📌 अपठित पद्यांश ● कक्षा 7-10 ● CBSE पैटर्न
यह वर्कशीट कक्षा 7-10 के विद्यार्थियों के लिए अपठित पद्यांश पर आधारित 20 महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह है। प्रत्येक पद्यांश पूर्णतः मौलिक एवं स्वरचित है। प्रत्येक पद्यांश के बाद 5 प्रश्न दिए गए हैं — अतिलघुत्तरीय, बहुविकल्पीय एवं रिक्त स्थान। पहले स्वयं हल करें, फिर उत्तर जाँचें।
🎵 अपठित पद्यांश — 20 प्रश्न
1. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
नभ में उड़ता पंछी देखो, कितना स्वच्छंद विचरता है।
ना उसको कोई बंधन बाँधे, ना कोई उसे डराता है।
खुले गगन में पंख पसारे, वह निडर उड़ान भरता है।
स्वतंत्रता ही उसका जीवन, वह इसी राग में मचलता है।
मनुज भी चाहे ऐसा जीवन, बंधन में वह क्यों बँधा रहे?
डर-भय छोड़ आगे बढ़ना, नित नई राह वह स्वयं गढ़े।
स्वच्छंदता का पाठ पढ़ाता, यह पंछी हर पल-छन में।
खोलो पिंजरा तोड़ो ताले, जीवन है यह अपने पन में।
नभ में उड़ता पंछी देखो, कितना स्वच्छंद विचरता है।
ना उसको कोई बंधन बाँधे, ना कोई उसे डराता है।
खुले गगन में पंख पसारे, वह निडर उड़ान भरता है।
स्वतंत्रता ही उसका जीवन, वह इसी राग में मचलता है।
मनुज भी चाहे ऐसा जीवन, बंधन में वह क्यों बँधा रहे?
डर-भय छोड़ आगे बढ़ना, नित नई राह वह स्वयं गढ़े।
स्वच्छंदता का पाठ पढ़ाता, यह पंछी हर पल-छन में।
खोलो पिंजरा तोड़ो ताले, जीवन है यह अपने पन में।
उत्तर:
प्रश्न 1: पंछी कैसे विचरता है?
उत्तर: पंछी स्वच्छंद (स्वतंत्र) होकर विचरता है।
प्रश्न 2: पंछी कहाँ उड़ान भरता है?
उत्तर: पंछी खुले गगन में उड़ान भरता है।
प्रश्न 3: पंछी का जीवन क्या है?
उत्तर: स्वतंत्रता ही पंछी का जीवन है।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार मनुज को कैसा जीवन चाहिए?
उत्तर: कवि के अनुसार मनुज भी स्वच्छंद जीवन चाहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'स्वच्छंदता का पाठ' या 'स्वतंत्रता का महत्व'।
प्रश्न 1: पंछी कैसे विचरता है?
उत्तर: पंछी स्वच्छंद (स्वतंत्र) होकर विचरता है।
प्रश्न 2: पंछी कहाँ उड़ान भरता है?
उत्तर: पंछी खुले गगन में उड़ान भरता है।
प्रश्न 3: पंछी का जीवन क्या है?
उत्तर: स्वतंत्रता ही पंछी का जीवन है।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार मनुज को कैसा जीवन चाहिए?
उत्तर: कवि के अनुसार मनुज भी स्वच्छंद जीवन चाहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'स्वच्छंदता का पाठ' या 'स्वतंत्रता का महत्व'।
2. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
धरती की शोभा है हरियाली, बिन इसके सूना जग सारा।
पेड़-पौधे देते जीवन, ऑक्सीजन का अनमोल उपहारा।
छाया, फल, फूल, लकड़ी, औषधियाँ भी देते अपार।
पर हम काटे जा रहे इनको, यह कैसा विध्वंस हमारा?
आओ मिलकर संकल्प करें, एक-एक पौधा लगाएँ।
धरती को फिर से हरा-भरा, हम सब मिलकर बनाएँ।
वृक्ष ही जीवन के आधार, यह सत्य न भूलो भूल।
हरियाली से ही संभव है, जीवन का सुखद मूल।
धरती की शोभा है हरियाली, बिन इसके सूना जग सारा।
पेड़-पौधे देते जीवन, ऑक्सीजन का अनमोल उपहारा।
छाया, फल, फूल, लकड़ी, औषधियाँ भी देते अपार।
पर हम काटे जा रहे इनको, यह कैसा विध्वंस हमारा?
आओ मिलकर संकल्प करें, एक-एक पौधा लगाएँ।
धरती को फिर से हरा-भरा, हम सब मिलकर बनाएँ।
वृक्ष ही जीवन के आधार, यह सत्य न भूलो भूल।
हरियाली से ही संभव है, जीवन का सुखद मूल।
उत्तर:
प्रश्न 1: धरती की शोभा क्या है?
उत्तर: धरती की शोभा हरियाली है।
प्रश्न 2: पेड़-पौधे हमें क्या-क्या देते हैं? (कोई तीन)
उत्तर: पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन, छाया, फल, फूल, लकड़ी और औषधियाँ देते हैं।
प्रश्न 3: मनुष्य पेड़ों के साथ क्या कर रहा है?
उत्तर: मनुष्य पेड़ों को काट रहा है।
प्रश्न 4: कवि क्या संकल्प करने को कहता है?
उत्तर: कवि एक-एक पौधा लगाने का संकल्प करने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हरियाली का महत्व' या 'वृक्षारोपण'।
प्रश्न 1: धरती की शोभा क्या है?
उत्तर: धरती की शोभा हरियाली है।
प्रश्न 2: पेड़-पौधे हमें क्या-क्या देते हैं? (कोई तीन)
उत्तर: पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन, छाया, फल, फूल, लकड़ी और औषधियाँ देते हैं।
प्रश्न 3: मनुष्य पेड़ों के साथ क्या कर रहा है?
उत्तर: मनुष्य पेड़ों को काट रहा है।
प्रश्न 4: कवि क्या संकल्प करने को कहता है?
उत्तर: कवि एक-एक पौधा लगाने का संकल्प करने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हरियाली का महत्व' या 'वृक्षारोपण'।
3. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
माँ की ममता का सागर, गहरा अपार अथाह।
पिता का प्यार पर्वत सा, देता हमें हर थाह।।
दादी की कहानियों में, मिलता ज्ञान अपार।
दादा का आशीर्वाद, बनता हमारा आधार।।
भाई-बहन का स्नेह, बढ़ाता हर खुशी दुगुनी।
परिवार का यह बंधन, है सबसे अनमोल धरोहर।
सीख मिले यहीं सदाचार की, मिले संस्कार सुंदर।
परिवार ही है पहली पाठशाला, यहाँ मिले जीवन का सबक निराला।।
माँ की ममता का सागर, गहरा अपार अथाह।
पिता का प्यार पर्वत सा, देता हमें हर थाह।।
दादी की कहानियों में, मिलता ज्ञान अपार।
दादा का आशीर्वाद, बनता हमारा आधार।।
भाई-बहन का स्नेह, बढ़ाता हर खुशी दुगुनी।
परिवार का यह बंधन, है सबसे अनमोल धरोहर।
सीख मिले यहीं सदाचार की, मिले संस्कार सुंदर।
परिवार ही है पहली पाठशाला, यहाँ मिले जीवन का सबक निराला।।
उत्तर:
प्रश्न 1: माँ की ममता को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: माँ की ममता को सागर के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: पिता के प्यार को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: पिता के प्यार को पर्वत के समान बताया गया है।
प्रश्न 3: दादी की कहानियों में क्या मिलता है?
उत्तर: दादी की कहानियों में अपार ज्ञान मिलता है।
प्रश्न 4: कवि ने परिवार को क्या कहा है?
उत्तर: कवि ने परिवार को पहली पाठशाला कहा है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'परिवार का महत्व' या 'अनमोल धरोहर'।
प्रश्न 1: माँ की ममता को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: माँ की ममता को सागर के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: पिता के प्यार को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: पिता के प्यार को पर्वत के समान बताया गया है।
प्रश्न 3: दादी की कहानियों में क्या मिलता है?
उत्तर: दादी की कहानियों में अपार ज्ञान मिलता है।
प्रश्न 4: कवि ने परिवार को क्या कहा है?
उत्तर: कवि ने परिवार को पहली पाठशाला कहा है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'परिवार का महत्व' या 'अनमोल धरोहर'।
4. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
कल का सोच कल की बात, आज का काम आज ही कर ले।
समय रूपी इस नदिया में, कौन कहे क्या बह गए कल।
बीता पल फिर हाथ न आवे, आने वाला अभी अनजान।
हाथ में है बस यही पल, इसी में ढूँढ़ अपना मान।।
आलस्य त्यागो, उठो जागो, हर पल करो कुछ ऐसा काम।
समय बीता पछताओगे, जीवन बनेगा तब निष्काम।
रात्रि में सोचो कल क्या करना, प्रातः करो वह काम।
समय का सदुपयोग ही, जीवन की असली शाम।
कल का सोच कल की बात, आज का काम आज ही कर ले।
समय रूपी इस नदिया में, कौन कहे क्या बह गए कल।
बीता पल फिर हाथ न आवे, आने वाला अभी अनजान।
हाथ में है बस यही पल, इसी में ढूँढ़ अपना मान।।
आलस्य त्यागो, उठो जागो, हर पल करो कुछ ऐसा काम।
समय बीता पछताओगे, जीवन बनेगा तब निष्काम।
रात्रि में सोचो कल क्या करना, प्रातः करो वह काम।
समय का सदुपयोग ही, जीवन की असली शाम।
उत्तर:
प्रश्न 1: समय को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: समय को नदिया (नदी) के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: कवि ने कैसा काम करने को कहा है?
उत्तर: कवि ने आज का काम आज ही करने को कहा है।
प्रश्न 3: हमें क्या त्यागना चाहिए?
उत्तर: हमें आलस्य त्यागना चाहिए।
प्रश्न 4: समय बीत जाने पर क्या होगा?
उत्तर: समय बीत जाने पर हम पछताएँगे।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'समय का सदुपयोग' या 'कालचक्र'।
प्रश्न 1: समय को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: समय को नदिया (नदी) के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: कवि ने कैसा काम करने को कहा है?
उत्तर: कवि ने आज का काम आज ही करने को कहा है।
प्रश्न 3: हमें क्या त्यागना चाहिए?
उत्तर: हमें आलस्य त्यागना चाहिए।
प्रश्न 4: समय बीत जाने पर क्या होगा?
उत्तर: समय बीत जाने पर हम पछताएँगे।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'समय का सदुपयोग' या 'कालचक्र'।
5. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
कभी न हारो मन में ठानो, चुनौतियाँ हैं क्या बड़ी।
गिर कर ही तो सीखा बच्चे, चलना फिरना खड़ी-खड़ी।।
हौसला हो तो पार करो तुम, ऊँची से ऊँची दीवार।
असफलता तो कदम चूमेगी, जिसमें हो जिगर अपार।।
मेहनत है तो सफलता नाचे, लगन है तो मिले आसमान।
हार उन्हीं को होती है, जो लड़ते ही नहीं मैदान।
तू कोशिश कर हार न मानो, राह निहारो अपनी पहचान।
कल जीत का सूरज चमकेगा, तू खोल नयन अब खोल कपाट।
कभी न हारो मन में ठानो, चुनौतियाँ हैं क्या बड़ी।
गिर कर ही तो सीखा बच्चे, चलना फिरना खड़ी-खड़ी।।
हौसला हो तो पार करो तुम, ऊँची से ऊँची दीवार।
असफलता तो कदम चूमेगी, जिसमें हो जिगर अपार।।
मेहनत है तो सफलता नाचे, लगन है तो मिले आसमान।
हार उन्हीं को होती है, जो लड़ते ही नहीं मैदान।
तू कोशिश कर हार न मानो, राह निहारो अपनी पहचान।
कल जीत का सूरज चमकेगा, तू खोल नयन अब खोल कपाट।
उत्तर:
प्रश्न 1: बच्चा कैसे चलना-फिरना सीखता है?
उत्तर: बच्चा गिर-गिर कर चलना-फिरना सीखता है।
प्रश्न 2: कवि के अनुसार किसमें जिगर (हिम्मत) होना चाहिए?
उत्तर: ऊँची दीवार पार करने वाले में जिगर होना चाहिए।
प्रश्न 3: किन लोगों की हार होती है?
उत्तर: जो लड़ते ही नहीं, उनकी हार होती है।
प्रश्न 4: कवि क्या न मानने को कहता है?
उत्तर: कवि हार न मानने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हौसले की उड़ान' या 'न हार मानो'।
प्रश्न 1: बच्चा कैसे चलना-फिरना सीखता है?
उत्तर: बच्चा गिर-गिर कर चलना-फिरना सीखता है।
प्रश्न 2: कवि के अनुसार किसमें जिगर (हिम्मत) होना चाहिए?
उत्तर: ऊँची दीवार पार करने वाले में जिगर होना चाहिए।
प्रश्न 3: किन लोगों की हार होती है?
उत्तर: जो लड़ते ही नहीं, उनकी हार होती है।
प्रश्न 4: कवि क्या न मानने को कहता है?
उत्तर: कवि हार न मानने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हौसले की उड़ान' या 'न हार मानो'।
6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
आओ बच्चों तुम्हें बताऊँ, जल संरक्षण का ज्ञान।
बूँद-बूँद से सागर भरता, मत इसका तुम अपमान।।
नदियाँ, ताल, सरोवर, झरने, ये सब जल के आगार।
इनके बिना सूना जीवन, सूने सब संसार।।
आओ मिलकर वर्षा जल को, संचय करना सीखें।
रो-रो कर पानी बहता, यह दृश्य न हम देखें।
जल ही जीवन है यह सत्य, कभी न भूलो तुम।
जल संरक्षण ही एकमात्र, भविष्य का है वरदान।
आओ बच्चों तुम्हें बताऊँ, जल संरक्षण का ज्ञान।
बूँद-बूँद से सागर भरता, मत इसका तुम अपमान।।
नदियाँ, ताल, सरोवर, झरने, ये सब जल के आगार।
इनके बिना सूना जीवन, सूने सब संसार।।
आओ मिलकर वर्षा जल को, संचय करना सीखें।
रो-रो कर पानी बहता, यह दृश्य न हम देखें।
जल ही जीवन है यह सत्य, कभी न भूलो तुम।
जल संरक्षण ही एकमात्र, भविष्य का है वरदान।
उत्तर:
प्रश्न 1: कवि बच्चों को किसका ज्ञान देना चाहता है?
उत्तर: कवि बच्चों को जल संरक्षण का ज्ञान देना चाहता है।
प्रश्न 2: बूँद-बूँद से क्या भरता है?
उत्तर: बूँद-बूँद से सागर भरता है।
प्रश्न 3: जल के आगार कौन-कौन हैं?
उत्तर: नदियाँ, ताल, सरोवर, झरने जल के आगार हैं।
प्रश्न 4: हमें क्या करना सीखना चाहिए?
उत्तर: हमें वर्षा जल का संचय करना सीखना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'जल संरक्षण' या 'जल ही जीवन है'।
प्रश्न 1: कवि बच्चों को किसका ज्ञान देना चाहता है?
उत्तर: कवि बच्चों को जल संरक्षण का ज्ञान देना चाहता है।
प्रश्न 2: बूँद-बूँद से क्या भरता है?
उत्तर: बूँद-बूँद से सागर भरता है।
प्रश्न 3: जल के आगार कौन-कौन हैं?
उत्तर: नदियाँ, ताल, सरोवर, झरने जल के आगार हैं।
प्रश्न 4: हमें क्या करना सीखना चाहिए?
उत्तर: हमें वर्षा जल का संचय करना सीखना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'जल संरक्षण' या 'जल ही जीवन है'।
7. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
ईमानदारी का रास्ता, भले ही कठिन होता।
पर इस पथ पर चलने वाला, हर दिल में रहता खोता।।
सच्चाई की रोशनी में, कितने अंधेरे मिट जाते।
झूठ का सहारा लेकर, लोग स्वयं ही मिट जाते।।
धोखा देकर जीत मिले तो, वह जीत नहीं हार है।
ईमान से हारा हुआ भी, असली शहंशाह है।
सोचो दिल में एक बार तुम, क्या चाहते हो अपने लिए।
ईमानदारी का दामन थामो, सच्चा सुख इसी में है।
ईमानदारी का रास्ता, भले ही कठिन होता।
पर इस पथ पर चलने वाला, हर दिल में रहता खोता।।
सच्चाई की रोशनी में, कितने अंधेरे मिट जाते।
झूठ का सहारा लेकर, लोग स्वयं ही मिट जाते।।
धोखा देकर जीत मिले तो, वह जीत नहीं हार है।
ईमान से हारा हुआ भी, असली शहंशाह है।
सोचो दिल में एक बार तुम, क्या चाहते हो अपने लिए।
ईमानदारी का दामन थामो, सच्चा सुख इसी में है।
उत्तर:
प्रश्न 1: ईमानदारी का रास्ता कैसा होता है?
उत्तर: ईमानदारी का रास्ता कठिन होता है।
प्रश्न 2: झूठ का सहारा लेने वालों का क्या होता है?
उत्तर: झूठ का सहारा लेने वाले स्वयं ही मिट जाते हैं।
प्रश्न 3: कवि के अनुसार धोखा देकर मिली जीत कैसी है?
उत्तर: धोखा देकर मिली जीत हार है।
प्रश्न 4: कवि क्या दामन थामने को कहता है?
उत्तर: कवि ईमानदारी का दामन थामने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'ईमानदारी का महत्व' या 'सच्चाई की राह'।
प्रश्न 1: ईमानदारी का रास्ता कैसा होता है?
उत्तर: ईमानदारी का रास्ता कठिन होता है।
प्रश्न 2: झूठ का सहारा लेने वालों का क्या होता है?
उत्तर: झूठ का सहारा लेने वाले स्वयं ही मिट जाते हैं।
प्रश्न 3: कवि के अनुसार धोखा देकर मिली जीत कैसी है?
उत्तर: धोखा देकर मिली जीत हार है।
प्रश्न 4: कवि क्या दामन थामने को कहता है?
उत्तर: कवि ईमानदारी का दामन थामने को कहता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'ईमानदारी का महत्व' या 'सच्चाई की राह'।
8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
शिक्षक वह दीपक है, जो जग से अंधेरा मिटाता।
ज्ञान रूपी उजियारा फैला, हर मन को सुख पहुँचाता।।
वह तो बस देता है देना, फिर भी भरा रहता।
जैसे सूरज रोज उगे, पर कभी न थकता।।
माँ-बाप ने जनम दिया, तो गुरु ने पहचान दिलाई।
बिना गुरु के जीवन अंधा, यह समझ हर कोई पाई।
गुरु की महिमा अपरंपार, शब्दों में क्या बखानूँ।
चरणों में शीश झुकाकर, बस इतना ही जानूँ।
शिक्षक वह दीपक है, जो जग से अंधेरा मिटाता।
ज्ञान रूपी उजियारा फैला, हर मन को सुख पहुँचाता।।
वह तो बस देता है देना, फिर भी भरा रहता।
जैसे सूरज रोज उगे, पर कभी न थकता।।
माँ-बाप ने जनम दिया, तो गुरु ने पहचान दिलाई।
बिना गुरु के जीवन अंधा, यह समझ हर कोई पाई।
गुरु की महिमा अपरंपार, शब्दों में क्या बखानूँ।
चरणों में शीश झुकाकर, बस इतना ही जानूँ।
उत्तर:
प्रश्न 1: शिक्षक को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: शिक्षक को दीपक के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: शिक्षक क्या फैलाता है?
उत्तर: शिक्षक ज्ञान रूपी उजियारा फैलाता है।
प्रश्न 3: शिक्षक को किसके समान न थकने वाला बताया गया है?
उत्तर: शिक्षक को सूरज के समान न थकने वाला बताया गया है।
प्रश्न 4: माँ-बाप ने जन्म दिया, तो गुरु ने क्या दिया?
उत्तर: माँ-बाप ने जन्म दिया, तो गुरु ने पहचान दिलाई।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'गुरु महिमा' या 'शिक्षक का महत्व'।
प्रश्न 1: शिक्षक को किसके समान बताया गया है?
उत्तर: शिक्षक को दीपक के समान बताया गया है।
प्रश्न 2: शिक्षक क्या फैलाता है?
उत्तर: शिक्षक ज्ञान रूपी उजियारा फैलाता है।
प्रश्न 3: शिक्षक को किसके समान न थकने वाला बताया गया है?
उत्तर: शिक्षक को सूरज के समान न थकने वाला बताया गया है।
प्रश्न 4: माँ-बाप ने जन्म दिया, तो गुरु ने क्या दिया?
उत्तर: माँ-बाप ने जन्म दिया, तो गुरु ने पहचान दिलाई।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'गुरु महिमा' या 'शिक्षक का महत्व'।
9. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
सुबह-सवेरे किरण आई, लाली लिए गगन पर छाई।
फूल-फूल खिल उठे सारे, तितली भी मंडराने आई।।
पंछियों का मधुर कलरव, सुन मन हो जाता बावरा।
नया दिन नई आस लिए, धरती पर उतरा फिर सवेरा।।
ओस की बूँदें मोती सी, पत्तों पर झिलमिलाती।
प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य, मन को अति भाती।
आओ इस दिन को ऐसे जिएँ, जैसे हर दिन हो त्योहार।
प्रकृति का दिया हर उपहार, हम सबका है अधिकार।
सुबह-सवेरे किरण आई, लाली लिए गगन पर छाई।
फूल-फूल खिल उठे सारे, तितली भी मंडराने आई।।
पंछियों का मधुर कलरव, सुन मन हो जाता बावरा।
नया दिन नई आस लिए, धरती पर उतरा फिर सवेरा।।
ओस की बूँदें मोती सी, पत्तों पर झिलमिलाती।
प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य, मन को अति भाती।
आओ इस दिन को ऐसे जिएँ, जैसे हर दिन हो त्योहार।
प्रकृति का दिया हर उपहार, हम सबका है अधिकार।
उत्तर:
प्रश्न 1: सुबह के समय गगन पर क्या छाई थी?
उत्तर: सुबह के समय गगन पर लाली छाई थी।
प्रश्न 2: पंछियों की आवाज़ को कैसा बताया गया है?
उत्तर: पंछियों की आवाज़ को मधुर कलरव बताया गया है।
प्रश्न 3: ओस की बूँदें कैसी लगती हैं?
उत्तर: ओस की बूँदें मोती सी लगती हैं।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार हमें हर दिन कैसे जीना चाहिए?
उत्तर: हर दिन ऐसे जीना चाहिए जैसे त्योहार हो।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सुबह का सौंदर्य' या 'प्रकृति का उपहार'।
प्रश्न 1: सुबह के समय गगन पर क्या छाई थी?
उत्तर: सुबह के समय गगन पर लाली छाई थी।
प्रश्न 2: पंछियों की आवाज़ को कैसा बताया गया है?
उत्तर: पंछियों की आवाज़ को मधुर कलरव बताया गया है।
प्रश्न 3: ओस की बूँदें कैसी लगती हैं?
उत्तर: ओस की बूँदें मोती सी लगती हैं।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार हमें हर दिन कैसे जीना चाहिए?
उत्तर: हर दिन ऐसे जीना चाहिए जैसे त्योहार हो।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सुबह का सौंदर्य' या 'प्रकृति का उपहार'।
10. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मेरा देश महान है, इसकी माटी महान।
यहाँ के वीर सपूतों ने, लिखी वीरता की कहान।।
हिमालय शिखर सर ऊँचा, गंगा-यमुना की धार।
तन-मन इन पर वार दूँ, यह मेरा अभिमान।।
अनेकता में एकता, यहाँ की पहचान।
हर भाषा, हर बोली में, बसता एक भारत महान।
तिरंगा लहराए गगन पर, देखो कितना शानदार।
मेरा देश महान है, यह सबसे ऊँचा मान।
मेरा देश महान है, इसकी माटी महान।
यहाँ के वीर सपूतों ने, लिखी वीरता की कहान।।
हिमालय शिखर सर ऊँचा, गंगा-यमुना की धार।
तन-मन इन पर वार दूँ, यह मेरा अभिमान।।
अनेकता में एकता, यहाँ की पहचान।
हर भाषा, हर बोली में, बसता एक भारत महान।
तिरंगा लहराए गगन पर, देखो कितना शानदार।
मेरा देश महान है, यह सबसे ऊँचा मान।
उत्तर:
प्रश्न 1: कवि ने किसकी माटी महान बताई है?
उत्तर: कवि ने देश (भारत) की माटी महान बताई है।
प्रश्न 2: यहाँ के वीर सपूतों ने क्या लिखी?
उत्तर: यहाँ के वीर सपूतों ने वीरता की कहान लिखी।
प्रश्न 3: भारत की पहचान क्या बताई गई है?
उत्तर: अनेकता में एकता भारत की पहचान बताई गई है।
प्रश्न 4: गगन पर क्या लहराता है?
उत्तर: गगन पर तिरंगा लहराता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'मेरा देश महान' या 'भारत-वंदना'।
प्रश्न 1: कवि ने किसकी माटी महान बताई है?
उत्तर: कवि ने देश (भारत) की माटी महान बताई है।
प्रश्न 2: यहाँ के वीर सपूतों ने क्या लिखी?
उत्तर: यहाँ के वीर सपूतों ने वीरता की कहान लिखी।
प्रश्न 3: भारत की पहचान क्या बताई गई है?
उत्तर: अनेकता में एकता भारत की पहचान बताई गई है।
प्रश्न 4: गगन पर क्या लहराता है?
उत्तर: गगन पर तिरंगा लहराता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'मेरा देश महान' या 'भारत-वंदना'।
11. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, तब-तब प्रभु ने अवतार लिया।
राम बने अयोध्या में, कृष्ण बने मथुरा में।।
सत्य की जीत सदा हुई, असत्य मिटा धरा से।
गीता का उपदेश अनोखा, मिला हमें भगवान से।।
राम ने सिखाया मर्यादा, कृष्ण ने प्रेम-भक्ति।
गुरु गोविंद सिंह ने दी, वीरता की शक्ति।
सब धर्मों का सम्मान, यह भारत की परंपरा।
यहाँ सिखाते गुरु-ग्रंथ, कुरान, बाइबिल और गीता।
जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, तब-तब प्रभु ने अवतार लिया।
राम बने अयोध्या में, कृष्ण बने मथुरा में।।
सत्य की जीत सदा हुई, असत्य मिटा धरा से।
गीता का उपदेश अनोखा, मिला हमें भगवान से।।
राम ने सिखाया मर्यादा, कृष्ण ने प्रेम-भक्ति।
गुरु गोविंद सिंह ने दी, वीरता की शक्ति।
सब धर्मों का सम्मान, यह भारत की परंपरा।
यहाँ सिखाते गुरु-ग्रंथ, कुरान, बाइबिल और गीता।
उत्तर:
प्रश्न 1: कब-कब प्रभु ने अवतार लिया?
उत्तर: जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, तब-तब प्रभु ने अवतार लिया।
प्रश्न 2: राम कहाँ अवतरित हुए और कृष्ण कहाँ?
उत्तर: राम अयोध्या में और कृष्ण मथुरा में अवतरित हुए।
प्रश्न 3: गीता का उपदेश किससे मिला?
उत्तर: गीता का उपदेश भगवान से मिला।
प्रश्न 4: राम और कृष्ण ने क्या-क्या सिखाया?
उत्तर: राम ने मर्यादा और कृष्ण ने प्रेम-भक्ति सिखाई।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'धर्म की राह' या 'अवतारों की गाथा'।
प्रश्न 1: कब-कब प्रभु ने अवतार लिया?
उत्तर: जब-जब धरती पर पाप बढ़ा, तब-तब प्रभु ने अवतार लिया।
प्रश्न 2: राम कहाँ अवतरित हुए और कृष्ण कहाँ?
उत्तर: राम अयोध्या में और कृष्ण मथुरा में अवतरित हुए।
प्रश्न 3: गीता का उपदेश किससे मिला?
उत्तर: गीता का उपदेश भगवान से मिला।
प्रश्न 4: राम और कृष्ण ने क्या-क्या सिखाया?
उत्तर: राम ने मर्यादा और कृष्ण ने प्रेम-भक्ति सिखाई।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'धर्म की राह' या 'अवतारों की गाथा'।
12. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
आओ बुनें एकता का धागा, प्रेम-सूत्र में सबको बाँधें।
भेद-भाव की दीवार गिरा, हम सब मिलकर आगे बढ़ें।।
कोई न छोटा कोई न बड़ा, सब एक समान।
यही हमारा संदेश पहुँचे, देश-विदेश अब तक जान।।
जाति-पाँति के नाम पे, क्यों बाँटे हम अपना मन?
मानवता ही सबसे बड़ा, सच्चा धर्म है यह तन।
आओ हाथ बढ़ाएँ सब, कमज़ोरों का सहारा बनें।
एकता ही शक्ति है अपनी, इस सत्य को पहचानें।
आओ बुनें एकता का धागा, प्रेम-सूत्र में सबको बाँधें।
भेद-भाव की दीवार गिरा, हम सब मिलकर आगे बढ़ें।।
कोई न छोटा कोई न बड़ा, सब एक समान।
यही हमारा संदेश पहुँचे, देश-विदेश अब तक जान।।
जाति-पाँति के नाम पे, क्यों बाँटे हम अपना मन?
मानवता ही सबसे बड़ा, सच्चा धर्म है यह तन।
आओ हाथ बढ़ाएँ सब, कमज़ोरों का सहारा बनें।
एकता ही शक्ति है अपनी, इस सत्य को पहचानें।
उत्तर:
प्रश्न 1: कवि क्या बुनने को कहता है?
उत्तर: कवि एकता का धागा बुनने को कहता है।
प्रश्न 2: हमें क्या गिराना चाहिए?
उत्तर: हमें भेद-भाव की दीवार गिरानी चाहिए।
प्रश्न 3: सबसे बड़ा सच्चा धर्म क्या है?
उत्तर: मानवता ही सबसे बड़ा सच्चा धर्म है।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार हम क्या बनें?
उत्तर: हम कमज़ोरों का सहारा बनें।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'एकता का संदेश' या 'मानवता धर्म'।
प्रश्न 1: कवि क्या बुनने को कहता है?
उत्तर: कवि एकता का धागा बुनने को कहता है।
प्रश्न 2: हमें क्या गिराना चाहिए?
उत्तर: हमें भेद-भाव की दीवार गिरानी चाहिए।
प्रश्न 3: सबसे बड़ा सच्चा धर्म क्या है?
उत्तर: मानवता ही सबसे बड़ा सच्चा धर्म है।
प्रश्न 4: कवि के अनुसार हम क्या बनें?
उत्तर: हम कमज़ोरों का सहारा बनें।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'एकता का संदेश' या 'मानवता धर्म'।
13. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
चाँद तारे संग खेले, रिमझिम बरसे पानी।
धरती सूखी प्यासी थी, उसे मिली यह नानी।।
मोर पपीहा झूम उठे, नाचे सबके मन।
बादल गरजे गगन मगन, खुशियों का है क्षण।।
हरी-भरी धरती देखो, हर पत्ता गाता है।
वर्षा की हर बूँद में, जीवन समाता है।
प्रकृति का यह नजारा, मन को अति लुभाता।
बारिश की रिमझिम फुहार, सबको सुख पहुँचाता।
चाँद तारे संग खेले, रिमझिम बरसे पानी।
धरती सूखी प्यासी थी, उसे मिली यह नानी।।
मोर पपीहा झूम उठे, नाचे सबके मन।
बादल गरजे गगन मगन, खुशियों का है क्षण।।
हरी-भरी धरती देखो, हर पत्ता गाता है।
वर्षा की हर बूँद में, जीवन समाता है।
प्रकृति का यह नजारा, मन को अति लुभाता।
बारिश की रिमझिम फुहार, सबको सुख पहुँचाता।
उत्तर:
प्रश्न 1: चाँद किसके संग खेलता है?
उत्तर: चाँद तारों के संग खेलता है।
प्रश्न 2: किसके बरसने से मोर-पपीहा झूम उठे?
उत्तर: पानी बरसने से मोर-पपीहा झूम उठे।
प्रश्न 3: धरती कैसी थी?
उत्तर: धरती सूखी और प्यासी थी।
प्रश्न 4: वर्षा की हर बूँद में क्या समाता है?
उत्तर: वर्षा की हर बूँद में जीवन समाता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'वर्षा का आगमन' या 'रिमझिम बरखा'।
प्रश्न 1: चाँद किसके संग खेलता है?
उत्तर: चाँद तारों के संग खेलता है।
प्रश्न 2: किसके बरसने से मोर-पपीहा झूम उठे?
उत्तर: पानी बरसने से मोर-पपीहा झूम उठे।
प्रश्न 3: धरती कैसी थी?
उत्तर: धरती सूखी और प्यासी थी।
प्रश्न 4: वर्षा की हर बूँद में क्या समाता है?
उत्तर: वर्षा की हर बूँद में जीवन समाता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'वर्षा का आगमन' या 'रिमझिम बरखा'।
14. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
यह सत्य सदा याद रखो, हार न मानो मीत।।
संकल्प करो दृढ़ मन में, कठिनाइयाँ हों कितनी।
हौसला बुलंद रखो तुम, मंज़िल मिलेगी अपनी।।
नदिया बहे अड़ी-अड़ी, पर सागर से मिलन होई।
गिर के संभलना सीखो, यह जीवन की खोई।
विश्वास रखो खुद पे थोड़ा, सपने साकार होंगे।
मेहनत का फल मीठा होगा, दिन भी बहार होंगे।
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
यह सत्य सदा याद रखो, हार न मानो मीत।।
संकल्प करो दृढ़ मन में, कठिनाइयाँ हों कितनी।
हौसला बुलंद रखो तुम, मंज़िल मिलेगी अपनी।।
नदिया बहे अड़ी-अड़ी, पर सागर से मिलन होई।
गिर के संभलना सीखो, यह जीवन की खोई।
विश्वास रखो खुद पे थोड़ा, सपने साकार होंगे।
मेहनत का फल मीठा होगा, दिन भी बहार होंगे।
उत्तर:
प्रश्न 1: मन के हारे क्या होता है?
उत्तर: मन के हारे हार होता है।
प्रश्न 2: कवि क्या न मानने को कहता है?
उत्तर: कवि हार न मानने को कहता है।
प्रश्न 3: नदिया कैसे बहती है?
उत्तर: नदिया अड़ी-अड़ी (लगातार) बहती है।
प्रश्न 4: हमें क्या सीखना चाहिए?
उत्तर: हमें गिर कर संभलना सीखना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हौसले की उड़ान' या 'मन के जीते जीत'।
प्रश्न 1: मन के हारे क्या होता है?
उत्तर: मन के हारे हार होता है।
प्रश्न 2: कवि क्या न मानने को कहता है?
उत्तर: कवि हार न मानने को कहता है।
प्रश्न 3: नदिया कैसे बहती है?
उत्तर: नदिया अड़ी-अड़ी (लगातार) बहती है।
प्रश्न 4: हमें क्या सीखना चाहिए?
उत्तर: हमें गिर कर संभलना सीखना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'हौसले की उड़ान' या 'मन के जीते जीत'।
15. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
एक बूँद ने कहा सागर से, मैं तो बहुत छोटी हूँ।
सागर बोला तू ही तो मेरा, आधार है मोटी।।
बूँद-बूँद से ही बनता, विशाल जल का भंडार।
तू न होती तो मैं कहाँ, यह समझ ले एक बार।।
छोटे से भी बड़ा काम, होता है हर दिन।
तूटे तिनके जोड़ कर, बनता मजबूत बंधन।
छोटा समझ न आँक किसी को, हर कोई है महान।
रेत का एक कण भी करता, सागर का सम्मान।
एक बूँद ने कहा सागर से, मैं तो बहुत छोटी हूँ।
सागर बोला तू ही तो मेरा, आधार है मोटी।।
बूँद-बूँद से ही बनता, विशाल जल का भंडार।
तू न होती तो मैं कहाँ, यह समझ ले एक बार।।
छोटे से भी बड़ा काम, होता है हर दिन।
तूटे तिनके जोड़ कर, बनता मजबूत बंधन।
छोटा समझ न आँक किसी को, हर कोई है महान।
रेत का एक कण भी करता, सागर का सम्मान।
उत्तर:
प्रश्न 1: बूँद ने सागर से क्या कहा?
उत्तर: बूँद ने कहा कि मैं तो बहुत छोटी हूँ।
प्रश्न 2: सागर ने बूँद को क्या बताया?
उत्तर: सागर ने बताया कि बूँद ही उसका आधार है।
प्रश्न 3: विशाल जल का भंडार कैसे बनता है?
उत्तर: विशाल जल का भंडार बूँद-बूँद से बनता है।
प्रश्न 4: हमें किसी को कैसे नहीं आँकना चाहिए?
उत्तर: हमें किसी को छोटा समझकर नहीं आँकना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'बूँद का महत्व' या 'छोटे की पहचान'।
प्रश्न 1: बूँद ने सागर से क्या कहा?
उत्तर: बूँद ने कहा कि मैं तो बहुत छोटी हूँ।
प्रश्न 2: सागर ने बूँद को क्या बताया?
उत्तर: सागर ने बताया कि बूँद ही उसका आधार है।
प्रश्न 3: विशाल जल का भंडार कैसे बनता है?
उत्तर: विशाल जल का भंडार बूँद-बूँद से बनता है।
प्रश्न 4: हमें किसी को कैसे नहीं आँकना चाहिए?
उत्तर: हमें किसी को छोटा समझकर नहीं आँकना चाहिए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'बूँद का महत्व' या 'छोटे की पहचान'।
16. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
नदी किनारे एक बहेलिया, फँसाता पंछी जाल में।
एक चतुर चिड़िया ने देखा, दूसरे संग यह जाल में।।
उड़ न सके वे अब अकेले, फंसे जाल के बंधन में।
तभी चिड़िया ने सोचा कुछ, एक नई उलझन में।।
आओ मिलकर एक साथ, हम सब उड़ान भरें।
एकता में शक्ति है अपनी, जाल तोड़ आगे बढ़ें।
सबने मिलकर एक साथ, जोर लगाया भारी।
जाल टूटा, पंछी उड़े, मिली सबको आज़ादी।
नदी किनारे एक बहेलिया, फँसाता पंछी जाल में।
एक चतुर चिड़िया ने देखा, दूसरे संग यह जाल में।।
उड़ न सके वे अब अकेले, फंसे जाल के बंधन में।
तभी चिड़िया ने सोचा कुछ, एक नई उलझन में।।
आओ मिलकर एक साथ, हम सब उड़ान भरें।
एकता में शक्ति है अपनी, जाल तोड़ आगे बढ़ें।
सबने मिलकर एक साथ, जोर लगाया भारी।
जाल टूटा, पंछी उड़े, मिली सबको आज़ादी।
उत्तर:
प्रश्न 1: बहेलिया कहाँ पंछी फँसाता था?
उत्तर: बहेलिया नदी किनारे पंछी फँसाता था।
प्रश्न 2: पंछी कहाँ फँस गए?
उत्तर: पंछी जाल में फँस गए।
प्रश्न 3: चतुर चिड़िया ने क्या सुझाव दिया?
उत्तर: चतुर चिड़िया ने मिलकर एक साथ उड़ान भरने का सुझाव दिया।
प्रश्न 4: पंछियों को कैसे आज़ादी मिली?
उत्तर: सबने मिलकर एक साथ जोर लगाया, जाल टूट गया और पंछी उड़ गए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'एकता में शक्ति' या 'चतुर चिड़िया'।
प्रश्न 1: बहेलिया कहाँ पंछी फँसाता था?
उत्तर: बहेलिया नदी किनारे पंछी फँसाता था।
प्रश्न 2: पंछी कहाँ फँस गए?
उत्तर: पंछी जाल में फँस गए।
प्रश्न 3: चतुर चिड़िया ने क्या सुझाव दिया?
उत्तर: चतुर चिड़िया ने मिलकर एक साथ उड़ान भरने का सुझाव दिया।
प्रश्न 4: पंछियों को कैसे आज़ादी मिली?
उत्तर: सबने मिलकर एक साथ जोर लगाया, जाल टूट गया और पंछी उड़ गए।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'एकता में शक्ति' या 'चतुर चिड़िया'।
17. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करै सो तस फल चाखा।
यह संदेश हमें युगों से, मिलता हर युग-पल-पल।।
तू बोएगा अगर बबूल तो, आम कहाँ से पाएगा।
जैसा बीज बोओगे तू, वैसा ही फल खाएगा।।
अच्छा कर अच्छा होगा, बुरा कर बुरा परिणाम।
यही सृष्टि का नियम है, समझो तुम यह काम।
इसलिए हर कर्म सोच-समझ, करो तुम भव को सँवार।
कर्म ही पूजा है सबसे बड़ी, यही जीवन का सार।
कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करै सो तस फल चाखा।
यह संदेश हमें युगों से, मिलता हर युग-पल-पल।।
तू बोएगा अगर बबूल तो, आम कहाँ से पाएगा।
जैसा बीज बोओगे तू, वैसा ही फल खाएगा।।
अच्छा कर अच्छा होगा, बुरा कर बुरा परिणाम।
यही सृष्टि का नियम है, समझो तुम यह काम।
इसलिए हर कर्म सोच-समझ, करो तुम भव को सँवार।
कर्म ही पूजा है सबसे बड़ी, यही जीवन का सार।
उत्तर:
प्रश्न 1: कवि ने क्या प्रधान बताया है?
उत्तर: कवि ने कर्म प्रधान बताया है।
प्रश्न 2: बबूल बोने से क्या मिलेगा?
उत्तर: बबूल बोने से आम नहीं मिलेगा।
प्रश्न 3: व्यक्ति को कैसा फल मिलता है?
उत्तर: व्यक्ति को जैसा बीज बोता है, वैसा ही फल मिलता है।
प्रश्न 4: सृष्टि का क्या नियम है?
उत्तर: अच्छा करने पर अच्छा और बुरा करने पर बुरा परिणाम मिलता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'कर्म का फल' या 'जैसा करोगे वैसा भरोगे'।
प्रश्न 1: कवि ने क्या प्रधान बताया है?
उत्तर: कवि ने कर्म प्रधान बताया है।
प्रश्न 2: बबूल बोने से क्या मिलेगा?
उत्तर: बबूल बोने से आम नहीं मिलेगा।
प्रश्न 3: व्यक्ति को कैसा फल मिलता है?
उत्तर: व्यक्ति को जैसा बीज बोता है, वैसा ही फल मिलता है।
प्रश्न 4: सृष्टि का क्या नियम है?
उत्तर: अच्छा करने पर अच्छा और बुरा करने पर बुरा परिणाम मिलता है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'कर्म का फल' या 'जैसा करोगे वैसा भरोगे'।
18. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
मैं नन्हीं-सी तितली, रंग-बिरंगे पंख मेरे।
फूल-फूल पर मंडराऊँ, बागों में मैं फिरूँ अकेले।।
भौंरे आए झूम-झूम, मधुरस पीना उनको भाए।
फूल खिले मुस्काते सारे, खुशबू चहुँ ओर समाए।।
प्रकृति की इस छटा को देखो, कितना सुंदर उपवन।
हर पत्ती हर डाली पे, बसता है मनोहर जीवन।
इसे सँभालो, इसे बचाओ, यही हमारा दायित्व।
प्रकृति की हर कण-कण में, बसा है परमात्म तत्त्व।
मैं नन्हीं-सी तितली, रंग-बिरंगे पंख मेरे।
फूल-फूल पर मंडराऊँ, बागों में मैं फिरूँ अकेले।।
भौंरे आए झूम-झूम, मधुरस पीना उनको भाए।
फूल खिले मुस्काते सारे, खुशबू चहुँ ओर समाए।।
प्रकृति की इस छटा को देखो, कितना सुंदर उपवन।
हर पत्ती हर डाली पे, बसता है मनोहर जीवन।
इसे सँभालो, इसे बचाओ, यही हमारा दायित्व।
प्रकृति की हर कण-कण में, बसा है परमात्म तत्त्व।
उत्तर:
प्रश्न 1: तितली के पंख कैसे हैं?
उत्तर: तितली के पंख रंग-बिरंगे हैं।
प्रश्न 2: भौंरे क्या पीना पसंद करते हैं?
उत्तर: भौंरे मधुरस पीना पसंद करते हैं।
प्रश्न 3: फूल कैसे खिले हैं?
उत्तर: फूल मुस्काते हुए खिले हैं।
प्रश्न 4: कवि का क्या दायित्व बताया गया है?
उत्तर: प्रकृति को सँभालना और बचाना दायित्व बताया गया है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'प्रकृति का सौंदर्य' या 'तितली और बगिया'।
प्रश्न 1: तितली के पंख कैसे हैं?
उत्तर: तितली के पंख रंग-बिरंगे हैं।
प्रश्न 2: भौंरे क्या पीना पसंद करते हैं?
उत्तर: भौंरे मधुरस पीना पसंद करते हैं।
प्रश्न 3: फूल कैसे खिले हैं?
उत्तर: फूल मुस्काते हुए खिले हैं।
प्रश्न 4: कवि का क्या दायित्व बताया गया है?
उत्तर: प्रकृति को सँभालना और बचाना दायित्व बताया गया है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'प्रकृति का सौंदर्य' या 'तितली और बगिया'।
19. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
सुबह उठो तो यह ठानो, करो कुछ ऐसा काम।
जिससे जग में छा जाए, तुम्हारा नाम और काम।।
लक्ष्य बड़ा रखो हमेशा, उसे पाने की चाह रखो।
मेहनत करो हर रोज तुम, हर सपने को साकार करो।।
नाव नहीं है तो क्या हुआ, तैरना ही सीख लो।
मंज़िल मिले न मिले, हौसला ही रख लो।
असफलता से डरो न तुम, यह तो सीढ़ी है पथ की।
गिर कर उठना सीख लो, यही कहानी है जीत की।
सुबह उठो तो यह ठानो, करो कुछ ऐसा काम।
जिससे जग में छा जाए, तुम्हारा नाम और काम।।
लक्ष्य बड़ा रखो हमेशा, उसे पाने की चाह रखो।
मेहनत करो हर रोज तुम, हर सपने को साकार करो।।
नाव नहीं है तो क्या हुआ, तैरना ही सीख लो।
मंज़िल मिले न मिले, हौसला ही रख लो।
असफलता से डरो न तुम, यह तो सीढ़ी है पथ की।
गिर कर उठना सीख लो, यही कहानी है जीत की।
उत्तर:
प्रश्न 1: सुबह उठकर हमें क्या ठानना चाहिए?
उत्तर: सुबह उठकर कुछ ऐसा काम करने को ठानना चाहिए जिससे जग में नाम छा जाए।
प्रश्न 2: हमें कैसा लक्ष्य रखना चाहिए?
उत्तर: हमें बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए।
प्रश्न 3: नाव नहीं होने पर क्या सीखना चाहिए?
उत्तर: नाव नहीं होने पर तैरना सीखना चाहिए।
प्रश्न 4: असफलता कैसी है?
उत्तर: असफलता सफलता की सीढ़ी है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सफलता का मंत्र' या 'हौसला बुलंद'।
प्रश्न 1: सुबह उठकर हमें क्या ठानना चाहिए?
उत्तर: सुबह उठकर कुछ ऐसा काम करने को ठानना चाहिए जिससे जग में नाम छा जाए।
प्रश्न 2: हमें कैसा लक्ष्य रखना चाहिए?
उत्तर: हमें बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए।
प्रश्न 3: नाव नहीं होने पर क्या सीखना चाहिए?
उत्तर: नाव नहीं होने पर तैरना सीखना चाहिए।
प्रश्न 4: असफलता कैसी है?
उत्तर: असफलता सफलता की सीढ़ी है।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सफलता का मंत्र' या 'हौसला बुलंद'।
20. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पद्यांश:
शीतल पवन बहती सुहानी, सावन की यह रुत है।
हरे-भरे ये पेड़-पौधे, मन को कितने सुखद है।।
कहीं कजरी कहीं बिरहा, गूँजे मीठे गान।
सखियाँ संग झूला झूले, खुशियों का है समान।।
घिर-घिर आए बादल काले, बरसे रिमझिम पानी।
धरती की प्यास बुझे अब, हरियाली छाई।
सावन का यह मास प्यारा, मनभावन सुखदायी।
प्रकृति संग मन भी नाचे, यह ऋतु सबको भायी।
शीतल पवन बहती सुहानी, सावन की यह रुत है।
हरे-भरे ये पेड़-पौधे, मन को कितने सुखद है।।
कहीं कजरी कहीं बिरहा, गूँजे मीठे गान।
सखियाँ संग झूला झूले, खुशियों का है समान।।
घिर-घिर आए बादल काले, बरसे रिमझिम पानी।
धरती की प्यास बुझे अब, हरियाली छाई।
सावन का यह मास प्यारा, मनभावन सुखदायी।
प्रकृति संग मन भी नाचे, यह ऋतु सबको भायी।
उत्तर:
प्रश्न 1: यह किस ऋतु का वर्णन है?
उत्तर: यह सावन (वर्षा) ऋतु का वर्णन है।
प्रश्न 2: पवन कैसी बह रही है?
उत्तर: पवन शीतल और सुहानी बह रही है।
प्रश्न 3: सखियाँ क्या कर रही हैं?
उत्तर: सखियाँ झूला झूल रही हैं।
प्रश्न 4: बादल कैसे हैं?
उत्तर: बादल काले हैं और घिर-घिर कर आ रहे हैं।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सावन का मौसम' या 'वर्षा ऋतु'।
प्रश्न 1: यह किस ऋतु का वर्णन है?
उत्तर: यह सावन (वर्षा) ऋतु का वर्णन है।
प्रश्न 2: पवन कैसी बह रही है?
उत्तर: पवन शीतल और सुहानी बह रही है।
प्रश्न 3: सखियाँ क्या कर रही हैं?
उत्तर: सखियाँ झूला झूल रही हैं।
प्रश्न 4: बादल कैसे हैं?
उत्तर: बादल काले हैं और घिर-घिर कर आ रहे हैं।
प्रश्न 5: पद्यांश का उचित शीर्षक क्या हो सकता है?
उत्तर: 'सावन का मौसम' या 'वर्षा ऋतु'।