सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 30 JUNE 2026
क्या आप जानते हैं कि 'पीतांबर' का अर्थ सिर्फ़ 'पीला वस्त्र' नहीं है, बल्कि यह 'पीला वस्त्र पहनने वाला' – यानी भगवान विष्णु को दर्शाता है? 'पीत' (पीला) + 'अंबर' (वस्त्र) = 'पीतांबर' – यहाँ दोनों पद मिलकर किसी अन्य व्यक्ति/वस्तु का बोध कराते हैं – 'पीला वस्त्र पहनने वाला' – यानी विष्णु। हिंदी व्याकरण में ऐसे समास जिनमें दोनों पद मिलकर किसी अन्य (तीसरे) का बोध कराते हैं – और जिनका विग्रह विशेषण-विशेष्य से अलग होता है – बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Compound) कहलाते हैं। 'बहुव्रीहि' का अर्थ है – 'बहु' (अधिक) + 'व्रीहि' (चावल) – यानी 'जिसके पास बहुत चावल हो' – पर व्याकरण में इसका अर्थ है – 'जिस समास में अन्यपद (तीसरा पद) प्रधान हो' – यानी दोनों पद मिलकर किसी अन्य की विशेषता बताते हैं। बहुव्रीहि समास तीन प्रकार का होता है – पूर्वपद प्रधान, उत्तरपद प्रधान, और अन्यपद प्रधान – प्रत्येक की अपनी पहचान है। इस पोस्ट में हम बहुव्रीहि समास को विस्तार से समझेंगे – उसकी परिभाषा, तीनों प्रकार, पहचान के नियम, उदाहरण, विग्रह, और वाक्यों में प्रयोग – ताकि आप किसी भी बहुव्रीहि समास को पहचान सकें और उसका सही विग्रह कर सकें। यह पोस्ट कक्षा 9‑10 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।
✅ अनुशंसित: कक्षा 9-10 | CBSE एवं UP Board
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1. बहुव्रीहि समास – परिभाषा एवं परिचय
बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Compound) वह समास है जिसमें दोनों पद मिलकर किसी अन्य (तीसरे) व्यक्ति, वस्तु, या विशेषण का बोध कराते हैं – अर्थात अन्यपद (तीसरा पद) प्रधान होता है। इस समास का नाम 'बहुव्रीहि' – 'बहु' (अधिक) + 'व्रीहि' (चावल) – से है – यानी 'जिसके पास बहुत चावल हो' – पर व्याकरण में 'अन्यपद' (तीसरा शब्द) प्रधान होता है।
उदाहरण –
- “पीत” + “अंबर” = “पीतांबर” – (पीला वस्त्र पहनने वाला – विष्णु)
- “दश” + “आनन” = “दशानन” – (दस मुख वाला – रावण)
- “चक्र” + “पाणि” = “चक्रपाणि” – (चक्र धारण करने वाला – विष्णु)
बहुव्रीहि समास में दोनों पद मिलकर किसी अन्य की विशेषता बताते हैं – 'पीतांबर' – 'पीला वस्त्र' नहीं, बल्कि 'पीला वस्त्र पहनने वाला' – यानी विष्णु। इस समास का विग्रह विशेषण-विशेष्य से भिन्न होता है – इसमें 'वाला' या 'युक्त' शब्द आते हैं।
2. बहुव्रीहि समास के तीन प्रकार – पूर्वपद, उत्तरपद, अन्यपद
बहुव्रीहि समास तीन प्रकार के होते हैं – पूर्वपद प्रधान, उत्तरपद प्रधान, और अन्यपद प्रधान – पर मुख्यतः अन्यपद प्रधान ही बहुव्रीहि की पहचान है।
2. उत्तरपद प्रधान बहुव्रीहि समास: जहाँ दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान हो – पर बहुव्रीहि में यह भी कम प्रचलित है – “पीत” + “अंबर” = “पीतांबर” – यहाँ 'अंबर' (उत्तरपद) प्रधान नहीं है, बल्कि 'वाला' – अन्यपद प्रधान है।
3. अन्यपद प्रधान बहुव्रीहि समास (मुख्य): जहाँ तीसरा पद (अन्यपद) प्रधान हो – “पीत” + “अंबर” = “पीतांबर” – यहाँ 'पीत' और 'अंबर' दोनों मिलकर 'विष्णु' (अन्यपद) का बोध कराते हैं – यही बहुव्रीहि की मुख्य पहचान है।
“दश” + “आनन” = “दशानन” – (दस मुख वाला – रावण – अन्यपद प्रधान)
“चक्र” + “पाणि” = “चक्रपाणि” – (चक्र धारण करने वाला – विष्णु – अन्यपद प्रधान)
ट्रिक – याद रखें: “अन्यपद – तीसरा पद प्रधान (पीतांबर – विष्णु); विग्रह में 'वाला' या 'युक्त' आता है – 'पीला वस्त्र पहनने वाला'; यही बहुव्रीहि समास की सबसे बड़ी पहचान – दोनों पद मिलकर किसी अन्य का बोध कराते हैं।”
3. बहुव्रीहि समास – उदाहरण तालिका
बहुव्रीहि समास के विभिन्न उदाहरण –
| समास शब्द | विग्रह | अर्थ (अन्यपद) |
|---|---|---|
| पीतांबर | पीत + अंबर | पीला वस्त्र पहनने वाला (विष्णु) |
| दशानन | दश + आनन | दस मुख वाला (रावण) |
| चक्रपाणि | चक्र + पाणि | चक्र धारण करने वाला (विष्णु) |
| नीलकंठ | नील + कंठ | नीला कंठ वाला (शिव) |
| श्वेतांबर | श्वेत + अंबर | सफेद वस्त्र पहनने वाला |
| त्रिनेत्र | त्रि + नेत्र | तीन नेत्र वाला (शिव) |
| चतुर्भुज | चतुर् + भुज | चार भुजाओं वाला (विष्णु) |
| सहस्रकिरण | सहस्र + किरण | हज़ार किरणों वाला (सूर्य) |
| अष्टावक्र | अष्ट + वक्र | आठ टेढ़ेपन वाला (ऋषि) |
| द्विज | द्वि + ज | दो बार जन्म लेने वाला (पक्षी/ब्राह्मण) |
| सुग्रीव | सु + ग्रीव | सुंदर ग्रीवा (गर्दन) वाला (वानर राजा) |
| बृहस्पति | बृहत् + पति | बड़े का स्वामी (देवगुरु) |
- अन्यपद – बहुव्रीहि समास का मुख्य लक्षण – दोनों पद मिलकर किसी अन्य का बोध कराते हैं – 'पीतांबर' – विष्णु (अन्यपद)।
- विग्रह में 'वाला' या 'युक्त' शब्द आते हैं – 'पीला वस्त्र पहनने वाला' – यही बहुव्रीहि की पहचान है।
- बहुव्रीहि समास हमेशा विशेषण बनता है – 'पीतांबर' – विष्णु का विशेषण – 'पीला वस्त्र पहनने वाला' – यह विशेषण है।
4. बहुव्रीहि और अन्य समासों में अंतर
बहुव्रीहि समास को कर्मधारय और तत्पुरुष से भ्रमित किया जा सकता है – आइए अंतर समझते हैं –
| बहुव्रीहि समास | कर्मधारय समास | तत्पुरुष समास |
|---|---|---|
| अन्यपद प्रधान – “पीतांबर” (विष्णु) | विशेषण-विशेष्य – “नीलकमल” (नीला कमल) | दूसरा पद प्रधान – “राजपुत्र” |
| विग्रह में 'वाला' – “पीला वस्त्र पहनने वाला” | विग्रह में विशेषण – “नीला कमल” | विग्रह में कारक चिह्न – “राजा का पुत्र” |
| उदाहरण – पीतांबर, दशानन | उदाहरण – नीलकमल, महाराजा | उदाहरण – राजपुत्र, गंगाजल |
5. वाक्यों में बहुव्रीहि समास का प्रयोग
बहुव्रीहि समास युक्त शब्दों का सही अर्थ समझना और उन्हें वाक्यों में प्रयोग करना आवश्यक है –
- पीतांबर (पीत + अंबर): “पीतांबर भगवान विष्णु का नाम है।” – (पीला वस्त्र पहनने वाला – विष्णु)
- दशानन (दश + आनन): “दशानन रावण का नाम है।” – (दस मुख वाला – रावण)
- चक्रपाणि (चक्र + पाणि): “चक्रपाणि भगवान विष्णु का नाम है।” – (चक्र धारण करने वाला – विष्णु)
- नीलकंठ (नील + कंठ): “नीलकंठ भगवान शिव का नाम है।” – (नीला कंठ वाला – शिव)
- त्रिनेत्र (त्रि + नेत्र): “त्रिनेत्र भगवान शिव का नाम है।” – (तीन नेत्र वाला – शिव)
- चतुर्भुज (चतुर् + भुज): “चतुर्भुज भगवान विष्णु का नाम है।” – (चार भुजाओं वाला – विष्णु)
हल सहित उदाहरण (5)
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व्याख्या: ‘पीत’ (पीला) + ‘अंबर’ (वस्त्र) – ‘पीला वस्त्र पहनने वाला’ – यहाँ ‘वाला’ (अन्यपद) प्रधान है – विग्रह में ‘वाला’ आया – यह बहुव्रीहि समास है।
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व्याख्या: ‘दश’ (दस) + ‘आनन’ (मुख) – ‘दस मुख वाला’ – यहाँ ‘वाला’ (अन्यपद) प्रधान है – विग्रह में ‘वाला’ आया – यह बहुव्रीहि समास है।
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व्याख्या: ‘चक्र’ + ‘पाणि’ (हाथ) – ‘चक्र धारण करने वाला’ – यहाँ ‘वाला’ (अन्यपद) प्रधान है – विग्रह में ‘वाला’ आया – यह बहुव्रीहि समास है।
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व्याख्या: ‘नील’ (नीला) + ‘कंठ’ (गला) – ‘नीला कंठ वाला’ – यहाँ ‘वाला’ (अन्यपद) प्रधान है – विग्रह में ‘वाला’ आया – यह बहुव्रीहि समास है।
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व्याख्या: ‘त्रि’ (तीन) + ‘नेत्र’ (आँख) – ‘तीन नेत्र वाला’ – यहाँ ‘वाला’ (अन्यपद) प्रधान है – विग्रह में ‘वाला’ आया – यह बहुव्रीहि समास है।
अभ्यास प्रश्न (5)
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बहुव्रीहि समास की समझ क्यों ज़रूरी है?
बहुव्रीहि समास हिंदी भाषा को सुंदर, सटीक और प्रभावी बनाता है – 'पीला वस्त्र पहनने वाला' की जगह 'पीतांबर' कहना अधिक सुरुचिपूर्ण है। यह समास विशेषण बनता है और किसी अन्य (तीसरे) का बोध कराता है – 'पीतांबर' – विष्णु, 'दशानन' – रावण, 'नीलकंठ' – शिव। बहुव्रीहि समास साहित्य, काव्य, और पौराणिक ग्रंथों में बहुत प्रयुक्त होता है – इसलिए इसे समझना अत्यंत आवश्यक है। इस पोस्ट में हमने समास परिभाषा और द्वंद्व समास के साथ बहुव्रीहि समास के तीनों प्रकारों – पूर्वपद, उत्तरपद, और अन्यपद – को उनके नियमों, उदाहरणों, और पहचान के साथ विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी बहुव्रीहि समास युक्त शब्द का विग्रह कर सकते हैं और उसका सही प्रकार बता सकते हैं।
अभ्यास से ही बहुव्रीहि समास की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक भाषा में बहुव्रीहि समास युक्त शब्दों पर ध्यान दें – 'पीतांबर', 'दशानन', 'चक्रपाणि', 'नीलकंठ', 'त्रिनेत्र', 'चतुर्भुज' – इनका विग्रह करें और देखें कि विग्रह में 'वाला' या 'युक्त' आ रहा है और यह किस अन्य का बोध करा रहा है। यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।
📝 बहुव्रीहि समास अभ्यास – कक्षा 9-10
इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 30 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक शब्द का विग्रह करना है और बताना है कि वह बहुव्रीहि समास है या नहीं। बहुव्रीहि समास वाले शब्दों में प्रकार (पूर्वपद, उत्तरपद, या अन्यपद) पहचानना है और बताना है कि वह किस अन्य का बोध करा रहा है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।
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