कक्षा 10 – कारतूस – हबीब तनवीर (स्पर्श) – वज़ीर अली की वीरता व अंग्रेज़ों को चुनौती देने का नाटकीय चित्रण | GPN
📘 पाठ – कारतूस | कक्षा 10 हिंदी (स्पर्श) | GPN
📚 कक्षा: 10 | 📖 पुस्तक: स्पर्श भाग 2 | ✍️ लेखक: हबीब तनवीर | 📝 प्रकार: एकांकी | ⭐⭐⭐ महत्वपूर्ण
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
- 7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय
हबीब तनवीर (1923-2009): जन्म: 1 सितंबर 1923, रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रमुख रचनाएँ: 'आगरा बाज़ार', 'चरणदास चोर', 'बहादुर कलारिन', 'हिरनी की टांग' (नाटक)। लेखन शैली: लोकनाट्य शैली, संवाद प्रधान, व्यंग्य और हास्य का सुंदर मिश्रण, सामाजिक विसंगतियों पर चोट। वे प्रसिद्ध नाटककार, अभिनेता और निर्देशक थे।
📖 पाठ की पृष्ठभूमि
'कारतूस' हबीब तनवीर का एक प्रसिद्ध एकांकी है। यह एकांकी द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें एक सैनिक और एक ग्रामीण लड़की की मुलाकात को दर्शाया गया है। इस एकांकी के माध्यम से लेखक ने युद्ध की विभीषिका, मानवीय संवेदनाओं और सामान्य जनता पर युद्ध के प्रभाव को उजागर किया है।
🎯 पाठ का महत्व
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से पात्र चित्रण, एकांकी की संवाद शैली, युद्ध की विभीषिका, मानवीय संवेदनाएँ और शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
2. सरल सारांश
यह एकांकी द्वितीय विश्व युद्ध के समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है। एक घायल सैनिक युद्ध के मैदान से भटकता हुआ एक गाँव में पहुँचता है। वह बुरी तरह घायल है और उसे पानी चाहिए। वहाँ उसकी मुलाकात एक ग्रामीण लड़की से होती है। लड़की पहले उसे देखकर डर जाती है, लेकिन फिर उसकी हालत देखकर उस पर दया आ जाती है। वह उसे पानी पिलाती है और उसकी मदद करती है। सैनिक उस लड़की के मासूमियत और दया से प्रभावित होता है। वह उसे अपने जीवन की कहानी सुनाता है कि कैसे वह युद्ध में लड़ रहा था और कैसे उसके साथी मारे गए। लड़की युद्ध की विभीषिका को नहीं समझती, लेकिन वह सैनिक के दर्द को महसूस करती है। अंत में सैनिक वहीं रुक जाता है। यह एकांकी युद्ध की निरर्थकता और मानवीय संवेदनाओं की जीत को दर्शाता है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 प्रमुख बिंदु
- घायल सैनिक का आगमन: एक घायल सैनिक युद्ध के मैदान से भटकता हुआ एक गाँव में पहुँचता है। वह बुरी तरह घायल है और उसे पानी चाहिए।
- ग्रामीण लड़की से मुलाकात: वहाँ उसकी मुलाकात एक मासूम ग्रामीण लड़की से होती है। लड़की पहले डरती है, फिर उसकी मदद करती है।
- सैनिक की कहानी: सैनिक लड़की को अपनी कहानी सुनाता है - कैसे वह युद्ध में लड़ रहा था, कैसे उसके साथी मारे गए।
- लड़की की मासूमियत: लड़की युद्ध की विभीषिका को नहीं समझती, लेकिन वह सैनिक के दर्द को महसूस करती है और उसकी मदद करती है।
- युद्ध की निरर्थकता: इस एकांकी के माध्यम से लेखक युद्ध की निरर्थकता और उसके विनाशकारी प्रभाव को दर्शाता है।
- मानवीय संवेदनाओं की जीत: अंत में लड़की की दया और सैनिक की पीड़ा के बीच मानवीय संवेदनाएँ जीत जाती हैं।
📌 मूलभाव / Theme
इस एकांकी का मूल भाव युद्ध की विभीषिका और निरर्थकता को उजागर करना है। यह बताता है कि युद्ध में केवल मासूम लोग मारे जाते हैं, सैनिक घायल होते हैं, परिवार बिखर जाते हैं। इसके विपरीत मानवीय संवेदनाएँ, दया और करुणा ही वास्तविक मूल्य हैं।
📌 सामाजिक संदेश
यह एकांकी यह संदेश देता है कि युद्ध मानवता के लिए अभिशाप है। यह कभी किसी समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि नई समस्याएँ पैदा करता है। शांति, प्रेम और मानवीय संवेदनाएँ ही सच्चे मूल्य हैं जो हमें इंसान बनाए रखते हैं।
📌 सीख
- युद्ध निरर्थक और विनाशकारी होता है।
- मानवीय संवेदनाएँ सबसे बड़ी शक्ति हैं।
- दया और करुणा ही हमें इंसान बनाती है।
- शांति और प्रेम ही सच्चे मानवीय मूल्य हैं।
4. पात्र चित्रण
🧑 सैनिक
स्वभाव: घायल, थका-हारा, दुखी, युद्ध से त्रस्त, फिर भी संवेदनशील।
भूमिका: वह युद्ध की विभीषिका का प्रतिनिधित्व करता है और अपने माध्यम से युद्ध के भयावह चेहरे को दर्शाता है।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) घायल: वह युद्ध में बुरी तरह घायल हो चुका है। (2) दुखी: उसके साथी मारे गए हैं, वह अकेला है। (3) भयभीत: युद्ध ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। (4) संवेदनशील: लड़की की दया देखकर वह भावुक हो जाता है। (5) स्पष्टवादी: वह युद्ध की सच्चाई बेबाकी से बयान करता है।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: सैनिक के चरित्र के माध्यम से युद्ध की विभीषिका का चित्रण। [2020]
🧑 ग्रामीण लड़की
स्वभाव: मासूम, सरल, दयालु, संवेदनशील, निडर।
भूमिका: वह मानवीय संवेदनाओं और मासूमियत का प्रतिनिधित्व करती है।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) मासूम: वह युद्ध की भयावहता को नहीं समझती। (2) सरल: उसका जीवन बहुत सरल है। (3) दयालु: वह घायल सैनिक की मदद करती है। (4) संवेदनशील: वह सैनिक के दर्द को महसूस करती है। (5) निडर: वह एक अजनबी सैनिक से बात करती है और उसकी मदद करती है।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: लड़की के चरित्र के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं का चित्रण। [2019]
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| कारतूस | गोली, बंदूक का गोला | सैनिक के पास कारतूस थे। |
| एकांकी | एक अंक का नाटक | यह पाठ एकांकी है। |
| विभीषिका | भयानकता, त्रासदी | युद्ध की विभीषिका का वर्णन किया गया है। |
| निरर्थक | बेकार, व्यर्थ | युद्ध निरर्थक है। |
| संवेदना | दूसरों के दुख को समझने की भावना | लड़की में संवेदना थी। |
| घायल | ज़ख्मी | सैनिक घायल था। |
| मासूम | निर्दोष, भोला | लड़की बहुत मासूम थी। |
| दया | करुणा, तरस | लड़की ने दया दिखाई। |
| युद्ध | लड़ाई, संग्राम | द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था। |
| शांति | अमन, चैन | युद्ध के बाद शांति चाहिए। |
| भय | डर | लड़की के मन में भय था। |
| पीड़ा | दर्द, कष्ट | सैनिक की पीड़ा देखते बनती थी। |
| संवाद | बातचीत | एकांकी में संवाद प्रमुख हैं। |
| प्रतीक | चिह्न, निशानी | सैनिक युद्ध का प्रतीक है। |
| मानवता | इंसानियत | मानवता की जीत हुई। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
प्रश्न 1. 'कारतूस' एकांकी के लेखक कौन हैं? [2020]
'कारतूस' एकांकी के लेखक प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर हैं।
प्रश्न 2. यह एकांकी किस पृष्ठभूमि पर आधारित है? [2019]
यह एकांकी द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
प्रश्न 3. घायल सैनिक कहाँ पहुँचता है?
घायल सैनिक युद्ध के मैदान से भटकता हुआ एक गाँव में पहुँचता है।
प्रश्न 4. गाँव में सैनिक की मुलाकात किससे होती है?
गाँव में सैनिक की मुलाकात एक मासूम ग्रामीण लड़की से होती है।
प्रश्न 5. लड़की पहले सैनिक को देखकर क्यों डर जाती है? [2018]
लड़की पहले सैनिक को देखकर डर जाती है क्योंकि वह घायल और अजनबी था, और उसके पास हथियार थे।
प्रश्न 6. लड़की ने सैनिक की मदद कैसे की?
लड़की ने सैनिक को पानी पिलाया और उसकी घायल अवस्था में उसकी देखभाल की।
प्रश्न 7. सैनिक ने लड़की को क्या बताया? [2021]
सैनिक ने लड़की को बताया कि वह युद्ध में लड़ रहा था, उसके साथी मारे गए और वह बुरी तरह घायल हो गया।
प्रश्न 8. लड़की के चरित्र की मुख्य विशेषता क्या है? [2020]
लड़की के चरित्र की मुख्य विशेषता उसकी मासूमियत, सरलता और दयालुता है।
प्रश्न 9. इस एकांकी में लेखक ने किसका विरोध किया है?
इस एकांकी में लेखक ने युद्ध की निरर्थकता और विभीषिका का विरोध किया है।
प्रश्न 10. एकांकी के अंत में क्या होता है? [2019]
एकांकी के अंत में सैनिक वहीं रुक जाता है, लड़की की दया और मानवीय संवेदनाएँ जीत जाती हैं।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
प्रश्न 1. 'कारतूस' एकांकी के आधार पर सैनिक के चरित्र का वर्णन कीजिए। [2020]
सैनिक इस एकांकी का प्रमुख पात्र है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. घायल और थका हुआ: सैनिक युद्ध में बुरी तरह घायल हो चुका है। वह थका हुआ है और उसे पानी और आराम की सख्त जरूरत है।
2. दुखी और त्रस्त: युद्ध ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है। उसके साथी मारे गए हैं, वह अकेला रह गया है। वह अतीत की भयानक घटनाओं को याद कर दुखी होता है।
3. संवेदनशील: भले ही वह एक सैनिक है, लेकिन उसके हृदय में संवेदनाएँ हैं। लड़की की दया और मदद देखकर वह भावुक हो जाता है।
4. स्पष्टवादी: वह युद्ध की सच्चाई को बेबाकी से बयान करता है। वह बताता है कि कैसे युद्ध में लोग बेवजह मारे जाते हैं।
5. मानवीय: उसके अंदर अभी भी मानवीय गुण जीवित हैं। वह लड़की की मासूमियत से प्रभावित होता है।
6. युद्ध का शिकार: वह युद्ध का शिकार है, जिसने अपना सब कुछ खो दिया है - साथी, स्वास्थ्य, और शायद उम्मीद भी।
इस प्रकार, सैनिक के चरित्र के माध्यम से लेखक ने युद्ध की विभीषिका को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 2. 'कारतूस' एकांकी की ग्रामीण लड़की के चरित्र की विशेषताएँ बताइए। [2019]
ग्रामीण लड़की इस एकांकी की महत्वपूर्ण पात्र है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. मासूमियत: लड़की बहुत मासूम है। वह युद्ध की भयावहता को नहीं समझती। उसके लिए यह दुनिया बहुत सरल है।
2. सरलता: उसका जीवन बहुत सरल है। वह गाँव में रहती है और प्रकृति के करीब है। उसमें शहरी जटिलताएँ नहीं हैं।
3. दयालुता: वह बहुत दयालु है। एक अजनबी घायल सैनिक को देखकर वह उसकी मदद करने का फैसला करती है, उसे पानी पिलाती है।
4. संवेदनशीलता: वह दूसरों के दर्द को महसूस करती है। सैनिक की पीड़ा देखकर उसका हृदय पसीज जाता है।
5. निडरता: पहले झिझक के बावजूद वह साहस दिखाती है और एक अजनबी सैनिक से बात करती है, उसकी मदद करती है।
6. मानवीय मूल्यों की प्रतिनिधि: वह मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों की प्रतिनिधि है। वह दिखाती है कि युद्ध के माहौल में भी मानवता जीवित है।
इस प्रकार, लड़की का चरित्र मासूमियत, सरलता और दयालुता का अद्भुत उदाहरण है।
प्रश्न 3. 'कारतूस' एकांकी के माध्यम से लेखक ने युद्ध की विभीषिका को किस प्रकार चित्रित किया है? [2021]
लेखक ने 'कारतूस' एकांकी के माध्यम से युद्ध की विभीषिका को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया है:
1. घायल सैनिक के माध्यम से: सैनिक की घायल अवस्था युद्ध की भयावहता को दर्शाती है। वह बुरी तरह घायल है, खून से लथपथ है, और उसे पानी तक नसीब नहीं।
2. साथियों की मृत्यु: सैनिक बताता है कि उसके सभी साथी मारे गए। यह युद्ध में होने वाली मौतों की भयावहता को दर्शाता है।
3. मानसिक पीड़ा: युद्ध ने सैनिक को मानसिक रूप से भी तोड़ दिया है। वह अतीत की घटनाओं को याद कर तड़पता है।
4. अकेलापन: सैनिक बिल्कुल अकेला है। उसका कोई नहीं है। यह युद्ध के बाद की स्थिति की त्रासदी को दर्शाता है।
5. निराशा: सैनिक के चेहरे पर निराशा साफ झलकती है। उसे अपने भविष्य की कोई उम्मीद नहीं है।
6. लड़की की मासूमियत का विपरीत चित्रण: लड़की की मासूमियत और सैनिक की पीड़ा के बीच का अंतर युद्ध की विभीषिका को और उजागर करता है।
इस प्रकार, लेखक ने युद्ध की विभीषिका का सजीव चित्रण किया है।
प्रश्न 4. 'कारतूस' एकांकी का शीर्षक कितना सार्थक है? स्पष्ट कीजिए। [2018]
'कारतूस' शीर्षक अत्यंत सार्थक है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
1. युद्ध का प्रतीक: कारतूस (गोली) युद्ध का प्रतीक है। यह एकांकी युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है, इसलिए यह शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त है।
2. विनाश का प्रतीक: कारतूस विनाश और मृत्यु का प्रतीक है। यह एकांकी युद्ध के विनाशकारी प्रभावों को दर्शाती है।
3. सैनिक से जुड़ाव: सैनिक के पास कारतूस होते हैं। वह उनका उपयोग करता है। यह शीर्षक सैनिक से भी जुड़ा है।
4. विरोधाभास: कारतूस जहाँ विनाश का प्रतीक है, वहीं एकांकी में मानवीय संवेदनाओं की जीत होती है। यह विरोधाभास शीर्षक को और सार्थक बनाता है।
5. ध्यानाकर्षक: यह शीर्षक पाठक का ध्यान आकर्षित करता है और उसे एकांकी पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
6. संक्षिप्त और प्रभावशाली: 'कारतूस' एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली शीर्षक है जो एकांकी के मूल भाव को दर्शाता है।
इस प्रकार, 'कारतूस' शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 5. 'कारतूस' एकांकी में सैनिक और ग्रामीण लड़की के बीच हुए संवाद का क्या महत्व है? [2020]
सैनिक और ग्रामीण लड़की के बीच हुए संवाद का इस एकांकी में विशेष महत्व है:
1. युद्ध की सच्चाई उजागर करना: इन संवादों के माध्यम से सैनिक युद्ध की भयावह सच्चाई को बयान करता है। वह बताता है कि युद्ध में क्या होता है।
2. मासूमियत और क्रूरता का टकराव: लड़की की मासूमियत और सैनिक की युद्ध-क्रूरता के अनुभवों के बीच संवाद एक दिलचस्प टकराव पैदा करता है।
3. मानवीय संवेदनाओं का उदय: संवादों में लड़की की दया और सैनिक की पीड़ा स्पष्ट होती है। यह मानवीय संवेदनाओं को उजागर करता है।
4. पात्रों के चरित्र का विकास: संवादों के माध्यम से दोनों पात्रों के चरित्र का विकास होता है। हम उन्हें बेहतर समझ पाते हैं।
5. भावनात्मक गहराई: ये संवाद एकांकी को भावनात्मक गहराई प्रदान करते हैं। पाठक सैनिक की पीड़ा और लड़की की मासूमियत से जुड़ जाता है।
6. कथानक को आगे बढ़ाना: संवाद कथानक को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं। इनसे हमें घटनाओं के बारे में पता चलता है।
इस प्रकार, संवादों का यह एकांकी में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रश्न 6. 'कारतूस' एकांकी में मानवीय संवेदनाओं को किस प्रकार दर्शाया गया है? [2019]
'कारतूस' एकांकी में मानवीय संवेदनाओं को बड़े ही मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है:
1. लड़की की दया: लड़की एक अजनबी घायल सैनिक की मदद करती है। वह उसे पानी पिलाती है, उसकी देखभाल करती है। यह दया और करुणा का प्रतीक है।
2. सैनिक की पीड़ा: सैनिक अपने साथियों की मौत पर दुखी है। वह युद्ध की भयावहता को याद कर तड़पता है। यह उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
3. सैनिक का भावुक होना: लड़की की मदद देखकर सैनिक भावुक हो जाता है। वह उसकी मासूमियत से प्रभावित होता है।
4. मानवता की जीत: युद्ध के भयानक माहौल में भी मानवता जीवित है। लड़की का व्यवहार यह दर्शाता है।
5. विश्वास: लड़की एक अजनबी पर विश्वास करती है और उसकी मदद करती है। यह विश्वास भी एक मानवीय संवेदना है।
6. आत्मीयता: दोनों के बीच एक आत्मीय संबंध बन जाता है, भले ही वे एक-दूसरे को नहीं जानते।
इस प्रकार, इस एकांकी में मानवीय संवेदनाओं को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।
प्रश्न 7. 'कारतूस' एकांकी के माध्यम से लेखक ने युद्ध के विरुद्ध क्या संदेश दिया है? [2018]
लेखक ने 'कारतूस' एकांकी के माध्यम से युद्ध के विरुद्ध निम्नलिखित संदेश दिए हैं:
1. युद्ध निरर्थक है: यह एकांकी दर्शाती है कि युद्ध का कोई अर्थ नहीं है। इसमें केवल मौत और विनाश है। सैनिक के साथी मारे गए, वह खुद बुरी तरह घायल है - यह सब किसलिए?
2. युद्ध में सिर्फ मासूम मरते हैं: युद्ध में सिर्फ मासूम लोग मारे जाते हैं। सैनिक जैसे लोग, जिनका अपना कोई दुश्मन नहीं था, वे एक-दूसरे को मारते हैं।
3. युद्ध मानवता के खिलाफ है: युद्ध मानवीय मूल्यों के खिलाफ है। यह दया, करुणा, प्रेम जैसी भावनाओं को खत्म करता है।
4. शांति का महत्व: इस एकांकी में दर्शाई गई विभीषिका के माध्यम से लेखक शांति का महत्व रेखांकित करता है।
5. मानवता की जीत: युद्ध के भयानक माहौल में भी मानवता बची रहती है। लड़की का व्यवहार यह दर्शाता है कि अंततः मानवीय संवेदनाएँ ही जीतती हैं।
6. युद्ध का कोई विकल्प हो सकता है: लेखक यह भी संकेत देता है कि युद्ध का कोई विकल्प हो सकता है - वह है संवाद, समझौता, और मानवीय संबंध।
इस प्रकार, लेखक ने युद्ध के विरुद्ध सशक्त संदेश दिया है।
प्रश्न 8. 'कारतूस' एकांकी की भाषा और शैली पर प्रकाश डालिए। [2021]
हबीब तनवीर की 'कारतूस' एकांकी की भाषा और शैली निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त है:
1. संवाद प्रधान शैली: यह एकांकी संवाद प्रधान है। पूरी कथा संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है। संवाद ही पात्रों के चरित्र, भावनाओं और कथानक को उजागर करते हैं।
2. सरल और सहज भाषा: लेखक ने सरल और सहज भाषा का प्रयोग किया है। ग्रामीण लड़की की भाषा सरल है तो सैनिक की भाषा में युद्ध की क्रूरता झलकती है।
3. पात्रानुकूल भाषा: दोनों पात्रों की भाषा उनके चरित्र के अनुकूल है। लड़की की भाषा मासूम और सरल है, जबकि सैनिक की भाषा में पीड़ा और निराशा है।
4. भावनात्मक गहराई: संवादों में भावनात्मक गहराई है। सैनिक की पीड़ा, लड़की की मासूमियत - सब संवादों में स्पष्ट झलकता है।
5. व्यंग्य और यथार्थ का मिश्रण: लेखक ने युद्ध की क्रूरता को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया है, साथ ही मानवीय संवेदनाओं को उजागर किया है।
6. प्रभावशाली शीर्षक: 'कारतूस' जैसा संक्षिप्त और प्रभावशाली शीर्षक एकांकी की शैली को मजबूती देता है।
इस प्रकार, हबीब तनवीर की शैली इस एकांकी में पूरी तरह सफल हुई है।
प्रश्न 9. यदि आप सैनिक की जगह होते तो लड़की की मदद का कैसा प्रतिक्रिया देते? पाठ के आधार पर लिखिए।
यदि मैं सैनिक की जगह होता तो लड़की की मदद पर इस प्रकार प्रतिक्रिया देता:
1. आभार व्यक्त करता: सबसे पहले मैं लड़की का धन्यवाद करता कि उसने एक अजनबी की इतनी मदद की। उसकी दया के लिए आभार जताता।
2. भावुक होता: लड़की की मासूमियत और दया देखकर मैं भी सैनिक की तरह भावुक हो जाता। युद्ध की क्रूरता के बीच ऐसी मानवीय संवेदना देखकर आँसू रोकना मुश्किल होता।
3. उसे युद्ध की सच्चाई बताता: मैं उसे बताता कि युद्ध कितना भयानक होता है, कैसे इसमें मासूम लोग मारे जाते हैं, कैसे परिवार बिखर जाते हैं।
4. उसकी मासूमियत की रक्षा की प्रार्थना करता: मैं ईश्वर से प्रार्थना करता कि यह लड़की हमेशा इसी तरह मासूम बनी रहे, युद्ध की क्रूरता उसे कभी न छुए।
5. शांति का संदेश देता: मैं उसे बताता कि असली जीत युद्ध में नहीं, बल्कि शांति और मानवता में है।
6. कृतज्ञता जताता: मैं उसकी इस मदद को जीवन भर याद रखता और कृतज्ञ रहता।
मैं भी सैनिक की तरह ही लड़की की मासूमियत और दया से अभिभूत हो जाता।
प्रश्न 10. 'कारतूस' एकांकी का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। [2019]
'कारतूस' एकांकी का मूलभाव बहुआयामी है:
1. युद्ध-विरोध: इस एकांकी का प्रमुख भाव युद्ध-विरोध है। यह युद्ध की निरर्थकता और विभीषिका को उजागर करता है। युद्ध में केवल मौत और विनाश है, कोई जीत नहीं।
2. मानवीय संवेदनाओं की जीत: युद्ध के भयानक माहौल में भी मानवीय संवेदनाएँ जीवित हैं। लड़की की दया और सैनिक की पीड़ा इसे दर्शाती है।
3. शांति का संदेश: यह एकांकी शांति का संदेश देती है। यह बताती है कि युद्ध का कोई विकल्प हो सकता है - संवाद, समझौता, और मानवीय संबंध।
4. मासूमियत का महत्व: लड़की का चरित्र मासूमियत का महत्व दर्शाता है। उसकी सरलता और दया ही सच्चे मानवीय मूल्य हैं।
5. मानवता की पहचान: यह एकांकी बताती है कि मानवता की पहचान युद्ध में नहीं, बल्कि दया और करुणा में है।
6. युद्ध के पीड़ितों की आवाज: यह एकांकी उन लाखों पीड़ितों की आवाज है जो युद्ध की भेंट चढ़ जाते हैं - सैनिक हों या आम नागरिक।
इस प्रकार, 'कारतूस' एक सशक्त युद्ध-विरोधी एकांकी है जो मानवीय संवेदनाओं की जीत का संदेश देती है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय
- सैनिक का चरित्र चित्रण: उसकी पीड़ा, घायल अवस्था, संवेदनशीलता [2020]
- ग्रामीण लड़की का चरित्र चित्रण: मासूमियत, सरलता, दयालुता [2019]
- युद्ध की विभीषिका: लेखक ने युद्ध के भयानक चेहरे को कैसे दर्शाया [2021]
- शीर्षक की सार्थकता: 'कारतूस' शीर्षक का महत्व [2018]
- संवाद शैली: एकांकी में संवादों का महत्व [2020]
- मानवीय संवेदनाएँ: कैसे दर्शाई गई हैं [2019]
- युद्ध-विरोधी संदेश: लेखक का मुख्य संदेश [2018]
- मूलभाव: एकांकी का केंद्रीय भाव [2019]
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक: हबीब तनवीर (1923-2009), प्रसिद्ध नाटककार
- विधा: एकांकी
- पात्र: सैनिक और ग्रामीण लड़की
- पृष्ठभूमि: द्वितीय विश्व युद्ध
- स्थान: एक गाँव
- मूल संदेश: युद्ध-विरोध, मानवीय संवेदनाओं की जीत
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"युद्ध में कोई जीतता नहीं, सब हारते हैं।"
"पानी... बस एक घूँट पानी..."
"तुम बहुत मासूम हो, ऐसे ही रहना।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न
टिप्स: सीधा और सटीक उत्तर दें। केवल मुख्य बिंदु लिखें। 2-3 वाक्यों में उत्तर पूरा करें।
उदाहरण: प्रश्न: इस एकांकी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: इस एकांकी के लेखक प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर हैं।
📝 4-5 अंक प्रश्न
टिप्स: उत्तर को तीन भागों में बाँटें - परिचय, मुख्य भाग, निष्कर्ष। पात्र चित्रण में सभी विशेषताओं का उल्लेख करें। उदाहरण दें।
उदाहरण: प्रश्न: सैनिक के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: [जैसा ऊपर दीर्घ प्रश्न 1 में दिया गया है]
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें: