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बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) | GPN

बहुव्रीहि समास समास का सबसे रचनात्मक और अप्रत्यक्ष प्रकार है, जहाँ मिलने वाले दोनों पदों में से कोई भी प्रधान नहीं होता, बल्कि मिलकर वे एक तीसरा, नया और अक्सर आकर्षक अर्थ उत्पन्न करते हैं। 'लंबोदर' (गणेश), 'नीलकंठ' (शिव), 'महामना' (महान विचार वाला) जैसे शब्द इसकी सजीवता के प्रमाण हैं।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 9–10 (परिचय व अभ्यास) | कक्षा 10+ (उच्च स्तर प्रयोग व साहित्यिक अध्ययन)


1. बहुव्रीहि समास का परिचय

कल्पना कीजिए, आप किसी से कहते हैं, "वह लंबोदर व्यक्ति बहुत विद्वान है।" सुनने वाला तुरंत जान जाएगा कि आप गणेशजी की बात कर रहे हैं, न कि सिर्फ 'लंबे पेट वाले' किसी आदमी की। यहाँ 'लंब' और 'उदर' मिले हैं, लेकिन इन दोनों का सीधा अर्थ (लंबा पेट) प्रधान नहीं है। इनसे एक तीसरा, समग्र और बिल्कुल नया अर्थ (गणेश) निकल रहा है। यही बहुव्रीहि समास की जादूगरी है। यह समास किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान की विशिष्ट विशेषता बताकर उसकी पहचान बनाता है। यह उपनाम, उपाधि और प्रतीकात्मक नाम बनाने में माहिर है।

यह समास भाषा को मुहावरेदार और चित्रात्मक बनाता है। जब आप किसी को 'कमलनयन' कहते हैं, तो आप सिर्फ उसकी आँखों की सुंदरता नहीं बता रहे, बल्कि एक पूरी छवि बना रहे हैं। संस्कृत और हिंदी साहित्य में ऐसे हज़ारों शब्द मिलेंगे जो बहुव्रीहि समास की देन हैं और जो हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।

2. परिभाषा

परिभाषा: वह समास जिसमें कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि समस्त पद (बना हुआ शब्द) दोनों पदों से भिन्न किसी तीसरे पद का विशेषण या बोधक बन जाता है, बहुव्रीहि समास कहलाता है। इसमें समस्त पद का अर्थ मूल पदों के सीधे अर्थ से नहीं, बल्कि उनकी विशेषता से निकलने वाले गुण से आता है। विग्रह करने पर 'जिसका/जिसकी/जिसके' या 'वाला' जैसे शब्द जुड़ते हैं।

3. मुख्य बिंदु / पहचान

बहुव्रीहि समास की पहचान के लिए इन नियमों को समझें:

  • कोई पद प्रधान नहीं: यह सबसे निर्णायक बिंदु है। तत्पुरुष/कर्मधारय में उत्तर पद, अव्ययीभाव में पूर्व पद और द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं। बहुव्रीहि में दोनों पद गौण होते हैं, क्योंकि प्रधान तो वह तीसरा अर्थ (व्यक्ति/वस्तु) है जिसकी ओर इशारा किया जा रहा है।
  • तीसरा अर्थ (गुणवाचक): बना हुआ शब्द किसी ऐसे व्यक्ति, वस्तु या स्थान का विशेषण या संज्ञा बन जाता है, जिसमें मूल पदों द्वारा बताई गई विशेषता पाई जाती है। 'नीलकंठ' शब्द स्वयं शिव का विशेषण/नाम है।
  • विग्रह में 'जिसका/वाला': विग्रह करते समय आपको 'जिसका', 'जिसकी', 'जिसके' या 'वाला' जुड़ा मिलेगा। 'लंबोदर' = लंबा है उदर (पेट) जिसका
  • समस्त पद विशेषणात्मक होता है: बहुव्रीहि से बना शब्द प्रायः एक विशेषण का काम करता है, भले ही वह संज्ञा के रूप में प्रचलित हो गया हो। 'चंद्रशेखर' (शिव) मूलतः एक विशेषण ही है जो संज्ञा बन गया।

4. बहुव्रीहि समास के प्रमुख प्रकार (अर्थ के आधार पर)

बहुव्रीहि समास के भीतर कोई कठोर व्याकरणिक भेद नहीं हैं, लेकिन अर्थ के स्रोत के आधार पर इन्हें समझा जा सकता है:

क्रम अर्थ का प्रकार / पहचान उदाहरण विग्रह तृतीय अर्थ (जिसका बोध)
1 शारीरिक विशेषता बताने वाला
(अंग, रूप, रंग)
लंबोदर, नीलकंठ, कमलनयन लंबा है उदर जिसका, नीला है कंठ जिसका, कमल के समान नयन जिसके गणेश, शिव, सुंदर व्यक्ति
2 गुण/स्वभाव बताने वाला
(मानसिक यौगिक विशेषता)
महामना, दयालु, कृतघ्न महान है मन जिसका, दया है जिसमें, कृत (उपकार) से घ्न (विरोध) जिसका महान विचार वाला व्यक्ति, दया करने वाला, उपकार न मानने वाला
3 संपत्ति/अवस्था बताने वाला
(धन, सामग्री, स्थिति)
धनवान, बलवान, विद्यावान धन है जिसके पास, बल है जिसमें, विद्या है जिसमें धनी व्यक्ति, शक्तिशाली, विद्वान
4 प्रसिद्ध व्यक्तिवाचक नाम
(देवता, ऐतिहासिक व्यक्ति)
चंद्रशेखर, जलंधर, पीतांबर चंद्र को शेखर (मुकुट) के रूप में धारण करने वाला, जल को धारण करने वाला, पीत (पीले) अंबर (वस्त्र) वाला शिव, एक राक्षस, कृष्ण या पीले वस्त्र वाला

5. उदाहरण

विभिन्न प्रकार के बहुव्रीहि समास के उदाहरण:

  • देवता/पौराणिक: गजानन (गज के समान आनन वाला – गणेश), चतुर्भुज (चार भुजाओं वाला – विष्णु), त्रिनेत्र (तीन नेत्रों वाला – शिव)।
  • व्यक्तिवाचक: इंद्रप्रस्थ (इंद्र जैसा प्रस्थ/नगर – दिल्ली), महाशय (महान शय/आसन वाला – सम्मानित व्यक्ति)।
  • सामान्य विशेषण: बुद्धिमान (बुद्धि से युक्त), साहसी (साहस वाला), निर्बल (बल रहित), अधूरा (पूर्ण न होना)।
  • प्राकृतिक: सप्तसिंधु (सात सिंधुओं/नदियों का देश), पंचवटी (पाँच वट वृक्षों वाली भूमि)।
  • रोज़मर्रा: बहुभाषी (अनेक भाषाएँ बोलने वाला), दुर्गम (जहाँ गमन/जाना कठिन हो), सुंदरलाल (सुंदर और लाल वाला – एक नाम)।

6. वाक्य में प्रयोग

बहुव्रीहि समास से बने शब्द वाक्य में विशेषण या संज्ञा की भूमिका निभाते हैं। जब ये विशेषण होते हैं (जैसे बुद्धिमान, दयालु) तो ये विशेष्य के लिंग, वचन और कारक के अनुसार बदलते हैं। जब ये संज्ञा के रूप में प्रसिद्ध हो जाते हैं (जैसे लंबोदर, नीलकंठ) तो वे एक व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह व्यवहार करते हैं और उनका रूप स्थिर रहता है।

उदाहरण (विशेषण): "वह एक बुद्धिमान छात्र है।" यहाँ 'बुद्धिमान' पुल्लिंग, एकवचन में है।
उदाहरण (संज्ञा): "नीलकंठ का दर्शन करने हज़ारों लोग आए।" यहाँ 'नीलकंठ' शिव के लिए प्रसिद्ध संज्ञा है।

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ

बहुव्रीहि को कर्मधारय से अलग पहचानना सबसे बड़ी चुनौती है। इन बातों पर ध्यान दें:

  • बहुव्रीहि vs कर्मधारय (सबसे महत्वपूर्ण):
    कर्मधारय: दूसरा पद (विशेष्य) प्रधान होता है। अर्थ सीधा और पारदर्शी होता है। 'नीलकमल' = नीला कमल (कमल प्रधान)।
    बहुव्रीहि: कोई पद प्रधान नहीं। अर्थ अप्रत्यक्ष और तीसरी वस्तु/व्यक्ति की ओर इशारा करता है। 'नीलकंठ' = नीला कंठ वाला (शिव)। यहाँ 'नील' या 'कंठ' प्रधान नहीं, बल्कि शिव प्रधान हैं।
    सरल तरीका: विग्रह में 'जिसका/वाला' आता है? → बहुव्रीहि। 'है जो' या 'के समान' आता है? → कर्मधारय।
  • 'वान्' और 'मान्' प्रत्यय वाले शब्द: धनवान, बलवान, गुणवान आदि सभी बहुव्रीहि समास हैं। इनका विग्रह 'धन है जिसके पास' होता है।
  • नकारात्मक उपसर्ग वाले: निर्बल (बल रहित), अधूरा (पूरा नहीं), निस्संदेह (संदेह रहित) – ये भी बहुव्रीहि हैं क्योंकि ये किसी ऐसी स्थिति या व्यक्ति का बोध कराते हैं जिसमें वह गुण नहीं है।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • बहुव्रीहि की परिभाषा में "कोई पद प्रधान नहीं" और "तीसरे पद का बोधक" – ये दोनों वाक्यांश अवश्य लिखें।
  • MCQ में अक्सर बहुव्रीहि पहचानने को कहा जाता है। लंबोदर, नीलकंठ, चंद्रशेखर, धनवान, बुद्धिमान इसके सुरक्षित उदाहरण हैं।
  • विग्रह करते समय याद रखें: बहुव्रीहि के विग्रह में 'जिसका/जिसकी/जिसके' या 'वाला' अवश्य जुड़ेगा। यह इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
  • बहुव्रीहि और कर्मधारय में अंतर पूछा जाना बहुत आम है। स्पष्ट कर दें कि कर्मधारय में उत्तर पद प्रधान और सीधा अर्थ मिलता है, जबकि बहुव्रीहि में अप्रत्यक्ष अर्थ मिलता है।

9. 🎯 बहुव्रीहि समास आधारित चुनौती

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर देकर देखें कि आप इस चुनौतीपूर्ण समास को कितना समझ पाए हैं।

1. "लंबोदर" शब्द का सही विग्रह कीजिए और बताइए कि यह किस प्रसिद्ध देवता का नाम है?

उत्तर: विग्रह: लंबा है उदर (पेट) जिसका। यह प्रसिद्ध देवता गणेशजी का एक नाम है।

2. "नीलकमल" और "नीलकंठ" – इन दोनों में कौन-सा बहुव्रीहि समास है और क्यों?

उत्तर:
नीलकमल: विग्रह - नीला है जो कमल। यहाँ 'कमल' प्रधान है और सीधा अर्थ मिलता है। अतः यह कर्मधारय समास है।
नीलकंठ: विग्रह - नीला है कंठ जिसका। यहाँ 'नील' या 'कंठ' प्रधान नहीं, बल्कि एक तीसरा अर्थ (शिव) निकल रहा है। अतः यह बहुव्रीहि समास है।

3. "धनवान" शब्द में कौन-सा योजक शब्द (जिसका, वाला) छिपा हुआ है? इसका विग्रह कीजिए।

उत्तर: छिपा हुआ योजक शब्द है "जिसके पास" या "वाला"। विग्रह: धन है जिसके पास (धनवाला)।

4. "महामना" शब्द का प्रयोग अक्सर किस महान व्यक्ति के लिए किया जाता है? यह शब्द बहुव्रीहि क्यों है?

उत्तर: इस शब्द का प्रयोग अक्सर पंडित मदन मोहन मालवीय जी के लिए किया जाता है। यह बहुव्रीहि है क्योंकि इसका विग्रह 'महान है मन जिसका' है। यहाँ 'महा' या 'मना' प्रधान नहीं, बल्कि एक तीसरे व्यक्ति (महान विचार वाले व्यक्ति) का बोध हो रहा है।

5. "पीतांबर" शब्द के दो संभावित अर्थ हैं। एक बहुव्रीहि के रूप में और एक कर्मधारय के रूप में। दोनों विग्रह बताइए।

उत्तर:
1. बहुव्रीहि: पीत (पीले) अंबर (वस्त्र) वाला (कृष्ण)। (यहाँ कृष्ण का बोध)
2. कर्मधारय: पीत (पीला) है जो अंबर (वस्त्र)। (यहाँ सीधे पीले वस्त्र का बोध)
सामान्यतः इसका प्रयोग कृष्ण के लिए (बहुव्रीहि) ही होता है।

6. "चंद्रशेखर" किस देवता का नाम है? इस शब्द में छिपे दो मूल पद कौन-से हैं और यह बहुव्रीहि क्यों है?

उत्तर: यह शिव का एक नाम है। मूल पद: चंद्र + शेखर (मुकुट)। यह बहुव्रीहि है क्योंकि विग्रह है: चंद्र को शेखर (मुकुट) के रूप में धारण करने वाला। यहाँ 'चंद्र' या 'शेखर' प्रधान नहीं, बल्कि शिव प्रधान हैं।

7. "सुंदरलाल" एक सामान्य नाम है। क्या यह बहुव्रीहि समास हो सकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर: हाँ, हो सकता है। यदि इसका अर्थ 'सुंदर और लाल (रंग) वाला व्यक्ति' हो, तो यह बहुव्रीहि है क्योंकि विग्रह में 'वाला' आता है और यह एक तीसरे व्यक्ति (नामधारी) का बोध कराता है। हालाँकि, यदि इसे 'सुंदर है जो लाल' (कर्मधारय) माना जाए, तो अर्थ अजीब हो जाएगा। अतः नाम के रूप में यह बहुव्रीहि ही है।

8. "दयालु" और "कृतघ्न" – क्या ये दोनों बहुव्रीहि समास हैं? दोनों का विग्रह कीजिए।

उत्तर: हाँ, दोनों हैं।
दयालु: विग्रह - दया है जिसमें/जिसके हृदय में (दया वाला)।
कृतघ्न: विग्रह - कृत (उपकार) का घ्न (विरोध/अहित करने वाला) जो है (उपकार न मानने वाला)।
दोनों में 'वाला' या 'जो' का भाव छिपा है।

9. "पंचवटी" (वह स्थान जहाँ पाँच वट वृक्ष हों) क्या बहुव्रीहि समास है? कारण बताइए।

उत्तर: हाँ, यह बहुव्रीहि समास है। विग्रह: पंच (पाँच) वट (वृक्ष) हैं जहाँ (पाँच वट वृक्षों वाली भूमि)। यहाँ 'पंच' या 'वट' प्रधान नहीं, बल्कि एक तीसरा अर्थ (वह विशेष स्थान) निकल रहा है। विग्रह में 'जहाँ' (जिस स्थान में) आ रहा है, जो बहुव्रीहि का संकेत है।

10. अपने आस-पास के लोगों के नामों या उपनामों में से एक ऐसा नाम ढूँढिए जो बहुव्रीहि समास का उदाहरण हो सकता हो। उसका विग्रह कीजिए।

उत्तर: (उदाहरण स्वरूप)
नाम: गुणवंत सिंह (गुणवंत)
विग्रह: गुण हैं जिसमें (गुणों वाला)।
या, नाम: श्यामलाल (श्याम और लाल वाला)।

10. सारांश

बहुव्रीहि समास समास की कलात्मक शाखा है, जो अप्रत्यक्ष बोध और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति पर ज़ोर देती है। इसकी मूल पहचान यह है कि इसमें कोई भी मूल पद प्रधान नहीं होता; दोनों पद मिलकर किसी तीसरी वस्तु, व्यक्ति या स्थान की एक विशिष्ट विशेषता बताते हैं और उसकी पहचान बन जाते हैं। 'लंबोदर', 'नीलकंठ', 'धनवान' जैसे शब्द इसकी सार्थकता के प्रमाण हैं। इसे कर्मधारय से अलग पहचानने की कसौटी है – विग्रह में 'जिसका/वाला' आना। यह समास भाषा को गहराई, सौंदर्य और प्रतीकात्मकता प्रदान करता है।

11. संबंधित विषय संकेत

अब जब आप सभी प्रकार के समास जान चुके हैं, तो उन्हें विघटित करके देखने की कला सीखिए: कक्षा 9-10 • समास विग्रह (Samas Vigrah / Compound Analysis)

📝 बहुव्रीहि समास - अभ्यास कार्यपत्रक

बहुव्रीहि समास की पहचान, विग्रह और कर्मधारय से अंतर पर आधारित चुनौतीपूर्ण अभ्यास प्रश्न।

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