अव्ययीभाव समास, समास का वह विशेष प्रकार है जिसमें बनने वाला नया शब्द क्रिया विशेषण (Adverb) का काम करता है। यह समास हमें बताता है कि कोई कार्य 'कैसे', 'कब', 'कितना' या 'किस प्रकार' हो रहा है। 'यथाशक्ति', 'प्रतिदिन' जैसे शब्द इसके सटीक उदाहरण हैं।
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1. अव्ययीभाव समास का परिचय
जब आप कहते हैं, "मैं यथाशक्ति प्रयास करूँगा," तो आपका मतलब होता है "जैसी मेरी शक्ति है, वैसा प्रयास।" लेकिन आपने पूरा वाक्यांश न कहकर सिर्फ एक शब्द "यथाशक्ति" का प्रयोग किया। यह शब्द बता रहा है कि "प्रयास" कैसे होगा – शक्ति के अनुसार। ऐसे ही शब्द, जो क्रिया की विशेषता बताने के लिए एक ही पैकेज में इस्तेमाल होते हैं, अव्ययीभाव समास के अंतर्गत आते हैं। ये शब्द वाक्य में हमेशा अव्यय (क्रिया विशेषण) की भूमिका निभाते हैं।
सोचिए, "वह प्रतिदिन सैर करता है।" यहाँ 'प्रतिदिन' बता रहा है कि 'सैर करना' कब होता है – हर दिन। यह शब्द "प्रति" और "दिन" के मेल से बना है। अव्ययीभाव समास में ऐसे ही पहले पद (प्रति, यथा, आजीवन) का विशेष महत्व होता है और पूरा शब्द अव्यय बन जाता है।
2. परिभाषा
परिभाषा: ऐसा समास जिसमें पहला पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और समास के बाद बना हुआ समस्त पद सदैव अव्यय (क्रिया-विशेषण) का काम करता है, अव्ययीभाव समास कहलाता है। इस समास का अर्थ सदैव क्रिया विशेषण के रूप में ही प्रयुक्त होता है।
3. मुख्य बिंदु / पहचान
अव्ययीभाव समास को पहचानना बहुत आसान है। बस इन तीन बातों पर ध्यान दें:
- पहला पद प्रधान: इसमें पहला शब्द (पूर्व पद) मुख्य होता है और अर्थ पर हावी रहता है। जैसे: यथाशक्ति में 'यथा' प्रधान है।
- समस्त पद अव्यय बनता है: बनने के बाद पूरा शब्द वाक्य में कभी संज्ञा या विशेषण नहीं, बल्कि हमेशा क्रिया विशेषण (Adverb) की तरह काम करेगा। यह बताएगा कि क्रिया कैसे, कब, कहाँ या किस सीमा तक हो रही है।
- प्रायः अव्यय पहले आते हैं: इस समास के अधिकतर उदाहरणों में पहला पद स्वयं एक अव्यय (जैसे यथा, प्रति, अनु, आ) ही होता है, जो दूसरे पद (संज्ञा) के साथ मिलकर एक नया अव्यय बना देता है।
- विग्रह में 'के अनुसार', 'के समान' आदि आते हैं: जब आप इसका विग्रह करेंगे, तो उसमें 'के अनुसार', 'के योग्य', 'में', 'तक' जैसे शब्द जुड़े मिलेंगे। जैसे: यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
4. अव्ययीभाव के प्रमुख उदाहरण-प्रकार
अव्ययीभाव समास के भीतर कोई अलग भेद तो नहीं होते, लेकिन पहले पद (अव्यय) के आधार पर इन्हें कुछ समूहों में समझा जा सकता है। यह तालिका आपको सामान्य उदाहरणों और उनके अर्थ से परिचित कराएगी।
| क्रम | समस्त पद (अव्ययीभाव) | विग्रह | प्रयोग / अर्थ |
|---|---|---|---|
| 1 | यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार | कैसे? (शक्ति के अनुसार ढंग से) |
| 2 | प्रतिदिन | प्रत्येक दिन | कब? (समय बताने वाला) |
| 3 | आजीवन | जीवन भर | कब तक? (अवधि बताने वाला) |
| 4 | यथासमय | समय के अनुसार | कब? (उचित समय पर) |
| 5 | अनुकूल | कूल (तट/ओर) के अनुसार | कैसे? (मेल खाते हुए) |
| 6 | घड़ी-घड़ी | हर घड़ी में | कितनी बार? (बारंबारता) |
5. उदाहरण
वाक्यों में अव्ययीभाव समास के प्रयोग को देखें तो यह और स्पष्ट हो जाएगा:
- उदाहरण 1: सैनिक यथाविधि श्रद्धांजलि देते हैं। (विधि के अनुसार)
- उदाहरण 2: आमरण वह इसी आश्रम में रहा। (मरने तक)
- उदाहरण 3: उसने जीवनभर मेहनत की। (जीवन भर तक)
- उदाहरण 4: कृपया यथास्थान बैठ जाइए। (अपने-अपने स्थान के अनुसार)
- उदाहरण 5: हमें प्रतिवर्ष जाँच करानी चाहिए। (हर वर्ष)
6. वाक्य में प्रयोग
अव्ययीभाव समास से बने शब्द वाक्य में सीधे क्रिया विशेषण की तरह प्रयुक्त होते हैं। इनका रूप कभी नहीं बदलता, न लिंग के कारण, न वचन के कारण, न कारक के कारण। ये अव्यय होने के कारण सदा एक जैसे रहते हैं। इन्हें वाक्य में मुख्य क्रिया से पहले या बाद में, जहाँ अर्थ स्पष्ट हो, वहाँ रखा जा सकता है।
सही प्रयोग: "विद्यार्थी को यथोचित व्यवहार करना चाहिए।" (यहाँ 'यथोचित' बता रहा है कि 'करना' कैसे होना चाहिए।)
गलत धारणा: इन शब्दों के साथ कारक चिह्न (ने, को, से आदि) नहीं लगते। "यथाशक्ति से" कहना गलत है, सिर्फ "यथाशक्ति" सही है।
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
अव्ययीभाव को तत्पुरुष या कर्मधारय समास से अलग पहचानना ज़रूरी है। इन बातों का ध्यान रखें:
- अव्ययीभाव vs तत्पुरुष: तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और बना शब्द संज्ञा या विशेषण होता है (जैसे 'राजपुत्र' - एक व्यक्ति)। अव्ययीभाव में पहला पद प्रधान होता है और बना शब्द अव्यय होता है (जैसे 'यथाशक्ति' - एक तरीका)। यह मूलभूत अंतर है।
- अर्थ पर ध्यान दें: अव्ययीभाव समास का अर्थ हमेशा क्रिया की विशेषता बताने वाला होता है। अगर बना शब्द 'कैसे', 'कब', 'कितना' जैसे प्रश्नों का उत्तर दे रहा है, तो वह अव्ययीभाव ही है।
- हर 'प्रति' वाला शब्द अव्ययीभाव नहीं: 'प्रतिज्ञा' (वचन) एक संज्ञा है, अव्यय नहीं। इसलिए वह तत्पुरुष समास है। जबकि 'प्रतिदिन' एक अव्यय है, इसलिए अव्ययीभाव है। अंतिम शब्द के अर्थ और प्रकार पर निर्भर करता है।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- परीक्षा में अक्सर परिभाषा पूछी जाती है: "पहला पद प्रधान और समस्त पद अव्यय बने।" यह वाक्यांश याद रखें।
- MCQ में अव्ययीभाव का उदाहरण पूछा जाए तो देखें कि कौन-सा विकल्प क्रिया विशेषण का काम कर रहा है। 'यथानियम', 'आमरण', 'जीवनभर' जैसे शब्द सुरक्षित विकल्प होते हैं।
- विग्रह करने में अक्सर गलती होती है। याद रखें: अव्ययीभाव के विग्रह में 'के अनुसार', 'तक', 'में', 'भर' जैसे शब्द आते हैं।
- समास के चार प्रमुख भेदों में से अव्ययीभाव सबसे कम उदाहरण वाला भेद है, लेकिन पूछा ज़रूर जाता है।
9. 🎯 अव्ययीभाव समास आधारित चुनौती
नीचे दिए गए प्रश्नों को हल करके देखें कि आप इस समास को कितना समझ पाए हैं।
1. "वह यथाविधि अपने कार्य में लगा रहा।" इस वाक्य में 'यथाविधि' शब्द किस प्रकार का समास है और यह क्रिया 'लगा रहा' की क्या विशेषता बता रहा है?
2. "प्रतिमाह" और "प्रतिमूर्ति" – इन दोनों में से कौन-सा शब्द अव्ययीभाव समास का उदाहरण है और क्यों?
3. "आजन्म" शब्द का विग्रह कीजिए और बताइए कि यह किस प्रकार का समास है?
4. "अनुरूप" और "अनुसार" – क्या ये दोनों अव्ययीभाव समास हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
अनुरूप: 'रूप के अनुसार' – यह क्रिया के ढंग की विशेषता बताता है।
अनुसार: 'सार (तत्व) के अनुसार' – यह भी क्रिया के ढंग की विशेषता बताता है।
दोनों वाक्य में अव्यय की भूमिका में प्रयुक्त होते हैं।
5. "यथोचित व्यवहार करो।" इस वाक्य में 'यथोचित' शब्द के विग्रह में कौन-सा शब्द आएगा? उस आधार पर समास का नाम बताइए।
6. "वह घर-घर जाकर मदद माँग रहा था।" क्या 'घर-घर' अव्ययीभाव समास है? कारण बताइए।
7. "मौसम के अनुरूप कपड़े पहनो।" – इस वाक्य में 'अनुरूप' शब्द को अलग करके देखें। क्या यह स्वयं एक समस्त पद है? यदि हाँ, तो इसके मूल पद क्या-क्या हैं?
8. "उसने जीवनभर संघर्ष किया।" और "उसका जीवनभर का संघर्ष प्रेरणादायक है।" – इन दोनों वाक्यों में 'जीवनभर' शब्द के प्रयोग में क्या अंतर है? क्या दोनों ही स्थितियों में यह अव्ययीभाव समास है?
9. "प्रतिपल" और "प्रतिफल" – इनमें से कौन-सा शब्द अव्ययीभाव है? दोनों के अर्थ लिखकर अंतर स्पष्ट कीजिए।
प्रतिपल: हर पल। यह एक अव्यय (क्रिया विशेषण) है जो समय की बारंबारता बताता है। अतः यह अव्ययीभाव समास है।
प्रतिफल: बदले में मिलने वाला (फल/परिणाम)। यह एक संज्ञा है। अतः यह तत्पुरुष समास है।
10. आप अपनी दिनचर्या में प्रयोग होने वाले तीन ऐसे शब्द लिखिए जो अव्ययीभाव समास के उदाहरण हों और उनका वाक्य में प्रयोग भी कीजिए।
1. प्रातःकाल – मैं प्रातःकाल टहलने जाता हूँ।
2. सदैव – हमें सदैव सच बोलना चाहिए।
3. यथासंभव – यथासंभव शीघ्र आइएगा।
10. सारांश
अव्ययीभाव समास समास का एक विशिष्ट प्रकार है जिसकी पहचान और नियम बहुत स्पष्ट हैं। इसमें पहला पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और मिलकर बना हुआ नया शब्द (समस्त पद) हमेशा अव्यय (क्रिया विशेषण) बनता है, जो क्रिया के ढंग, समय, स्थान आदि की विशेषता बताता है। 'यथा', 'प्रति', 'आ' जैसे अव्ययों से शुरू होने वाले शब्द अक्सर इसी के अंतर्गत आते हैं। इसे तत्पुरुष समास से अलग पहचानने के लिए यह जाँचें कि बना शब्द संज्ञा/विशेषण है या फिर एक अव्यय।
11. संबंधित विषय संकेत
अव्ययीभाव के बाद समास के सबसे प्रचलित और महत्वपूर्ण भेद को समझें: कक्षा 7-8 • तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)
📝 अव्ययीभाव समास - अभ्यास कार्यपत्रक
अव्ययीभाव समास की पहचान और प्रयोग पर आधारित विशेष अभ्यास प्रश्न।
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