📌 संवाद लेखन ● कक्षा 6-8 ● CBSE बोर्ड पैटर्न
यह वर्कशीट कक्षा 6-8 के विद्यार्थियों के लिए संवाद लेखन के 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आधारित है। सभी प्रश्न CBSE पाठ्यक्रम एवं NCERT दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं। प्रत्येक संवाद में पात्रों के नाम एवं उनके कथन स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। पहले स्वयं लिखें, फिर उत्तर जाँचें।
💬 संवाद लेखन — 20 प्रश्न
परीक्षा की तैयारी
रोहन: नमस्ते आकाश! कैसे हो?
आकाश: मैं ठीक हूँ, बस परीक्षा की तैयारी में लगा हूँ। तुम्हारी तैयारी कैसी चल रही है?
रोहन: मैं भी पढ़ाई में व्यस्त हूँ। गणित के सवालों को हल करने में थोड़ी परेशानी हो रही है।
आकाश: गणित में तो नियमित अभ्यास बहुत जरूरी है। मैं रोज कम से कम 10 सवाल हल करता हूँ।
रोहन: यह सही है। तुम विज्ञान की तैयारी कैसे कर रहे हो?
आकाश: विज्ञान में मैं पहले पूरा पाठ पढ़ता हूँ, फिर उसके आरेख बनाकर समझता हूँ। इससे याद जल्दी होता है।
रोहन: अच्छा विचार है! मैं भी यह तरीका अपनाऊँगा। हिंदी में तुम क्या करते हो?
आकाश: हिंदी में मैं प्रतिदिन एक पाठ पढ़ता हूँ और कठिन शब्दों के अर्थ याद करता हूँ। व्याकरण के नियमों को भी रोज दोहराता हूँ।
रोहन: तुम्हारी पढ़ाई का तरीका बहुत अच्छा है। मुझे भी अब नियमित रूप से पढ़ना चाहिए।
आकाश: हाँ, सबसे जरूरी है समय सारणी बनाकर पढ़ना। मैंने सुबह 1 घंटा और शाम 2 घंटे पढ़ने का समय तय किया है।
रोहन: मैं भी कल से समय सारणी बनाकर पढ़ूँगा। आज शाम को साथ में पढ़ेंगे?
आकाश: हाँ, जरूर! शाम 4 बजे मेरे घर चले आओ। हम साथ में गणित के सवाल हल करेंगे।
रोहन: धन्यवाद! मैं जरूर आऊँगा। अच्छी तैयारी करके हम दोनों अच्छे अंक लाएँगे।
आकाश: हाँ, मेहनत का फल मीठा होता है। मिलते हैं शाम को!
रोहन: मिलते हैं, नमस्ते!
पुस्तक की दुकान पर
ग्राहक (अंकित): नमस्ते! क्या मुझे कक्षा 7 की हिंदी की पुस्तक मिल सकती है?
विक्रेता: जी नमस्ते! हाँ, मिलेगी। कौन-सा प्रकाशन चाहिए?
अंकित: एनसीईआरटी की पुस्तक चाहिए।
विक्रेता: जी, यह लीजिए। नई प्रति है, बिल्कुल साफ-सुथरी।
अंकित: इसकी क्या कीमत है?
विक्रेता: इसका मूल्य 120 रुपये है।
अंकित: क्या इस पर कोई छूट मिलेगी?
विक्रेता: जी, आप 10 प्रतिशत की छूट ले सकते हैं। 108 रुपये देने होंगे।
अंकित: ठीक है, मैं ले लूँगा। साथ में विज्ञान की कार्य-पुस्तिका भी चाहिए।
विक्रेता: कक्षा 7 के लिए ही?
अंकित: हाँ जी।
विक्रेता: यह लीजिए, यह 80 रुपये की है। दोनों मिलाकर 188 रुपये हुए, छूट के बाद 170 रुपये देने होंगे।
अंकित: बहुत अच्छा, मैं ले रहा हूँ। यह लीजिए 200 रुपये।
विक्रेता: जी, यह लीजिए 30 रुपये वापस। और यह रही आपकी पुस्तकें।
अंकित: धन्यवाद! अगली बार फिर आऊँगा।
विक्रेता: जी, आपका स्वागत है। फिर आइएगा। नमस्ते!
मोबाइल का बढ़ता उपयोग
पिता जी: बेटा आयुष, आजकल तुम बहुत देर तक मोबाइल पर गेम खेलते हो।
आयुष: पिता जी, मैं तो बस थोड़ी देर खेलता हूँ।
माता जी: थोड़ी देर? कल तो तुम 3 घंटे मोबाइल चलाते रहे। तुम्हारी पढ़ाई भी तो करनी है।
आयुष: माँ, मैं पढ़ाई भी तो पूरी कर लेता हूँ ना।
पिता जी: बेटा, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग तुम्हारी आँखों के लिए हानिकारक है। डॉक्टर भी कहते हैं कि इससे आँखें कमजोर होती हैं।
आयुष: लेकिन पिता जी, मेरे सारे दोस्त तो खेलते हैं।
माता जी: बेटा, जो दूसरे कर रहे हैं, वह हमेशा सही नहीं होता। तुम्हें अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।
पिता जी: और एक बात, मोबाइल पर समय बिताने की बजाय बाहर खेलने जाओ। इससे तुम्हारा शारीरिक विकास भी होगा।
आयुष: पर पिता जी, मैदान में जाने के लिए दोस्त भी तो चाहिए।
माता जी: तुम रोहन, विवेक और अंशुल को साथ लेकर जा सकते हो। कल से शाम को बैडमिंटन खेलो।
पिता जी: हाँ बेटा, हम तुम्हारे लिए अच्छी बैडमिंटन किट ला देंगे।
आयुष: ठीक है पिता जी, मैं कल से शाम को बैडमिंटन खेलूँगा और मोबाइल भी कम चलाऊँगा।
माता जी: शाबाश बेटा! यही तो हम चाहते थे।
पिता जी: और हाँ, पढ़ाई के बीच में मोबाइल मत चलाया करो। इससे ध्यान भंग होता है।
आयुष: जी पिता जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मैं आपकी बात मानूँगा।
विद्यालय में विलंब
शिक्षक: अंशुल, आज फिर तुम देरी से आए हो। यह इस सप्ताह की तीसरी बार है।
अंशुल: मुझे क्षमा करें सर, आज बस थोड़ी देर हो गई।
शिक्षक: कारण क्या है? रोज देरी से आने का?
अंशुल: सर, मुझे सुबह उठने में थोड़ी परेशानी होती है।
शिक्षक: देखो अंशुल, समय की पाबंदी बहुत जरूरी है। यह तुम्हारे जीवन में सफलता का पहला मंत्र है।
अंशुल: जी सर, मैं समझ गया। मैं कल से समय पर आने की कोशिश करूँगा।
शिक्षक: कोशिश नहीं, तुम्हें यह करना ही होगा। बताओ, तुम रात को कितने बजे सोते हो?
अंशुल: सर, मैं रात को 10:30 बजे सो जाता हूँ, पर सुबह अलार्म बजने पर नींद नहीं खुलती।
शिक्षक: ऐसा करो, रात को 10 बजे तक सो जाया करो। 8 घंटे की नींद पर्याप्त होती है। सुबह 6 बजे उठने की आदत डालो।
अंशुल: जी सर, मैं आज से ही यह आदत डालूँगा।
शिक्षक: और हाँ, रात को मोबाइल मत चलाया करो। इससे नींद देर से आती है।
अंशुल: जी सर, मैं मोबाइल भी कम चलाऊँगा।
शिक्षक: अच्छा, आज तो मैं तुम्हें क्षमा करता हूँ। लेकिन अब से नियमित और समय पर आना।
अंशुल: धन्यवाद सर। मैं आपको निराश नहीं करूँगा।
शिक्षक: शाबाश! अब जाओ, कक्षा में बैठो और पढ़ाई पर ध्यान दो।
घर के कामों में सहयोग
अंजलि (बहन): भैया, आज तुमने अपना कमरा नहीं सँभाला। सारा सामान बिखरा पड़ा है।
आयुष (भाई): अभी थोड़ी देर में सँभाल लूँगा। पहले यह गेम खत्म कर लूँ।
अंजलि: तुम हर बार यही कहते हो। कल से तुमने अपना कमरा नहीं सँभाला।
आयुष: तू ही क्यों नहीं सँभाल देती? तू तो हर समय घर पर रहती है।
अंजलि: यह तुम्हारा कमरा है, तुम्हें ही सँभालना चाहिए। और मैं भी तो अपना कमरा और दूसरे काम करती हूँ।
आयुष: ठीक है, मैं अभी सँभाल लेता हूँ। (कमरा सँभालते हुए)
अंजलि: देखो भैया, माँ दिनभर कितने काम करती हैं। हमें भी उनकी मदद करनी चाहिए।
आयुष: हाँ, तू सही कह रही है। आज से मैं रोज अपना कमरा खुद सँभालूँगा।
अंजलि: और सुबह अपनी बिस्तर भी तह करके रखा करो।
आयुष: ठीक है। और सुन, बर्तन उठाने में भी मैं तुम्हारी मदद करूँगा।
अंजलि: सच में? यह तो बहुत अच्छी बात है। माँ को बहुत खुशी होगी।
आयुष: हाँ, अब मैं समझ गया कि घर के कामों में सबको साथ मिलकर मदद करनी चाहिए।
अंजलि: शाबाश भैया! चलो, आज शाम को साथ में माँ के लिए चाय बनाते हैं।
आयुष: हाँ जरूर, मगर मुझे सिखाना पड़ेगा।
अंजलि: बिल्कुल, मैं सिखा दूँगी।
चिकित्सालय में
डॉक्टर: आइए, बैठिए। क्या समस्या है?
रोगी (सुमित): सर, मुझे दो दिन से तेज बुखार है और सिर में दर्द रहता है।
डॉक्टर: ठीक है, पहले तापमान चेक करते हैं। (थर्मामीटर लगाते हुए) हाँ, 102 डिग्री है। खांसी या जुकाम तो नहीं है?
सुमित: जी, हल्की खांसी भी है और गला भी खराब है।
डॉक्टर: क्या आपने कोई दवाई ली है?
सुमित: जी, कल रात पड़ोस की दुकान से पेरासिटामोल लेकर खा ली थी।
डॉक्टर: देखिए, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाई नहीं लेनी चाहिए। यह नुकसान कर सकती है।
सुमित: जी, अब से ध्यान रखूँगा।
डॉक्टर: (स्टेथोस्कोप से चेक करते हुए) फेफड़े साफ हैं, चिंता की बात नहीं है। वायरल इन्फेक्शन है।
सुमित: क्या यह ठीक हो जाएगा डॉक्टर साहब?
डॉक्टर: हाँ, बिल्कुल। मैं कुछ दवाइयाँ लिख देता हूँ। यह एंटीबायोटिक दिन में दो बार लेनी है, और यह बुखार की गोली जरूरत पर लेनी है।
सुमित: ठीक है डॉक्टर साहब। और क्या सावधानी रखनी होगी?
डॉक्टर: खूब पानी पिएँ, गुनगुने पानी से गरारे करें, और पूरा आराम करें। 2-3 दिन में आराम मिल जाएगा।
सुमित: धन्यवाद डॉक्टर साहब। फीस कितनी हुई?
डॉक्टर: 300 रुपये। जल्दी स्वस्थ हों।
बस स्टैंड पर
यात्री 1 (राजेश): क्या आपको पता है देहरादून की बस कितने बजे आती है?
यात्री 2 (सुरेश): सुबह 9 बजे आनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं आई।
राजेश: मैं भी पिछले एक घंटे से इंतजार कर रहा हूँ। आप कहाँ जाएँगे?
सुरेश: मुझे हरिद्वार जाना है। वहाँ मेरे भतीजे की शादी है।
राजेश: अच्छा! बधाई हो। मैं देहरादून अपने नाना-नानी के घर जा रहा हूँ।
सुरेश: कितने दिनों की छुट्टी है?
राजेश: एक सप्ताह की। गर्मी की छुट्टियाँ हैं, तो नाना-नानी से मिलने जा रहा हूँ।
सुरेश: बहुत अच्छा। बड़ों का आशीर्वाद बहुत जरूरी है।
राजेश: जी, और वहाँ का प्राकृतिक नजारा भी बहुत सुंदर है।
सुरेश: देर क्यों हो रही है बस को? कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं?
राजेश: शायद बारिश के कारण देरी हो रही है। कल भी ऐसा ही हुआ था।
सुरेश: (बस आती देख) लो, वह आ गई! बस आ गई।
राजेश: हाँ, यही है। चलिए, चढ़ते हैं।
सुरेश: आप पहले चढ़िए, मैं सामान संभालता हूँ।
राजेश: धन्यवाद! यात्रा शुभ हो।
सुरेश: आपको भी शुभ यात्रा!
कॉलोनी की सफाई
श्री शर्मा: नमस्ते श्री गुप्ता जी! कैसे हैं आप?
श्री गुप्ता: मैं ठीक हूँ, बस कॉलोनी की गंदगी देखकर परेशान हूँ।
श्री शर्मा: हाँ, पिछले कई दिनों से कूड़ा नहीं उठा है। बहुत बदबू हो रही है।
श्री गुप्ता: और देखिए, सामने वाले घर ने तो सड़क पर ही कूड़ा डाल दिया है।
श्री शर्मा: हमने नगर निगम में कई बार फोन किया, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
श्री गुप्ता: ऐसा करते हैं, सब पड़ोसी मिलकर एक शिकायत पत्र लिखते हैं।
श्री शर्मा: यह अच्छा विचार है। सबके हस्ताक्षर लेकर नगर निगम अधिकारी को देंगे।
श्री गुप्ता: और हमें अपनी कॉलोनी में भी जागरूकता फैलानी होगी।
श्री शर्मा: हाँ, लोगों को समझाना होगा कि कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही डालें।
श्री गुप्ता: कल शाम 7 बजे सब पड़ोसियों की बैठक बुलाते हैं।
श्री शर्मा: ठीक है, मैं सबको सूचित कर देता हूँ।
श्री गुप्ता: सफाई हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, केवल नगर निगम की नहीं।
श्री शर्मा: बिल्कुल सही कहा। मिलकर प्रयास करेंगे तो समस्या जरूर हल होगी।
श्री गुप्ता: तो कल शाम 7 बजे मेरे घर पर। नमस्ते!
श्री शर्मा: जी, नमस्ते!
पुस्तकालय में
छात्र (अर्पित): नमस्ते सर! क्या मुझे 'पंचतंत्र की कहानियाँ' पुस्तक मिल सकती है?
पुस्तकालयाध्यक्ष: हाँ बेटा, यह रही पुस्तक। लेकिन यह तो हिंदी की है, तुम्हें अंग्रेजी में चाहिए?
अर्पित: जी सर, हिंदी में ही चाहिए। मुझे हिंदी की कहानियाँ पढ़ना बहुत पसंद है।
पुस्तकालयाध्यक्ष: बहुत अच्छी बात है। कितने दिनों के लिए चाहिए?
अर्पित: 15 दिनों के लिए चाहिए सर।
पुस्तकालयाध्यक्ष: ठीक है, पहले यह फॉर्म भरो। अपना नाम, कक्षा और अनुक्रमांक लिखो।
अर्पित: (फॉर्म भरते हुए) जी सर, हो गया।
पुस्तकालयाध्यक्ष: यह पुस्तक 15 दिन बाद 5 दिसंबर को जमा करानी होगी। ध्यान रखना, पुस्तक को साफ रखना और पन्ने नहीं मोड़ने।
अर्पित: जी सर, मैं बहुत ध्यान से रखूँगा।
पुस्तकालयाध्यक्ष: और हाँ, अगर देरी से जमा कराओगे तो 5 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगेगा।
अर्पित: जी सर, मैं समय पर जमा करा दूँगा। क्या मैं एक और पुस्तक ले सकता हूँ?
पुस्तकालयाध्यक्ष: हाँ, एक सदस्य दो पुस्तकें ले सकता है। और कौन-सी पुस्तक चाहिए?
अर्पित: विज्ञान की कोई रोचक पुस्तक हो तो दे दीजिए।
पुस्तकालयाध्यक्ष: यह लो, 'विज्ञान के चमत्कार' बहुत अच्छी पुस्तक है।
अर्पित: धन्यवाद सर! मैं यह दोनों पुस्तकें पढ़कर अगले सप्ताह जमा करा दूँगा।
पुस्तकालयाध्यक्ष: शाबाश! पढ़ते रहो, ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है।
सब्जी मंडी में
ग्राहक (सीमा): भैया, आलू कैसे दे रहे हो?
दुकानदार: दीदी, 30 रुपये किलो है। बहुत अच्छी क्वालिटी है।
सीमा: 30 रुपये! कल तो 25 रुपये था। इतना महँगा क्यों है?
दुकानदार: दीदी, बारिश के कारण सप्लाई कम है, इसलिए भाव थोड़ा बढ़ गया है। देखो, कितने साफ-सुथरे हैं आलू।
सीमा: ठीक है, 2 किलो दे दो। टमाटर क्या भाव है?
दुकानदार: टमाटर 40 रुपये किलो है।
सीमा: 40 रुपये! बहुत ज्यादा है। 35 रुपये में दो?
दुकानदार: नहीं दीदी, 40 से कम नहीं होगा। हमारा भी 35 में पड़ रहा है।
सीमा: अच्छा, आधा किलो दे दो। प्याज़ कितने का है?
दुकानदार: प्याज़ 25 रुपये किलो है। बहुत मीठा है।
सीमा: 1 किलो प्याज़ दे दो। और हरी धनिया कैसी है?
दुकानदार: देखो दीदी, बहुत ताजी है। सुबह ही मंडी से लाया हूँ। 10 रुपये का गुच्छा है।
सीमा: ठीक है, एक गुच्छा दे दो। सब मिलाकर कितने हुए?
दुकानदार: 2 किलो आलू 60, आधा टमाटर 20, 1 किलो प्याज़ 25, और धनिया 10 — कुल 115 रुपये हुए।
सीमा: यह लो 100 रुपये, बाकी 15 कल दे दूँगी।
दुकानदार: ठीक है दीदी, कल ले आइएगा।
सीमा: हाँ, ले आऊँगी। धन्यवाद!
जन्मदिन की बधाई
रिया: हैप्पी बर्थडे नेहा! तुम्हें बहुत-बहुत बधाई!
नेहा: थैंक यू, रिया! मुझे याद है तुम्हें कि आज मेरा जन्मदिन है।
रिया: हाँ, भूल कैसे सकती हूँ! कल ही मैंने कैलेंडर में देखा था। यह लो, तुम्हारे लिए छोटा-सा गिफ्ट।
नेहा: अरे, यह तो वही डायरी है जो मैं पिछले महीने दुकान में देख रही थी! तुम्हें याद है?
रिया: हाँ, तुमने कहा था कि तुम्हें यह डायरी बहुत पसंद आई है। तो सोचा, जन्मदिन पर दे दूँ।
नेहा: थैंक यू सो मच, रिया! तुम सच में बहुत अच्छी दोस्त हो।
रिया: अरे, यह तो मेरा फर्ज है! तो बता, इस जन्मदिन पर कोई खास प्लान है?
नेहा: हाँ, शाम को 7 बजे घर पर छोटी-सी पार्टी रखी है। तुम भी आओ ना।
रिया: जरूर आऊँगी! क्या-क्या तैयारी है?
नेहा: माँ ने केक बनाया है, और पिज्जा भी मँगवाया है। थोड़े गेम्स भी होंगे।
रिया: वाह! मस्त है। अंजलि और प्रिया भी आएँगी?
नेहा: हाँ, वे भी आ रही हैं। सब दोस्त मिलकर बहुत मजा करेंगे।
रिया: बहुत अच्छा! तो फिर मैं शाम 7 बजे तक आ जाती हूँ।
नेहा: हाँ, जरूर आना। और एक बार फिर थैंक यू सो मच।
रिया: वेलकम! शाम को मिलते हैं।
रेलवे स्टेशन पर पूछताछ
यात्री: नमस्ते भैया! क्या मैं एक पूछताछ कर सकता हूँ?
सूचना कर्मचारी: जी, कहिए। क्या जानना है?
यात्री: मुझे जयपुर जाना है। अगली ट्रेन कब मिलेगी?
सूचना कर्मचारी: जी, एक मिनट। (कंप्यूटर देखते हुए) जयपुर के लिए दो ट्रेनें हैं — एक सुपरफास्ट 2 बजे और दूसरी एक्सप्रेस 4:30 बजे।
यात्री: 2 बजे वाली ट्रेन के लिए टिकट मिलेगा?
सूचना कर्मचारी: जी, देखता हूँ। सुपरफास्ट में वेटिंग 25 है। एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट मिल रहा है।
यात्री: तो मैं एक्सप्रेस ही ले लूँगा। किराया कितना है?
सूचना कर्मचारी: साधारण श्रेणी का 250 रुपये और वातानुकूलित श्रेणी का 800 रुपये है।
यात्री: साधारण श्रेणी का ही दे दीजिए। टिकट कहाँ मिलेगा?
सूचना कर्मचारी: टिकट विंडो नंबर 5 पर मिलेगा। या फिर ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं।
यात्री: धन्यवाद! प्लेटफॉर्म कौन-सा है?
सूचना कर्मचारी: प्लेटफॉर्म नंबर 3 से जाएगी। अभी 1 घंटे बाद आएगी।
यात्री: बहुत-बहुत धन्यवाद।
सूचना कर्मचारी: जी, आपका स्वागत है। यात्रा शुभ हो।
पालतू कुत्ता पालने की जिद
आर्यन: माँ, मुझे एक पालतू कुत्ता चाहिए। रोहन के घर भी नया पप्पी आया है।
माँ: बेटा, पालतू जानवर पालना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। क्या तुम उसे संभाल पाओगे?
आर्यन: हाँ माँ, मैं पूरी जिम्मेदारी से रखूँगा। उसे रोज खाना दूँगा, घुमाने ले जाऊँगा।
माँ: पर उसे नहलाना, उसकी सफाई रखना, टीकाकरण करवाना — ये सब बहुत काम है।
आर्यन: मैं सब करूँगा माँ। प्लीज़... प्लीज़... एक बार मान जाओ ना।
माँ: और तुम्हारी पढ़ाई? रोज 2-3 घंटे तो कुत्ते को ही देना होगा।
आर्यन: मैं सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई कर लूँगा। शाम को उसे घुमाने ले जाऊँगा।
माँ: और एक बात, कुत्ते का खर्चा भी तो होता है — खाना, दवाई, डॉक्टर, सामान।
आर्यन: मैं अपने पॉकेट मनी से उसका खर्च उठा लूँगा। और पिता जी से भी मदद ले लूँगा।
माँ: ठीक है, पहले तुम एक हफ्ते पड़ोसी के कुत्ते की देखभाल करके दिखाओ। फिर हम विचार करेंगे।
आर्यन: सच में माँ? थैंक यू! मैं बहुत अच्छे से देखभाल करूँगा।
माँ: हाँ, पहले यह ट्रायल पीरियड पूरा करो, फिर हम तुम्हारे लिए पप्पी ला देंगे।
आर्यन: आई लव यू माँ! तुम दुनिया की सबसे अच्छी माँ हो!
खेलकूद प्रतियोगिता
अजय: सुन विवेक, अगले सप्ताह विद्यालय की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता है। तुम किसमें भाग ले रहे हो?
विवेक: मैं 100 मीटर दौड़ में भाग लेना चाहता हूँ। पर अभी नामांकन नहीं किया है।
अजय: जल्दी करो, कल आखिरी दिन है। मैंने तो लंबी कूद और गोला फेंक में नाम लिखवा दिया है।
विवेक: वाह! तुम तो बहुत अच्छे खिलाड़ी हो। अभ्यास कर लिया?
अजय: हाँ, शाम को रोज मैदान में जाता हूँ। तुम भी आ जाया करो, साथ में अभ्यास करेंगे।
विवेक: हाँ, आज से मैं भी आने लगूँगा। पिछली बार मैं 100 मीटर में दूसरे स्थान पर रहा था।
अजय: इस बार तो पहला स्थान लाना है। मेहनत करनी होगी।
विवेक: हाँ, कोशिश करूँगा। तुम्हारा लक्ष्य क्या है?
अजय: मैं लंबी कूद में विद्यालय रिकॉर्ड तोड़ना चाहता हूँ। 5.2 मीटर का रिकॉर्ड है।
विवेक: वाह! मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाऊँगा। शाम 5 बजे चलते हैं मैदान?
अजय: हाँ, जरूर। खेल शिक्षक सर भी वहीं मिलेंगे, वे तकनीक बताएँगे।
विवेक: बहुत अच्छा। आज से पूरी तैयारी शुरू।
अजय: शाबाश! इस बार हमारा विद्यालय जिला स्तर पर भी जाएगा।
होटल में भोजन
वेटर: नमस्ते सर! क्या ऑर्डर लूँ?
ग्राहक: हाँ, पहले मेन्यू कार्ड दीजिए।
वेटर: जी, यह लीजिए। आज स्पेशल पनीर-बटर मसाला और तंदूरी रोटी है।
ग्राहक: अच्छा, एक पनीर-बटर मसाला और दो तंदूरी रोटी लाओ।
वेटर: जी, और कुछ?
ग्राहक: सलाद फ्री है ना?
वेटर: जी सर, सलाद और पापड़ फ्री है।
ग्राहक: अच्छा, तो सलाद साथ में भेज दो। और पानी लाना।
वेटर: जी सर, पानी अभी लाता हूँ। खाना 10 मिनट में तैयार हो जाएगा।
ग्राहक: ठीक है। (थोड़ी देर बाद)
वेटर: सर, खाना लगा दूँ?
ग्राहक: हाँ, प्लेट भी दे दो। (खाना खाते हुए) पनीर अच्छा बना है, मसाला भी बढ़िया है।
वेटर: थैंक यू सर। एक और रोटी लाऊँ?
ग्राहक: हाँ, एक और ले लो। (खाना खत्म करने के बाद) बिल लेकर आओ।
वेटर: जी, कुल 350 रुपये हुए।
ग्राहक: यह लो 400 रुपये। 50 रुपये तुम रख लो।
वेटर: थैंक यू सर! फिर आइएगा।
ग्राहक: हाँ, अगली बार परिवार के साथ आऊँगा।
पर्यावरण संरक्षण
शुभम: सुन निकिता, आजकल बहुत गर्मी बढ़ रही है।
निकिता: हाँ, पर्यावरण प्रदूषण के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है।
शुभम: वाकई? मुझे तो पता भी नहीं था। और क्या-क्या हो रहा है?
निकिता: बहुत कुछ। पेड़ काटे जा रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, हवा जहरीली हो रही है।
शुभम: यह तो बहुत बुरा है। हम कुछ कर सकते हैं?
निकिता: हाँ, बिल्कुल। छोटे-छोटे प्रयासों से हम बहुत बदलाव ला सकते हैं।
शुभम: जैसे?
निकिता: जैसे — प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करो, पेड़ लगाओ, पानी बचाओ, बिजली बचाओ।
शुभम: मैंने तो आज तक सोचा भी नहीं था। कल से मैं भी प्लास्टिक बैग नहीं लूँगा।
निकिता: शाबाश! और देख, हम अपने जन्मदिन पर एक-एक पौधा लगाएँगे।
शुभम: यह तो बहुत अच्छा विचार है! इस रविवार को हम विद्यालय में पौधारोपण अभियान चला सकते हैं।
निकिता: हाँ, प्रधानाचार्य सर से बात करते हैं। सब मिलकर अभियान चलाएँगे।
शुभम: अब मैं समझ गया — धरती बचेगी तो हम बचेंगे।
डाकघर में मनीऑर्डर
ग्राहक: नमस्ते! मुझे गाँव पैसे भेजने हैं।
कर्मचारी: जी, कैसे भेजने हैं — मनीऑर्डर, आईपीओ या डाकघर बचत खाते से?
ग्राहक: मनीऑर्डर से भेजने हैं। कितना चार्ज लगता है?
कर्मचारी: 500 रुपये तक 10 रुपये, 1000 रुपये तक 15 रुपये, उससे अधिक पर 20 रुपये लगते हैं।
ग्राहक: मुझे 2000 रुपये भेजने हैं। फॉर्म दीजिए।
कर्मचारी: जी, यह लीजिए। इसमें प्रेषक और पाने वाले का पूरा नाम, पता, पिन कोड सही-सही भरिए।
ग्राहक: (फॉर्म भरते हुए) यह लीजिए, फॉर्म भर दिया।
कर्मचारी: जी, 2000 रुपये + 20 रुपये शुल्क = 2020 रुपये हुए।
ग्राहक: यह लीजिए पैसे।
कर्मचारी: धन्यवाद। यह रसीद संभाल लीजिए। 4-5 दिन में पैसे पहुँच जाएँगे।
ग्राहक: धन्यवाद।
दुर्घटना में सहायता
राहुल: देखो, सामने एक व्यक्ति गिर गया! जल्दी चलो।
प्रवीण: हाँ, बाइक फिसल गई लगती है। बुजुर्ग हैं, खड़े होने में परेशान हो रहे हैं।
राहुल: चाचा जी, आपको चोट तो नहीं लगी?
घायल व्यक्ति: बेटा, पैर में थोड़ा दर्द है, घुटना छिल गया है।
प्रवीण: आप थोड़ा इस पेड़ के नीचे बैठिए। पानी पीजिए।
राहुल: चाचा, आप कहाँ रहते हो? घर फोन कर दूँ?
घायल व्यक्ति: मैं सामने ही कॉलोनी में रहता हूँ। बेटा, पास में ही डॉक्टर का क्लिनिक है, वहाँ चलोगे?
प्रवीण: चलिए, मैं आपको ले चलता हूँ। राहुल, तुम बाइक सँभालो।
राहुल: ठीक है, मैं बाइक स्टैंड पर खड़ी कर देता हूँ। (क्लिनिक पहुँचकर)
डॉक्टर: आइए, क्या हुआ?
घायल व्यक्ति: डॉक्टर साहब, सड़क पर फिसल गया।
डॉक्टर: (घाव साफ करते हुए) कोई बड़ी चोट नहीं है। पट्टी कर देता हूँ। 2-3 दिन आराम करें।
घायल व्यक्ति: बेटा, तुम लोगों का बहुत-बहुत शुक्रिया। नाम क्या है तुम्हारा?
राहुल: मैं राहुल और यह मेरा दोस्त प्रवीण है।
घायल व्यक्ति: भगवान तुम दोनों को खुश रखे। आज तुम नहीं होते तो पता नहीं क्या होता।
बस में टिकट
कंडक्टर: टिकट ले लो, टिकट ले लो... कहाँ जाना है सर?
यात्री: राजेंद्र नगर तक का टिकट दीजिए।
कंडक्टर: राजेंद्र नगर 15 रुपये है। कितने लोग हैं?
यात्री: दो लोग हैं। यह लीजिए 50 रुपये।
कंडक्टर: (टिकट काटते हुए) यह लीजिए आपके टिकट। और बाकी 20 रुपये।
यात्री: भैया, नंबर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है क्या? मैं तो रोज इसी बस से जाता हूँ।
कंडक्टर: जी, इस महीने की नई लिस्ट आई है। आप अपना नाम ड्राइवर सर को बता दीजिए, कल से नंबर लग जाएगा।
यात्री: ठीक है। अगले स्टॉप पर उतरना है, बता देना।
कंडक्टर: जी, अगला स्टॉप राजेंद्र नगर है। आप तैयार हो जाइए।
यात्री: धन्यवाद।
दीपावली की तैयारी
राधिका: सुन रिया, दीपावली में अब केवल 10 दिन रह गए हैं। तुमने कोई तैयारी शुरू की?
रिया: हाँ, कल ही घर की सफाई शुरू कर दी है। माँ ने नए पर्दे भी लिए हैं।
राधिका: वाह! हमने भी आज दीये और रंगोली के रंग खरीदे। इस बार घर पर ही रंगोली बनाऊँगी।
रिया: मैं भी कल से रंगोली प्रैक्टिस शुरू कर दूँगी। पिछली बार तो तुम्हारी रंगोली बहुत सुंदर बनी थी।
राधिका: थैंक्स! इस बार कोई नया डिजाइन ट्राई करूँगी। तुमने मिठाई के बारे में सोचा?
रिया: हाँ, माँ ने घर पर ही गुलाब जामुन और चावल की खीर बनाने की सोची है। तुम्हारे यहाँ?
राधिका: हम भी घर पर ही मिठाई बनाएँगे — बर्फी और काजू कतली।
रिया: पटाखों के बारे में क्या सोचा है इस बार?
राधिका: पिता जी ने कहा है कि इस बार सिर्फ दीये जलाएँगे, पटाखे नहीं। प्रदूषण नहीं फैलाना।
रिया: हाँ, मैंने भी यही सोचा है। चलो हम लोग मिलकर पूरी कॉलोनी में दीये जलाते हैं।
राधिका: बहुत अच्छा विचार है! इस बार दीपावली हरी दीपावली मनाएँगे।
रिया: तो फिर यही तय हुआ — पर्यावरण बचाओ, दीपावली मनाओ!
राधिका: बिल्कुल! इस बार की दीपावली सबसे खास होगी।