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प्रत्यय से शब्द निर्माण (Word Formation using Suffixes) | Hindi Grammar | GPN

प्रत्यय से शब्द निर्माण हिंदी व्याकरण का वह व्यावहारिक पक्ष है जो भाषा को जीवंत और गतिशील बनाता है। जब आप सीख जाते हैं कि कैसे सही प्रत्यय चुनकर नए शब्द बनाए जाते हैं, तो आपकी अभिव्यक्ति की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। यह कौशल न सिर्फ परीक्षा में, बल्कि साहित्यिक रचना और दैनिक संवाद में भी आपको प्रभावशाली बनाता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 8–9 (व्यावहारिक प्रयोग) | कक्षा 10–12 (उन्नत प्रयोग) | उच्च शिक्षा (साहित्यिक अनुसंधान)


1. प्रत्यय से शब्द निर्माण का परिचय

शब्द निर्माण की कला को "भाषा की वास्तुकला" कहा जा सकता है। जैसे एक वास्तुकार ईंट-गारे से भवन बनाता है, वैसे ही एक भाषा प्रेमी मूल शब्द और प्रत्यय से नए शब्दों का निर्माण करता है। "सत्य" एक मूल शब्द है। जब इसमें "ता" प्रत्यय लगता है तो "सत्यता" बनता है - सत्य होने का भाव। जब "ई" लगता है तो "सत्यी" बनता है - सत्य से संबंधित। यही है प्रत्यय से शब्द निर्माण का विज्ञान।

कल्पना कीजिए, आपके पास "ज्ञान" शब्द है। प्रत्यय की सहायता से आप इससे कितने शब्द बना सकते हैं? "अज्ञान", "विज्ञान", "प्रज्ञान", "ज्ञानी", "ज्ञानवान", "ज्ञानता" - और भी बहुत कुछ! हर शब्द का अर्थ अलग, हर शब्द की उपयोगिता अलग। कक्षा 8-9 में हम सीखेंगे कि कैसे व्यवस्थित ढंग से प्रत्यय लगाकर सार्थक और प्रभावी शब्दों का निर्माण किया जाता है।

2. प्रत्यय से शब्द निर्माण की परिभाषा

परिभाषा: प्रत्यय से शब्द निर्माण वह व्याकरणिक प्रक्रिया है जिसमें किसी मूल शब्द के अंत में उपयुक्त प्रत्यय जोड़कर नए सार्थक शब्द बनाए जाते हैं। यह प्रक्रिया कृत और तद्धित दोनों प्रकार के प्रत्ययों द्वारा संपन्न होती है और इसके द्वारा संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण आदि का निर्माण किया जाता है।

3. शब्द निर्माण के मुख्य सिद्धांत

प्रत्यय से शब्द बनाते समय कुछ मौलिक सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है। ये सिद्धांत गलत शब्द निर्माण से बचाते हैं और भाषा की शुद्धता बनाए रखते हैं।

  • प्रत्यय-मूल अनुकूलता: प्रत्यय और मूल शब्द का व्याकरणिक अनुकूलन होना चाहिए (क्रिया धातु + कृत प्रत्यय, संज्ञा + तद्धित प्रत्यय)।
  • अर्थ संगति: निर्मित शब्द का अर्थ तार्किक और स्पष्ट होना चाहिए (सुंदर + ता = सुंदरता ✅, सुंदर + क = सुंदरक ❌)।
  • संधि नियम पालन: प्रत्यय जोड़ते समय संधि नियमों का पालन आवश्यक है (गुरु + ई = गुर्वी ✅, गुरुई ❌)।
  • प्रचलन का ध्यान: निर्मित शब्द भाषा में प्रचलित होना चाहिए, काल्पनिक नहीं।
  • शब्द-भेद निर्धारण: प्रत्यय चुनते समय वांछित शब्द-भेद (संज्ञा, विशेषण आदि) का ध्यान रखना चाहिए।

4. शब्द निर्माण की विधियाँ

प्रत्यय से शब्द निर्माण की मुख्यतः दो विधियाँ हैं जो प्रत्यय के प्रकार पर निर्भर करती हैं। इन विधियों को समझना शब्द निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।

क्रम निर्माण विधि प्रत्यय प्रकार उदाहरण परिणामी शब्द-भेद
1 कृत प्रत्यय विधि कृत प्रत्यय पढ़ + क = पाठक क्रिया → संज्ञा
2 तद्धित प्रत्यय विधि तद्धित प्रत्यय गुण + वान = गुणवान संज्ञा → विशेषण
3 मिश्रित विधि कृत + तद्धित लिख + ता + ई = लिखताई क्रिया → संज्ञा → विशेषण
4 उपसर्ग-प्रत्यय संयुक्त उपसर्ग + प्रत्यय अ + विद्या + ई = अविद्याई संज्ञा → विशेषण

5. शब्द निर्माण के व्यावहारिक उदाहरण

नीचे विभिन्न प्रकार के मूल शब्दों से प्रत्यय लगाकर शब्द निर्माण के उदाहरण दिए गए हैं। ये उदाहरण कक्षा 8-9 के स्तर के अनुरूप हैं और परीक्षा में भी इसी प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

उदाहरण सेट 1: कृत प्रत्यय द्वारा निर्माण
• लिख + त = लिखित (भूतकालिक विशेषण)
• पढ़ + क = पाठक (कर्ता संज्ञा)
• देख + ना = देखना (भाववाचक संज्ञा)
• चल + आव = चलाव (भाववाचक संज्ञा)
• कर + तव्य = कर्तव्य (कर्तव्यवाचक संज्ञा)

उदाहरण सेट 2: तद्धित प्रत्यय द्वारा निर्माण
• सुंदर + ता = सुंदरता (भाववाचक संज्ञा)
• गुण + वान = गुणवान (गुणवाचक विशेषण)
• शेर + इनी = शेरनी (स्त्रीलिंग संज्ञा)
• भारत + इय = भारतीय (संबंधवाचक विशेषण)
• मीठा + पन = मीठापन (भाववाचक संज्ञा)

उदाहरण सेट 3: जटिल निर्माण
• अ + ज्ञान + ई = अज्ञानी (नकारात्मक + संज्ञा + संबंध)
• सु + लेख + क = सुलेखक (सकारात्मक + संज्ञा + कर्ता)
• प्र + काश + इक = प्रकाशिक (उपसर्ग + संज्ञा + संबंध)
• नि + दय + ई = निदयी (नकारात्मक + संज्ञा + संबंध)
• उप + हार + ई = उपहारी (उपसर्ग + संज्ञा + संबंध)

6. शब्द निर्माण की व्यवस्थित विधि

प्रत्यय से शब्द बनाने की एक व्यवस्थित और चरणबद्ध विधि है जिसका पालन करके आप सही और सार्थक शब्दों का निर्माण कर सकते हैं। यह विधि चार मुख्य चरणों में पूरी होती है।

शब्द निर्माण की चार-चरणीय विधि:
1. मूल शब्द विश्लेषण: सबसे पहले मूल शब्द का प्रकार (संज्ञा, विशेषण, क्रिया) पहचानें।
2. वांछित अर्थ निर्धारण: तय करें कि आपको किस प्रकार का नया शब्द चाहिए (कर्ता, भाव, संबंध आदि)।
3. उपयुक्त प्रत्यय चयन: मूल शब्द और वांछित अर्थ के अनुसार सही प्रत्यय चुनें।
4. संधि/योजना करना: प्रत्यय को मूल शब्द के साथ संधि नियमों के अनुसार जोड़ें।

व्यावहारिक उदाहरण: "भाषा" से "भाषाई" बनाना
1. मूल शब्द: भाषा (संज्ञा)
2. वांछित अर्थ: भाषा से संबंधित (विशेषण)
3. उपयुक्त प्रत्यय: ई (संबंध बताने वाला तद्धित प्रत्यय)
4. संधि: भाषा + ई = भाषाई (आ + ई = आई संधि)
परिणाम: भाषाई = भाषा से संबंधित

7. शब्द निर्माण में सामान्य गलतियाँ

प्रत्यय से शब्द निर्माण करते समय छात्र कुछ विशेष गलतियाँ करते हैं जो परीक्षा में अंक कटने का कारण बनती हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

  • प्रत्यय-मूल असंगति: गलत प्रकार का प्रत्यय लगाना (क्रिया में तद्धित या संज्ञा में कृत प्रत्यय लगाना)।
  • असार्थक शब्द निर्माण: बिना तर्क के प्रत्यय लगाकर ऐसा शब्द बनाना जिसका कोई अर्थ न निकले।
  • संधि त्रुटि: संधि नियमों की अवहेलना करना (गुरु + ई = गुरुई ❌, सही है गुर्वी ✅)।
  • प्रचलन भूल: ऐसे शब्द बनाना जो भाषा में प्रचलित नहीं हैं, भले ही व्याकरणिक रूप से सही हों।
  • कृत-तद्धित भ्रम: कृत और तद्धित प्रत्ययों में भ्रम होना और गलत प्रत्यय चुनना।
  • अर्थ विरोधाभास: ऐसा शब्द बनाना जिसका अर्थ मूल शब्द के अर्थ से विपरीत या असंगत हो।
  • वर्तनी त्रुटि: प्रत्यय लगाते समय वर्तनी की गलती करना (देखनीय ❌, सही है देखनीय ✅)।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए" प्रश्न में सबसे पहले मूल शब्द का प्रकार पहचानें, फिर वांछित अर्थ के अनुसार प्रत्यय चुनें।
  • रिक्त स्थान हेतु: "वह एक _____ व्यक्ति है" - संदर्भ देखकर तय करें: यदि गुणों से युक्त तो "गुणवान", यदि बुद्धि से युक्त तो "बुद्धिमान"।
  • एक-शब्द उत्तर: "जो पढ़ता है" = "पाठक" (पढ़ + क), "जो लिखता है" = "लेखक" (लिख + क)।
  • विशेष तथ्य: कुछ शब्दों में दो प्रत्यय भी हो सकते हैं: अनुपस्थिति (अनु + अप + स्थित + इ), अभ्युदय (अभि + उद् + अय)।
  • तुलना हेतु: संस्कृत में प्रत्यय से शब्द निर्माण की प्रक्रिया अधिक जटिल है, हिंदी में यह सरलीकृत रूप में है।
  • याद रखने की ट्रिक: "कर्ता के लिए क/ता, भाव के लिए ना/ता/पन, संबंध के लिए ई/इक, स्त्रीलिंग के लिए ई/इनी/आइन" - यह सूत्र याद रखें।

9. 🎯 प्रत्यय से शब्द निर्माण - समझ की जाँच

नीचे दिए गए 10 प्रश्न प्रत्यय से शब्द निर्माण की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न व्यावहारिक हैं और आपको वास्तविक परिस्थितियों में शब्द निर्माण करना सिखाएँगे।

1. "विद्या" से ऐसा शब्द बनाइए जिसका अर्थ "विद्या से संबंधित" हो और वह विशेषण हो।

उत्तर: वैदिक या विद्यात्मक या विद्याप्रिय
सबसे उपयुक्त: विद्या + इक = वैदिक (विद्या से संबंधित)
अन्य विकल्प:
- विद्या + ई = विद्याई (विद्या से संबंधित)
- विद्या + प्रिय = विद्याप्रिय (विद्या से प्रेम करने वाला)
परीक्षा में "वैदिक" सबसे सटीक उत्तर होगा।

2. "कर" धातु से तीन अलग-अलग प्रकार के प्रत्यय लगाकर तीन अलग-अलग अर्थ वाले शब्द बनाइए।

उत्तर:
1. कर + ता = करता (वर्तमान काल में करने वाला) → "वह करता है"
2. कर + तव्य = कर्तव्य (करना चाहिए, आवश्यक) → "हमारा कर्तव्य"
3. कर + ण = कारण (करने का साधन/हेतु) → "सफलता का कारण"

तीनों कृत प्रत्यय हैं और तीनों के अर्थ भिन्न हैं:
- करता: वर्तमान काल की क्रिया
- कर्तव्य: नैतिक/कानूनी बाध्यता
- कारण: हेतु/साधन

3. "सुन्दर" से "सुन्दरता" बनाने में कौन-सा प्रत्यय है और यह किस प्रकार का प्रत्यय है? क्या "सुन्दरपन" भी सही है?

उत्तर:
प्रत्यय: ता
प्रत्यय प्रकार: तद्धित प्रत्यय (भाववाचक संज्ञा बनाने वाला)

"सुन्दरता" vs "सुन्दरपन":
- सुन्दर + ता = सुन्दरता (संस्कृत मूल, अधिक प्रचलित और मानक)
- सुन्दर + पन = सुन्दरपन (हिंदी/प्राकृत मूल, कम प्रचलित)

दोनों व्याकरणिक रूप से सही हैं, पर "सुन्दरता" अधिक स्वीकार्य और प्रचलित है। परीक्षा में "सुन्दरता" लिखना ही उचित है।

4. "गुरु" से "गुर्वी" कैसे बना? संधि नियम समझाइए और क्या "गुरुई" भी सही हो सकता है?

उत्तर: शब्द निर्माण: गुरु + ई = गुर्वी
संधि नियम: यह गुण संधि का उदाहरण है।
- गुरु (उकारांत) + ई (प्रत्यय)
- उ + ई = वी (गुण संधि)
- इसलिए गुरु + ई = गुर्वी

"गुरुई" के बारे में:
"गुरुई" सही नहीं है क्योंकि:
1. यह संधि नियमों के विरुद्ध है
2. यह भाषा में प्रचलित नहीं है
3. इसका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं निकलता

"गुर्वी" = गुरु की पत्नी या गुरु के समान गुणों वाली स्त्री।

5. एक ही मूल शब्द "बल" से चार अलग-अलग प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए जिनके अर्थ अलग-अलग हों।

उत्तर: "बल" से बने शब्द:

1. बल + वान = बलवान (बल से युक्त व्यक्ति) → "वह बलवान पहलवान है"
2. बल + हीन = बलहीन (बल रहित) → "बीमारी के बाद वह बलहीन हो गया"
3. बल + ष्ठ = बलिष्ठ (अत्यधिक बलवान) → "बलिष्ठ योद्धा"
4. बल + युक्त = बलयुक्त (बल से युक्त) → "बलयुक्त प्रहार"

चारों एक ही मूल शब्द "बल" से, चार अलग प्रत्ययों द्वारा, चार अलग अर्थ वाले शब्द।
ध्यान दें: "बलहीन" में "हीन" प्रत्यय ने अभाव का भाव दिया है।

6. "लेख" और "लेखक" में क्या अंतर है? दोनों के निर्माण में कौन-से प्रत्यय हैं?

उत्तर: मूलभूत अंतर:

लेख:
- मूल शब्द: लिख (क्रिया धातु)
- प्रत्यय: अ (कृत प्रत्यय)
- निर्माण: लिख + अ = लेख
- अर्थ: लिखी हुई वस्तु, रचना
- शब्द-भेद: संज्ञा

लेखक:
- मूल शब्द: लिख (क्रिया धातु)
- प्रत्यय: क (कृत प्रत्यय)
- निर्माण: लिख + क = लेखक
- अर्थ: लिखने वाला व्यक्ति
- शब्द-भेद: संज्ञा

अंतर: "लेख" = लिखी हुई वस्तु (कर्म), "लेखक" = लिखने वाला (कर्ता)।
दोनों एक ही धातु से, दो अलग कृत प्रत्ययों द्वारा, दो अलग अर्थ वाले शब्द।

7. "मित्र" से "मित्रता" और "मैत्री" दोनों बनते हैं। दोनों में क्या अंतर है और कौन-से प्रत्यय हैं?

उत्तर: शब्द निर्माण और अंतर:

मित्रता:
- मित्र + ता = मित्रता ("ता" तद्धित प्रत्यय)
- अर्थ: मित्र होने का भाव/गुण
- प्रयोग: सामान्य, औपचारिक
- उदाहरण: "उनकी मित्रता प्रशंसनीय है"

मैत्री:
- मित्र + ई = मैत्री ("ई" तद्धित प्रत्यय, रूपांतरण के साथ)
- अर्थ: मित्रता, दोस्ती
- प्रयोग: अधिक साहित्यिक, गहन
- उदाहरण: "भारत-रूस मैत्री"

अंतर: "मित्रता" सामान्य दोस्ती के लिए, "मैत्री" गहरी/राजनयिक दोस्ती के लिए।
"मैत्री" अधिक सम्मानजनक और साहित्यिक है।

8. क्या "विद्यालय" में कोई प्रत्यय है? यदि हाँ, तो उसे अलग कीजिए और बताइए यह किस प्रकार का प्रत्यय है।

उत्तर: हाँ, "विद्यालय" में प्रत्यय है:

शब्द विश्लेषण: विद्या + आलय = विद्यालय
- मूल शब्द: विद्या (संज्ञा)
- प्रत्यय: आलय (तद्धित प्रत्यय)
- प्रत्यय प्रकार: तद्धित प्रत्यय (संबंध/स्थान बताने वाला)

"आलय" प्रत्यय का अर्थ: स्थान, घर, निवास
इसी तरह:
- पुस्तक + आलय = पुस्तकालय (पुस्तकों का स्थान)
- धन + आलय = धनालय (धन का स्थान/बैंक)
- जल + आलय = जलालय (जल का स्थान/तालाब)

"विद्यालय" = विद्या का स्थान (स्कूल/कॉलेज)।

9. "अहिंसा" से "अहिंसक" कैसे बना? क्या यहाँ उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हैं?

उत्तर: शब्द निर्माण विश्लेषण:

पूर्ण विश्लेषण: अ + हिंसा + क = अहिंसक
1. मूल शब्द: हिंस (क्रिया धातु)
2. उपसर्ग: अ (नकारात्मक)
3. प्रत्यय: अ (कृत प्रत्यय, हिंस → हिंसा)
4. प्रत्यय: क (तद्धित प्रत्यय, अहिंसा → अहिंसक)

चरणबद्ध निर्माण:
- पहला चरण: हिंस + अ = हिंसा (कृत प्रत्यय "अ" द्वारा भाववाचक संज्ञा)
- दूसरा चरण: अ + हिंसा = अहिंसा (उपसर्ग "अ" द्वारा नकारात्मक अर्थ)
- तीसरा चरण: अहिंसा + क = अहिंसक (तद्धित प्रत्यय "क" द्वारा विशेषण)

हाँ, यहाँ उपसर्ग ("अ") और प्रत्यय ("अ" और "क") दोनों हैं।
"अहिंसक" = अहिंसा से संबंधित या अहिंसा करने वाला।

10. एक जटिल शब्द "अनुपस्थिति" का विश्लेषण कीजिए और बताइए कि इसमें कितने प्रत्यय हैं और वे कैसे कार्य करते हैं।

उत्तर: "अनुपस्थिति" का पूर्ण विश्लेषण:

मूल शब्द: स्था (क्रिया धातु, रहना/टिकना)

चरणबद्ध निर्माण:
1. स्था + त = स्थित (कृत प्रत्यय "त" - भूतकालिक)
2. अप + स्थित = उपस्थित (उपसर्ग "अप" - समीप/सामने)
3. अनु + उपस्थित = अनुपस्थित (उपसर्ग "अनु" - विरोध/अभाव)
4. अनुपस्थित + इ = अनुपस्थिति (तद्धित प्रत्यय "इ" - भाववाचक संज्ञा)

प्रत्ययों का विवरण:
1. "त" - कृत प्रत्यय (भूतकाल बनाता है)
2. "इ" - तद्धित प्रत्यय (भाववाचक संज्ञा बनाता है)

उपसर्गों का विवरण:
1. "अप" - समीप/सामने का भाव
2. "अनु" - विरोध/अभाव का भाव

अर्थ विकास:
स्थित → उपस्थित (सामने उपस्थित) → अनुपस्थित (सामने नहीं) → अनुपस्थिति (सामने न होने का भाव)

निष्कर्ष: "अनुपस्थिति" में दो प्रत्यय ("त" और "इ") और दो उपसर्ग ("अप" और "अनु") हैं। यह जटिल शब्द निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

10. सारांश

प्रत्यय से शब्द निर्माण हिंदी व्याकरण का वह व्यावहारिक और रचनात्मक पक्ष है जो भाषा को समृद्ध और गतिशील बनाता है। हमने सीखा कि कैसे कृत और तद्धित प्रत्ययों का उपयोग करके मूल शब्दों से नए, सार्थक और प्रभावी शब्दों का निर्माण किया जाता है। शब्द निर्माण की चार-चरणीय विधि (मूल शब्द विश्लेषण, वांछित अर्थ निर्धारण, उपयुक्त प्रत्यय चयन, संधि/योजना) का पालन करके हम सही शब्द निर्माण कर सकते हैं। कक्षा 8-9 के स्तर पर यह समझना आवश्यक है कि प्रत्यय न केवल शब्दों के अर्थ बदलते हैं, बल्कि उनके व्याकरणिक प्रकार (संज्ञा, विशेषण, क्रिया) भी निर्धारित करते हैं। यह कौशल हमारी भाषाई क्षमता को निखारता है और हमें अधिक प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने में सहायक होता है।

11. संबंधित विषय संकेत

प्रत्यय से शब्द निर्माण का ज्ञान प्राप्त करने के बाद अब अगला तार्किक कदम है: समास परिचय

📝 प्रत्यय से शब्द निर्माण - अभ्यास कार्यपत्रक

इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको विभिन्न मूल शब्दों से प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाने के अभ्यास मिलेंगे।

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