📘 पाठ – उसकी माँ | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, गद्य खंड) | GPN
📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (गद्य खंड) | ✍️ लेखक: पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु प्रश्न (5)
- 7. दीर्घ प्रश्न (5)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र'
जन्म: 1900, पंडरी कला (मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश)
मृत्यु: 1967
प्रमुख रचनाएँ: चॉकलेट, बूढ़ी काकी, दिल्ली का दलाल, उसकी माँ, सन्यासी, ज़िंदगी के मोड़
पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' हिंदी साहित्य के विवादास्पद लेखक रहे हैं। उन्होंने अपने समय में ऐसे विषय उठाए जिन पर बात करना वर्जित समझा जाता था। उनकी रचनाओं में समाज के यथार्थ को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत किया गया है। उनकी भाषा तीखी, व्यंग्यपूर्ण और सीधी-सादी है।
'उसकी माँ' उनकी सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह एक ऐसी माँ की कहानी है जो अपने बेटे को एक वेश्या के चंगुल से बचाने की कोशिश करती है। कहानी में माँ की ममता, उसकी चिंता, उसकी बेचैनी और उसकी विवशता को बड़े मार्मिक ढंग से चित्रित किया गया है। यह कहानी सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम है।
📖 कहानी की पृष्ठभूमि
यह कहानी उस दौर में लिखी गई जब समाज में वेश्या-वृत्ति को लेकर बात करना भी पाप समझा जाता था। उग्र जी ने इस वर्जित विषय पर कहानी लिखकर हलचल मचा दी। उन पर अश्लीलता के आरोप लगे, यहाँ तक कि उन पर मुकदमा भी चला। लेकिन उग्र जी ने अपनी बात पर अडिग रहे।
कहानी का केंद्र एक माँ है। उसका बेटा एक वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। माँ को इसका पता चलता है। वह चिंतित हो जाती है। वह जानती है कि यह रिश्ता उसके बेटे का जीवन बर्बाद कर देगा। वह उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश करती है। वह उसे समझाती है, डाँटती है, यहाँ तक कि खुद उस वेश्या के पास भी जाती है। लेकिन बेटा नहीं मानता।
उग्र जी ने इस कहानी में एक माँ के मन की गहराइयों को बड़ी बारीकी से उकेरा है। उसकी ममता, उसकी चिंता, उसकी बेचैनी, उसकी विवशता, उसका क्रोध, उसकी निराशा - सब कुछ। यह कहानी सिर्फ एक माँ की नहीं, बल्कि उस समाज की भी कहानी है जो वेश्या-वृत्ति को बढ़ावा देता है, लेकिन उससे जुड़े लोगों को सम्मान नहीं देता।
🎯 अध्याय का महत्व
कक्षा 11 की परीक्षा में यह कहानी महत्वपूर्ण है। माँ के चरित्र, उसकी ममता और संघर्ष, बेटे का मोहभंग, वेश्या का चरित्र, सामाजिक यथार्थ - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। उग्र जी की लेखन शैली, उनकी साहसिकता और यथार्थवादिता भी परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है। यह कहानी सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को समझने में मदद करती है।
2. सरल सारांश
यह कहानी एक माँ और उसके बेटे की है। माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है। वह उसे सब कुछ समझाती है, उसकी हर जरूरत का ख्याल रखती है। बेटा जवान हो जाता है। वह बाहर ज्यादा रहने लगता है। माँ को चिंता होती है।
एक दिन माँ को पता चलता है कि उसका बेटा एक वेश्या के प्रेम में पड़ गया है। वह सुनकर स्तब्ध रह जाती है। उसे विश्वास नहीं होता। वह सोचती है - जिस बेटे को उसने इतने प्यार से पाला, वह ऐसा कैसे कर सकता है? वह उसे समझाने की कोशिश करती है। बताती है कि यह रिश्ता ठीक नहीं है, यह उसका जीवन बर्बाद कर देगा। लेकिन बेटा नहीं मानता।
माँ कई बार कोशिश करती है। वह बेटे से विनती करती है, गिड़गिड़ाती है, डाँटती है, धमकाती है। लेकिन बेटे पर कोई असर नहीं होता। वह तो उस वेश्या के पास ही जाता है, उसी में डूबा रहता है। माँ टूट जाती है। उसे लगता है कि उसका बेटा उससे दूर होता जा रहा है।
एक दिन माँ हिम्मत करके खुद उस वेश्या के पास जाती है। वह उससे विनती करती है कि वह उसके बेटे को छोड़ दे। वेश्या उसे देखती है, सुनती है, लेकिन कुछ नहीं कहती। माँ लौट आती है। बेटे को पता चलता है कि उसकी माँ वहाँ गई थी। उसे बहुत गुस्सा आता है। वह माँ से बदतमीजी करता है। माँ चुप रह जाती है।
कुछ दिन बीतते हैं। एक रात बेटा घर लौटता है तो देखता है कि उसकी माँ बुखार में तप रही है। वह बहुत बीमार है। उसे देखकर बेटे को एहसास होता है कि उसने क्या खो दिया। वह माँ के पास बैठ जाता है। माँ उसे देखती है, मुस्कुराती है और आँखें बंद कर लेती है। कहानी यहीं खत्म होती है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण
- माँ की ममता: यह कहानी माँ की ममता का बेजोड़ उदाहरण है। माँ अपने बेटे से असीम प्यार करती है। वह उसे बचाने के लिए सब कुछ करती है - समझाना, डाँटना, विनती करना, यहाँ तक कि खुद वेश्या के पास जाना। उसकी ममता ही उसकी ताकत है और कमजोरी भी।
- बेटे का मोहभंग: बेटा एक वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। वह समझ नहीं पाता कि यह रिश्ता उसे कहाँ ले जाएगा। वह माँ की बातों को अनदेखा करता है। उसे लगता है कि वह बड़ा हो गया है, उसे कोई नहीं समझा सकता। यह युवा मोहभंग की त्रासदी है।
- वेश्या का चरित्र: वेश्या का चरित्र बहुत कम शब्दों में उभरता है। वह चुप रहती है, कुछ नहीं कहती। वह शायद माँ की पीड़ा समझती है, लेकिन उसकी मजबूरियाँ भी हैं। उग्र जी ने उसे राक्षस की तरह नहीं, बल्कि एक सामान्य इंसान की तरह दिखाया है।
- संवादहीनता: कहानी में माँ और बेटे के बीच संवादहीनता दिखती है। माँ समझाना चाहती है, लेकिन बेटा सुनना नहीं चाहता। बेटा अपनी बात कहना चाहता है, लेकिन माँ शायद उसे समझ नहीं पाती। यह संवादहीनता उनके रिश्ते को और कमजोर करती है।
- सामाजिक यथार्थ: कहानी में उस दौर के सामाजिक यथार्थ को दिखाया गया है। वेश्या-वृत्ति मौजूद है, लेकिन उस पर बात करना वर्जित है। माँ को अपने बेटे की बर्बादी देखनी पड़ रही है, लेकिन वह किसी से कुछ कह नहीं सकती। समाज चुप है, मदद के लिए कोई नहीं है।
- अंत की मार्मिकता: कहानी का अंत बहुत मार्मिक है। बेटे को एहसास होता है, लेकिन शायद बहुत देर हो चुकी है। माँ उसे देखकर मुस्कुराती है और आँखें बंद कर लेती है। यह मुस्कान क्षमा है, प्रेम है, विदाई है।
📌 विषय / Theme
इस कहानी के कई विषय हैं। पहला विषय है - माँ का असीम प्रेम। दूसरा विषय है - युवा मोहभंग और उसके परिणाम। तीसरा विषय है - सामाजिक यथार्थ और उसकी विसंगतियाँ। चौथा विषय है - संवादहीनता और उससे पैदा होने वाली दूरियाँ। पाँचवाँ विषय है - क्षमा और ममता की विजय।
📌 सामाजिक संदेश
उग्र जी समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें अपने बच्चों के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। उन्हें सही-गलत का ज्ञान देना चाहिए। अगर माँ और बेटे के बीच संवाद होता, तो शायद स्थिति इतनी न बिगड़ती। वे यह भी दिखाना चाहते हैं कि समाज की वर्जित चीजों पर चुप रहना ठीक नहीं है। उन पर बात होनी चाहिए, तभी समाधान निकलेगा।
📌 नैतिक शिक्षा
- माँ का सम्मान करो: माँ से बढ़कर कोई नहीं होता। उसकी बातें सुनो, उसका सम्मान करो।
- सही-गलत की पहचान करो: हर चमकती चीज सोना नहीं होती। मोह में पड़कर अपना जीवन बर्बाद मत करो।
- संवाद जरूरी है: परिवार में खुलकर बात करो। अपनी समस्याएँ बताओ, दूसरों की सुनो।
- क्षमा बड़ा गुण है: माँ ने बेटे की हर गलती माफ की। क्षमा करना सीखो।
- समाज के यथार्थ को समझो: आँखें बंद करके मत जियो। समाज में क्या हो रहा है, यह जानो और उसके बारे में सोचो।
4. पात्र चित्रण
🧑 माँ (केंद्रीय पात्र)
स्वभाव: माँ कहानी की केंद्रीय पात्र है। वह अपने बेटे से असीम प्रेम करती है। उसकी ममता ही उसकी पहचान है। वह बेटे की हर बात का ध्यान रखती है, उसकी हर जरूरत पूरी करती है। जब उसे पता चलता है कि बेटा एक वेश्या के चक्कर में पड़ गया है, तो वह टूट जाती है। लेकिन वह हार नहीं मानती। वह बेटे को बचाने की हर मुमकिन कोशिश करती है। वह उसे समझाती है, डाँटती है, विनती करती है, यहाँ तक कि खुद वेश्या के पास भी जाती है। वह बहुत संघर्षशील है। वह चाहती है कि उसका बेटा सही रास्ते पर आए। अंत में वह बीमार पड़ जाती है। बेटे के लौटने पर वह मुस्कुराती है और आँखें बंद कर लेती है। उसकी मुस्कान में क्षमा है, प्रेम है, संतोष है।
भूमिका: माँ उस असीम ममता का प्रतीक है जो हर माँ में होती है। वह त्याग, संघर्ष, क्षमा और प्रेम की मूरत है।
प्रमुख घटनाएँ: बेटे के बारे में पता चलना, उसे समझाना, वेश्या के पास जाना, बेटे की बदतमीजी सहना, बीमार पड़ना, बेटे के लौटने पर मुस्कुराना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: माँ - ममतामयी, संघर्षशील, क्षमाशील, त्यागमयी, प्रेम की मूरत।
🧑 बेटा
स्वभाव: बेटा जवान है। वह एक वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। वह माँ की बातों को अनदेखा करता है। उसे लगता है कि वह बड़ा हो गया है, उसे कोई नहीं समझा सकता। वह माँ के समझाने पर नहीं मानता। जब उसे पता चलता है कि माँ वेश्या के पास गई थी, तो उसे गुस्सा आता है और वह माँ से बदतमीजी करता है। लेकिन अंत में जब वह माँ को बीमार देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसने क्या खो दिया। वह माँ के पास बैठ जाता है। उसे शायद अपनी गलती का एहसास होता है।
भूमिका: बेटा उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो मोह में पड़कर सही-गलत की पहचान खो देती है और बाद में पछताती है।
प्रमुख घटनाएँ: वेश्या के प्रेम में पड़ना, माँ की बात न मानना, माँ से बदतमीजी करना, अंत में माँ के पास लौटना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: बेटा - मोहग्रस्त, जिद्दी, विद्रोही, लेकिन अंततः पछताने वाला।
🧑 वेश्या
स्वभाव: वेश्या का चरित्र बहुत कम शब्दों में उभरता है। वह चुप रहती है, बहुत कुछ नहीं बोलती। जब माँ उसके पास जाती है और विनती करती है, तो वह सुनती है लेकिन कुछ नहीं कहती। उग्र जी ने उसे राक्षस की तरह नहीं, बल्कि एक सामान्य इंसान की तरह दिखाया है। उसकी मजबूरियाँ हैं, उसकी विवशताएँ हैं। वह भी समाज की शिकार है। लेखक ने उसके प्रति कोई घृणा नहीं दिखाई, बल्कि एक संवेदनशील दृष्टि दी है।
भूमिका: वेश्या उस सामाजिक यथार्थ का प्रतिनिधित्व करती है जिस पर बात करना वर्जित है। वह विवशता और शोषण की शिकार है।
प्रमुख घटनाएँ: माँ का उसके पास आना, उसकी विनती सुनना, चुप रहना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: वेश्या - चुप, विवश, रहस्यमयी, समाज की शिकार।
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| वेश्या | पतिता, देह व्यापार करने वाली स्त्री, prostitute | बेटा एक वेश्या के प्रेम में पड़ गया। |
| ममता | स्नेह, वात्सल्य, affection | माँ की ममता असीम थी। |
| त्याग | बलिदान, sacrifice | माँ ने अपने बेटे के लिए सब कुछ त्याग दिया। |
| क्षमा | माफी, forgiveness | माँ ने बेटे की सब गलतियाँ क्षमा कर दीं। |
| मोह | आसक्ति, attachment | बेटा मोह में पड़कर अंधा हो गया था। |
| संवादहीनता | बातचीत न होना, lack of communication | माँ-बेटे के बीच संवादहीनता थी। |
| विवशता | मजबूरी, helplessness | माँ की विवशता देखते ही बनती थी। |
| यथार्थ | वास्तविकता, reality | उग्र जी ने सामाजिक यथार्थ को दिखाया। |
| वर्जित | निषिद्ध, forbidden | उस समय इस विषय पर बात करना वर्जित था। |
| संघर्ष | struggle | माँ का पूरा जीवन संघर्ष में बीता। |
| बदतमीजी | अशिष्टता, rudeness | बेटे ने माँ से बदतमीजी की। |
| मार्मिक | हृदयस्पर्शी, touching | कहानी का अंत बहुत मार्मिक है। |
| विवादास्पद | जिस पर विवाद हो, controversial | उग्र जी की रचनाएँ विवादास्पद रहीं। |
| अश्लीलता | obscenity | उन पर अश्लीलता के आरोप लगे। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)
प्रश्न 1: 'उसकी माँ' कहानी के केंद्र में कौन-सा पात्र है और क्यों? [CBSE 2023]
'उसकी माँ' कहानी के केंद्र में माँ का पात्र है। वही कहानी की नायिका है। उसकी ममता, उसका संघर्ष, उसकी व्यथा - सब कुछ कहानी का मुख्य विषय है। बेटा एक वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। माँ उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश करती है। वह समझाती है, डाँटती है, विनती करती है, यहाँ तक कि खुद वेश्या के पास भी जाती है। उसकी यही ममता और संघर्ष कहानी का केंद्र है। शीर्षक भी 'उसकी माँ' है, जो बताता है कि माँ ही केंद्र में है।
प्रश्न 2: माँ ने अपने बेटे को बचाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए? [CBSE 2022]
माँ ने अपने बेटे को बचाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किया। पहले उसने उसे समझाने की कोशिश की। बताया कि यह रिश्ता ठीक नहीं है, यह उसका जीवन बर्बाद कर देगा। जब बेटा नहीं माना, तो उसने उसे डाँटा, धमकाया। फिर विनती की, गिड़गिड़ाई। जब इन सबका कोई असर नहीं हुआ, तो वह खुद उस वेश्या के पास गई और उससे अपने बेटे को छोड़ने की विनती की। उसने हर वह कोशिश की जो एक माँ कर सकती है।
प्रश्न 3: वेश्या के पास जाने वाली घटना का क्या महत्व है? [CBSE 2021]
माँ का वेश्या के पास जाना बहुत महत्वपूर्ण है। यह उसकी ममता की चरम अभिव्यक्ति है। एक साधारण महिला के लिए वेश्या के पास जाना आसान नहीं होता। समाज उसे बुरी नज़र से देखता है। लेकिन माँ ने अपने बेटे के लिए यह कदम उठाया। वह उससे विनती करती है कि वह उसके बेटे को छोड़ दे। यह दृश्य बहुत मार्मिक है। यह दिखाता है कि माँ अपने बेटे के लिए कुछ भी कर सकती है, अपनी इज्जत तक दाँव पर लगा सकती है।
प्रश्न 4: बेटे का चरित्र-चित्रण कीजिए। [CBSE 2023, 2020]
बेटा जवान है। वह एक वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। वह माँ की बातों को अनदेखा करता है। उसे लगता है कि वह बड़ा हो गया है, उसे कोई नहीं समझा सकता। वह जिद्दी है और मोहग्रस्त है। जब उसे पता चलता है कि माँ वेश्या के पास गई थी, तो उसे गुस्सा आता है और वह माँ से बदतमीजी करता है। लेकिन अंत में जब वह माँ को बीमार देखता है, तो उसे एहसास होता है कि उसने क्या खो दिया। वह माँ के पास बैठ जाता है। उसका यह लौटना दिखाता है कि अंदर से वह बुरा नहीं है, बस मोह में अंधा हो गया था।
प्रश्न 5: कहानी के अंत की मार्मिकता स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2021]
कहानी का अंत बहुत मार्मिक है। एक रात बेटा घर लौटता है तो देखता है कि उसकी माँ बुखार में तप रही है, बहुत बीमार है। उसे देखकर बेटे को एहसास होता है कि उसने क्या खो दिया। वह माँ के पास बैठ जाता है। माँ उसे देखती है, मुस्कुराती है और आँखें बंद कर लेती है। यह मुस्कान बहुत कुछ कह जाती है। इसमें क्षमा है, प्रेम है, संतोष है, विदाई है। बेटे को एहसास तो होता है, लेकिन शायद बहुत देर हो चुकी है। यह खुला अंत पाठक को सोचने पर मजबूर कर देता है।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)
प्रश्न 1: 'उसकी माँ' कहानी के माध्यम से उग्र जी ने माँ की ममता और उसके संघर्ष को किस प्रकार चित्रित किया है? [CBSE 2023, 2021]
- असीम ममता: माँ अपने बेटे से असीम प्रेम करती है। वह उसकी हर जरूरत का ध्यान रखती है। जब बेटा गलत रास्ते पर जाता है, तो वह टूट जाती है, लेकिन उसका प्यार कम नहीं होता।
- समझाने की कोशिश: वह बेटे को समझाने की हर मुमकिन कोशिश करती है। वह बताती है कि यह रिश्ता ठीक नहीं है, यह उसका जीवन बर्बाद कर देगा। वह उसे सही रास्ते पर लाना चाहती है।
- डाँट-डपट: जब समझाने से काम नहीं चलता, तो वह डाँटती है, धमकाती है। वह चाहती है कि डर से ही सही, बेटा सही रास्ते पर आ जाए।
- विनती: डाँट-डपट का भी असर नहीं होता, तो वह विनती करती है, गिड़गिड़ाती है। वह बेटे के सामने हाथ फैला देती है। यह उसकी ममता की पराकाष्ठा है।
- वेश्या के पास जाना: अंत में वह खुद वेश्या के पास जाती है। एक साधारण महिला के लिए यह कदम उठाना बहुत कठिन है। समाज उसे बुरी नज़र से देखेगा, लेकिन वह बेटे के लिए यह भी कर गुज़रती है।
- क्षमा और त्याग: बेटे की बदतमीजी के बावजूद वह उसे क्षमा कर देती है। अंत में वह बीमार पड़ती है, लेकिन बेटे को देखकर मुस्कुराती है। यह मुस्कान उसके त्याग और क्षमा का प्रतीक है।
प्रश्न 2: 'उसकी माँ' कहानी के आधार पर बताइए कि माँ और बेटे के बीच संवादहीनता के क्या कारण थे और इसके क्या परिणाम हुए? [CBSE 2022]
- संवादहीनता के कारण: माँ और बेटे के बीच खुलकर बातचीत नहीं होती। बेटा अपनी बात माँ से नहीं कहता। शायद उसे डर है कि माँ समझेगी नहीं। माँ भी शायद सही तरीके से बात नहीं कर पाती। वह डाँट-डपट से काम चलाती है, जिससे बेटा और दूर हो जाता है।
- बेटे का मोह: बेटा वेश्या के मोह में अंधा है। वह माँ की बातों को अनदेखा करता है। उसे लगता है कि माँ उसे समझ नहीं सकती, इसलिए वह बात ही नहीं करता।
- पीढ़ी का अंतर: माँ और बेटे की सोच में अंतर है। माँ पुराने विचारों की है, बेटा नई पीढ़ी का है। वह उसकी बातों को बोझ समझता है।
- परिणाम - दूरी: इस संवादहीनता के कारण माँ-बेटे के बीच दूरी बढ़ती जाती है। बेटा माँ से दूर हो जाता है, उसकी बातें नहीं सुनता।
- परिणाम - बेटे का बिगड़ना: बेटा और बिगड़ता जाता है। वह माँ की बात नहीं मानता, उसकी बदतमीजी करता है। वह वेश्या के पास ही जाता है, घर नहीं आता।
- परिणाम - माँ की बीमारी: इस सबसे माँ टूट जाती है। वह बीमार पड़ जाती है। उसकी तबीयत बिगड़ती है, लेकिन बेटे को पता भी नहीं चलता। जब उसे पता चलता है, तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होती है।
प्रश्न 3: 'उसकी माँ' कहानी में वेश्या के चरित्र का क्या महत्व है? क्या उसे नकारात्मक पात्र कहा जा सकता है? [CBSE 2021]
- कम शब्द, गहरा प्रभाव: वेश्या का चरित्र बहुत कम शब्दों में उभरता है। वह ज्यादा कुछ बोलती नहीं, लेकिन उसकी उपस्थिति पूरी कहानी पर छाई रहती है।
- चुप्पी का महत्व: जब माँ उसके पास जाती है और विनती करती है, तो वह चुप रहती है। यह चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। शायद वह माँ की पीड़ा समझती है, लेकिन उसकी मजबूरियाँ भी हैं।
- न तो राक्षस, न देवी: उग्र जी ने उसे न तो राक्षस की तरह दिखाया है, न देवी की तरह। वह एक सामान्य इंसान है, जो अपनी ज़िंदगी जी रही है।
- समाज की शिकार: वह भी समाज की शिकार है। वेश्या-वृत्ति में धकेल दी गई, कोई सहारा नहीं, कोई रास्ता नहीं। उसके पास कोई विकल्प नहीं है।
- नकारात्मक पात्र नहीं: उसे नकारात्मक पात्र नहीं कहा जा सकता। वह किसी का बुरा नहीं करती। बेटा खुद उसके पास जाता है, वह उसे नहीं बुलाती। वह तो बस अपना काम कर रही है।
- सामाजिक यथार्थ: उसका चरित्र उस सामाजिक यथार्थ को दर्शाता है जिस पर बात करना वर्जित है। उग्र जी ने इस वर्जित विषय को उठाकर एक बड़ा काम किया है।
प्रश्न 4: 'उसकी माँ' कहानी के आधार पर पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' की लेखन शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2020]
- साहसिक विषय: उग्र जी की सबसे बड़ी विशेषता है - साहसिक विषयों का चुनाव। उन्होंने उस दौर में वेश्या-वृत्ति पर कहानी लिखी, जब इस पर बात करना भी पाप समझा जाता था।
- यथार्थवादिता: वे समाज का यथार्थ बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत करते हैं। वे न तो कुछ छिपाते हैं, न ही अलंकृत करते हैं।
- तीखी और सीधी भाषा: उनकी भाषा तीखी और सीधी-सादी है। वे बहुत कम शब्दों में बहुत कुछ कह देते हैं। उनके संवाद छोटे, लेकिन प्रभावी होते हैं।
- मार्मिकता: उनकी रचनाओं में गहरी मार्मिकता है। माँ की पीड़ा, उसका संघर्ष, उसकी विवशता - सब कुछ हृदय को छू जाता है।
- पात्रों का मनोवैज्ञानिक चित्रण: वे पात्रों के मन की गहराइयों में उतरते हैं। माँ क्या सोचती है, क्या महसूस करती है - इसका बहुत बारीकी से चित्रण किया गया है।
- व्यंग्य और आक्रोश: उनके लेखन में हल्का व्यंग्य और गहरा आक्रोश है। वे व्यवस्था पर चोट करते हैं, लेकिन संवेदनशीलता के साथ।
प्रश्न 5: 'उसकी माँ' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को किस प्रकार व्यक्त करता है? [CBSE 2019]
- माँ केंद्र में: 'उसकी माँ' शीर्षक से स्पष्ट है कि माँ ही कहानी की केंद्रीय पात्र है। बेटा गौण है, वेश्या और भी गौण। माँ की ममता, उसका संघर्ष, उसकी पीड़ा - यही कहानी का मुख्य विषय है।
- अनाम माँ: माँ का कोई नाम नहीं है। वह सिर्फ 'उसकी माँ' है। यह उसे एक सार्वभौमिक चरित्र बना देता है। वह हर उस माँ का प्रतिनिधित्व करती है जो अपने बच्चे के लिए संघर्ष करती है।
- बेटे के नज़रिए से: 'उसकी माँ' - यानी बेटे के नज़रिए से माँ। बेटा जिसे माँ कहता है, वही इस कहानी की नायिका है। यह बेटे और माँ के रिश्ते को रेखांकित करता है।
- पहचान: पूरी कहानी में माँ की कोई अलग पहचान नहीं है। वह सिर्फ बेटे की माँ है। उसकी पूरी ज़िंदगी बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। यह शीर्षक इसी सच्चाई को उजागर करता है।
- सार्वभौमिकता: यह शीर्षक कहानी को सार्वभौमिक बना देता है। यह किसी एक माँ की कहानी नहीं, बल्कि हर उस माँ की कहानी है जो अपने बेटे को बचाने के लिए संघर्ष करती है।
- निष्कर्ष: 'उसकी माँ' शीर्षक बहुत सार्थक है। यह कहानी के केंद्रीय भाव - माँ की ममता और उसके संघर्ष - को बखूबी व्यक्त करता है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न
- माँ के चरित्र की विशेषताएँ - 2023, 2022, 2021
- माँ द्वारा बेटे को बचाने के प्रयास - 2023, 2022
- बेटे का चरित्र-चित्रण - 2022, 2020
- वेश्या के पास जाने की घटना - 2023, 2021
- कहानी के अंत की मार्मिकता - 2022, 2021
- शीर्षक की सार्थकता - 2021, 2020, 2019
- उग्र जी की लेखन शैली - 2020, 2019
📈 बोर्ड ट्रेंड
पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कहानी से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में माँ के चरित्र, उसके प्रयासों और कहानी के अंत पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में माँ की ममता और संघर्ष, संवादहीनता के कारण और परिणाम, तथा उग्र जी की लेखन शैली पर प्रश्न आते हैं।
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक - पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (1900-1967)
- पुस्तक - अंतरा भाग 1 (गद्य खंड)
- केंद्रीय पात्र - माँ (बेटे की माँ)
- अन्य पात्र - बेटा, वेश्या
- मुख्य विषय - माँ की ममता, संघर्ष, संवादहीनता, सामाजिक यथार्थ
- महत्वपूर्ण घटना - माँ का वेश्या के पास जाना
- विशेषता - वर्जित विषय पर साहसिक लेखन
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"माँ की ममता असीम होती है।"
"बेटे के लिए माँ क्या-क्या नहीं कर सकती!"
"उसकी माँ - बस इतनी सी पहचान, पूरा जीवन।"
"वह मुस्कुराई और आँखें बंद कर लीं।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)
एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - कहानी की केंद्रीय पात्र कौन है? उत्तर - माँ।
📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)
परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - माँ ने बेटे को बचाने के लिए क्या प्रयास किए? उत्तर - परिचय में बताएँ कि माँ ने हर मुमकिन कोशिश की। फिर समझाना, डाँटना, विनती करना, वेश्या के पास जाना - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि माँ ने वह सब किया जो एक माँ कर सकती है।
📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)
चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना (पात्र का परिचय) + मुख्य भाग (चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित) + कहानी में भूमिका + निष्कर्ष।
विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें) + निष्कर्ष। जैसे संवादहीनता पर प्रश्न - पहले संवादहीनता का परिचय, फिर उसके कारण, फिर उसके परिणाम, फिर निष्कर्ष।
शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न के लिए: शीर्षक का अर्थ + कहानी से उसका संबंध + वह केंद्रीय भाव को कैसे व्यक्त करता है + निष्कर्ष।
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें:
- हिंदी व्याकरण नोट्स, नियम और अभ्यास (कक्षा 3 से 12, सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड)– हिंदी ग्रामर हब
- हिंदी साहित्य पाठ, सारांश और व्याख्या – हिंदी लिटरेचर हब (कक्षा 9 से 12 की सभी पुस्तकें)
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