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कक्षा 11 अध्याय 9 – संदेश – फणीश्वरनाथ रेणु (आरोह – गद्य) | GPN

📘 पाठ – संदेश | कक्षा 11 हिंदी (आरोह) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: आरोह भाग 1 | ✍️ लेखक: फणीश्वरनाथ रेणु | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखक परिचय - फणीश्वरनाथ रेणु

जन्म: 4 मार्च 1921, औराही हिंगना (भागलपुर, बिहार)

मृत्यु: 11 अप्रैल 1977

प्रमुख रचनाएँ: मैला आँचल, परती परिकथा, जूलूस, दीर्घतपा, ठुमरी, अग्निखोर, रसप्रिया, आदि

सम्मान: पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार (मैला आँचल के लिए)

फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य के उन महान लेखकों में हैं जिन्होंने 'आंचलिक उपन्यास' को एक नई पहचान दी। उनका 'मैला आँचल' हिंदी का सबसे प्रसिद्ध आंचलिक उपन्यास माना जाता है। उनकी रचनाओं में ग्रामीण बिहार का जीवन, उसकी संस्कृति, उसकी समस्याएँ और उसके लोग बड़ी जीवन्तता के साथ उभर कर आते हैं। वे सिर्फ एक कथाकार नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उनकी भाषा में अंचल की बोली, उसके लोकगीत, उसकी संस्कृति का अनूठा मिश्रण मिलता है। 'संदेश' उनकी एक प्रसिद्ध कहानी है, जिसमें उन्होंने गाँव से शहर गए एक युवक के मन में उठने वाले भावनात्मक द्वंद्व को बड़ी संवेदनशीलता से चित्रित किया है।

📖 अध्याय पृष्ठभूमि

'संदेश' फणीश्वरनाथ रेणु की एक मार्मिक कहानी है। यह एक गाँव के युवक की कहानी है जो रोजगार की तलाश में शहर चला जाता है। वहाँ वह मजदूरी करता है, छोटे-मोटे काम करता है। उसका जीवन बहुत कठिन है। लेकिन वह हार नहीं मानता।

गाँव में उसकी बूढ़ी माँ है, जो अकेली रहती है। वह बेटे के इंतजार में रहती है। उसे उम्मीद है कि एक दिन उसका बेटा लौट आएगा। बेटा भी माँ को याद करता है। लेकिन वह लौट नहीं सकता। उसे पैसे कमाने हैं, कुछ बनना है।

एक दिन माँ बीमार पड़ जाती है। वह बेटे को संदेश भेजती है कि वह आ जाए। लेकिन बेटा नहीं आ पाता। उसके पास पैसे नहीं हैं, समय नहीं है। वह सिर्फ एक संदेश भेज सकता है - "माँ, मैं आ रहा हूँ।" लेकिन वह संदेश भी माँ तक नहीं पहुँच पाता।

यह कहानी उन लाखों लोगों की कहानी है जो रोजी-रोटी की तलाश में घर छोड़कर शहर चले जाते हैं। यह उन माँओं की कहानी है जो अपने बच्चों के इंतजार में रहती हैं। यह उन संदेशों की कहानी है जो कभी पहुँचते नहीं।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की बोर्ड परीक्षा में यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष इससे 5-8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण, माँ-बेटे के रिश्ते की मार्मिकता, ग्रामीण-शहरी जीवन का द्वंद्व, कहानी का शीर्षक और उसकी सार्थकता, रेणु की भाषा-शैली आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि कहानी का मुख्य संदेश क्या है? माँ की व्यथा को किस प्रकार चित्रित किया गया है? 'संदेश' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

2. सरल सारांश

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी 'संदेश' एक गाँव की बूढ़ी माँ और उसके बेटे की कहानी है, जो रोजगार की तलाश में शहर चला गया है।

गाँव में एक बूढ़ी माँ अकेली रहती है। उसका इकलौता बेटा रोजी-रोटी की तलाश में शहर चला गया है। माँ हर दिन उसकी राह देखती है। उसे उम्मीद है कि एक दिन उसका बेटा लौट आएगा। वह अपने पड़ोसियों से कहती है - "मेरा बेटा आएगा तो तुम्हें पता चल जाएगा। वह बहुत अच्छा है।"

शहर में बेटा मजदूरी करता है। वह छोटे-मोटे काम करता है। उसका जीवन बहुत कठिन है। वह माँ को याद करता है, लेकिन वह लौट नहीं सकता। उसे पैसे कमाने हैं। उसे कुछ बनना है। वह सोचता है - "एक बार पैसे कमा लूँ, फिर माँ के पास लौट जाऊँगा।"

एक दिन माँ बीमार पड़ जाती है। उसे लगता है कि अब उसका अंत समय नजदीक है। वह बेटे को संदेश भेजना चाहती है। वह किसी को बुलाकर कहती है - "मेरे बेटे को बता दो, मैं उसकी राह देख रही हूँ।" संदेश शहर पहुँचता है। बेटे को पता चलता है कि माँ बीमार है।

बेटा तुरंत जाना चाहता है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं। उसके पास समय नहीं है। वह सिर्फ एक संदेश भेज सकता है - "माँ, मैं आ रहा हूँ।" वह संदेश भेजता है। लेकिन वह संदेश माँ तक नहीं पहुँच पाता। जब तक संदेश पहुँचता, माँ इस दुनिया में नहीं रहती।

बेटा बहुत बाद में गाँव लौटता है। उसे पता चलता है कि माँ नहीं रही। वह माँ की कब्र पर जाता है और रोता है। वह सोचता है - "माँ, मैं तो आ गया, लेकिन तुम नहीं रहीं।"

यह कहानी उन लाखों लोगों की कहानी है जो रोजी-रोटी की तलाश में घर छोड़कर चले जाते हैं और कभी लौटकर नहीं आ पाते। यह उन माँओं की कहानी है जो अपने बच्चों के इंतजार में जीवन भर राह देखती हैं और एक दिन चली जाती हैं।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • माँ का अकेलापन और प्रतीक्षा: कहानी में माँ का अकेलापन बहुत मार्मिक है। वह अकेली है, बूढ़ी है, बीमार है। उसके पास कोई नहीं है। वह सिर्फ बेटे के इंतजार में जी रही है। उसकी यह प्रतीक्षा हर उस माँ की प्रतीक्षा है जिसका बेटा दूर चला गया है।
  • बेटे का द्वंद्व: बेटे के मन में गहरा द्वंद्व है। एक तरफ वह माँ के पास जाना चाहता है। दूसरी तरफ उसकी मजबूरियाँ हैं - पैसे नहीं हैं, समय नहीं है, काम छूट जाएगा। यह द्वंद्व हर उस युवा के मन में होता है जो घर छोड़कर शहर गया है।
  • संदेश का प्रतीकात्मक महत्व: 'संदेश' सिर्फ एक शीर्षक नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है। यह उन अधूरे संदेशों का प्रतीक है जो कभी पहुँचते नहीं। यह उन भावनाओं का प्रतीक है जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
  • ग्रामीण-शहरी जीवन का द्वंद्व: कहानी ग्रामीण और शहरी जीवन के द्वंद्व को भी दिखाती है। गाँव में माँ अकेली है, शहर में बेटा अकेला है। दोनों अकेले हैं, दोनों एक-दूसरे के लिए तरस रहे हैं, लेकिन मिल नहीं पा रहे।
  • आर्थिक मजबूरियाँ: कहानी आर्थिक मजबूरियों को भी उजागर करती है। बेटा जाना चाहता है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं। यह उन लाखों गरीब लोगों की कहानी है जो पैसे की कमी के कारण अपनों से दूर रह जाते हैं।
  • समय की क्रूरता: समय कितना क्रूर है। माँ ने जिंदगी भर इंतजार किया, लेकिन बेटा नहीं आया। जब बेटा आया, माँ नहीं थी। यह समय की क्रूरता को दर्शाता है।

📌 विषय / Theme

इस कहानी का मुख्य विषय है माँ-बेटे के रिश्ते की मार्मिकता और प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा। यह दिखाता है कि कैसे आर्थिक मजबूरियाँ परिवारों को तोड़ देती हैं। दूसरा महत्वपूर्ण विषय है प्रतीक्षा और वियोग का दर्द। तीसरा विषय है ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच की खाई। चौथा विषय है उन अधूरे संदेशों की कहानी जो कभी पहुँचते नहीं।

📌 सामाजिक संदेश

फणीश्वरनाथ रेणु इस कहानी के माध्यम से समाज को यह संदेश देते हैं कि हमें अपने बुजुर्गों का ख्याल रखना चाहिए। उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। यह कहानी यह भी संदेश देती है कि प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं को समझना चाहिए। उनके लिए बेहतर सुविधाएँ होनी चाहिए ताकि वे अपने परिवार से जुड़े रह सकें। यह कहानी यह भी बताती है कि समय का सदुपयोग करना चाहिए। जो आज कर सकते हो, कल पर मत टालो।

📌 नैतिक शिक्षा

  • माता-पिता का सम्मान: माता-पिता का सम्मान करो। उन्हें अकेला मत छोड़ो।
  • समय का सदुपयोग: समय का सदुपयोग करो। जो आज कर सकते हो, कल पर मत टालो।
  • संबंधों की अहमियत: रिश्तों की अहमियत समझो। पैसे से ज्यादा कीमती रिश्ते होते हैं।
  • संवाद जरूरी है: अपनों से जुड़े रहो। उनसे बात करो। उन्हें बताओ कि तुम उनसे प्यार करते हो।
  • मजबूरियाँ समझो: दूसरों की मजबूरियाँ समझो। हर कोई वह नहीं कर सकता जो वह चाहता है।

4. पात्र चित्रण

🧑 माँ (केंद्रीय पात्र)

स्वभाव: माँ कहानी की सबसे मार्मिक पात्र है। वह बूढ़ी है, अकेली है, बीमार है। उसके पास कोई नहीं है। वह सिर्फ बेटे के इंतजार में जी रही है। वह हर दिन उसकी राह देखती है। उसे उम्मीद है कि एक दिन उसका बेटा लौट आएगा। वह पड़ोसियों से बेटे की तारीफ करती है - "मेरा बेटा बहुत अच्छा है।" वह अपनी बीमारी छुपाती है, ताकि बेटे को परेशानी न हो। वह त्याग और समर्पण की मूरत है। उसका पूरा जीवन बेटे के लिए है।

भूमिका: वह कहानी की केंद्रीय पात्र है। उसके माध्यम से लेखक ने उन लाखों माँओं की पीड़ा को चित्रित किया है जिनके बेटे दूर चले जाते हैं। वह त्याग, प्रतीक्षा और ममता का प्रतीक है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: माँ त्यागमयी, धैर्यवान, प्रेममयी, अकेली, बीमार, लेकिन बेटे के लिए जीने वाली है। वह ममता का प्रतीक है।

🧑 बेटा

स्वभाव: बेटा एक युवक है जो रोजगार की तलाश में शहर चला गया है। वह मेहनती है - वह मजदूरी करता है, छोटे-मोटे काम करता है। वह जिम्मेदार है - वह पैसे कमाना चाहता है ताकि माँ की मदद कर सके। वह संवेदनशील है - वह माँ को याद करता है, उसके लिए तरसता है। लेकिन वह मजबूर है - उसके पास पैसे नहीं हैं, समय नहीं है। वह द्वंद्व में है - एक तरफ माँ के पास जाना चाहता है, दूसरी तरफ उसकी मजबूरियाँ हैं।

भूमिका: वह कहानी का दूसरा महत्वपूर्ण पात्र है। उसके माध्यम से लेखक ने उन लाखों प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा को चित्रित किया है जो अपने परिवार से दूर रहने को मजबूर हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: बेटा मेहनती, जिम्मेदार, संवेदनशील, लेकिन मजबूर है। वह द्वंद्व में फँसा है। वह प्रवासी श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
संदेशmessage, खबरबेटे ने माँ के लिए संदेश भेजा।
प्रतीक्षाwaiting, इंतजारमाँ बेटे की प्रतीक्षा में थी।
वियोगseparation, दूरीमाँ-बेटे के वियोग की यह मार्मिक कहानी है।
मजबूरीcompulsion, helplessnessबेटे की मजबूरी समझो।
प्रवासीmigrantप्रवासी श्रमिकों की यह कहानी है।
अकेलापनlonelinessमाँ का अकेलापन बहुत मार्मिक है।
ममताmotherly loveमाँ की ममता असीम होती है।
त्यागsacrificeउसने अपना सब कुछ त्याग दिया।
द्वंद्वconflictबेटे के मन में द्वंद्व था।
आंचलिकregionalरेणु आंचलिक कथाकार हैं।
ग्रामीणruralकहानी में ग्रामीण जीवन का चित्रण है।
शहरीurbanबेटा शहरी जीवन जी रहा था।
मार्मिकheart-touchingयह एक मार्मिक कहानी है।
क्रूरcruelसमय बहुत क्रूर है।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: 'संदेश' कहानी में माँ की क्या स्थिति है? उसके अकेलेपन और प्रतीक्षा का वर्णन कीजिए। [CBSE 2023, 2021]

'संदेश' कहानी में माँ की स्थिति बहुत दयनीय है। वह बूढ़ी है, अकेली है, बीमार है। उसका इकलौता बेटा रोजगार की तलाश में शहर चला गया है। वह हर दिन उसकी राह देखती है। उसे उम्मीद है कि एक दिन उसका बेटा लौट आएगा। वह पड़ोसियों से बेटे की तारीफ करती है - "मेरा बेटा बहुत अच्छा है।" वह अपनी बीमारी छुपाती है, ताकि बेटे को परेशानी न हो। उसका पूरा जीवन बेटे के इंतजार में बीत रहा है। यह प्रतीक्षा हर उस माँ की प्रतीक्षा है जिसका बेटा दूर चला गया है। उसका अकेलापन और उसकी प्रतीक्षा कहानी को बहुत मार्मिक बना देती है।

प्रश्न 2: बेटे के मन में क्या द्वंद्व है? वह माँ के पास क्यों नहीं लौट पाता? [CBSE 2022, 2020]

बेटे के मन में गहरा द्वंद्व है। एक तरफ वह माँ के पास जाना चाहता है। वह उसे याद करता है, उसके लिए तरसता है। दूसरी तरफ उसकी मजबूरियाँ हैं। उसके पास पैसे नहीं हैं कि वह टिकट ले सके। उसके पास समय नहीं है - काम छूट जाएगा तो भूखा मरना पड़ेगा। उसे पैसे कमाने हैं, कुछ बनना है। वह सोचता है - "एक बार पैसे कमा लूँ, फिर माँ के पास लौट जाऊँगा।" लेकिन वह समय कभी नहीं आता। यह द्वंद्व हर उस युवा के मन में होता है जो घर छोड़कर शहर गया है। वह लौटना चाहता है, लेकिन लौट नहीं पाता।

प्रश्न 3: 'संदेश' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2023, 2019]

'संदेश' शीर्षक अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है। पहले स्तर पर, यह उस संदेश को दर्शाता है जो माँ बेटे को भेजती है कि वह आ जाए। दूसरे स्तर पर, यह उस संदेश को दर्शाता है जो बेटा माँ को भेजता है - "माँ, मैं आ रहा हूँ।" तीसरे स्तर पर, यह उन अधूरे संदेशों का प्रतीक है जो कभी पहुँचते नहीं। माँ का संदेश बेटे तक पहुँचता है, लेकिन बेटे का संदेश माँ तक नहीं पहुँच पाता। चौथे स्तर पर, यह उन भावनाओं का प्रतीक है जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। इस प्रकार, यह शीर्षक पूरी कहानी का सार समेटे हुए है।

प्रश्न 4: कहानी में ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच के अंतर को किस प्रकार दर्शाया गया है? [CBSE 2021, 2020]

फणीश्वरनाथ रेणु ने 'संदेश' कहानी में ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच के अंतर को बहुत ही मार्मिक ढंग से दर्शाया है। गाँव में माँ है - अकेली, बूढ़ी, बीमार, लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़ी हुई। शहर में बेटा है - अकेला, संघर्षशील, मजबूर, लेकिन अपनों से दूर। गाँव का जीवन धीमा है, शांत है, लेकिन उसमें रिश्तों की गर्माहट है। शहर का जीवन तेज है, भागदौड़ भरा है, लेकिन उसमें अकेलापन है। गाँव में माँ बेटे के इंतजार में है, शहर में बेटा माँ को याद कर रहा है। दोनों एक-दूसरे के लिए तरस रहे हैं, लेकिन मिल नहीं पा रहे। यह अंतर ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच की खाई को दर्शाता है।

प्रश्न 5: कहानी का अंत क्या संदेश देता है? [CBSE 2022]

'संदेश' कहानी का अंत बहुत मार्मिक है और गहरा संदेश देता है। बेटा बहुत बाद में गाँव लौटता है, लेकिन माँ नहीं रही। वह माँ की कब्र पर जाकर रोता है। यह अंत कई संदेश देता है। पहला - समय का सदुपयोग करो, कल पर मत टालो। दूसरा - रिश्तों की अहमियत समझो, पैसे से ज्यादा कीमती रिश्ते होते हैं। तीसरा - माता-पिता का सम्मान करो, उन्हें अकेला मत छोड़ो। चौथा - आर्थिक मजबूरियाँ कैसे परिवारों को तोड़ देती हैं, यह समझो। पाँचवाँ - प्यार का इजहार करो, अपनों को बताओ कि तुम उनसे प्यार करते हो, वरना देर हो जाती है।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'संदेश' कहानी के माध्यम से फणीश्वरनाथ रेणु ने प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा को किस प्रकार चित्रित किया है? विस्तार से विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2023, 2021, 2019]

फणीश्वरनाथ रेणु ने 'संदेश' कहानी के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक और यथार्थवादी ढंग से चित्रित किया है।

  • आर्थिक मजबूरियाँ: बेटा रोजगार की तलाश में शहर गया है। यह उसकी आर्थिक मजबूरी है। गाँव में उसे काम नहीं मिल रहा था, इसलिए उसे शहर जाना पड़ा। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जो रोजी-रोटी की तलाश में घर छोड़ने को मजबूर हैं।
  • अकेलापन: शहर में बेटा अकेला है। वहाँ कोई अपना नहीं है। वह माँ को याद करता है, लेकिन वहाँ से लौट नहीं सकता। यह अकेलापन हर प्रवासी के जीवन का हिस्सा है।
  • द्वंद्व और अपराधबोध: बेटे के मन में द्वंद्व है। एक तरफ वह माँ के पास जाना चाहता है, दूसरी तरफ उसकी मजबूरियाँ हैं। जब माँ बीमार होती है, तो वह नहीं जा पाता। बाद में उसे अपराधबोध होता है कि वह माँ के पास नहीं जा सका।
  • आर्थिक तंगी: बेटे के पास पैसे नहीं हैं कि वह टिकट ले सके। यह प्रवासी श्रमिकों की सबसे बड़ी समस्या है। वे कमाते तो हैं, लेकिन इतना नहीं कि आराम से रह सकें और अपनों से मिल सकें।
  • समय का अभाव: उसके पास समय नहीं है। काम छूट जाएगा तो भूखा मरना पड़ेगा। यह समय का अभाव भी प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी समस्या है।
  • परिवार से दूरी: सबसे बड़ी पीड़ा है परिवार से दूरी। माँ अकेली है, बीमार है, लेकिन बेटा उसके पास नहीं है। जब वह जाता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

इस प्रकार, रेणु ने इस कहानी के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की उस पीड़ा को चित्रित किया है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। यह कहानी उन लाखों लोगों की कहानी है जो रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर हैं और अपनों से मिलने को तरस रहे हैं।

प्रश्न 2: 'संदेश' कहानी में माँ-बेटे के रिश्ते को किस प्रकार चित्रित किया गया है? इस रिश्ते की मार्मिकता का वर्णन कीजिए। [CBSE 2022, 2020]

फणीश्वरनाथ रेणु ने 'संदेश' कहानी में माँ-बेटे के रिश्ते को बहुत ही मार्मिक और संवेदनशील ढंग से चित्रित किया है।

माँ का पक्ष:

  • असीम ममता: माँ अपने बेटे से असीम प्यार करती है। वह हर दिन उसकी राह देखती है। वह पड़ोसियों से बेटे की तारीफ करती है - "मेरा बेटा बहुत अच्छा है।"
  • त्याग: वह अपनी बीमारी छुपाती है, ताकि बेटे को परेशानी न हो। वह अपने दुखों को सहन कर लेती है, लेकिन बेटे पर बोझ नहीं डालना चाहती।
  • प्रतीक्षा: उसका पूरा जीवन प्रतीक्षा में बीत रहा है। वह जानती है कि बेटा आएगा, वह उसकी राह देख रही है।
  • चिंता: वह बेटे की चिंता करती है - कहीं वह बीमार तो नहीं है, कहीं उसे कोई परेशानी तो नहीं है।

बेटे का पक्ष:

  • प्रेम और सम्मान: बेटा भी माँ से बहुत प्यार करता है। वह उसे याद करता है, उसके लिए तरसता है। वह उसका सम्मान करता है।
  • द्वंद्व: उसके मन में गहरा द्वंद्व है। वह माँ के पास जाना चाहता है, लेकिन मजबूरियाँ हैं।
  • अपराधबोध: जब माँ बीमार होती है और वह नहीं जा पाता, तो उसे अपराधबोध होता है। बाद में जब माँ नहीं रहती, तो यह अपराधबोध और गहरा हो जाता है।

रिश्ते की मार्मिकता:

  • दूरी के बावजूद जुड़ाव: दोनों शारीरिक रूप से दूर हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं।
  • अधूरा संदेश: बेटे का संदेश माँ तक नहीं पहुँच पाता। यह अधूरापन रिश्ते को और मार्मिक बना देता है।
  • देर से आना: बेटा बहुत देर से आता है। जब वह आता है, माँ नहीं रहती। यह देरी रिश्ते की त्रासदी को और गहरा कर देती है।
  • कब्र पर मिलन: अंत में वह माँ की कब्र पर जाकर रोता है। यह उनका अंतिम मिलन है।

इस प्रकार, रेणु ने माँ-बेटे के रिश्ते को उसकी संपूर्ण मार्मिकता और गहराई के साथ चित्रित किया है। यह रिश्ता किसी भी पाठक की आँखों को नम कर देता है।

प्रश्न 3: फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं? 'संदेश' कहानी के संदर्भ में विस्तार से लिखिए। [CBSE 2021, 2019]

फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा-शैली की अनेक विशेषताएँ हैं, जो 'संदेश' कहानी में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

  • आंचलिकता: रेणु की भाषा की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी आंचलिकता। वे बिहार के उस अंचल की भाषा का प्रयोग करते हैं जहाँ की वे कहानियाँ लिखते हैं। 'संदेश' में भी ग्रामीण बिहार की भाषा के शब्द मिलते हैं।
  • सजीवता और चित्रात्मकता: उनकी भाषा बहुत सजीव और चित्रात्मक है। वे गाँव के दृश्यों, माँ की प्रतीक्षा, बेटे के द्वंद्व को इतनी सजीवता से चित्रित करते हैं कि पाठक उसे अपनी आँखों के सामने देखने लगता है।
  • सरलता और सहजता: उनकी भाषा बहुत सरल और सहज है। वे कठिन से कठिन बात को भी इतनी आसानी से कह देते हैं कि पाठक बिना किसी प्रयास के समझ जाता है।
  • संवेदनशीलता: उनकी भाषा में गहरी संवेदनशीलता है। वे माँ की पीड़ा, उसके अकेलेपन, उसकी प्रतीक्षा को बहुत संवेदनशीलता से चित्रित करते हैं।
  • लोक तत्वों का समावेश: वे अपनी कहानियों में लोकगीतों, लोककथाओं और लोकजीवन के तत्वों का समावेश करते हैं। इससे उनकी कहानियाँ और अधिक जीवन्त हो जाती हैं।
  • मार्मिकता: उनकी भाषा में गहरी मार्मिकता है। 'संदेश' पढ़ते समय कई जगह पाठक की आँखें नम हो जाती हैं।
  • प्रवाहपूर्णता: उनकी भाषा में प्रवाह है। पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई कहानी सुन रहे हों। यह प्रवाह पाठक को बाँधे रखता है।

इस प्रकार, रेणु की भाषा-शैली आंचलिक, सजीव, संवेदनशील और मार्मिक है। वे हिंदी साहित्य के महानतम कथाकारों में से एक हैं।

प्रश्न 4: 'संदेश' कहानी को समय की क्रूरता की कहानी के रूप में विश्लेषित कीजिए। [CBSE 2020]

'संदेश' कहानी को समय की क्रूरता की कहानी के रूप में देखा जा सकता है। यह कहानी दिखाती है कि समय कितना क्रूर हो सकता है।

  • प्रतीक्षा का लंबा समय: माँ ने जिंदगी भर बेटे का इंतजार किया। हर दिन, हर घंटे, हर पल वह उसकी राह देखती रही। समय बीतता गया, लेकिन बेटा नहीं आया।
  • बीमारी और मृत्यु: जब माँ बीमार पड़ी, तब भी बेटा नहीं आया। जब उसकी मृत्यु हुई, तब भी बेटा नहीं आया। समय ने उसे वह मौका नहीं दिया।
  • देर से आना: बेटा बहुत देर से आया। जब वह आया, माँ इस दुनिया में नहीं थी। यह देरी समय की क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
  • अधूरा संदेश: बेटे का संदेश - "माँ, मैं आ रहा हूँ" - माँ तक नहीं पहुँच पाया। समय ने उसे पहुँचने ही नहीं दिया।
  • मजबूरियाँ और समय: बेटे की मजबूरियाँ भी समय से जुड़ी हैं। उसके पास समय नहीं था। काम छूट जाने का डर था। यह समय की कमी ही उसे माँ से दूर रखती है।
  • अपराधबोध और पछतावा: बाद में बेटे को अपराधबोध और पछतावा होता है कि वह समय पर नहीं आया। लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। समय लौटकर नहीं आता।

कहानी का सबसे मार्मिक पक्ष यह है कि बेटा आ तो गया, लेकिन समय पर नहीं। माँ ने उसे देखा नहीं, उसकी आवाज सुनी नहीं, उसका स्पर्श महसूस नहीं किया। समय ने उन्हें मिलने का मौका ही नहीं दिया। यही समय की क्रूरता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि समय का सदुपयोग करो। जो आज कर सकते हो, कल पर मत टालो। क्योंकि कल पता नहीं किसका होता है।

प्रश्न 5: 'संदेश' कहानी का शीर्षक 'संदेश' क्यों रखा गया है? क्या कोई अन्य शीर्षक भी हो सकता था? अपने विचार व्यक्त कीजिए। [CBSE 2021]

फणीश्वरनाथ रेणु ने अपनी इस मार्मिक कहानी का शीर्षक 'संदेश' रखा है, जो अत्यंत सार्थक है।

'संदेश' शीर्षक की सार्थकता:

  • माँ का संदेश: माँ बीमार पड़ने पर बेटे को संदेश भेजती है कि वह आ जाए। यह संदेश बेटे तक पहुँचता है।
  • बेटे का संदेश: बेटा माँ को संदेश भेजता है - "माँ, मैं आ रहा हूँ।" यह संदेश माँ तक नहीं पहुँच पाता।
  • अधूरे संदेश: दोनों संदेशों में से एक अधूरा रह जाता है। यह अधूरापन कहानी को और मार्मिक बना देता है।
  • प्रतीकात्मकता: 'संदेश' उन सभी अधूरे संदेशों का प्रतीक है जो कभी पहुँचते नहीं। यह उन भावनाओं का प्रतीक है जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।

अन्य संभावित शीर्षक:

  • प्रतीक्षा: यह शीर्षक माँ की प्रतीक्षा पर केंद्रित होता। लेकिन यह कहानी के दूसरे पक्ष - बेटे के द्वंद्व और संदेश - को नहीं दर्शाता।
  • माँ: यह शीर्षक माँ को केंद्र में रखता, लेकिन बेटे की पीड़ा को नहीं दर्शाता।
  • देरी: यह शीर्षक समय की क्रूरता पर केंद्रित होता, लेकिन संदेश के महत्व को नहीं दर्शाता।
  • वियोग: यह शीर्षक माँ-बेटे के वियोग को दर्शाता, लेकिन यह बहुत सामान्य है।

निष्कर्ष: इन सभी विकल्पों की तुलना में 'संदेश' शीर्षक सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह कहानी के केंद्रीय तत्व को दर्शाता है - वह संदेश जो भेजा गया, वह संदेश जो पहुँचा, वह संदेश जो नहीं पहुँचा। यह शीर्षक पूरी कहानी का सार समेटे हुए है और पाठक को सोचने पर मजबूर करता है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • माँ के अकेलेपन और प्रतीक्षा का वर्णन - 2023, 2021, 2019
  • बेटे के द्वंद्व का विश्लेषण - 2022, 2020, 2018
  • शीर्षक की सार्थकता - 2022, 2020, 2019
  • ग्रामीण-शहरी जीवन का अंतर - 2021, 2019
  • कहानी के अंत का संदेश - 2020, 2018
  • प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा - 2021, 2020, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस पाठ से प्रतिवर्ष 5-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में माँ की स्थिति, बेटे के द्वंद्व और शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा, माँ-बेटे के रिश्ते की मार्मिकता और समय की क्रूरता पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखक - फणीश्वरनाथ रेणु
  • जन्म - 1921, मृत्यु - 1977
  • प्रमुख रचनाएँ - मैला आँचल, परती परिकथा, जूलूस
  • सम्मान - पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • पुस्तक - आरोह भाग 1
  • पाठ का नाम - संदेश
  • मुख्य पात्र - माँ, बेटा
  • मुख्य विषय - माँ-बेटे का वियोग, प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा
  • विधा - कहानी (आंचलिक)

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"माँ, मैं आ रहा हूँ।"

"बेटा आएगा तो तुम्हें पता चल जाएगा।"

"समय बहुत क्रूर है।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।

उदाहरण: प्रश्न - 'संदेश' कहानी के लेखक कौन हैं? उत्तर - फणीश्वरनाथ रेणु।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु का उदाहरण सहित वर्णन।

उदाहरण: प्रश्न - माँ की क्या स्थिति है? उत्तर - परिचय में बताएँ कि माँ कहानी की केंद्रीय पात्र है। फिर उसके अकेलेपन, बीमारी, प्रतीक्षा, त्याग - चार बिंदुओं में समझाएँ। निष्कर्ष में कहें कि यह स्थिति उसे एक मार्मिक पात्र बनाती है।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या + उदाहरण सहित विश्लेषण + निष्कर्ष। जैसे प्रवासी श्रमिकों की पीड़ा पर प्रश्न - पहले प्रवासी श्रमिकों की समस्या का परिचय दें, फिर कहानी में बेटे के माध्यम से उस पीड़ा का विश्लेषण करें, अंत में निष्कर्ष दें।

10. हब लिंक



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