Skip to main content

View in English
हिंदी में देखें


this padding is for avoiding search bar cut

Surdas class 11 antra poem

📘 पाठ 10 – सूरदास के पद | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, काव्य खंड) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (काव्य खंड) | ✍️ कवि: सूरदास | 📝 प्रकार: भक्तिकालीन पद | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: बहुत उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 कवि परिचय - सूरदास

जन्म: लगभग 1478, रुनकता (आगरा के पास) - कुछ विद्वान दिल्ली या मथुरा मानते हैं

मृत्यु: लगभग 1583, पारसौली (मथुरा के पास)

गुरु: महाप्रभु वल्लभाचार्य (पुष्टिमार्गीय संप्रदाय)

भाषा: ब्रजभाषा

प्रमुख रचनाएँ: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी

सूरदास भक्तिकाल की सगुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं। वे कृष्ण भक्ति शाखा के सबसे बड़े कवि माने जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में श्रीकृष्ण के बाल रूप, बाल लीलाओं और उनके सौंदर्य का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया है। उनके पदों में जो माधुर्य है, जो भाव-प्रवणता है, वह हिंदी साहित्य में दुर्लभ है।

कहा जाता है कि सूरदास जन्म से अंधे थे। लेकिन उनकी कविता में जो चित्रात्मकता है, उसे देखकर यकीन नहीं होता। मानो उन्होंने कान्हा के बाल रूप को अपनी आँखों से देखा हो। वल्लभाचार्य से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने गोवर्धन के पास रहकर भक्ति में डूबकर पद रचे। उनके पद आज भी पूरे उत्तर भारत में भक्ति में गाए जाते हैं।

📖 काव्य की पृष्ठभूमि

सूरदास का समय 16वीं सदी का उत्तरार्ध था। उस समय उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन अपने चरम पर था। कृष्ण भक्ति की विभिन्न धाराएँ फल-फूल रही थीं। वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की थी, जिसमें कृष्ण की बाल लीलाओं की पूजा पर विशेष बल था। सूरदास इसी मार्ग के कवि थे।

सूरदास ने मुख्य रूप से श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का वर्णन किया है। उनके पदों में कान्हा की माँ यशोदा के साथ छटा, उनकी बाल-क्रीड़ाएँ, उनकी शरारतें, ग्वाल-बालों के साथ खेल, माखन चोरी, गोपियों के साथ रास - सब कुछ आता है। उन्होंने कृष्ण के सौंदर्य का ऐसा वर्णन किया कि पाठक मुग्ध हो जाता है।

कक्षा 11 के पाठ्यक्रम में सूरदास के जो पद शामिल हैं, उनमें मुख्य रूप से कृष्ण के बाल रूप का वर्णन है, माँ यशोदा का उनके प्रति वात्सल्य प्रेम है, और गोपियों के विरह का वर्णन है।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की परीक्षा में सूरदास के पद अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनके पदों की व्याख्या, भावार्थ, कृष्ण के बाल रूप का वर्णन, माँ यशोदा का वात्सल्य, गोपियों के प्रेम का वर्णन - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। सूरदास की भाषा-शैली, उनके काव्य सौंदर्य पर भी प्रश्न आते हैं।

2. सरल सारांश

सूरदास के पदों में श्रीकृष्ण के बाल रूप का अद्भुत चित्रण है। वे बालक कृष्ण की शरारतों, उनकी मुस्कान, उनकी चाल, उनके खेल का ऐसा वर्णन करते हैं कि साक्षात् कान्हा आँखों के सामने घूमने लगते हैं।

पहले पद में सूरदास कृष्ण के बाल रूप का वर्णन करते हैं। कैसे वे ग्वाल-बालों के साथ खेलते हैं, कैसे उनका शरीर धूल-धूसरित हो जाता है, कैसे उनकी मुस्कान सबका मन मोह लेती है। माँ यशोदा उन्हें देखकर निहाल हो जाती हैं।

दूसरे पद में माँ यशोदा कान्हा को समझाती हैं। वह कहती हैं - तुम इतनी शरारत मत करो। रोज माखन चुराते हो, ग्वाल-बालों को सताते हो। तुम्हारी ये शरारतें देखकर सब परेशान हैं। लेकिन उनकी डाँट में भी वात्सल्य छिपा है।

तीसरे पद में सूरदास गोपियों के विरह का वर्णन करते हैं। कृष्ण मथुरा चले गए हैं। गोपियाँ उनके वियोग में व्याकुल हैं। उन्हें अपने कान्हा की याद आती है। उनकी बाँसुरी की आवाज़, उनकी मुस्कान, उनकी चितवन - सब याद आता है। वे बावली-सी हो जाती हैं।

चौथे पद में सूरदास कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन करते हैं। उनके नेत्र कमल के समान हैं, उनके अधर पके बिम्बफल के समान हैं, उनकी मुस्कान मोहक है, उनकी चाल मनोहर है। ऐसे कान्हा को देखकर कोई भी मोहित हो जाए।

पाँचवें पद में माँ यशोदा कान्हा को दूध पिलाते हुए उन्हें निहारती हैं। कैसे वह कान्हा के मुँह की ओर देखती हैं, कैसे उनका मन प्रसन्न होता है। उनकी आँखें तृप्त नहीं होतीं।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • बाल रूप का वर्णन: सूरदास की कविता का सबसे बड़ा आकर्षण है - कृष्ण के बाल रूप का वर्णन। उन्होंने कान्हा की हर बाल-क्रीड़ा को शब्दों में पिरोया है - उनका खेलना, माखन चुराना, ग्वाल-बालों से हँसी-मज़ाक करना।
  • वात्सल्य रस: उनके पदों में वात्सल्य रस की प्रधानता है। माँ यशोदा का कान्हा के प्रति जो प्रेम है, उसे उन्होंने बड़े मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। माँ की डाँट में भी प्यार है, उनकी चिंता में भी प्रेम है।
  • शृंगार रस: गोपियों के प्रेम प्रसंगों में शृंगार रस है। कृष्ण के प्रति गोपियों का प्रेम, उनका विरह, उनकी व्याकुलता - सब बड़े मनोहारी ढंग से वर्णित है।
  • सौंदर्य वर्णन: सूरदास ने कृष्ण के सौंदर्य का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है। उनके नेत्र, अधर, मुस्कान, चाल, वेशभूषा - सब कुछ। उनके वर्णन में एक अलौकिकता है।
  • चित्रात्मकता: उनके पदों में चित्रात्मकता है। वे शब्दों से चित्र खींचते हैं। पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो सब कुछ आँखों के सामने घट रहा हो।
  • भक्ति का स्वरूप: सूरदास की भक्ति प्रेमाश्रयी है। उनके लिए कृष्ण केवल ईश्वर नहीं, बल्कि अपने कान्हा हैं, जिनसे वे अगाध प्रेम करते हैं।

📌 विषय / Theme

सूरदास के पदों के कई विषय हैं। पहला विषय है - कृष्ण की बाल लीला। दूसरा विषय है - माँ यशोदा का वात्सल्य प्रेम। तीसरा विषय है - कृष्ण के प्रति गोपियों का अनन्य प्रेम। चौथा विषय है - कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन। पाँचवाँ विषय है - कृष्ण के प्रति समर्पण और भक्ति का भाव।

📌 सामाजिक संदेश

सूरदास के पदों में सीधा कोई सामाजिक संदेश नहीं है। लेकिन उनके माध्यम से जो प्रेम का भाव फैला, जो भक्ति का मार्ग खुला, उसने समाज पर गहरा प्रभाव डाला। उनके पदों ने जाति-पाति से ऊपर उठकर प्रेम का संदेश दिया। उनके पदों को सुनकर लोगों के मन में शांति मिलती थी, प्रेम जागता था।

📌 नैतिक शिक्षा

  • प्रेम करो: सूरदास सिखाते हैं कि ईश्वर से प्रेम करो। वह तुम्हारे कान्हा हैं, तुम्हारे अपने हैं।
  • समर्पण भाव रखो: भक्ति में समर्पण सबसे बड़ी चीज है। सूरदास का पूरा जीवन ही कृष्ण को समर्पित था।
  • सौंदर्य की सराहना करो: उनके पद हमें सिखाते हैं कि सौंदर्य की सराहना करना चाहिए, उसका आनंद लेना चाहिए।
  • माँ का सम्मान करो: माँ यशोदा के माध्यम से उन्होंने माँ के प्रेम की महिमा का गान किया है।

4. पात्र चित्रण

🧑 श्रीकृष्ण (बाल रूप)

स्वभाव: सूरदास के पदों में श्रीकृष्ण बाल रूप में हैं। वे बड़े चंचल, शरारती और मोहक हैं। माखन चुराना उनका प्रिय काम है। ग्वाल-बालों के साथ खेलना, उन्हें सताना, हँसी-मज़ाक करना - यही उनका नित्यकर्म है। उनकी मुस्कान सबका मन मोह लेती है। उनकी चाल में एक अलग ही लावण्य है। उनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं। वे माँ यशोदा के बहुत प्रिय हैं। माँ की डाँट की उन्हें कोई परवाह नहीं। वे तो अपनी शरारतों में मस्त रहते हैं।

भूमिका: कृष्ण सूरदास के काव्य के केंद्र हैं। उनके चारों ओर पूरा काव्य घूमता है। वे भक्तों के आराध्य हैं, गोपियों के प्रियतम हैं, माँ यशोदा के लाल हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: बाल कृष्ण - चंचल, शरारती, मोहक, सुंदर, माखन चोर, माँ यशोदा के प्रिय।

🧑 माँ यशोदा

स्वभाव: माँ यशोदा कृष्ण की माँ हैं। वे अपने कान्हा से बेहद प्रेम करती हैं। उनका पूरा जीवन कान्हा के इर्द-गिर्द घूमता है। वे कान्हा की हर शरारत पर डाँटती हैं, लेकिन उनकी डाँट में भी प्यार छिपा होता है। कान्हा को देखकर उनकी आँखें तृप्त नहीं होतीं। वे उन्हें दूध पिलाते हुए निहारती रहती हैं। कान्हा के माखन चुराने पर वे उन्हें समझाती हैं, लेकिन मन ही मन उनकी चतुराई पर गर्व भी करती हैं। वे वात्सल्य प्रेम की साक्षात् मूर्ति हैं।

भूमिका: माँ यशोदा वात्सल्य रस की प्रतिनिधि पात्र हैं। उनके माध्यम से सूरदास ने माँ के प्रेम की महिमा का गान किया है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: माँ यशोदा - वात्सल्यमयी, प्रेममयी, कान्हा की शरारतों पर डाँटने वाली, लेकिन अंतस से प्यार करने वाली।

🧑 गोपियाँ

स्वभाव: गोपियाँ वृन्दावन की ग्वालिनें हैं। वे कृष्ण से अगाध प्रेम करती हैं। उनके लिए कृष्ण ही सब कुछ हैं। कृष्ण के मथुरा चले जाने पर वे विरह में व्याकुल हो जाती हैं। उन्हें कृष्ण की बाँसुरी की आवाज़ याद आती है, उनकी मुस्कान याद आती है। वे बावली-सी हो जाती हैं। उनका प्रेम निस्वार्थ है, समर्पित है। वे कृष्ण के अलावा किसी और को नहीं जानतीं।

भूमिका: गोपियाँ शृंगार रस की प्रतिनिधि पात्र हैं। उनके माध्यम से सूरदास ने प्रेम की व्याकुलता, विरह की वेदना और समर्पण के भाव को चित्रित किया है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: गोपियाँ - प्रेममयी, विरहिणी, समर्पित, कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम रखने वाली।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
वात्सल्यमाँ का पुत्र के प्रति प्रेम, affection of motherसूरदास के पदों में वात्सल्य रस है।
शृंगारप्रेम रस, romantic moodगोपियों के प्रेम में शृंगार रस है।
बाल लीलाबचपन की क्रीड़ाएँ, childhood playsकृष्ण की बाल लीला अद्भुत है।
माखन चोरमाखन चुराने वाला, butter thiefकान्हा को माखन चोर कहा जाता है।
विरहवियोग, separationगोपियाँ कृष्ण के विरह में व्याकुल हैं।
ब्रजभाषामथुरा-वृन्दावन के आसपास की भाषासूरदास ने ब्रजभाषा में रचना की।
सगुण भक्तिसाकार ईश्वर की भक्ति, devotion to formful godसूरदास सगुण भक्ति के कवि हैं।
पुष्टिमार्गवल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित संप्रदायसूरदास पुष्टिमार्ग के भक्त थे।
गोपीग्वालिन, cowherd womanगोपियाँ कृष्ण से अगाध प्रेम करती थीं।
बाँसुरीfluteकृष्ण की बाँसुरी की धुन मन मोह लेती थी।
चितवनदृष्टि, नज़र, glanceकृष्ण की चितवन मोहक थी।
अधरहोठ, lipsउनके अधर पके बिम्बफल के समान हैं।
सूरसागरसूरदास की प्रमुख रचनासूरसागर में कृष्ण की बाल लीलाएँ हैं।
लावण्यसौंदर्य, beautyउनकी चाल में गजब का लावण्य है।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: सूरदास के पदों में वात्सल्य रस कैसे अभिव्यक्त हुआ है? [CBSE 2023]

सूरदास के पदों में वात्सल्य रस मुख्य रूप से माँ यशोदा के माध्यम से अभिव्यक्त हुआ है। माँ यशोदा अपने कान्हा से बेहद प्रेम करती हैं। वे उन्हें दूध पिलाते हुए निहारती हैं, उनकी शरारतों पर डाँटती हैं, लेकिन उनकी डाँट में भी प्यार छिपा होता है। कान्हा को देखकर उनकी आँखें तृप्त नहीं होतीं। कान्हा के माखन चुराने पर वे उन्हें समझाती हैं, लेकिन मन ही मन उनकी चतुराई पर गर्व भी करती हैं। इस प्रकार सूरदास ने माँ यशोदा के माध्यम से वात्सल्य रस को बड़े ही मार्मिक ढंग से चित्रित किया है।

प्रश्न 2: सूरदास ने बालक कृष्ण के सौंदर्य का कैसा वर्णन किया है? [CBSE 2022]

सूरदास ने बालक कृष्ण के सौंदर्य का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। उनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, उनके अधर पके बिम्बफल के समान लाल हैं। उनकी मुस्कान मोहक है, उनकी चाल में गजब का लावण्य है। उनके शरीर पर धूल-धूसरित होने पर भी उनका सौंदर्य बढ़ जाता है। माँ यशोदा उन्हें देखकर निहाल हो जाती हैं। गोपियाँ उनकी एक चितवन पर मोहित हो जाती हैं। सूरदास ने उनके सौंदर्य को अलौकिक बताया है।

प्रश्न 3: गोपियों के विरह का वर्णन सूरदास ने किस प्रकार किया है? [CBSE 2021]

सूरदास ने गोपियों के विरह का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है। कृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ विरह में व्याकुल हो जाती हैं। उन्हें कृष्ण की बाँसुरी की आवाज़ याद आती है, उनकी मुस्कान याद आती है, उनकी चितवन याद आती है। वे बावली-सी हो जाती हैं। उन्हें कृष्ण के बिना कहीं चैन नहीं मिलता। वे कृष्ण के पास जाने को व्याकुल रहती हैं। उनका प्रेम इतना गहरा है कि उनके लिए कृष्ण ही सब कुछ हैं।

प्रश्न 4: सूरदास की भाषा-शैली की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2023, 2020]

सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है। उनकी भाषा में माधुर्य है, प्रवाह है। उनकी शैली चित्रात्मक है - वे शब्दों से चित्र खींचते हैं। उनमें भाव-प्रवणता है, गेयता है। उनके पद गाए जाने के लिए बने हैं। वे संगीतात्मक हैं। उनमें अलंकारों का सहज प्रयोग है। वे उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा का बड़ा सुंदर प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा में सरलता है, जो हर कोई समझ सकता है।

प्रश्न 5: सूरदास के पदों में कृष्ण की बाल-लीलाओं का क्या महत्व है? [CBSE 2021]

सूरदास के पदों में कृष्ण की बाल-लीलाओं का विशेष महत्व है। उन्होंने कृष्ण के बाल रूप को केंद्र में रखा है। उनके अनुसार बाल रूप ही सबसे अधिक मोहक है। इससे भक्त ईश्वर के अधिक निकट आ सकते हैं। माँ यशोदा का वात्सल्य प्रेम, कृष्ण की शरारतें, उनकी मुस्कान - यह सब बाल-लीलाओं के माध्यम से ही चित्रित होता है। बाल-लीलाओं के माध्यम से सूरदास ने ईश्वर को सुलभ और सरल बना दिया है।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: सूरदास के पदों के आधार पर उनके काव्य की मुख्य विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2023, 2021]

  • वात्सल्य रस की प्रधानता: सूरदास के काव्य की सबसे बड़ी विशेषता है - वात्सल्य रस। माँ यशोदा और कान्हा के प्रेम को उन्होंने बड़े मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। माँ की डाँट में भी प्रेम है, उनकी चिंता में भी प्रेम है।
  • बाल रूप का सजीव चित्रण: उन्होंने कृष्ण के बाल रूप का बहुत ही सजीव चित्रण किया है। उनकी शरारतें, उनकी मुस्कान, उनकी चाल, उनका खेलना - सब कुछ ऐसा लगता है मानो साक्षात् कान्हा सामने हों।
  • शृंगार रस का अद्भुत प्रयोग: गोपियों के प्रेम प्रसंगों में शृंगार रस है। कृष्ण के प्रति गोपियों का प्रेम, उनका विरह, उनकी व्याकुलता - सब बड़े मनोहारी ढंग से वर्णित है।
  • चित्रात्मक शैली: सूरदास की शैली चित्रात्मक है। वे शब्दों से चित्र खींचते हैं। उनके वर्णन में ऐसी जीवंतता है कि पाठक सब कुछ अपनी आँखों से देखने लगता है।
  • गेयता और संगीतात्मकता: उनके पद गाए जाने के लिए बने हैं। उनमें स्वाभाविक गेयता है। यही कारण है कि आज भी उनके पद भक्ति में गाए जाते हैं।
  • सरल और मधुर भाषा: उनकी भाषा ब्रजभाषा है, जो बहुत मधुर और सरल है। उनके पदों में अलंकारों का सहज प्रयोग है, जो काव्य को और सुंदर बना देता है।

प्रश्न 2: सूरदास के पदों में माँ यशोदा के चरित्र का चित्रण कीजिए। [CBSE 2022]

  • वात्सल्य प्रेम की मूर्ति: माँ यशोदा वात्सल्य प्रेम की साक्षात् मूर्ति हैं। वे अपने कान्हा से बेहद प्रेम करती हैं। उनका पूरा जीवन कान्हा के इर्द-गिर्द घूमता है।
  • डाँट में भी प्रेम: कान्हा की शरारतों पर वे उन्हें डाँटती हैं, लेकिन उनकी डाँट में भी प्रेम छिपा होता है। वे जानती हैं कि कान्हा उनकी बात नहीं मानेंगे, फिर भी डाँटती हैं।
  • अतृप्त नेत्र: कान्हा को देखकर उनकी आँखें तृप्त नहीं होतीं। वे कान्हा को दूध पिलाते हुए निहारती रहती हैं। उनके मुँह की ओर देखकर उनका मन प्रसन्न हो जाता है।
  • चिंता और व्याकुलता: कान्हा जब बाहर खेलने जाते हैं, तो माँ यशोदा को उनकी चिंता सताती है। कब लौटेंगे, कहीं गिर तो नहीं गए, कहीं साँप-बिच्छू तो नहीं काट लिए - ऐसी चिंता।
  • गर्व की अनुभूति: कान्हा की शरारतों पर उन्हें गर्व भी होता है। माखन चुराने की चतुराई देखकर वे मन ही मन खुश होती हैं।
  • समर्पित माँ: माँ यशोदा का पूरा जीवन कान्हा के लिए समर्पित है। उनके सुख-दुख, उनकी चिंता-व्याकुलता - सब कान्हा के लिए।

प्रश्न 3: सूरदास के पदों की तुलना कबीर के पदों से कीजिए। [CBSE 2021]

  • भक्ति का प्रकार: सूरदास सगुण भक्ति के कवि हैं, कबीर निर्गुण भक्ति के। सूरदास साकार (कृष्ण) की उपासना करते हैं, कबीर निराकार ईश्वर की।
  • विषय: सूरदास के पदों का विषय कृष्ण की बाल-लीला, उनका सौंदर्य, माँ यशोदा का वात्सल्य और गोपियों का प्रेम है। कबीर के पदों का विषय समाज सुधार, जाति-पाति का विरोध, धार्मिक आडंबरों की आलोचना है।
  • भाषा: सूरदास की भाषा ब्रजभाषा है, जो मधुर और साहित्यिक है। कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है, जो आम बोलचाल की भाषा है।
  • रस: सूरदास के पदों में मुख्य रस वात्सल्य और शृंगार है। कबीर के पदों में वीर, शांत और वैराग्य रस की प्रधानता है।
  • उद्देश्य: सूरदास का उद्देश्य कृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार है। कबीर का उद्देश्य समाज में फैली बुराइयों को दूर करना और लोगों को सही रास्ता दिखाना है।
  • समानताएँ: दोनों भक्तिकाल के महान कवि हैं। दोनों ने अपनी रचनाओं से जनमानस पर गहरा प्रभाव डाला। दोनों की रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

प्रश्न 4: सूरदास के पदों में निहित भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2020]

  • प्रेमाश्रयी भक्ति: सूरदास की भक्ति प्रेमाश्रयी है। वे कृष्ण से अगाध प्रेम करते हैं। उनके लिए कृष्ण केवल ईश्वर नहीं, बल्कि अपने कान्हा हैं।
  • दास्य भाव: उनके पदों में दास्य भाव भी है। वे स्वयं को कृष्ण का दास मानते हैं और उनकी सेवा में लीन रहते हैं।
  • सख्य भाव: ग्वाल-बालों के माध्यम से सख्य भाव प्रकट होता है। कृष्ण उनके मित्र हैं, सखा हैं, जिनके साथ वे खेलते हैं।
  • वात्सल्य भाव: माँ यशोदा के माध्यम से वात्सल्य भाव प्रकट होता है। कृष्ण उनके लाल हैं, जिनके प्रति माँ का असीम प्रेम है।
  • माधुर्य भाव: गोपियों के माध्यम से माधुर्य भाव प्रकट होता है। कृष्ण उनके प्रियतम हैं, जिनसे वे अनन्य प्रेम करती हैं।
  • समर्पण का भाव: सूरदास की भक्ति में समर्पण का भाव प्रमुख है। वे स्वयं को पूरी तरह कृष्ण को समर्पित कर चुके हैं। उनके लिए कृष्ण के अलावा और कुछ नहीं है।

प्रश्न 5: 'सूरदास के पदों में कृष्ण के बाल रूप का चित्रण अद्वितीय है' - इस कथन की पुष्टि कीजिए। [CBSE 2019]

  • सजीव चित्रण: सूरदास ने कृष्ण के बाल रूप का जो सजीव चित्रण किया है, वह हिंदी साहित्य में अद्वितीय है। उनके कान्हा मानो आँखों के सामने घूमने लगते हैं।
  • शारीरिक सौंदर्य: उन्होंने कृष्ण के शारीरिक सौंदर्य का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। उनके नेत्र, अधर, मुस्कान, चाल - सब का ऐसा वर्णन कि पाठक मुग्ध हो जाता है।
  • शरारतों का वर्णन: कान्हा की शरारतों का वर्णन बड़ा रोचक है। माखन चोरी, ग्वाल-बालों को सताना, माँ की बात न मानना - यह सब बाल-सुलभ शरारतें हैं।
  • मासूमियत का चित्रण: उन्होंने कान्हा की मासूमियत का बड़ा ही प्यारा चित्रण किया है। उनकी मुस्कान में, उनकी शरारतों में, उनके खेल में एक मासूमियत है।
  • माँ के प्रति लगाव: कान्हा का माँ के प्रति जो लगाव है, उसे भी उन्होंने चित्रित किया है। माँ की गोद में बैठना, माँ का दूध पीना, माँ से दुलार पाना - यह सब बच्चे के स्वाभाविक लगाव को दर्शाता है।
  • अलौकिकता और लौकिकता का समन्वय: उनके कान्हा में अलौकिकता भी है और लौकिकता भी। वे ईश्वर हैं, लेकिन साथ ही एक साधारण बच्चा भी। यह समन्वय ही उनके बाल रूप को अद्वितीय बनाता है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • सूरदास के काव्य की विशेषताएँ - 2023, 2022, 2021
  • माँ यशोदा का चरित्र-चित्रण - 2023, 2022
  • बालक कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन - 2022, 2020
  • वात्सल्य रस की अभिव्यक्ति - 2023, 2021
  • गोपियों के विरह का वर्णन - 2022, 2021
  • कबीर और सूरदास की तुलना - 2021, 2020, 2019
  • भक्ति भावना का स्वरूप - 2020, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस काव्य पाठ से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में कृष्ण के बाल रूप का वर्णन, माँ यशोदा का चरित्र, वात्सल्य रस, गोपियों के विरह पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में सूरदास के काव्य की विशेषताएँ, माँ यशोदा का चरित्र-चित्रण, कबीर से तुलना, भक्ति भावना और बाल रूप के चित्रण पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • कवि - सूरदास (सगुण भक्ति धारा)
  • समय - 15वीं-16वीं सदी (लगभग 1478-1583)
  • गुरु - महाप्रभु वल्लभाचार्य
  • भाषा - ब्रजभाषा
  • प्रमुख रचनाएँ - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी
  • मुख्य विषय - कृष्ण की बाल-लीला, माँ यशोदा का वात्सल्य, गोपियों का प्रेम और विरह
  • प्रमुख रस - वात्सल्य और शृंगार

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"मैया कबहुँ बढ़ैगी चोटी।"

"बाल बिनोदिन मोहन बाला।"

"जसुदा हरि पालनैं झुलावै।"

"कहाँ गए मोहन माखन चोर।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - सूरदास किस भाषा में लिखते थे? उत्तर - ब्रजभाषा में।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को सूरदास के पदों के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - सूरदास ने बालक कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है? उत्तर - परिचय में बताएँ कि सूरदास ने कृष्ण के बाल रूप का अद्भुत वर्णन किया है। फिर उनके नेत्रों का वर्णन, अधरों का वर्णन, मुस्कान का वर्णन, चाल का वर्णन - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि उनका वर्णन अद्वितीय है।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना (पात्र का परिचय) + मुख्य भाग (चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित) + काव्य में भूमिका + निष्कर्ष।

विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को सूरदास के पदों से उदाहरण सहित स्पष्ट करें) + निष्कर्ष।

तुलनात्मक प्रश्नों के लिए: दोनों का संक्षिप्त परिचय + समानताएँ + असमानताएँ + निष्कर्ष।

10. हब लिंक



© 2025 Guided Path Noida | All Rights Reserved