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मात्रिक छंद (Matrik Chhand) | Hindi Grammar | GPN

क्या आपने कभी गौर किया है कि "समय पाय फल होत है" और "बंदउँ गुरु पद पदुम परागा" में एक खास लय है? यह लय मात्राओं के नियमित क्रम से आती है - यही है मात्रिक छंद का जादू! मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना होती है, वर्णों की नहीं। जब कविता की हर पंक्ति में मात्राएँ गिनी जाती हैं और उनका एक निश्चित क्रम होता है, तो वह मात्रिक छंद कहलाता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 10–11 (परिचय) | कक्षा 11–12 (अभ्यास) | स्नातक स्तर (उच्च स्तर प्रयोग)


1. मात्रिक छंद: मात्राओं का नृत्य

मात्रिक छंद वह छंद है जिसमें मात्राओं की संख्या और उनके क्रम का नियम होता है। इसमें वर्णों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि मात्राओं की संख्या महत्वपूर्ण होती है। मात्रा उच्चारण में लगने वाले समय की इकाई है - लघु वर्ण (एक मात्रा) और गुरु वर्ण (दो मात्राएँ)। मात्रिक छंद हिंदी काव्य में सबसे अधिक प्रचलित है क्योंकि हिंदी भाषा मात्राओं पर आधारित है।

ऐतिहासिक उदाहरण देखें: तुलसीदास के रामचरितमानस में चौपाई, सूरदास के सूरसागर में दोहे, रहीम के दोहे - ये सभी मात्रिक छंद के उदाहरण हैं। जब आप "समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात" पढ़ते हैं, तो इसमें 13-11 मात्राओं का क्रम है जो दोहे का नियम है। एक रोचक तथ्य: मात्रिक छंद का प्रयोग न केवल हिंदी में बल्कि अवधी, ब्रज, राजस्थानी जैसी कई भारतीय भाषाओं में भी होता है। महाकवि तुलसीदास ने मात्रिक छंदों में ही अपनी अमर कृति रामचरितमानस की रचना की।

2. मात्रिक छंद की परिभाषा

परिभाषा: मात्रिक छंद वह छंद है जिसमें मात्राओं की संख्या निश्चित होती है और उनका क्रम भी निश्चित होता है। इसमें वर्णों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, केवल मात्राओं की संख्या और उनके क्रम (गुरु-लघु का क्रम) का ध्यान रखा जाता है। मात्रिक छंद में प्रत्येक चरण (पंक्ति) में मात्राओं की संख्या समान होती है।

3. मात्रिक छंद की विशेषताएँ

मात्रिक छंद की मुख्य पहचान और विशेषताएँ:

  • मात्रा गणना: इसमें मात्राओं की गिनती की जाती है, वर्णों की नहीं।
  • गुरु-लघु क्रम: गुरु (दो मात्रा) और लघु (एक मात्रा) का निश्चित क्रम होता है।
  • लयबद्धता: मात्राओं के नियमित क्रम से लय उत्पन्न होती है।
  • सरलता: वर्णिक छंद की तुलना में सरल और समझने में आसान।
  • लोकप्रियता: हिंदी काव्य में सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला छंद।
  • भावानुकूलता: विभिन्न भावों के लिए विभिन्न मात्रिक छंद उपलब्ध हैं।

4. प्रमुख मात्रिक छंद और उनके नियम

मात्रिक छंद के मुख्य प्रकार और उनके नियम:

क्रम छंद मात्राएँ गण/क्रम चरण उदाहरण
1 दोहा 24 (13+11) मात्रिक क्रम 4 समय पाय फल होत है...
2 सोरठा 24 (11+13) दोहे का उल्टा 4 रहिमन देखि बड़ेन को...
3 चौपाई 16-16 समान मात्राएँ 4 बंदउँ गुरु पद पदुम परागा...
4 रोला 24-24 11+13 के दो खंड 4 कहत नटत रीझत खिझत...
5 हरिगीतिका 28-28 16+12 के दो खंड 4 मधुर मधुर मेरे दीपक जल...
6 उल्लाला 28-28 15+13 के दो खंड 4 अब लौं आये बालम तिहारे देश...

5. विस्तृत उदाहरण और विश्लेषण

आइए प्रमुख मात्रिक छंदों को विस्तार से समझें:

1. दोहा:

  • उदाहरण: "समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात।
    सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात॥"
  • मात्रा विश्लेषण: पहले और तीसरे चरण में 13 मात्राएँ, दूसरे और चौथे में 11 मात्राएँ
  • गणना: 13+11, 13+11 = कुल 48 मात्राएँ

2. चौपाई:

  • उदाहरण: "बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
    सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥"
  • मात्रा विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ
  • गणना: 16+16+16+16 = कुल 64 मात्राएँ

3. रोला:

  • उदाहरण: "कहत नटत रीझत खिझत, मिलत खिलत लजियात।
    भरे भौन में करत हैं, नैनन ही सब बात॥"
  • मात्रा विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ (11+13 के दो खंड)

4. हरिगीतिका:

  • उदाहरण: "मधुर मधुर मेरे दीपक जल,
    युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल।"
  • मात्रा विश्लेषण: प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ (16+12 के दो खंड)

6. मात्रा गणना की विधि

मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना कैसे करें:

1. लघु वर्ण: ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) = 1 मात्रा
2. गुरु वर्ण: दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) = 2 मात्राएँ
3. अनुस्वार/अनुनासिक: ँ, ं = 1 मात्रा
4. विसर्ग: : (प्रातः) = 1 मात्रा
5. हलंत: व्यंजन के नीचे रेखा (क्) = 0.5 मात्रा (गिनती में नहीं)
6. संयुक्ताक्षर: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र = 2 मात्राएँ

एक उदाहरण से समझें: "राम" शब्द में - रा (दीर्घ स्वर = 2 मात्राएँ) + म (व्यंजन = कोई मात्रा नहीं) = कुल 2 मात्राएँ। "कृष्ण" में - कृ (ह्रस्व = 1) + ष् (हलंत = 0) + ण (व्यंजन = 0) = कुल 1 मात्रा (लेकिन व्यवहार में इसे 2 माना जाता है क्योंकि 'कृ' का उच्चारण लंबा होता है)।

7. सामान्य भ्रम और सावधानियाँ

छात्र अक्सर इन बातों में भ्रमित होते हैं और परीक्षा में गलतियाँ कर बैठते हैं:

  • मात्रा और वर्ण में भ्रम: मात्रिक छंद में मात्राएँ गिनी जाती हैं, वर्ण नहीं।
  • दोहा और सोरठा में अंतर: दोहा = 13+11, सोरठा = 11+13 (दोहे का उल्टा)।
  • गुरु-लघु का गलत निर्धारण: ह्रस्व स्वर = लघु (1 मात्रा), दीर्घ स्वर = गुरु (2 मात्राएँ)।
  • चौपाई में मात्रा गणना: चौपाई में हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं, इसमें कोई भिन्नता नहीं।
  • रोला और हरिगीतिका में भेद: रोला = 24 मात्राएँ, हरिगीतिका = 28 मात्राएँ।
  • मात्रा गणना में अशुद्धि: अनुस्वार, विसर्ग की मात्राएँ भूल जाना।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • मात्रिक छंद को 'मात्रावृत्त' भी कहते हैं।
  • दोहा सबसे प्रसिद्ध मात्रिक छंद है जिसका प्रयोग रहीम, तुलसी, कबीर सभी ने किया है।
  • चौपाई का प्रयोग मुख्यतः आख्यान काव्य (कहानी काव्य) में होता है।
  • हरिगीतिका छंद का प्रयोग भक्ति काव्य में अधिक होता है।
  • रोला छंद श्रृंगार रस के लिए उपयुक्त माना जाता है।
  • उल्लाला छंद वीर रस के लिए उपयुक्त है।
  • मात्रिक छंदों में यति (विराम) का विशेष महत्व है।
  • आधुनिक गीतों में भी मात्रिक छंदों का प्रयोग होता है, लेकिन कुछ परिवर्तनों के साथ।
  • मात्रिक छंदों का ज्ञान न केवल काव्य रचना के लिए बल्कि संगीत रचना के लिए भी उपयोगी है।

9. 🎯 मात्रिक छंद चुनौती

नीचे दिए गए 10 प्रश्नों में मात्रिक छंदों की पहचान करें:

1. "समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात" - यह किस मात्रिक छंद का उदाहरण है?

उत्तर: दोहा - इसमें पहले चरण में 13 और दूसरे में 11 मात्राएँ हैं।

2. "बंदउँ गुरु पद पदुम परागा" - यह किस छंद का उदाहरण है?

उत्तर: चौपाई - प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।

3. दोहे में कितनी मात्राएँ होती हैं?

उत्तर: दोहे में कुल 48 मात्राएँ होती हैं: पहले और तीसरे चरण में 13-13, दूसरे और चौथे में 11-11 मात्राएँ।

4. सोरठा और दोहा में क्या अंतर है?

उत्तर: सोरठा दोहे का उल्टा है: दोहा = 13+11, सोरठा = 11+13।

5. "मधुर मधुर मेरे दीपक जल" - यह किस छंद का उदाहरण है?

उत्तर: हरिगीतिका - प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ (16+12 के दो खंड)।

6. रोला छंद में प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?

उत्तर: रोला छंद में प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं (11+13 के दो खंड)।

7. गुरु और लघु वर्ण में क्या अंतर है?

उत्तर: गुरु वर्ण में दो मात्राएँ होती हैं (दीर्घ स्वर), लघु वर्ण में एक मात्रा होती है (ह्रस्व स्वर)।

8. "कहत नटत रीझत खिझत" - यह किस छंद का उदाहरण है?

उत्तर: रोला - यह रोला छंद का प्रसिद्ध उदाहरण है।

9. मात्रिक छंद में क्या गिना जाता है - मात्राएँ या वर्ण?

उत्तर: मात्रिक छंद में मात्राएँ गिनी जाती हैं, वर्ण नहीं।

10. चौपाई छंद का प्रयोग किस प्रसिद्ध ग्रंथ में हुआ है?

उत्तर: चौपाई छंद का प्रयोग तुलसीदास के रामचरितमानस में हुआ है।

10. सारांश

मात्रिक छंद हिंदी काव्य का सबसे महत्वपूर्ण और प्रचलित छंद है जो मात्राओं की गणना और उनके नियमित क्रम पर आधारित है। दोहा, सोरठा, चौपाई, रोला, हरिगीतिका जैसे मात्रिक छंदों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है और उसे एक विशिष्ट लय व संगीत प्रदान किया है। इन छंदों का ज्ञान न केवल काव्य रचना के लिए आवश्यक है बल्कि साहित्यिक समझ को भी विकसित करता है। मात्राओं की सही गणना, गुरु-लघु का ध्यान और छंद के नियमों का पालन - ये तीनों मात्रिक छंद की सफल रचना के मूल मंत्र हैं।

11. संबंधित विषय संकेत

इस विषय के बाद आगे पढ़ें: कक्षा 10-12 • वर्णिक छंद (Varnik Chhand / Alphabetic Meter)

📝 मात्रिक छंद अभ्यास कार्यपत्रक

मात्रिक छंद से संबंधित वर्कशीट।

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