कक्षा 10 – डायरी का एक पन्ना – सीताराम सेकसरिया (स्पर्श) – स्वतंत्रता संग्राम व कोलकाता आंदोलन का जीवंत दस्तावेज़ | GPN
📘 पाठ – डायरी का एक पन्ना | कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श) | GPN
📚 कक्षा: 10 | 📖 पुस्तक: स्पर्श भाग 2 | ✍️ लेखक: सीताराम सेकसरिया | 📝 प्रकार: संस्मरण | ⭐⭐⭐ बहुत महत्वपूर्ण
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
- 7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय
सीताराम सेकसरिया (1893-1978): जन्म: 1893, लाहौर (अब पाकिस्तान में)। लेखन शैली: संस्मरणात्मक शैली, सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, ऐतिहासिक घटनाओं का सजीव चित्रण। वे एक प्रसिद्ध पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी भी थे।
📖 पाठ की पृष्ठभूमि
'डायरी का एक पन्ना' 26 जनवरी 1931 को लिखा गया एक संस्मरण है। यह वह समय था जब भारत में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। 26 जनवरी 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था और अगले वर्ष 1931 में भी यह दिवस बड़े ही उत्साह और जोश के साथ मनाया गया। यह डायरी का पन्ना उसी ऐतिहासिक दिन की घटनाओं का जीवंत वर्णन है।
🎯 पाठ का महत्व
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से प्रायः 2, 4 और 5 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। 26 जनवरी 1931 के दिन का वर्णन, देशभक्ति की भावना, पुलिस अत्याचार, महिलाओं का योगदान और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जनता का उत्साह - इन सभी विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
2. सरल सारांश
यह पाठ लेखक सीताराम सेकसरिया की डायरी का एक पन्ना है जो 26 जनवरी 1931 को लिखा गया। इस दिन पूर्ण स्वराज दिवस मनाने के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) के पाड़ा रोड पर एक विशाल सभा का आयोजन किया गया था। हजारों लोग तिरंगा लेकर जुलूस में शामिल हुए। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और गोलियाँ चलाईं, लेकिन प्रदर्शनकारी डटे रहे। सुभाष चंद्र बोस ने जुलूस का नेतृत्व किया। महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। शाम को फिर से सभा हुई। इस पूरे दिन के दौरान देशभक्ति का अद्भुत वातावरण था। लेखक ने उस दिन की हर छोटी-बड़ी घटना को डायरी में दर्ज किया है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 प्रमुख बिंदु
- 26 जनवरी 1931 का महत्व: यह दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया गया। एक साल पहले 1930 में लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया गया था।
- जुलूस का आयोजन: कलकत्ता के पाड़ा रोड पर सुबह से ही लोग इकट्ठा होने लगे। हाथों में तिरंगे लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- सुभाष चंद्र बोस का नेतृत्व: वे घोड़े पर सवार होकर जुलूस के आगे-आगे चल रहे थे। उन्होंने लोगों में जोश भरा।
- पुलिस अत्याचार: अंग्रेज सरकार ने जुलूस को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और गोलियाँ चलाईं। कई लोग घायल हुए, कुछ शहीद हो गए।
- महिलाओं की भागीदारी: महिलाएँ भी सड़कों पर उतर आईं। वे पुलिस की क्रूरता के आगे नहीं झुकीं।
- शाम की सभा: शाम को फिर से एक विशाल सभा हुई जिसमें देशभक्ति के गीत गाए गए और प्रस्ताव पारित किए गए।
📌 मूलभाव / Theme
इस पाठ का मूल भाव स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय जनता की देशभक्ति, बलिदान और अटूट संकल्प को दर्शाना है। यह बताता है कि किस प्रकार आम नागरिक, महिलाएँ और युवा अंग्रेजों के अत्याचार के बावजूद आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
📌 सामाजिक संदेश
पाठ यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना हर नागरिक का कर्तव्य है। यह बताता है कि कैसे समाज के हर वर्ग ने - पुरुष, महिला, बच्चे - मिलकर आज़ादी की लड़ाई लड़ी। यह हमें अपने देश के इतिहास और शहीदों के बलिदान को याद रखने की प्रेरणा देता है।
📌 सीख
- हमें अपने देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
- किसी भी लड़ाई में एकजुटता और दृढ़ संकल्प से जीत हासिल की जा सकती है।
- महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं - वे भी देश के लिए बलिदान दे सकती हैं।
- अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है।
4. पात्र चित्रण
🧑 सुभाष चंद्र बोस
स्वभाव: साहसी, क्रांतिकारी, कुशल नेता, देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत, जनता के बीच लोकप्रिय।
भूमिका: उन्होंने 26 जनवरी 1931 के जुलूस का नेतृत्व किया। वे घोड़े पर सवार होकर जुलूस के आगे-आगे चल रहे थे।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) साहसी: पुलिस की गोलियों के सामने भी वे डटे रहे। (2) प्रेरणास्रोत: उनके नेतृत्व ने हजारों लोगों में जोश भर दिया। (3) दूरदर्शी: वे स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण नेता थे।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: सुभाष चंद्र बोस के चरित्र, उनके नेतृत्व और उस दिन उनकी भूमिका पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
🧑 आम जनता (प्रदर्शनकारी)
स्वभाव: देशभक्त, साहसी, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एकजुट, बलिदान के लिए तैयार।
भूमिका: पूर्ण स्वराज दिवस के जुलूस में शामिल होकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) एकजुटता: हजारों लोग एक साथ जुलूस में शामिल हुए। (2) अडिग संकल्प: लाठीचार्ज और गोलियों के बावजूद वे नहीं डरे। (3) देशभक्ति: उनके मन में देश के लिए अपार प्रेम था।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: जनता की भूमिका, उनके उत्साह और बलिदान पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
🧑 महिलाएँ
स्वभाव: साहसी, आत्मनिर्भर, देशभक्ति से भरपूर, पुलिस अत्याचार के आगे न झुकने वाली।
भूमिका: उन्होंने जुलूस में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) साहस: पुलिस की क्रूरता के आगे वे नहीं झुकीं। (2) समर्पण: देश की आज़ादी के लिए उन्होंने हर कष्ट सहा। (3) प्रेरणास्रोत: उनके साहस ने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| स्वराज | अपना राज, स्वतंत्रता | 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ। |
| तिरंगा | तीन रंगों वाला झंडा | हजारों लोगों ने तिरंगा लहराया। |
| जुलूस | जनसमूह, रैली | सुभाष बाबू के नेतृत्व में जुलूस निकला। |
| लाठीचार्ज | लाठियाँ भाँजना, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठियों से हमला | पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। |
| गोलीकांड | गोलियाँ चलाने की घटना | उस दिन भयानक गोलीकांड हुआ। |
| शहीद | देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाला | कई लोग शहीद हो गए। |
| प्रस्ताव | संकल्प, मत | सभा में अनेक प्रस्ताव पारित किए गए। |
| संकल्प | दृढ़ निश्चय | लोगों ने आज़ादी का संकल्प लिया। |
| अत्याचार | क्रूरता, जुल्म | अंग्रेजों के अत्याचार चरम पर थे। |
| बलिदान | कुर्बानी, त्याग | शहीदों ने अपना बलिदान दिया। |
| प्रदर्शन | विरोध का प्रदर्शन | लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। |
| उत्साह | जोश, उमंग | लोगों में अपार उत्साह था। |
| वंदे मातरम् | माँ को नमन, देशभक्ति का नारा | जुलूस में वंदे मातरम् के नारे गूंज रहे थे। |
| इंकलाब | क्रांति | इंकलाब जिंदाबाद का नारा लग रहा था। |
| डायरी | दैनंदिनी, रोजनामचा | लेखक ने डायरी में घटनाएँ लिखीं। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
प्रश्न 1: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के लेखक कौन हैं? [2020]
'डायरी का एक पन्ना' पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया हैं।
प्रश्न 2: यह डायरी का पन्ना किस तिथि को लिखा गया है?
यह डायरी का पन्ना 26 जनवरी 1931 को लिखा गया है।
प्रश्न 3: 26 जनवरी 1931 को कौन-सा दिवस मनाया गया?
26 जनवरी 1931 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया।
प्रश्न 4: पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव सबसे पहले कब और कहाँ पारित हुआ था?
पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव सबसे पहले दिसंबर 1929 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में पारित हुआ था और 26 जनवरी 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया।
प्रश्न 5: जुलूस का नेतृत्व किसने किया और वे किस वाहन पर सवार थे?
जुलूस का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस ने किया और वे घोड़े पर सवार थे।
प्रश्न 6: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर क्या अत्याचार किए?
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और गोलियाँ चलाईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ शहीद हो गए।
प्रश्न 7: उस दिन जुलूस में कौन-कौन से नारे लग रहे थे?
उस दिन जुलूस में 'वंदे मातरम्', 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'महात्मा गांधी की जय' जैसे नारे लग रहे थे।
प्रश्न 8: स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की क्या भूमिका रही?
महिलाओं ने जुलूस में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं और पुलिस अत्याचार के आगे नहीं झुकीं।
प्रश्न 9: शाम को कहाँ और कैसी सभा हुई?
शाम को एक विशाल सभा हुई जिसमें देशभक्ति के गीत गाए गए और अनेक प्रस्ताव पारित किए गए।
प्रश्न 10: लेखक ने इस डायरी के पन्ने में किसका वर्णन किया है?
लेखक ने इस डायरी के पन्ने में 26 जनवरी 1931 को मनाए गए पूर्ण स्वराज दिवस की घटनाओं और लोगों के उत्साह का वर्णन किया है।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
प्रश्न 1: 26 जनवरी 1931 के दिन का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
26 जनवरी 1931 का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया गया। उस दिन का वर्णन इस प्रकार है:
सुबह से ही कलकत्ता के पाड़ा रोड पर लोग इकट्ठा होने लगे। हजारों की संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुँचे। सुभाष चंद्र बोस घोड़े पर सवार होकर जुलूस के आगे-आगे चल रहे थे। 'वंदे मातरम्' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों से पूरा वातावरण गूंज रहा था।
पुलिस ने जुलूस को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और गोलियाँ चलाईं। कई लोग घायल हुए और कुछ शहीद हो गए, लेकिन लोग डटे रहे। महिलाएँ भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थीं।
शाम को फिर से एक विशाल सभा हुई जिसमें देशभक्ति के गीत गाए गए और प्रस्ताव पारित किए गए। पूरे दिन देशभक्ति का अद्भुत वातावरण रहा।
प्रश्न 2: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालिए। [2018]
'डायरी का एक पन्ना' पाठ के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही:
1. जुलूस में सक्रिय भागीदारी: महिलाएँ सुबह से ही जुलूस में शामिल हो गई थीं। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थीं।
2. साहस का परिचय: जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया और गोलियाँ चलाईं, तब भी महिलाएँ नहीं डरीं। उन्होंने डटकर विरोध किया।
3. प्रेरणास्रोत: महिलाओं के इस साहस ने समाज की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया। वे यह दिखाना चाहती थीं कि वे पुरुषों से कम नहीं हैं।
4. बलिदान के लिए तैयार: महिलाएँ भी देश की आज़ादी के लिए अपना बलिदान देने को तैयार थीं। उन्होंने अंग्रेजों के अत्याचार सहे।
इस प्रकार, महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया और साबित किया कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं।
प्रश्न 3: सुभाष चंद्र बोस ने उस दिन जुलूस का नेतृत्व किस प्रकार किया? उनकी भूमिका पर प्रकाश डालिए। [2022]
सुभाष चंद्र बोस ने 26 जनवरी 1931 के जुलूस का नेतृत्व बहुत ही कुशलता और साहस के साथ किया:
1. नेतृत्व: वे घोड़े पर सवार होकर जुलूस के आगे-आगे चल रहे थे। उनकी इस भव्य उपस्थिति ने लोगों में जोश भर दिया।
2. प्रेरणास्रोत: उनके नेतृत्व में हजारों लोग जुलूस में शामिल हुए। उन्होंने लोगों को संबोधित किया और उनमें देशभक्ति की भावना जागृत की।
3. साहस का परिचय: पुलिस के लाठीचार्ज और गोलियों के बावजूद वे डटे रहे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया।
4. एकता का प्रतीक: उन्होंने सभी वर्गों के लोगों - पुरुष, महिला, युवा - को एकजुट किया।
5. संदेश: उनके नेतृत्व ने यह संदेश दिया कि अंग्रेजों के अत्याचार के आगे घुटने नहीं टेकने हैं।
इस प्रकार, सुभाष चंद्र बोस ने उस ऐतिहासिक दिन अपने साहस और नेतृत्व से लोगों में नई ऊर्जा का संचार किया।
प्रश्न 4: पुलिस के अत्याचारों के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे रहे - इस कथन को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
पुलिस के अत्याचारों के बावजूद प्रदर्शनकारियों का डटे रहना उनके अटूट संकल्प और देशभक्ति को दर्शाता है:
1. लाठीचार्ज के बावजूद: जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया, तो लोग पीछे नहीं हटे। वे घायल होने के बाद भी वहीं डटे रहे।
2. गोलियों का सामना: पुलिस ने गोलियाँ चलाईं, कई लोग शहीद हो गए, फिर भी प्रदर्शनकारी डरे नहीं और जुलूस जारी रहा।
3. महिलाओं का साहस: महिलाओं ने भी पुलिस के आगे घुटने नहीं टेके। वे डटकर खड़ी रहीं।
4. शाम की सभा: दिन भर के अत्याचारों के बावजूद शाम को फिर से विशाल सभा हुई, जो लोगों के अडिग संकल्प को दर्शाती है।
5. दृढ़ निश्चय: प्रदर्शनकारियों का यह दृढ़ निश्चय था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे आज़ादी की लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।
इस प्रकार, अत्याचारों के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे रहे और उन्होंने अंग्रेजों को यह संदेश दिया कि भारत की जनता अब गुलामी स्वीकार नहीं करेगी।
प्रश्न 5: 'डायरी का एक पन्ना' शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
'डायरी का एक पन्ना' शीर्षक अत्यंत सार्थक और उचित है:
1. डायरी का अंश: यह पाठ लेखक सीताराम सेकसरिया की डायरी का एक अंश है, जो उन्होंने 26 जनवरी 1931 को लिखा था। अतः शीर्षक पाठ की प्रकृति को स्पष्ट करता है।
2. एक दिन का वर्णन: 'एक पन्ना' से तात्पर्य है कि यह उनकी डायरी का केवल एक दिन का वर्णन है। यह उस ऐतिहासिक दिन की घटनाओं का संक्षिप्त लेकिन सजीव चित्रण है।
3. व्यक्तिगत अनुभव: डायरी में लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों और देखी-सुनी घटनाओं को लिखता है। यह पाठ भी लेखक के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है।
4. ऐतिहासिक दस्तावेज़: यह पन्ना मात्र एक डायरी का पन्ना नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।
5. सरल और आकर्षक: शीर्षक सरल, स्पष्ट और आकर्षक है, जो पाठक को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
इस प्रकार, 'डायरी का एक पन्ना' शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 6: उस समय के वातावरण में देशभक्ति की भावना किस प्रकार देखी जा सकती थी? पाठ के आधार पर लिखिए।
26 जनवरी 1931 के दिन के वातावरण में देशभक्ति की भावना स्पष्ट देखी जा सकती थी:
1. जनसैलाब: सुबह से ही हजारों लोग तिरंगा लेकर सड़कों पर उतर आए थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होना उनकी देशभक्ति को दर्शाता है।
2. देशभक्ति के नारे: पूरे वातावरण में 'वंदे मातरम्', 'इंकलाब जिंदाबाद' जैसे नारे गूंज रहे थे। ये नारे लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना जगाते थे।
3. बलिदान के लिए तत्परता: लोग पुलिस के लाठीचार्ज और गोलियों के सामने डटे रहे। वे देश के लिए अपना बलिदान देने को तैयार थे।
4. महिलाओं का उत्साह: महिलाएँ भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थीं, जो उनकी देशभक्ति को दर्शाता है।
5. शाम की सभा: पूरे दिन के अत्याचारों के बावजूद शाम को विशाल सभा हुई, जहाँ देशभक्ति के गीत गाए गए।
इस प्रकार, उस समय का वातावरण पूरी तरह देशभक्ति से ओत-प्रोत था।
प्रश्न 7: लेखक ने डायरी में उस दिन की किन-किन घटनाओं का वर्णन किया है?
लेखक ने 26 जनवरी 1931 की डायरी में निम्नलिखित घटनाओं का वर्णन किया है:
1. सुबह की तैयारी: सुबह से ही लोगों का पाड़ा रोड पर एकत्र होना।
2. जुलूस का आरंभ: सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में जुलूस का निकलना।
3. देशभक्ति के नारे: जुलूस के दौरान लगाए जा रहे नारों का वर्णन।
4. पुलिस अत्याचार: पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और गोलीबारी की घटना।
5. बलिदान: कई लोगों के घायल होने और शहीद होने का वर्णन।
6. महिलाओं का योगदान: महिलाओं की सक्रिय भागीदारी।
7. शाम की सभा: शाम को हुई विशाल सभा और वहाँ पारित प्रस्ताव।
8. वातावरण: पूरे दिन के वातावरण और लोगों के उत्साह का वर्णन।
प्रश्न 8: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ का मूल संदेश क्या है?
'डायरी का एक पन्ना' पाठ का मूल संदेश निम्नलिखित है:
1. देशभक्ति की भावना: यह पाठ हममें देशभक्ति की भावना जगाता है और हमें अपने देश के प्रति प्रेम करना सिखाता है।
2. बलिदान का महत्व: यह हमें बताता है कि हमारी आज़ादी के लिए कितने लोगों ने अपना बलिदान दिया है। हमें उन शहीदों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
3. एकता में शक्ति: यह पाठ दिखाता है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो वे किसी भी अत्याचार का सामना कर सकते हैं।
4. अन्याय के खिलाफ आवाज: यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का कर्तव्य है।
5. महिलाओं का सम्मान: यह महिलाओं के योगदान को रेखांकित करता है और उनके सम्मान की बात करता है।
इस प्रकार, यह पाठ हमें अपने देश के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद रखने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 9: पूर्ण स्वराज दिवस मनाने का क्या महत्व था? पाठ के आधार पर लिखिए। [2021]
पूर्ण स्वराज दिवस मनाने का अत्यधिक महत्व था:
1. संकल्प का दिन: 26 जनवरी 1930 को पहली बार पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था। यह पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने के संकल्प का दिन था।
2. अंग्रेजों को संदेश: इस दिवस को मनाकर भारतीय जनता ने अंग्रेजों को यह संदेश दिया कि वे अब गुलामी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
3. एकता का प्रतीक: यह दिन देशभर के भारतीयों की एकता का प्रतीक बन गया। सभी प्रांतों में इसे धूमधाम से मनाया गया।
4. स्वतंत्रता संग्राम को गति: इस दिवस ने स्वतंत्रता संग्राम को नई गति दी और लाखों लोग इसमें शामिल हुए।
5. ऐतिहासिक महत्व: यह दिन भारत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। बाद में 26 जनवरी 1950 को ही भारत का संविधान लागू हुआ और यह दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
इस प्रकार, पूर्ण स्वराज दिवस का ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व था।
प्रश्न 10: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ में लेखक ने तत्कालीन समाज का कौन-सा चित्र प्रस्तुत किया है?
'डायरी का एक पन्ना' पाठ में लेखक ने तत्कालीन समाज का निम्नलिखित चित्र प्रस्तुत किया है:
1. जागरूक समाज: उस समय का समाज राजनीतिक रूप से जागरूक था। लोग स्वतंत्रता के महत्व को समझते थे।
2. एकजुट समाज: समाज के सभी वर्ग - अमीर, गरीब, पुरुष, महिला, युवा - सभी एकजुट थे और एक साथ संघर्ष कर रहे थे।
3. बलिदान के लिए तैयार समाज: लोग अपने प्राणों की परवाह किए बिना आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे।
4. उत्साही समाज: अत्याचारों के बावजूद लोगों में अपार उत्साह था। वे निडर होकर सड़कों पर उतर रहे थे।
5. महिलाओं की सक्रियता: महिलाएँ अब घरों से बाहर निकल रही थीं और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभा रही थीं।
6. अंग्रेजों के प्रति आक्रोश: समाज में अंग्रेजी हुकूमत के प्रति गहरा आक्रोश था और लोग उनसे मुक्ति चाहते थे।
इस प्रकार, लेखक ने एक जागरूक, एकजुट और क्रांतिकारी समाज का चित्र प्रस्तुत किया है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय
- 26 जनवरी 1931 का वर्णन: उस दिन की घटनाओं का विस्तार से वर्णन [बहुत महत्वपूर्ण]
- सुभाष चंद्र बोस की भूमिका: उनके नेतृत्व और साहस पर प्रश्न [2019, 2022]
- महिलाओं का योगदान: स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी [2018]
- पुलिस अत्याचार: लाठीचार्ज और गोलीबारी की घटनाएँ
- पूर्ण स्वराज दिवस का महत्व: 26 जनवरी का ऐतिहासिक महत्व [2021]
- शीर्षक की सार्थकता: 'डायरी का एक पन्ना' शीर्षक की उपयुक्तता
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक: सीताराम सेकसरिया
- तिथि: 26 जनवरी 1931
- स्थान: कलकत्ता (कोलकाता) का पाड़ा रोड
- नेता: सुभाष चंद्र बोस (घोड़े पर सवार)
- आयोजन: पूर्ण स्वराज दिवस
- नारे: वंदे मातरम्, इंकलाब जिंदाबाद
- पुलिस कार्रवाई: लाठीचार्ज, गोलीबारी
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"आज फिर वही तारीख आ पहुँची है - 26 जनवरी।"
"वंदे मातरम् के नारों से आकाश गूंज रहा था।"
"सुभाष बाबू घोड़े पर सवार होकर आगे-आगे चल रहे थे।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न
टिप्स: सीधा और सटीक उत्तर दें। केवल मुख्य बिंदु लिखें। 2-3 वाक्यों में उत्तर पूरा करें। अनावश्यक विस्तार न करें।
उदाहरण: प्रश्न: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: 'डायरी का एक पन्ना' पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया हैं।
📝 4-5 अंक प्रश्न
टिप्स: उत्तर को तीन भागों में बाँटें - परिचय, मुख्य भाग, निष्कर्ष। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल करें। घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन करें। उद्धरण दें।
उदाहरण: प्रश्न: 26 जनवरी 1931 के दिन का वर्णन कीजिए।
उत्तर: [जैसा ऊपर दीर्घ प्रश्न 1 में दिया गया है]
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें: