वाच्य क्रिया का वह गुण है जो हमें बताता है कि वाक्य का केन्द्र किस पर है - कर्ता पर, कर्म पर या भाव पर। यह हमारी भाषा को लचीला और विविधतापूर्ण बनाता है। एक ही घटना को हम तीन अलग-अलग ढंग से कह सकते हैं, बस वाच्य बदलकर। यह टॉपिक हिंदी व्याकरण के 'क्रिया' अध्याय का समापन बिंदु है, जो हमें भाषा की सूक्ष्मताओं का संपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करता है।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 9–10 (परिचय) | कक्षा 10–11 (अभ्यास) | कक्षा 11–12 (उच्च स्तर प्रयोग)
1. वाच्य का परिचय
कल्पना कीजिए, एक ही स्थिति को तीन तरीकों से कहा जा सकता है: "राम ने रावण को मारा।" "रावण राम से मारा गया।" "राम से रावण का मारा जाना हुआ।" पहले वाक्य में ज़ोर कर्ता 'राम' पर है, दूसरे में कर्म 'रावण' पर और तीसरे में भाव 'मारे जाने' पर। यही तीन दृष्टिकोण वाच्य के तीन भेद हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य। वाच्य वह दर्पण है जिसमें वाक्य अपना केन्द्र बिंदु बदलकर देखता है।
रोज़मर्रा के प्रयोग में भी हम वाच्य बदलते रहते हैं। जब हम अपनी उपलब्धि बताना चाहते हैं तो कर्तृवाच्य का प्रयोग करते हैं: "मैंने यह प्रोजेक्ट पूरा किया।" जब बाहरी घटना या प्रक्रिया पर ध्यान दिलाना हो तो कर्मवाच्य: "यह प्रोजेक्ट पूरा किया गया।" और जब किसी सामान्य स्थिति या भाव की बात हो तो भाववाच्य: "यहाँ से जाना पड़ता है।" वाच्य का चुनाव वक्ता के इरादे पर निर्भर करता है।
2. परिभाषा
वाच्य की परिभाषा: क्रिया के जिस रूपान्तर से यह ज्ञात हो कि वाक्य में प्रधानता किसकी है - कर्ता की, कर्म की या भाव की, उसे वाच्य कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वाच्य वह व्याकरणिक कोटि है जो यह बताती है कि वाक्य की क्रिया कर्ता, कर्म या भाव में से किसके सन्दर्भ में प्रयुक्त हुई है।
3. मुख्य बिंदु / पहचान
वाच्य की पहचान और समझ के लिए इन बुनियादी बातों को ध्यान में रखें:
- केन्द्र बिंदु: वाच्य का निर्धारण इस आधार पर होता है कि वाक्य में मुख्य बल (प्रधानता) किस पर है। कर्ता पर हो तो कर्तृवाच्य, कर्म पर हो तो कर्मवाच्य, और भाव पर हो तो भाववाच्य।
- क्रिया रूप में परिवर्तन: वाच्य बदलने पर क्रिया का रूप बदल जाता है। कर्तृवाच्य में क्रिया सकर्मक या अकर्मक हो सकती है, कर्मवाच्य में प्रायः 'जाना' क्रिया का प्रयोग होता है, और भाववाच्य में क्रिया अकर्मक रहती है।
- कर्ता की भूमिका: कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान और सक्रिय होता है। कर्मवाच्य में कर्ता गौण या अनुपस्थित हो जाता है, और कर्म प्रधान बन जाता है। भाववाच्य में कर्ता का अस्तित्व ही नहीं होता या वह निष्क्रिय होता है।
- विभक्ति चिह्न: विभिन्न वाच्यों में कर्ता और कर्म के साथ लगने वाली विभक्तियाँ (चिह्न) बदल जाती हैं। जैसे कर्तृवाच्य में कर्ता के साथ 'ने', कर्मवाच्य में कर्म के साथ 'से' या कोई विभक्ति नहीं।
4. भेद / प्रकार
हिंदी में वाच्य के मुख्यतः तीन भेद माने जाते हैं। इनका विवरण निम्न तालिका में दिया गया है:
| क्रम | वाच्य का प्रकार | परिभाषा / मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | कर्तृवाच्य (Active Voice) |
जिस वाक्य में क्रिया के विषय में कर्ता की प्रधानता हो। कर्ता सक्रिय होता है और क्रिया कर्ता के लिंग-वचन के अनुरूप होती है। | राम ने फल खाया। सीता गाती है। |
| 2 | कर्मवाच्य (Passive Voice) |
जिस वाक्य में क्रिया के विषय में कर्म की प्रधानता हो। कर्ता गौण हो जाता है या छिप जाता है, और क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुरूप होती है। | फल राम द्वारा खाया गया। पत्र लिखा जाता है। |
| 3 | भाववाच्य (Impersonal Voice) |
जिस वाक्य में न तो कर्ता की प्रधानता हो और न कर्म की, बल्कि केवल क्रिया के भाव या घटना की प्रधानता हो। इसमें कर्ता का अस्तित्व ही नहीं होता या अज्ञात होता है। | मुझसे उठा नहीं जाता। यहाँ सोया नहीं जाता। |
5. उदाहरण
एक ही मूल अर्थ को तीनों वाच्यों में व्यक्त करने वाले उदाहरण:
- कर्तृवाच्य के उदाहरण:
- माली ने पौधों को सींचा। (कर्ता 'माली' प्रधान)
- वह पुस्तक पढ़ता है।
- हमने मैच जीता।
- कर्मवाच्य के उदाहरण:
- पौधों को माली द्वारा सींचा गया। (कर्म 'पौधों' प्रधान)
- पुस्तक उससे पढ़ी जाती है।
- मैच हमसे जीता गया।
- भाववाच्य के उदाहरण:
- मुझसे उठा नहीं जाता। (भाव 'उठने का असमर्थता' प्रधान)
- यहाँ चला नहीं जाता।
- अब सोया जाए। (भाव 'सोने की इच्छा' प्रधान)
6. वाक्य में प्रयोग / प्रयोग की विधि
वाच्य परिवर्तन के मुख्य नियम और प्रयोग विधि:
1. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना:
• कर्ता के स्थान पर कर्म को प्रधानता दें।
• कर्ता के साथ 'द्वारा', 'से' या 'के द्वारा' लगाएँ या उसे हटा दें।
• क्रिया को कर्म के लिंग-वचन के अनुसार बदलें और उसके साथ 'जाना' क्रिया का उचित रूप जोड़ें।
उदाहरण: "राम ने पत्र लिखा।" → "पत्र राम द्वारा लिखा गया।"
2. कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना:
• कर्ता को 'से' विभक्ति के साथ रखें (जैसे: मुझसे, उससे)।
• कर्म को हटा दें (क्योंकि भाववाच्य में कर्म नहीं होता)।
• क्रिया को सदैव एकवचन पुल्लिंग में रखें और उसके साथ 'जाना' क्रिया का रूप जोड़ें।
उदाहरण: "मैं चल नहीं सकता।" → "मुझसे चला नहीं जाता।"
3. भाववाच्य का विशेष प्रयोग: भाववाच्य का प्रयोग अक्सर असमर्थता, अनिच्छा, सामान्य नियम या प्राकृतिक घटनाओं को बताने के लिए होता है।
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
वाच्य के प्रयोग में सबसे आम भ्रम कर्मवाच्य और भाववाच्य को एक समान समझना, और वाच्य परिवर्तन में क्रिया के लिंग-वचन में गलती करना है।
- भ्रम 1: कर्मवाच्य और भाववाच्य में अंतर न समझना। कर्मवाच्य में कर्म का अस्तित्व और प्रधानता होती है, जबकि भाववाच्य में कर्म होता ही नहीं, केवल भाव या स्थिति होती है। जैसे: "चाय पी जाती है।" (कर्मवाच्य - कर्म 'चाय' है) vs "मुझसे चला नहीं जाता।" (भाववाच्य - कोई कर्म नहीं)।
- भ्रम 2: कर्मवाच्य में क्रिया का लिंग-वचन। कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के लिंग-वचन के अनुसार होती है, कर्ता के नहीं। जैसे: "सेब (पुल्लिंग) लड़के द्वारा खाया गया।" क्रिया 'खाया गया' कर्म 'सेब' के अनुसार है।
- सावधानी: भाववाच्य की क्रिया सदैव एकवचन पुल्लिंग में होती है, चाहे कर्ता कुछ भी हो। जैसे: "मुझसे उठा नहीं जाता।" (एकवचन पुल्लिंग), "हमसे चला नहीं जाता।" (एकवचन पुल्लिंग ही)।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- वाच्य को अंग्रेजी में Voice कहते हैं। कर्तृवाच्य = Active Voice, कर्मवाच्य = Passive Voice, भाववाच्य = Impersonal Voice.
- केवल सकर्मक क्रियाओं का ही कर्मवाच्य बन सकता है, अकर्मक क्रियाओं का नहीं। अकर्मक क्रियाओं का केवल भाववाच्य बनता है।
- परीक्षा में अक्सर कर्तृवाच्य के वाक्य को कर्मवाच्य या भाववाच्य में बदलने को कहा जाता है, या फिर दिए गए वाक्य का वाच्य बताने को कहा जाता है।
- कर्मवाच्य में प्रायः 'जाना' क्रिया का भूतकालिक कृदन्त रूप 'गया', 'गई', 'गए' आदि का प्रयोग होता है।
9. 🎯 वाच्य आधारित चुनौती
नीचे दिए गए 10 प्रश्नों से जाँचिए कि आपने वाच्य के तीनों भेदों और उनके परिवर्तन के नियमों को कितनी अच्छी तरह समझा है।
1. "शिक्षक ने छात्रों को पाठ पढ़ाया।" इस कर्तृवाच्य वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए।
(कर्म 'छात्रों को' या 'पाठ' को प्रधानता दी गई है और 'द्वारा' तथा 'गया' का प्रयोग हुआ है।)
2. कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य में एक मुख्य अंतर बताइए।
3. "बच्चों द्वारा यह कहानी सुनी गई।" इस वाक्य का वाच्य बताइए और कर्तृवाच्य में बदलिए।
वाच्य: कर्मवाच्य (क्योंकि कर्म 'कहानी' प्रधान है और 'द्वारा', 'गई' का प्रयोग है)।
कर्तृवाच्य में: "बच्चों ने यह कहानी सुनी।"
4. "मुझसे अब चला नहीं जाता।" इस वाक्य का वाच्य बताइए। क्या इसे कर्तृवाच्य में बदला जा सकता है? यदि हाँ, तो बदलिए।
वाच्य: भाववाच्य (क्योंकि न कर्ता प्रधान है, न कर्म; केवल 'चलने में असमर्थता' का भाव प्रधान है)।
हाँ, इसे कर्तृवाच्य में बदला जा सकता है: "मैं अब चल नहीं सकता।" या "मैं अब चल नहीं पाता।"
5. क्या निम्नलिखित वाक्य शुद्ध है? "इस कमरे में सोया जाता है।" यदि हाँ, तो इसका वाच्य बताइए।
वाच्य: भाववाच्य। यह वाक्य एक सामान्य स्थिति या भाव (इस कमरे में सोने की क्रिया होती है/हो सकती है) बता रहा है। इसमें न तो कोई विशेष कर्ता है, न कर्म।
6. "वह फूल तोड़ता है।" इस कर्तृवाच्य वाक्य को कर्मवाच्य में बदलते समय क्रिया का रूप कर्म 'फूल' के अनुसार क्या होगा?
कर्मवाच्य वाक्य: "फूल उसके द्वारा तोड़ा जाता है।"
क्रिया रूप: तोड़ा जाता है (पुल्लिंग, एकवचन)।
7. भाववाच्य की क्रिया का लिंग-वचन सदैव कैसा होता है? एक उदाहरण देकर समझाइए।
उदाहरण:
- मुझसे (स्त्रीलिंग कर्ता भी) उठा नहीं जाता। (एकवचन पुल्लिंग)
- हम लोगों से (बहुवचन कर्ता) वहाँ रहा नहीं जाता। (एकवचन पुल्लिंग)
- उससे (पुल्लिंग कर्ता) दौड़ा नहीं जाता। (एकवचन पुल्लिंग)
8. निम्नलिखित वाक्यों में से भाववाच्य का वाक्य चुनिए:
क) किताबें पढ़ी जा रही हैं।
ख) बच्चों से खेला नहीं जाता।
ग) खाना माँ द्वारा बनाया गया।
घ) वह गाना गाती है।
कारण: यह वाक्य एक भाव या स्थिति (बच्चों का खेलने में असमर्थ या अनिच्छुक होना) बता रहा है। इसमें कोई कर्म नहीं है और क्रिया 'खेला नहीं जाता' एकवचन पुल्लिंग में है। अन्य वाक्य: क) कर्मवाच्य (कर्म 'किताबें'), ग) कर्मवाच्य (कर्म 'खाना'), घ) कर्तृवाच्य (कर्ता 'वह' प्रधान)।
9. "सैनिकों ने दुश्मन को हराया।" इस वाक्य को पहले कर्मवाच्य में और फिर उस कर्मवाच्य वाक्य को भाववाच्य में बदलने का प्रयास कीजिए। क्या यह संभव है? क्यों या क्यों नहीं?
कर्मवाच्य: "दुश्मन सैनिकों द्वारा हराया गया।"
भाववाच्य में बदलना: इस विशिष्ट वाक्य को भाववाच्य में बदलना उचित नहीं है, क्योंकि भाववाच्य का प्रयोग सामान्यतः असमर्थता, अनिच्छा, सामान्य स्थिति या प्राकृतिक घटना बताने के लिए होता है। "हराना" एक सक्रिय, विशिष्ट कार्य है जिसमें कर्ता और कर्म स्पष्ट हैं। इसे भाववाच्य में बदलने पर अर्थहीन वाक्य बनेगा, जैसे: "सैनिकों से दुश्मन का हराया जाना हुआ।" जो अटपटा लगता है।
10. वाच्य परिवर्तन क्यों आवश्यक है? हमें एक ही बात को अलग-अलग वाच्यों में कहने की ज़रूरत कब पड़ती है?
जरूरत पड़ती है जब:
1. ज़ोर बदलना हो: जब वक्ता कर्ता पर नहीं, बल्कि कर्म या घटना पर ध्यान आकर्षित करना चाहता है।
2. कर्ता अज्ञात या अनिश्चित हो: जब पता न हो कि काम किसने किया, तो कर्मवाच्य प्रयोग करते हैं। (जैसे: "खिड़की तोड़ी गई है।")
3. सामान्य नियम या भाव बताना हो: तब भाववाच्य का प्रयोग होता है। (जैसे: "यहाँ धूम्रपान नहीं किया जाता।")
4. शिष्टता या विनम्रता दिखानी हो: कभी-कभी प्रत्यक्ष कर्तृवाच्य की जगह कर्मवाच्य या भाववाच्य का प्रयोग अधिक विनम्र लगता है।
10. सारांश
संक्षेप में, वाच्य क्रिया का वह गुण है जो वाक्य में प्रधानता के केन्द्र को निर्धारित करता है। कर्तृवाच्य में यह केन्द्र कर्ता होता है, जो सक्रिय रूप से कार्य करता है। कर्मवाच्य में केन्द्र कर्म होता है, जिस पर कार्य का प्रभाव पड़ता है। भाववाच्य में केन्द्र न तो कर्ता होता है न कर्म, बल्कि क्रिया का भाव या घटना मात्र होता है। वाच्य परिवर्तन से हम एक ही तथ्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत कर सकते हैं, जो भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता को बहुत समृद्ध बनाता है।
11. संबंधित विषय संकेत
बधाई हो! आपने हिंदी व्याकरण के "क्रिया" अध्याय की सातों महत्वपूर्ण कड़ियों का सफर पूरा कर लिया है - क्रिया की परिभाषा से लेकर वाच्य के परिचय तक। यह ज्ञान आपके भाषा-ज्ञान की मजबूत नींव है। अब आप आगे के व्याकरणिक अध्यायों जैसे संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण की ओर बढ़ सकते हैं।
📝 वाच्य का परिचय - अभ्यास वर्कशीट
वाच्य पहचान, परिवर्तन और प्रयोग पर आधारित विस्तृत अभ्यास प्रश्नों का संग्रह।
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