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Mahadevi jag tujhko door jana class 11 antra poem

📘 पाठ 13 – जाग तुझको दूर जाना | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, काव्य खंड) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (काव्य खंड) | ✍️ कवयित्री: महादेवी वर्मा | 📝 प्रकार: छायावादी गीत | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: बहुत उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 कवयित्री परिचय - महादेवी वर्मा

जन्म: 26 मार्च 1907, फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)

मृत्यु: 11 सितंबर 1987

उपाधि: आधुनिक मीरा

सम्मान: पद्मभूषण, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी पुरस्कार

भाषा: खड़ी बोली हिंदी

प्रमुख रचनाएँ: नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ

महादेवी वर्मा छायावाद की प्रमुख कवयित्री हैं। उन्हें 'आधुनिक मीरा' भी कहा जाता है। उनकी कविता में वेदना, पीड़ा, विरह और करुणा का गहरा स्वर है। उनकी भाषा में संगीतात्मकता है, चित्रात्मकता है, और एक गहरी संवेदनशीलता है। उनके गीतों में रहस्य भावना भी है और दार्शनिकता भी।

'जाग तुझको दूर जाना' उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है। इसमें वे एक यात्री को संबोधित करती हैं जिसे बहुत दूर जाना है। रात बीत रही है, सुबह होने वाली है, और उसे अपनी यात्रा पर निकल जाना चाहिए। यह कविता जीवन की नश्वरता और समय के बीतने का गहरा संदेश देती है।

📖 काव्य की पृष्ठभूमि

महादेवी वर्मा की कविताओं में वेदना और पीड़ा का गहरा स्वर है। उनके निजी जीवन में बहुत दुख थे। कम उम्र में ही उनका विवाह हो गया था, लेकिन वे ससुराल नहीं गईं। उनके पति का देहांत जल्दी हो गया। इस वैधव्य ने उन्हें गहरा आघात पहुँचाया। उनकी कविताओं में यह पीड़ा बार-बार उभरकर आती है।

'जाग तुझको दूर जाना' कविता में भी यह वेदना है। यहाँ एक यात्री को संबोधित किया गया है। उसे बहुत दूर जाना है। रात बीत रही है, वह अभी भी सोया है। कवयित्री उसे जगाती है - जाग, तुझे दूर जाना है। यह यात्री कोई साधारण यात्री नहीं है। यह जीवन का पथिक है, जिसे अंतिम यात्रा पर निकलना है।

इस कविता में रात, सुबह, यात्रा जैसे प्रतीकों के माध्यम से जीवन और मृत्यु का गहरा दार्शनिक संदेश दिया गया है। यह छायावादी कविता की सबसे सुंदर रचनाओं में से एक है।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की परीक्षा में यह कविता अत्यंत महत्वपूर्ण है। महादेवी की काव्यगत विशेषताएँ, उनकी भाषा-शैली, वेदना और करुणा का स्वर, प्रतीकों का प्रयोग - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। कविता की व्याख्या करना, उसका भावार्थ लिखना, उसमें निहित दार्शनिकता को स्पष्ट करना - ये सब परीक्षा में पूछा जाता है।

2. सरल सारांश

यह कविता एक यात्री को संबोधित है। रात बीत रही है, सुबह होने वाली है। यात्री को बहुत दूर जाना है, लेकिन वह अभी भी सोया है। कवयित्री उसे जगाती है - उठो, अब समय हो गया है। तुम्हें दूर जाना है।

पहली पंक्तियों में कवयित्री कहती है - रात बीत रही है, अंधेरा छंटने लगा है। पूर्व दिशा में लाली फैल रही है। सूरज उगने वाला है। अब और सोना ठीक नहीं। उठो, अपनी यात्रा पर निकलो।

आगे वह कहती है - तुमने यहाँ बहुत समय बिता लिया। अब आगे बढ़ने का समय है। रास्ता लंबा है, मंजिल दूर है। देर मत करो। जागो, अब और मत सोओ।

कवयित्री यात्री के मन की दुविधा समझती है - वह शायद यहीं रहना चाहता है। उसे यह जगह प्यारी लगती है। उसे लगता है कि यहीं सब कुछ है। लेकिन कवयित्री कहती है - नहीं, तुम्हें जाना होगा। यह तुम्हारी मंजिल नहीं है। तुम्हें और दूर जाना है।

अंत में वह कहती है - यह शरीर नश्वर है, यह जीवन क्षणभंगुर है। जो आज है, कल नहीं होगा। इसलिए देर मत करो। जो करना है, आज करो। जो जाना है, अब जाओ। कल बहुत देर हो जाएगी।

इस प्रकार यह कविता जीवन की नश्वरता और समय के बीतने का गहरा संदेश देती है। यह हमें जागने, आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • यात्री का प्रतीकात्मक अर्थ: इस कविता का यात्री कोई साधारण यात्री नहीं है। वह जीवन का पथिक है। उसे जीवन रूपी यात्रा पर निकलना है। उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है।
  • रात और सुबह का प्रतीक: रात अज्ञान, अंधकार और निष्क्रियता का प्रतीक है। सुबह ज्ञान, प्रकाश और सक्रियता का। रात बीत रही है, सुबह हो रही है - यानी अब अज्ञान छोड़कर ज्ञान की ओर बढ़ने का समय है।
  • दूर जाने का अर्थ: 'दूर जाना' का अर्थ है - अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना, जीवन में आगे बढ़ना, ऊँचा उठना। यह एक आध्यात्मिक यात्रा भी हो सकती है - परमात्मा की ओर बढ़ना।
  • समय की नश्वरता: कवयित्री समय के बीतने पर जोर देती है। रात बीत रही है, सुबह हो रही है। समय किसी के लिए नहीं रुकता। इसलिए जो करना है, आज करो।
  • मोह और आसक्ति: यात्री शायद यहीं रहना चाहता है। उसे यह जगह प्यारी लगती है। यह मोह और आसक्ति है। कवयित्री उसे इस मोह से बाहर निकलने को कहती है।
  • जीवन की नश्वरता: कविता का गहरा दार्शनिक पक्ष है - यह शरीर नश्वर है, यह जीवन क्षणभंगुर है। जो आज है, कल नहीं होगा। इसलिए सचेत हो जाओ, जाग जाओ।

📌 विषय / Theme

इस कविता के कई विषय हैं। पहला विषय है - जीवन की नश्वरता। दूसरा विषय है - समय का महत्व। तीसरा विषय है - लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा। चौथा विषय है - मोह और आसक्ति से मुक्ति। पाँचवाँ विषय है - जागरूकता और सचेतनता।

📌 सामाजिक संदेश

महादेवी का सामाजिक संदेश यह है कि हमें समय की कीमत समझनी चाहिए। जीवन बहुत छोटा है। इसे आलस्य और निष्क्रियता में नहीं गँवाना चाहिए। हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। मोह और आसक्ति में फँसकर नहीं रहना चाहिए। जागना चाहिए, आगे बढ़ना चाहिए।

📌 नैतिक शिक्षा

  • समय की कीमत समझो: समय बहुत कीमती है। इसे बर्बाद मत करो।
  • आलस्य छोड़ो: आलस्य और निष्क्रियता को त्यागो। सक्रिय बनो।
  • लक्ष्य की ओर बढ़ो: अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करो और उसकी ओर बढ़ो।
  • मोह त्यागो: सांसारिक मोह-माया में मत फँसो। आगे बढ़ो।
  • जागरूक बनो: हर पल जागरूक रहो। जो हो रहा है, उसे समझो।

4. पात्र चित्रण

🧑 यात्री (जीवन का पथिक)

स्वभाव: यात्री इस कविता का केंद्रीय पात्र है। वह जीवन के पथ पर यात्रा कर रहा है। वह थका हुआ है, शायद सो गया है। उसे बहुत दूर जाना है, लेकिन वह अभी भी विश्राम कर रहा है। वह यहीं रुक जाना चाहता है। उसे यह जगह प्यारी लगती है। उसके मन में मोह है, आसक्ति है। कवयित्री उसे जगाती है, उसे उसके लक्ष्य की याद दिलाती है। यात्री हम सबका प्रतिनिधित्व करता है। हम सब जीवन के पथिक हैं। हम सबको कहीं न कहीं जाना है। हम सबके अपने-अपने लक्ष्य हैं।

भूमिका: यात्री जीवन के पथिक का प्रतीक है। वह हर उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो जीवन में आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन मोह और आलस्य में फँस जाता है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: यात्री - जीवन का पथिक, थका हुआ, मोहग्रस्त, लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला, हम सबका प्रतिनिधि।

🧑 कवयित्री (महादेवी)

स्वभाव: कवयित्री इस कविता में एक संबोधिका के रूप में हैं। वह यात्री को जगा रही हैं, उसे उसके लक्ष्य की याद दिला रही हैं। वह जानती हैं कि समय बीत रहा है, रात ढल रही है। वह चाहती हैं कि यात्री देर न करे, अब और न सोए। वह यात्री के मोह को समझती हैं, लेकिन उसे इस मोह से बाहर निकलने की प्रेरणा देती हैं। वह एक मार्गदर्शक की तरह हैं, एक गुरु की तरह।

भूमिका: कवयित्री मार्गदर्शक की भूमिका में हैं। वह हम सबको जगाने का काम करती हैं, हमें हमारे लक्ष्य की याद दिलाती हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: कवयित्री - मार्गदर्शक, जागरूक, संवेदनशील, यात्री को प्रेरित करने वाली।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
यात्रीराहगीर, पथिक, travellerयात्री को बहुत दूर जाना है।
नश्वरताक्षणभंगुरता, perishabilityजीवन की नश्वरता का एहसास होना चाहिए।
मोहआसक्ति, attachmentमोह में फँसकर इंसान रुक जाता है।
आसक्तिलगाव, attachmentसांसारिक आसक्ति से मुक्त होना चाहिए।
जागरणजागना, awakeningआध्यात्मिक जागरण आवश्यक है।
लक्ष्यमंजिल, goalअपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए।
प्रतीकसंकेत, symbolरात और सुबह प्रतीक हैं।
आलस्यसुस्ती, lazinessआलस्य छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
निष्क्रियताकुछ न करना, inactivityनिष्क्रियता में समय बर्बाद होता है।
दार्शनिकतागहरा चिंतन, philosophical depthकविता में दार्शनिकता है।
वेदनापीड़ा, painमहादेवी की कविता में वेदना है।
करुणादया, compassionउनकी कविता में करुणा का स्वर है।
आधुनिक मीरामहादेवी की उपाधिमहादेवी को आधुनिक मीरा कहा जाता है।
दीपशिखामहादेवी की रचनादीपशिखा उनकी प्रसिद्ध रचना है।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में यात्री किसका प्रतीक है? [CBSE 2023]

'जाग तुझको दूर जाना' कविता में यात्री जीवन के पथिक का प्रतीक है। वह हर उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो जीवन रूपी यात्रा पर है। उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, लेकिन वह थका हुआ है, सो गया है, यहीं रुक जाना चाहता है। कवयित्री उसे जगाती है, उसे उसके लक्ष्य की याद दिलाती है। यह यात्री हम सबका प्रतिनिधित्व करता है।

प्रश्न 2: कविता में रात और सुबह किसके प्रतीक हैं? [CBSE 2022]

कविता में रात और सुबह प्रतीकात्मक अर्थ रखते हैं। रात अज्ञान, अंधकार, निष्क्रियता और आलस्य का प्रतीक है। सुबह ज्ञान, प्रकाश, सक्रियता और जागरण का प्रतीक है। रात बीत रही है - यानी अज्ञान और निष्क्रियता का समय समाप्त हो रहा है। सुबह हो रही है - यानी ज्ञान और सक्रियता का समय आ रहा है। इसलिए अब जागने, आगे बढ़ने का समय है।

प्रश्न 3: महादेवी वर्मा को 'आधुनिक मीरा' क्यों कहा जाता है? [CBSE 2021]

महादेवी वर्मा को 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है क्योंकि उनकी कविताओं में मीरा की तरह ही वेदना, विरह और प्रेम का गहरा स्वर है। जैसे मीरा कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और विरह में डूबी रहती थीं, वैसे ही महादेवी की कविताओं में एक गहरी वेदना और पीड़ा है। उनकी भाषा में भी संगीतात्मकता है, भक्ति का भाव है। इसलिए उन्हें आधुनिक मीरा कहा जाता है।

प्रश्न 4: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता का मुख्य संदेश क्या है? [CBSE 2023, 2020]

इस कविता का मुख्य संदेश है - समय की कीमत समझो और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ो। जीवन बहुत छोटा है, नश्वर है। इसे आलस्य और निष्क्रियता में नहीं गँवाना चाहिए। मोह और आसक्ति में फँसकर नहीं रहना चाहिए। जागना चाहिए, सचेत होना चाहिए और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। यही जीवन की सार्थकता है।

प्रश्न 5: महादेवी की भाषा-शैली की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2021]

महादेवी की भाषा-शैली की मुख्य विशेषताएँ हैं - संगीतात्मकता, चित्रात्मकता, संवेदनशीलता, प्रतीकों का सुंदर प्रयोग। उनकी भाषा खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें संस्कृत के शब्दों का सुंदर प्रयोग है। उनके गीतों में लय है, प्रवाह है, तुक है। उनकी शैली में वेदना और करुणा का गहरा स्वर है। वे कम शब्दों में गहरी बात कह जाती हैं।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में निहित दार्शनिकता पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2023, 2021]

  • जीवन की नश्वरता: कविता का सबसे गहरा दार्शनिक पक्ष है - जीवन की नश्वरता। यह शरीर क्षणभंगुर है, यह जीवन कुछ पलों का है। जो आज है, कल नहीं होगा। इसलिए इस नश्वर जीवन का सदुपयोग करना चाहिए।
  • समय का महत्व: समय बीत रहा है, रात ढल रही है, सुबह हो रही है। समय किसी के लिए नहीं रुकता। इसलिए समय की कीमत समझनी चाहिए और हर पल का सदुपयोग करना चाहिए।
  • मोह और आसक्ति: यात्री यहीं रुक जाना चाहता है। उसे यह जगह प्यारी लगती है। यह मोह और आसक्ति है। दार्शनिक दृष्टि से यह मोह ही सबसे बड़ा बंधन है। इससे मुक्त होना चाहिए।
  • लक्ष्य की ओर बढ़ना: जीवन का एक लक्ष्य होना चाहिए और उसकी ओर बढ़ना चाहिए। बिना लक्ष्य के जीवन व्यर्थ है। यही कविता का गहरा संदेश है।
  • जागरण की आवश्यकता: कवयित्री बार-बार 'जाग' कहती है। यह जागरण केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। हमें अपने अंदर जागना है, सचेत होना है।
  • जीवन और मृत्यु का रहस्य: यह कविता जीवन और मृत्यु के रहस्य को भी छूती है। 'दूर जाना' का अर्थ मृत्यु भी हो सकता है। जीवन के बाद हम सबको उस अंतिम यात्रा पर जाना है। इसलिए तैयार रहना चाहिए।

प्रश्न 2: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में प्रयुक्त प्रतीकों का विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2022]

  • यात्री का प्रतीक: यात्री जीवन के पथिक का प्रतीक है। वह हर उस व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो जीवन रूपी यात्रा पर है। उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है।
  • रात का प्रतीक: रात अज्ञान, अंधकार, निष्क्रियता और आलस्य का प्रतीक है। रात बीत रही है - यानी अज्ञान और निष्क्रियता का समय समाप्त हो रहा है।
  • सुबह का प्रतीक: सुबह ज्ञान, प्रकाश, सक्रियता और जागरण का प्रतीक है। सुबह हो रही है - यानी ज्ञान और सक्रियता का समय आ रहा है।
  • दूर जाने का प्रतीक: 'दूर जाना' का प्रतीकात्मक अर्थ है - अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना, जीवन में आगे बढ़ना, ऊँचा उठना। यह आध्यात्मिक यात्रा का भी प्रतीक हो सकता है।
  • जागने का प्रतीक: 'जाग' का अर्थ केवल नींद से नहीं, बल्कि अज्ञान से, मोह से, आलस्य से जागना है। यह आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।
  • ठहरने का प्रतीक: यात्री का यहीं रुक जाना मोह और आसक्ति का प्रतीक है। यह उन बंधनों का प्रतीक है जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।

प्रश्न 3: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता के आधार पर महादेवी वर्मा की काव्यगत विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2021]

  • वेदना और करुणा का स्वर: महादेवी की कविता में वेदना और करुणा का गहरा स्वर है। इस कविता में भी यात्री के प्रति करुणा है, उसे जगाने की व्याकुलता है।
  • प्रतीकों का प्रयोग: वे प्रतीकों का बहुत सुंदर प्रयोग करती हैं। इस कविता में यात्री, रात, सुबह, दूर जाना - सब प्रतीक हैं, जो गहरे अर्थ रखते हैं।
  • दार्शनिकता: उनकी कविता में गहरी दार्शनिकता है। वे जीवन और मृत्यु, समय और नश्वरता जैसे गूढ़ विषयों पर लिखती हैं।
  • संगीतात्मकता: उनके गीतों में संगीतात्मकता है। 'जाग तुझको दूर जाना' भी एक सुंदर गीत है, जिसमें लय है, प्रवाह है, तुक है।
  • चित्रात्मकता: उनकी शैली चित्रात्मक है। रात बीतने और सुबह होने का दृश्य वे शब्दों में इस तरह खींचती हैं कि आँखों के सामने आ जाता है।
  • संवेदनशीलता: उनमें गहरी संवेदनशीलता है। वे दूसरों की पीड़ा को समझती हैं, महसूस करती हैं। यही संवेदनशीलता उनकी कविता को और गहराई देती है।

प्रश्न 4: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता की तुलना कबीर के किसी पद से कीजिए। [CBSE 2020]

  • जागरण का संदेश: दोनों ही कविताओं में जागरण का संदेश है। कबीर कहते हैं - जागो, अब और मत सोओ। महादेवी कहती हैं - जाग, तुझको दूर जाना। दोनों ही आलस्य और निष्क्रियता से जागने की बात करते हैं।
  • आध्यात्मिकता: दोनों में आध्यात्मिकता है। कबीर का जागरण आध्यात्मिक है - परमात्मा की ओर बढ़ना। महादेवी का भी जागरण आध्यात्मिक हो सकता है - जीवन के अंतिम लक्ष्य की ओर बढ़ना।
  • भाषा-शैली: कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है, सीधी-सपाट। महादेवी की भाषा खड़ी बोली हिंदी है, संस्कृतनिष्ठ, संगीतात्मक।
  • प्रतीकों का प्रयोग: कबीर सीधे-सीधे बात कहते हैं, उनके यहाँ प्रतीक कम हैं। महादेवी प्रतीकों का बहुत प्रयोग करती हैं।
  • वेदना का स्वर: महादेवी की कविता में वेदना और करुणा का स्वर है, कबीर की कविता में वीर और शांत रस है।
  • निष्कर्ष: दोनों ही महान कवि हैं। दोनों ने जागरण का संदेश दिया है, लेकिन अलग-अलग शैली में।

प्रश्न 5: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में निहित जीवन-मूल्यों पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2019]

  • समय का सदुपयोग: यह कविता हमें सिखाती है कि समय बहुत कीमती है। इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए। हर पल का सदुपयोग करना चाहिए।
  • आलस्य त्याग: आलस्य और निष्क्रियता को त्यागना चाहिए। सक्रिय बनना चाहिए, आगे बढ़ना चाहिए।
  • लक्ष्य निर्धारण: जीवन में एक लक्ष्य होना चाहिए। बिना लक्ष्य के जीवन व्यर्थ है। उस लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना चाहिए।
  • मोह त्याग: सांसारिक मोह-माया में नहीं फँसना चाहिए। उन बंधनों को तोड़ना चाहिए जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हैं।
  • जागरूकता: जीवन में हर पल जागरूक रहना चाहिए। जो हो रहा है, उसे समझना चाहिए। अज्ञान में नहीं रहना चाहिए।
  • जीवन की नश्वरता का एहसास: यह जीवन क्षणभंगुर है। यह एहसास हमें सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • यात्री का प्रतीकात्मक अर्थ - 2023, 2022
  • रात और सुबह का प्रतीक - 2023, 2021
  • दार्शनिकता - 2022, 2020
  • महादेवी की काव्यगत विशेषताएँ - 2021, 2020
  • जीवन-मूल्य - 2022, 2021, 2019
  • आधुनिक मीरा - 2021, 2020
  • प्रतीकों का विश्लेषण - 2020, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कविता से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में यात्री के प्रतीकात्मक अर्थ, रात-सुबह के प्रतीक, आधुनिक मीरा की संज्ञा, कविता के संदेश पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में दार्शनिकता, प्रतीकों का विश्लेषण, महादेवी की काव्यगत विशेषताएँ, कबीर से तुलना और जीवन-मूल्यों पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • कवयित्री - महादेवी वर्मा (1907-1987)
  • उपाधि - आधुनिक मीरा
  • सम्मान - पद्मभूषण, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी
  • काव्यधारा - छायावाद
  • प्रमुख रचनाएँ - नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा
  • मुख्य विषय - वेदना, करुणा, विरह, जीवन की नश्वरता
  • भाषा - खड़ी बोली हिंदी (संस्कृतनिष्ठ, संगीतात्मक)

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"जाग तुझको दूर जाना।"

"रात बीती, सुबह हुई, अब और न सोना।"

"तुझे बहुत दूर जाना है, देर मत करना।"

"यह शरीर नश्वर है, यह जीवन क्षणभंगुर।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - महादेवी वर्मा को किस उपाधि से सम्मानित किया गया? उत्तर - आधुनिक मीरा।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को कविता के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - कविता में रात और सुबह किसके प्रतीक हैं? उत्तर - परिचय में बताएँ कि रात और सुबह प्रतीक हैं। फिर रात का प्रतीकात्मक अर्थ, सुबह का प्रतीकात्मक अर्थ, कविता में उनका प्रयोग - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि ये प्रतीक कविता को गहराई देते हैं।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

दार्शनिक विश्लेषण के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को कविता की पंक्तियों से उदाहरण सहित स्पष्ट करें) + निष्कर्ष।

प्रतीक-विश्लेषण के लिए: प्रस्तावना + विभिन्न प्रतीकों की व्याख्या + उनके अर्थ + कविता में योगदान + निष्कर्ष।

तुलनात्मक प्रश्नों के लिए: दोनों का संक्षिप्त परिचय + समानताएँ + असमानताएँ + निष्कर्ष।

10. हब लिंक



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