क्रिया के भेद क्रिया के विस्तृत परिवार की तरह हैं। अब तक हमने क्रिया के मूल स्वरूप, सकर्मक-अकर्मक भेद, मुख्य-सहायक क्रिया और काल को समझा। अब यह जानना ज़रूरी है कि क्रिया और भी किन-किन रूपों में प्रयुक्त होती है। प्रेरणार्थक क्रिया, पूर्वकालिक क्रिया, संयुक्त क्रिया आदि विशेष भेद हमें यह समझाते हैं कि क्रिया कितने सूक्ष्म और विविध अर्थों को व्यक्त कर सकती है।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 7–8 (परिचय) | कक्षा 8–9 (अभ्यास) | कक्षा 9–10 (उच्च स्तर प्रयोग)
1. क्रिया के भेद का परिचय
कल्पना कीजिए, कोई कहता है "मैंने खाना खा लिया"। कोई कहता है "मैंने उसे खाना खिला दिया"। पहले वाक्य में 'खा लिया' बताता है कि काम स्वयं किया, दूसरे में 'खिला दिया' बताता है कि काम दूसरे से करवाया। यह अंतर प्रेरणार्थक क्रिया का है। फिर कोई कहता है "खाना खाकर वह सो गया" - यहाँ 'खाकर' बता रहा है कि एक काम (खाना) दूसरे काम (सोना) से पहले हुआ। यह पूर्वकालिक क्रिया का उदाहरण है। ये सभी क्रिया के विशेष भेद हैं जो भाषा को समृद्ध और सटीक बनाते हैं।
रोज़मर्रा की भाषा में हम इन भेदों का प्रयोग बिना जाने ही करते रहते हैं। जब आप कहते हैं "मैंने किताब पढ़ डाली" तो यह संयुक्त क्रिया है। "उसने मुझसे पत्र लिखवाया" तो यह प्रेरणार्थक क्रिया है। "वह हँसता-हँसता बोला" तो यह अन्यपुरुषीय क्रिया है। इन भेदों को समझने से हम भाषा के सूक्ष्म अंतरों को पकड़ पाते हैं।
2. परिभाषा
क्रिया के भेद की परिभाषा: क्रिया के रचना, रूप और अर्थ के आधार पर किए गए विभिन्न वर्गीकरण को क्रिया के भेद कहते हैं। ये भेद हमें यह बताते हैं कि क्रिया किस प्रकार के कार्य को, किस रूप में और किस प्रयोजन से व्यक्त कर रही है।
3. मुख्य बिंदु / पहचान
क्रिया के विभिन्न भेदों की पहचान के लिए इन बातों पर ध्यान दें:
- रचना के आधार पर: क्रिया एक शब्द में है या दो शब्दों के योग से बनी है। जैसे: 'पढ़ना' (सामान्य), 'पढ़ डालना' (संयुक्त)।
- अर्थ के आधार पर: क्रिया क्या भाव व्यक्त कर रही है - स्वयं का काम, दूसरे से करवाना, एक काम के बाद दूसरा काम, आदि।
- प्रत्ययों पर ध्यान: विभिन्न भेदों में क्रिया के साथ विशेष प्रत्यय जुड़ते हैं। जैसे: प्रेरणार्थक में 'वाना', 'वानी' (पढ़वाना), पूर्वकालिक में 'कर' (खाकर)।
- कर्ता-कर्म सम्बन्ध: कुछ भेद कर्ता और कर्म के सम्बन्ध में परिवर्तन दर्शाते हैं। जैसे प्रेरणार्थक क्रिया में दो कर्ता होते हैं - प्रेरक (जो करवाता है) और प्रेरित (जो करता है)।
4. भेद / प्रकार
क्रिया के भेद मुख्यतः रचना और प्रयोग के आधार पर निम्नलिखित हैं। यहाँ मुख्य भेदों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है:
| क्रम | भेद का नाम | मुख्य विशेषता / परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रेरणार्थक क्रिया | जिस क्रिया से यह पता चले कि कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से करवा रहा है। | पढ़वाना, लिखवाना, करवाना ("मैंने उससे पत्र लिखवाया।") |
| 2 | पूर्वकालिक क्रिया (क्रियार्थक कृदंत) |
वह क्रिया जो मुख्य क्रिया से पहले पूरी हो जाने का भाव देती है। | खाकर, पढ़कर, जाकर ("वह नहाकर स्कूल गया।") |
| 3 | संयुक्त क्रिया | दो या दो से अधिक क्रियाओं के योग से बनी हुई क्रिया जिससे विशेष अर्थ निकलता है। | पढ़ डालना, लिख लेना, चला जाना ("उसने सारा काम कर डाला।") |
| 4 | नामधातु क्रिया | संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी हुई क्रिया। | लतियाना (लता से), हथियाना (हाथ से), बतियाना (बात से) |
| 5 | अकर्मक क्रिया से सकर्मक | जो क्रिया सामान्यतः अकर्मक होती है लेकिन विशेष प्रयोग में सकर्मक बन जाती है। | उड़ना (अकर्मक) → पतंग उड़ाना (सकर्मक) हँसना (अकर्मक) → मुझे हँसाना (सकर्मक) |
नोट: इसके अलावा द्विकर्मक क्रिया (दो कर्म लेने वाली), समूहवाचक क्रिया आदि भेद भी होते हैं। उपरोक्त पाँच मुख्य भेदों को पाठ्यक्रम में प्राथमिकता दी जाती है।
5. उदाहरण
विभिन्न भेदों के और अधिक स्पष्ट उदाहरण:
- प्रेरणार्थक क्रिया:
- अध्यापक ने छात्र से पाठ पढ़वाया। (पढ़ना → पढ़वाना)
- माँ ने बच्चे से दूध पिलवाया। (पीना → पिलवाना)
- उसने मज़दूर से कमरा सफ़ करवाया। (साफ़ करना → सफ़ करवाना)
- पूर्वकालिक क्रिया:
- वह नाश्ता करके ऑफिस गया।
- पुस्तक पढ़कर उसने सबको सुनाई।
- वह रोते-रोते सो गया। (आवृत्ति सूचक)
- संयुक्त क्रिया:
- उसने मेरी बात सुन ली। (सुनना + लेना)
- बच्चा ज़ोर से चिल्ला उठा। (चिल्लाना + उठना)
- मैं यह काम कर सकता हूँ। (करना + सकना)
6. वाक्य में प्रयोग / प्रयोग की विधि
इन भेदों का प्रयोग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
1. प्रेरणार्थक क्रिया: इसमें दो कर्ताओं का भाव छिपा होता है। मूल क्रिया में 'वाना', 'वानी', 'आना' आदि प्रत्यय जोड़कर बनती है। जैसे: लिखना → लिखवाना। वाक्य में प्रयोग: "प्रेरक (ने) + प्रेरित (से) + कर्म + क्रिया।" जैसे: "मैंने (प्रेरक) उससे (प्रेरित) पत्र लिखवाया।"
2. पूर्वकालिक क्रिया: यह हमेशा मुख्य क्रिया से पहले आती है और उसके साथ 'कर' या 'करके' जुड़ा होता है। जैसे: "वह खाना खाकर सो गया।" यहाँ 'खाकर' पूर्वकालिक क्रिया है जो बता रही है कि 'सोना' क्रिया से पहले 'खाना' का काम पूरा हुआ।
3. संयुक्त क्रिया: दो क्रियाओं के मेल से बनती है, जहाँ पहली क्रिया मुख्य अर्थ देती है और दूसरी उसमें विशेषता जोड़ती है (पूर्णता, समर्थना, आरम्भ आदि)। जैसे: "वह बोल उठा।" (आरम्भ का भाव)।
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
इस टॉपिक में सबसे बड़ा भ्रम प्रेरणार्थक क्रिया और सकर्मक क्रिया में, तथा संयुक्त क्रिया और सहायक क्रिया में होता है।
- भ्रम 1: प्रेरणार्थक क्रिया को साधारण सकर्मक क्रिया समझना। प्रेरणार्थक क्रिया में हमेशा दो कर्ताओं (एक जो करवाता है, दूसरा जो करता है) का भाव होता है, जबकि साधारण सकर्मक क्रिया में एक ही कर्ता होता है।
- भ्रम 2: संयुक्त क्रिया और सहायक क्रिया में अंतर न समझना। सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के अर्थ में समय या भाव जोड़ती है, लेकिन संयुक्त क्रिया में दोनों क्रियाएँ मिलकर एक नया अर्थ बनाती हैं। जैसे: 'पढ़ रहा है' (सहायक क्रिया) vs 'पढ़ डाला' (संयुक्त क्रिया)।
- सावधानी: पूर्वकालिक क्रिया के बाद हमेशा कोई न कोई मुख्य क्रिया आनी चाहिए। जैसे: "उसने खाना खाकर (पूर्वकालिक) टीवी देखा (मुख्य)।" केवल "उसने खाना खाकर।" अधूरा वाक्य है।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- प्रेरणार्थक क्रिया के दो स्तर हो सकते हैं: प्रथम प्रेरणार्थक (जैसे: पढ़वाना) और द्वितीय प्रेरणार्थक (जैसे: पढ़वलवाना - यानी किसी से पढ़वाकर दूसरे से करवाना)।
- पूर्वकालिक क्रिया को क्रियार्थक कृदंत भी कहते हैं।
- संयुक्त क्रिया के अंतर्गत आज्ञार्थक, इच्छार्थक, नित्यकर्मबोधक आदि प्रकार भी आते हैं।
- परीक्षा में अक्सर वाक्य देकर क्रिया का भेद पूछा जाता है, या फिर दिए गए भेद का उदाहरण देने को कहा जाता है।
9. 🎯 क्रिया के भेद आधारित चुनौती
नीचे दिए गए 10 प्रश्नों से जाँचिए कि आपने क्रिया के विविध भेदों को कितनी अच्छी तरह समझा है।
1. "मोहन ने राम से पुस्तक पढ़वाई।" इस वाक्य में क्रिया का भेद बताइए।
2. प्रेरणार्थक क्रिया और सकर्मक क्रिया में एक मुख्य अंतर बताइए।
3. "वह दौड़ते-दौड़ते थक गया।" इस वाक्य में 'दौड़ते-दौड़ते' किस प्रकार की क्रिया है?
4. संयुक्त क्रिया बनाने के लिए 'डालना' क्रिया क्या भाव जोड़ती है? एक उदाहरण दीजिए।
उदाहरण: "उसने सारा खाना खा डाला।" (पूरा खा लिया)
5. निम्नलिखित वाक्य को पूर्वकालिक क्रिया का प्रयोग करते हुए लिखिए: "सीमा ने अपना काम पूरा किया। फिर वह खेलने चली गई।"
6. "लतियाना" और "हथियाना" किस प्रकार की क्रियाएँ हैं? इनके मूल शब्द भी बताइए।
- लतियाना: मूल शब्द लता (संज्ञा) से बना है।
- हथियाना: मूल शब्द हाथ (संज्ञा) से बना है।
7. "वह रोते-रोते सो गया।" और "वह रोकर सो गया।" - इन दोनों वाक्यों में पूर्वकालिक क्रिया के भेद में क्या अंतर है?
8. एक ही मूल क्रिया 'लिखना' से एक प्रेरणार्थक क्रिया और एक संयुक्त क्रिया बनाइए।
प्रेरणार्थक क्रिया: लिखवाना (मैंने उससे पत्र लिखवाया।)
संयुक्त क्रिया: लिख डालना (उसने सारा प्रश्न लिख डाला।)
9. नीचे दिए वाक्य में क्रिया का भेद पहचानिए:
"उसने इतनी मेहनत की कि वह सफल हो गया।"
10. क्या यह वाक्य सही है? "उसने मुझसे यह काम करवाकर खुश हुआ।" यदि हाँ, तो इसमें प्रयुक्त क्रिया के भेद का नाम बताइए।
10. सारांश
संक्षेप में, क्रिया के भेद हमें क्रिया की विविधता और सूक्ष्मता से परिचित कराते हैं। प्रेरणार्थक क्रिया दूसरे से काम करवाने का भाव देती है। पूर्वकालिक क्रिया एक कार्य के दूसरे कार्य से पहले पूरा होने का बोध कराती है। संयुक्त क्रिया दो क्रियाओं के मेल से बनकर नया विशेष अर्थ देती है। नामधातु क्रिया संज्ञा आदि से बनती है। इन भेदों को समझने से हम भाषा के जटिल और सुंदर प्रयोगों को बेहतर ढंग से समझ और प्रयोग कर पाते हैं।
11. संबंधित विषय संकेत
क्रिया के विभिन्न भेदों को समझने के बाद अब यह जानना ज़रूरी है कि क्रिया के रूप (धातु, लकार आदि) कैसे बनते हैं। अगले टॉपिक में हम पढ़ेंगे: क्रिया के रूप – कि कैसे क्रिया की धातु से विभिन्न लकारों, कालों और प्रयोगों के अनुसार रूप बनते हैं।
📝 क्रिया के भेद - अभ्यास वर्कशीट
प्रेरणार्थक, पूर्वकालिक, संयुक्त आदि क्रियाओं की पहचान और प्रयोग पर आधारित विस्तृत अभ्यास प्रश्न।
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