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वाच्य परिवर्तन – परिभाषा, प्रकार, उपयोग और उदाहरण (Vachya Parivartan – Voice Change) | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 7 JULY 2026

क्या आप जानते हैं कि "राम ने किताब पढ़ी" और "किताब राम द्वारा पढ़ी गई" – इन दोनों में एक ही बात कही गई है, पर पहले में 'राम' (कर्ता) को महत्व दिया गया है, और दूसरे में 'किताब' (कर्म) को? पहला वाक्य कर्तृवाच्य (Active Voice) का उदाहरण है, दूसरा कर्मवाच्य (Passive Voice) का – और एक तीसरा प्रकार भी है – भाववाच्य (Impersonal Voice) – जिसमें केवल क्रिया का महत्व होता है – "खाया जाता है।" हिंदी व्याकरण में वाच्य परिवर्तन (Voice Change) एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है – यह वाक्य-रचना को समझने और लेखन कौशल को बेहतर बनाने में सहायक है। इस पोस्ट में हम वाच्य परिवर्तन – तीनों वाच्यों की परिभाषा, पहचान, परिवर्तन के नियम, उदाहरण, और वाक्यों में प्रयोग – को विस्तार से समझेंगे – और साथ ही सामान्य त्रुटियाँ और उनके शुद्ध रूप को भी जानेंगे। यह पोस्ट वाक्य रूपांतरण श्रृंखला की तीसरी कड़ी है – कक्षा 8‑9 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 8-9 | CBSE एवं UP Board



1. वाच्य का परिचय – तीनों प्रकार

वाच्य (Voice) क्रिया का वह रूप है जो यह बताता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म, या क्रिया में से किसे महत्व दिया गया है। हिंदी में तीन प्रकार के वाच्य होते हैं – कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य

तीनों वाच्यों की सरल परिभाषा:
  • कर्तृवाच्य (Active Voice): जब वाक्य में कर्ता को महत्व दिया जाता है – क्रिया कर्ता के अनुसार आती है।
    उदाहरण: “राम पढ़ता है।”
  • कर्मवाच्य (Passive Voice): जब वाक्य में कर्म को महत्व दिया जाता है – क्रिया कर्म के अनुसार आती है – कर्ता के साथ 'द्वारा' या 'से' आता है।
    उदाहरण: “किताब राम द्वारा पढ़ी जाती है।”
  • भाववाच्य (Impersonal Voice): जब वाक्य में केवल क्रिया को महत्व दिया जाता है – न तो कर्ता का, न ही कर्म का – क्रिया तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग में आती है।
    उदाहरण:पढ़ा जाता है।”

पहचान: कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान, कर्मवाच्य में 'द्वारा' या 'से' के साथ कर्ता और कर्म प्रधान, भाववाच्य में केवल क्रिया – 'जाना' के साथ।

2. वाच्य परिवर्तन के नियम

एक वाच्य से दूसरे वाच्य में बदलने के लिए तीन मुख्य नियम हैं –

  • नियम 1 – कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य: कर्ता को 'द्वारा' या 'से' में बदलें – कर्म को कर्ता बनाएँ – क्रिया का रूप कर्म के अनुसार बदलें (लिंग, वचन, काल) – और 'जाना' सहायक क्रिया जोड़ें।
    “राम ने किताब पढ़ी।” → “किताब राम द्वारा पढ़ी गई।”
  • नियम 2 – कर्तृवाच्य → भाववाच्य: कर्ता और कर्म दोनों हटाएँ – केवल क्रिया को 'जाना' के साथ प्रयोग करें – क्रिया तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग में।
    “राम खाता है।” → “खाया जाता है।”
  • नियम 3 – कर्मवाच्य → कर्तृवाच्य (विपरीत): 'द्वारा' के साथ आए कर्ता को मुख्य कर्ता बनाएँ – कर्म को कर्म बनाएँ – क्रिया का रूप कर्ता के अनुसार बदलें।
    “किताब राम द्वारा पढ़ी गई।” → “राम ने किताब पढ़ी।”
परिवर्तन नियम उदाहरण
कर्तृ → कर्म कर्ता → 'द्वारा', कर्म → कर्ता, क्रिया → कर्म के अनुसार राम ने किताब पढ़ी → किताब राम द्वारा पढ़ी गई
कर्तृ → भाव कर्ता/कर्म हटाएँ, क्रिया + 'जाना' राम खाता है → खाया जाता है
कर्म → कर्तृ 'द्वारा' से कर्ता निकालें, क्रिया कर्ता के अनुसार किताब राम द्वारा पढ़ी गई → राम ने किताब पढ़ी

3. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलना

कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलने के चरण

  1. कर्ता को 'द्वारा' या 'से' में बदलें: “राम” → “राम द्वारा
  2. कर्म को कर्ता बनाएँ: “किताब” → “किताब” (कर्ता बनी)
  3. क्रिया का रूप कर्म के अनुसार बदलें: “पढ़ी” (स्त्रीलिंग, एकवचन) → “पढ़ी गई” – कर्म के अनुसार
  4. सहायक क्रिया 'जाना' जोड़ें: “पढ़ी गई” – यह कर्मवाच्य बना
कर्तृवाच्य कर्मवाच्य काल
राम किताब पढ़ता है।किताब राम द्वारा पढ़ी जाती है।वर्तमान
राम ने किताब पढ़ी।किताब राम द्वारा पढ़ी गई।भूत
राम किताब पढ़ेगा।किताब राम द्वारा पढ़ी जाएगी।भविष्य
सीता गाना गाती है।गाना सीता द्वारा गाया जाता है।वर्तमान
माँ ने खाना बनाया।खाना माँ द्वारा बनाया गया।भूत

4. कर्तृवाच्य से भाववाच्य में बदलना

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में बदलने के चरण

  1. कर्ता और कर्म दोनों हटाएँ: “राम फल खाता है।” → “खाया जाता है।” – कर्ता और कर्म दोनों हट गए
  2. क्रिया को तीसरे पुरुष, एकवचन, पुल्लिंग में बदलें: “खाता” → “खाया” (भूतकालिक कृदंत) – और 'जाता है' जोड़ें
  3. सहायक क्रिया 'जाना' का प्रयोग करें: “खाया जाता है” – यह भाववाच्य है
कर्तृवाच्य भाववाच्य काल
राम खाता है।खाया जाता है।वर्तमान
राम ने खाना खाया।खाया गया।भूत
राम खाएगा।खाया जाएगा।भविष्य
बच्चे खेलते हैं।खेला जाता है।वर्तमान
सीता गाती है।गाया जाता है।वर्तमान
ट्रिक – याद रखें:कर्तृवाच्यकर्मवाच्य: कर्ता → 'द्वारा', कर्म → कर्ता, क्रिया बदले; कर्तृवाच्यभाववाच्य: कर्ता-कर्म हटाएँ, क्रिया + 'जाना'; 'राम ने किताब पढ़ी' → 'किताब राम द्वारा पढ़ी गई' (कर्म); 'राम खाता है' → 'खाया जाता है' (भाव)।”

5. सामान्य त्रुटियाँ और शुद्ध रूप

वाच्य परिवर्तन में होने वाली सामान्य गलतियाँ

अशुद्ध परिवर्तनशुद्ध परिवर्तनत्रुटि का प्रकार
राम ने किताब पढ़ी। → किताब राम द्वारा पढ़ी।→ किताब राम द्वारा पढ़ी गई।'गई' (सहायक क्रिया) का अभाव
राम खाता है। → खाया है।→ खाया जाता है।'जाता है' का अभाव – भाववाच्य में 'जाना' आवश्यक
सीता गाना गाती है। → गाना सीता द्वारा गाया जाता है।सही है
राम ने किताब पढ़ी। → किताब पढ़ी गई।→ किताब राम द्वारा पढ़ी गई।कर्ता (राम) को 'द्वारा' के साथ रखना आवश्यक
वह जाता है। → जाया जाता है।→ जाया नहीं – 'जाना' अकर्मक है – इसका कर्मवाच्य/भाववाच्य नहीं बनताअकर्मक क्रिया का वाच्य नहीं बनता
ट्रिक – याद रखें:कर्मवाच्य में 'गई/गया/गए' + 'द्वारा'; भाववाच्य में 'जाता है/जाया गया' – अकर्मक क्रिया का वाच्य नहीं बनता – 'जाना', 'सोना', 'रोना' – इनका कर्मवाच्य/भाववाच्य नहीं बनता। हमेशा सकर्मक क्रिया का ही वाच्य बनता है।”


हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “राम ने किताब पढ़ी।” – इस कर्तृवाच्य वाक्य को कर्मवाच्य और भाववाच्य में बदलें।
उत्तर देखें
कर्मवाच्य: “किताब राम द्वारा पढ़ी गई।”
भाववाच्य: “पढ़ी गई।” (या “पढ़ा गया” – कर्म के बिना) – पर भाववाच्य में 'पढ़ा गया' अधिक सामान्य है – “पढ़ा गया।”
व्याख्या: कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य: कर्ता 'राम' → 'राम द्वारा', कर्म 'किताब' → कर्ता, क्रिया 'पढ़ी' → 'पढ़ी गई'। भाववाच्य: कर्ता-कर्म हटाए, क्रिया 'पढ़ा गया'।
उदाहरण 2
प्रश्न: “सीता गाना गाती है।” – इस कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में बदलें।
उत्तर देखें
उत्तर: “गाना सीता द्वारा गाया जाता है।”
व्याख्या: कर्ता 'सीता' → 'सीता द्वारा', कर्म 'गाना' → कर्ता, क्रिया 'गाती है' → 'गाया जाता है' – कर्म के अनुसार (गाना पुल्लिंग, एकवचन) – 'गाया' सही है।
उदाहरण 3
प्रश्न: “माँ ने खाना बनाया।” – इस वाक्य को कर्मवाच्य और भाववाच्य में बदलें।
उत्तर देखें
कर्मवाच्य: “खाना माँ द्वारा बनाया गया।”
भाववाच्य: “बनाया गया।”
व्याख्या: कर्मवाच्य में 'खाना' (कर्म) कर्ता बना, 'माँ' → 'माँ द्वारा', क्रिया 'बनाया' → 'बनाया गया'। भाववाच्य में कर्ता-कर्म हटे, केवल 'बनाया गया'।
उदाहरण 4
प्रश्न: “बच्चे खेलते हैं।” – क्या इस वाक्य का कर्मवाच्य बन सकता है? यदि नहीं, तो क्यों?
उत्तर देखें
उत्तर: नहीं – क्योंकि 'खेलते' एक अकर्मक क्रिया है – इसमें कोई कर्म नहीं है – इसलिए कर्मवाच्य नहीं बनता।
व्याख्या: केवल सकर्मक क्रियाओं का ही कर्मवाच्य बनता है – 'खेलना' अकर्मक है – 'खेला जाता है' – भाववाच्य बन सकता है पर कर्मवाच्य नहीं।
उदाहरण 5
प्रश्न: “राम फल खाता है।” – इस वाक्य का भाववाच्य बनाएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: “फल खाया जाता है।” (या “खाया जाता है।”)
व्याख्या: कर्ता 'राम' और कर्म 'फल' – दोनों हटाए – क्रिया 'खाता' → 'खाया जाता है' – यह भाववाच्य है – हालाँकि 'फल' कर्म है, पर भाववाच्य में उसे भी हटा सकते हैं – 'खाया जाता है' अधिक सामान्य है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“पिताजी ने अखबार पढ़ा।” – इस वाक्य को कर्मवाच्य में बदलें।
उत्तर देखें
उत्तर: “अखबार पिताजी द्वारा पढ़ा गया।”
प्रश्न 2
“बच्चे पार्क में खेलते हैं।” – क्या इस वाक्य का कर्मवाच्य बनेगा? कारण सहित बताएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: नहीं – 'खेलते' अकर्मक क्रिया है – इसमें कर्म नहीं है – इसलिए कर्मवाच्य नहीं बनता।
प्रश्न 3
“सीता गाना गाती है।” – इस वाक्य को भाववाच्य में बदलें।
उत्तर देखें
उत्तर: “गाया जाता है।”
प्रश्न 4
कर्मवाच्य में कर्ता के साथ क्या लगता है?
उत्तर देखें
उत्तर: कर्ता के साथ 'द्वारा' या 'से' लगता है – जैसे – “राम द्वारा” या “राम से”।
प्रश्न 5
“राम सोता है।” – क्या इस वाक्य का भाववाच्य बनेगा? यदि हाँ, तो बनाएँ।
उत्तर देखें
उत्तर: “सोया जाता है।” – हाँ – भाववाच्य बन सकता है – क्योंकि 'सोना' अकर्मक है, पर भाववाच्य बनता है – 'सोया जाता है' सही है।

वाच्य परिवर्तन – वाक्य रूपांतरण का तीसरा कदम

वाच्य परिवर्तन वाक्य रूपांतरण श्रृंखला की तीसरी कड़ी है – यह वह कौशल है जो आपको वाक्य के भाव को बदलने की क्षमता देता है – कभी कर्ता को महत्व देना, कभी कर्म को, और कभी केवल क्रिया को। 'राम ने किताब पढ़ी' – कर्ता प्रधान – 'किताब राम द्वारा पढ़ी गई' – कर्म प्रधान – 'पढ़ी गई' – केवल क्रिया। इस पोस्ट में हमने  वाच्य परिचय और  क्रिया के साथ वाच्य परिवर्तन के नियमों, विधियों, और उदाहरणों को विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी सकर्मक क्रिया वाले वाक्य का वाच्य परिवर्तन कर सकते हैं।

अभ्यास से ही वाच्य परिवर्तन मज़बूत होता है। अपनी दैनिक भाषा और लेखन में वाक्यों पर ध्यान दें – कब कर्तृवाच्य, कब कर्मवाच्य, और कब भाववाच्य का प्रयोग होता है – और यदि आवश्यक हो, तो उन्हें बदलने का प्रयास करें। नियमित अभ्यास से आप वाच्य परिवर्तन में निपुण हो जाएंगे – और आपकी हिंदी शुद्ध, प्रभावी और प्रवाहपूर्ण होगी।

📝 वाच्य परिवर्तन अभ्यास – कक्षा 8-9

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको प्रत्येक वाक्य का वाच्य (कर्तृ, कर्म, या भाव) पहचानना है और उसे दूसरे वाच्य में बदलना है। साथ ही, कुछ गलत परिवर्तनों को शुद्ध करना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

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उत्तर कुंजी सहित • CBSE एवं UP Board पाठ्यक्रम के अनुरूप



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