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कक्षा 11 अध्याय 2 – मियाँ नसीरुद्दीन – कृष्णा सोबती (आरोह – गद्य) | GPN

📘 पाठ – मियाँ नसीरुद्दीन | कक्षा 11 हिंदी (आरोह) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: आरोह भाग 1 | ✍️ लेखिका: कृष्णा सोबती | 📝 प्रकार: रेखाचित्र (व्यक्ति-चित्र) | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखिका परिचय - कृष्णा सोबती

जन्म: 18 फरवरी 1925, गुजरात (पाकिस्तान)

मृत्यु: 25 जनवरी 2019

प्रमुख रचनाएँ: जिंदगीनामा, मित्रो मरजानी, डार से बिछुड़ी, सूरजमुखी अंधेरे के, बादलों के घेरे, यारों के यार, हम हशमत, ऐ लड़की, तिन पहाड़, समय सरगम

सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1980), मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, कथा चूड़ामणि पुरस्कार, व्यास सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017)

कृष्णा सोबती हिंदी साहित्य की एक प्रमुख कथाकार और उपन्यासकार थीं। उनकी रचनाओं में स्त्री-विमर्श, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संबंधों की जटिलताओं का गहरा चित्रण मिलता है। उनकी भाषा बेहद सजीव, ठेठ और क्षेत्रीय बोलियों से भरपूर होती है। 'मियाँ नसीरुद्दीन' उनका एक प्रसिद्ध रेखाचित्र है, जिसमें उन्होंने एक साधारण कारीगर के असाधारण व्यक्तित्व का चित्रण किया है। वे नई कहानी आंदोलन की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर थीं और उन्होंने पारंपरिक कथा-शैली से हटकर नए प्रयोग किए।

📖 अध्याय पृष्ठभूमि

'मियाँ नसीरुद्दीन' कृष्णा सोबती द्वारा लिखा गया एक रेखाचित्र है, जो एक साधारण से कारीगर के असाधारण व्यक्तित्व का चित्रण करता है। यह रेखाचित्र मियाँ नसीरुद्दीन नामक एक बुजुर्ग शिल्पकार की कहानी है, जो दिल्ली की एक गली में रहता है और अपने हाथों से खिलौने और चीज़ें बनाता है। लेखिका जब भी उस गली से गुजरती हैं, वह उन्हें दिख जाता है - अपनी छोटी-सी दुकान में बैठा, हाथों में औजार लिए, कुछ न कुछ बनाता हुआ।

यह रेखाचित्र केवल एक व्यक्ति का चित्र नहीं है, बल्कि एक जीवन-दर्शन है। मियाँ नसीरुद्दीन अपनी सादगी, शिल्प के प्रति समर्पण, धैर्य और संतोष के कारण एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बन जाते हैं। लेखिका उनके माध्यम से हमें जीने की कला सिखाती हैं - कैसे थोड़े में संतोष करना, कैसे अपने काम से प्रेम करना, कैसे समय के साथ बहना। यह रेखाचित्र एक ओर जहाँ लुप्त होती शिल्प-संस्कृति का दस्तावेज है, वहीं दूसरी ओर मानवीय मूल्यों का एक सजीव चित्र।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की बोर्ड परीक्षा में यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष इससे 5-8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। मियाँ नसीरुद्दीन के चरित्र की विशेषताएँ, उनके जीवन-दर्शन, लेखिका का उनके प्रति दृष्टिकोण, रेखाचित्र की शैली आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि मियाँ नसीरुद्दीन लेखिका को क्यों प्रभावित करते हैं? उनके जीवन से हम क्या सीख सकते हैं? रेखाचित्र की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं?

2. सरल सारांश

कृष्णा सोबती का यह रेखाचित्र मियाँ नसीरुद्दीन नामक एक बुजुर्ग कारीगर के इर्द-गिर्द घूमता है। मियाँ नसीरुद्दीन दिल्ली की किसी पुरानी गली में रहते हैं। उनकी एक छोटी-सी दुकान है, जहाँ वे बैठकर लकड़ी और धातु के खिलौने, बर्तन और दूसरी चीज़ें बनाते हैं। लेखिका जब भी उस गली से गुजरती हैं, वह उन्हें वहाँ बैठे दिख जाते हैं - हाथों में औजार, आँखों में एक अजीब सी शांति, चेहरे पर संतोष की मुस्कान।

मियाँ नसीरुद्दीन की सबसे बड़ी विशेषता है उनका धैर्य। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ पर काम करते रहते हैं। उन्हें कोई जल्दी नहीं, कोई हड़बड़ी नहीं। वे अपने काम से प्यार करते हैं। उनके बनाए खिलौनों में एक अलग ही रौनक होती है - मानो उनमें जान डाल दी गई हो। लेखिका को उनका यह समर्पण बहुत भाता है।

धीरे-धीरे लेखिका का उनसे परिचय बढ़ता है। वे उनसे बातें करती हैं, उनके जीवन के बारे में जानती हैं। मियाँ नसीरुद्दीन बताते हैं कि वे बचपन से यही काम कर रहे हैं। उनके पिता भी यही काम करते थे, उनके दादा भी। यह काम उन्हें विरासत में मिला है। उन्होंने कभी कोई बड़ा सपना नहीं देखा, कभी दूर जाने की इच्छा नहीं की। उनकी पूरी दुनिया इसी गली में बसी है - उनकी दुकान, उनके औजार, उनके खिलौने।

लेखिका उनके इस संतोष और सादगी से बहुत प्रभावित होती हैं। वह सोचती हैं कि कितने लोग होते हैं जो बड़े-बड़े सपने देखते हैं, बड़ी-बड़ी इच्छाएँ पालते हैं, लेकिन फिर भी दुखी रहते हैं। और यह मियाँ नसीरुद्दीन हैं - जिनके पास कुछ नहीं है, लेकिन वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति है, एक गहरा संतोष।

रेखाचित्र के अंत में लेखिका यह महसूस करती हैं कि मियाँ नसीरुद्दीन कोई साधारण कारीगर नहीं हैं। वे एक दार्शनिक हैं, एक संत हैं। उन्होंने जीवन का सच्चा सुख पा लिया है - अपने काम में, अपनी सादगी में, अपने संतोष में। वे हमें सिखाते हैं कि जीवन का असली आनंद बड़ी चीज़ों में नहीं, छोटी-छोटी चीज़ों में है।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • सादगी और संतोष का जीवन-दर्शन: मियाँ नसीरुद्दीन का पूरा जीवन सादगी और संतोष का प्रतीक है। उनके पास न तो बड़ा मकान है, न कोई बड़ी दौलत। बस एक छोटी-सी दुकान, कुछ औजार, और उनके हाथ। फिर भी वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। यह संतोष ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
  • शिल्प के प्रति समर्पण: मियाँ नसीरुद्दीन अपने काम से बेइंतहा प्यार करते हैं। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं। उनके लिए काम कोई बोझ नहीं, बल्कि ध्यान है, साधना है। उनके बनाए खिलौनों में उनकी आत्मा बसती है।
  • समय की अलग अवधारणा: मियाँ नसीरुद्दीन के लिए समय की कोई जल्दी नहीं है। वे आधुनिक जीवन की उस भागदौड़ से बिल्कुल अलग हैं जहाँ हर किसी को जल्दी रहती है। उनका समय धीरे-धीरे बहता है, जैसे कोई शांत नदी।
  • विरासत और परंपरा: यह शिल्प उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। वे इसे सिर्फ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि एक परंपरा के रूप में जीते हैं। यह उनकी पहचान है, उनकी अस्मिता है।
  • आधुनिकता और परंपरा का द्वंद्व: यह रेखाचित्र आधुनिक जीवन और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के बीच के द्वंद्व को भी उजागर करता है। एक तरफ है आधुनिक जीवन की भागदौड़ और असंतोष, दूसरी तरफ है मियाँ नसीरुद्दीन का धीमा, संतोषी जीवन।
  • लुप्त होती शिल्प-संस्कृति: यह रेखाचित्र उस शिल्प-संस्कृति का भी दस्तावेज है जो धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। मशीनों के इस युग में हाथ के बने उत्पादों की कोई कीमत नहीं रह गई है। मियाँ नसीरुद्दीन जैसे कारीगर अब दिखाई नहीं देते।

📌 विषय / Theme

इस रेखाचित्र का मुख्य विषय सादगी और संतोष का जीवन-दर्शन है। यह दिखाता है कि असली सुख बड़ी चीज़ों में नहीं, छोटी-छोटी चीज़ों में है। दूसरा महत्वपूर्ण विषय है शिल्प और कला के प्रति समर्पण - कैसे अपने काम से प्यार करना ही जीवन को सार्थक बना सकता है। तीसरा विषय है परंपरा और विरासत का महत्व। चौथा विषय है आधुनिक जीवन की भागदौड़ और पारंपरिक जीवन की शांति के बीच का अंतर।

📌 सामाजिक संदेश

कृष्णा सोबती इस रेखाचित्र के माध्यम से समाज को यह संदेश देती हैं कि जीवन का असली आनंद बड़ी चीज़ों में नहीं, छोटी-छोटी चीज़ों में है। हमें अपने काम से प्यार करना चाहिए, उसे सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं समझना चाहिए। यह रेखाचित्र हमें यह भी याद दिलाता है कि हमारी परंपराएँ और विरासत कितनी महत्वपूर्ण हैं। हमें उन कारीगरों और शिल्पकारों का सम्मान करना चाहिए जो अपने हाथों से चीज़ें बनाते हैं और हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं।

📌 नैतिक शिक्षा

  • संतोष ही सबसे बड़ा सुख है: मियाँ नसीरुद्दीन हमें सिखाते हैं कि संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। जो थोड़े में संतोष कर लेता है, वही सच्चा सुखी है।
  • काम से प्यार करो: हमें अपने काम से प्यार करना चाहिए। काम को सिर्फ पैसे कमाने का जरिया न समझें, बल्कि उसे अपनी साधना बनाएँ।
  • धैर्य का महत्व: मियाँ नसीरुद्दीन का धैर्य हमें सिखाता है कि जीवन में जल्दी नहीं, धैर्य से काम लेना चाहिए।
  • अपनी जड़ों से जुड़े रहो: हमें अपनी जड़ों से, अपनी परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए। यही हमारी पहचान है।
  • सादगी में सौंदर्य: सादगी में एक अलग ही सौंदर्य होता है। हमें सादगी से जीना सीखना चाहिए।

4. पात्र चित्रण

🧑 मियाँ नसीरुद्दीन (केंद्रीय पात्र)

स्वभाव: मियाँ नसीरुद्दीन एक बुजुर्ग कारीगर हैं, जो दिल्ली की एक पुरानी गली में रहते हैं। उनका स्वभाव बेहद शांत, धैर्यवान और संतोषी है। वे बहुत कम बोलते हैं, लेकिन उनकी आँखों में एक गहराई है। उनके चेहरे पर हमेशा एक अजीब सी शांति और संतोष की मुस्कान रहती है। उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं, कोई इच्छा नहीं। वे पूरी तरह से संतुष्ट हैं अपनी छोटी-सी दुनिया में।

विशेषताएँ: उनकी सबसे बड़ी विशेषता है उनका धैर्य। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं। दूसरी विशेषता है उनका अपने काम के प्रति समर्पण। उनके लिए काम कोई बोझ नहीं, बल्कि ध्यान है। तीसरी विशेषता है उनकी सादगी। वे बहुत थोड़े में जीते हैं और उसी में संतुष्ट हैं। चौथी विशेषता है उनकी परंपरा के प्रति निष्ठा - वे उस शिल्प को जीवित रखे हुए हैं जो उन्हें अपने पूर्वजों से मिला है।

भूमिका: मियाँ नसीरुद्दीन सिर्फ एक पात्र नहीं हैं, बल्कि एक जीवन-दर्शन हैं। वे सादगी, संतोष और समर्पण के प्रतीक हैं। उनके माध्यम से लेखिका हमें जीवन का सच्चा सुख दिखाती हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: मियाँ नसीरुद्दीन धैर्यवान, संतोषी, सादगीपसंद, कर्मठ, परंपरा के प्रति समर्पित हैं। वे लेखिका के आदर्श का प्रतिनिधित्व करते हैं।

🧑 लेखिका (कृष्णा सोबती) - वर्णनकर्ता

स्वभाव: लेखिका स्वयं इस रेखाचित्र की वर्णनकर्ता हैं। वे एक संवेदनशील और चिंतनशील व्यक्तित्व हैं। उन्हें अपने आसपास की छोटी-छोटी चीज़ों में गहराई दिखती है। वे मियाँ नसीरुद्दीन को देखती हैं तो उनमें एक असाधारणता महसूस करती हैं। वे उनसे प्रभावित होती हैं और उनके जीवन-दर्शन को समझने की कोशिश करती हैं।

भूमिका: लेखिका एक पर्यवेक्षक की भूमिका में हैं। वे मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन को करीब से देखती हैं और उसका चित्रण करती हैं। वे पाठकों को मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन-दर्शन से परिचित कराती हैं और उनसे सीखने का आग्रह करती हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: लेखिका संवेदनशील, चिंतनशील, गहरी दृष्टि रखने वाली हैं। वे मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन-दर्शन से प्रभावित हैं।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) तथा कक्षा 11 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
रेखाचित्रव्यक्ति या स्थान का शब्द-चित्र, sketchयह रेखाचित्र मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन पर आधारित है।
कारीगरशिल्पकार, craftsmanमियाँ नसीरुद्दीन एक कुशल कारीगर हैं।
शिल्पहस्तकला, craftयह शिल्प उन्हें अपने पूर्वजों से मिला है।
संतोषcontentment, satisfactionउनके चेहरे पर गहरा संतोष दिखता है।
सादगीsimplicityउनकी सादगी देखते ही बनती है।
धैर्यpatienceउनका धैर्य अद्भुत है।
समर्पणdedicationअपने काम के प्रति उनका समर्पण देखते ही बनता है।
विरासतheritage, legacyयह शिल्प उनकी विरासत है।
परंपराtraditionवे अपनी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
लुप्तdisappearing, extinctअब ऐसे कारीगर लुप्त होते जा रहे हैं।
औजारtoolsउनके पास पुराने औजार हैं।
खिलौनेtoysवे हाथ से खिलौने बनाते हैं।
भागदौड़rush, hustleआधुनिक जीवन की भागदौड़ में यह शांति कहाँ।
दार्शनिकphilosopherमियाँ नसीरुद्दीन एक सच्चे दार्शनिक हैं।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: मियाँ नसीरुद्दीन कौन हैं? उनके व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2023, 2021]

मियाँ नसीरुद्दीन कृष्णा सोबती के रेखाचित्र के केंद्रीय पात्र हैं। वे दिल्ली की एक पुरानी गली में रहने वाले एक बुजुर्ग कारीगर हैं, जो हाथ से खिलौने और दूसरी चीज़ें बनाते हैं। उनके व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ हैं - धैर्य, संतोष, सादगी, और अपने काम के प्रति समर्पण। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं, उन्हें कोई जल्दी नहीं होती। वे बहुत थोड़े में जीते हैं और पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके चेहरे पर हमेशा एक अजीब सी शांति और संतोष की मुस्कान रहती है। वे अपने शिल्प को विरासत की तरह निभा रहे हैं और उसी में अपना सुख पाते हैं।

प्रश्न 2: लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन से क्यों प्रभावित हैं? [CBSE 2022, 2020]

लेखिका कृष्णा सोबती मियाँ नसीरुद्दीन से कई कारणों से प्रभावित हैं। पहला कारण है उनका धैर्य और अपने काम के प्रति समर्पण। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के। दूसरा कारण है उनकी सादगी और संतोष। उनके पास कुछ नहीं है, फिर भी वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। तीसरा कारण है उनका शांत और गंभीर व्यक्तित्व। उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति है, एक गहरा संतोष। चौथा कारण है उनका जीवन-दर्शन - वे बिना किसी इच्छा के, बिना किसी शिकायत के जीते हैं। लेखिका को लगता है कि मियाँ नसीरुद्दीन सिर्फ एक कारीगर नहीं, बल्कि एक दार्शनिक हैं, एक संत हैं।

प्रश्न 3: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं? [CBSE 2023, 2019]

कृष्णा सोबती की भाषा-शैली की अनेक विशेषताएँ इस रेखाचित्र में दिखाई देती हैं। पहली विशेषता है भाषा की सजीवता और चित्रात्मकता। वे शब्दों से ऐसा चित्र खींचती हैं कि पाठक मियाँ नसीरुद्दीन को अपनी आँखों के सामने देखने लगता है। दूसरी विशेषता है ठेठ क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग। उनकी भाषा में दिल्ली की स्थानीय बोली के शब्द मिलते हैं। तीसरी विशेषता है संवेदनशीलता। वे बड़ी संवेदनशीलता से पात्रों के मनोभावों को चित्रित करती हैं। चौथी विशेषता है सरलता और सहजता। उनकी भाषा बोलचाल की भाषा है, जो पाठक से सीधे जुड़ती है। पाँचवीं विशेषता है दार्शनिक गहराई - साधारण-सी बातों में भी वे गहरा अर्थ खोज लेती हैं।

प्रश्न 4: मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन-दर्शन से हम क्या सीख सकते हैं? [CBSE 2022, 2021]

मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन-दर्शन से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। पहला सीख - संतोष ही सबसे बड़ा सुख है। उनके पास कुछ नहीं है, फिर भी वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। दूसरा सीख - अपने काम से प्यार करो। वे अपने काम को सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं मानते, बल्कि उससे प्यार करते हैं। तीसरा सीख - धैर्य रखो। उनके पास असीम धैर्य है, जो आज के भागदौड़ भरे जीवन में दुर्लभ है। चौथा सीख - सादगी से जियो। सादगी में एक अलग ही सौंदर्य होता है। पाँचवाँ सीख - अपनी जड़ों से जुड़े रहो। वे अपनी परंपरा और विरासत को जीवित रखे हुए हैं।

प्रश्न 5: रेखाचित्र विधा क्या है? 'मियाँ नसीरुद्दीन' को रेखाचित्र क्यों कहा जाता है? [CBSE 2020]

रेखाचित्र गद्य की एक विधा है जिसमें किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का शब्दों के माध्यम से ऐसा चित्र प्रस्तुत किया जाता है मानो पाठक उसे अपनी आँखों से देख रहा हो। यह संस्मरण और निबंध के मिश्रण जैसा होता है। 'मियाँ नसीरुद्दीन' को रेखाचित्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व का बहुत ही सजीव और चित्रात्मक वर्णन किया है। उनकी दुकान, उनके बैठने का ढंग, उनके हाथों की गति, उनके चेहरे का भाव - सब कुछ ऐसा वर्णित है कि पाठक उन्हें अपने सामने देख सकता है। साथ ही, इसमें लेखिका की निजी टिप्पणियाँ और भावनाएँ भी शामिल हैं, जो इसे संस्मरण का रूप देती हैं।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र के माध्यम से कृष्णा सोबती ने आधुनिक जीवन और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के बीच के द्वंद्व को किस प्रकार उजागर किया है? [CBSE 2023, 2021, 2019]

कृष्णा सोबती ने 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र के माध्यम से आधुनिक जीवन और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के बीच के द्वंद्व को बहुत ही सूक्ष्मता से उजागर किया है।

  • भागदौड़ बनाम धैर्य: आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता है भागदौड़ और जल्दबाजी। हर किसी को जल्दी है, कुछ पाने की, कहीं पहुँचने की। इसके विपरीत, मियाँ नसीरुद्दीन के जीवन में असीम धैर्य है। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के।
  • असंतोष बनाम संतोष: आधुनिक जीवन में असंतोष का बोलबाला है। लोगों के पास सब कुछ है, फिर भी वे संतुष्ट नहीं हैं। मियाँ नसीरुद्दीन के पास कुछ नहीं है, फिर भी वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके चेहरे पर एक गहरा संतोष है।
  • मशीनीकरण बनाम हस्तशिल्प: आधुनिक युग में मशीनों ने हाथ के काम की जगह ले ली है। मशीन से बनी चीज़ें सस्ती और जल्दी मिल जाती हैं। मियाँ नसीरुद्दीन का हस्तशिल्प इस मशीनी दुनिया में एक विसंगति की तरह है। वे उस लुप्त होती शिल्प-संस्कृति के प्रतीक हैं जो धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।
  • पैसे की दौड़ बनाम काम के प्रति समर्पण: आधुनिक जीवन में लोग सिर्फ पैसे के पीछे भागते हैं। उनके लिए काम सिर्फ पैसे कमाने का जरिया है। मियाँ नसीरुद्दीन के लिए काम उनकी साधना है, उनका ध्यान है। वे उससे प्यार करते हैं, उसे समर्पित हैं।

इस प्रकार, कृष्णा सोबती ने मियाँ नसीरुद्दीन के चरित्र के माध्यम से आधुनिक जीवन की खोखली दौड़ पर गहरा व्यंग्य किया है और हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि असली सुख क्या है - भागदौड़ में या ठहराव में, पाने में या संतोष में।

प्रश्न 2: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र में लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व के किन-किन पहलुओं को उजागर किया है? विस्तार से वर्णन कीजिए। [CBSE 2022, 2020]

कृष्णा सोबती ने 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र में मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को बहुत ही संवेदनशीलता से उजागर किया है।

  • बाहरी रूप-रंग और वातावरण: लेखिका ने सबसे पहले मियाँ नसीरुद्दीन के बाहरी रूप-रंग और उनके आसपास के वातावरण का चित्रण किया है - उनकी छोटी-सी दुकान, उनके पुराने औजार, उनके बैठने का ढंग, उनके हाथों की गति। यह सब इतना सजीव है कि पाठक उन्हें अपनी आँखों के सामने देख सकता है।
  • धैर्य और समर्पण: उनके व्यक्तित्व का सबसे प्रमुख पहलू है उनका असीम धैर्य और अपने काम के प्रति समर्पण। वे घंटों बैठकर एक ही चीज़ बनाते रहते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के। उनके लिए काम कोई बोझ नहीं, बल्कि ध्यान है।
  • संतोष और सादगी: उनके व्यक्तित्व का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है उनका संतोष और सादगी। उनके पास कुछ नहीं है, फिर भी वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनके चेहरे पर एक गहरा संतोष है, एक अजीब सी शांति।
  • परंपरा और विरासत के प्रति निष्ठा: वे उस शिल्प को जीवित रखे हुए हैं जो उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। उनके लिए यह सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि उनकी पहचान है, उनकी अस्मिता है।
  • मौन और गंभीरता: वे बहुत कम बोलते हैं, लेकिन उनके मौन में एक गहराई है, एक अर्थ है। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक है, जो उनके भीतर की शांति और ज्ञान को दर्शाती है।
  • दार्शनिक दृष्टि: लेखिका उनमें एक दार्शनिक देखती हैं। वे साधारण-सी बातों में भी जीवन का गहरा अर्थ खोज लेते हैं। उनका पूरा जीवन एक दर्शन है - सादगी, संतोष और समर्पण का दर्शन।

इस प्रकार, लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व के हर पहलू को बड़ी बारीकी से उकेरा है और उन्हें एक साधारण कारीगर से ऊपर उठाकर एक प्रतीक, एक दार्शनिक का रूप दिया है।

प्रश्न 3: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र में प्रयुक्त प्रतीकों और बिंबों की व्याख्या कीजिए। [CBSE 2021, 2019]

कृष्णा सोबती ने 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र में अनेक प्रतीकों और बिंबों का सफल प्रयोग किया है, जो रेखाचित्र को गहराई और विस्तार प्रदान करते हैं।

  • मियाँ नसीरुद्दीन स्वयं एक प्रतीक: मियाँ नसीरुद्दीन स्वयं एक प्रतीक हैं - लुप्त होती शिल्प-संस्कृति के प्रतीक, सादगी और संतोष के प्रतीक, धैर्य और समर्पण के प्रतीक। वे उस पारंपरिक भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं जो धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है।
  • औजारों का प्रतीक: उनके पुराने औजार उनकी विरासत और परंपरा के प्रतीक हैं। ये औजार सिर्फ काम के साधन नहीं हैं, बल्कि उनके पूर्वजों की देन हैं, उनकी सांस्कृतिक विरासत हैं।
  • हाथों से बने खिलौनों का बिंब: उनके हाथों से बने खिलौने मानवीय स्पर्श और संवेदना के प्रतीक हैं। मशीन से बनी चीज़ों में वह जान नहीं होती जो हाथ से बनी चीज़ों में होती है। ये खिलौने मानवीय श्रम और कला के महत्व के प्रतीक हैं।
  • गली और दुकान का बिंब: उनकी छोटी-सी गली और दुकान उनकी सीमित दुनिया का प्रतीक है। यह दुनिया छोटी है, लेकिन इसमें वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। यह बिंब हमें याद दिलाता है कि सुख के लिए बड़ी दुनिया की जरूरत नहीं होती।
  • समय का बिंब: मियाँ नसीरुद्दीन के लिए समय धीरे-धीरे बहता है, जैसे कोई शांत नदी। यह बिंब आधुनिक जीवन की तेज-रफ्तार के विपरीत है और हमें ठहरने, धीरे होने का संदेश देता है।
  • चेहरे की मुस्कान और शांति का बिंब: उनके चेहरे की वह अजीब सी शांति और संतोष की मुस्कान आंतरिक सुख और संतुष्टि का बिंब है। यह बिंब दिखाता है कि असली सुख बाहरी चीज़ों में नहीं, भीतर है।

इन प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से कृष्णा सोबती ने रेखाचित्र को केवल एक व्यक्ति-चित्र से ऊपर उठाकर एक सार्वभौमिक दस्तावेज बना दिया है, जो हर युग में प्रासंगिक है।

प्रश्न 4: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र में कृष्णा सोबती की भाषा-शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। यह शैली उनके कथ्य को किस प्रकार सशक्त बनाती है? [CBSE 2022, 2020]

कृष्णा सोबती की भाषा-शैली की अनेक विशेषताएँ हैं, जो इस रेखाचित्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं और उनके कथ्य को बहुत सशक्त बनाती हैं।

  • सजीवता और चित्रात्मकता: उनकी भाषा की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी सजीवता। वे शब्दों से ऐसा चित्र खींचती हैं कि पाठक मियाँ नसीरुद्दीन को अपनी आँखों के सामने देखने लगता है। यह चित्रात्मकता उनके वर्णन को बहुत प्रभावी बनाती है। उदाहरण के लिए, वे मियाँ नसीरुद्दीन के हाथों की गति का वर्णन करती हैं तो ऐसा लगता है मानो हम उन्हें काम करते देख रहे हों।
  • ठेठ क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग: वे दिल्ली की स्थानीय बोली के शब्दों का प्रयोग करती हैं, जिससे उनकी भाषा में एक अलग ही रंगत आ जाती है। यह भाषा पात्रों के परिवेश से मेल खाती है और उन्हें और अधिक यथार्थवादी बनाती है।
  • संवेदनशीलता और सहानुभूति: उनकी भाषा में गहरी संवेदनशीलता है। वे मियाँ नसीरुद्दीन के प्रति अपनी सहानुभूति और प्रशंसा को शब्द देती हैं। यह संवेदनशीलता पाठक को भी पात्र से जोड़ देती है।
  • सरलता और सहजता: उनकी भाषा बोलचाल की भाषा है, जो पाठक से सीधे जुड़ती है। कोई कृत्रिमता नहीं, कोई बनावटीपन नहीं। यह सरलता उनके कथ्य को और अधिक सशक्त बनाती है।
  • दार्शनिक गहराई: साधारण-सी बातों में भी वे गहरा अर्थ खोज लेती हैं। उनकी भाषा में एक दार्शनिक गहराई है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती है।
  • लयात्मकता: उनके वाक्यों में एक विशेष लय है। यह लय पाठक को बाँधे रखती है और उसे रेखाचित्र के माहौल में डुबो देती है।

इस प्रकार, कृष्णा सोबती की भाषा-शैली उनके कथ्य को इतना सशक्त बनाती है कि मियाँ नसीरुद्दीन सिर्फ एक पात्र नहीं रह जाते, बल्कि हमारे अपने हो जाते हैं। हम उनके सुख-दुख को महसूस करने लगते हैं, उनके जीवन-दर्शन से प्रभावित होने लगते हैं।

प्रश्न 5: 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र को एक सामाजिक दस्तावेज के रूप में विश्लेषित कीजिए। यह रेखाचित्र हमें समाज की किन-किन विसंगतियों से अवगत कराता है? [CBSE 2021]

'मियाँ नसीरुद्दीन' केवल एक रेखाचित्र नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक दस्तावेज भी है, जो हमें समाज की अनेक विसंगतियों से अवगत कराता है।

  • लुप्त होती शिल्प-संस्कृति: यह रेखाचित्र उस शिल्प-संस्कृति का दस्तावेज है जो धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। मियाँ नसीरुद्दीन जैसे कारीगर आज दिखाई नहीं देते। मशीनों ने उनकी जगह ले ली है। यह रेखाचित्र हमें याद दिलाता है कि हम अपनी एक समृद्ध परंपरा को खो रहे हैं।
  • आधुनिक जीवन की भागदौड़ और असंतोष: यह रेखाचित्र आधुनिक जीवन की भागदौड़ और असंतोष पर गहरा व्यंग्य करता है। मियाँ नसीरुद्दीन का धीमा, संतोषी जीवन आधुनिक जीवन की तेज-रफ्तार और असंतोष के बिल्कुल विपरीत है। यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि असली सुख क्या है।
  • मानवीय मूल्यों का ह्रास: यह रेखाचित्र मानवीय मूल्यों के ह्रास को भी उजागर करता है। आज के समाज में धैर्य, संतोष, समर्पण जैसे मूल्यों की कोई कीमत नहीं रह गई है। सब कुछ पैसे से मापा जाता है।
  • शहरी जीवन का अकेलापन: मियाँ नसीरुद्दीन अपनी छोटी-सी दुनिया में अकेले हैं। यह शहरी जीवन के अकेलेपन को भी दर्शाता है। बड़े शहरों में लोग एक-दूसरे के पास रहते हुए भी अकेले हैं।
  • परंपरा और आधुनिकता का टकराव: यह रेखाचित्र परंपरा और आधुनिकता के टकराव को भी दिखाता है। मियाँ नसीरुद्दीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, और उनके आसपास की दुनिया आधुनिकता का। यह टकराव ही समाज की सबसे बड़ी विसंगति है।
  • उपेक्षित और अदृश्य लोग: यह रेखाचित्र उन उपेक्षित और अदृश्य लोगों की कहानी है, जो समाज की मुख्यधारा में कभी दिखाई नहीं देते। मियाँ नसीरुद्दीन जैसे कारीगर, मजदूर, छोटे दुकानदार - ये सब समाज के वे अंग हैं जिन्हें हम देखते तो हैं, लेकिन पहचानते नहीं।

इस प्रकार, 'मियाँ नसीरुद्दीन' एक सामाजिक दस्तावेज के रूप में हमें अपने समाज की कई विसंगतियों से रूबरू कराता है और हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम कहाँ जा रहे हैं और क्या खो रहे हैं।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व की विशेषताएँ - 2023, 2021, 2019
  • लेखिका के प्रभावित होने के कारण - 2022, 2020, 2018
  • रेखाचित्र की भाषा-शैली - 2023, 2019
  • मियाँ नसीरुद्दीन का जीवन-दर्शन - 2022, 2021, 2020
  • रेखाचित्र विधा की परिभाषा और विशेषताएँ - 2020, 2018
  • आधुनिक जीवन और पारंपरिक मूल्यों का द्वंद्व - 2021, 2019
  • प्रतीकों और बिंबों का प्रयोग - 2020, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस पाठ से प्रतिवर्ष 5-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व, लेखिका के प्रभावित होने के कारण और भाषा-शैली पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में आधुनिकता-परंपरा का द्वंद्व, प्रतीक-बिंब विधान और सामाजिक दस्तावेज के रूप में विश्लेषण पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखिका - कृष्णा सोबती
  • जन्म - 1925, मृत्यु - 2019
  • प्रमुख रचनाएँ - जिंदगीनामा, मित्रो मरजानी, डार से बिछुड़ी
  • सम्मान - साहित्य अकादमी (1980), ज्ञानपीठ (2017)
  • पुस्तक - आरोह भाग 1
  • पाठ का नाम - मियाँ नसीरुद्दीन
  • मुख्य पात्र - मियाँ नसीरुद्दीन, लेखिका (वर्णनकर्ता)
  • मुख्य विषय - सादगी, संतोष, शिल्प के प्रति समर्पण
  • विधा - रेखाचित्र

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"संतोष ही सबसे बड़ा सुख है।"

"अपने काम से प्यार करो, वही तुम्हारी साधना है।"

"थोड़े में जीना सीखो, यही जीवन की सबसे बड़ी कला है।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।

उदाहरण: प्रश्न - 'मियाँ नसीरुद्दीन' रेखाचित्र की लेखिका कौन हैं? उत्तर - कृष्णा सोबती।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु का उदाहरण सहित वर्णन।

उदाहरण: प्रश्न - मियाँ नसीरुद्दीन के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर - परिचय में बताएँ कि मियाँ नसीरुद्दीन एक बुजुर्ग कारीगर हैं। फिर उनके धैर्य, संतोष, सादगी, काम के प्रति समर्पण - चार बिंदुओं में समझाएँ। निष्कर्ष में कहें कि ये विशेषताएँ उन्हें एक साधारण कारीगर से ऊपर उठाकर एक दार्शनिक बना देती हैं।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना + बाह्य रूप-रंग + आंतरिक गुण + महत्वपूर्ण घटनाएँ + निष्कर्ष। जैसे मियाँ नसीरुद्दीन के चरित्र पर प्रश्न - पहले उनका परिचय दें, फिर उनके रूप-रंग और वातावरण का वर्णन, फिर उनके आंतरिक गुणों की विस्तार से चर्चा, अंत में निष्कर्ष।

विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या + उदाहरण सहित विश्लेषण + निष्कर्ष। जैसे आधुनिकता-परंपरा के द्वंद्व पर प्रश्न - पहले दोनों की परिभाषा दें, फिर रेखाचित्र में दोनों के विभिन्न पहलुओं का उदाहरण सहित विश्लेषण करें, अंत में निष्कर्ष दें।

10. हब लिंक



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