सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 14 JULY 2026
मेरी दादी जब रोज़ सुबह भजन गाती थीं – "राम नाम रट ले, भवसागर तर ले" – तो उनके गाने में एक अजीब सी लय होती थी – एक खास रिदम जो बार-बार दोहराई जाती थी। मैं बचपन में सोचता था – "यह लय कहाँ से आती है?" बड़े होकर जब मैंने हिंदी साहित्य पढ़ा – तो पता चला – यह मात्रिक छंद का जादू था! दादी जी के भजन में हर पंक्ति में निश्चित संख्या में मात्राएँ थीं – जो एक समान गति और लय पैदा कर रही थीं। मात्रिक छंद वे छंद हैं – जिनमें मात्राओं की संख्या निश्चित होती है – वर्णों की नहीं – ये लोकगीत, भक्ति-काव्य, और आम बोलचाल की कविता में अधिक प्रयुक्त होते हैं – क्योंकि ये अधिक सरल, प्रवाहपूर्ण और संगीतमय होते हैं। इस पोस्ट में हम कक्षा 10-12 के स्तर पर मात्रिक छंद – उनके नियम, प्रकार, प्रमुख छंद (दोहा, चौपाई, सोरठा, आदि) – और पहचान – को विस्तृत उदाहरणों और अभ्यास के साथ समझेंगे – ताकि आप काव्य की लय और मात्राओं को गहराई से समझ सकें और अपनी रचना को लोक-संगीत जैसा प्रवाह दे सकें।
✅ अनुशंसित: कक्षा 10-12 | CBSE एवं UP Board
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- 1. मात्रिक छंद क्या है? – परिभाषा और बुनियादी समझ
- 2. मात्रिक छंद के मूल नियम – मात्राओं की गिनती
- 3. दोहा छंद – परिभाषा, नियम और उदाहरण
- 4. चौपाई और सोरठा – परिभाषा, नियम और उदाहरण
- 5. अन्य प्रमुख मात्रिक छंद – रोला, बरवै, आदि
- 6. मात्रिक छंद पहचानने की ट्रिक्स और अभ्यास
- 7. हल सहित उदाहरण (5)
- 8. अभ्यास प्रश्न (5)
- 📝 वर्कशीट: मात्रिक छंद
1. मात्रिक छंद क्या है? – परिभाषा और बुनियादी समझ
मात्रिक छंद (Metrical Verse) – वे छंद जिनमें मात्राओं की संख्या निश्चित होती है – वर्णों की संख्या निश्चित नहीं होती – मात्रिक छंद कहलाते हैं। इन छंदों में हर पंक्ति में एक समान संख्या में मात्राएँ होती हैं – चाहे उसमें वर्ण कितने भी हों। मात्रिक छंद सरल, प्रवाहपूर्ण और संगीतमय होते हैं – इसलिए ये लोकगीत, भक्ति-काव्य, दोहे, और गीत में अधिक प्रयुक्त होते हैं। हिंदी साहित्य के अधिकांश काव्य मात्रिक छंदों में ही रचे गए हैं – क्योंकि ये बोलचाल की भाषा के अधिक नज़दीक होते हैं।
उदाहरण –
- “रघुपति राघव राजाराम” – 16 मात्राएँ (चौपाई)
- “जो रहे सो जाए, जो जाए सो रहे” – 13+11 मात्राएँ (दोहा)
मात्रिक छंद की विशेषता – इनमें लय और गति का विशेष ध्यान रखा जाता है – पढ़ते समय एक समान अंतराल पर मात्राएँ गिनी जाती हैं – इसलिए ये गायन के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं। कक्षा 10-12 में मात्रिक छंदों का विस्तृत अध्ययन होता है – क्योंकि बोर्ड परीक्षा में इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
2. मात्रिक छंद के मूल नियम – मात्राओं की गिनती
मात्रिक छंदों को समझने के लिए मात्राओं को गिनना सीखना बहुत ज़रूरी है – नियम:
- नियम 1 – ह्रस्व (लघु) = 1 मात्रा: 'क', 'प', 'र', 'स', 'त' – बिना मात्रा वाले व्यंजन – 1 मात्रा – जैसे 'र' = 1
- नियम 2 – दीर्घ (गुरु) = 2 मात्रा: 'का', 'पा', 'रा', 'सा' – 'आ' की मात्रा वाले – 2 मात्रा – जैसे 'रा' = 2
- नियम 3 – संयुक्त व्यंजन = 2 मात्रा: 'क्र', 'प्र', 'त्र', 'म्र' – दो व्यंजन मिलकर – 2 मात्रा – जैसे 'प्र' = 2
- नियम 4 – अनुस्वार और अनुनासिक = 1 या 2 मात्रा: 'हंस' – 'हं' – 2 मात्रा (ह + अं) – 'हम' – 'ह' = 1, 'म' = 1, 'अं' नहीं – तो 'हम' = 2 मात्रा
- बिना मात्रा वाला व्यंजन (क, ख, ग, घ…) = 1 मात्रा
- मात्रा वाला व्यंजन (का, खा, गा…) = 2 मात्रा
- संयुक्त व्यंजन (क्र, प्र, त्र…) = 2 मात्रा
- स्वर (अ, आ, इ, ई…) – 'अ' = 1, 'आ' = 2, 'इ' = 1, 'ई' = 2
3. दोहा छंद – परिभाषा, नियम और उदाहरण
दोहा – हिंदी का सबसे लोकप्रिय और सरल मात्रिक छंद – जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं – पहली और तीसरी पंक्ति में 13-13 मात्राएँ – दूसरी और चौथी पंक्ति में 11-11 मात्राएँ – और अंत में तुकांत होता है। तुलसीदास, कबीर, और रहीम ने दोहों की रचना की है – यही दोहा भक्ति-काव्य और नीति-काव्य का आधार है।
- पहली पंक्ति – 13 मात्राएँ
- दूसरी पंक्ति – 11 मात्राएँ
- तीसरी पंक्ति – 13 मात्राएँ
- चौथी पंक्ति – 11 मात्राएँ
- दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (अंत में समान ध्वनि)
उदाहरण –
- “जो रहे सो जाए, जो जाए सो रहे” – 13+11 मात्राएँ
- “राम राम रट ले, भवसागर तर ले” – 13+11 मात्राएँ
दोहा पहचानने की ट्रिक –
- पहली और तीसरी पंक्ति लंबी (13 मात्राएँ) – दूसरी और चौथी छोटी (11 मात्राएँ)
- तुक दूसरी और चौथी पंक्ति में – पहली और तीसरी में नहीं
4. चौपाई और सोरठा – परिभाषा, नियम और उदाहरण
चौपाई – प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ – और अंत में तुकांत – यह अवधी का प्रमुख छंद है – तुलसीदास ने रामचरितमानस को चौपाई में ही लिखा है।
- प्रत्येक पंक्ति – 16 मात्राएँ
- सभी पंक्तियों में तुक (आमतौर पर)
उदाहरण –
- “चलत मधुबन अति मृदु बयारी” – 16 मात्राएँ
- “रघुपति राघव राजाराम” – 16 मात्राएँ
सोरठा – दोहा का उल्टा रूप – पहली और तीसरी पंक्ति में 11-11 मात्राएँ – दूसरी और चौथी में 13-13 मात्राएँ – और तुक भी दोहे के विपरीत होता है।
- पहली पंक्ति – 11 मात्राएँ
- दूसरी पंक्ति – 13 मात्राएँ
- तीसरी पंक्ति – 11 मात्राएँ
- चौथी पंक्ति – 13 मात्राएँ
उदाहरण –
- “जो जनि जाने कौन” – 11+13 मात्राएँ
5. अन्य प्रमुख मात्रिक छंद – रोला, बरवै, आदि
दोहा, चौपाई, और सोरठा के अलावा भी कुछ प्रमुख मात्रिक छंद हैं – जिनका परिचय कक्षा 10-12 में होना चाहिए:
| छंद | लक्षण | उदाहरण |
|---|---|---|
| रोला | प्रत्येक पंक्ति में 24 मात्राएँ – 12+12 के विराम से | “मन मोरा, रन बिचारा” |
| बरवै | प्रत्येक पंक्ति में 8 मात्राएँ – छोटा छंद | “सब सुखी, सब निरोगी” |
| उल्लाला | प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ – पर चौपाई से अलग | “चलत मधुबन अति मृदु” |
इन छंदों की गहरी समझ के लिए काव्य-पाठ और मात्रा-गणना का अभ्यास ज़रूरी है – इन्हें पहचानने के लिए मात्राएँ गिनना ही सबसे आसान तरीका है।
6. मात्रिक छंद पहचानने की ट्रिक्स और अभ्यास
मात्रिक छंद पहचानने के लिए कुछ आसान ट्रिक्स:
- ट्रिक 1 – मात्राएँ गिनें: हर पंक्ति में मात्राओं की संख्या गिनें – अगर सभी पंक्तियों में 16 मात्राएँ आएँ – तो चौपाई – अगर 13+11 का क्रम हो – तो दोहा।
- ट्रिक 2 – लय सुनें: कविता को जोर से पढ़ें – जहाँ एक समान ताल महसूस हो – वहाँ मात्रिक छंद की संभावना।
- ट्रिक 3 – तुक देखें: दोहे में तुक दूसरी और चौथी पंक्ति में – चौपाई में सभी पंक्तियों में – यह याद रखें।
- ट्रिक 4 – लघु-गुरु का क्रम देखें: दोहे में 13+11 मात्राओं का विशिष्ट क्रम होता है – पहचानना आसान है।
हल सहित उदाहरण (5)
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अभ्यास प्रश्न (5)
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- हिंदी व्याकरण हब – संज्ञा से छंद तक – सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण
- वर्कशीट मास्टर हब – हर अध्याय पर इंटरैक्टिव अभ्यास – उत्तर कुंजी सहित
- English Grammar Hub – Complete English grammar with practice worksheets
- गणित हब – गणित को सरल, रुचिकर और चरणबद्ध सीखें
- GPN नॉलेज हब – परीक्षा रणनीतियाँ, समय प्रबंधन और करियर मार्गदर्शन
मात्रिक छंद – काव्य की लोक-लय
मात्रिक छंद हिंदी काव्य की जान हैं – ये कविता को सरल, प्रवाहपूर्ण और संगीतमय बनाते हैं – दोहा, चौपाई, सोरठा – ये सभी हिंदी साहित्य के अमर छंद हैं – जिनमें हज़ारों कवियों ने अपनी रचनाएँ लिखी हैं। 'जो रहे सो जाए' – दोहा – 'रघुपति राघव' – चौपाई – हर पंक्ति में लय – हर शब्द में संगीत – यही मात्रिक छंद का जादू है। इस पोस्ट में हमने छंद और मात्रिक छंद की बुनियाद पर मात्रिक छंदों – दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, बरवै – की पूरी समझ, नियम, और पहचान – को विस्तृत उदाहरणों के साथ समझाया है – अब आप किसी भी काव्य-पंक्ति में मात्राएँ गिन सकते हैं और छंद को पहचान सकते हैं।
याद रखें – जितना अधिक आप कविता पढ़ेंगे और मात्राएँ गिनने का अभ्यास करेंगे – उतनी ही अच्छी आपकी मात्रिक छंदों की समझ होगी। काव्य-पाठ करें – मात्राएँ गिनें – छंद को महसूस करें – और अपनी भाषा को संगीतमय, प्रभावशाली और यादगार बनाएँ – यह कौशल आपको जीवन भर काम आएगा – चाहे साहित्य हो, परीक्षा हो, या गीत-लेखन – हर जगह लयबद्ध और प्रभावशाली भाषा आपकी पहचान बनेगी।
📝 मात्रिक छंद अभ्यास – कक्षा 10-12
इस वर्कशीट में 25 काव्य-पंक्तियाँ दी गई हैं – जिनमें आपको मात्राएँ गिननी हैं – और बताना है कि वे दोहा, चौपाई, सोरठा, रोला, या बरवै में से किस छंद का उदाहरण हैं – साथ ही कुछ पंक्तियों में गलत मात्रा-गणना को पहचानकर शुद्ध करना है।
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