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कक्षा 10 – कर चले हम फ़िदा – कैफ़ी आज़मी (स्पर्श) – सैनिक बलिदान और राष्ट्रप्रेम की ओजपूर्ण काव्य अभिव्यक्ति | GPN

📘 पाठ – कर चले हम फ़िदा | कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श) | GPN

📚 कक्षा: 10 | 📖 पुस्तक: स्पर्श भाग 2 | ✍️ कवि: कैफ़ी आज़मी | 📝 प्रकार: देशभक्ति गीत | ⭐⭐⭐ बहुत महत्वपूर्ण


📌 अनुक्रमणिका

इस पाठ को गहराई से समझने के लिए छात्र कक्षा 10 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 कवि परिचय

कैफ़ी आज़मी (1919-2002): जन्म: 14 जनवरी 1919, मिजवां, उत्तर प्रदेश। प्रमुख रचनाएँ: 'झंकार', 'आखिरी शब', 'सरमाया', 'वरक' (काव्य संग्रह)। वे प्रसिद्ध शायर, गीतकार और प्रगतिशील लेखक थे। उन्होंने 'हीर रांझा', 'गरम हवा', 'हकीकत' जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, देशभक्ति, मानवीय मूल्य और प्रगतिशील विचारधारा की झलक मिलती है। उन्हें 'सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार' और 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

📖 पाठ की पृष्ठभूमि

'कर चले हम फ़िदा' कविता भारत-चीन युद्ध (1962) की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। यह कविता फिल्म 'हकीकत' के लिए लिखी गई थी, जो 1962 के युद्ध पर आधारित थी। इस कविता में भारतीय सैनिकों के देशभक्ति, बलिदान और साहस का गुणगान किया गया है। कवि ने सैनिकों के माध्यम से देश के प्रति प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना को अभिव्यक्त किया है। यह कविता आज भी देशभक्ति की भावना जगाने के लिए गाई जाती है।

🎯 पाठ का महत्व

बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से कवि परिचय, देशभक्ति की भावना, सैनिकों के बलिदान का वर्णन, पद्यांशों की व्याख्या, अलंकारों का प्रयोग और कवि की भाषा शैली पर प्रश्न पूछे जाते हैं। यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है।

2. सरल सारांश

यह एक देशभक्ति गीत है जो भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और देशप्रेम का गुणगान करता है। कवि कहते हैं कि हम सैनिक देश पर अपना सब कुछ न्योछावर कर चले। हम जानते हैं कि हम वापस नहीं लौटेंगे, फिर भी हम आगे बढ़ रहे हैं। दुश्मनों से लोहा लेते हुए हम आखिरी सांस तक लड़ेंगे। हम अपने वतन की खातिर मर मिटेंगे। हमारा खून बहेगा, पर देश का मान नहीं जाने देंगे। हम चाहते हैं कि हमारे बाद आने वाली पीढ़ियाँ यह याद रखें कि हमने उनके लिए अपना बलिदान दिया। यह गीत सैनिकों के अदम्य साहस और देशभक्ति का प्रतीक है।

3. पद्यांश व्याख्या

📌 पद्यांश 1

पद्यांश: कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

व्याख्या: कवि सैनिकों के माध्यम से कहते हैं कि हम अपने प्राण और शरीर देश पर न्योछावर कर चले। हे साथियों! अब यह वतन तुम्हारे हवाले है। यह पंक्ति सैनिकों के बलिदान और उनके अंतिम समय की भावना को व्यक्त करती है। वे जानते हैं कि वे वापस नहीं लौटेंगे, इसलिए वे देश की जिम्मेदारी अपने साथियों को सौंप रहे हैं।

📌 पद्यांश 2

पद्यांश: सर झुका है शहीदों को सलाम आज,
फिर लहराएगा यह परचम आज।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि आज हम उन शहीदों को सलाम करते हैं जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके बलिदान के कारण ही यह तिरंगा फिर से लहराएगा। कवि ने यहाँ शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना व्यक्त की है। शहीदों के बलिदान से ही देश का मान बना रहता है।

📌 पद्यांश 3

पद्यांश: लाख दुश्मन ने दामन न हिलाया साथियो,
हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए साथियो।

व्याख्या: कवि सैनिकों के साहस का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि लाख दुश्मनों ने हमला किया, लेकिन हम डिगे नहीं। हमने दुश्मनों के छक्के हिला दिए। यह पंक्ति भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और वीरता को दर्शाती है। वे कितने भी बड़े दुश्मन के सामने नहीं झुके, बल्कि उन्हें परास्त किया।

📌 पद्यांश 4

पद्यांश: हँसते-हँसते कट गया सफर साथियो,
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि हमने यह यात्रा (जीवन या युद्ध) हँसते-हँसते पूरी कर ली। हमें कोई गिला नहीं, कोई शिकवा नहीं। अब यह वतन तुम्हारे हवाले है। यह पंक्ति सैनिकों के संतोष और निस्वार्थ बलिदान को दर्शाती है। वे मुस्कुराते हुए बलिदान दे रहे हैं, बिना किसी शिकायत के।

📌 पद्यांश 5

पद्यांश: याद आएगा बहुत ये देश का वो कारवाँ,
जो निकले थे न जाने किस तरफ आज।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि आने वाली पीढ़ियों को यह देश का वह कारवाँ (सैनिक दल) बहुत याद आएगा, जो निकले थे और नहीं जानते थे कि किधर जा रहे हैं। यह पंक्ति सैनिकों के अनिश्चित भविष्य और उनके बलिदान को दर्शाती है। वे नहीं जानते कि लौटेंगे या नहीं, फिर भी वे देश की रक्षा के लिए निकल पड़े।

अन्य अध्यायों को पढ़ने के लिए छात्र कक्षा 9 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 9 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

4. शब्दार्थ

शब्द अर्थ
फ़िदान्योछावर, बलिदान
जान-ओ-तनप्राण और शरीर
हवालेसुपुर्द, सौंपना
वतनदेश, मातृभूमि
शहीददेश के लिए बलिदान देने वाला
सलामप्रणाम, सम्मान
परचमझंडा, तिरंगा
दुश्मनशत्रु
दामनआँचल, पल्ला
छक्केहोश, सुध-बुध
सफरयात्रा
कारवाँकाफिला, समूह
बलिदानकुर्बानी
वीरताबहादुरी
साहसहिम्मत
देशभक्तिदेश प्रेम
गौरवसम्मान, शान
कृतज्ञताएहसान मानना

5. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)

प्रश्न 1. 'कर चले हम फ़िदा' कविता के कवि कौन हैं? [2020]

'कर चले हम फ़िदा' कविता के कवि प्रसिद्ध शायर और गीतकार कैफ़ी आज़मी हैं।

प्रश्न 2. कैफ़ी आज़मी का जन्म कहाँ और कब हुआ था? [2019]

कैफ़ी आज़मी का जन्म 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के मिजवां गाँव में हुआ था।

प्रश्न 3. कैफ़ी आज़मी की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए। [2021]

कैफ़ी आज़मी की प्रमुख रचनाएँ हैं - 'झंकार', 'आखिरी शब', 'सरमाया', 'वरक' (काव्य संग्रह) आदि।

प्रश्न 4. यह कविता किस फिल्म के लिए लिखी गई थी? [2018]

यह कविता फिल्म 'हकीकत' के लिए लिखी गई थी, जो 1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित थी।

प्रश्न 5. 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन' का क्या अर्थ है? [2020]

इसका अर्थ है - हम अपने प्राण और शरीर देश पर न्योछावर कर चले।

प्रश्न 6. 'अब तुम्हारे हवाले वतन' से कवि का क्या आशय है? [2019]

इससे कवि का आशय है कि अब यह देश तुम लोगों के हवाले (जिम्मेदारी में) है। सैनिक अपने साथियों को देश की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं।

प्रश्न 7. कवि ने शहीदों के प्रति क्या भाव व्यक्त किया है? [2021]

कवि ने शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव व्यक्त किया है। वे कहते हैं कि आज हम शहीदों को सलाम करते हैं।

प्रश्न 8. 'हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए' का क्या अर्थ है? [2018]

इसका अर्थ है - हमने दुश्मनों को परास्त कर दिया, उनके होश उड़ा दिए।

प्रश्न 9. कवि को किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया? [2020]

कैफ़ी आज़मी को 'सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार' और 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 10. यह कविता किस भावना से प्रेरित है? [2019]

यह कविता देशभक्ति, बलिदान और वीरता की भावना से प्रेरित है।

6. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)

प्रश्न 1. 'कर चले हम फ़िदा' कविता में सैनिकों की किन भावनाओं को व्यक्त किया गया है? [2020]

कैफ़ी आज़मी ने इस कविता में सैनिकों की अनेक भावनाओं को व्यक्त किया है:

1. देशभक्ति: सैनिकों में देश के प्रति गहरा प्रेम है। वे देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन' इसी भावना को व्यक्त करता है।

2. बलिदान की भावना: सैनिक जानते हैं कि वे वापस नहीं लौटेंगे, फिर भी वे हँसते-हँसते बलिदान दे रहे हैं। 'हँसते-हँसते कट गया सफर' इसी भावना को दर्शाता है।

3. साहस और वीरता: सैनिकों में अपार साहस है। वे दुश्मनों से बेखौफ होकर लड़ते हैं। 'हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए' उनकी वीरता को दर्शाता है।

4. जिम्मेदारी का भाव: सैनिक अपने कर्तव्य को समझते हैं। वे देश की रक्षा को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

5. साथियों के प्रति विश्वास: वे अपने साथियों पर पूरा विश्वास करते हैं और उन्हें देश की जिम्मेदारी सौंपते हैं - 'अब तुम्हारे हवाले वतन'।

6. संतोष की भावना: सैनिकों को कोई शिकवा-शिकायत नहीं। वे संतोष के साथ बलिदान हो रहे हैं।

इस प्रकार, कवि ने सैनिकों की विभिन्न भावनाओं का सुंदर चित्रण किया है।

प्रश्न 2. 'सर झुका है शहीदों को सलाम आज' - इस पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। [2019]

इस पंक्ति का भावार्थ निम्नलिखित है:

1. शाब्दिक अर्थ: आज हम शहीदों को सलाम करते हैं, उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।

2. शहीदों के प्रति सम्मान: यह पंक्ति उन वीर सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करती है जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। 'सर झुकाना' सम्मान का प्रतीक है।

3. कृतज्ञता का भाव: हम शहीदों के ऋणी हैं। उनके बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र और सुरक्षित हैं। यह पंक्ति हमारी कृतज्ञता को व्यक्त करती है।

4. बलिदान की स्मृति: शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। हर साल, हर दिन हम उन्हें याद करते हैं और सलाम करते हैं।

5. प्रेरणा का स्रोत: शहीद हमारे लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उनका बलिदान हमें देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है।

6. आने वाली पंक्ति से संबंध: 'फिर लहराएगा यह परचम' - शहीदों के बलिदान से ही तिरंगा फिर से लहराएगा। यह उनके बलिदान की सार्थकता को दर्शाता है।

इस प्रकार, यह पंक्ति शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की गहरी भावना को व्यक्त करती है।

प्रश्न 3. 'हँसते-हँसते कट गया सफर साथियो' - इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है? [2021]

इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने गहरा संदेश दिया है:

1. शाब्दिक अर्थ: हमने यह यात्रा (जीवन या युद्ध) हँसते-हँसते पूरी कर ली।

2. निस्वार्थ बलिदान: सैनिक बिना किसी शिकायत के, बिना किसी लालसा के बलिदान हो रहे हैं। वे हँसते हुए मौत को गले लगा रहे हैं। यह निस्वार्थ बलिदान का उच्चतम रूप है।

3. संतोष की भावना: सैनिकों को कोई मलाल नहीं, कोई अफसोस नहीं। वे संतुष्ट हैं कि उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया।

4. साहस का प्रतीक: हँसते हुए मौत का सामना करना सबसे बड़े साहस की निशानी है। यह पंक्ति सैनिकों के असीम साहस को दर्शाती है।

5. जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण: सैनिक जीवन के अंतिम क्षणों में भी सकारात्मक हैं, हँस रहे हैं। यह जीवन के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

6. कर्तव्यपरायणता: वे जानते हैं कि यह सफर (युद्ध) कठिन है, शायद आखिरी है, फिर भी वे उसे हँसते हुए पूरा कर रहे हैं। यह उनकी कर्तव्यपरायणता को दर्शाता है।

7. अगली पीढ़ी के लिए संदेश: यह पंक्ति आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देती है कि देश के लिए बलिदान देना गर्व की बात है, उसे हँसते हुए स्वीकार करना चाहिए।

इस प्रकार, यह पंक्ति सैनिकों के साहस, संतोष और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है।

प्रश्न 4. 'लाख दुश्मन ने दामन न हिलाया साथियो' - इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [2018]

इस पंक्ति का आशय निम्नलिखित है:

1. शाब्दिक अर्थ: लाख दुश्मनों ने हमला किया, लेकिन हम डिगे नहीं, हमारा आँचल नहीं हिला।

2. सैनिकों की दृढ़ता: यह पंक्ति भारतीय सैनिकों की अटूट दृढ़ता को दर्शाती है। चाहे कितने भी दुश्मन हों, कितना भी बड़ा हमला हो, वे डिगने वाले नहीं।

3. अडिग संकल्प: 'दामन न हिलाया' का अर्थ है कि वे अपने संकल्प से डिगे नहीं। उनका मनोबल टूटा नहीं, उनका हौसला नहीं टूटा।

4. संख्या का महत्व न होना: 'लाख दुश्मन' कहकर कवि यह बताना चाहते हैं कि दुश्मन चाहे कितने भी हों, वीर सैनिकों के सामने उनकी एक नहीं चलती।

5. आत्मविश्वास: यह पंक्ति सैनिकों के अपार आत्मविश्वास को दर्शाती है। वे जानते हैं कि वे किसी भी परिस्थिति में डटे रहेंगे।

6. देशभक्ति की शक्ति: देशभक्ति की भावना इतनी प्रबल है कि कोई भी दुश्मन उन्हें डिगा नहीं सकता।

7. अगली पंक्ति से तुलना: 'हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए' - यह पंक्ति बताती है कि उन्होंने न केवल खुद को बचाया, बल्कि दुश्मनों को परास्त भी किया।

इस प्रकार, यह पंक्ति भारतीय सैनिकों के अडिग साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

प्रश्न 5. 'कर चले हम फ़िदा' कविता में निहित देशभक्ति की भावना का वर्णन कीजिए। [2020]

इस कविता में देशभक्ति की भावना का सजीव चित्रण हुआ है:

1. बलिदान के लिए तत्परता: 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन' - सैनिक अपने प्राण और शरीर देश पर न्योछावर करने को तैयार हैं। यह देशभक्ति की चरम अभिव्यक्ति है।

2. देश की जिम्मेदारी: 'अब तुम्हारे हवाले वतन' - सैनिकों के लिए देश सबसे कीमती है। वे उसे अपने साथियों की जिम्मेदारी में दे रहे हैं।

3. शहीदों के प्रति सम्मान: 'सर झुका है शहीदों को सलाम' - देशभक्ति में शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव शामिल है।

4. तिरंगे का गौरव: 'फिर लहराएगा यह परचम' - देश के झंडे का गौरव बनाए रखना देशभक्ति का अभिन्न अंग है।

5. दुश्मनों से लोहा लेना: 'हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए' - देश के दुश्मनों से बेखौफ होकर लड़ना देशभक्ति की निशानी है।

6. हँसते हुए बलिदान: 'हँसते-हँसते कट गया सफर' - देश के लिए हँसते हुए बलिदान देना सच्ची देशभक्ति है।

7. भविष्य की चिंता: 'याद आएगा बहुत ये देश का वो कारवाँ' - देशभक्त अपने बाद आने वाली पीढ़ियों के बारे में भी सोचते हैं।

इस प्रकार, यह कविता देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत है।

प्रश्न 6. कैफ़ी आज़मी की भाषा शैली की विशेषताएँ बताइए। [2019]

कैफ़ी आज़मी की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

भाषा:
1. उर्दू-हिंदी मिश्रित भाषा: कैफ़ी आज़मी उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे, इसलिए उनकी भाषा में उर्दू के शब्दों की बहुतायत है - 'फ़िदा', 'जान-ओ-तन', 'हवाले', 'वतन', 'सलाम', 'परचम' आदि।
2. सरलता: उनकी भाषा सरल और सहज है, जो आम जनता की भाषा है।
3. प्रवाहपूर्णता: उनकी भाषा में स्वाभाविक प्रवाह है। पढ़ते समय रुकावट महसूस नहीं होती।
4. संगीतात्मकता: उनकी भाषा में संगीत है, इसलिए उनके गीत फिल्मों के लिए उपयुक्त होते हैं।

शैली:
1. गेय शैली: यह कविता मूलतः एक गीत है, इसलिए इसमें गेयता और संगीतात्मकता है।
2. देशभक्ति शैली: उनकी इस कविता में देशभक्ति की भावना प्रबल है।
3. प्रेरणादायक शैली: उनकी शैली प्रेरणादायक है, जो पाठक के मन में देशभक्ति का संचार करती है।
4. संवाद शैली: वे सैनिकों के माध्यम से सीधे पाठक से संवाद करते हैं - 'साथियो'।
5. प्रतीकों का प्रयोग: 'परचम', 'कारवाँ' जैसे प्रतीकों का प्रयोग।
6. भावप्रवणता: उनकी शैली में गहरी भावप्रवणता है, जो पाठक को भावुक कर देती है।

इस प्रकार, कैफ़ी आज़मी की भाषा शैली अत्यंत प्रभावशाली है।

प्रश्न 7. 'कर चले हम फ़िदा' कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। [2021]

इस कविता का मूलभाव बहुआयामी है:

1. देशभक्ति: इस कविता का प्रमुख भाव देशभक्ति है। यह उन वीर सैनिकों की गाथा है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

2. बलिदान का महत्व: कविता बलिदान के महत्व को रेखांकित करती है। सैनिक हँसते-हँसते बलिदान हो रहे हैं, बिना किसी शिकायत के।

3. कर्तव्यनिष्ठा: सैनिक अपने कर्तव्य के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। वे जानते हैं कि यह सफर कठिन है, फिर भी वे डटे हैं।

4. साहस और वीरता: यह कविता सैनिकों के साहस और वीरता का गुणगान करती है। वे लाख दुश्मनों के सामने नहीं डिगे।

5. शहीदों के प्रति कृतज्ञता: कविता हमें शहीदों के प्रति कृतज्ञ होने की प्रेरणा देती है। उनके बलिदान के कारण ही आज तिरंगा लहरा रहा है।

6. देश की एकता और अखंडता: यह कविता देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संदेश देती है।

7. आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश: 'याद आएगा बहुत ये देश का वो कारवाँ' - यह पंक्ति आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाती है कि उनके पूर्वजों ने क्या बलिदान दिए।

इस प्रकार, यह कविता देशभक्ति, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा का अद्भुत संगम है।

प्रश्न 8. इस कविता में 'साथियो' शब्द की पुनरावृत्ति का क्या महत्व है? [2018]

इस कविता में 'साथियो' शब्द की पुनरावृत्ति का विशेष महत्व है:

1. संबोधन का सौंदर्य: 'साथियो' शब्द सैनिकों द्वारा अपने साथियों को संबोधित करने के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह संबोधन कविता को सजीव बना देता है।

2. आत्मीयता का भाव: 'साथियो' कहकर सैनिक अपने साथियों के प्रति आत्मीयता और अपनापन व्यक्त करते हैं। यह उनके गहरे संबंधों को दर्शाता है।

3. एकता का प्रतीक: यह शब्द सैनिकों की एकता का प्रतीक है। वे सब एक हैं, एक दूसरे के साथी हैं।

4. जिम्मेदारी सौंपने का भाव: 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो' - यहाँ 'साथियो' कहकर वे अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी (देश) उन्हें सौंप रहे हैं।

5. भावनात्मक जुड़ाव: इस शब्द की पुनरावृत्ति से सैनिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का पता चलता है। वे एक-दूसरे के लिए सब कुछ हैं।

6. विश्वास का प्रतीक: 'साथियो' कहकर वे अपने साथियों पर पूरा विश्वास जताते हैं कि वे देश की रक्षा करेंगे।

7. लय और संगीत: 'साथियो' शब्द की पुनरावृत्ति से कविता में एक विशेष लय और संगीत उत्पन्न होता है।

8. पाठक से जुड़ाव: यह शब्द पाठक को भी इस भावना से जोड़ता है, मानो वह भी उन सैनिकों का साथी हो।

इस प्रकार, 'साथियो' शब्द की पुनरावृत्ति कविता में अनेक स्तरों पर अर्थ रखती है।

प्रश्न 9. 'याद आएगा बहुत ये देश का वो कारवाँ' - इस पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं? [2020]

इस पंक्ति के माध्यम से कवि गहरा संदेश देना चाहते हैं:

1. शाब्दिक अर्थ: देश का वह कारवाँ (सैनिक दल) बहुत याद आएगा, जो निकले थे और नहीं जानते थे कि किधर जा रहे हैं।

2. बलिदान की स्मृति: कवि कहते हैं कि इन सैनिकों का बलिदान कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें हमेशा याद करेंगी।

3. अनिश्चितता का भाव: 'न जाने किस तरफ' - यह अंश सैनिकों के भविष्य की अनिश्चितता को दर्शाता है। वे नहीं जानते कि वे लौटेंगे या नहीं, फिर भी वे निकल पड़े।

4. साहस का प्रतीक: अनिश्चितता के बावजूद निकल पड़ना सबसे बड़े साहस की निशानी है। यह पंक्ति सैनिकों के इसी साहस को दर्शाती है।

5. इतिहास में अमर होना: यह कारवाँ इतिहास में अमर हो जाएगा। आने वाली पीढ़ियाँ इसे याद करेंगी।

6. देशभक्ति की मिसाल: यह सैनिक दल देशभक्ति की मिसाल बन जाएगा। लोग उदाहरण के तौर पर इन्हें याद करेंगे।

7. कृतज्ञता का भाव: यह पंक्ति हमें उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञ होने की प्रेरणा देती है जिन्होंने हमारे लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

इस प्रकार, यह पंक्ति सैनिकों के बलिदान और उसकी स्मृति की अमरता को व्यक्त करती है।

प्रश्न 10. 'कर चले हम फ़िदा' कविता की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए। [2019]

'कर चले हम फ़िदा' कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है:

1. देशभक्ति की भावना जगाने में: यह कविता आज भी लोगों के मन में देशभक्ति की भावना जगाती है। इसे स्कूलों, कार्यक्रमों में गाया जाता है।

2. शहीदों के प्रति कृतज्ञता: यह कविता हमें उन असंख्य शहीदों की याद दिलाती है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज भी हमें उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।

3. सैनिकों के प्रति सम्मान: यह कविता हमारे जवानों के प्रति सम्मान का भाव जगाती है। आज भी हमारे सैनिक सीमाओं पर डटे हैं और देश की रक्षा कर रहे हैं।

4. आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा: यह कविता आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देती है।

5. देश की एकता के लिए: आज भी देश की एकता और अखंडता के लिए ऐसी कविताओं की आवश्यकता है, जो लोगों को एक सूत्र में बाँध सकें।

6. राष्ट्रीय पर्वों पर: स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर यह गीत बजाया जाता है और लोगों में देशभक्ति का संचार करता है।

7. फिल्म 'हकीकत' के कारण: फिल्म 'हकीकत' और इस गीत ने 1962 के युद्ध को अमर कर दिया। आज भी जब यह गीत बजता है, तो उन वीरों की याद आ जाती है।

इस प्रकार, यह कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और सदा प्रासंगिक बनी रहेगी।

7. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय

  • कवि परिचय: कैफ़ी आज़मी का जीवन, रचनाएँ, भाषा शैली [2020]
  • पद्यांशों की व्याख्या: सभी प्रमुख पंक्तियों का भावार्थ [2018, 2019, 2020, 2021]
  • देशभक्ति की भावना: सैनिकों के बलिदान का वर्णन [2020]
  • सैनिकों की भावनाएँ: कर्तव्यनिष्ठा, साहस, संतोष [2020]
  • शहीदों के प्रति सम्मान: 'सर झुका है शहीदों को सलाम' [2019]
  • 'साथियो' का महत्व: शब्द की पुनरावृत्ति का अर्थ [2018]
  • बलिदान की भावना: 'हँसते-हँसते कट गया सफर' [2021]
  • सैनिकों का साहस: 'लाख दुश्मन ने दामन न हिलाया' [2018]
  • मूलभाव: कविता का केंद्रीय भाव [2021]
  • प्रासंगिकता: आज के समय में कविता की प्रासंगिकता [2019]

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • कवि: कैफ़ी आज़मी (1919-2002), उर्दू-हिंदी के प्रसिद्ध शायर
  • रचनाएँ: झंकार, आखिरी शब, सरमाया, वरक
  • फिल्म: 'हकीकत' (1962) के लिए लिखा गया गीत
  • पृष्ठभूमि: 1962 का भारत-चीन युद्ध
  • पुरस्कार: सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • मुख्य भाव: देशभक्ति, बलिदान, साहस, कर्तव्यनिष्ठा

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।"

"सर झुका है शहीदों को सलाम आज, फिर लहराएगा यह परचम आज।"

"हँसते-हँसते कट गया सफर साथियो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो।"

"लाख दुश्मन ने दामन न हिलाया साथियो, हमने दुश्मन के छक्के हिला दिए साथियो।"

8. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न

टिप्स: सीधा और सटीक उत्तर दें। केवल मुख्य बिंदु लिखें। 2-3 वाक्यों में उत्तर पूरा करें।

उदाहरण: प्रश्न: 'कर चले हम फ़िदा' कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस कविता के कवि प्रसिद्ध शायर और गीतकार कैफ़ी आज़मी हैं।

📝 4-5 अंक प्रश्न

टिप्स: उत्तर को तीन भागों में बाँटें - परिचय, मुख्य भाग, निष्कर्ष। पंक्ति की व्याख्या में पहले शाब्दिक अर्थ, फिर गूढ़ अर्थ स्पष्ट करें। देशभक्ति के भाव पर विशेष ध्यान दें।

उदाहरण: प्रश्न: 'हँसते-हँसते कट गया सफर साथियो' - इस पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: [जैसा ऊपर दीर्घ प्रश्न 3 में दिया गया है]

9. हब लिंक



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