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कृत प्रत्यय (Krit Pratyaya / Primary Suffixes) | Hindi Grammar | GPN

कृत प्रत्यय हिंदी व्याकरण की वह अनोखी शाखा है जो क्रिया धातुओं से नए शब्दों का निर्माण करती है। जैसे एक बीज से पेड़ बनता है, वैसे ही एक क्रिया धातु से कृत प्रत्यय द्वारा संज्ञा, विशेषण आदि अनेक शब्द बनाए जाते हैं। यह विषय कक्षा 7-8 के छात्रों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह शब्द-निर्माण के गहरे रहस्यों से परिचित कराता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 7–8 (प्रारंभ) | कक्षा 9–10 (विस्तार) | कक्षा 11–12 (साहित्यिक प्रयोग)


1. कृत प्रत्यय का परिचय

कृत प्रत्यय को समझने के लिए इसे "क्रिया के पुत्र" की तरह देखिए। जैसे पिता के गुण पुत्र में आते हैं, वैसे ही क्रिया के भाव नए बने शब्द में आते हैं। "पढ़" एक क्रिया है। जब इसमें "क" प्रत्यय लगता है तो "पाठक" बनता है - वह जो पढ़ता है। "ता" लगता है तो "पाठकता" बनता है - पढ़ने का भाव। यही है कृत प्रत्यय का चमत्कार।

आइए एक सरल उदाहरण से समझते हैं। "लिख" धातु लीजिए - यह क्रिया है। अब इसमें विभिन्न कृत प्रत्यय लगाइए: "लिखित" (भूतकाल), "लेखक" (कर्ता), "लेखनीय" (योग्य), "लिखनी" (भाव)। हर बार नया शब्द, नया अर्थ! यही है कृत प्रत्ययों की शक्ति। कक्षा 7-8 में हम उन मुख्य कृत प्रत्ययों को सीखेंगे जो दैनिक प्रयोग के अधिकांश शब्दों के निर्माण में सहायक हैं।

2. कृत प्रत्यय की परिभाषा

परिभाषा: कृत प्रत्यय वे प्रत्यय होते हैं जो क्रिया धातुओं के अंत में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। ये प्रत्यय क्रिया से संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण आदि बनाते हैं और शब्द में काल, कर्ता, कर्म, भाव आदि का बोध कराते हैं।

3. कृत प्रत्यय की विशेषताएँ

कृत प्रत्ययों को पहचानना और समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये हिंदी के सबसे प्रचलित शब्दों के निर्माण में भूमिका निभाते हैं। नीचे दिए बिंदुओं से आप इनकी विशेषताएँ समझ सकते हैं।

  • धातु से संबंध: कृत प्रत्यय सदैव क्रिया धातुओं के साथ जुड़ते हैं, संज्ञा या विशेषण के साथ नहीं।
  • शब्द-भेद परिवर्तन: ये क्रिया से संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण बनाते हैं (जैसे पढ़ → पाठक)।
  • काल बोध: कुछ कृत प्रत्यय काल का बोध कराते हैं (वर्तमान, भूत, भविष्य)।
  • कर्ता-कर्म बोध: ये कर्ता (करने वाला) और कर्म (जिस पर क्रिया हो) दर्शाते हैं।
  • संस्कृत मूल: अधिकांश कृत प्रत्यय संस्कृत से लिए गए हैं और हिंदी में प्रचलित हैं।

4. कृत प्रत्यय के प्रकार

कृत प्रत्ययों को उनके कार्य और प्रयोग के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। यह वर्गीकरण आपको यह समझने में मदद करेगा कि कौन-सा प्रत्यय किस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त होता है।

क्रम प्रकार प्रमुख प्रत्यय उदाहरण
1 कर्तृवाचक क, त, ता, ने वाला पाठक, गायक, लिखता
2 कर्मवाचक य, अन, न पाठ्य, भोजन, श्रवण
3 भाववाचक ना, आव, ती पढ़ना, चलाव, लिखती
4 क्रियावाचक त, तव्य, अनीय कर्तव्य, पूजनीय, वंदनीय

5. 15 प्रमुख कृत प्रत्ययों के उदाहरण

यहाँ 15 सबसे महत्वपूर्ण कृत प्रत्यय दिए जा रहे हैं जो कक्षा 7-8 के पाठ्यक्रम में शामिल हैं और परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • 1. क (कर्ता): पढ़ + क = पाठक, गा + क = गायक, लिख + क = लेखक
  • 2. त (भूतकाल): कृ + त = कृत, लिख + त = लिखित, पठ + त = पठित
  • 3. ता (वर्तमान कर्ता): लिख + ता = लिखता, पढ़ + ता = पढ़ता, देख + ता = देखता
  • 4. ना (भाव): पढ़ + ना = पढ़ना, लिख + ना = लिखना, खेल + ना = खेलना
  • 5. आव (भाव): चल + आव = चलाव, बह + आव = बहाव, उड़ + आव = उड़ाव
  • 6. अन (कर्म): भुज + अन = भोजन, श्रु + अन = श्रवण, मन + अन = मनन
  • 7. य (योग्य): पठ + य = पाठ्य, दृश्य + य = दृश्य, कर + य = कार्य
  • 8. ती (स्त्रीलिंग): लिख + ती = लिखती, पढ़ + ती = पढ़ती, देख + ती = देखती
  • 9. वाला (कर्ता): पढ़ + वाला = पढ़ने वाला, लिख + वाला = लिखने वाला
  • 10. इत (भूत): गा + इत = गायित, नृत्य + इत = नृत्यित
  • 11. तव्य (कर्तव्य): कर + तव्य = कर्तव्य, पठ + तव्य = पठितव्य
  • 12. अनीय (योग्य): पूज + अनीय = पूजनीय, वंद + अनीय = वंदनीय
  • 13. ई (संबंध): चल + ई = चाली, बोल + ई = बोली
  • 14. आ (भाव): रो + आ = रोआ, सो + आ = सोआ
  • 15. ऊ (कर्ता): पढ़ + ऊ = पढ़ू, लिख + ऊ = लिखू

6. कृत प्रत्ययों का वाक्यों में प्रयोग

कृत प्रत्ययों का सही प्रयोग करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गलत प्रत्यय लगाने पर शब्द का अर्थ ही बदल सकता है। नीचे दिए गए वाक्यों में देखिए कि कैसे एक ही धातु से अलग-अलग प्रत्ययों द्वारा बने शब्द अलग-अलग संदर्भों में प्रयुक्त होते हैं।

प्रयोग का नियम: कृत प्रत्यय लगाते समय ध्यान रखें कि कुछ प्रत्यय धातु के अंतिम अक्षर के अनुसार धातु का रूप बदल देते हैं। जैसे "पढ़" धातु में "क" प्रत्यय लगने पर "पाठक" बनता है, "पढ़क" नहीं। इसे धातु का रूपांतरण कहते हैं।

वाक्य प्रयोग:
1. वह एक अच्छा पाठक है। (पढ़ + क = पाठक)
2. यह लिखित दस्तावेज़ है। (लिख + त = लिखित)
3. पढ़ना बहुत ज़रूरी है। (पढ़ + ना = पढ़ना)
4. नदी का बहाव तेज़ है। (बह + आव = बहाव)
5. भोजन का समय हो गया है। (भुज + अन = भोजन)
6. यह पाठ्य सामग्री है। (पठ + य = पाठ्य)
7. वह लिखती है। (लिख + ती = लिखती)
8. पढ़ने वाला छात्र सफल होता है। (पढ़ + वाला = पढ़ने वाला)
9. हमारा कर्तव्य है देश की सेवा करना। (कर + तव्य = कर्तव्य)
10. ताजमहल देखनीय स्थान है। (देख + नीय = देखनीय)

7. कृत प्रत्ययों में सामान्य गलतियाँ

कृत प्रत्यय सीखते समय छात्र कुछ विशेष गलतियाँ करते हैं जिनसे परीक्षा में अंक कटते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए नीचे दिए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।

  • धातु भ्रम: कृत प्रत्यय केवल क्रिया धातुओं के साथ लगते हैं, संज्ञा के साथ नहीं। "किताब" में "क" नहीं लग सकता क्योंकि यह संज्ञा है।
  • रूपांतरण भूल: धातु का रूप बदलना भूल जाना (पढ़ + क = पाठक ✅, पढ़क ❌)।
  • प्रत्यय भ्रम: "ता" प्रत्यय दो तरह का है - कृत प्रत्यय (लिखता) और तद्धित प्रत्यय (सुंदरता)। संदर्भ से पहचानें।
  • काल भ्रम: "त" (भूतकाल) और "ता" (वर्तमान) में भ्रम - लिखित (हो चुका), लिखता (अभी कर रहा है)।
  • स्त्रीलिंग भूल: "ता" (पुल्लिंग) और "ती" (स्त्रीलिंग) में अंतर न समझना - वह लिखता है (पु.), वह लिखती है (स्त्री.)।
  • संधि अनदेखी: "देख + नीय = देखनीय" लिखना चाहिए, "देखनिय" या "देखनिए" नहीं।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "क" प्रत्यय कर्ता बनाता है, "त" प्रत्यय भूतकाल बनाता है, "ना" प्रत्यय भाव बनाता है - यह याद रखें।
  • रिक्त स्थान हेतु: "वह एक अच्छा _____ है" - यदि पढ़ने वाला तो "पाठक", यदि गाने वाला तो "गायक"।
  • एक-शब्द उत्तर: "जो पढ़ता है" = "पाठक" (पढ़ + क), "जो लिखता है" = "लेखक" (लिख + क)।
  • विशेष तथ्य: "वाला" एक विशेष कृत प्रत्यय है जो हिंदी मूल का है और संस्कृत से नहीं आया।
  • तुलना हेतु: संस्कृत में कृत प्रत्ययों की संख्या लगभग 50 है, पर हिंदी में 15-20 मुख्य कृत प्रत्यय ही प्रचलित हैं।
  • याद रखने की ट्रिक: "क-त-ता-ना, आव-अन-य-ती, वाला-इत-तव्य, अनीय-ई-आ-ऊ" - यह क्रम याद रखें।

9. 🎯 कृत प्रत्यय - समझ की जाँच

नीचे दिए गए 10 प्रश्न कृत प्रत्ययों की आपकी समझ को परखेंगे। ये प्रश्न सीधे परीक्षा पैटर्न पर आधारित हैं और आपकी तैयारी को मज़बूत करेंगे।

1. "गायक" और "गायिका" में कौन-से प्रत्यय हैं और दोनों में क्या अंतर है?

उत्तर:
- गा + क = गायक ("क" कृत प्रत्यय - पुल्लिंग कर्ता)
- गा + इका = गायिका ("इका" तद्धित प्रत्यय - स्त्रीलिंग)
अंतर: "गायक" में "क" कृत प्रत्यय है जो कर्ता बनाता है, जबकि "गायिका" में "इका" तद्धित प्रत्यय है जो स्त्रीलिंग बनाता है। "गायक" कृत प्रत्यय से बना है, "गायिका" तद्धित प्रत्यय से।

2. "लिखित" और "लेखक" में "त" और "क" प्रत्ययों ने क्या अंतर लाया है?

उत्तर: कार्य भिन्नता:
- लिख + त = लिखित ("त" प्रत्यय - भूतकाल, काम हो चुका)
- लिख + क = लेखक ("क" प्रत्यय - कर्ता, काम करने वाला)
"लिखित" = जो लिखा जा चुका है (भूतकालिक विशेषण)
"लेखक" = जो लिखता है (कर्ता संज्ञा)
एक ही धातु से दो अलग अर्थ वाले शब्द।

3. "पढ़ना" और "पाठक" में "ना" और "क" प्रत्ययों के कार्य में क्या अंतर है?

उत्तर: कार्य भेद:
- पढ़ + ना = पढ़ना ("ना" प्रत्यय - भाववाचक संज्ञा, क्रिया का भाव)
- पढ़ + क = पाठक ("क" प्रत्यय - कर्तावाचक संज्ञा, क्रिया करने वाला)
"पढ़ना" = पढ़ने का कार्य/भाव (संज्ञा)
"पाठक" = पढ़ने वाला व्यक्ति (संज्ञा)
एक ही धातु, दो अलग प्रत्यय, दो अलग प्रकार के शब्द।

4. "कर्तव्य" और "करणीय" में "तव्य" और "अनीय" प्रत्ययों के अर्थ में क्या अंतर है?

उत्तर: अर्थ भिन्नता:
- कर + तव्य = कर्तव्य ("तव्य" प्रत्यय - करना चाहिए, आवश्यकता)
- कर + अनीय = करणीय ("अनीय" प्रत्यय - किया जाने योग्य, संभावना)
"कर्तव्य" = जो करना ही चाहिए (नैतिक/कानूनी बाध्यता)
"करणीय" = जो किया जा सकता है (संभावना/योग्यता)
दोनों में करने का भाव है पर तीव्रता भिन्न है।

5. "बहाव" और "बहता" में "आव" और "ता" प्रत्ययों ने क्या अंतर लाया है?

उत्तर: शब्द-भेद अंतर:
- बह + आव = बहाव ("आव" प्रत्यय - भाववाचक संज्ञा)
- बह + ता = बहता ("ता" प्रत्यय - वर्तमान काल की क्रिया)
"बहाव" = बहने का भाव/प्रक्रिया (संज्ञा)
"बहता" = बह रहा है (क्रिया)
एक ही धातु से एक संज्ञा और एक क्रिया बनी।

6. "भोजन" और "भुज्य" में "अन" और "य" प्रत्ययों के कार्य में क्या अंतर है?

उत्तर: कर्म बनाम योग्यता:
- भुज + अन = भोजन ("अन" प्रत्यय - कर्मवाचक, जो खाया जाए)
- भुज + य = भुज्य ("य" प्रत्यय - योग्यतावाचक, खाने योग्य)
"भोजन" = खाने की वस्तु (कर्म संज्ञा)
"भुज्य" = खाने योग्य (विशेषण)
"भुज्य" शब्द अब प्रचलन में कम है, "भोज्य" अधिक प्रचलित है।

7. "पाठक" और "पाठ्य" में "क" और "य" प्रत्ययों ने क्या अंतर लाया है?

उत्तर: कर्ता बनाम कर्म/योग्यता:
- पठ + क = पाठक ("क" प्रत्यय - कर्ता, पढ़ने वाला)
- पठ + य = पाठ्य ("य" प्रत्यय - कर्म/योग्य, पढ़ने योग्य)
"पाठक" = वह जो पढ़ता है (कर्ता संज्ञा)
"पाठ्य" = जो पढ़ा जाए (कर्म संज्ञा/विशेषण)
दोनों एक ही धातु "पठ" से बने हैं पर अर्थ भिन्न।

8. क्या "वाला" एक कृत प्रत्यय है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: हाँ, "वाला" एक कृत प्रत्यय है क्योंकि:
1. यह क्रिया धातु के साथ जुड़ता है: पढ़ + वाला = पढ़ने वाला
2. यह कर्ता बनाता है: लिखने वाला (लेखक), पढ़ने वाला (पाठक)
3. यह हिंदी मूल का प्रत्यय है, संस्कृत से नहीं आया
विशेषता: "वाला" प्रत्यय बोलचाल की हिंदी में बहुत प्रचलित है और औपचारिक लेखन में भी स्वीकार्य है।

9. "देखनीय" और "दर्शनीय" में "नीय" प्रत्यय है। क्या दोनों सही हैं? अंतर समझाइए।

उत्तर: हाँ, दोनों सही हैं पर अर्थ/प्रयोग में भिन्नता:
- देख + नीय = देखनीय (सामान्य देखने योग्य)
- दृश् + नीय = दर्शनीय (दर्शन/प्रशंसा के योग्य)
"देखनीय" = जो देखा जा सकता है (सामान्य)
"दर्शनीय" = जो देखने योग्य/सुंदर है (विशेष)
"दर्शनीय" अधिक सम्मानजनक/साहित्यिक है, "देखनीय" सामान्य है।

10. एक ही धातु "गम्" (जाना) से चार अलग-अलग कृत प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए और उनके अर्थ बताइए।

उत्तर: "गम्" धातु से बने शब्द:

1. गम् + त = गत (जो जा चुका, भूतकाल) → "गत वर्ष" (बीता हुआ वर्ष)
2. गम् + अन = गमन (जाने का भाव/क्रिया) → "सूर्योदय का गमन"
3. गम् + तृ = गन्ता (जाने वाला, कर्ता) → "पथिक एक गन्ता है"
4. गम् + य = गम्य (जाने योग्य) → "गम्य स्थान" (पहुँचने योग्य)

चारों एक ही धातु से, चार अलग प्रत्ययों द्वारा, चार अलग अर्थ वाले शब्द। यह कृत प्रत्ययों की शक्ति को दर्शाता है।

10. सारांश

कृत प्रत्यय हिंदी व्याकरण के वे महत्वपूर्ण अंग हैं जो क्रिया धातुओं से नए शब्दों का सृजन करते हैं। हमने सीखा कि कृत प्रत्यय (क, त, ता, ना, आव, अन, य, ती, वाला, इत, तव्य, अनीय, ई, आ, ऊ आदि) क्रिया से संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण आदि बनाते हैं और शब्द में काल, कर्ता, कर्म, भाव आदि का बोध कराते हैं। इन प्रत्ययों का सही प्रयोग करने के लिए धातु के रूपांतरण और संधि नियमों का ज्ञान आवश्यक है। कक्षा 7-8 के स्तर पर इन प्रत्ययों को पहचानना, उनके कार्य समझना और सही शब्द निर्माण करना सीखना ही पर्याप्त है।

11. संबंधित विषय संकेत

कृत प्रत्ययों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद अब अगला तार्किक कदम है: तद्धित प्रत्यय

📝 कृत प्रत्यय - अभ्यास कार्यपत्रक

इस विषय से संबंधित वर्कशीट में आपको कृत प्रत्यय पहचानने, उनके अर्थ समझने और नए शब्द बनाने के अभ्यास मिलेंगे।

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