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विसर्ग संधि (Visarga Sandhi) | Hindi Grammar | GPN

विसर्ग संधि

भाषा का वह रहस्यमय संधि-सूत्र है जहाँ विसर्ग (:) अपना रूप बदलकर नई ध्वनियों का सृजन करता है। जब "नमः" और "ते" मिलते हैं तो "नमस्ते" का पवित्र स्वर उत्पन्न होता है - यह कोई साधारण परिवर्तन नहीं, बल्कि भाषा की आध्यात्मिक गहराई का प्रतिबिंब है। कक्षा 8-9 के विद्यार्थियों के लिए यह विषय भाषा के दार्शनिक पक्ष को समझने का सुनहरा द्वार है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 8–9 (प्रारंभिक स्तर) | कक्षा 10–12 (मध्यम स्तर) | उच्च शिक्षा (उन्नत स्तर)


1. विसर्ग संधि का रहस्यमय परिचय

विसर्ग संधि को भाषा का "रहस्यविद्या" कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। जैसे रहस्यविद्या में एक तत्व दूसरे में परिवर्तित हो जाता है, वैसे ही विसर्ग संधि में विसर्ग (:) अन्य ध्वनियों में रूपांतरित हो जाता है। "पुनः" और "आवर्तन" के मिलन से "पुनरावर्तन" का जन्म होता है - एक ऐसा परिवर्तन जो न सिर्फ उच्चारण को मधुर करता है बल्कि अर्थ को भी गहराई देता है। यह भाषा की आध्यात्मिक क्रिया है, न कि कोई सामान्य नियम।

सोचिए, एक अदृश्य धागा दो मोतियों को पिरो रहा है। विसर्ग वह अदृश्य धागा है जो शब्दों को जोड़ता है। "दुः" और "ख" अलग-अलग साधारण हैं, पर जब "दुःख" बनते हैं तो एक नया भाव आ जाता है। "निः" और "संदेह" मिलकर "निःसंदेह" बन जाते हैं - पूर्ण, निश्चित, अटल। कक्षा 8-9 में हम इसी विसर्ग रहस्य के नियमों को समझेंगे - कब विसर्ग किस ध्वनि से मिलकर क्या बनता है।

2. विसर्ग संधि की गहन परिभाषा

परिभाषा: विसर्ग संधि वह संधि प्रक्रिया है जिसमें विसर्ग (ः) और उसके बाद आने वाली ध्वनि (स्वर या व्यंजन) के मिलने से परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन विशेष नियमों के अनुसार होता है जिसमें विसर्ग स, र, ओ आदि में बदल जाता है या लुप्त हो जाता है।

3. विसर्ग संधि की विशेष पहचान

विसर्ग संधि को पहचानना अन्य संधियों से भिन्न है क्योंकि इसमें एक विशेष ध्वनि "विसर्ग" शामिल होती है। नीचे दिए बिंदु आपको बताएँगे कि कैसे किसी शब्द में विसर्ग संधि की उपस्थिति जानें।

  • विसर्ग की उपस्थिति: विसर्ग संधि में विसर्ग (ः) अवश्य होता है
  • विसर्ग परिवर्तन: परिणामस्वरूप विसर्ग स, र, ओ में बदल जाता है या लुप्त हो जाता है।
  • नियमबद्ध परिवर्तन: परिवर्तन निश्चित नियमों के अनुसार होता है।
  • उच्चारण सरलता: मुख्य उद्देश्य उच्चारण को सरल और प्रवाहमय बनाना है।
  • संस्कृत मूल: अधिकांश विसर्ग संधि युक्त शब्द संस्कृत से आए हैं

4. विसर्ग संधि के प्रमुख भेद

विसर्ग संधि के मुख्यतः चार प्रकार हैं जो विसर्ग के परिवर्तन के आधार पर हैं। यह वर्गीकरण आपको समझने में मदद करेगा कि विसर्ग किन परिस्थितियों में किस रूप में बदलता है।

क्रम संधि प्रकार विसर्ग + अगली ध्वनि परिणाम उदाहरण
1 विसर्ग का 'स' में परिवर्तन ः + क, ख, प, फ स् निः + कपट = निष्कपट
2 विसर्ग का 'र' में परिवर्तन ः + स्वर (अ, आ, इत्यादि) र् पुनः + आवर्तन = पुनरावर्तन
3 विसर्ग का 'ओ' में परिवर्तन ः + उ, ऊ मनः + उद्धार = मनोद्धार
4 विसर्ग का लोप ः + श, ष, स विसर्ग लुप्त दुः + सह = दुःसह (विशेष)

5. विसर्ग संधि के प्रकारानुसार उदाहरण

नीचे प्रत्येक प्रकार की विसर्ग संधि के स्पष्ट उदाहरण दिए गए हैं। ये उदाहरण कक्षा 8-9 के स्तर के अनुरूप हैं और परीक्षा में भी इसी प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

1. विसर्ग → 'स' संधि के उदाहरण:
• निः + कपट = निष्कपट (ः + क = ष्क)
• निः + छल = निश्छल (ः + छ = श्छ)
• निः + पाप = निष्पाप (ः + प = ष्प)
• निः + फल = निष्फल (ः + फ = ष्फ)
• निः + तार = निस्तार (ः + त = स्त)

2. विसर्ग → 'र' संधि के उदाहरण:
• पुनः + आवर्तन = पुनरावर्तन (ः + आ = रा)
• नमः + अस्तु = नमरस्तु (ः + अ = र)
• मनः + अभिलाषा = मनरभिलाषा (ः + अ = र)
• तेजः + अंश = तेजरंश (ः + अ = र)
• दुः + आत्मा = दुरात्मा (ः + आ = रा)

3. विसर्ग → 'ओ' संधि के उदाहरण:
• मनः + उद्धार = मनोद्धार (ः + उ = ओ)
• तेजः + उज्ज्वल = तेजोज्ज्वल (ः + उ = ओ)
• वचः + उक्ति = वचोक्ति (ः + उ = ओ)
• यशः + उदय = यशोदय (ः + उ = ओ)
• धनः + ऊर्जा = धनोर्जा (ः + ऊ = ओ)

6. विसर्ग संधि का व्यावहारिक प्रयोग

विसर्ग संधि का सही प्रयोग जानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संस्कृत मूल के शब्दों की शुद्धता बनाए रखती है। विसर्ग संधि का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि यह उच्चारण को सरल बनाए, कठिन नहीं।

प्रयोग की विधि: विसर्ग संधि लगाते समय सबसे पहले पहचानें कि विसर्ग के बाद कौन-सी ध्वनि आ रही है। फिर उस ध्वनि के अनुसार संधि नियम लागू करें। याद रखें कि विसर्ग संधि का मुख्य उद्देश्य उच्चारण को प्रवाहमय और स्पष्ट बनाना है।

वाक्यों में प्रयोग:
1. हम नमस्ते कहकर अभिवादन करते हैं। (नमः + ते = नमस्ते)
2. वह एक निष्कपट व्यक्ति है। (निः + कपट = निष्कपट)
3. पुनरावर्तन प्रकृति का नियम है। (पुनः + आवर्तन = पुनरावर्तन)
4. यह निष्फल प्रयास है। (निः + फल = निष्फल)
5. मनोद्धार करना चाहिए। (मनः + उद्धार = मनोद्धार)
6. निश्छल प्रेम सच्चा होता है। (निः + छल = निश्छल)
7. तेजोज्ज्वल व्यक्तित्व आकर्षक होता है। (तेजः + उज्ज्वल = तेजोज्ज्वल)

7. विसर्ग संधि में सामान्य गलतियाँ एवं सावधानियाँ

कक्षा 8-9 के छात्र विसर्ग संधि सीखते समय कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

  • संधि प्रकार भ्रम: विसर्ग के 'स', 'र', 'ओ' में परिवर्तन में भ्रम होना। याद रखें: कखपफ से पहले → स, स्वर से पहले → र, उ/ऊ से पहले → ओ।
  • विसर्ग लोप भूल: विसर्ग के लोप होने की स्थिति भूल जाना (श, ष, स से पहले)।
  • वर्तनी गलती: संधि के बाद वर्तनी में गलती करना (निः + कपट = निष्कपट ✅, निश्कपट ❌)।
  • विशेष नियम भूल: कुछ विशेष शब्दों में विशेष संधि होती है (जैसे "नमः + ते = नमस्ते" में विशेष परिवर्तन)।
  • उच्चारण अनदेखा: संधि करते समय उच्चारण की सुविधा को नज़रअंदाज करना।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "विसर्ग + कखपफ = स्" और "विसर्ग + स्वर = र्" यह सूत्र याद रखें।
  • रिक्त स्थान हेतु: "वह _____ व्यक्ति है" - यदि कपट रहित तो "निष्कपट" (निः + कपट) संधि युक्त शब्द उचित रहेगा।
  • एक-शब्द उत्तर: "नमः और ते का मिलन" = "नमस्ते" (नमः + ते - विसर्ग संधि)।
  • विशेष तथ्य: "नमस्ते" विसर्ग संधि का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है जो संस्कृत से हिंदी में आया है।
  • तुलना हेतु: संस्कृत में विसर्ग संधि के 8+ प्रकार हैं, हिंदी में मुख्यतः 4 प्रकार ही पढ़ाए जाते हैं।

9. 🎯 विसर्ग संधि - समझ की जाँच

नीचे दिए गए 10 प्रश्न विसर्ग संधि की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न सीधे परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं।

1. "नमस्ते" में कौन-सी विसर्ग संधि है और किन दो शब्दों के मिलने से बना है?

उत्तर:
- मूल शब्द: नमः + ते
- संधि: नमः + ते = नमस्ते
- संधि प्रकार: विसर्ग संधि (विशेष प्रकार)
- परिवर्तन: ः + ते = स्ते
- नियम: विसर्ग + त/थ/द/ध = स् + त/थ/द/ध (विशेष नियम)

विश्लेषण:
1. "नमः" का अंतिम ध्वनि विसर्ग (ः) है
2. "ते" का प्रारंभिक व्यंजन "त" है
3. ः + ते के मिलने से "स्ते" बनता है
4. इसलिए नमः + ते = नमस्ते

अर्थ: नमस्ते = नमः (नमन) + ते (तुम्हें) = तुम्हें नमन
यह विसर्ग संधि का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र उदाहरण है।

2. "निष्कपट" में कौन-सी संधि है? क्या यह "निः" और "कपट" का मेल है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल सही!

- मूल शब्द: निः + कपट
- संधि: निः + कपट = निष्कपट
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'स' संधि
- परिवर्तन: ः + क = ष्क
- नियम: विसर्ग + क/ख/प/फ = स् + क/ख/प/फ

विशेष बात:
"निष्कपट" = निः + कपट = कपट रहित, सीधा-सादा
यह एक सकारात्मक गुणवाचक शब्द है।

ध्यान दें:
कुछ लोग "निश्कपट" लिखने की गलती करते हैं, पर सही रूप "निष्कपट" ही है क्योंकि विसर्ग संधि के नियमानुसार ः + क = ष्क बनता है।

3. "पुनरावर्तन" में कौन-सी संधि है? क्या यह "पुनः" और "आवर्तन" का मेल है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल सही!

- मूल शब्द: पुनः + आवर्तन
- संधि: पुनः + आवर्तन = पुनरावर्तन
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'र' संधि
- परिवर्तन: ः + आ = रा
- नियम: विसर्ग + स्वर = र् + स्वर

विशेष बात:
"पुनरावर्तन" = पुनः + आवर्तन = बार-बार होना, चक्रीय प्रक्रिया
यह प्रकृति और विज्ञान दोनों में प्रयुक्त होता है।

उदाहरण:
1. प्रकृति में पुनरावर्तन होता रहता है।
2. यह एक पुनरावर्ती प्रक्रिया है।

4. "मनोद्धार" में कौन-सी संधि है? क्या यह "मनः" और "उद्धार" का मेल है?

उत्तर: हाँ, सही पहचान!

संधि विश्लेषण:
- मूल शब्द: मनः + उद्धार
- संधि: मनः + उद्धार = मनोद्धार
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'ओ' संधि
- परिवर्तन: ः + उ = ओ
- नियम: विसर्ग + उ/ऊ = ओ

अर्थ: मनोद्धार = मनः (मन) + उद्धार (उदय/उन्नति) = मन की उन्नति

विशेष बात:
1. यह एक आध्यात्मिक शब्द है
2. इसका अर्थ है मन का उत्थान या शुद्धि
3. ध्यान और साधना से मनोद्धार होता है

ध्यान दें:
"मनोद्धार" में "ओ" विसर्ग और "उ" के मिलन से बना है।

5. "निष्फल" और "निश्छल" में कौन-सी संधियाँ हैं? दोनों में क्या अंतर है?

उत्तर:
निष्फल में संधि:
- मूल शब्द: निः + फल
- संधि: निः + फल = निष्फल
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'स' संधि
- परिवर्तन: ः + फ = ष्फ
- अर्थ: निष्फल = निः (बिना) + फल (परिणाम) = बिना परिणाम का

निश्छल में संधि:
- मूल शब्द: निः + छल
- संधि: निः + छल = निश्छल
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'स' संधि
- परिवर्तन: ः + छ = श्छ
- अर्थ: निश्छल = निः (बिना) + छल (धोखा) = बिना धोखे का

अंतर:
1. दूसरा व्यंजन: निष्फल में "फ", निश्छल में "छ"
2. परिणाम: ष्फ vs श्छ
3. अर्थ: "बेकार" vs "सीधा-सादा"

दोनों विसर्ग → 'स' संधि के उदाहरण हैं पर दूसरे व्यंजन के कारण परिणाम भिन्न हैं।

6. "दुःख" में क्या संधि है? क्या यह "दुः" और "ख" का मेल है?

उत्तर: हाँ, लेकिन विशेष स्थिति!

संधि विश्लेषण:
- मूल शब्द: दुः + ख
- संधि: दुः + ख = दुःख
- संधि प्रकार: विसर्ग संधि (विशेष)
- परिवर्तन: ः + ख = ःख (विसर्ग लुप्त नहीं होता)

विशेष बात:
1. "दुःख" एक अपवाद है
2. इसमें विसर्ग लुप्त नहीं होता
3. यह एक मूल शब्द के रूप में प्रचलित है

अर्थ: दुःख = कष्ट, पीड़ा, sorrow

तुलना:
- दुः + ख = दुःख (विसर्ग लुप्त नहीं)
- निः + ख = निष्ख (विसर्ग → स में बदल जाएगा)

"दुःख" एक विशेष शब्द है जिसमें विसर्ग संधि का सामान्य नियम लागू नहीं होता।

7. "तेजोज्ज्वल" में कौन-सी संधि है? क्या यह "तेजः" और "उज्ज्वल" का मेल है?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल सही!

संधि विश्लेषण:
- मूल शब्द: तेजः + उज्ज्वल
- संधि: तेजः + उज्ज्वल = तेजोज्ज्वल
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'ओ' संधि
- परिवर्तन: ः + उ = ओ
- नियम: विसर्ग + उ/ऊ = ओ

अर्थ: तेजोज्ज्वल = तेजः (तेज) + उज्ज्वल (चमकीला) = अत्यधिक तेजस्वी

विशेष बात:
1. यह एक सुंदर साहित्यिक शब्द है
2. इसका प्रयोग व्यक्तित्व की चमक के लिए होता है
3. उदाहरण: "तेजोज्ज्वल व्यक्तित्व"

ध्यान दें:
"तेजोज्ज्वल" में दो संधियाँ हैं:
1. तेजः + उ = तेजो (विसर्ग संधि)
2. तेजो + उज्ज्वल = तेजोज्ज्वल (उ + उ = ओज्ज)

8. "निःसंदेह" में कौन-सी संधि है? क्या यह "निः" और "संदेह" का मेल है?

उत्तर: हाँ, लेकिन विशेष स्थिति!

संधि विश्लेषण:
- मूल शब्द: निः + संदेह
- संधि: निः + संदेह = निःसंदेह
- संधि प्रकार: विसर्ग लोप संधि
- परिवर्तन: ः + स = (विसर्ग लुप्त)

विशेष बात:
1. "निःसंदेह" एक अपवाद है
2. इसमें विसर्ग लुप्त नहीं होता बल्कि बना रहता है
3. यह एक प्रचलित शब्द है

अर्थ: निःसंदेह = निः (बिना) + संदेह (शक) = बिना शक के, निश्चित रूप से

तकनीकी रूप:
वास्तव में "निःसंदेह" में विसर्ग का लोप होना चाहिए था (निस्संदेह), पर प्रचलन में "निःसंदेह" ही है।
यह दिखाता है कि भाषा में प्रचलन भी महत्वपूर्ण है।

9. "वचोक्ति" और "यशोदय" में क्या संधियाँ हैं? दोनों में क्या समानता है?

उत्तर:
वचोक्ति में संधि:
- मूल शब्द: वचः + उक्ति
- संधि: वचः + उक्ति = वचोक्ति
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'ओ' संधि
- परिवर्तन: ः + उ = ओ
- अर्थ: वचोक्ति = वचः (वाणी) + उक्ति (कथन) = वाक्य, उक्ति

यशोदय में संधि:
- मूल शब्द: यशः + उदय
- संधि: यशः + उदय = यशोदय
- संधि प्रकार: विसर्ग → 'ओ' संधि
- परिवर्तन: ः + उ = ओ
- अर्थ: यशोदय = यशः (कीर्ति) + उदय (उगना) = यश का उदय

समानता:
1. संधि प्रकार: दोनों में विसर्ग → 'ओ' संधि
2. परिवर्तन: दोनों में ः + उ = ओ
3. संरचना: दोनों संस्कृत मूल के शब्द हैं
4. प्रयोग: दोनों साहित्यिक प्रयोग में आते हैं

दोनों विसर्ग → 'ओ' संधि के सुंदर उदाहरण हैं।

10. विसर्ग संधि के चार प्रकारों के नाम और एक-एक उदाहरण बताइए।

उत्तर: विसर्ग संधि के चार प्रकार और उदाहरण:

1. विसर्ग → 'स' संधि: विसर्ग + क/ख/प/फ = स् + क/ख/प/फ
उदाहरण: निः + कपट = निष्कपट (ः + क = ष्क)

2. विसर्ग → 'र' संधि: विसर्ग + स्वर = र् + स्वर
उदाहरण: पुनः + आवर्तन = पुनरावर्तन (ः + आ = रा)

3. विसर्ग → 'ओ' संधि: विसर्ग + उ/ऊ = ओ
उदाहरण: मनः + उद्धार = मनोद्धार (ः + उ = ओ)

4. विसर्ग लोप संधि: विसर्ग + श/ष/स = विसर्ग लुप्त
उदाहरण: दुः + सह = दुःसह (विशेष - विसर्ग लुप्त नहीं होता)

याद रखने की ट्रिक:
"विसर्ग संधि चार प्रकार, स-र-ओ और लोप सार,
कखपफ से पहले स, स्वर से र, उऊ से ओ अपार।"

10. सारांश

विसर्ग संधि हिंदी व्याकरण का वह रहस्यमय पक्ष है जो भाषा को आध्यात्मिक गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि प्रदान करता है। हमने सीखा कि विसर्ग संधि के चार मुख्य प्रकार हैं: विसर्ग का 'स' में परिवर्तन, विसर्ग का 'र' में परिवर्तन, विसर्ग का 'ओ' में परिवर्तन और विसर्ग का लोप। प्रत्येक संधि के अपने विशेष नियम हैं जिनके अनुसार विसर्ग (:) अगली ध्वनि के साथ मिलकर नया रूप धारण करता है। कक्षा 8-9 के स्तर पर इन नियमों को समझना, उदाहरणों के माध्यम से उनकी पहचान करना और सही संधि करना सीखना ही पर्याप्त है। विसर्ग संधि का ज्ञान न सिर्फ हमारी भाषाई क्षमता को निखारता है बल्कि हमें भाषा की सांस्कृतिक विरासत और दार्शनिक आधार से भी परिचित कराता है।

11. संबंधित विषय संकेत

विसर्ग संधि का ज्ञान प्राप्त करने के बाद अब अगला तार्किक कदम है: संधि विच्छेद

📝 विसर्ग संधि - अभ्यास कार्यपत्रक

इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको विसर्ग संधि पहचानने, संधि करने और संधि विच्छेद के अभ्यास मिलेंगे।

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