो कथा' अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निकोबारी आदिवासियों की एक प्रसिद्ध लोककथा है। यह कथा दो युवक-युवती तताँरा और वामीरो के अपार प्रेम और बलिदान की कहानी है। इस कथा के माध्यम से निकोबार द्वीप समूह की सामाजिक व्यवस्था, जहाँ गाँव के मुखिया का निर्णय सर्वोपरि होता था, को दर्शाया गया है। यह कथा प्रेम, बलिदान और सामाजिक नियमों के पालन का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
🎯 पाठ का महत्व
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। तताँरा और वामीरो के चरित्र चित्रण, उनके प्रेम का आदर्श रूप, बलिदान की भावना और निकोबारी समाज की व्यवस्था पर प्रश्न पूछे जाते हैं। यह पाठ प्रेम और कर्तव्य के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है।
2. सरल सारांश
यह कथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निकोबारी आदिवासियों की लोककथा है। तताँरा नाम का एक सुंदर, बलशाली और दयालु युवक था। वह अपनी मूर्तियाँ बनाने की कला के लिए प्रसिद्ध था। एक दिन वह जंगल में लकड़ी ढूँढ़ने गया और वहाँ उसकी मुलाकात वामीरो नाम की सुंदर युवती से हुई। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। वामीरो पास के ही गाँव की रहने वाली थी। उसके गाँव का मुखिया उससे विवाह करना चाहता था। जब मुखिया को तताँरा और वामीरो के प्रेम का पता चला तो वह क्रोधित हो गया। उसने दोनों को अलग करने का प्रयास किया। एक दिन तताँरा और मुखिया में झड़प हो गई। तताँरा ने मुखिया को मार डाला। ग्रामीणों ने तताँरा को पकड़ लिया और उसे मृत्युदंड दे दिया। वामीरो इस दुःख को सहन न कर सकी और वह भी मर गई। कहा जाता है कि तताँरा की तलवार के आकार का एक पेड़ वहाँ उग आया, जिसे 'तताँरा का पेड़' कहा जाता है। यह पेड़ उनके अमर प्रेम का प्रतीक है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 प्रमुख बिंदु
- तताँरा का परिचय: तताँरा निकोबार द्वीप का एक सुंदर, बलशाली और कलाप्रेमी युवक था। वह लकड़ी पर सुंदर मूर्तियाँ बनाता था।
- वामीरो से मुलाकात: एक दिन जंगल में लकड़ी ढूँढ़ते समय तताँरा की मुलाकात वामीरो से हुई। वामीरो बहुत सुंदर और सुशील थी।
- प्रेम का विकास: दोनों एक-दूसरे को देखते ही प्रेम करने लगे। वे प्रतिदिन जंगल में मिलने लगे।
- मुखिया का विरोध: वामीरो के गाँव का मुखिया उससे विवाह करना चाहता था। उसे तताँरा-वामीरो के प्रेम का पता चल गया।
- संघर्ष और बलिदान: मुखिया ने तताँरा को मारने की योजना बनाई। तताँरा ने आत्मरक्षा में मुखिया को मार डाला। ग्रामीणों ने तताँरा को मृत्युदंड दे दिया।
- अमर प्रेम: वामीरो तताँरा के वियोग में मर गई। उस स्थान पर तलवार के आकार का एक पेड़ उग आया, जिसे 'तताँरा का पेड़' कहा जाता है।
📌 मूलभाव / Theme
इस कथा का मूल भाव प्रेम का आदर्श रूप और उसके लिए किया गया बलिदान है। यह बताती है कि सच्चा प्रेम मृत्यु के बाद भी अमर रहता है। साथ ही, यह कथा सामाजिक नियमों और व्यवस्था के महत्व को भी दर्शाती है, जहाँ गाँव का मुखिया सर्वोपरि होता है।
📌 सामाजिक संदेश
यह कथा यह संदेश देती है कि प्रेम में बलिदान आवश्यक है। यह बताती है कि समाज में नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन अन्याय का विरोध भी करना चाहिए। यह कथा प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंध को भी दर्शाती है, जहाँ तताँरा का पेड़ उनके प्रेम का प्रतीक बन जाता है।
📌 सीख
- सच्चा प्रेम अमर होता है और युगों-युगों तक याद किया जाता है।
- बलिदान प्रेम की सबसे बड़ी परीक्षा है।
- समाज के नियमों का पालन करना चाहिए, लेकिन अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
- प्रकृति और मनुष्य का गहरा संबंध होता है।
4. पात्र चित्रण
🧑 तताँरा
स्वभाव: सुंदर, बलशाली, दयालु, कलाप्रेमी, संवेदनशील, प्रेम में समर्पित।
भूमिका: कथा का नायक जो वामीरो से असीम प्रेम करता है और अंत में बलिदान हो जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) कलाप्रेमी: वह लकड़ी पर सुंदर मूर्तियाँ बनाता था। (2) साहसी: उसने मुखिया का सामना किया। (3) समर्पित प्रेमी: वामीरो के लिए उसने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। (4) लोकप्रिय: वह अपने गाँव में सभी का प्रिय था।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: तताँरा के चरित्र की विशेषताएँ, उसका प्रेम और बलिदान। [2022]
🧑 वामीरो
स्वभाव: सुंदर, सुशील, संवेदनशील, प्रेम में डूबी हुई, साहसी।
भूमिका: कथा की नायिका जो तताँरा से प्रेम करती है और उसके वियोग में प्राण त्याग देती है।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) सौंदर्य: वह अत्यंत सुंदर थी। (2) समर्पण: उसने तताँरा के प्रति अपने प्रेम में पूर्ण समर्पण दिखाया। (3) साहस: उसने मुखिया के दबाव के बावजूद तताँरा से प्रेम किया। (4) बलिदान: तताँरा के वियोग में उसने अपने प्राण त्याग दिए।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: वामीरो के चरित्र की विशेषताएँ, तताँरा के प्रति उसका प्रेम। [2019]
🧑 मुखिया
स्वभाव: स्वार्थी, क्रूर, सत्तालोलुप, अन्यायी।
भूमिका: वामीरो के गाँव का मुखिया जो उससे विवाह करना चाहता था और तताँरा का शत्रु बन गया।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) स्वार्थी: वह केवल अपने स्वार्थ के बारे में सोचता था। (2) अन्यायी: उसने अपने पद का दुरुपयोग किया। (3) क्रूर: उसने तताँरा को मारने की योजना बनाई। (4) सत्तालोलुप: वह अपनी सत्ता को बनाए रखना चाहता था।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: मुखिया के चरित्र के नकारात्मक पहलू।
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| लोककथा | लोक में प्रचलित कथा | तताँरा-वामीरो कथा एक प्रसिद्ध लोककथा है। |
| आदिवासी | मूल निवासी | निकोबार द्वीप में आदिवासी रहते हैं। |
| मूर्ति | प्रतिमा | तताँरा लकड़ी की मूर्तियाँ बनाता था। |
| तलवार | एक हथियार | तताँरा के पास तलवार थी। |
| मुखिया | गाँव का प्रधान | मुखिया का आदेश सबको मानना होता था। |
| वियोग | बिछोह, अलगाव | तताँरा के वियोग में वामीरो मर गई। |
| बलिदान | कुर्बानी, त्याग | तताँरा ने प्रेम में अपना बलिदान दे दिया। |
| अमर | मरने वाला नहीं | उनका प्रेम अमर हो गया। |
| प्रतीक | चिह्न, निशानी | तताँरा का पेड़ उनके प्रेम का प्रतीक है। |
| संघर्ष | लड़ाई, द्वंद्व | तताँरा और मुखिया में संघर्ष हुआ। |
| द्वीप | चारों ओर पानी से घिरा भू-भाग | अंडमान-निकोबार द्वीप समूह है। |
| समर्पण | अपने को सौंप देना | वामीरो ने तताँरा के प्रति समर्पण दिखाया। |
| क्रोध | गुस्सा | मुखिया क्रोध से भर गया। |
| मृत्युदंड | मौत की सजा | तताँरा को मृत्युदंड दिया गया। |
| पीढ़ी | पुश्त, generation | यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
तताँरा कौन था? उसकी क्या विशेषताएँ थीं? [2020]
तताँरा निकोबार द्वीप का एक सुंदर, बलशाली और कलाप्रेमी युवक था। वह लकड़ी पर सुंदर मूर्तियाँ बनाने में निपुण था। वह दयालु और संवेदनशील भी था।
वामीरो कौन थी? उसकी क्या विशेषताएँ थीं?
वामीरो निकोबार द्वीप की एक सुंदर और सुशील युवती थी। वह तताँरा से असीम प्रेम करती थी और उसके वियोग में अपने प्राण त्याग दिए।
तताँरा और वामीरो की पहली मुलाकात कैसे हुई?
एक दिन तताँरा जंगल में मूर्तियाँ बनाने के लिए लकड़ी ढूँढ़ रहा था। वहाँ उसकी मुलाकात वामीरो से हुई। दोनों एक-दूसरे को देखते ही प्रेम करने लगे।
वामीरो के गाँव का मुखिया क्यों क्रोधित हो गया?
वामीरो के गाँव का मुखिया स्वयं वामीरो से विवाह करना चाहता था। जब उसे तताँरा और वामीरो के प्रेम का पता चला तो वह क्रोधित हो गया।
तताँरा को मृत्युदंड क्यों दिया गया?
तताँरा ने आत्मरक्षा में वामीरो के गाँव के मुखिया को मार डाला था। इस अपराध में ग्रामीणों ने उसे मृत्युदंड दे दिया।
वामीरो की मृत्यु कैसे हुई? [2018]
तताँरा के वियोग में वामीरो इतनी दुखी हुई कि उसने भी अपने प्राण त्याग दिए। वह तताँरा के बिना जीवित नहीं रह सकती थी।
'तताँरा का पेड़' क्या है? यह कहाँ स्थित है?
'तताँरा का पेड़' तलवार के आकार का एक विशेष पेड़ है, जो उस स्थान पर उगा था जहाँ तताँरा और वामीरो मिला करते थे। यह निकोबार द्वीप में स्थित है और उनके अमर प्रेम का प्रतीक है।
तताँरा-वामीरो कथा किस प्रकार की कथा है?
यह कथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निकोबारी आदिवासियों की एक प्रसिद्ध लोककथा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है।
तताँरा की कला के बारे में आप क्या जानते हैं? [2021]
तताँरा एक कुशल कलाकार था। वह लकड़ी पर बहुत सुंदर मूर्तियाँ बनाता था। उसकी बनाई मूर्तियाँ देखने लायक होती थीं।
निकोबार द्वीप के आदिवासियों की सामाजिक व्यवस्था में मुखिया का क्या स्थान था?
निकोबार द्वीप के आदिवासियों की सामाजिक व्यवस्था में मुखिया का सर्वोच्च स्थान था। उसका आदेश सबको मानना होता था और उसके निर्णय अंतिम होते थे।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
तताँरा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2022]
तताँरा इस कथा का नायक है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. रूप और बल: तताँरा अत्यंत सुंदर और बलशाली था। वह अपने गाँव में अपनी सुंदरता और ताकत के लिए जाना जाता था।
2. कलाप्रेमी: वह एक कुशल कलाकार था। वह लकड़ी पर सुंदर मूर्तियाँ बनाता था। उसकी कला उसके संवेदनशील हृदय को दर्शाती थी।
3. दयालु और संवेदनशील: वह दयालु स्वभाव का था और दूसरों की भावनाओं को समझता था। वामीरो के प्रति उसका प्रेम उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
4. साहसी: उसने मुखिया का साहसपूर्वक सामना किया और आत्मरक्षा में उसे मार डाला।
5. समर्पित प्रेमी: वह वामीरो से असीम प्रेम करता था। उसने अपने प्रेम के लिए बलिदान दे दिया।
इस प्रकार, तताँरा एक आदर्श चरित्र था जिसमें सुंदरता, बल, कला, संवेदनशीलता और साहस का अद्भुत समन्वय था।
वामीरो के चरित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2019]
वामीरो इस कथा की नायिका है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सौंदर्य: वामीरो अत्यंत सुंदर थी। उसकी सुंदरता ने तताँरा को आकर्षित किया। वह अपने गाँव में अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी।
2. सुशील स्वभाव: वह सुशील और विनम्र थी। उसका व्यवहार सबके प्रति मधुर था।
3. प्रेम में समर्पण: उसने तताँरा के प्रति अपने प्रेम में पूर्ण समर्पण दिखाया। वह मुखिया के दबाव के बावजूद तताँरा से प्रेम करती रही।
4. साहस: उसमें अपने प्रेम के लिए संघर्ष करने का साहस था। उसने मुखिया के सामने घुटने नहीं टेके।
5. बलिदान: तताँरा के वियोग में उसने अपने प्राण त्याग दिए। यह उसके प्रेम की गहराई और बलिदान की भावना को दर्शाता है।
इस प्रकार, वामीरो सुंदरता, सुशीलता, साहस और समर्पण का प्रतिरूप थी।
तताँरा-वामीरो कथा के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है?
तताँरा-वामीरो कथा के माध्यम से लेखक ने अनेक महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं:
1. प्रेम का आदर्श रूप: यह कथा सच्चे प्रेम का आदर्श प्रस्तुत करती है। तताँरा और वामीरो का प्रेम निःस्वार्थ और समर्पित था।
2. बलिदान का महत्व: यह बताती है कि सच्चे प्रेम में बलिदान आवश्यक है। तताँरा ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए और वामीरो ने भी वियोग में प्राण त्याग दिए।
3. अमर प्रेम: यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम मृत्यु के बाद भी अमर रहता है। तताँरा का पेड़ उनके अमर प्रेम का प्रतीक है।
4. सामाजिक नियमों का पालन: यह कथा निकोबारी समाज की व्यवस्था को दर्शाती है, जहाँ मुखिया का निर्णय सर्वोपरि होता था।
5. अन्याय का विरोध: तताँरा ने मुखिया के अन्याय का विरोध किया, यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
6. प्रकृति और मनुष्य का संबंध: यह कथा प्रकृति और मनुष्य के गहरे संबंध को भी दर्शाती है।
तताँरा-वामीरो कथा में मुखिया के चरित्र का वर्णन कीजिए।
मुखिया इस कथा का नकारात्मक चरित्र है। उसके चरित्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. स्वार्थी: मुखिया पूरी तरह स्वार्थी था। वह केवल अपने बारे में सोचता था। वह वामीरो से उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करना चाहता था।
2. सत्तालोलुप: वह अपनी सत्ता को बनाए रखना चाहता था। उसे लगा कि तताँरा उसकी सत्ता के लिए खतरा है।
3. क्रूर: वह क्रूर स्वभाव का था। उसने तताँरा को मारने की योजना बनाई और उसके लिए षड्यंत्र रचा।
4. अन्यायी: उसने अपने पद का दुरुपयोग किया। उसने अपनी शक्ति का प्रयोग निजी स्वार्थ के लिए किया।
5. ईर्ष्यालु: वह तताँरा की लोकप्रियता और वामीरो के प्रेम से ईर्ष्या करता था।
मुखिया का चरित्र यह दर्शाता है कि सत्ता का दुरुपयोग और स्वार्थ अंततः विनाश का कारण बनते हैं।
'तताँरा का पेड़' क्या है? यह किस बात का प्रतीक है? [2020]
'तताँरा का पेड़' का विशेष महत्व है:
पेड़ का वर्णन: यह तलवार के आकार का एक विशेष पेड़ है, जो निकोबार द्वीप में उस स्थान पर उगा था जहाँ तताँरा और वामीरो मिला करते थे। कहा जाता है कि यह पेड़ तताँरा की तलवार से उत्पन्न हुआ था।
प्रतीक के रूप में:
1. अमर प्रेम का प्रतीक: यह पेड़ तताँरा और वामीरो के अमर प्रेम का प्रतीक है। उनका प्रेम मृत्यु के बाद भी इस पेड़ के रूप में जीवित है।
2. बलिदान का प्रतीक: यह उनके द्वारा किए गए बलिदान की याद दिलाता है।
3. प्रकृति और मनुष्य के संबंध का प्रतीक: यह दर्शाता है कि प्रकृति मनुष्य की भावनाओं से जुड़ी है।
4. सांस्कृतिक धरोहर: यह पेड़ निकोबारी आदिवासियों की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है और आज भी उनके द्वारा पूजनीय है।
इस प्रकार, 'तताँरा का पेड़' केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि प्रेम, बलिदान और अमरता का जीवंत प्रतीक है।
तताँरा-वामीरो कथा के माध्यम से निकोबारी समाज की झलक प्रस्तुत कीजिए। [2018]
तताँरा-वामीरो कथा के माध्यम से निकोबारी समाज की निम्नलिखित झलक मिलती है:
1. सामाजिक व्यवस्था: निकोबारी समाज में मुखिया का सर्वोच्च स्थान था। उसके निर्णय अंतिम होते थे और सबको उनका पालन करना होता था।
2. ग्रामीण जीवन: यह समाज छोटे-छोटे गाँवों में बसा हुआ था। सभी लोग एक-दूसरे को जानते थे और सामूहिक निर्णय लिए जाते थे।
3. कला और संस्कृति: तताँरा द्वारा मूर्तियाँ बनाना यह दर्शाता है कि निकोबारी समाज कला और शिल्प में रुचि रखता था।
4. प्रकृति से जुड़ाव: निकोबारी समाज का प्रकृति से गहरा जुड़ाव था। वे जंगलों और पेड़-पौधों को महत्व देते थे।
5. न्याय व्यवस्था: तताँरा को मृत्युदंड दिया जाना यह दर्शाता है कि समाज में अपराध के लिए कड़ी सजा का प्रावधान था।
6. परंपराएँ: यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है, जो उनकी मौखिक परंपरा को दर्शाता है।
तताँरा-वामीरो की प्रेम कथा को अमर क्यों कहा जाता है? [2021]
तताँरा-वामीरो की प्रेम कथा को अमर निम्नलिखित कारणों से कहा जाता है:
1. सच्चा प्रेम: उनका प्रेम निःस्वार्थ और सच्चा था। वे एक-दूसरे को देखते ही प्रेम करने लगे थे और यह प्रेम आजीवन बना रहा।
2. बलिदान: तताँरा ने अपने प्रेम के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वामीरो ने भी उसके वियोग में प्राण त्याग दिए। यह बलिदान उनके प्रेम को अमर बनाता है।
3. अमर प्रेम का प्रतीक: 'तताँरा का पेड़' आज भी उनके प्रेम की याद दिलाता है। यह पेड़ उनके अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है।
4. लोककथा के रूप में: यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है। आज भी निकोबार द्वीप के लोग इस कथा को सुनाते हैं, जिससे उनका प्रेम अमर हो गया है।
5. आदर्श प्रेम: यह कथा प्रेम का आदर्श प्रस्तुत करती है, जो लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।
इन्हीं कारणों से तताँरा-वामीरो की प्रेम कथा अमर कहलाती है।
तताँरा की कला और उसके स्वभाव का आपस में क्या संबंध था?
तताँरा की कला और उसके स्वभाव में गहरा संबंध था:
1. संवेदनशीलता का प्रतिबिंब: तताँरा संवेदनशील स्वभाव का था और यही संवेदनशीलता उसकी कला में झलकती थी। वह लकड़ी पर जो मूर्तियाँ बनाता था, वे जीवंत और भावपूर्ण होती थीं।
2. सौंदर्य की अनुभूति: तताँरा सौंदर्य को पहचानता था। वह सुंदर मूर्तियाँ बनाता था और वामीरो के सौंदर्य से आकर्षित हुआ। उसकी कला और उसका प्रेम दोनों ही सौंदर्य से जुड़े थे।
3. धैर्य और एकाग्रता: मूर्तियाँ बनाने के लिए धैर्य और एकाग्रता की आवश्यकता होती है। तताँरा में ये दोनों गुण थे, जो उसके स्वभाव का हिस्सा थे।
4. प्रकृति से जुड़ाव: वह लकड़ी का चयन स्वयं करता था, जो उसके प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। उसकी कला प्रकृति से प्रेरित थी।
5. रचनात्मकता: उसका स्वभाव रचनात्मक था और यही रचनात्मकता उसकी कला में अभिव्यक्त होती थी।
इस प्रकार, तताँरा की कला उसके संवेदनशील, सौंदर्यप्रेमी और रचनात्मक स्वभाव का ही विस्तार थी।
यदि तताँरा और वामीरो के स्थान पर आप होते तो मुखिया के अन्याय का क्या विरोध करते?
यदि मैं तताँरा और वामीरो के स्थान पर होता तो मुखिया के अन्याय का निम्नलिखित तरीकों से विरोध करता:
1. गाँव वालों को जागरूक करना: सबसे पहले गाँव के लोगों को मुखिया के अन्याय के बारे में बताता और उनका समर्थन प्राप्त करता।
2. शांतिपूर्ण विरोध: मुखिया के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करता, जिससे वह अपने अन्याय पर पुनर्विचार करे।
3. गाँव के बुजुर्गों की पंचायत: गाँव के बुजुर्गों की पंचायत बुलाकर उनके सामने मुखिया के अन्याय का मामला रखता।
4. समझौते का प्रयास: मुखिया से बातचीत कर उसे समझाने का प्रयास करता कि प्रेम में बलपूर्वक कुछ नहीं किया जा सकता।
5. अंतिम विकल्प: यदि कोई रास्ता न बचता तो दूसरे गाँव में जाकर बसने का विकल्प चुनता, हिंसा का नहीं।
हिंसा का रास्ता अंतिम विकल्प हो सकता है, लेकिन पहले सभी शांतिपूर्ण विकल्पों को आजमाना चाहिए।
तताँरा-वामीरो कथा का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
तताँरा-वामीरो कथा का मूलभाव बहुआयामी है:
1. प्रेम का आदर्श: इस कथा का प्रमुख भाव प्रेम का आदर्श स्वरूप है। यह दर्शाती है कि सच्चा प्रेम निःस्वार्थ, समर्पित और बलिदान के लिए तैयार होता है।
2. बलिदान की महिमा: यह कथा बलिदान के महत्व को रेखांकित करती है। तताँरा और वामीरो ने अपने प्रेम के लिए सबसे बड़ा बलिदान - अपने प्राण - दे दिए।
3. अमर प्रेम: यह बताती है कि सच्चा प्रेम मृत्यु के बाद भी अमर रहता है। 'तताँरा का पेड़' इस अमर प्रेम का प्रतीक है।
4. सामाजिक नियम और व्यवस्था: यह कथा निकोबारी समाज की सामाजिक व्यवस्था को दर्शाती है, जहाँ मुखिया का निर्णय सर्वोपरि होता था।
5. अन्याय का विरोध: तताँरा ने मुखिया के अन्याय का विरोध किया, यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
6. प्रकृति और मनुष्य का संबंध: यह कथा प्रकृति और मनुष्य के अटूट संबंध को भी दर्शाती है।
इस प्रकार, यह कथा प्रेम, बलिदान, सामाजिक व्यवस्था और प्रकृति के समन्वय का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करती है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय
- तताँरा का चरित्र चित्रण: उसकी विशेषताएँ, कला, प्रेम और बलिदान [2022]
- वामीरो का चरित्र चित्रण: उसकी सुंदरता, सुशीलता, प्रेम और बलिदान [2019]
- मुखिया का चरित्र: उसके नकारात्मक पहलू, स्वार्थ और अन्याय
- तताँरा का पेड़: इसका महत्व और प्रतीकात्मक अर्थ [2020]
- प्रेम का आदर्श रूप: तताँरा-वामीरो के प्रेम की विशेषताएँ [2021]
- निकोबारी समाज की झलक: सामाजिक व्यवस्था, मुखिया का स्थान [2018]
- बलिदान की भावना: तताँरा और वामीरो का बलिदान
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- यह अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की लोककथा है
- पात्र: तताँरा (नायक), वामीरो (नायिका), मुखिया (प्रतिद्वंद्वी)
- तताँरा: सुंदर, बलशाली, कलाप्रेमी (लकड़ी की मूर्तियाँ बनाता था)
- वामीरो: अत्यंत सुंदर, सुशील, प्रेम में समर्पित
- मुलाकात: जंगल में लकड़ी ढूँढ़ते समय
- मुखिया: वामीरो से विवाह करना चाहता था
- अंत: तताँरा को मृत्युदंड, वामीरो का वियोग में मरना
- प्रतीक: 'तताँरा का पेड़' (तलवार के आकार का)
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"तताँरा की बनाई मूर्तियाँ देखने लायक होती थीं।"
"वामीरो के सौंदर्य पर मुग्ध होकर तताँरा वहीं ठिठक गया।"
"तताँरा का पेड़ आज भी उनके अमर प्रेम की कहानी कहता है।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न
टिप्स: सीधा और सटीक उत्तर दें। केवल मुख्य बिंदु लिखें। 2-3 वाक्यों में उत्तर पूरा करें। अनावश्यक विस्तार न करें।
उदाहरण: तताँरा कौन था?
उत्तर: तताँरा निकोबार द्वीप का एक सुंदर, बलशाली और कलाप्रेमी युवक था। वह लकड़ी पर सुंदर मूर्तियाँ बनाने में निपुण था।
📝 4-5 अंक प्रश्न
टिप्स: उत्तर को तीन भागों में बाँटें - परिचय, मुख्य भाग, निष्कर्ष। पात्र चित्रण में सभी विशेषताओं का उल्लेख करें। घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन करें। उदाहरण और उद्धरण दें।
उदाहरण: तताँरा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: [जैसा ऊपर दीर्घ प्रश्न 1 में दिया गया है]
10. हब लिंक
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