समास विग्रह वह क्रिया है जिसके द्वारा हम किसी समस्त पद (सामासिक शब्द) को उसके मूल पदों में विभक्त करते हैं और उनके बीच के लुप्त संबंधों (विभक्ति चिह्नों) को पुनः स्थापित करते हैं। यह समास-विज्ञान की परीक्षा की कुंजी है, जो न सिर्फ़ समास के प्रकार बताती है बल्कि शब्दों के गहन अर्थ को भी उजागर करती है।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 9–10 (परिचय व नियम) | कक्षा 10+ (जटिल विग्रह व प्रयोग)
1. समास विग्रह का परिचय
आपने 'राजपुत्र' शब्द सुना। यह एक पैकेज्ड शब्द है। विग्रह का मतलब है इस पैकेज को खोलकर देखना कि इसमें क्या-क्या है और वे चीज़ें आपस में कैसे जुड़ी हैं। तो, 'राजपुत्र' का पैकेज खोलेंगे तो मिलेगा – 'राजा का पुत्र'। यही विग्रह है। यह एक रिवर्स इंजीनियरिंग की तरह है। समास में हम 'राजा का पुत्र' से 'राजपुत्र' बनाते हैं, और विग्रह में हम 'राजपुत्र' से वापस 'राजा का पुत्र' बनाते हैं। यह क्रिया न सिर्फ़ परीक्षा के लिए ज़रूरी है, बल्कि किसी भी सामासिक शब्द के सही अर्थ और प्रयोग को समझने के लिए भी अनिवार्य है।
बिना विग्रह के, आप 'पीतांबर' को सिर्फ़ एक नाम समझेंगे। विग्रह करने पर ('पीत है जो अंबर' या 'पीले वस्त्र वाला') आपको पता चलेगा कि यह कृष्ण का विशेषण है और इसका सांस्कृतिक महत्व क्या है। विग्रह ही आपको बताता है कि शब्द तत्पुरुष है, कर्मधारय है या बहुव्रीहि।
2. परिभाषा
परिभाषा: किसी समस्त पद (सामासिक शब्द) को विभक्त करके उसके मूल पदों में अलग-अलग करना तथा उन पदों के बीच के लुप्त संबंधसूचक शब्दों (विभक्ति चिह्नों, योजक शब्दों आदि) को पुनः जोड़कर एक सार्थक वाक्यांश बनाना, समास-विग्रह कहलाता है।
सरल शब्दों में: समास से बने शब्द को तोड़कर उसका मूल रूप लिखना 'विग्रह' है।
3. विग्रह के नियम एवं पहचान
विग्रह करते समय इन बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- मूल पदों को पहचानें: सबसे पहले समस्त पद में छिपे दो (या अधिक) मूल शब्दों को पहचानें। जैसे: 'विद्यालय' में 'विद्या' + 'आलय'।
- लुप्त संबंध शब्द जोड़ें: समास बनाते समय जो विभक्ति चिह्न (का, से, में) या योजक (और, या) हटाए गए थे, विग्रह में उन्हें वापस जोड़ें। यही कदम समास का प्रकार तय करता है।
- सार्थक वाक्यांश बनाएँ: विग्रह करने के बाद बना वाक्यांश पूरी तरह सार्थक और व्याकरणिक दृष्टि से शुद्ध होना चाहिए।
- क्रम का ध्यान रखें: विग्रह में पदों का क्रम बदल सकता है। अधिकतर पहले पूर्वपद और फिर उत्तरपद आता है, लेकिन अर्थ के अनुसार क्रम बदला जा सकता है। 'राजपुत्र' का विग्रह 'पुत्र राजा का' नहीं, 'राजा का पुत्र' होगा।
- समास का नाम लिखें: विग्रह करने के बाद, उससे निकलते समास के प्रकार का नाम अवश्य लिखें। यह परीक्षा में पूर्ण अंक दिलाता है।
4. विभिन्न समासों के विग्रह के सूत्र (Patterns)
प्रत्येक समास के विग्रह का एक खास ढाँचा (Pattern) होता है। इस तालिका को समझकर आप किसी भी शब्द का विग्रह आसानी से कर सकते हैं:
| समास का प्रकार | विग्रह का सूत्र / पैटर्न | उदाहरण | विग्रह |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्वपद के अनुसार + उत्तरपद (पहला पद प्रधान, अव्यय बनाता है) |
यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| तत्पुरुष (सभी भेद) |
पूर्वपद + लुप्त विभक्ति (का, से, में, के लिए) + उत्तरपद (दूसरा पद प्रधान) |
राजपुत्र, गंगाजल, भयभीत, जेलखाना | राजा का पुत्र, गंगा का जल, भय से भीत, जेल के लिए खाना |
| कर्मधारय | पूर्वपद + है जो/के समान + उत्तरपद (विशेषण-विशेष्य या उपमा) |
नीलकमल, महात्मा, चंद्रमुख | नीला है जो कमल, महान है जो आत्मा, चंद्र के समान मुख |
| द्वंद्व | पूर्वपद + और/अथवा + उत्तरपद (दोनों पद प्रधान) |
माता-पिता, सुख-दुःख, एक-आध | माता और पिता, सुख और दुःख, एक अथवा आध |
| बहुव्रीहि | पूर्वपद + उत्तरपद + जिसका/वाला/जहाँ (कोई पद प्रधान नहीं, तीसरा अर्थ) |
लंबोदर, नीलकंठ, पंचवटी | लंबा है उदर जिसका, नीला है कंठ जिसका, पाँच वट वृक्ष हैं जहाँ |
5. विस्तृत उदाहरण
विभिन्न प्रकार के समासों के विग्रह के और उदाहरण:
- अव्ययीभाव: प्रतिदिन → प्रत्येक दिन, आजीवन → जीवन भर, यथोचित → उचित के अनुसार।
- तत्पुरुष:
- संबंध: देशभक्त → देश का भक्त।
- करण: हथकड़ी → हाथ से कड़ी।
- अपादान: जन्मांध → जन्म से अंध।
- अधिकरण: आत्मविश्वास → आत्मा में विश्वास।
- कर्मधारय: सज्जन → सत् (अच्छा) है जो जन, पुरुषोत्तम → पुरुषों में उत्तम, घनश्याम → घन (बादल) के समान श्याम।
- द्वंद्व: दाल-रोटी → दाल और रोटी, ऊँच-नीच → ऊँच और नीच, आना-जाना → आना और जाना।
- बहुव्रीहि: चतुर्भुज → चार भुजाएँ जिसकी, धनवान → धन है जिसके पास, त्रिनेत्र → तीन नेत्र जिसके।
6. विग्रह करने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
किसी भी समस्त पद का विग्रह करने के लिए इस चार-चरणीय विधि का पालन करें:
चरण 1: पद-पहचान – समस्त पद को देखकर अनुमान लगाएँ कि इसमें कौन-से दो मूल शब्द छिपे हैं। (जैसे: 'तुलसीदास' → 'तुलसी' + 'दास')
चरण 2: संबंध अनुमान – दोनों शब्दों के बीच क्या संबंध हो सकता है? क्या एक दूसरे का है? क्या एक दूसरे के समान है? क्या दोनों साथ-साथ हैं? (जैसे: तुलसी का दास? तुलसी के समान दास? तुलसी और दास?)
चरण 3: विग्रह निर्माण – अनुमानित संबंध के अनुसार लुप्त शब्द (का, और, है जो, जिसका आदि) जोड़कर एक सार्थक वाक्यांश बनाएँ। (जैसे: तुलसी का दास → यह सार्थक है।)
चरण 4: समास नामकरण – बने विग्रह के आधार पर समास का प्रकार बताएँ। (जैसे: 'तुलसी का दास' में 'का' है, अतः यह तत्पुरुष समास (संबंध) है।)
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
विग्रह करते समय छात्र अक्सर इन गलतियों के शिकार होते हैं:
- गलत संबंध शब्द जोड़ना: 'नीलकमल' का विग्रह 'नील का कमल' लिख देना (यह तत्पुरुष हो जाएगा)। सही विग्रह है 'नीला है जो कमल' (कर्मधारय)।
- कर्मधारय और बहुव्रीहि में भ्रम: 'पीतांबर' का विग्रह अगर 'पीला है जो अंबर' लिखेंगे तो कर्मधारय, और 'पीले अंबर वाला' लिखेंगे तो बहुव्रीहि। प्रसंग देखें! सामान्यतः यह कृष्ण के लिए प्रयुक्त होता है, अतः बहुव्रीहि विग्रह ('पीले वस्त्र वाला') श्रेष्ठ है।
- द्वंद्व में 'और' भूल जाना: 'माता-पिता' का विग्रह सिर्फ 'माता पिता' लिख देना गलत है। 'और' जोड़ना अनिवार्य है।
- समास का नाम न लिखना: विग्रह करने के बाद समास का नाम लिखना न भूलें। प्रश्न में चाहे न पूछा हो, लिख देने से अंक सुरक्षित रहते हैं।
- अशुद्ध विग्रह: विग्रह करने के बाद जाँच लें कि बना वाक्यांश व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध और अर्थपूर्ण है या नहीं।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- विग्रह के प्रश्न में हमेशा दो चीज़ें लिखें: (1) विग्रह और (2) समास का नाम।
- विग्रह करते समय कोष्ठक () का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे: राजपुत्र – विग्रह: राजा का पुत्र (तत्पुरुष समास)।
- MCQ में अक्सर किसी शब्द के सही विग्रह के लिए चार विकल्प दिए होते हैं। गलत विग्रह वाले विकल्पों में आमतौर पर संबंध शब्द गलत होता है (जैसे 'और' की जगह 'का' या 'है जो' की जगह 'से')।
- जटिल शब्दों (जैसे चंद्रशेखर, पंचवटी) का विग्रह करने के लिए उनके सांस्कृतिक/साहित्यिक संदर्भ को जानना लाभदायक है।
- यदि प्रश्न में केवल 'विग्रह' लिखा है, तो भी समास का नाम लिख देना चाहिए। यह अतिरिक्त सुरक्षा है।
9. 🎯 समास विग्रह आधारित चुनौती
नीचे दिए गए प्रश्नों में समस्त पदों का विग्रह कीजिए और समास का नाम बताइए।
1. "महावीर"
विग्रह: महान है जो वीर।
समास का नाम: कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य)।
2. "आजन्म"
विग्रह: जन्म से (लेकर)।
समास का नाम: अव्ययीभाव समास।
3. "पंचतंत्र"
विग्रह: पाँच हैं जो तंत्र (नियम/कथाएँ)।
समास का नाम: कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य)।
(नोट: यह एक ग्रंथ का नाम है, अतः कर्मधारय माना जाता है। कभी-कभी इसे बहुव्रीहि भी मान सकते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम के स्तर पर कर्मधारय स्वीकार्य है।)
4. "भूदान"
विग्रह: भूमि का दान।
समास का नाम: तत्पुरुष समास (संबंध भेद)।
5. "सिर-मौं" (क्रोध में आना)
विग्रह: सिर और मौं (माथा)।
समास का नाम: द्वंद्व समास (इतरेतर)।
6. "निर्बल"
विग्रह: बल रहित (जिसमें बल न हो)।
समास का नाम: बहुव्रीहि समास।
7. "यथाविधि"
विग्रह: विधि (नियम) के अनुसार।
समास का नाम: अव्ययीभाव समास।
8. "गजानन"
विग्रह: गज (हाथी) के समान आनन (मुख) वाला।
समास का नाम: बहुव्रीहि समास।
9. "घुड़सवार"
विग्रह: घोड़े का सवार।
समास का नाम: तत्पुरुष समास (संबंध भेद)।
10. "दशानन" (रावण)
विग्रह: दस आनन (मुख) वाला।
समास का नाम: बहुव्रीहि समास।
10. सारांश
समास विग्रह समस्त पदों को उनके मूल स्वरूप में लौटाने की क्रिया है। यह एक विश्लेषणात्मक कौशल है जो समास के नियमों की गहरी समझ माँगता है। विग्रह करने के लिए समस्त पद में छिपे मूल पदों को पहचानना, उनके बीच के लुप्त संबंधसूचक शब्दों (का, से, और, है जो, जिसका आदि) को सही ढंग से जोड़ना और एक सार्थक वाक्यांश बनाना आवश्यक है। इसके बाद उस विग्रह के आधार पर समास का प्रकार बताना चाहिए। विग्रह न सिर्फ़ परीक्षा में सफलता की कुंजी है, बल्कि हमारी भाषा की समृद्धि और सूक्ष्मता को समझने का एक शानदार तरीका भी है।
11. संबंधित विषय संकेत
हिंदी व्याकरण के एक और महत्वपूर्ण अंग को समझने के लिए आगे बढ़ें: क्रिया (Kriya) - स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि
📝 समास विग्रह - अभ्यास कार्यपत्रक
सभी प्रकार के समासों के विग्रह पर आधारित व्यापक और चुनौतीपूर्ण अभ्यास प्रश्नों का संग्रह।
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