📌 कहानी लेखन ● कक्षा 7-9 ● CBSE पैटर्न
यह वर्कशीट कक्षा 7-9 के विद्यार्थियों के लिए कहानी लेखन के 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों पर आधारित है। सभी कहानियाँ मौलिक एवं स्वरचित हैं। प्रत्येक कहानी में शीर्षक, कथा-वस्तु एवं सीख (बोध) स्पष्ट रूप से दी गई है। पहले स्वयं लिखें, फिर उत्तर जाँचें।
📖 कहानी लेखन — 20 प्रश्न
1. 'ईमानदारी का फल' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: ईमानदारी का फल
सुबह का समय था। रमेश नाम का एक गरीब लड़का अपनी छोटी-सी दुकान पर बैठा था। वह फल बेचने का काम करता था। उसकी दुकान बहुत छोटी थी, पर वह बहुत ईमानदारी से काम करता था।
एक दिन एक अमीर सज्जन उसकी दुकान पर आए। उन्होंने सेब खरीदे और 500 रुपये का नोट दिया। रमेश ने उन्हें 200 रुपये वापस लौटा दिए। सज्जन ने बिना गिने पैसे जेब में रख लिए और चले गए।
थोड़ी देर बाद उन्होंने पैसे गिने तो पाया कि रमेश ने 50 रुपये ज्यादा लौटा दिए हैं। असल में उन्होंने 250 रुपये के सेब खरीदे थे, पर रमेश को लगा कि उन्होंने 300 रुपये दिए हैं।
सज्जन तुरंत वापस लौटे और बोले, "बेटा, तुमने मुझे 50 रुपये ज्यादा लौटा दिए हैं।"
रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, "साहब, मैंने आपको उतने ही लौटाए जितने आपके बनते थे।"
सज्जन बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, "बेटा, आज के इस भ्रष्ट युग में तुमने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ।"
उन्होंने रमेश को अपनी कंपनी में नौकरी दे दी। आज रमेश उसी कंपनी का मैनेजर है और आज भी उतनी ही ईमानदारी से काम करता है।
सीख: ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। सच्चाई और ईमानदारी से काम करने वाला व्यक्ति कभी नहीं हारता।
शीर्षक: ईमानदारी का फल
सुबह का समय था। रमेश नाम का एक गरीब लड़का अपनी छोटी-सी दुकान पर बैठा था। वह फल बेचने का काम करता था। उसकी दुकान बहुत छोटी थी, पर वह बहुत ईमानदारी से काम करता था।
एक दिन एक अमीर सज्जन उसकी दुकान पर आए। उन्होंने सेब खरीदे और 500 रुपये का नोट दिया। रमेश ने उन्हें 200 रुपये वापस लौटा दिए। सज्जन ने बिना गिने पैसे जेब में रख लिए और चले गए।
थोड़ी देर बाद उन्होंने पैसे गिने तो पाया कि रमेश ने 50 रुपये ज्यादा लौटा दिए हैं। असल में उन्होंने 250 रुपये के सेब खरीदे थे, पर रमेश को लगा कि उन्होंने 300 रुपये दिए हैं।
सज्जन तुरंत वापस लौटे और बोले, "बेटा, तुमने मुझे 50 रुपये ज्यादा लौटा दिए हैं।"
रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, "साहब, मैंने आपको उतने ही लौटाए जितने आपके बनते थे।"
सज्जन बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा, "बेटा, आज के इस भ्रष्ट युग में तुमने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ।"
उन्होंने रमेश को अपनी कंपनी में नौकरी दे दी। आज रमेश उसी कंपनी का मैनेजर है और आज भी उतनी ही ईमानदारी से काम करता है।
सीख: ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। सच्चाई और ईमानदारी से काम करने वाला व्यक्ति कभी नहीं हारता।
2. 'एकता में बल है' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: एकता का जादू
एक जंगल में एक बूढ़ा कबूतर अपने बच्चों के साथ रहता था। उसके चार बच्चे थे, लेकिन वे हमेशा आपस में लड़ते रहते थे। कोई किसी की बात नहीं सुनता था।
एक दिन बूढ़े कबूतर ने सोचा कि अब इन्हें सीख देनी चाहिए। उसने एक तिनके का गट्ठर बनाया और अपने चारों बच्चों को बुलाया।
"बेटों, क्या तुम इस गट्ठर को तोड़ सकते हो?" बूढ़े कबूतर ने पूछा।
पहले बच्चे ने कोशिश की, गट्ठर नहीं टूटा। दूसरे ने कोशिश की, नहीं टूटा। तीसरे और चौथे ने भी कोशिश की, लेकिन गट्ठर नहीं टूटा।
अब बूढ़े कबूतर ने गट्ठर खोला और एक-एक तिनका अलग किया। "अब इसे तोड़ो," उसने कहा।
बच्चों ने आसानी से एक-एक तिनका तोड़ दिया।
बूढ़ा कबूतर बोला, "बेटों, यही एकता का संदेश है। जब तुम एक साथ रहोगे, तो कोई तुम्हें हरा नहीं सकता। लेकिन अलग-अलग रहोगे तो बहुत कमजोर हो जाओगे।"
बच्चों ने अपनी गलती मानी और हमेशा साथ रहने का वादा किया।
सीख: एकता में ही असली ताकत है। एकजुट रहने वालों को कोई नहीं हरा सकता।
शीर्षक: एकता का जादू
एक जंगल में एक बूढ़ा कबूतर अपने बच्चों के साथ रहता था। उसके चार बच्चे थे, लेकिन वे हमेशा आपस में लड़ते रहते थे। कोई किसी की बात नहीं सुनता था।
एक दिन बूढ़े कबूतर ने सोचा कि अब इन्हें सीख देनी चाहिए। उसने एक तिनके का गट्ठर बनाया और अपने चारों बच्चों को बुलाया।
"बेटों, क्या तुम इस गट्ठर को तोड़ सकते हो?" बूढ़े कबूतर ने पूछा।
पहले बच्चे ने कोशिश की, गट्ठर नहीं टूटा। दूसरे ने कोशिश की, नहीं टूटा। तीसरे और चौथे ने भी कोशिश की, लेकिन गट्ठर नहीं टूटा।
अब बूढ़े कबूतर ने गट्ठर खोला और एक-एक तिनका अलग किया। "अब इसे तोड़ो," उसने कहा।
बच्चों ने आसानी से एक-एक तिनका तोड़ दिया।
बूढ़ा कबूतर बोला, "बेटों, यही एकता का संदेश है। जब तुम एक साथ रहोगे, तो कोई तुम्हें हरा नहीं सकता। लेकिन अलग-अलग रहोगे तो बहुत कमजोर हो जाओगे।"
बच्चों ने अपनी गलती मानी और हमेशा साथ रहने का वादा किया।
सीख: एकता में ही असली ताकत है। एकजुट रहने वालों को कोई नहीं हरा सकता।
3. 'लोभ का फल बुरा होता है' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: लालची कुत्ता
एक गाँव में एक कुत्ता रहता था। एक दिन उसे रोटी का एक टुकड़ा मिला। वह उसे मुंह में दबाकर खुशी-खुशी अपने घर की ओर जा रहा था।
रास्ते में एक नदी पड़ती थी। कुत्ता नदी के पुल से जा रहा था। उसने नदी में झाँका तो उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखाई दी।
लालची कुत्ता समझा कि पानी में दूसरा कुत्ता है और उसके मुंह में भी रोटी का टुकड़ा है। उसने सोचा, "क्यों न मैं उस कुत्ते की रोटी भी छीन लूँ!"
वह जोर से भौंका। उसके मुंह से रोटी का टुकड़ा गिरकर नदी में बह गया। अब उसके पास कुछ नहीं बचा।
वह लालची कुत्ता खाली हाथ घर लौट आया और पछताता रहा।
सीख: लालच बुरी बला है। जो मिला है, उसमें संतोष करना चाहिए। लालच करने वाला अपना ही नुकसान कर बैठता है।
शीर्षक: लालची कुत्ता
एक गाँव में एक कुत्ता रहता था। एक दिन उसे रोटी का एक टुकड़ा मिला। वह उसे मुंह में दबाकर खुशी-खुशी अपने घर की ओर जा रहा था।
रास्ते में एक नदी पड़ती थी। कुत्ता नदी के पुल से जा रहा था। उसने नदी में झाँका तो उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखाई दी।
लालची कुत्ता समझा कि पानी में दूसरा कुत्ता है और उसके मुंह में भी रोटी का टुकड़ा है। उसने सोचा, "क्यों न मैं उस कुत्ते की रोटी भी छीन लूँ!"
वह जोर से भौंका। उसके मुंह से रोटी का टुकड़ा गिरकर नदी में बह गया। अब उसके पास कुछ नहीं बचा।
वह लालची कुत्ता खाली हाथ घर लौट आया और पछताता रहा।
सीख: लालच बुरी बला है। जो मिला है, उसमें संतोष करना चाहिए। लालच करने वाला अपना ही नुकसान कर बैठता है।
4. 'सच्चा मित्र' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: सच्चे मित्र की पहचान
मोहन और सोहन दो घनिष्ठ मित्र थे। वे एक ही गाँव में रहते थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी।
एक दिन जंगल में घूमते समय एक भालू ने उनका पीछा किया। मोहन तो तुरंत एक पेड़ पर चढ़ गया। सोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था।
उसने मोहन से मदद माँगी, "मोहन, मुझे भी पेड़ पर चढ़ा लो!"
मोहन ने कहा, "मैं तो बस अपनी जान बचा रहा हूँ। तुम कोई दूसरा उपाय करो।"
सोहन बहुत दुखी हुआ। उसने सोचा, "यह है मेरा सच्चा मित्र?"
तभी उसे याद आया कि भालू मरे हुए प्राणी को नहीं छूते। वह तुरंत जमीन पर लेट गया और साँस रोक दी।
भालू ने उसे सूँघा, मरा समझकर चला गया।
भालू के जाने के बाद मोहन पेड़ से उतरा और बोला, "भालू ने तुमसे क्या कहा?"
सोहन ने कहा, "उसने कहा — ऐसे मित्र का साथ कभी मत दो जो मुसीबत में साथ छोड़ दे।"
मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने क्षमा माँगी।
सीख: सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत के समय साथ न छोड़े। विपत्ति में ही मित्र की परीक्षा होती है।
शीर्षक: सच्चे मित्र की पहचान
मोहन और सोहन दो घनिष्ठ मित्र थे। वे एक ही गाँव में रहते थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी।
एक दिन जंगल में घूमते समय एक भालू ने उनका पीछा किया। मोहन तो तुरंत एक पेड़ पर चढ़ गया। सोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था।
उसने मोहन से मदद माँगी, "मोहन, मुझे भी पेड़ पर चढ़ा लो!"
मोहन ने कहा, "मैं तो बस अपनी जान बचा रहा हूँ। तुम कोई दूसरा उपाय करो।"
सोहन बहुत दुखी हुआ। उसने सोचा, "यह है मेरा सच्चा मित्र?"
तभी उसे याद आया कि भालू मरे हुए प्राणी को नहीं छूते। वह तुरंत जमीन पर लेट गया और साँस रोक दी।
भालू ने उसे सूँघा, मरा समझकर चला गया।
भालू के जाने के बाद मोहन पेड़ से उतरा और बोला, "भालू ने तुमसे क्या कहा?"
सोहन ने कहा, "उसने कहा — ऐसे मित्र का साथ कभी मत दो जो मुसीबत में साथ छोड़ दे।"
मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने क्षमा माँगी।
सीख: सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत के समय साथ न छोड़े। विपत्ति में ही मित्र की परीक्षा होती है।
5. 'परिश्रम का महत्व' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: मेहनत का फल
एक गाँव में दो किसान रहते थे — रामू और श्यामू। रामू बहुत मेहनती था। वह सुबह जल्दी उठता, खेतों में जाता, फसलों की देखभाल करता।
श्यामू आलसी था। वह कहता, "भगवान जो देंगे, खा लेंगे। इतनी मेहनत क्यों करें?" वह दिनभर आराम करता।
फसल कटने का समय आया। रामू के खेतों में सुनहरी फसल लहलहा रही थी। उसकी उपज बाजार में अच्छे दामों पर बिकी। वह खुश था।
श्यामू के खेतों में घास ही घास थी। कुछ नहीं उगा था। वह भूखा रह गया।
श्यामू रामू के पास गया और बोला, "भाई, मुझसे बड़ी गलती हुई। मैंने मेहनत का महत्व नहीं समझा।"
रामू ने उसे अनाज दिया और कहा, "परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता।"
श्यामू ने सबक सीखा और अगले सीजन से मेहनत करने लगा।
सीख: परिश्रम करने वाले की कभी हार नहीं होती। मेहनत ही सफलता का एकमात्र रास्ता है।
शीर्षक: मेहनत का फल
एक गाँव में दो किसान रहते थे — रामू और श्यामू। रामू बहुत मेहनती था। वह सुबह जल्दी उठता, खेतों में जाता, फसलों की देखभाल करता।
श्यामू आलसी था। वह कहता, "भगवान जो देंगे, खा लेंगे। इतनी मेहनत क्यों करें?" वह दिनभर आराम करता।
फसल कटने का समय आया। रामू के खेतों में सुनहरी फसल लहलहा रही थी। उसकी उपज बाजार में अच्छे दामों पर बिकी। वह खुश था।
श्यामू के खेतों में घास ही घास थी। कुछ नहीं उगा था। वह भूखा रह गया।
श्यामू रामू के पास गया और बोला, "भाई, मुझसे बड़ी गलती हुई। मैंने मेहनत का महत्व नहीं समझा।"
रामू ने उसे अनाज दिया और कहा, "परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता।"
श्यामू ने सबक सीखा और अगले सीजन से मेहनत करने लगा।
सीख: परिश्रम करने वाले की कभी हार नहीं होती। मेहनत ही सफलता का एकमात्र रास्ता है।
6. 'जैसा करोगे वैसा भरोगे' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: कर्म का फल
एक गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन दयालु थी। वह जो कुछ कमाती, उसमें से आधा भूखों को खिला देती।
उसके पड़ोस में एक अमीर व्यापारी रहता था। वह बहुत स्वार्थी और लालची था। उसे किसी की परवाह नहीं थी।
एक दिन व्यापारी की पोती बीमार पड़ गई। कोई दवा काम नहीं कर रही थी। तभी एक संत ने कहा कि किसी नेक इंसान के हाथ का बना खाना खाने से रोग ठीक हो सकता है।
व्यापारी ने बूढ़ी औरत से मदद माँगी। उसने तुरंत खाना बनाकर दिया। बच्ची ठीक हो गई।
व्यापारी की आँखें खुल गईं। उसने अपना स्वार्थी स्वभाव बदला और दूसरों की मदद करने लगा।
सीख: जैसा हम दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही हमारे साथ होता है। अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा मिलता है।
शीर्षक: कर्म का फल
एक गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। वह बहुत गरीब थी, लेकिन दयालु थी। वह जो कुछ कमाती, उसमें से आधा भूखों को खिला देती।
उसके पड़ोस में एक अमीर व्यापारी रहता था। वह बहुत स्वार्थी और लालची था। उसे किसी की परवाह नहीं थी।
एक दिन व्यापारी की पोती बीमार पड़ गई। कोई दवा काम नहीं कर रही थी। तभी एक संत ने कहा कि किसी नेक इंसान के हाथ का बना खाना खाने से रोग ठीक हो सकता है।
व्यापारी ने बूढ़ी औरत से मदद माँगी। उसने तुरंत खाना बनाकर दिया। बच्ची ठीक हो गई।
व्यापारी की आँखें खुल गईं। उसने अपना स्वार्थी स्वभाव बदला और दूसरों की मदद करने लगा।
सीख: जैसा हम दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही हमारे साथ होता है। अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा मिलता है।
7. 'अहंकार का पतन' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: घमंडी पेड़
एक जंगल में एक बहुत बड़ा और सुंदर पेड़ था। उसकी शाखाएँ बहुत ऊँची थीं। वह अपनी ऊँचाई पर बहुत घमंड करता था।
वह छोटे पौधों को ताने देता, "देखो मैं कितना ऊँचा हूँ! तुम लोग कितने नीचे हो।"
एक दिन तेज आँधी आई। घमंडी पेड़ ने छोटे पौधों से कहा, "देखना, मैं इस आँधी को भी मात दे दूँगा।"
आँधी ने जोर पकड़ा। पेड़ ने झुकने से इनकार कर दिया। वह अड़ा रहा। अचानक तेज हवा के झोंके से वह उखड़कर गिर पड़ा।
दूसरी ओर, छोटे पौधे झुक गए। हवा उनके ऊपर से निकल गई। आँधी रुकने के बाद वे फिर से खड़े हो गए।
गिरे हुए पेड़ को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
सीख: अहंकार सदा पतन का कारण बनता है। विनम्रता ही सच्ची महानता है।
शीर्षक: घमंडी पेड़
एक जंगल में एक बहुत बड़ा और सुंदर पेड़ था। उसकी शाखाएँ बहुत ऊँची थीं। वह अपनी ऊँचाई पर बहुत घमंड करता था।
वह छोटे पौधों को ताने देता, "देखो मैं कितना ऊँचा हूँ! तुम लोग कितने नीचे हो।"
एक दिन तेज आँधी आई। घमंडी पेड़ ने छोटे पौधों से कहा, "देखना, मैं इस आँधी को भी मात दे दूँगा।"
आँधी ने जोर पकड़ा। पेड़ ने झुकने से इनकार कर दिया। वह अड़ा रहा। अचानक तेज हवा के झोंके से वह उखड़कर गिर पड़ा।
दूसरी ओर, छोटे पौधे झुक गए। हवा उनके ऊपर से निकल गई। आँधी रुकने के बाद वे फिर से खड़े हो गए।
गिरे हुए पेड़ को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
सीख: अहंकार सदा पतन का कारण बनता है। विनम्रता ही सच्ची महानता है।
8. 'समय का सदुपयोग' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: कीमती समय
अमन एक होशियार छात्र था, लेकिन उसे आलस की बुरी आदत थी। वह हर काम कल पर टाल देता था। "आज करेंगे, कल करेंगे" — यही उसकी आदत बन गई थी।
परीक्षा नजदीक आ रही थी, लेकिन अमन ने पढ़ाई नहीं की थी। वह रोज सोचता, "कल से पढ़ूँगा।"
एक दिन उसके दादा जी ने उसे समझाया, "बेटा, समय रहते काम करो। समय हाथ से निकल गया तो फिर हाथ नहीं आता।"
अमन ने दादा जी की बात नहीं मानी। परीक्षा शुरू हो गई। वह तैयारी के बिना परीक्षा देने गया। स्वाभाविक रूप से वह फेल हो गया।
अब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने दादा जी से क्षमा माँगी और पक्का किया कि अब कभी काम नहीं टालेगा।
अगले वर्ष उसने समय पर पढ़ाई की और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ।
सीख: समय बहुमूल्य है। समय का सदुपयोग करने वाला ही जीवन में सफल होता है।
शीर्षक: कीमती समय
अमन एक होशियार छात्र था, लेकिन उसे आलस की बुरी आदत थी। वह हर काम कल पर टाल देता था। "आज करेंगे, कल करेंगे" — यही उसकी आदत बन गई थी।
परीक्षा नजदीक आ रही थी, लेकिन अमन ने पढ़ाई नहीं की थी। वह रोज सोचता, "कल से पढ़ूँगा।"
एक दिन उसके दादा जी ने उसे समझाया, "बेटा, समय रहते काम करो। समय हाथ से निकल गया तो फिर हाथ नहीं आता।"
अमन ने दादा जी की बात नहीं मानी। परीक्षा शुरू हो गई। वह तैयारी के बिना परीक्षा देने गया। स्वाभाविक रूप से वह फेल हो गया।
अब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने दादा जी से क्षमा माँगी और पक्का किया कि अब कभी काम नहीं टालेगा।
अगले वर्ष उसने समय पर पढ़ाई की और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ।
सीख: समय बहुमूल्य है। समय का सदुपयोग करने वाला ही जीवन में सफल होता है।
9. 'दया और करुणा' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: दयालु राजकुमार
एक नगर में एक दयालु राजकुमार रहता था। वह प्रतिदिन राजमहल से बाहर निकलता और गरीबों की मदद करता।
एक दिन उसने एक गरीब बूढ़ी महिला को देखा जो भूखी थी। राजकुमार ने अपना भोजन उसे दे दिया।
दूसरे दिन उसने एक अनाथ बच्चे को देखा जो ठंड में काँप रहा था। राजकुमार ने अपना ऊनी वस्त्र उसे दे दिया।
मंत्रियों ने राजकुमार से कहा, "आप राजमहल का सारा सामान गरीबों को दे रहे हैं। आगे क्या होगा?"
राजकुमार ने कहा, "प्रजा ही राजा की असली संपत्ति है। जब तक मेरी प्रजा सुखी है, मैं सुखी हूँ।"
कुछ समय बाद राजकुमार राजा बना। उसकी दयालुता के कारण प्रजा बहुत खुश थी। सभी उससे प्रेम करते थे। उसका राज्य बहुत उन्नत हुआ।
सीख: दया और करुणा सबसे बड़े गुण हैं। दूसरों की सहायता करने वाला स्वयं भी सुखी रहता है।
शीर्षक: दयालु राजकुमार
एक नगर में एक दयालु राजकुमार रहता था। वह प्रतिदिन राजमहल से बाहर निकलता और गरीबों की मदद करता।
एक दिन उसने एक गरीब बूढ़ी महिला को देखा जो भूखी थी। राजकुमार ने अपना भोजन उसे दे दिया।
दूसरे दिन उसने एक अनाथ बच्चे को देखा जो ठंड में काँप रहा था। राजकुमार ने अपना ऊनी वस्त्र उसे दे दिया।
मंत्रियों ने राजकुमार से कहा, "आप राजमहल का सारा सामान गरीबों को दे रहे हैं। आगे क्या होगा?"
राजकुमार ने कहा, "प्रजा ही राजा की असली संपत्ति है। जब तक मेरी प्रजा सुखी है, मैं सुखी हूँ।"
कुछ समय बाद राजकुमार राजा बना। उसकी दयालुता के कारण प्रजा बहुत खुश थी। सभी उससे प्रेम करते थे। उसका राज्य बहुत उन्नत हुआ।
सीख: दया और करुणा सबसे बड़े गुण हैं। दूसरों की सहायता करने वाला स्वयं भी सुखी रहता है।
10. 'धैर्य का फल' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: धैर्य की जीत
एक गाँव में एक किसान था। वह बहुत गरीब था, लेकिन बहुत धैर्यवान था। उसके पास एक छोटा-सा खेत था।
एक वर्ष भयंकर सूखा पड़ा। सारे किसान घबरा गए। कई तो खेती छोड़कर शहर चले गए। लेकिन वह किसान डटा रहा।
उसने कुएँ से पानी खींचकर अपनी फसल सिंचित की। पड़ोसी उसका मज़ाक उड़ाते, "अब भी उम्मीद है तुझे? बारिश नहीं होगी।"
किसान ने धैर्य नहीं खोया। वह रोज मेहनत करता रहा।
कुछ दिनों बाद बारिश हुई। उसकी फसल बच गई। जबकि जो किसान खेती छोड़कर चले गए थे, उनकी सब कुछ बर्बाद हो गया।
उस वर्ष किसान की फसल बहुत अच्छी हुई। वह खुश था कि उसने धैर्य नहीं खोया।
सीख: धैर्य रखने वाले की कभी हार नहीं होती। संकट के समय धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार है।
शीर्षक: धैर्य की जीत
एक गाँव में एक किसान था। वह बहुत गरीब था, लेकिन बहुत धैर्यवान था। उसके पास एक छोटा-सा खेत था।
एक वर्ष भयंकर सूखा पड़ा। सारे किसान घबरा गए। कई तो खेती छोड़कर शहर चले गए। लेकिन वह किसान डटा रहा।
उसने कुएँ से पानी खींचकर अपनी फसल सिंचित की। पड़ोसी उसका मज़ाक उड़ाते, "अब भी उम्मीद है तुझे? बारिश नहीं होगी।"
किसान ने धैर्य नहीं खोया। वह रोज मेहनत करता रहा।
कुछ दिनों बाद बारिश हुई। उसकी फसल बच गई। जबकि जो किसान खेती छोड़कर चले गए थे, उनकी सब कुछ बर्बाद हो गया।
उस वर्ष किसान की फसल बहुत अच्छी हुई। वह खुश था कि उसने धैर्य नहीं खोया।
सीख: धैर्य रखने वाले की कभी हार नहीं होती। संकट के समय धैर्य ही सबसे बड़ा हथियार है।
11. 'छोटा उपाय, बड़ा काम' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: चतुर कौआ
गर्मी का दिन था। एक कौआ बहुत प्यासा था। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ रहा था।
उसे एक घड़ा दिखाई दिया। वह खुशी-खुशी घड़े के पास गया। घड़े में पानी था, लेकिन बहुत नीचे था। उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी।
कौआ ने सोचा, "अब क्या करूँ?"
वह काफी देर तक सोचता रहा। तभी उसे एक उपाय सूझा। उसने आसपास पड़े कंकड़ उठाने शुरू कर दिए और एक-एक करके घड़े में डालने लगा।
कंकड़ डालने से पानी ऊपर आने लगा। उसने बहुत से कंकड़ डाले। आखिरकार पानी ऊपर आ गया और उसने पानी पी लिया।
उसकी प्यास बुझ गई और वह खुशी-खुशी उड़ गया।
सीख: छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ी समस्या का हल कर सकती हैं। बुद्धि और धैर्य से कठिन से कठिन काम भी संभव है।
शीर्षक: चतुर कौआ
गर्मी का दिन था। एक कौआ बहुत प्यासा था। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ रहा था।
उसे एक घड़ा दिखाई दिया। वह खुशी-खुशी घड़े के पास गया। घड़े में पानी था, लेकिन बहुत नीचे था। उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी।
कौआ ने सोचा, "अब क्या करूँ?"
वह काफी देर तक सोचता रहा। तभी उसे एक उपाय सूझा। उसने आसपास पड़े कंकड़ उठाने शुरू कर दिए और एक-एक करके घड़े में डालने लगा।
कंकड़ डालने से पानी ऊपर आने लगा। उसने बहुत से कंकड़ डाले। आखिरकार पानी ऊपर आ गया और उसने पानी पी लिया।
उसकी प्यास बुझ गई और वह खुशी-खुशी उड़ गया।
सीख: छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ी समस्या का हल कर सकती हैं। बुद्धि और धैर्य से कठिन से कठिन काम भी संभव है।
12. 'सेवा ही परम धर्म' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: सेवा का सुख
रिया एक छात्रा थी। उसके घर के पास एक वृद्धाश्रम था। वह प्रतिदिन शाम को वृद्धाश्रम जाती और बुजुर्गों की सेवा करती।
उसकी सहेलियाँ उससे कहतीं, "तुम वहाँ क्यों जाती हो? वहाँ तो बूढ़े लोग हैं।"
रिया मुस्कुराती और कहती, "उन्हें किसी की जरूरत है। उनके बच्चे दूर हैं। मेरे पास जाकर उन्हें सुकून मिलता है।"
वह बुजुर्गों को अखबार पढ़कर सुनाती, उनकी दवाई समय पर देती, उनसे बातें करती।
एक दिन वृद्धाश्रम के संचालक ने रिया को बुलाया और कहा, "बेटा, तुम्हारी सेवा भावना से हम बहुत प्रभावित हैं। यह लो, तुम्हारे लिए सम्मान पत्र।"
रिया ने विनम्रता से कहा, "मैंने तो बस अपना कर्तव्य निभाया है।"
उसके इस कार्य को देखकर उसकी सहेलियाँ भी प्रेरित हुईं और वे भी उसके साथ वृद्धाश्रम जाने लगीं।
सीख: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। दूसरों की सेवा करने से जो सुख मिलता है, वह किसी और चीज में नहीं।
शीर्षक: सेवा का सुख
रिया एक छात्रा थी। उसके घर के पास एक वृद्धाश्रम था। वह प्रतिदिन शाम को वृद्धाश्रम जाती और बुजुर्गों की सेवा करती।
उसकी सहेलियाँ उससे कहतीं, "तुम वहाँ क्यों जाती हो? वहाँ तो बूढ़े लोग हैं।"
रिया मुस्कुराती और कहती, "उन्हें किसी की जरूरत है। उनके बच्चे दूर हैं। मेरे पास जाकर उन्हें सुकून मिलता है।"
वह बुजुर्गों को अखबार पढ़कर सुनाती, उनकी दवाई समय पर देती, उनसे बातें करती।
एक दिन वृद्धाश्रम के संचालक ने रिया को बुलाया और कहा, "बेटा, तुम्हारी सेवा भावना से हम बहुत प्रभावित हैं। यह लो, तुम्हारे लिए सम्मान पत्र।"
रिया ने विनम्रता से कहा, "मैंने तो बस अपना कर्तव्य निभाया है।"
उसके इस कार्य को देखकर उसकी सहेलियाँ भी प्रेरित हुईं और वे भी उसके साथ वृद्धाश्रम जाने लगीं।
सीख: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। दूसरों की सेवा करने से जो सुख मिलता है, वह किसी और चीज में नहीं।
13. 'सच्ची वीरता' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: बहादुर राजू
राजू दस वर्ष का एक छोटा लड़का था। एक दिन वह अपने छोटे भाई के साथ खेत में खेल रहा था। अचानक उन्होंने देखा कि एक बच्चा नहर में गिर गया है।
वह बच्चा डूब रहा था। आसपास कोई बड़ा नहीं था। राजू ने एक पल भी नहीं सोचा। वह तुरंत नहर में कूद गया।
उसे तैरना कम आता था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने बच्चे को पकड़ा और किनारे की ओर खींचने लगा।
उसके छोटे भाई ने शोर मचाया। आसपास के लोग दौड़े आए। उन्होंने राजू और उस बच्चे दोनों को बाहर निकाला।
गाँव वालों ने राजू की बहादुरी की तारीफ की। उसे स्कूल में सम्मानित किया गया।
राजू ने कहा, "मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया। किसी की जान बचाना हर किसी का फर्ज है।"
सीख: सच्ची वीरता शरीर के बल से नहीं, हृदय के साहस से आती है। दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ी वीरता है।
शीर्षक: बहादुर राजू
राजू दस वर्ष का एक छोटा लड़का था। एक दिन वह अपने छोटे भाई के साथ खेत में खेल रहा था। अचानक उन्होंने देखा कि एक बच्चा नहर में गिर गया है।
वह बच्चा डूब रहा था। आसपास कोई बड़ा नहीं था। राजू ने एक पल भी नहीं सोचा। वह तुरंत नहर में कूद गया।
उसे तैरना कम आता था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने बच्चे को पकड़ा और किनारे की ओर खींचने लगा।
उसके छोटे भाई ने शोर मचाया। आसपास के लोग दौड़े आए। उन्होंने राजू और उस बच्चे दोनों को बाहर निकाला।
गाँव वालों ने राजू की बहादुरी की तारीफ की। उसे स्कूल में सम्मानित किया गया।
राजू ने कहा, "मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया। किसी की जान बचाना हर किसी का फर्ज है।"
सीख: सच्ची वीरता शरीर के बल से नहीं, हृदय के साहस से आती है। दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ी वीरता है।
14. 'माता-पिता का सम्मान' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: माता-पिता का आशीर्वाद
सुमित एक अमीर परिवार का लड़का था। उसके पास सब कुछ था, लेकिन वह अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता था। वह उनसे ऊँची आवाज में बात करता, उनकी बात नहीं सुनता।
एक दिन उसके पिता बीमार पड़ गए। सुमित ने कोई परवाह नहीं की। वह दोस्तों के साथ घूमने चला गया।
घूमते समय उसकी मुलाकात एक बूढ़े व्यक्ति से हुई। वह व्यक्ति बहुत दुखी था। सुमित ने पूछा, "आप इतने दुखी क्यों हैं?"
बूढ़ा बोला, "मेरा बेटा मुझसे दूर है। वह मेरी परवाह नहीं करता। काश वह मेरे पास होता।"
सुमित को अपने पिता की याद आई। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तुरंत घर लौटा और पिता के पैर छूए। "पिता जी, मुझे माफ कर दीजिए।"
पिता ने उसे आशीर्वाद दिया। सुमित ने वादा किया कि अब वह हमेशा माता-पिता का सम्मान करेगा।
सीख: माता-पिता का सम्मान करना हर बच्चे का पहला कर्तव्य है। उनका आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है।
शीर्षक: माता-पिता का आशीर्वाद
सुमित एक अमीर परिवार का लड़का था। उसके पास सब कुछ था, लेकिन वह अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता था। वह उनसे ऊँची आवाज में बात करता, उनकी बात नहीं सुनता।
एक दिन उसके पिता बीमार पड़ गए। सुमित ने कोई परवाह नहीं की। वह दोस्तों के साथ घूमने चला गया।
घूमते समय उसकी मुलाकात एक बूढ़े व्यक्ति से हुई। वह व्यक्ति बहुत दुखी था। सुमित ने पूछा, "आप इतने दुखी क्यों हैं?"
बूढ़ा बोला, "मेरा बेटा मुझसे दूर है। वह मेरी परवाह नहीं करता। काश वह मेरे पास होता।"
सुमित को अपने पिता की याद आई। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह तुरंत घर लौटा और पिता के पैर छूए। "पिता जी, मुझे माफ कर दीजिए।"
पिता ने उसे आशीर्वाद दिया। सुमित ने वादा किया कि अब वह हमेशा माता-पिता का सम्मान करेगा।
सीख: माता-पिता का सम्मान करना हर बच्चे का पहला कर्तव्य है। उनका आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है।
15. 'स्वच्छता का महत्व' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: स्वच्छता अभियान
गाँव के स्कूल में नए शिक्षक आए — श्री वर्मा। उन्होंने देखा कि स्कूल के आसपास बहुत गंदगी फैली है। बच्चे कहीं भी कूड़ा फेंक देते हैं।
एक दिन श्री वर्मा ने सभी बच्चों को इकट्ठा किया और कहा, "क्या तुम्हें पता है कि गंदगी से कितनी बीमारियाँ फैलती हैं?"
उन्होंने बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाया। उन्होंने 'स्वच्छता अभियान' चलाने का सुझाव दिया।
पहले तो बच्चों ने हँसी उड़ाई, लेकिन धीरे-धीरे वे जागरूक हुए। उन्होंने झाड़ू उठाया और स्कूल परिसर की सफाई शुरू कर दी।
देखते-देखते पूरा गाँव इस अभियान से जुड़ गया। गाँव वालों ने कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था की, साफ-सफाई का ध्यान रखा।
कुछ महीनों में गाँव की तस्वीर ही बदल गई। लोग स्वस्थ रहने लगे। बीमारियाँ कम हुईं।
सीख: स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है। सफाई के प्रति जागरूकता ही स्वस्थ समाज की नींव है।
शीर्षक: स्वच्छता अभियान
गाँव के स्कूल में नए शिक्षक आए — श्री वर्मा। उन्होंने देखा कि स्कूल के आसपास बहुत गंदगी फैली है। बच्चे कहीं भी कूड़ा फेंक देते हैं।
एक दिन श्री वर्मा ने सभी बच्चों को इकट्ठा किया और कहा, "क्या तुम्हें पता है कि गंदगी से कितनी बीमारियाँ फैलती हैं?"
उन्होंने बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाया। उन्होंने 'स्वच्छता अभियान' चलाने का सुझाव दिया।
पहले तो बच्चों ने हँसी उड़ाई, लेकिन धीरे-धीरे वे जागरूक हुए। उन्होंने झाड़ू उठाया और स्कूल परिसर की सफाई शुरू कर दी।
देखते-देखते पूरा गाँव इस अभियान से जुड़ गया। गाँव वालों ने कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था की, साफ-सफाई का ध्यान रखा।
कुछ महीनों में गाँव की तस्वीर ही बदल गई। लोग स्वस्थ रहने लगे। बीमारियाँ कम हुईं।
सीख: स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है। सफाई के प्रति जागरूकता ही स्वस्थ समाज की नींव है।
16. 'अनोखा दान' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: सबसे बड़ा दान
एक राजा था। वह बहुत दानी था। प्रतिदिन वह गरीबों को सोना, चाँदी, वस्त्र दान करता। सभी उसकी प्रशंसा करते।
एक दिन एक संत राजमहल आए। राजा ने उनका स्वागत किया और बहुत सा धन दान में दिया।
संत ने वह धन नहीं लिया। उन्होंने कहा, "राजन, यह दान नहीं है। यह तो आपका कर्तव्य है। सच्चा दान तो वह है जो तुम किसी ऐसे को दो जो तुम्हें कुछ नहीं दे सकता।"
राजा समझ नहीं पाए। संत ने कहा, "कल सुबह तुम वस्त्र लेकर उस गरीब महिला के पास जाओ जिसका बेटा तुम्हारे यहाँ काम करता है।"
अगले दिन राजा उस महिला के पास गए। उन्होंने देखा कि महिला अपने बेटे के लिए रोटी बना रही थी, लेकिन खुद भूखी थी।
राजा ने उसे वस्त्र और भोजन दिया। महिला की आँखों में आँसू थे। उसने राजा के चरण छू लिए।
राजा समझ गए कि सच्चा दान वह है जो बिना किसी स्वार्थ के, बिना प्रशंसा की चाहत के किया जाए।
सीख: सच्चा दान वह है जो बदले की भावना के बिना, केवल मानवता के लिए किया जाए।
शीर्षक: सबसे बड़ा दान
एक राजा था। वह बहुत दानी था। प्रतिदिन वह गरीबों को सोना, चाँदी, वस्त्र दान करता। सभी उसकी प्रशंसा करते।
एक दिन एक संत राजमहल आए। राजा ने उनका स्वागत किया और बहुत सा धन दान में दिया।
संत ने वह धन नहीं लिया। उन्होंने कहा, "राजन, यह दान नहीं है। यह तो आपका कर्तव्य है। सच्चा दान तो वह है जो तुम किसी ऐसे को दो जो तुम्हें कुछ नहीं दे सकता।"
राजा समझ नहीं पाए। संत ने कहा, "कल सुबह तुम वस्त्र लेकर उस गरीब महिला के पास जाओ जिसका बेटा तुम्हारे यहाँ काम करता है।"
अगले दिन राजा उस महिला के पास गए। उन्होंने देखा कि महिला अपने बेटे के लिए रोटी बना रही थी, लेकिन खुद भूखी थी।
राजा ने उसे वस्त्र और भोजन दिया। महिला की आँखों में आँसू थे। उसने राजा के चरण छू लिए।
राजा समझ गए कि सच्चा दान वह है जो बिना किसी स्वार्थ के, बिना प्रशंसा की चाहत के किया जाए।
सीख: सच्चा दान वह है जो बदले की भावना के बिना, केवल मानवता के लिए किया जाए।
17. 'परोपकार' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: परोपकारी गिलहरी
एक जंगल में एक छोटी गिलहरी रहती थी। वह बहुत परोपकारी थी। जरूरतमंद जानवरों की वह हर संभव मदद करती।
एक दिन जंगल में भयंकर आग लग गई। सभी जानवर डरकर भागने लगे। बड़े-बड़े हाथी भी घबरा गए।
गिलहरी ने देखा कि आग की लपटें बहुत तेज हैं। वह नदी के पास गई, अपने शरीर को गीला किया और आग के पास दौड़ी। उसने अपने गीले शरीर से पानी की बूँदें आग पर गिराईं।
हाथी ने कहा, "बहन, तुम छोटी हो। तुम्हारी बूँदों से क्या होगा?"
गिलहरी ने कहा, "मैं अपना कर्तव्य निभा रही हूँ। बड़ा हो या छोटा, प्रयास तो करना चाहिए।"
उसकी बात सुनकर सभी जानवर शर्मिंदा हुए। उन्होंने मिलकर आग पर काबू पाया।
सीख: परोपकार में बड़ा-छोटा नहीं होता। छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
शीर्षक: परोपकारी गिलहरी
एक जंगल में एक छोटी गिलहरी रहती थी। वह बहुत परोपकारी थी। जरूरतमंद जानवरों की वह हर संभव मदद करती।
एक दिन जंगल में भयंकर आग लग गई। सभी जानवर डरकर भागने लगे। बड़े-बड़े हाथी भी घबरा गए।
गिलहरी ने देखा कि आग की लपटें बहुत तेज हैं। वह नदी के पास गई, अपने शरीर को गीला किया और आग के पास दौड़ी। उसने अपने गीले शरीर से पानी की बूँदें आग पर गिराईं।
हाथी ने कहा, "बहन, तुम छोटी हो। तुम्हारी बूँदों से क्या होगा?"
गिलहरी ने कहा, "मैं अपना कर्तव्य निभा रही हूँ। बड़ा हो या छोटा, प्रयास तो करना चाहिए।"
उसकी बात सुनकर सभी जानवर शर्मिंदा हुए। उन्होंने मिलकर आग पर काबू पाया।
सीख: परोपकार में बड़ा-छोटा नहीं होता। छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
18. 'सच्चा सुख' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: सुख की खोज
एक अमीर व्यापारी था। उसके पास धन, दौलत, बड़ा महल, नौकर-चाकर सब कुछ था, लेकिन वह हमेशा दुखी रहता था।
वह सुख की तलाश में एक संत के पास गया। "महाराज, मेरे पास सब कुछ है, फिर भी मैं सुखी नहीं हूँ। कृपया मुझे सुख का मार्ग बताइए।"
संत ने कहा, "तुम कल सुबह उठकर सबसे पहले जिस गरीब व्यक्ति को देखो, उससे एक रोटी माँगकर खाओ।"
व्यापारी हैरान हुआ, "मैं अमीर हूँ, मैं किसी से रोटी क्यों माँगूँ?"
संत मुस्कुराए, "तभी तुम सुखी नहीं हो।"
व्यापारी ने अगले दिन एक गरीब मजदूर से रोटी माँगी। मजदूर ने बड़े प्रेम से अपनी आधी रोटी उसे दे दी।
व्यापारी ने वह रोटी खाई। उसे जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि सुख पाने में नहीं, देने में है।
सीख: सच्चा सुख धन-दौलत में नहीं, अपनेपन और प्रेम में है। देने वाला ही सच्चा सुखी है।
शीर्षक: सुख की खोज
एक अमीर व्यापारी था। उसके पास धन, दौलत, बड़ा महल, नौकर-चाकर सब कुछ था, लेकिन वह हमेशा दुखी रहता था।
वह सुख की तलाश में एक संत के पास गया। "महाराज, मेरे पास सब कुछ है, फिर भी मैं सुखी नहीं हूँ। कृपया मुझे सुख का मार्ग बताइए।"
संत ने कहा, "तुम कल सुबह उठकर सबसे पहले जिस गरीब व्यक्ति को देखो, उससे एक रोटी माँगकर खाओ।"
व्यापारी हैरान हुआ, "मैं अमीर हूँ, मैं किसी से रोटी क्यों माँगूँ?"
संत मुस्कुराए, "तभी तुम सुखी नहीं हो।"
व्यापारी ने अगले दिन एक गरीब मजदूर से रोटी माँगी। मजदूर ने बड़े प्रेम से अपनी आधी रोटी उसे दे दी।
व्यापारी ने वह रोटी खाई। उसे जीवन में पहली बार एहसास हुआ कि सुख पाने में नहीं, देने में है।
सीख: सच्चा सुख धन-दौलत में नहीं, अपनेपन और प्रेम में है। देने वाला ही सच्चा सुखी है।
19. 'क्षमा' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: क्षमा का बदला
रामू और श्यामू पड़ोसी थे। दोनों के खेत सटे हुए थे। एक दिन श्यामू की गाय रामू के खेत में घुस गई और फसल खराब कर दी।
रामू बहुत गुस्सा हुआ। उसने श्यामू को खूब भला-बुरा कहा। श्यामू ने माफी माँगी, लेकिन रामू ने नहीं मानी।
कुछ दिनों बाद रामू का बेटा बीमार पड़ गया। उसे अस्पताल ले जाने की जल्दी थी, लेकिन उसके पास गाड़ी नहीं थी।
श्यामू ने यह देखा। वह अपनी गाड़ी लेकर तुरंत रामू के पास गया। "बच्चे को अस्पताल ले चलो," उसने कहा।
रामू शर्मिंदा हुआ। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। अस्पताल से लौटने के बाद उसने श्यामू से क्षमा माँगी।
"मैंने तुम्हारी फसल खराब की थी, लेकिन तुमने मेरे बेटे की जान बचाई। तुम सच में महान हो," रामू ने कहा।
सीख: क्षमा सबसे बड़ा गुण है। बुराई का बदला भलाई से देना ही सच्ची मानवता है।
शीर्षक: क्षमा का बदला
रामू और श्यामू पड़ोसी थे। दोनों के खेत सटे हुए थे। एक दिन श्यामू की गाय रामू के खेत में घुस गई और फसल खराब कर दी।
रामू बहुत गुस्सा हुआ। उसने श्यामू को खूब भला-बुरा कहा। श्यामू ने माफी माँगी, लेकिन रामू ने नहीं मानी।
कुछ दिनों बाद रामू का बेटा बीमार पड़ गया। उसे अस्पताल ले जाने की जल्दी थी, लेकिन उसके पास गाड़ी नहीं थी।
श्यामू ने यह देखा। वह अपनी गाड़ी लेकर तुरंत रामू के पास गया। "बच्चे को अस्पताल ले चलो," उसने कहा।
रामू शर्मिंदा हुआ। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। अस्पताल से लौटने के बाद उसने श्यामू से क्षमा माँगी।
"मैंने तुम्हारी फसल खराब की थी, लेकिन तुमने मेरे बेटे की जान बचाई। तुम सच में महान हो," रामू ने कहा।
सीख: क्षमा सबसे बड़ा गुण है। बुराई का बदला भलाई से देना ही सच्ची मानवता है।
20. 'निष्ठा का फल' विषय पर आधारित मौलिक कहानी लिखिए।
उत्तर:
शीर्षक: वफादार कुत्ता
एक गाँव में एक किसान था। उसके पास एक वफादार कुत्ता था। कुत्ता उसके घर और खेत की रखवाली करता।
एक दिन किसान बाजार गया हुआ था। घर पर उसका छोटा बेटा सो रहा था। अचानक एक जहरीला साँप घर में घुस आया और बच्चे की ओर बढ़ने लगा।
कुत्ते ने देखा। वह तुरंत साँप पर टूट पड़ा। दोनों में भयंकर लड़ाई हुई। अंत में कुत्ते ने साँप को मार डाला, लेकिन उसे भी साँप ने काट लिया।
कुछ देर बाद किसान घर लौटा। उसने देखा कुत्ते का मुँह खून से सना है और उसका बेटा नहीं दिख रहा। उसे लगा कि कुत्ते ने उसके बेटे को मार डाला है।
गुस्से में उसने कुत्ते को मार दिया। फिर वह अंदर गया तो देखा कि उसका बेटा बिल्कुल ठीक है और पास ही एक मरा हुआ साँप पड़ा है।
किसान को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कुत्ते की वफादारी के आगे सिर झुका दिया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
सीख: निष्ठा सबसे बड़ा गुण है। बिना सोचे-समझे निर्णय लेना भारी पड़ सकता है। विश्वास और धैर्य हमेशा काम आते हैं।
शीर्षक: वफादार कुत्ता
एक गाँव में एक किसान था। उसके पास एक वफादार कुत्ता था। कुत्ता उसके घर और खेत की रखवाली करता।
एक दिन किसान बाजार गया हुआ था। घर पर उसका छोटा बेटा सो रहा था। अचानक एक जहरीला साँप घर में घुस आया और बच्चे की ओर बढ़ने लगा।
कुत्ते ने देखा। वह तुरंत साँप पर टूट पड़ा। दोनों में भयंकर लड़ाई हुई। अंत में कुत्ते ने साँप को मार डाला, लेकिन उसे भी साँप ने काट लिया।
कुछ देर बाद किसान घर लौटा। उसने देखा कुत्ते का मुँह खून से सना है और उसका बेटा नहीं दिख रहा। उसे लगा कि कुत्ते ने उसके बेटे को मार डाला है।
गुस्से में उसने कुत्ते को मार दिया। फिर वह अंदर गया तो देखा कि उसका बेटा बिल्कुल ठीक है और पास ही एक मरा हुआ साँप पड़ा है।
किसान को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने कुत्ते की वफादारी के आगे सिर झुका दिया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
सीख: निष्ठा सबसे बड़ा गुण है। बिना सोचे-समझे निर्णय लेना भारी पड़ सकता है। विश्वास और धैर्य हमेशा काम आते हैं।