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क्रिया के रूप (Forms of Verb) | Hindi Grammar | GPN

क्रिया के रूप वह आधारशिला हैं जिस पर पूरा हिंदी व्याकरण का वाक्य-निर्माण खड़ा है। जिस तरह एक ही मूल धातु से अलग-अलग प्रयोगों के लिए अलग-अलग रूप बनते हैं, वैसे ही क्रिया भी कर्ता, काल, वचन, लिंग और लकार के अनुसार अपना रूप बदलती है। इस टॉपिक को समझना हिंदी भाषा की संरचना को गहराई से समझने जैसा है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 8–9 (परिचय) | कक्षा 9–10 (अभ्यास) | कक्षा 10+ (उच्च स्तर प्रयोग)


1. क्रिया के रूप का परिचय

सोचिए, मूल धातु 'खा' है। इससे 'खाता है', 'खाएगा', 'खाओ', 'खाइए', 'खाया', 'खाना' आदि अनेक रूप बनते हैं। ये सभी रूप क्रिया-रूपान्तर कहलाते हैं। ये रूपान्तर हमें बताते हैं कि क्रिया किस काल में है, कर्ता का लिंग-वचन क्या है, वाक्य में आदेश है या प्रश्न, और बहुत कुछ। क्रिया के इन्हीं विभिन्न रूपों के नियमों और प्रयोगों का अध्ययन 'क्रिया के रूप' के अन्तर्गत किया जाता है।

रोज़मर्रा के वाक्यों में हम इन रूपों का लगातार प्रयोग करते हैं। जब आप कहते हैं "पढ़ो" तो यह आज्ञार्थक रूप है। "पढ़ता हूँ" वर्तमान काल का रूप है। "पढ़ा था" भूतकाल का। "पढ़ना" क्रिया का मूल अव्यय रूप है। हर स्थिति के लिए क्रिया का एक विशेष रूप होता है, और इन सभी रूपों को बनाने के नियम इसी टॉपिक में आते हैं।

2. परिभाषा

क्रिया के रूप की परिभाषा: क्रिया के मूल धातु में लिंग, वचन, पुरुष, काल और लकार आदि के अनुसार होने वाले परिवर्तनों से बने विभिन्न शब्द-रूपों को क्रिया के रूप कहते हैं। दूसरे शब्दों में, क्रिया के जिस बदलते हुए स्वरूप से वाक्य में उसका सही प्रयोग होता है, उसे क्रिया का रूप कहते हैं।

3. मुख्य बिंदु / पहचान

क्रिया के रूपों को समझने के लिए इन मूल अवधारणाओं को जानना आवश्यक है:

  • धातु: क्रिया का मूल रूप जिसमें 'ना' प्रत्यय जोड़ा जाता है। जैसे: पढ़+ना = पढ़ना (धातु: पढ़)। धातु ही क्रिया-रूपों का आधार है।
  • लकार: क्रिया के रूपों का वर्गीकरण जो मोड (Mood) बताता है - जैसे विधिलकार (चाहिए, करना चाहिए), आज्ञालकार (आदेश), संदेहलकार (संदेह) आदि।
  • पुरुष: कर्ता की स्थिति के आधार पर - उत्तम पुरुष (मैं, हम), मध्यम पुरुष (तुम, आप), अन्य पुरुष (वह, वे)।
  • क्रिया रूप निर्माण के घटक: क्रिया का कोई भी रूप बनाने के लिए इनमें से कुछ या सभी घटक जुड़ते हैं: धातु + काल सूचक + लिंग-वचन सूचक + पुरुष सूचक + लकार सूचक

4. रूपों के आधार (वर्गीकरण)

क्रिया के रूपों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ मुख्य आधार और उनके अनुसार रूप दिए गए हैं:

क्रम रूप का आधार रूपों के प्रकार / उदाहरण टिप्पणी
1 काल के आधार पर वर्तमान (खाता है), भूत (खाया), भविष्य (खाएगा) क्रिया के समय के अनुसार रूप
2 लकार के आधार पर विधिलकार (खाना चाहिए), आज्ञालकार (खाओ), संदेहलकार (खाता होगा) वाक्य के भाव (मोड) के अनुसार
3 कर्ता के लिंग-वचन के आधार पर पुल्लिंग एकवचन (खाता है), स्त्रीलिंग एकवचन (खाती है), बहुवचन (खाते हैं) कर्ता के अनुसार क्रिया का सहमति रूप
4 पुरुष के आधार पर उत्तम (मैं खाता हूँ), मध्यम (तुम खाते हो), अन्य (वह खाता है) कर्ता की दूरी/सम्बन्ध के अनुसार
5 वचन के आधार पर एकवचन (लिखता है), बहुवचन (लिखते हैं) कर्ता की संख्या के अनुसार

5. उदाहरण: एक धातु के विभिन्न रूप

'पढ़ना' (धातु: पढ़) क्रिया के विभिन्न रूपों का उदाहरणात्मक विवरण:

काल / लकार उत्तम पुरुष (मैं) मध्यम पुरुष (तुम) अन्य पुरुष (वह)
वर्तमान काल मैं पढ़ता हूँ / पढ़ती हूँ तुम पढ़ते हो वह पढ़ता है / पढ़ती है
भूतकाल (सामान्य) मैंने पढ़ / पढ़ तुमने पढ़ उसने पढ़ / पढ़
भविष्यत काल मैं पढ़ूँगा / पढ़ूँगी तुम पढ़ोगे / पढ़ोगी वह पढ़ेगा / पढ़ेगी
आज्ञालकार
(आदेश)
--- (तुम) पढ़!
(आप) पढ़िए!
वह पढ़!
विधिलकार
(चाहिए)
मुझे पढ़ना चाहिए तुम्हें पढ़ना चाहिए उसे पढ़ना चाहिए

6. वाक्य में प्रयोग / प्रयोग की विधि

क्रिया का सही रूप चुनने के लिए इन चरणों का पालन करें:

चरण 1: कर्ता की पहचान - कर्ता कौन है? उसका पुरुष (मैं/तुम/वह), लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग) और वचन (एकवचन/बहुवचन) क्या है?

चरण 2: काल/भाव की पहचान - वाक्य किस समय या भाव की बात कर रहा है? (वर्तमान, भूत, भविष्य, आदेश, इच्छा आदि)।

चरण 3: संयोजन - धातु के साथ उपयुक्त प्रत्यय जोड़ें।

उदाहरण: कर्ता: 'वह लड़की' (अन्य पुरुष, स्त्रीलिंग, एकवचन)। काल: वर्तमान। क्रिया: खेलना (धातु: खेल)।
रूप: खेल + ती + है = खेलती है

याद रखें: सहायक क्रिया ('है', 'था', 'होगा') का रूप भी कर्ता के अनुसार बदलता है।

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ

क्रिया रूपों में सबसे आम गलतियाँ लिंग-वचन की अशुद्धि, पुरुष के अनुसार क्रिया रूप का गलत प्रयोग, और काल व लकार के प्रत्ययों में भ्रम की हैं।

  • भ्रम 1: कर्ता और क्रिया में लिंग-वचन की अशुद्धि। जैसे: "लड़कियाँ खेलता है।" (गलत); सही: "लड़कियाँ खेलती हैं।" बहुवचन कर्ता के साथ क्रिया भी बहुवचन में होगी।
  • भ्रम 2: उत्तम पुरुष (मैं) और मध्यम पुरुष (तुम) में क्रिया रूपों का भ्रम। जैसे: "मैं जाता हो।" (गलत); सही: "मैं जाता हूँ।" "तुम जाते हूँ।" (गलत); सही: "तुम जाते हो।"
  • भ्रम 3: आज्ञालकार में 'तुम' और 'आप' के लिए अलग-अलग रूप। 'तुम' के लिए: पढ़, 'आप' के लिए: पढ़िए। दोनों को मिला देना गलत है।
  • सावधानी: परीक्षा में अक्सर रिक्त स्थान भरने के लिए क्रिया का सही रूप चुनना होता है। कर्ता और काल को पहचानकर ही रूप चुनें।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • हिंदी में क्रिया रूपों का निर्माण मुख्यतः दो ढंग से होता है: केवल धातु के रूप में (जैसे: पढ़ा, लिखा) और धातु + सहायक क्रिया के रूप में (जैसे: पढ़ रहा है, लिख चुका है)।
  • अकर्मक क्रियाओं के भूतकाल में कर्ता के साथ 'ने' विभक्ति नहीं लगती, जबकि सकर्मक क्रियाओं में लगती है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।
  • लकारों की संख्या विद्वानों में मतभेद के कारण 5 से 11 तक मानी जाती है, लेकिन पाठ्यक्रम में मुख्यतः विधिलकार, आज्ञालकार और संदेहलकार पढ़ाए जाते हैं।
  • क्रिया का मूल रूप (इनफिनिटिव) हमेशा 'ना' में समाप्त होता है - जैसे करना, होना, जाना।

9. 🎯 क्रिया के रूप आधारित चुनौती

नीचे दिए गए 10 प्रश्नों से जाँचिए कि आपने क्रिया रूपों के निर्माण और प्रयोग के नियम कितनी अच्छी तरह सीखे हैं।

1. "वे लोग" (बहुवचन, पुल्लिंग) कर्ता के लिए 'आना' क्रिया का वर्तमान काल में सही रूप लिखिए।

उत्तर: आते हैं। (धातु 'आ' + ते (बहुवचन पुल्लिंग प्रत्यय) + हैं (सहायक क्रिया))

2. 'सोना' क्रिया (अकर्मक) का भूतकाल रूप कर्ता 'वह लड़का' के लिए बनाइए और बताइए कि इसमें 'ने' विभक्ति क्यों नहीं लगेगी?

उत्तर: सही रूप: वह लड़का सोया
कारण: 'सोना' एक अकर्मक क्रिया है। अकर्मक क्रियाओं के भूतकाल में कर्ता के साथ 'ने' विभक्ति का प्रयोग नहीं होता। 'ने' विभक्ति केवल सकर्मक क्रियाओं के भूतकाल में लगती है।

3. क्रिया 'होना' के मूल धातु रूप (इनफिनिटिव) से उत्तम पुरुष (मैं) के लिए भविष्यत काल का रूप बनाइए।

उत्तर: मूल रूप: होना। धातु: हो।
उत्तम पुरुष एकवचन भविष्यत काल: होऊँगा (पुल्लिंग) / होऊँगी (स्त्रीलिंग)।
(हो + ऊँ + गा/गी)

4. "तुम्हें यह काम करना चाहिए।" इस वाक्य में प्रयुक्त लकार का नाम बताइए और उसकी एक विशेषता लिखिए।

उत्तर: लकार: विधिलकार (कर्तव्य या इच्छा बताने वाला)।
विशेषता: विधिलकार में क्रिया के मूल रूप (करना, जाना) के साथ 'चाहिए', 'चाहिये' आदि शब्द जुड़ते हैं। इससे कर्तव्य, इच्छा, अनिवार्यता आदि का भाव प्रकट होता है।

5. "तुम" कर्ता के लिए 'लिखना' क्रिया का आज्ञालकार (आदेशात्मक) रूप लिखिए। साथ ही, यदि कर्ता 'आप' होता तो रूप क्या होता?

उत्तर:
कर्ता 'तुम' के लिए: लिखो!
कर्ता 'आप' के लिए: लिखिए!
(आज्ञालकार में 'तुम' के लिए 'ओ' प्रत्यय और 'आप' के लिए 'इए' प्रत्यय लगता है।)

6. निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करें: "मैं और मेरा भाई कल फिल्म देखने गयी।"

उत्तर: शुद्ध वाक्य: "मैं और मेरा भाई कल फिल्म देखने गए।"
कारण: कर्ता 'मैं और मेरा भाई' बहुवचन पुल्लिंग है (क्योंकि 'और' से जुड़े कर्ताओं में यदि एक भी पुल्लिंग है तो क्रिया पुल्लिंग बहुवचन में होगी)। इसलिए क्रिया 'गयी' (स्त्रीलिंग एकवचन) के बजाय 'गए' (पुल्लिंग बहुवचन) होगी।

7. 'पीना' क्रिया का संदेहलकार (अनुमान बोधक) रूप कर्ता 'वे' (बहुवचन) के लिए बनाइए।

उत्तर: वे पीते होंगे
(धातु 'पी' + ते (बहुवचन प्रत्यय) + होंगे (संदेह/अनुमान सूचक सहायक क्रिया))

8. एक ही धातु 'देख' से तीन अलग-अलग लकारों (काल नहीं) के वाक्य बनाइए।

उत्तर:
1. विधिलकार: तुम्हें यह फिल्म देखनी चाहिए
2. आज्ञालकार: (तुम) इस चिड़िया को देखो!
3. संदेहलकार: शायद वह अभी टीवी देख रहा होगा

9. कर्ता 'तुम' (मध्यम पुरुष) के लिए 'जाना' क्रिया का भूतकाल रूप और वर्तमान काल रूप बताइए।

उत्तर:
भूतकाल: तुम गए। (या 'तुमने जाना' - यदि सकर्मक प्रयोग हो, लेकिन 'जाना' अकर्मक है इसलिए 'तुम गए' ही सही है।)
वर्तमान काल: तुम जाते हो

10. क्रिया रूपों के निर्माण में 'धातु' और 'प्रत्यय' का क्या महत्व है? संक्षेप में समझाइए।

उत्तर: धातु क्रिया का मूल सार है, जो क्रिया का मुख्य अर्थ (करना, होना, जाना आदि) रखती है। प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो धातु के साथ जुड़कर क्रिया के रूप में काल, लिंग, वचन, पुरुष और लकार आदि का बोध कराते हैं। बिना प्रत्यय के धातु अधूरी रहती है, और बिना धातु के प्रत्यय का कोई अर्थ नहीं होता। दोनों मिलकर पूर्ण और सार्थक क्रिया रूप बनाते हैं।

10. सारांश

संक्षेप में, क्रिया के रूप क्रिया के उस परिवर्तनशील स्वरूप को कहते हैं जो धातु में विभिन्न प्रत्ययों के योग से बनता है। ये रूप कर्ता के लिंग, वचन, पुरुष और वाक्य के काल व लकार के अनुसार बदलते हैं। क्रिया रूपों के नियमों को समझना हिंदी व्याकरण की गहरी समझ हासिल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे हम शुद्ध, सटीक और प्रभावशाली वाक्यों का निर्माण कर पाते हैं।

11. संबंधित विषय संकेत

क्रिया के विभिन्न रूपों और उनके निर्माण के नियमों को समझने के बाद, अब यह जानना बाकी है कि वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया के बीच सम्बन्ध कैसे व्यक्त होता है। अगले और अंतिम टॉपिक में हम पढ़ेंगे: वाच्य का परिचय – कि कैसे वाक्य कर्ता, कर्म या भाव के अनुसार अपना स्वरूप बदलता है।

📝 क्रिया के रूप - अभ्यास वर्कशीट

क्रिया रूप निर्माण, लिंग-वचन सम्बन्ध और लकारों पर आधारित विस्तृत अभ्यास प्रश्न।

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