तद्धित प्रत्यय हिंदी व्याकरण का वह रचनात्मक पक्ष है जो संज्ञा और विशेषण शब्दों से नए शब्दों का निर्माण करता है। जैसे सोने से आभूषण बनते हैं, वैसे ही मूल शब्दों से तद्धित प्रत्यय द्वारा सुंदर और अर्थपूर्ण शब्दों का सृजन होता है। यह विषय कक्षा 7-8 के छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भाषा की समृद्धि को समझने का मार्ग प्रशस्त करता है।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 7–8 (प्रारंभ) | कक्षा 9–10 (विस्तार) | कक्षा 11–12 (साहित्यिक प्रयोग)
1. तद्धित प्रत्यय का परिचय
तद्धित प्रत्यय को "शब्दों के सज्जाकार" के रूप में समझा जा सकता है। जैसे एक सज्जाकार साधारण वस्त्र को सुंदर परिधान में बदल देता है, वैसे ही तद्धित प्रत्यय साधारण संज्ञा या विशेषण को नए रूप और अर्थ वाले शब्द में परिवर्तित कर देता है। "गुरु" एक साधारण शब्द है, पर जब इसमें "ई" प्रत्यय लगता है तो "गुर्वी" बनता है - गुरु की पत्नी। यही है तद्धित प्रत्यय की कला।
एक रोचक उदाहरण देखिए। "धन" शब्द लीजिए - संपत्ति का भाव। अब इसमें विभिन्न तद्धित प्रत्यय लगाइए: "धनी" (धनवान व्यक्ति), "धनिक" (धनी व्यक्ति), "धन्य" (धन से युक्त/भाग्यशाली), "धनाढ्य" (अत्यधिक धनी)। हर शब्द का अर्थ "धन" से जुड़ा है, पर हर बार नई विशेषता, नया भाव! कक्षा 7-8 में हम उन मुख्य तद्धित प्रत्ययों को सीखेंगे जो हमारी दैनिक शब्दावली को समृद्ध बनाते हैं।
2. तद्धित प्रत्यय की परिभाषा
परिभाषा: तद्धित प्रत्यय वे प्रत्यय होते हैं जो संज्ञा या विशेषण शब्दों के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। ये प्रत्यय मूल शब्द से संबंध, सादृश्य, भाव, स्त्रीलिंग रूप आदि व्यक्त करते हैं और शब्द के अर्थ में विस्तार या परिवर्तन लाते हैं।
3. तद्धित प्रत्यय की विशेषताएँ
तद्धित प्रत्ययों को पहचानना और समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये हिंदी के सबसे सुंदर और अर्थपूर्ण शब्दों के निर्माण में भूमिका निभाते हैं। नीचे दिए बिंदुओं से आप इनकी विशेषताएँ समझ सकते हैं।
- मूल शब्द प्रकार: तद्धित प्रत्यय सदैव संज्ञा या विशेषण के साथ जुड़ते हैं, क्रिया धातुओं के साथ नहीं।
- अर्थ विस्तार: ये मूल शब्द के अर्थ में विस्तार, संबंध या परिवर्तन लाते हैं।
- स्त्रीलिंग निर्माण: अधिकांश तद्धित प्रत्यय स्त्रीलिंग शब्द बनाने का कार्य करते हैं।
- संबंध बोध: ये संबंध (रिश्ता), सादृश्य (समानता), भाव आदि व्यक्त करते हैं।
- संस्कृत मूल: लगभग सभी तद्धित प्रत्यय संस्कृत से लिए गए हैं और हिंदी में प्रचलित हैं।
4. तद्धित प्रत्यय के प्रकार
तद्धित प्रत्ययों को उनके कार्य और प्रयोग के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। यह वर्गीकरण आपको यह समझने में मदद करेगा कि कौन-सा प्रत्यय किस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त होता है।
| क्रम | प्रकार | प्रमुख प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | संबंधवाचक | ई, इक, ऐसा | दिल्ली → दिल्लीवाला, भारत → भारतीय |
| 2 | स्त्रीलिंगवाचक | ई, इनी, आइन, आनी | देव → देवी, शेर → शेरनी |
| 3 | गुणवाचक | मान, वान, मती | गुण → गुणवान, बल → बलवान |
| 4 | अपत्यवाचक | अय, एय, आयन | गौतम → गौतमीय, कश्यप → काश्यप |
5. 15 प्रमुख तद्धित प्रत्ययों के उदाहरण
यहाँ 15 सबसे महत्वपूर्ण तद्धित प्रत्यय दिए जा रहे हैं जो कक्षा 7-8 के पाठ्यक्रम में शामिल हैं और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- 1. ई (संबंध/स्त्रीलिंग): दिल्ली + ई = दिल्लीवाला, गुरु + ई = गुर्वी, घर + ई = घरेलू
- 2. इक (संबंध): भारत + इक = भारतीय, मन + इक = मानसिक, दैन + इक = दैनिक
- 3. इनी (स्त्रीलिंग): शेर + इनी = शेरनी, हाथ + इनी = हथिनी, गज + इनी = गजनी
- 4. मान (गुणवाचक): गुण + मान = गुणवान, बल + मान = बलवान, धन + मान = धनवान
- 5. वान (गुणवाचक): तेज + वान = तेजवान, यश + वान = यशवान, बुद्धि + वान = बुद्धिमान
- 6. आइन (स्त्रीलिंग): नौकर + आइन = नौकरानी, धोबी + आइन = धोबिन
- 7. आनी (स्त्रीलिंग): सेठ + आनी = सेठानी, माली + आनी = मालिन
- 8. ता (भाववाचक): सुंदर + ता = सुंदरता, मीठा + ता = मिठास (रूपांतर)
- 9. पन (भाववाचक): मीठा + पन = मीठापन, बुढ़ा + पन = बुढ़ापन
- 10. ऐसा (सादृश्य): देव + ऐसा = देवतुल्य, राजा + ऐसा = राजसी
- 11. इय (संबंध): ग्राम + इय = ग्रामीण, नगर + इय = नागरिक
- 12. ईय (संबंध): देश + ईय = देशीय, विदेश + ईय = विदेशीय
- 13. अक (कर्तावाचक): चित्र + अक = चित्रकार, लेख + अक = लेखक (कृत प्रत्यय से भिन्न)
- 14. इकाई (मात्रा): संख्या + इकाई = संख्यिकी, इकाई + इकाई = एकिक
- 15. वत् (सादृश्य): राज + वत् = राजवत्, मित्र + वत् = मित्रवत्
6. तद्धित प्रत्ययों का वाक्यों में प्रयोग
तद्धित प्रत्ययों का सही प्रयोग करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये शब्दों को सौंदर्य और सटीकता प्रदान करते हैं। नीचे दिए गए वाक्यों में देखिए कि कैसे एक ही मूल शब्द से अलग-अलग प्रत्ययों द्वारा बने शब्द अलग-अलग संदर्भों में प्रयुक्त होते हैं।
प्रयोग का नियम: तद्धित प्रत्यय लगाते समय ध्यान रखें कि कुछ प्रत्यय मूल शब्द के अंतिम अक्षर के अनुसार मूल शब्द का रूप बदल देते हैं। जैसे "गुरु" में "ई" प्रत्यय लगने पर "गुर्वी" बनता है, "गुरुई" नहीं। इसे संधि या रूपांतरण कहते हैं।
वाक्य प्रयोग:
1. वह एक गुणवान व्यक्ति है। (गुण + वान = गुणवान)
2. शेरनी अपने बच्चों की रक्षा करती है। (शेर + इनी = शेरनी)
3. उसकी सुंदरता सबको मोह लेती है। (सुंदर + ता = सुंदरता)
4. यह दैनिक समाचार पत्र है। (दिन + इक = दैनिक)
5. भारतीय संस्कृति विविधतापूर्ण है। (भारत + इय = भारतीय)
6. नौकरानी काम कर रही है। (नौकर + आइन = नौकरानी)
7. उसका बुढ़ापन सभी को दया दिलाता है। (बुढ़ा + पन = बुढ़ापन)
8. वह दिल्लीवाला है। (दिल्ली + वाला = दिल्लीवाला)
9. ग्रामीण जीवन सरल होता है। (ग्राम + ईण = ग्रामीण)
10. उसने मित्रवत् व्यवहार किया। (मित्र + वत् = मित्रवत्)
7. तद्धित प्रत्ययों में सामान्य गलतियाँ
तद्धित प्रत्यय सीखते समय छात्र कुछ विशेष गलतियाँ करते हैं जिनसे परीक्षा में अंक कटते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।
- कृत-तद्धित भ्रम: कृत प्रत्यय (क्रिया से) और तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण से) में भ्रम। "लेखक" में "क" कृत प्रत्यय है, "चित्रकार" में "कार" तद्धित प्रत्यय है।
- स्त्रीलिंग प्रत्यय भ्रम: "ई", "इनी", "आइन", "आनी" में भ्रम - हर प्रत्यय अलग शब्दों के साथ आता है।
- रूपांतरण भूल: संधि नियमों की अनदेखी (गुरु + ई = गुर्वी ✅, गुरुई ❌)।
- अर्थ भ्रम: "वान" और "मान" दोनों गुणवाचक हैं, पर "वान" अधिक प्रचलित है (गुणवान, बलवान)।
- संबंध प्रत्यय भूल: "ई" और "इक" दोनों संबंध बताते हैं, पर "ई" स्थान/व्यक्ति संबंध (दिल्लीवाला), "इक" गुण/भाव संबंध (मानसिक)।
- वर्तनी गलती: "ता" और "पन" दोनों भाववाचक संज्ञा बनाते हैं, पर "सुंदरता" ✅, "सुंदरपन" ❌ (सुंदरपन कम प्रचलित)।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- MCQ हेतु: "ई" प्रत्यय संबंध/स्त्रीलिंग बनाता है, "इक" प्रत्यय गुण/भाव संबंध बनाता है, "ता/पन" भाववाचक संज्ञा बनाते हैं।
- रिक्त स्थान हेतु: "वह एक _____ व्यक्ति है" - यदि गुणों से युक्त तो "गुणवान", यदि बल से युक्त तो "बलवान"।
- एक-शब्द उत्तर: "शेर की मादा" = "शेरनी" (शेर + इनी), "गुरु की पत्नी" = "गुर्वी" (गुरु + ई)।
- विशेष तथ्य: "वाला" प्रत्यय दो तरह का है - कृत प्रत्यय (पढ़ने वाला) और तद्धित प्रत्यय (दिल्लीवाला)। संदर्भ से पहचानें।
- तुलना हेतु: संस्कृत में तद्धित प्रत्ययों की संख्या लगभग 100 है, पर हिंदी में 20-25 मुख्य तद्धित प्रत्यय ही प्रचलित हैं।
- याद रखने की ट्रिक: "ई-इक-इनी, मान-वान-आइन, ता-पन-ऐसा, इय-ईय-अक, इकाई-वत्" - यह क्रम याद रखें।
9. 🎯 तद्धित प्रत्यय - समझ की जाँच
नीचे दिए गए 10 प्रश्न तद्धित प्रत्ययों की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न सीधे परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं और आपकी तैयारी को मज़बूत करेंगे।
1. "गुर्वी" और "गुरुकुल" में कौन-सा प्रत्यय है और दोनों में क्या अंतर है?
- गुरु + ई = गुर्वी ("ई" तद्धित प्रत्यय - स्त्रीलिंग/संबंध)
- गुरु + कुल = गुरुकुल ("कुल" उपसर्ग नहीं, समास का हिस्सा है)
अंतर: "गुर्वी" में "ई" तद्धित प्रत्यय है जो स्त्रीलिंग बनाता है (गुरु की पत्नी)। "गुरुकुल" में कोई प्रत्यय नहीं है, यह तत्पुरुष समास है (गुरु का कुल)।
2. "भारतीय" और "भारतवासी" में "ईय" और "वासी" प्रत्ययों ने क्या अंतर लाया है?
- भारत + ईय = भारतीय ("ईय" तद्धित प्रत्यय - संबंध बताता है)
- भारत + वासी = भारतवासी ("वासी" तद्धित प्रत्यय - निवासी बताता है)
"भारतीय" = भारत से संबंधित (वस्तु, व्यक्ति, भाव)
"भारतवासी" = भारत में रहने वाला (केवल व्यक्ति)
"भारतीय" व्यापक है, "भारतवासी" सीमित।
3. "शेरनी" और "हथिनी" में "इनी" प्रत्यय है। क्या सभी जानवरों में यही प्रत्यय लगता है?
1. शेर + इनी = शेरनी
2. हाथी + इनी = हथिनी
3. बाघ + इन = बघिन (अपवाद)
4. कुत्ता + ईया = कुतिया (अपवाद)
5. घोड़ा + ई = घोड़ी (अपवाद)
प्रत्यय चुनाव मूल शब्द के अंतिम अक्षर और प्रचलन पर निर्भर करता है। कोई एक नियम नहीं है।
4. "गुणवान" और "गुणी" में "वान" और "ई" प्रत्यय हैं। दोनों में क्या अंतर है?
- गुण + वान = गुणवान ("वान" प्रत्यय - गुणों से युक्त)
- गुण + ई = गुणी ("ई" प्रत्यय - गुणों वाला, पर कम प्रभावी)
"गुणवान" = अधिक/प्रभावशाली गुणों वाला
"गुणी" = गुणों वाला (सामान्य)
"गुणवान" अधिक प्रशंसात्मक है, "गुणी" सामान्य है।
5. "दैनिक" और "दिनभर" में "इक" प्रत्यय है क्या? दोनों में अंतर समझाइए।
- दिन + इक = दैनिक ("इक" तद्धित प्रत्यय - संबंध बताता है)
- दिन + भर = दिनभर ("भर" प्रत्यय नहीं, अव्ययीभाव समास है)
अंतर: "दैनिक" में "इक" तद्धित प्रत्यय है जो दिन से संबंध बताता है (प्रतिदिन होने वाला)। "दिनभर" में कोई प्रत्यय नहीं है, यह समास है (पूरा दिन)।
"दैनिक" = प्रतिदिन, "दिनभर" = पूरे दिन।
6. "सुंदरता" और "मीठापन" में "ता" और "पन" प्रत्यय हैं। दोनों में क्या अंतर है?
- सुंदर + ता = सुंदरता ("ता" प्रत्यय - संस्कृत मूल)
- मीठा + पन = मीठापन ("पन" प्रत्यय - हिंदी/प्राकृत मूल)
अंतर:
1. मूल: "ता" संस्कृत से, "पन" प्राकृत/हिंदी से
2. प्रयोग: "ता" अधिकांश संस्कृत मूल के शब्दों के साथ (सुंदरता, महत्व), "पन" हिंदी मूल के शब्दों के साथ (मीठापन, बचपन)
3. लिंग: "ता" स्त्रीलिंग, "पन" पुल्लिंग
7. "चित्रकार" और "लेखक" में "कार" और "क" प्रत्यय हैं। क्या दोनों तद्धित प्रत्यय हैं?
- चित्र + कार = चित्रकार ("कार" तद्धित प्रत्यय - संज्ञा से संज्ञा)
- लिख + क = लेखक ("क" कृत प्रत्यय - क्रिया से संज्ञा)
अंतर:
1. मूल शब्द: "चित्रकार" में "चित्र" (संज्ञा), "लेखक" में "लिख" (क्रिया)
2. प्रत्यय प्रकार: "कार" तद्धित, "क" कृत
3. निर्माण: संज्ञा → संज्ञा vs क्रिया → संज्ञा
"चित्रकार" = चित्र बनाने वाला, "लेखक" = लिखने वाला
8. "नागरिक" और "ग्रामीण" में "इक" और "ईण" प्रत्यय हैं। दोनों में क्या समानता और अंतर है?
- नगर + इक = नागरिक ("इक" तद्धित प्रत्यय)
- ग्राम + ईण = ग्रामीण ("ईण" तद्धित प्रत्यय)
समानता: दोनों संबंध बताते हैं (नगर से, ग्राम से)
अंतर:
1. प्रत्यय भिन्न: "इक" vs "ईण"
2. मूल शब्द भिन्न: "नगर" (नगर) vs "ग्राम" (गाँव)
3. रूपांतरण: नगर → नागर, ग्राम → ग्राम (कोई बदलाव नहीं)
दोनों स्थान/क्षेत्र से संबंध दर्शाते हैं।
9. "मित्रवत्" और "राजवत्" में "वत्" प्रत्यय है। इसका क्या कार्य है?
- मित्र + वत् = मित्रवत् (मित्र के समान)
- राजा + वत् = राजवत् (राजा के समान)
कार्य: "वत्" प्रत्यय सादृश्य/समानता बताता है। यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति या वस्तु किसी के समान व्यवहार कर रही है या उसके गुण रखती है।
"वत्" संस्कृत मूल का प्रत्यय है और हिंदी में कम प्रचलित है, पर साहित्यिक प्रयोग में आता है।
10. एक ही मूल शब्द "धन" से चार अलग-अलग तद्धित प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए और उनके अर्थ बताइए।
1. धन + ई = धनी (धनवान व्यक्ति) → "वह एक धनी व्यापारी है"
2. धन + इक = धनिक (धनी व्यक्ति, विशेषतः साहूकार) → "गाँव का धनिक"
3. धन + वान = धनवान (धन से युक्त) → "धनवान परिवार"
4. धन + य = धन्य (धन से युक्त/भाग्यशाली) → "धन्यवाद" (धन्य + वाद)
चारों एक ही मूल शब्द "धन" से, चार अलग तद्धित प्रत्ययों द्वारा, चार अलग अर्थ वाले शब्द।
ध्यान दें: "धन्य" में "य" प्रत्यय ने आशीर्वाद/भाग्य का भाव दिया है, सीधे धन का नहीं।
10. सारांश
तद्धित प्रत्यय हिंदी व्याकरण के वे सृजनात्मक अंग हैं जो संज्ञा और विशेषण शब्दों से नए, अर्थपूर्ण शब्दों का निर्माण करते हैं। हमने सीखा कि तद्धित प्रत्यय (ई, इक, इनी, मान, वान, आइन, आनी, ता, पन, ऐसा, इय, ईय, अक, इकाई, वत् आदि) मूल शब्द से संबंध, स्त्रीलिंग रूप, गुण, भाव, सादृश्य आदि व्यक्त करते हैं। इन प्रत्ययों का सही प्रयोग करने के लिए मूल शब्द के प्रकार और संधि नियमों का ज्ञान आवश्यक है। कक्षा 7-8 के स्तर पर इन प्रत्ययों को पहचानना, उनके कार्य समझना और कृत-तद्धित प्रत्ययों में अंतर करना सीखना ही पर्याप्त है।
11. संबंधित विषय संकेत
तद्धित प्रत्ययों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद अब अगला तार्किक कदम है: प्रत्यय से शब्द निर्माण
📝 तद्धित प्रत्यय - अभ्यास कार्यपत्रक
इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको तद्धित प्रत्यय पहचानने, उनके अर्थ समझने और नए शब्द बनाने के अभ्यास मिलेंगे।
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