विषय आधारित अनुच्छेद लेखन: इस कार्यपत्रक में कक्षा 5-8 के स्तर के अनुसार विभिन्न विषयों पर अनुच्छेद लेखन के 20 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न परीक्षा में पूछे गए पैटर्न पर हैं। प्रत्येक अनुच्छेद 100-120 शब्दों में लिखें।
विषय आधारित अनुच्छेद लेखन (प्रश्न 1–20)
1. "सोशल मीडिया के लाभ और हानि" विषय पर 100-120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2023)
उत्तर:
सोशल मीडिया आधुनिक डिजिटल युग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इसके लाभ और हानि दोनों पहलू हैं। लाभों में सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता, रोजगार के अवसर और सामाजिक जागरूकता फैलाना प्रमुख हैं। विद्यार्थी ऑनलाइन कोर्सेज कर सकते हैं और दुनिया भर के विद्वानों से जुड़ सकते हैं। व्यवसायी अपने उत्पादों का प्रचार कर सकते हैं। परंतु इसकी हानियाँ भी गंभीर हैं। सोशल मीडिया की लत से समय की बर्बादी होती है, अध्ययन प्रभावित होता है। गलत सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। साइबर बुलिंग और प्राइवेसी का खतरा बढ़ गया है। युवा अवास्तविक जीवनशैली से प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया का संतुलित और सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए। माता-पिता को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए।
सोशल मीडिया आधुनिक डिजिटल युग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। इसके लाभ और हानि दोनों पहलू हैं। लाभों में सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता, रोजगार के अवसर और सामाजिक जागरूकता फैलाना प्रमुख हैं। विद्यार्थी ऑनलाइन कोर्सेज कर सकते हैं और दुनिया भर के विद्वानों से जुड़ सकते हैं। व्यवसायी अपने उत्पादों का प्रचार कर सकते हैं। परंतु इसकी हानियाँ भी गंभीर हैं। सोशल मीडिया की लत से समय की बर्बादी होती है, अध्ययन प्रभावित होता है। गलत सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। साइबर बुलिंग और प्राइवेसी का खतरा बढ़ गया है। युवा अवास्तविक जीवनशैली से प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया का संतुलित और सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए। माता-पिता को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए।
2. "ऑनलाइन शिक्षा" विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2022)
उत्तर:
कोरोना महामारी ने ऑनलाइन शिक्षा को एक नई दिशा दी है। ऑनलाइन शिक्षा में इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर या मोबाइल पर पढ़ाई की जाती है। इसके अनेक लाभ हैं। छात्र घर बैठे विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। वीडियो लेक्चर, ई-बुक्स और ऑनलाइन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। समय और स्थान की बाध्यता नहीं रहती। दिव्यांग और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी लाभान्वित हो रहे हैं। परंतु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं। गरीब परिवारों के पास इंटरनेट और डिवाइस नहीं हैं। लगातार स्क्रीन देखने से आँखों पर दबाव पड़ता है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सीधा संवाद कम होता है। व्यावहारिक प्रयोग और प्रयोगशाला कार्य संभव नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा पारंपरिक शिक्षा का विकल्प नहीं बल्कि पूरक है। दोनों का समन्वय आवश्यक है।
कोरोना महामारी ने ऑनलाइन शिक्षा को एक नई दिशा दी है। ऑनलाइन शिक्षा में इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटर या मोबाइल पर पढ़ाई की जाती है। इसके अनेक लाभ हैं। छात्र घर बैठे विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। वीडियो लेक्चर, ई-बुक्स और ऑनलाइन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। समय और स्थान की बाध्यता नहीं रहती। दिव्यांग और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी लाभान्वित हो रहे हैं। परंतु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं। गरीब परिवारों के पास इंटरनेट और डिवाइस नहीं हैं। लगातार स्क्रीन देखने से आँखों पर दबाव पड़ता है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सीधा संवाद कम होता है। व्यावहारिक प्रयोग और प्रयोगशाला कार्य संभव नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा पारंपरिक शिक्षा का विकल्प नहीं बल्कि पूरक है। दोनों का समन्वय आवश्यक है।
3. "महिला सशक्तिकरण" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2021)
उत्तर:
महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र और सबल बनाना। स्वतंत्र भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है परंतु अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। शिक्षा महिला सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। शिक्षित महिला स्वावलंबी बनती है और परिवार व समाज का नेतृत्व करती है। आज महिलाएँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं - विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, खेल और राजनीति में। कल्पना चावला, इंदिरा नूई, मैरी कॉम और सुषमा स्वराज जैसी महिलाओं ने यह साबित कर दिया है। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा पर अभी भी ध्यान देना होगा। बाल विवाह, दहेज प्रथा और लिंग भेद जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करना होगा। महिला सशक्तिकरण से ही देश का सही विकास संभव है। सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाए हैं।
महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र और सबल बनाना। स्वतंत्र भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है परंतु अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। शिक्षा महिला सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। शिक्षित महिला स्वावलंबी बनती है और परिवार व समाज का नेतृत्व करती है। आज महिलाएँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं - विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय, खेल और राजनीति में। कल्पना चावला, इंदिरा नूई, मैरी कॉम और सुषमा स्वराज जैसी महिलाओं ने यह साबित कर दिया है। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा पर अभी भी ध्यान देना होगा। बाल विवाह, दहेज प्रथा और लिंग भेद जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करना होगा। महिला सशक्तिकरण से ही देश का सही विकास संभव है। सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाए हैं।
4. "डिजिटल इंडिया" विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर:
डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसकी शुरुआत 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। डिजिटल इंडिया के तीन मुख्य आधार हैं - डिजिटल अवसंरचना का निर्माण, डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी और डिजिटल साक्षरता। इस योजना के अंतर्गत ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। आधार कार्ड, डिजिटल लॉकर, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा और ई-किसान जैसी सेवाएँ शुरू की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है। डिजिटल इंडिया से भ्रष्टाचार कम हुआ है और सरकारी सेवाएँ पारदर्शी हुई हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास - यह डिजिटल इंडिया का नारा है। इससे भारत विश्व में डिजिटल शक्ति के रूप में उभरेगा।
डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसकी शुरुआत 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। डिजिटल इंडिया के तीन मुख्य आधार हैं - डिजिटल अवसंरचना का निर्माण, डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी और डिजिटल साक्षरता। इस योजना के अंतर्गत ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। आधार कार्ड, डिजिटल लॉकर, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा और ई-किसान जैसी सेवाएँ शुरू की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाई जा रही है। डिजिटल इंडिया से भ्रष्टाचार कम हुआ है और सरकारी सेवाएँ पारदर्शी हुई हैं। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास - यह डिजिटल इंडिया का नारा है। इससे भारत विश्व में डिजिटल शक्ति के रूप में उभरेगा।
5. "योग और स्वास्थ्य" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर:
योग भारत की प्राचीन और अमूल्य धरोहर है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है बल्कि जीवन जीने की कला है। नियमित योगाभ्यास से शरीर लचीला और मजबूत होता है। पाचन तंत्र ठीक रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। प्राणायाम से फेफड़े मजबूत होते हैं और श्वसन संबंधी रोग दूर होते हैं। ध्यान (मेडिटेशन) से मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। योग के अंतर्गत आसन, प्राणायाम, मुद्रा और ध्यान आते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग विशेष रूप से लाभदायक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी योग कर सकते हैं। योग न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। योग से स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है।
योग भारत की प्राचीन और अमूल्य धरोहर है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है बल्कि जीवन जीने की कला है। नियमित योगाभ्यास से शरीर लचीला और मजबूत होता है। पाचन तंत्र ठीक रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। प्राणायाम से फेफड़े मजबूत होते हैं और श्वसन संबंधी रोग दूर होते हैं। ध्यान (मेडिटेशन) से मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। योग के अंतर्गत आसन, प्राणायाम, मुद्रा और ध्यान आते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग विशेष रूप से लाभदायक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी योग कर सकते हैं। योग न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। योग से स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है।
6. "किसान और भारतीय अर्थव्यवस्था" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2018 पैटर्न)
उत्तर:
भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश की लगभग 50% आबादी कृषि पर निर्भर है। किसान अन्न उत्पादन करके देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। कृषि उत्पादों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है। कपास, गन्ना, चाय, कॉफी जैसे उत्पादों से उद्योगों को कच्चा माल मिलता है। परंतु भारतीय किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। छोटी जोत, पुरानी तकनीक, सिंचाई की कमी, उचित मूल्य न मिलना और कर्ज का बोझ मुख्य समस्याएँ हैं। कई बार फसल खराब होने पर किसान आत्महत्या कर लेते हैं। सरकार को किसानों के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए। नई कृषि तकनीक, बीमा योजना, सिंचाई सुविधा और उचित मूल्य की गारंटी जरूरी है। किसानों की स्थिति सुधरेगी तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। "जय जवान, जय किसान" का नारा आज भी प्रासंगिक है।
भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश की लगभग 50% आबादी कृषि पर निर्भर है। किसान अन्न उत्पादन करके देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। कृषि उत्पादों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है। कपास, गन्ना, चाय, कॉफी जैसे उत्पादों से उद्योगों को कच्चा माल मिलता है। परंतु भारतीय किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। छोटी जोत, पुरानी तकनीक, सिंचाई की कमी, उचित मूल्य न मिलना और कर्ज का बोझ मुख्य समस्याएँ हैं। कई बार फसल खराब होने पर किसान आत्महत्या कर लेते हैं। सरकार को किसानों के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए। नई कृषि तकनीक, बीमा योजना, सिंचाई सुविधा और उचित मूल्य की गारंटी जरूरी है। किसानों की स्थिति सुधरेगी तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। "जय जवान, जय किसान" का नारा आज भी प्रासंगिक है।
7. "विज्ञान के चमत्कार" विषय पर 100-120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2023 पैटर्न)
उत्तर:
विज्ञान ने मानव जीवन में अद्भुत क्रांति ला दी है। इसके चमत्कारों ने हमारे जीवन को सरल, सुविधाजनक और सुरक्षित बना दिया है। संचार के क्षेत्र में मोबाइल फोन और इंटरनेट ने दुनिया को एक गाँव बना दिया है। चिकित्सा के क्षेत्र में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और टीके ने अनेक बीमारियों पर काबू पाया है। यातायात के क्षेत्र में हवाई जहाज, रेलगाड़ी और मेट्रो ने लंबी दूरियाँ कम कर दी हैं। कंप्यूटर और रोबोटिक्स ने उत्पादन और सेवाओं में क्रांति ला दी है। अंतरिक्ष विज्ञान में भारत ने चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशन सफल किए हैं। कृषि में नई तकनीकों से उत्पादन बढ़ा है। परंतु विज्ञान के दुरुपयोग से भी समस्याएँ पैदा हुई हैं। परमाणु हथियार, पर्यावरण प्रदूषण और जैविक युद्ध चिंता का विषय हैं। विज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि विनाश के लिए। विज्ञान ने जो सपने दिखाए थे, वे आज हकीकत बन गए हैं।
विज्ञान ने मानव जीवन में अद्भुत क्रांति ला दी है। इसके चमत्कारों ने हमारे जीवन को सरल, सुविधाजनक और सुरक्षित बना दिया है। संचार के क्षेत्र में मोबाइल फोन और इंटरनेट ने दुनिया को एक गाँव बना दिया है। चिकित्सा के क्षेत्र में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और टीके ने अनेक बीमारियों पर काबू पाया है। यातायात के क्षेत्र में हवाई जहाज, रेलगाड़ी और मेट्रो ने लंबी दूरियाँ कम कर दी हैं। कंप्यूटर और रोबोटिक्स ने उत्पादन और सेवाओं में क्रांति ला दी है। अंतरिक्ष विज्ञान में भारत ने चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशन सफल किए हैं। कृषि में नई तकनीकों से उत्पादन बढ़ा है। परंतु विज्ञान के दुरुपयोग से भी समस्याएँ पैदा हुई हैं। परमाणु हथियार, पर्यावरण प्रदूषण और जैविक युद्ध चिंता का विषय हैं। विज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि विनाश के लिए। विज्ञान ने जो सपने दिखाए थे, वे आज हकीकत बन गए हैं।
8. "स्वच्छ भारत: स्वस्थ भारत" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2022 पैटर्न)
उत्तर:
स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत एक दूसरे के पूरक हैं। स्वच्छता के बिना स्वास्थ्य की कल्पना नहीं की जा सकती। स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई है। खुले में शौच से मुक्ति, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, कचरा प्रबंधन और सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छता से मच्छर जनित बीमारियाँ जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया कम हुई हैं। दूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ जैसे हैजा, टायफाइड और पीलिया पर नियंत्रण हुआ है। स्वच्छ वातावरण में साँस लेने से श्वसन रोग कम होते हैं। स्वच्छ भोजन और पानी से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। स्वच्छता से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। स्वच्छ स्कूल, स्वच्छ अस्पताल और स्वच्छ बाजार समाज के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने आस-पास स्वच्छता बनाए रखे। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत बन सकता है।
स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत एक दूसरे के पूरक हैं। स्वच्छता के बिना स्वास्थ्य की कल्पना नहीं की जा सकती। स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाई है। खुले में शौच से मुक्ति, सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, कचरा प्रबंधन और सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छता से मच्छर जनित बीमारियाँ जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया कम हुई हैं। दूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ जैसे हैजा, टायफाइड और पीलिया पर नियंत्रण हुआ है। स्वच्छ वातावरण में साँस लेने से श्वसन रोग कम होते हैं। स्वच्छ भोजन और पानी से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। स्वच्छता से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। स्वच्छ स्कूल, स्वच्छ अस्पताल और स्वच्छ बाजार समाज के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अपने आस-पास स्वच्छता बनाए रखे। स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत बन सकता है।
9. "साइबर सुरक्षा" विषय पर 100-120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2021 पैटर्न)
उत्तर:
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन गई है। साइबर सुरक्षा का अर्थ है कंप्यूटर, नेटवर्क, प्रोग्राम और डेटा को अनधिकृत पहुँच, हमले या क्षति से बचाना। इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी बढ़े हैं। हैकिंग, फिशिंग, वायरस, रैंसमवेयर और ऑनलाइन धोखाधड़ी आम हो गई हैं। लोगों के बैंक खाते हैक किए जाते हैं, पहचान चोरी होती है और निजी जानकारी लीक होती है। साइबर बुलिंग से बच्चे और युवा प्रभावित हो रहे हैं। साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड, दो-चरणीय प्रमाणीकरण, एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और फायरवॉल जरूरी हैं। व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध ईमेल और लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। सरकार ने साइबर क्राइम सेल बनाई हैं। स्कूलों में साइबर सुरक्षा शिक्षा दी जानी चाहिए। साइबर सुरक्षा हर डिजिटल उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी है। सावधानी ही सुरक्षा है।
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन गई है। साइबर सुरक्षा का अर्थ है कंप्यूटर, नेटवर्क, प्रोग्राम और डेटा को अनधिकृत पहुँच, हमले या क्षति से बचाना। इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी बढ़े हैं। हैकिंग, फिशिंग, वायरस, रैंसमवेयर और ऑनलाइन धोखाधड़ी आम हो गई हैं। लोगों के बैंक खाते हैक किए जाते हैं, पहचान चोरी होती है और निजी जानकारी लीक होती है। साइबर बुलिंग से बच्चे और युवा प्रभावित हो रहे हैं। साइबर सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड, दो-चरणीय प्रमाणीकरण, एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और फायरवॉल जरूरी हैं। व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध ईमेल और लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। सरकार ने साइबर क्राइम सेल बनाई हैं। स्कूलों में साइबर सुरक्षा शिक्षा दी जानी चाहिए। साइबर सुरक्षा हर डिजिटल उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी है। सावधानी ही सुरक्षा है।
10. "विद्यार्थी और अनुशासन" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2020 पैटर्न)
उत्तर:
अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सफलता की कुंजी है। अनुशासन का अर्थ है नियमों और व्यवस्था के अनुसार आचरण करना। एक अनुशासित विद्यार्थी समय पर उठता है, नियमित अध्ययन करता है, स्कूल समय पर पहुँचता है और गृहकार्य पूरा करता है। वह अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करता है। अनुशासन से विद्यार्थी का चरित्र निर्माण होता है। वह आत्मनियंत्रण सीखता है और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करता है। अनुशासनहीन विद्यार्थी समय बर्बाद करता है, पढ़ाई में मन नहीं लगाता और बुरी संगति में पड़ जाता है। स्कूल और कक्षा में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। शोरगुल न करना, कक्षा में ध्यान से पढ़ना, परीक्षा में नकल न करना - ये अनुशासन के उदाहरण हैं। अनुशासन केवल स्कूल तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में होना चाहिए। खेल के मैदान में, सड़क पर, सार्वजनिक स्थानों पर - हर जगह अनुशासन जरूरी है। अनुशासित विद्यार्थी ही भविष्य में अनुशासित नागरिक बनता है।
अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सफलता की कुंजी है। अनुशासन का अर्थ है नियमों और व्यवस्था के अनुसार आचरण करना। एक अनुशासित विद्यार्थी समय पर उठता है, नियमित अध्ययन करता है, स्कूल समय पर पहुँचता है और गृहकार्य पूरा करता है। वह अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करता है। अनुशासन से विद्यार्थी का चरित्र निर्माण होता है। वह आत्मनियंत्रण सीखता है और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करता है। अनुशासनहीन विद्यार्थी समय बर्बाद करता है, पढ़ाई में मन नहीं लगाता और बुरी संगति में पड़ जाता है। स्कूल और कक्षा में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। शोरगुल न करना, कक्षा में ध्यान से पढ़ना, परीक्षा में नकल न करना - ये अनुशासन के उदाहरण हैं। अनुशासन केवल स्कूल तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में होना चाहिए। खेल के मैदान में, सड़क पर, सार्वजनिक स्थानों पर - हर जगह अनुशासन जरूरी है। अनुशासित विद्यार्थी ही भविष्य में अनुशासित नागरिक बनता है।
11. "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर:
"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण अभियान है जिसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीपत, हरियाणा से की थी। इस अभियान का उद्देश्य लिंगानुपात में गिरावट को रोकना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है। भारत में कन्या भ्रूण हत्या एक गंभीर समस्या है। कई परिवार लड़की को बोझ समझते हैं और गर्भ में ही उसकी हत्या कर देते हैं। इससे लिंगानुपात असंतुलित हो गया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बेटी बोझ नहीं बल्कि वरदान है। बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुकन्या समृद्धि योजना, बालिका शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इस अभियान से समाज की मानसिकता बदलने में मदद मिली है। आज बेटियाँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ न केवल नारा है बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है।
"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ" भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण अभियान है जिसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीपत, हरियाणा से की थी। इस अभियान का उद्देश्य लिंगानुपात में गिरावट को रोकना और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है। भारत में कन्या भ्रूण हत्या एक गंभीर समस्या है। कई परिवार लड़की को बोझ समझते हैं और गर्भ में ही उसकी हत्या कर देते हैं। इससे लिंगानुपात असंतुलित हो गया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बेटी बोझ नहीं बल्कि वरदान है। बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सुकन्या समृद्धि योजना, बालिका शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। इस अभियान से समाज की मानसिकता बदलने में मदद मिली है। आज बेटियाँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ न केवल नारा है बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है।
12. "प्रदूषण मुक्त दिवाली" विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2018)
उत्तर:
दिवाली प्रकाश और खुशियों का त्योहार है परंतु पटाखों के अत्यधिक प्रयोग से यह प्रदूषण का त्योहार बन गया है। प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाना आज की आवश्यकता बन गई है। पटाखों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण फैलाता है जिससे साँस की बीमारियाँ बढ़ती हैं। विशेष रूप से अस्थमा और हृदय रोग के मरीजों को परेशानी होती है। तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण होता है जिससे बुजुर्ग, बीमार और पशु-पक्षी पीड़ित होते हैं। पटाखों के कचरे से पर्यावरण दूषित होता है। प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने के लिए हमें कम पटाखे फोड़ने चाहिए। ग्रीन पटाखों का प्रयोग करना चाहिए जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। दीये और रोशनी से घर सजाना चाहिए। पारंपरिक मिठाइयाँ बनानी चाहिए और गरीबों को दान देना चाहिए। स्कूलों में प्रदूषण मुक्त दिवाली के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। असली दिवाली तो प्रकाश की विजय की है, प्रदूषण फैलाने की नहीं। आओ, हम सब प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाएँ।
दिवाली प्रकाश और खुशियों का त्योहार है परंतु पटाखों के अत्यधिक प्रयोग से यह प्रदूषण का त्योहार बन गया है। प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाना आज की आवश्यकता बन गई है। पटाखों से निकलने वाला धुआँ वायु प्रदूषण फैलाता है जिससे साँस की बीमारियाँ बढ़ती हैं। विशेष रूप से अस्थमा और हृदय रोग के मरीजों को परेशानी होती है। तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण होता है जिससे बुजुर्ग, बीमार और पशु-पक्षी पीड़ित होते हैं। पटाखों के कचरे से पर्यावरण दूषित होता है। प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने के लिए हमें कम पटाखे फोड़ने चाहिए। ग्रीन पटाखों का प्रयोग करना चाहिए जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। दीये और रोशनी से घर सजाना चाहिए। पारंपरिक मिठाइयाँ बनानी चाहिए और गरीबों को दान देना चाहिए। स्कूलों में प्रदूषण मुक्त दिवाली के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। असली दिवाली तो प्रकाश की विजय की है, प्रदूषण फैलाने की नहीं। आओ, हम सब प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाएँ।
13. "स्मार्ट सिटी मिशन" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2023)
उत्तर:
स्मार्ट सिटी मिशन भारत सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य देश में 100 स्मार्ट शहरों का विकास करना है। इसकी शुरुआत 25 जून 2015 को हुई थी। स्मार्ट सिटी का अर्थ है ऐसा शहर जो प्रौद्योगिकी का उपयोग करके नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर और सतत विकास प्रदान करे। स्मार्ट शहरों में स्मार्ट परिवहन, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट जल प्रबंधन, स्मार्ट स्वास्थ्य सेवा और स्मार्ट शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। स्मार्ट सिटी में ई-गवर्नेंस, वाई-फाई हॉटस्पॉट, सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट पार्किंग और स्मार्ट बिलिंग की सुविधा होती है। इससे यातायात जाम कम होते हैं, ऊर्जा की बचत होती है, पानी का समुचित उपयोग होता है और अपराध पर नियंत्रण रहता है। स्मार्ट सिटी मिशन से शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा और देश की प्रगति होगी। यह योजना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम है।
स्मार्ट सिटी मिशन भारत सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य देश में 100 स्मार्ट शहरों का विकास करना है। इसकी शुरुआत 25 जून 2015 को हुई थी। स्मार्ट सिटी का अर्थ है ऐसा शहर जो प्रौद्योगिकी का उपयोग करके नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर और सतत विकास प्रदान करे। स्मार्ट शहरों में स्मार्ट परिवहन, स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट जल प्रबंधन, स्मार्ट स्वास्थ्य सेवा और स्मार्ट शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। स्मार्ट सिटी में ई-गवर्नेंस, वाई-फाई हॉटस्पॉट, सीसीटीवी कैमरे, स्मार्ट पार्किंग और स्मार्ट बिलिंग की सुविधा होती है। इससे यातायात जाम कम होते हैं, ऊर्जा की बचत होती है, पानी का समुचित उपयोग होता है और अपराध पर नियंत्रण रहता है। स्मार्ट सिटी मिशन से शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा और देश की प्रगति होगी। यह योजना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम है।
14. "कोरोना महामारी से सीख" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2022 पैटर्न)
उत्तर:
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इसने हमें कई महत्वपूर्ण सीखें दी हैं। सबसे पहले, हमने स्वास्थ्य के महत्व को समझा। पहले हम स्वास्थ्य को हल्के में लेते थे पर अब हम जान गए कि "स्वास्थ्य ही धन है।" स्वच्छता और साफ-सफाई का महत्व समझ आया। बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का उपयोग और मास्क पहनना हमारी आदत बन गया। हमने प्रकृति के महत्व को समझा। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम हुआ और प्रकृति ने सांस ली। हमें एहसास हुआ कि हम प्रकृति का दोहन न करें। परिवार के साथ समय बिताने का महत्व समझा। डिजिटल तकनीक के उपयोग में वृद्धि हुई - ऑनलाइन शिक्षा, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन खरीदारी बढ़ी। हमने सहानुभूति और एकजुटता सीखी। डॉक्टर, नर्स, पुलिस और सफाई कर्मचारियों के योगदान को समझा। आत्मनिर्भर भारत का महत्व समझा। कोरोना ने हमें सिखाया कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है। हमें इन सीखों को भविष्य में भी याद रखना चाहिए।
कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। इसने हमें कई महत्वपूर्ण सीखें दी हैं। सबसे पहले, हमने स्वास्थ्य के महत्व को समझा। पहले हम स्वास्थ्य को हल्के में लेते थे पर अब हम जान गए कि "स्वास्थ्य ही धन है।" स्वच्छता और साफ-सफाई का महत्व समझ आया। बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का उपयोग और मास्क पहनना हमारी आदत बन गया। हमने प्रकृति के महत्व को समझा। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम हुआ और प्रकृति ने सांस ली। हमें एहसास हुआ कि हम प्रकृति का दोहन न करें। परिवार के साथ समय बिताने का महत्व समझा। डिजिटल तकनीक के उपयोग में वृद्धि हुई - ऑनलाइन शिक्षा, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन खरीदारी बढ़ी। हमने सहानुभूति और एकजुटता सीखी। डॉक्टर, नर्स, पुलिस और सफाई कर्मचारियों के योगदान को समझा। आत्मनिर्भर भारत का महत्व समझा। कोरोना ने हमें सिखाया कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है। हमें इन सीखों को भविष्य में भी याद रखना चाहिए।
15. "सौर ऊर्जा: भविष्य की ऊर्जा" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2021)
उत्तर:
सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है क्योंकि यह स्वच्छ, नवीकरणीय और असीमित है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं। सौर पैनलों के माध्यम से इस ऊर्जा को बिजली में बदला जाता है। सौर ऊर्जा के अनेक लाभ हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि इसमें कोई प्रदूषण नहीं होता। यह नवीकरणीय है - सूर्य अनंत काल तक चमकता रहेगा। कोयला, पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा स्रोत सीमित हैं और प्रदूषण फैलाते हैं। सौर ऊर्जा से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बिजली पहुँचाई जा सकती है। सोलर कुकर, सोलर वॉटर हीटर, सोलर स्ट्रीट लाइट और सोलर पंप उपयोगी हैं। भारत में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं क्योंकि यहाँ साल भर धूप रहती है। सरकार ने रूफटॉप सोलर योजना और सोलर पार्क बनाने की योजनाएँ शुरू की हैं। सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से देश आत्मनिर्भर बनेगा और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। सौर ऊर्जा सतत विकास का मार्ग है।
सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है क्योंकि यह स्वच्छ, नवीकरणीय और असीमित है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं। सौर पैनलों के माध्यम से इस ऊर्जा को बिजली में बदला जाता है। सौर ऊर्जा के अनेक लाभ हैं। यह पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि इसमें कोई प्रदूषण नहीं होता। यह नवीकरणीय है - सूर्य अनंत काल तक चमकता रहेगा। कोयला, पेट्रोलियम जैसे ऊर्जा स्रोत सीमित हैं और प्रदूषण फैलाते हैं। सौर ऊर्जा से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बिजली पहुँचाई जा सकती है। सोलर कुकर, सोलर वॉटर हीटर, सोलर स्ट्रीट लाइट और सोलर पंप उपयोगी हैं। भारत में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं क्योंकि यहाँ साल भर धूप रहती है। सरकार ने रूफटॉप सोलर योजना और सोलर पार्क बनाने की योजनाएँ शुरू की हैं। सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से देश आत्मनिर्भर बनेगा और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। सौर ऊर्जा सतत विकास का मार्ग है।
16. "प्लास्टिक मुक्त भारत" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर:
प्लास्टिक प्रदूषण आज एक वैश्विक समस्या बन गई है और प्लास्टिक मुक्त भारत की आवश्यकता है। प्लास्टिक का उपयोग बढ़ने से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। प्लास्टिक न तो सड़ता है और न ही पूरी तरह से नष्ट होता है। यह सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में रहता है। प्लास्टिक कचरा नालियों को जाम कर देता है जिससे बाढ़ आती है। समुद्र में प्लास्टिक मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए खतरा है। जानवर प्लास्टिक खा लेते हैं और मर जाते हैं। प्लास्टिक को जलाने से विषैली गैसें निकलती हैं। प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए हमें सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना होगा। कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करना चाहिए। प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर काँच या स्टील की बोतलें प्रयोग करनी चाहिए। प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाना चाहिए। सरकार ने भी प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने के लिए कानून बनाए हैं। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह प्लास्टिक के उपयोग को कम करे। प्लास्टिक मुक्त भारत स्वच्छ और हरा-भरा भारत होगा।
प्लास्टिक प्रदूषण आज एक वैश्विक समस्या बन गई है और प्लास्टिक मुक्त भारत की आवश्यकता है। प्लास्टिक का उपयोग बढ़ने से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। प्लास्टिक न तो सड़ता है और न ही पूरी तरह से नष्ट होता है। यह सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में रहता है। प्लास्टिक कचरा नालियों को जाम कर देता है जिससे बाढ़ आती है। समुद्र में प्लास्टिक मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए खतरा है। जानवर प्लास्टिक खा लेते हैं और मर जाते हैं। प्लास्टिक को जलाने से विषैली गैसें निकलती हैं। प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए हमें सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना होगा। कपड़े या जूट के थैले का उपयोग करना चाहिए। प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर काँच या स्टील की बोतलें प्रयोग करनी चाहिए। प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाना चाहिए। सरकार ने भी प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने के लिए कानून बनाए हैं। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह प्लास्टिक के उपयोग को कम करे। प्लास्टिक मुक्त भारत स्वच्छ और हरा-भरा भारत होगा।
17. "वन और वन्य जीव संरक्षण" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर:
वन और वन्य जीव पृथ्वी के जीवन का आधार हैं। वन पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, मिट्टी का कटाव रोकते हैं और वर्षा लाने में सहायक होते हैं। वन्य जीव खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं। परंतु मानव गतिविधियों के कारण वनों का विनाश हो रहा है और वन्य जीवों का अस्तित्व खतरे में है। वनों की कटाई से वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। शिकार और तस्करी के कारण बाघ, हाथी, गैंडे जैसे जानवर विलुप्त होने की कगार पर हैं। वन और वन्य जीव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं। वन महोत्सव मनाकर पेड़ लगाए जाते हैं। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम बनाया गया है। हमें वनों की कटाई रोकनी चाहिए, अधिक पेड़ लगाने चाहिए और वन्य जीवों के शिकार का विरोध करना चाहिए। वन और वन्य जीव हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं, इनकी रक्षा हमारा कर्तव्य है।
वन और वन्य जीव पृथ्वी के जीवन का आधार हैं। वन पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं, मिट्टी का कटाव रोकते हैं और वर्षा लाने में सहायक होते हैं। वन्य जीव खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं। परंतु मानव गतिविधियों के कारण वनों का विनाश हो रहा है और वन्य जीवों का अस्तित्व खतरे में है। वनों की कटाई से वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। शिकार और तस्करी के कारण बाघ, हाथी, गैंडे जैसे जानवर विलुप्त होने की कगार पर हैं। वन और वन्य जीव संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं। वन महोत्सव मनाकर पेड़ लगाए जाते हैं। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम बनाया गया है। हमें वनों की कटाई रोकनी चाहिए, अधिक पेड़ लगाने चाहिए और वन्य जीवों के शिकार का विरोध करना चाहिए। वन और वन्य जीव हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं, इनकी रक्षा हमारा कर्तव्य है।
18. "आत्मनिर्भर भारत" विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2023 पैटर्न)
उत्तर:
आत्मनिर्भर भारत का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2020 को कोरोना महामारी के दौरान दिया था। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो और विश्व में अपनी पहचान बनाए। इसका उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वह किसी भी संकट का सामना कर सके। आत्मनिर्भर भारत अभियान के पाँच स्तंभ हैं - अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, जनसांख्यिकी और मांग। इसके तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। "वोकल फॉर लोकल" का नारा दिया गया है जिसका अर्थ है स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत विश्व में एक शक्ति के रूप में उभरेगा। आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक अपना योगदान देगा।
आत्मनिर्भर भारत का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2020 को कोरोना महामारी के दौरान दिया था। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो और विश्व में अपनी पहचान बनाए। इसका उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वह किसी भी संकट का सामना कर सके। आत्मनिर्भर भारत अभियान के पाँच स्तंभ हैं - अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, जनसांख्यिकी और मांग। इसके तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। "वोकल फॉर लोकल" का नारा दिया गया है जिसका अर्थ है स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएँ आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत विश्व में एक शक्ति के रूप में उभरेगा। आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक अपना योगदान देगा।
19. "जलवायु परिवर्तन" विषय पर 100-120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2022)
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है। जलवायु परिवर्तन का अर्थ है पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि होना जिसके कारण मौसम में बदलाव आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण मानव गतिविधियाँ हैं जिनसे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। जीवाश्म ईंधन का जलना, वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और वाहनों से निकलने वाला धुआँ मुख्य कारण हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव गंभीर हैं। ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। मौसम में अप्रत्याशित बदलाव हो रहे हैं - अत्यधिक वर्षा, सूखा, बाढ़ और चक्रवात बढ़ रहे हैं। कृषि पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वैश्विक प्रयास किए जा रहे हैं। पेरिस समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें अधिक पेड़ लगाने चाहिए, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना चाहिए और ऊर्जा का संरक्षण करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है जिसका समाधान सभी देशों को मिलकर करना होगा। हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।
जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है। जलवायु परिवर्तन का अर्थ है पृथ्वी के तापमान में लगातार वृद्धि होना जिसके कारण मौसम में बदलाव आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण मानव गतिविधियाँ हैं जिनसे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। जीवाश्म ईंधन का जलना, वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और वाहनों से निकलने वाला धुआँ मुख्य कारण हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव गंभीर हैं। ध्रुवों की बर्फ पिघल रही है जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। मौसम में अप्रत्याशित बदलाव हो रहे हैं - अत्यधिक वर्षा, सूखा, बाढ़ और चक्रवात बढ़ रहे हैं। कृषि पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वैश्विक प्रयास किए जा रहे हैं। पेरिस समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें अधिक पेड़ लगाने चाहिए, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना चाहिए और ऊर्जा का संरक्षण करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक समस्या है जिसका समाधान सभी देशों को मिलकर करना होगा। हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।
20. "शिक्षा में नैतिक मूल्यों का महत्व" विषय पर अनुच्छेद लिखिए। (CBSE 2021 पैटर्न)
उत्तर:
आज की शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। नैतिक मूल्यों से तात्पर्य है - सत्य बोलना, ईमानदारी, अनुशासन, करुणा, सम्मान और दया जैसे गुण। वर्तमान समय में शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी प्राप्त करने तक सीमित हो गई है। विद्यार्थी पढ़ाई में तो अव्वल आते हैं पर नैतिक मूल्यों में पिछड़ जाते हैं। नैतिक शिक्षा के अभाव में समाज में अपराध, भ्रष्टाचार और अनैतिकता बढ़ रही है। शिक्षा में नैतिक मूल्यों का समावेश करने से विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होता है। वह केवल एक अच्छा पेशेवर ही नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनता है। नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण होता है और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। स्कूलों में नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। कहानियों, नाटकों और गतिविधियों के माध्यम से नैतिक मूल्य सिखाए जा सकते हैं। शिक्षक और माता-पिता को भी आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। शिक्षा जब नैतिक मूल्यों से युक्त होगी तभी वह सही मायने में सार्थक होगी। ज्ञान के साथ संस्कार जरूरी हैं।
आज की शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। नैतिक मूल्यों से तात्पर्य है - सत्य बोलना, ईमानदारी, अनुशासन, करुणा, सम्मान और दया जैसे गुण। वर्तमान समय में शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी प्राप्त करने तक सीमित हो गई है। विद्यार्थी पढ़ाई में तो अव्वल आते हैं पर नैतिक मूल्यों में पिछड़ जाते हैं। नैतिक शिक्षा के अभाव में समाज में अपराध, भ्रष्टाचार और अनैतिकता बढ़ रही है। शिक्षा में नैतिक मूल्यों का समावेश करने से विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होता है। वह केवल एक अच्छा पेशेवर ही नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनता है। नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण होता है और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। स्कूलों में नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए। कहानियों, नाटकों और गतिविधियों के माध्यम से नैतिक मूल्य सिखाए जा सकते हैं। शिक्षक और माता-पिता को भी आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। शिक्षा जब नैतिक मूल्यों से युक्त होगी तभी वह सही मायने में सार्थक होगी। ज्ञान के साथ संस्कार जरूरी हैं।