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क्रिया के रूप (Forms of Verb) | Hindi Grammar | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 21 JUNE 2026

क्या आपने कभी सोचा है कि “खाना”, “खाता है”, “खा रहा है”, और “खा चुका है” – ये सभी एक ही क्रिया के अलग-अलग रूप क्यों हैं? इनमें से कुछ क्रिया के मूल रूप हैं, कुछ सामान्य रूप, और कुछ संयुक्त रूप – और सभी का अपना अलग प्रयोग है। हिंदी व्याकरण में क्रिया के रूप (Forms of Verb) तीन मुख्य प्रकार के होते हैं – धातु (मूल रूप), सामान्य क्रिया, और संयुक्त क्रिया। धातु क्रिया का सबसे मूल रूप है – “पढ़”, “जा”, “खा” – जबकि सामान्य क्रिया वह है जो वाक्य में प्रयुक्त होती है – “पढ़ता है”, “जाता है” – और संयुक्त क्रिया दो या अधिक क्रियाओं का मेल है – “पढ़ लेना”, “जा देना”। इस पोस्ट में हम क्रिया के तीनों रूपों – धातु, सामान्य क्रिया, संयुक्त क्रिया – की परिभाषा, उनके बनने के नियम, उदाहरण, अंतर, और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 8‑9 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 8-9 | CBSE एवं UP Board



1. क्रिया के रूप – परिचय एवं परिभाषा

क्रिया के रूप (Forms of Verb) का अर्थ है – क्रिया के विभिन्न रूप जो वाक्य में उसके प्रयोग, काल, कर्ता, और अर्थ के अनुसार बदलते हैं। हिंदी में क्रिया के मुख्यतः तीन रूप होते हैं – धातु (मूल रूप), सामान्य क्रिया, और संयुक्त क्रिया

क्रिया के तीन मुख्य रूप:
  • धातु (मूल रूप): क्रिया का सबसे मूल, अविकारी रूप – “पढ़”, “जा”, “खा
  • सामान्य क्रिया: धातु में काल, लिंग, वचन के अनुसार प्रत्यय जोड़कर बना रूप – “पढ़ता है”, “जाता है”, “खाता है”
  • संयुक्त क्रिया: दो या अधिक क्रियाओं के मेल से बना रूप – “पढ़ लेना”, “जा देना”, “खा लेना

इन तीनों रूपों का अपना अलग महत्व और प्रयोग है – धातु क्रिया का आधार है, सामान्य क्रिया वाक्यों में प्रयुक्त होती है, और संयुक्त क्रिया अर्थ को और स्पष्ट/प्रभावी बनाती है।

2. धातु (मूल रूप) – परिभाषा एवं उदाहरण

धातु (Root Verb) क्रिया का सबसे मूल, अविकारी रूप है – बिना किसी प्रत्यय, काल, लिंग, वचन के। यह क्रिया का आधार है – जिसमें ‘ना’ जोड़कर हम क्रिया का मूल रूप पाते हैं – “पढ़ना”, “जाना”, “खाना”।

धातु के लक्षण:
  • अविकारी: लिंग, वचन, काल के अनुसार नहीं बदलता – “पढ़” ही रहता है।
  • मूल अर्थ: क्रिया का मूल काम बताता है – “पढ़” का मूल अर्थ = पढ़ना।
  • उपसर्ग/प्रत्यय जोड़ने का आधार: “पढ़” में ‘ता’ जोड़कर “पढ़ता” बनता है।

उदाहरण –
  • गति वाचक धातुएँ: जा, आ, चल, भाग, उड़
  • क्रिया वाचक धातुएँ: खा, पी, पढ़, लिख, गा
  • अवस्था वाचक धातुएँ: सो, रो, हँस, जाग, बैठ

धातु क्रिया की जड़ है – इसे समझे बिना क्रिया के अन्य रूपों को समझना मुश्किल है। “पढ़” – यह धातु है – “पढ़ता”, “पढ़ेगा”, “पढ़वाना” – सभी इसी धातु से बने हैं।

3. सामान्य क्रिया – रूप और प्रयोग

सामान्य क्रिया (Simple Verb) धातु में काल, लिंग, वचन के अनुसार प्रत्यय (जैसे – ‘ता’, ‘ती’, ‘ते’, ‘आ’, ‘ई’, ‘ए’) जोड़कर बनती है – और वाक्यों में प्रयुक्त होती है।

सामान्य क्रिया के लक्षण:
  • विकारी: लिंग, वचन, काल के अनुसार बदलती है – “पढ़ता” (पुल्लिंग, एकवचन) → “पढ़ती” (स्त्रीलिंग) → “पढ़ते” (बहुवचन)
  • वाक्य में प्रयुक्त: “राम पढ़ता है।” – यहाँ ‘पढ़ता’ सामान्य क्रिया है।
  • काल और कर्ता के अनुसार बदलती है: “पढ़ता”, “पढ़ेगा”, “पढ़ा” – समय के अनुसार।

उदाहरण –
  • वर्तमान काल: “राम पढ़ता है।” – ‘पढ़ता’ सामान्य क्रिया है।
  • भूतकाल: “राम पढ़ा।” – ‘पढ़ा’ सामान्य क्रिया है।
  • भविष्य काल: “राम पढ़ेगा।” – ‘पढ़ेगा’ सामान्य क्रिया है।

सामान्य क्रिया वाक्य का मुख्य काम बताती है – “राम पढ़ता है” – यहाँ ‘पढ़ता’ मुख्य काम है।

4. संयुक्त क्रिया – रूप और प्रयोग

संयुक्त क्रिया (Compound Verb) दो या अधिक क्रियाओं के मेल से बनती है – मुख्य क्रिया (धातु या सामान्य रूप) + सहायक क्रिया – मिलकर एक नया अर्थ देती है।

संयुक्त क्रिया के लक्षण:
  • दो या अधिक क्रियाएँ:खा लेना” – ‘खा’ (मुख्य) + ‘लेना’ (सहायक)
  • अर्थ में सूक्ष्मता: “खाना” (सामान्य) बनाम “खा लेना” (संयुक्त) – ‘खा लेना’ में पूर्णता/समाप्ति का भाव आ गया।
  • कई प्रकार की संयुक्त क्रियाएँ: “जा देना”, “पढ़ लेना”, “कर डालना”, “सो जाना”

संयुक्त क्रिया के प्रकार – (सहायक क्रिया के अनुसार):
  • ‘लेना’ के साथ: “खा लेना”, “पढ़ लेना” – अपने लिए (स्वयं)
  • ‘देना’ के साथ: “जा देना”, “कर देना” – दूसरों के लिए
  • ‘जाना’ के साथ: “सो जाना”, “बैठ जाना” – अचानक/पूर्णता
  • ‘डालना’ के साथ: “कर डालना” – जल्दी/अचानक

संयुक्त क्रिया अर्थ को गहरा बनाती है और वाक्य को अधिक प्रभावी – “मैंने काम किया” बनाम “मैंने काम कर दिया” – दूसरा अधिक पूर्णता/निर्णायकता दिखाता है।

5. तीनों रूपों में अंतर – तुलनात्मक अध्ययन

क्रिया के तीनों रूपों – धातु, सामान्य क्रिया, संयुक्त क्रिया – के बीच मुख्य अंतर रचना, अर्थ, और प्रयोग का है।

धातु (मूल रूप) सामान्य क्रिया संयुक्त क्रिया
क्रिया का सबसे मूल रूप – “पढ़” धातु में प्रत्यय जोड़कर बना – “पढ़ता” दो क्रियाएँ मिलकर – “पढ़ लेना”
अविकारी – लिंग/वचन/काल से नहीं बदलता विकारी – लिंग/वचन/काल से बदलता है मुख्य + सहायक – दोनों बदल सकते हैं
मूल अर्थ – “पढ़ना” सामान्य अर्थ – “पढ़ता है” (काल/लिंग/वचन सहित) सूक्ष्म अर्थ – “पढ़ लेना” (पूर्णता/समाप्ति)
वाक्य में अकेली नहीं आती – “पढ़” (अधूरा) वाक्य में प्रयुक्त होती है – “राम पढ़ता है” वाक्य में प्रयुक्त होती है – “राम ने किताब पढ़ ली”
ट्रिक – याद रखें:धातु – जड़ (मूल); सामान्य – पेड़ (प्रयोग); संयुक्त – फल (गहरा अर्थ)। धातु से सामान्य बने, सामान्य से संयुक्त – क्रिया का यही क्रम है।”


हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “खाना” – इस शब्द का क्रिया के रूपों के अनुसार वर्गीकरण करें।
उत्तर देखें
उत्तर: ‘खाना’ – सामान्य क्रिया/धातु
व्याख्या: ‘खाना’ का मूल रूप (धातु) – ‘खा’ है – ‘खाना’ सामान्य क्रिया है – इससे ‘खा लेना’ संयुक्त क्रिया बनती है।
उदाहरण 2
प्रश्न: “राम पढ़ता है।” – इस वाक्य में क्रिया का कौन-सा रूप है?
उत्तर देखें
उत्तर: सामान्य क्रिया
व्याख्या: ‘पढ़ता’ – धातु ‘पढ़’ में ‘ता’ प्रत्यय जुड़ा है – यह सामान्य क्रिया है (वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन)।
उदाहरण 3
प्रश्न: “राम ने खाना खा लिया।” – इस वाक्य में क्रिया का कौन-सा रूप है?
उत्तर देखें
उत्तर: संयुक्त क्रिया
व्याख्या: ‘खा लिया’ – ‘खा’ (मुख्य) + ‘लिया’ (सहायक) – मिलकर संयुक्त क्रिया बनी है – इससे पूर्णता का भाव आया है।
उदाहरण 4
प्रश्न: “जा” – इस शब्द का क्रिया के रूपों के अनुसार वर्गीकरण करें।
उत्तर देखें
उत्तर: ‘जा’ – धातु (मूल रूप)
व्याख्या: ‘जा’ का कोई प्रत्यय नहीं है – यह क्रिया का सबसे मूल, अविकारी रूप है – इससे ‘जाता’ (सामान्य) और ‘जा देना’ (संयुक्त) बनते हैं।
उदाहरण 5
प्रश्न: “सो जाना” – क्रिया का कौन-सा रूप है और इसका क्या अर्थ है?
उत्तर देखें
उत्तर: संयुक्त क्रिया
व्याख्या: ‘सो जाना’ – ‘सो’ (मुख्य) + ‘जाना’ (सहायक) – इसका अर्थ है ‘नींद आ जाना’ या ‘सोने की पूर्ण अवस्था’ – ‘सोना’ (सामान्य) से अधिक सूक्ष्म अर्थ है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“पढ़” – क्रिया का कौन-सा रूप है?
उत्तर देखें
उत्तर: धातु (मूल रूप)
प्रश्न 2
“सीता गाती है।” – इस वाक्य में क्रिया का कौन-सा रूप है?
उत्तर देखें
उत्तर: सामान्य क्रिया (‘गाती’ – धातु ‘गा’ + ‘ती’)
प्रश्न 3
“राम ने काम कर डाला।” – क्रिया का रूप बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: संयुक्त क्रिया (‘कर डाला’ – ‘कर’ + ‘डाला’ सहायक)
प्रश्न 4
“खा लेना” – इस संयुक्त क्रिया में मुख्य और सहायक क्रिया अलग करें।
उत्तर देखें
उत्तर: मुख्य – ‘खा’, सहायक – ‘लेना’
प्रश्न 5
“जा” (धातु) – इससे सामान्य क्रिया और संयुक्त क्रिया बनाएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: सामान्य – ‘जाता है’, ‘गया’, ‘जाएगा’ ; संयुक्त – ‘जा देना’, ‘जा बैठना’

क्रिया के रूपों की समझ क्यों ज़रूरी है?

क्रिया के रूपों को समझना हिंदी व्याकरण का आधारभूत हिस्सा है – यह हमें बताता है कि क्रिया कैसे बनती है, कैसे प्रयोग होती है, और कैसे उसका अर्थ गहरा होता है। धातु से सामान्य क्रिया, और सामान्य से संयुक्त क्रिया – यह क्रम क्रिया के विकास को दर्शाता है। इस ज्ञान के बिना हम सही वाक्य-रचना नहीं कर सकते – “राम ने काम किया” बनाम “राम ने काम कर दिया” – दोनों में अर्थ का बड़ा अंतर है। इस पोस्ट में हमने  क्रिया परिभाषा और  क्रिया के भेद के साथ क्रिया के तीनों रूपों को स्पष्ट किया है – अब आप किसी भी क्रिया के रूप को पहचान सकते हैं और समझ सकते हैं कि वह कैसे बनी है।

अभ्यास से ही क्रिया के रूपों की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक बातचीत में क्रियाओं पर ध्यान दें – वे धातु हैं, सामान्य क्रिया हैं, या संयुक्त क्रिया हैं – और देखें कि संयुक्त क्रिया से अर्थ कैसे सूक्ष्म हो जाता है। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।

📝 क्रिया के रूप अभ्यास – कक्षा 8-9

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य और 25 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक क्रिया का रूप (धातु, सामान्य क्रिया, या संयुक्त क्रिया) पहचानना है। साथ ही, कुछ धातुओं से सामान्य क्रिया और संयुक्त क्रिया बनानी है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

📖 वर्कशीट खोलें »

उत्तर कुंजी सहित • CBSE एवं UP Board पाठ्यक्रम के अनुरूप



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