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लोकोक्तियों की अवधारणा – प्रश्नोत्तर, अभ्यास और उदाहरण सहित (Concept of Proverbs) | Hindi Grammar | GPN

लोकोक्तियाँ हमारे बड़े-बुजुर्गों के अनुभव का खजाना हैं। ये छोटी-छोटी बातें जीवन का गहरा सबक सिखा जाती हैं। कक्षा 6-7 के विद्यार्थियों के लिए लोकोक्तियों को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि ये न केवल परीक्षा में पूछी जाती हैं, बल्कि रोज़मर्रा की बातचीत में भी खूब इस्तेमाल होती हैं। आइए, लोकोक्तियों की इस रोचक दुनिया में कदम रखें।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 6–7 (परिचय) | कक्षा 8–9 (अभ्यास) | कक्षा 10–12 (उच्च स्तर प्रयोग)


1. लोकोक्तियाँ क्या हैं? (What are Proverbs?)

'लोकोक्ति' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है - 'लोक' (आम जन) + 'उक्ति' (कहावत)। यानी आम लोगों की कहावत। लोकोक्तियाँ वे वाक्य होते हैं जो सदियों के अनुभव से निकले हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं। जैसे 'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत' - यह लोकोक्ति हमें समय पर काम करने की सीख देती है।

जब हम कहते हैं "बिना माँगे मोती मिले तो भी मत लो", तो यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सबक है। लोकोक्तियाँ हमें सही-गलत का ज्ञान कराती हैं और कम शब्दों में बड़ी बात कह जाती हैं।

2. परिभाषा (Definition)

परिभाषा: लोकोक्ति उस स्वतंत्र वाक्य को कहते हैं जो किसी घटना या स्थिति पर संपूर्ण टिप्पणी करता है। यह किसी समुदाय या समाज के सामूहिक अनुभव और ज्ञान को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर यह है कि मुहावरा वाक्यांश होता है, लोकोक्ति पूरा वाक्य।

3. लोकोक्तियों की पहचान (Key Features)

लोकोक्तियों की चार खास पहचान हैं:

  • पूर्ण वाक्य: लोकोक्ति स्वयं में पूरा वाक्य होती है, जैसे 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे'।
  • स्वतंत्र प्रयोग: इसे वाक्य में जोड़े बिना भी बोला जा सकता है।
  • जीवन सबक: हर लोकोक्ति में कोई न कोई सीख छिपी होती है।
  • लोक प्रचलित: ये सदियों से लोगों की जुबान पर चढ़ी हैं।

4. मुहावरा और लोकोक्ति में अंतर (Difference between Idiom and Proverb)

अक्सर छात्र मुहावरे और लोकोक्ति में भ्रमित हो जाते हैं। आइए, तालिका के माध्यम से अंतर समझें:

क्रम मुहावरा (Idiom) लोकोक्ति (Proverb)
1 वाक्यांश होता है, पूरा वाक्य नहीं पूरा वाक्य होता है, स्वतंत्र
2 अकेला प्रयोग नहीं होता अकेला प्रयोग हो सकता है
3 उदाहरण: 'आँखों का तारा' उदाहरण: 'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत'
4 केवल अर्थ बताता है पूरी स्थिति पर टिप्पणी करता है

5. 50 प्रचलित लोकोक्तियाँ (50 Popular Proverbs)

नीचे 5 श्रेणियों में 50 प्रचलित लोकोक्तियाँ दी गई हैं। प्रत्येक श्रेणी में 10 लोकोक्तियाँ हैं। लोकोक्ति का अर्थ और वाक्य प्रयोग देखने के लिए बटन पर क्लिक करें।

श्रेणी 1: समय और अवसर से जुड़ी लोकोक्तियाँ देखने के लिए नीचे का बटन दबाएं:

  • 1. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत — समय निकल जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं।
    प्रयोग: परीक्षा में फेल होने के बाद रोने से क्या फायदा, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
  • 2. कल करे सो आज कर, आज करे सो अब — काम को टालना नहीं चाहिए।
    प्रयोग: होमवर्क कल पर मत टालो, कल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
  • 3. जो बीत गई सो बात गई — बीती बातों को भूल जाना चाहिए।
    प्रयोग: पिछले साल की असफलता के बारे में मत सोचो, जो बीत गई सो बात गई।
  • 4. थोथा चना बाजे घना — जिसमें गुण नहीं, वही ज्यादा शोर करता है।
    प्रयोग: जो छात्र कम पढ़ा होता है, वही क्लास में सबसे ज्यादा बोलता है - थोथा चना बाजे घना।
  • 5. दूर के ढोल सुहावने — दूर की चीज़ें अच्छी लगती हैं।
    प्रयोग: विदेश जाने का सपना सब देखते हैं, पर दूर के ढोल सुहावने वाली बात है।
  • 6. नाच न जाने आँगन टेढ़ा — अयोग्य व्यक्ति बहाने बनाता है।
    प्रयोग: जो छात्र पढ़ना नहीं चाहता, वह कहता है टीचर ठीक नहीं पढ़ाते - नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
  • 7. पहले आप, बाद में आप — स्वार्थी व्यक्ति का नजरिया।
    प्रयोग: उसे किसी की परवाह नहीं, उसका तो नियम है - पहले आप, बाद में आप।
  • 8. बहती गंगा में हाथ धोना — अवसर का लाभ उठाना।
    प्रयोग: जब मौका मिले तो काम निकाल लेना चाहिए, बहती गंगा में हाथ धोना चाहिए।
  • 9. मुँह में राम बगल में छुरी — मीठी बातें, पर दिल में बुराई।
    प्रयोग: वह तो मुँह में राम बगल में छुरी वाला आदमी है, उससे सावधान रहना।
  • 10. साँप मरे तो लाठी टूटे — दोनों तरफ से नुकसान।
    प्रयोग: उस केस में वकील ने इतनी फीस ली कि साँप मरे तो लाठी टूटे वाली स्थिति हो गई।

 

श्रेणी 2: संगति और साथ से जुड़ी लोकोक्तियाँ देखने के लिए नीचे का बटन दबाएं:

  • 11. संगत का असर, जैसे संगत वैसा असर — जैसी संगत, वैसा प्रभाव।
    प्रयोग: बुरे बच्चों के साथ घूमने से उसकी आदतें खराब हो गईं - संगत का असर, जैसे संगत वैसा असर।
  • 12. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता — अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता।
    प्रयोग: इस काम के लिए टीम चाहिए, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
  • 13. आप बुरे तो जग बुरा — जो स्वयं बुरा होता है, उसे सब बुरे लगते हैं।
    प्रयोग: वह हर किसी में बुराई निकालता है, पर आप बुरे तो जग बुरा वाली बात है।
  • 14. एक और एक ग्यारह होते हैं — एकता में शक्ति है।
    प्रयोग: भारतीय सेना में एक और एक ग्यारह होते हैं।
  • 15. एक हाथ से ताली नहीं बजती — झगड़े के लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार होते हैं।
    प्रयोग: तुम अकेले नहीं, उसने भी गलती की - एक हाथ से ताली नहीं बजती।
  • 16. जैसा देश वैसा भेष — जैसा माहौल, वैसा व्यवहार।
    प्रयोग: विदेश जाकर उसने वहाँ के रहन-सहन अपना लिया - जैसा देश वैसा भेष।
  • 17. जैसी संगत बैठिए, वैसी ही बातें कहिए — जैसे लोग, वैसी बातें।
    प्रयोग: बच्चों को अच्छी संगत देनी चाहिए, क्योंकि जैसी संगत बैठिए, वैसी ही बातें कहिए।
  • 18. तीन लड़कों का तमाशा — तीन के समूह में अक्सर मतभेद होता है।
    प्रयोग: तीन दोस्तों की टीम ज्यादा दिन नहीं चलती - तीन लड़कों का तमाशा।
  • 19. दूध का दूध, पानी का पानी — सच सामने आना।
    प्रयोग: पुलिस ने सबूत इकट्ठा करके दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया।
  • 20. नेताजी के घर नौकर नहीं — दिखावा अधिक, हकीकत कम।
    प्रयोग: वह बड़े-बड़े दावे करता है, पर नेताजी के घर नौकर नहीं वाली बात है।

 

श्रेणी 3: व्यवहार और स्वभाव से जुड़ी लोकोक्तियाँ देखने के लिए नीचे का बटन दबाएं:

  • 21. अधजल गगरी छलकत जाए — थोड़ा ज्ञान होने पर व्यक्ति घमंड करता है।
    प्रयोग: थोड़ा अंग्रेजी सीखते ही वह इतराने लगा - अधजल गगरी छलकत जाए।
  • 22. आम के आम, गुठलियों के दाम — दोहरा फायदा।
    प्रयोग: इस सौदे में उसे आम के आम, गुठलियों के दाम मिल गए।
  • 23. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे — गलत आदमी, सही पर उल्टा दोष लगाए।
    प्रयोग: चोर पकड़ा गया, पर पुलिस पर ही केस कर दिया - उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।
  • 24. कंगाली में आटा गीला — मुसीबत पर मुसीबत आना।
    प्रयोग: नौकरी गई, बीमार पड़ गए - कंगाली में आटा गीला हो गया।
  • 25. खोदा पहाड़ निकली चुहिया — बहुत मेहनत, बहुत कम नतीजा।
    प्रयोग: इतनी तैयारी के बाद सिर्फ 40% नंबर? खोदा पहाड़ निकली चुहिया।
  • 26. गीदड़ भी न मरा, हज भी न हुआ — न यह काम हुआ, न वह।
    प्रयोग: पढ़ाई भी नहीं हुई, खेल भी नहीं खेले - गीदड़ भी न मरा, हज भी न हुआ।
  • 27. घर का भेदी लंका ढाये — अपना ही नुकसान करता है।
    प्रयोग: कंपनी के डाटा लीक करने वाला तो अपना ही आदमी निकला - घर का भेदी लंका ढाये।
  • 28. चिराग तले अंधेरा — अपनों में ही बुराई होना।
    प्रयोग: पुलिस वाले के घर में ही चोरी - चिराग तले अंधेरा।
  • 29. जाकी जैसी सोच, वैसी ही पहुँच — जैसा सोचोगे, वैसा ही पाओगे।
    प्रयोग: उसने कड़ी मेहनत की और IIT में सीट मिल गई - जाकी जैसी सोच, वैसी ही पहुँच।
  • 30. ढाक के तीन पात — हमेशा एक जैसी हालत।
    प्रयोग: उसकी नौकरी की क्या बात करें, ढाक के तीन पात वाली स्थिति है।

 

श्रेणी 4: परिश्रम और मेहनत से जुड़ी लोकोक्तियाँ देखने के लिए नीचे का बटन दबाएं:

  • 31. करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान — अभ्यास से मूर्ख भी विद्वान बन जाता है।
    प्रयोग: रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ने से वह कमजोर छात्र भी अव्वल आ गया - करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
  • 32. उद्योगिन्नरः पुरुषलक्षणम् — मेहनत करना पुरुष का लक्षण है।
    प्रयोग: हार मान लेना कायरता है, मेहनत करते रहो - उद्योगिन्नरः पुरुषलक्षणम्।
  • 33. उद्योगी को क्या कमी — मेहनती को कभी कमी नहीं होती।
    प्रयोग: रोज काम करने वाले मजदूर के घर खाने की कमी नहीं - उद्योगी को क्या कमी।
  • 34. परिश्रम सफलता की कुंजी है — मेहनत से ही सफलता मिलती है।
    प्रयोग: सचिन तेंदुलकर ने मेहनत से ही यह मुकाम हासिल किया - परिश्रम सफलता की कुंजी है।
  • 35. बिना मेहनत कुछ नहीं मिलता — मेहनत जरूरी है।
    प्रयोग: बिना पढ़े नंबर नहीं आ सकते, बिना मेहनत कुछ नहीं मिलता।
  • 36. मेहनत की कमाई मीठी होती है — अपनी मेहनत का फल अच्छा लगता है।
    प्रयोग: नौकरी की पहली तनख्वाह देखकर बहुत खुशी हुई - मेहनत की कमाई मीठी होती है।
  • 37. मेहनत का फल मीठा होता है — मेहनत रंग लाती है।
    प्रयोग: आज परीक्षा में अव्वल आने पर पता चला कि मेहनत का फल मीठा होता है।
  • 38. रात-दिन एक करना — बहुत मेहनत करना।
    प्रयोग: उसने रात-दिन एक करके आईएएस पास किया।
  • 39. लकीर का फकीर होना — पुराने तरीकों से चिपके रहना।
    प्रयोग: नई तकनीक नहीं अपनाएगा तो लकीर का फकीर बना रहेगा।
  • 40. हाथ कंगन को आरसी क्या — जो चीज़ साफ दिख रही हो, उसके सबूत की जरूरत नहीं।
    प्रयोग: सूरज को दिखाने के लिए दीये की क्या जरूरत - हाथ कंगन को आरसी क्या।

 

श्रेणी 5: जीवन और नैतिकता से जुड़ी लोकोक्तियाँ देखने के लिए नीचे का बटन दबाएं:

  • 41. जैसा बोओगे, वैसा काटोगे — जैसा कर्म, वैसा फल।
    प्रयोग: अगर मेहनत नहीं करोगे तो फेल हो जाओगे - जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।
  • 42. सच्चाई की हमेशा जीत होती है — झूठ का साथ नहीं देता।
    प्रयोग: अदालत में सच सामने आ गया - सच्चाई की हमेशा जीत होती है।
  • 43. ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है — सच बोलना ही अच्छा है।
    प्रयोग: झूठ बोलकर भागने से अच्छा है सच कह दो - ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।
  • 44. अति का नाश — किसी भी चीज की अति बुरी होती है।
    प्रयोग: बहुत ज्यादा मिठाई खाने से बीमार पड़ गए - अति का नाश।
  • 45. सब्र का फल मीठा होता है — धैर्य का फल अच्छा होता है।
    प्रयोग: सालों इंतजार के बाद नौकरी मिल ही गई - सब्र का फल मीठा होता है।
  • 46. दान देना पुण्य है — दान करना अच्छा काम है।
    प्रयोग: गरीबों की मदद करो, दान देना पुण्य है।
  • 47. परोपकार का फल मीठा होता है — दूसरों की मदद का फल अच्छा होता है।
    प्रयोग: बाढ़ पीड़ितों की मदद करके बहुत संतोष मिला - परोपकार का फल मीठा होता है।
  • 48. बुराई का बुरा अंत — बुरे कामों का अंत बुरा होता है।
    प्रयोग: रावण का अंत बुरा हुआ - बुराई का बुरा अंत।
  • 49. मान से बड़ा नहीं कोई — सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं।
    प्रयोग: पैसा आएगा-जाएगा, पर इज्जत चली गई तो मान से बड़ा नहीं कोई।
  • 50. सत्य की हमेशा जीत — सच हमेशा जीतता है।
    प्रयोग: झूठ का सहारा लेने वाला अंत में हारता है - सत्य की हमेशा जीत।

6. लोकोक्तियों का वाक्य प्रयोग (Usage in Sentences)

लोकोक्तियाँ स्वतंत्र वाक्य होती हैं, इसलिए इन्हें वाक्य में जोड़ने के लिए "यह सच है कि", "ठीक ही कहा है कि", "जैसा कि कहावत है" आदि का प्रयोग किया जाता है।

  • सही प्रयोग: उसने बिना पढ़े परीक्षा दी और फेल हो गया। ठीक ही कहा है - "बिना मेहनत कुछ नहीं मिलता।"
  • सही प्रयोग: तुम रोज कल पर टालते हो, याद रखो - "कल करे सो आज कर, आज करे सो अब।"

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ (Common Mistakes)

लोकोक्तियों में अक्सर शब्दों को लेकर भ्रम हो जाता है।

  • भ्रम: 'अब पछताए होत क्या' को 'तब पछताए होत क्या' कहना - गलत है।
  • भ्रम: 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' को 'उल्टा चोर पुलिस को डाँटे' कहना - लोकोक्ति के शब्द न बदलें।
  • भ्रम: लोकोक्ति और मुहावरे में अंतर न समझना - लोकोक्ति पूरा वाक्य है।
  • भ्रम: लोकोक्ति के बीच में क्रिया का रूप बदलना - जैसे 'चिड़िया चुग गई' को 'चिड़िया चुग गयी' न लिखें।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Points)

  • लोकोक्तियाँ अक्सर रिक्त स्थान भरो, सही जोड़ी मिलाओ और अर्थ लिखो वाले प्रश्नों में पूछी जाती हैं।
  • लोकोक्ति का अर्थ लिखते समय संक्षिप्त और सटीक अर्थ लिखें।
  • वाक्य प्रयोग में लोकोक्ति को उद्धरण चिह्नों (" ") में लिखना चाहिए।
  • प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ जैसे 'अब पछताए होत क्या', 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' अक्सर पूछी जाती हैं।
  • NCERT की किताबों में दी गई लोकोक्तियों पर विशेष ध्यान दें।

9. 🎯 लोकोक्ति चुनौती (10 सवाल)

नीचे दी गई लोकोक्तियों का अर्थ लिखें और वाक्य में प्रयोग करें। पहले खुद सोचें, फिर उत्तर देखें।

1. 'अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: समय निकल जाने पर पछताने से कोई लाभ नहीं।
वाक्य प्रयोग: परीक्षा में फेल होने के बाद रोने से क्या फायदा - अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

2. 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: गलत आदमी, सही पर उल्टा दोष लगाए।
वाक्य प्रयोग: चोर पकड़ा गया, पर पुलिस पर ही केस कर दिया - उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।

3. 'एक और एक ग्यारह होते हैं' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: एकता में शक्ति है।
वाक्य प्रयोग: साथ मिलकर काम करोगे तो जरूर सफल होगे - एक और एक ग्यारह होते हैं।

4. 'करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: अभ्यास से मूर्ख भी विद्वान बन जाता है।
वाक्य प्रयोग: रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ने से कमजोर छात्र भी अव्वल आ गया - करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।

5. 'चिराग तले अंधेरा' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: अपनों में ही बुराई होना।
वाक्य प्रयोग: पुलिस वाले के घर में ही चोरी - चिराग तले अंधेरा।

6. 'जैसा देश वैसा भेष' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: जैसा माहौल, वैसा व्यवहार।
वाक्य प्रयोग: विदेश जाकर उसने वहाँ के रहन-सहन अपना लिया - जैसा देश वैसा भेष।

7. 'थोथा चना बाजे घना' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: जिसमें गुण नहीं, वही ज्यादा शोर करता है।
वाक्य प्रयोग: जो छात्र कम पढ़ा होता है, वही क्लास में सबसे ज्यादा बोलता है - थोथा चना बाजे घना।

8. 'दूर के ढोल सुहावने' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: दूर की चीज़ें अच्छी लगती हैं।
वाक्य प्रयोग: विदेश जाने का सपना सब देखते हैं, पर दूर के ढोल सुहावने वाली बात है।

9. 'नाच न जाने आँगन टेढ़ा' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: अयोग्य व्यक्ति बहाने बनाता है।
वाक्य प्रयोग: जो छात्र पढ़ना नहीं चाहता, वह कहता है टीचर ठीक नहीं पढ़ाते - नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

10. 'बहती गंगा में हाथ धोना' - अर्थ और वाक्य प्रयोग

अर्थ: अवसर का लाभ उठाना।
वाक्य प्रयोग: जब मौका मिले तो काम निकाल लेना चाहिए - बहती गंगा में हाथ धोना चाहिए।

10. सारांश (Summary)

लोकोक्तियाँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। कक्षा 6-7 के विद्यार्थियों के लिए ये 50 लोकोक्तियाँ न सिर्फ परीक्षा में मदद करेंगी, बल्कि जीवन में सही-गलत की पहचान भी कराएँगी। याद रखें - लोकोक्तियाँ पूरे वाक्य होती हैं और इनका अपना एक अलग महत्व है।

11. संबंधित विषय संकेत (Related Topics)

आगे पढ़ें: प्रचलित लोकोक्तियाँ - कक्षा 8-9

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