सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 21 JUNE 2026
“राम ने किताब पढ़ी” और “किताब राम द्वारा पढ़ी गई” – क्या आपको लगता है कि इन दोनों वाक्यों में कोई अंतर है? अर्थ तो एक ही है – किताब पढ़ी गई – पर पहले वाक्य में राम (कर्ता) को महत्व दिया गया है, और दूसरे में किताब (कर्म) को। हिंदी व्याकरण में क्रिया के इस रूप को वाच्य (Voice) कहते हैं। वाच्य यह बताता है कि वाक्य में किसे महत्व दिया गया है – कर्ता को, कर्म को, या केवल क्रिया को। हिंदी में वाच्य के तीन प्रकार होते हैं – कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य। यह क्रिया श्रृंखला की अंतिम कड़ी है – वाच्य का परिचय (Introduction to Voice)। इस पोस्ट में हम वाच्य की परिभाषा, उसके तीनों प्रकार, उनके बनने के नियम, उदाहरण, पहचान के नियम, और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 9‑10 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे पढ़कर अपनी हिंदी को और निखार सकता है।
✅ अनुशंसित: कक्षा 9-10 | CBSE एवं UP Board
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1. वाच्य – परिभाषा एवं परिचय
वाच्य (Voice) क्रिया का वह रूप है जो यह बताता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म, या क्रिया में से किसे महत्व दिया गया है। हिंदी में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं – कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य।
उदाहरण –
- कर्तृवाच्य: “राम पढ़ता है।” (कर्ता – राम – का महत्व)
- कर्मवाच्य: “किताब पढ़ी जाती है।” (कर्म – किताब – का महत्व)
- भाववाच्य: “खाया जाता है।” (क्रिया का महत्व – कर्ता/कर्म स्पष्ट नहीं)
वाच्य का ज्ञान हमें वाक्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखने की क्षमता देता है – कभी हम कर्ता पर ज़ोर देना चाहते हैं, तो कभी कर्म पर, और कभी केवल क्रिया पर।
2. वाच्य के तीन प्रकार – परिभाषा एवं उदाहरण
हिंदी में वाच्य के तीन प्रकार हैं –
लक्षण: क्रिया का रूप कर्ता के लिंग, वचन, काल के अनुसार बदलता है।
उदाहरण: “राम खाता है।” – कर्ता ‘राम’ को महत्व मिला है।
“सीता पढ़ती है।” – कर्ता ‘सीता’ को महत्व मिला है।
2. कर्मवाच्य (Passive Voice): जब वाक्य में कर्म को महत्व दिया जाता है – कर्म को कर्ता की तरह प्रस्तुत किया जाता है।
लक्षण: क्रिया का रूप कर्म के लिंग, वचन, काल के अनुसार आता है – कर्ता के साथ ‘द्वारा’ या ‘से’ आता है।
उदाहरण: “किताब पढ़ी जाती है।” – कर्म ‘किताब’ को महत्व मिला है।
“फल खाए गए।” – कर्म ‘फल’ को महत्व मिला है।
3. भाववाच्य (Impersonal Voice): जब वाक्य में केवल क्रिया को महत्व दिया जाता है – न तो कर्ता का, न ही कर्म का।
लक्षण: क्रिया का रूप तीसरा पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग में आता है – ‘जाना’, ‘खाया जाना’ आदि।
उदाहरण: “खाया जाता है।” – केवल खाने की क्रिया का महत्व है – कर्ता/कर्म स्पष्ट नहीं।
“सोया जाता है।” – केवल सोने की क्रिया का महत्व है।
ट्रिक – याद रखें: “कर्ता का महत्व → कर्तृवाच्य; कर्म का महत्व → कर्मवाच्य; क्रिया का महत्व → भाववाच्य।”
3. तीनों वाच्यों की पहचान – तुलनात्मक अध्ययन
तीनों वाच्यों को पहचानने के लिए ये नियम याद रखें –
| कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | भाववाच्य |
|---|---|---|
| कर्ता को महत्व | कर्म को महत्व | क्रिया को महत्व |
| क्रिया कर्ता के अनुसार | क्रिया कर्म के अनुसार | क्रिया तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग |
| “राम खाता है।” | “खाना खाया जाता है।” | “खाया जाता है।” |
| “सीता पढ़ती है।” | “किताब पढ़ी जाती है।” | “पढ़ा जाता है।” |
4. वाच्य बदलने के नियम
एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलने के लिए निम्नलिखित नियम हैं –
- कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य:
कर्ता को ‘द्वारा’ या ‘से’ में बदलें – कर्म को कर्ता बनाएँ – क्रिया का रूप कर्म के अनुसार बदलें।
“राम ने किताब पढ़ी।” → “किताब राम द्वारा पढ़ी गई।” - कर्तृवाच्य → भाववाच्य:
कर्ता और कर्म दोनों हटाएँ – केवल क्रिया को ‘जाना’ के साथ प्रयोग करें – क्रिया तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग में।
“राम खाता है।” → “खाया जाता है।” - कर्मवाच्य → कर्तृवाच्य:
‘द्वारा’/‘से’ के साथ आए कर्ता को मुख्य कर्ता बनाएँ – कर्म को कर्म बनाएँ – क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार बदलें।
“किताब राम द्वारा पढ़ी गई।” → “राम ने किताब पढ़ी।”
| वाच्य परिवर्तन | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृ → कर्म | कर्ता → ‘द्वारा’, कर्म → कर्ता | राम ने किताब पढ़ी → किताब राम द्वारा पढ़ी गई |
| कर्तृ → भाव | कर्ता/कर्म हटाएँ, क्रिया + ‘जाना’ | राम खाता है → खाया जाता है |
| कर्म → कर्तृ | ‘द्वारा’ से कर्ता निकालें | किताब राम द्वारा पढ़ी गई → राम ने किताब पढ़ी |
5. वाक्यों में वाच्य का सही प्रयोग
वाच्य का सही प्रयोग वाक्य के उद्देश्य पर निर्भर करता है –
- कर्तृवाच्य – जब कर्ता पर ज़ोर देना हो: “प्रधानमंत्री ने नई योजना की घोषणा की।” – कर्ता (प्रधानमंत्री) महत्वपूर्ण है।
- कर्मवाच्य – जब कर्म पर ज़ोर देना हो: “नई योजना प्रधानमंत्री द्वारा घोषित की गई।” – कर्म (योजना) पर ज़ोर है।
- भाववाच्य – जब केवल क्रिया की बात हो: “खाया जाता है।” – कर्ता/कर्म अज्ञात या महत्वहीन।
- विज्ञापन, सूचनाएँ, औपचारिक लेखन में: कर्मवाच्य और भाववाच्य का प्रयोग अधिक होता है – “सूचना दी जाती है।”, “नियम बनाए गए हैं।”
महत्वपूर्ण: सभी वाच्यों का अपना स्थान है – वाक्य के उद्देश्य के अनुसार सही वाच्य का चयन करें – इससे भाषा शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनती है।
हल सहित उदाहरण (5)
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कर्मवाच्य: “किताब राम द्वारा पढ़ी गई।”
व्याख्या: कर्ता ‘राम’ → ‘राम द्वारा’; कर्म ‘किताब’ → कर्ता बना; क्रिया ‘पढ़ी’ → ‘पढ़ी गई’ (कर्म के अनुसार)।
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व्याख्या: कर्म ‘गाना’ → कर्ता बना; कर्ता ‘सीता’ → ‘सीता द्वारा’; क्रिया ‘गाती है’ → ‘गाया जाता है’ (कर्म के अनुसार – पुल्लिंग, एकवचन)।
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व्याख्या: कर्ता ‘बच्चे’ और कर्म दोनों हटाएँ – केवल क्रिया ‘खेला जाता है’ – तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग।
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कर्तृवाच्य: “राम खाना खाता है।” (उचित कर्ता – राम)
व्याख्या: ‘द्वारा’/‘से’ नहीं है – पर ‘खाना’ (कर्म) को महत्व मिला है – कर्तृवाच्य में कर्ता ‘राम’ को महत्व मिला।
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व्याख्या: न तो कर्ता है, न ही कर्म – केवल क्रिया ‘सोया जाता है’ – यह भाववाच्य है।
अभ्यास प्रश्न (5)
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वाच्य का परिचय – क्रिया श्रृंखला का समापन
वाच्य हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण अध्याय है – यह हमें वाक्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखने और लिखने की क्षमता देता है। चाहे हम कर्ता पर ज़ोर देना चाहें (कर्तृवाच्य), कर्म पर (कर्मवाच्य), या केवल क्रिया पर (भाववाच्य) – वाच्य हमें यह विकल्प प्रदान करता है। यह क्रिया श्रृंखला की अंतिम कड़ी है – इस पोस्ट में हमने क्रिया परिभाषा और क्रिया के काल के साथ वाच्य के तीनों प्रकारों को स्पष्ट किया है – अब आप किसी भी वाक्य में वाच्य को पहचान सकते हैं और एक वाच्य से दूसरे में बदल सकते हैं।
याद रखें – अभ्यास ही निपुणता की कुंजी है। अपनी दैनिक बातचीत और लेखन में वाच्यों पर ध्यान दें – कब कर्तृवाच्य, कब कर्मवाच्य, और कब भाववाच्य का प्रयोग हुआ है – और देखें कि वाच्य बदलने से वाक्य का प्रभाव कैसे बदलता है। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, प्रभावी और प्रवाहपूर्ण बनाएगा। GPN के साथ सीखते रहें और आगे बढ़ते रहें!
📝 वाच्य अभ्यास – कक्षा 9-10
यह इंटरैक्टिव वर्कशीट क्रिया श्रृंखला की अंतिम वर्कशीट है। इसमें 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको प्रत्येक वाक्य में वाच्य की पहचान करनी है (कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, या भाववाच्य) और उसे दूसरे वाच्य में बदलना है। साथ ही, कुछ वाक्यों में सही वाच्य का चयन करना है (लेखन के उद्देश्य के अनुसार)। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी सम्पूर्ण क्रिया और वाच्य की समझ को परखें।
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