कक्षा 10 – हरिहर काका – मिथिलेश्वर (संचयन) – वृद्धावस्था में संपत्ति, परिवार और धर्म के शोषण का मार्मिक चित्रण | GPN
📘 पाठ – हरिहर काका | कक्षा 10 हिंदी (संचयन) | GPN
📚 कक्षा: 10 | 📖 पुस्तक: संचयन भाग 2 | ✍️ लेखक: मिथिलेश्वर | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ बहुत महत्वपूर्ण
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
- 7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय
मिथिलेश्वर (जन्म 1950): जन्म: 11 अगस्त 1950, गोपालपुर, मुजफ्फरपुर (बिहार)। प्रमुख रचनाएँ: 'यहाँ से वहाँ', 'गिरते हुए लोग', 'धरती कब तक घूमेगी', 'प्रतिनिधि कविताएँ' (कविता संग्रह); 'हरिहर काका', 'औरंगजेब की आखिरी रात' (कहानी संग्रह)। वे समकालीन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन का यथार्थ, सामाजिक विसंगतियाँ और मानवीय संवेदनाएँ मुख्य रूप से मिलती हैं।
📖 पाठ की पृष्ठभूमि
'हरिहर काका' कहानी ग्रामीण भारत की उस सामाजिक विडंबना को उजागर करती है जहाँ संपत्ति के लिए रिश्तेदार किसी भी हद तक गिर सकते हैं। हरिहर काका एक बुजुर्ग किसान हैं, जिनके पास बीस बीघा उपजाऊ जमीन है। उनके भाई और रिश्तेदार उनकी संपत्ति हड़पने की कोशिश करते हैं। वे उन्हें बेटा बनाने, अपने नाम संपत्ति लिखवाने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचते हैं। कहानी ग्रामीण समाज की कुरीतियों, लालच और मानवीय संवेदनाओं के ह्रास पर गहरी चोट करती है।
🎯 पाठ का महत्व
बोर्ड परीक्षा में इस पाठ से पात्र चित्रण (हरिहर काका, महंत, ठाकुरबारी के लोग), ग्रामीण समाज का यथार्थ, संपत्ति के लालच की समस्या, कहानी का उद्देश्य और शीर्षक की सार्थकता पर प्रश्न पूछे जाते हैं। यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है।
2. सरल सारांश
हरिहर काका एक गरीब किसान हैं, जिनके पास बीस बीघे उपजाऊ जमीन है। उनकी पत्नी मर चुकी है और कोई संतान नहीं है। वे अकेले रहते हैं। उनके तीन भाई हैं, जो पहले उनसे अलग रहते थे। हरिहर काका की जमीन को लेकर उनके भाइयों और ठाकुरबारी के महंत के बीच संघर्ष छिड़ जाता है। भाई उन्हें अपने नाम जमीन लिखवाना चाहते हैं, तो महंत उन्हें ठाकुरबारी को जमीन दान में देने के लिए कहते हैं। दोनों पक्ष हरिहर काका को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं। हरिहर काका समझदार हैं, वे जानते हैं कि दोनों ही उनकी जमीन के लालची हैं। एक दिन भाई उनका अपहरण कर लेते हैं और उनसे जमीन अपने नाम लिखवाने की कोशिश करते हैं। महंत भी अपने लोगों को भेजता है। अंत में हरिहर काका की जमीन पर दोनों पक्ष झगड़ते हैं और हरिहर काका कहीं गायब हो जाते हैं। कहानी ग्रामीण समाज की कुरीतियों और लालच की पराकाष्ठा को दर्शाती है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 प्रमुख बिंदु
- हरिहर काका का जीवन: हरिहर काका एक बुजुर्ग किसान हैं। उनकी पत्नी मर चुकी है, कोई संतान नहीं। वे अकेले रहते हैं। उनके पास बीस बीघा उपजाऊ जमीन है।
- भाइयों का लालच: उनके तीन भाई हैं जो पहले उनसे अलग रहते थे। अब वे उनकी जमीन के लालच में उनके पास आने लगे हैं। वे उन्हें बेटा बनाना चाहते हैं ताकि जमीन उनके नाम हो जाए।
- ठाकुरबारी का महंत: ठाकुरबारी के महंत भी हरिहर काका की जमीन के लालची हैं। वे उन्हें जमीन दान में देने के लिए कहते हैं।
- हरिहर काका का अपहरण: एक दिन भाई हरिहर काका का अपहरण कर लेते हैं और उनसे जमीन अपने नाम लिखवाने की कोशिश करते हैं।
- दोनों पक्षों का संघर्ष: महंत भी अपने लोगों को भेजता है। दोनों पक्ष आपस में झगड़ते हैं।
- हरिहर काका का गायब होना: अंत में हरिहर काका कहीं गायब हो जाते हैं। उनकी जमीन पर दोनों पक्ष झगड़ते रहते हैं।
📌 मूलभाव / Theme
इस कहानी का मूल भाव ग्रामीण समाज में संपत्ति के लालच के कारण बिखरते मानवीय संबंधों को उजागर करना है। यह दर्शाती है कि कैसे रिश्तेदार और धार्मिक संस्थाएँ भी लालच में पड़कर एक बुजुर्ग को प्रताड़ित करती हैं और उसकी संपत्ति हड़पने की कोशिश करती हैं।
📌 सामाजिक संदेश
यह कहानी यह संदेश देती है कि लालच मनुष्य को किस हद तक गिरा सकता है। रिश्तेदार, धार्मिक संस्थाएँ - कोई भी लालच से अछूता नहीं। यह वृद्ध लोगों की दुर्दशा को भी उजागर करती है, जो संपत्ति के कारण अपनों से ही प्रताड़ित होते हैं।
📌 सीख
- लालच बुरी बला है - यह मनुष्य को पशु बना देता है।
- संपत्ति के लालच में रिश्तेदार भी दुश्मन बन जाते हैं।
- बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए, उनकी संपत्ति का लालच नहीं करना चाहिए।
- धार्मिक संस्थाओं को भी लालच से ऊपर उठना चाहिए।
4. पात्र चित्रण
🧑 हरिहर काका
स्वभाव: सीधे-सादे, मेहनती, ईमानदार, समझदार, अकेले, असहाय।
भूमिका: कहानी के केंद्रीय पात्र जिनकी जमीन को लेकर सारा संघर्ष है।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) सीधा-सादा: वे बहुत सीधे और भोले हैं। (2) मेहनती: उन्होंने अपनी जमीन पर खूब मेहनत की है। (3) समझदार: वे जानते हैं कि सभी उनकी जमीन के लालची हैं। (4) असहाय: बुढ़ापे में वे असहाय हो जाते हैं। (5) अकेला: परिवार में कोई नहीं, इसलिए अकेले हैं।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: हरिहर काका के चरित्र के माध्यम से ग्रामीण समाज की विडंबना का चित्रण। [2020]
🧑 महंत (ठाकुरबारी)
स्वभाव: लालची, धूर्त, पाखंडी, सत्ता लोलुप।
भूमिका: वे धार्मिक संस्था के प्रमुख हैं लेकिन लालच में हरिहर काका की जमीन हड़पना चाहते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) लालची: वे हरिहर काका की जमीन के लालची हैं। (2) पाखंडी: वे धर्म का आवरण लेकर लोगों को ठगते हैं। (3) धूर्त: वे चालाकी से काम लेते हैं। (4) सत्ता लोलुप: वे अपनी सत्ता और प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: महंत के चरित्र के माध्यम से धार्मिक पाखंड का चित्रण। [2019]
🧑 हरिहर काका के भाई
स्वभाव: लालची, स्वार्थी, निर्मम, धोखेबाज।
भूमिका: वे रिश्तेदार होते हुए भी हरिहर काका की जमीन हड़पने की कोशिश करते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ: (1) लालची: वे जमीन के लालच में हैं। (2) स्वार्थी: केवल अपने बारे में सोचते हैं। (3) निर्मम: वे अपने भाई का अपहरण तक कर लेते हैं। (4) धोखेबाज: वे धोखे से काम लेते हैं।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: भाइयों के चरित्र के माध्यम से रिश्तेदारों के लालच का चित्रण। [2021]
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| बीघा | जमीन नापने की इकाई | हरिहर काका के पास बीस बीघा जमीन थी। |
| ठाकुरबारी | ठाकुर का मंदिर | गाँव में एक ठाकुरबारी थी। |
| महंत | मंदिर का मुख्य पुजारी | महंत जी बहुत प्रभावशाली थे। |
| बेटा बनाना | गोद लेना | भाई हरिहर काका को बेटा बनाना चाहते थे। |
| दान | धार्मिक देन | महंत जमीन दान में लेना चाहते थे। |
| लालच | अति लोभ | लालच ने रिश्तेदारों को पशु बना दिया। |
| अपहरण | अगवा करना | भाइयों ने हरिहर काका का अपहरण कर लिया। |
| पंच | गाँव के मुखिया | पंचों ने फैसला करने की कोशिश की। |
| पाखंड | दिखावा, आडंबर | महंत के पाखंड का पर्दाफाश हुआ। |
| निःसंतान | बिना संतान के | हरिहर काका निःसंतान थे। |
| बंधु-बांधव | रिश्तेदार | सारे बंधु-बांधव लालच में थे। |
| कानून | कानून, विधि | कानून का सहारा लेने की बात हुई। |
| गायब | लापता | हरिहर काका गायब हो गए। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 2 अंक)
प्रश्न 1. 'हरिहर काका' कहानी के लेखक कौन हैं? [2020]
'हरिहर काका' कहानी के लेखक मिथिलेश्वर हैं, जो समकालीन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।
प्रश्न 2. हरिहर काका के पास कितनी जमीन थी? [2019]
हरिहर काका के पास बीस बीघा उपजाऊ जमीन थी, जिसे लेकर सारा विवाद था।
प्रश्न 3. हरिहर काका के परिवार में कौन-कौन थे? [2021]
हरिहर काका की पत्नी मर चुकी थी और कोई संतान नहीं थी। उनके तीन भाई थे जो पहले उनसे अलग रहते थे।
प्रश्न 4. हरिहर काका के भाई उन्हें 'बेटा' क्यों बनाना चाहते थे? [2018]
हरिहर काका के भाई उन्हें 'बेटा' इसलिए बनाना चाहते थे ताकि उनकी जमीन उनके नाम हो जाए और वे उसे हड़प सकें।
प्रश्न 5. ठाकुरबारी का महंत क्या चाहता था? [2020]
ठाकुरबारी का महंत चाहता था कि हरिहर काका अपनी जमीन ठाकुरबारी को दान में दे दें, ताकि वे उसे हड़प सकें।
प्रश्न 6. हरिहर काका के भाइयों ने आखिरकार क्या किया? [2019]
हरिहर काका के भाइयों ने आखिरकार उनका अपहरण कर लिया और उनसे जमीन अपने नाम लिखवाने की कोशिश की।
प्रश्न 7. कहानी के अंत में हरिहर काका का क्या हुआ? [2021]
कहानी के अंत में हरिहर काका कहीं गायब हो जाते हैं। उनकी जमीन पर दोनों पक्ष आपस में झगड़ते रहते हैं।
प्रश्न 8. लेखक ने इस कहानी के माध्यम से क्या दिखाने की कोशिश की है? [2018]
लेखक ने इस कहानी के माध्यम से ग्रामीण समाज में संपत्ति के लालच के कारण बिखरते मानवीय संबंधों को दिखाने की कोशिश की है।
प्रश्न 9. महंत के चरित्र के माध्यम से लेखक ने किस पर व्यंग्य किया है? [2020]
महंत के चरित्र के माध्यम से लेखक ने धार्मिक आडंबर और पाखंड पर व्यंग्य किया है।
प्रश्न 10. 'हरिहर काका' कहानी का मुख्य संदेश क्या है? [2019]
इस कहानी का मुख्य संदेश है कि लालच मनुष्य को पशु बना देता है और संपत्ति के लिए रिश्तेदार भी दुश्मन बन जाते हैं।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 प्रश्न, 4-5 अंक)
प्रश्न 1. हरिहर काका के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [2020]
हरिहर काका इस कहानी के केंद्रीय पात्र हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सीधा-सादा और भोला: हरिहर काका बहुत सीधे-सादे और भोले इंसान हैं। वे किसी के साथ छल-कपट नहीं करते। उनकी यही सीधाई उनके लिए मुसीबत बन जाती है।
2. मेहनती: हरिहर काका ने अपनी जमीन पर खूब मेहनत की है। उन्होंने अपने परिश्रम से उसे उपजाऊ बनाया है। वे आजीवन मेहनत करते रहे।
3. समझदार: हरिहर काका समझदार हैं। वे जानते हैं कि उनके भाई और महंत दोनों ही उनकी जमीन के लालची हैं। वे किसी के झांसे में नहीं आते।
4. असहाय: बुढ़ापे में वे असहाय हो जाते हैं। उनका कोई अपना नहीं जो उनकी रक्षा करे। वे अकेले हैं।
5. अकेला: पत्नी के मरने के बाद वे बिल्कुल अकेले हैं। कोई संतान नहीं। यह अकेलापन उनकी दुर्दशा का कारण बनता है।
6. संघर्षशील: इन सबके बावजूद वे संघर्ष करते हैं। अपने अधिकारों के लिए लड़ते हैं, भले ही अंत में उन्हें हार माननी पड़े।
इस प्रकार, हरिहर काका का चरित्र ग्रामीण भारत के उन असंख्य बुजुर्गों का प्रतिनिधित्व करता है जो संपत्ति के लालच में अपनों से ही प्रताड़ित होते हैं।
प्रश्न 2. महंत के चरित्र के माध्यम से लेखक ने किस पर व्यंग्य किया है? [2019]
महंत के चरित्र के माध्यम से लेखक ने गहरा व्यंग्य किया है:
1. धार्मिक पाखंड पर व्यंग्य: महंत धर्म का आवरण ओढ़े हुए है। वह ठाकुरबारी का प्रमुख है, लेकिन उसके मन में धर्म नहीं, लालच है। यह धार्मिक पाखंड पर करारा व्यंग्य है।
2. धार्मिक संस्थाओं के लालच पर व्यंग्य: ठाकुरबारी जैसी धार्मिक संस्था भी लालच से अछूती नहीं है। वह भी हरिहर काका की जमीन हड़पना चाहती है। यह धार्मिक संस्थाओं के पतन पर व्यंग्य है।
3. दान के नाम पर हड़पने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य: महंत दान के नाम पर जमीन लेना चाहता है। वह धर्म का सहारा लेकर लोगों को ठगने की कोशिश करता है।
4. सत्ता के दुरुपयोग पर व्यंग्य: महंत अपनी धार्मिक सत्ता का दुरुपयोग करता है। वह अपने प्रभाव से लोगों को डराता-धमकाता है।
5. आडंबर पर व्यंग्य: महंत बाहरी आडंबरों में लगा है, असली धर्म से उसका कोई लेना-देना नहीं।
6. समाज के दोहरेपन पर व्यंग्य: एक ओर धार्मिक संस्था, दूसरी ओर परिवार - दोनों ही लालच में हैं। यह समाज के दोहरेपन पर व्यंग्य है।
इस प्रकार, महंत के चरित्र के माध्यम से लेखक ने धार्मिक पाखंड, लालच और सामाजिक विसंगतियों पर गहरा व्यंग्य किया है।
प्रश्न 3. हरिहर काका के भाइयों के चरित्र का वर्णन कीजिए। [2021]
हरिहर काका के भाई इस कहानी के नकारात्मक पात्र हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. अत्यधिक लालची: भाइयों की सबसे बड़ी विशेषता उनका लालच है। वे हरिहर काका की जमीन के लालच में हैं। उनके मन में भाई के प्रति कोई प्रेम नहीं, केवल जमीन का लोभ है।
2. स्वार्थी: वे पूरी तरह स्वार्थी हैं। केवल अपने बारे में सोचते हैं। उन्हें हरिहर काका की भलाई की कोई चिंता नहीं।
3. निर्मम और क्रूर: वे इतने निर्मम हैं कि अपने ही भाई का अपहरण कर लेते हैं। उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं।
4. धोखेबाज: वे धोखे से काम लेते हैं। पहले वे हरिहर काका से दूर रहते थे, जमीन के लालच में उनके पास आए। वे उन्हें 'बेटा' बनाने का नाटक करते हैं।
5. कानून का दुरुपयोग करने वाले: वे कानून का भी दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं। वे चाहते हैं कि कानूनी तौर पर जमीन उनके नाम हो जाए।
6. पशुता की हद तक गिरे हुए: उनका चरित्र उस हद को दर्शाता है जहाँ लालच मनुष्य को पशु बना देता है। वे भाई होते हुए भी भाई नहीं रहे।
7. संगठित: वे तीनों भाई मिलकर काम करते हैं। उनमें आपसी सहयोग है, लेकिन यह सहयोग भी गलत काम के लिए है।
इस प्रकार, भाइयों का चरित्र लालच और स्वार्थ की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
प्रश्न 4. 'हरिहर काका' कहानी में ग्रामीण समाज का कैसा चित्र प्रस्तुत किया गया है? [2018]
मिथिलेश्वर ने 'हरिहर काका' कहानी में ग्रामीण समाज का यथार्थपरक चित्र प्रस्तुत किया है:
1. संपत्ति के लालच का चित्र: ग्रामीण समाज में संपत्ति के लालच का जो चित्र है, वह इस कहानी में स्पष्ट दिखता है। रिश्तेदार, धार्मिक संस्थाएँ - सभी संपत्ति हड़पने में लगे हैं।
2. पारिवारिक संबंधों का बिखराव: कहानी दिखाती है कि कैसे संपत्ति के लालच में पारिवारिक संबंध बिखर जाते हैं। भाई-भाई के दुश्मन बन जाते हैं।
3. धार्मिक पाखंड का चित्र: ठाकुरबारी और महंत के माध्यम से लेखक ने धार्मिक पाखंड का चित्र प्रस्तुत किया है। धर्म के नाम पर लोगों को ठगा जाता है।
4. बुजुर्गों की दुर्दशा: हरिहर काका के माध्यम से ग्रामीण समाज में बुजुर्गों की दुर्दशा का चित्र प्रस्तुत किया गया है। संपत्ति के कारण वे असुरक्षित हैं।
5. कानून की विफलता: कहानी में कानून भी विफल दिखता है। न तो पंचायत कुछ कर पाती है, न ही पुलिस।
6. ग्रामीण सत्ता का ढाँचा: ठाकुरबारी, महंत, पंच - इनके माध्यम से ग्रामीण सत्ता के ढाँचे का चित्र प्रस्तुत किया गया है।
7. आर्थिक असमानता: जमीन को लेकर यह संघर्ष आर्थिक असमानता को भी दर्शाता है।
इस प्रकार, यह कहानी ग्रामीण समाज का बहुआयामी चित्र प्रस्तुत करती है।
प्रश्न 5. 'हरिहर काका' कहानी में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए। [2020]
इस कहानी में गहरा व्यंग्य निहित है:
1. रिश्तेदारों पर व्यंग्य: सबसे बड़ा व्यंग्य रिश्तेदारों पर है। हरिहर काका के भाई, जिनसे वे पहले अलग रहते थे, अचानक उनके 'हितैषी' बन जाते हैं। वे उन्हें 'बेटा' बनाना चाहते हैं। यह रिश्तेदारों के दिखावटी प्रेम पर करारा व्यंग्य है।
2. धार्मिक संस्थाओं पर व्यंग्य: ठाकुरबारी का महंत धर्म का आवरण ओढ़े हुए है। वह दान के नाम पर जमीन हड़पना चाहता है। यह धार्मिक संस्थाओं के पतन और पाखंड पर व्यंग्य है।
3. ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर व्यंग्य: पंचायत और गाँव के लोग सब कुछ देखते हुए भी चुप रहते हैं। वे तटस्थ रहते हैं। यह ग्रामीण न्याय व्यवस्था की विफलता पर व्यंग्य है।
4. कानून पर व्यंग्य: कानून भी इस मामले में असहाय दिखता है। न तो पुलिस कुछ कर पाती है, न ही प्रशासन।
5. समाज की चुप्पी पर व्यंग्य: पूरा गाँव देखता है कि हरिहर काका के साथ क्या हो रहा है, लेकिन कोई आगे नहीं आता। यह समाज की चुप्पी पर व्यंग्य है।
6. मानवीय मूल्यों के पतन पर व्यंग्य: लालच ने मानवीय मूल्यों को कैसे नष्ट कर दिया है, यह कहानी का सबसे बड़ा व्यंग्य है।
इस प्रकार, कहानी में हर स्तर पर गहरा व्यंग्य निहित है।
प्रश्न 6. 'हरिहर काका' कहानी के शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए। [2019]
'हरिहर काका' शीर्षक अत्यंत सार्थक है:
1. केंद्रीय पात्र: यह शीर्षक कहानी के केंद्रीय पात्र हरिहर काका की ओर संकेत करता है। पूरी कहानी उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी जमीन, उनका जीवन, उनकी समस्याएँ - सब कुछ।
2. आत्मीयता का भाव: 'काका' शब्द में आत्मीयता और अपनापन है। यह हरिहर काका के प्रति पाठक के मन में सहानुभूति जगाता है। यह एक ऐसे बुजुर्ग की कहानी है जो हम सबके 'काका' जैसा है।
3. सामान्य व्यक्ति का प्रतिनिधित्व: हरिहर काका कोई असाधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सामान्य ग्रामीण बुजुर्ग हैं। यह शीर्षक उन लाखों सामान्य लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो इसी तरह प्रताड़ित होते हैं।
4. करुणा का भाव: यह शीर्षक पाठक के मन में करुणा और सहानुभूति का भाव जगाता है। हरिहर काका की दुर्दशा पढ़कर पाठक द्रवित हो जाता है।
5. सरलता: शीर्षक सरल और सहज है, ठीक वैसे ही जैसे हरिहर काका का व्यक्तित्व सरल और सहज है।
6. यादगार: यह शीर्षक यादगार है। पढ़ने के बाद 'हरिहर काका' का नाम और उनकी कहानी लंबे समय तक याद रहती है।
इस प्रकार, 'हरिहर काका' शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
प्रश्न 7. हरिहर काका की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है? [2021]
हरिहर काका की दुर्दशा के लिए अनेक कारक जिम्मेदार हैं:
1. उनके भाई: सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनके अपने भाइयों की है। वे लालच में उनका अपहरण करते हैं और उन्हें प्रताड़ित करते हैं। रक्त संबंधी होते हुए भी वे ही उनके सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं।
2. ठाकुरबारी का महंत: धार्मिक संस्था का प्रमुख होते हुए भी महंत उनकी जमीन हड़पना चाहता है। वह भी उनके दुखों का कारण बनता है।
3. गाँव का समाज: गाँव के लोग मूकदर्शक बने रहते हैं। वे सब कुछ देखते हैं लेकिन चुप रहते हैं। कोई हरिहर काका की मदद के लिए आगे नहीं आता।
4. पंचायत: गाँव की पंचायत भी विफल रहती है। वे कोई ठोस कदम नहीं उठा पाते।
5. कानून व्यवस्था: पुलिस-प्रशासन भी असहाय या उदासीन दिखता है। वे समय पर हस्तक्षेप नहीं करते।
6. सामाजिक व्यवस्था: पूरी सामाजिक व्यवस्था ही ऐसी है जहाँ बुजुर्ग असुरक्षित हैं। उनकी रक्षा करने वाला कोई नहीं।
7. हरिहर काका का अकेलापन: उनके पास कोई संतान नहीं, कोई अपना नहीं। यह अकेलापन भी उनकी दुर्दशा का कारण है।
इस प्रकार, हरिहर काका की दुर्दशा के लिए अनेक कारक जिम्मेदार हैं।
प्रश्न 8. मिथिलेश्वर की भाषा शैली की विशेषताएँ बताइए। [2018]
मिथिलेश्वर की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
भाषा:
1. ग्रामीण अंचल की भाषा: उनकी भाषा में बिहार के ग्रामीण अंचल की सहज भाषा का प्रयोग है। 'बीघा', 'बेटा बनाना', 'ठाकुरबारी' जैसे शब्द इसी क्षेत्र के हैं।
2. सरलता और सहजता: उनकी भाषा बहुत सरल और सहज है। वे कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं करते।
3. प्रवाहपूर्णता: उनकी भाषा में स्वाभाविक प्रवाह है। पढ़ते समय रुकावट महसूस नहीं होती।
4. चित्रात्मकता: उनकी भाषा चित्र खींचती है। गाँव, खेत, ठाकुरबारी - सब सजीव हो उठते हैं।
शैली:
1. यथार्थवादी शैली: वे ग्रामीण जीवन का यथार्थपरक चित्रण करते हैं। न तो अतिशयोक्ति, न ही आदर्शीकरण।
2. व्यंग्य शैली: उनकी शैली में गहरा व्यंग्य है, खासकर सामाजिक विसंगतियों पर।
3. संवाद शैली: वे संवादों का सफल प्रयोग करते हैं। संवाद पात्रों के चरित्र को उजागर करते हैं।
4. सरल वर्णन शैली: वे घटनाओं का सरलता से वर्णन करते हैं, बिना किसी जटिलता के।
5. मार्मिकता: उनकी शैली में मार्मिकता है जो पाठक को भावुक कर देती है।
6. सामाजिक चेतना: उनकी शैली में सामाजिक चेतना स्पष्ट दिखती है।
इस प्रकार, मिथिलेश्वर की भाषा शैली अत्यंत प्रभावशाली है।
प्रश्न 9. 'हरिहर काका' कहानी का मूलभाव स्पष्ट कीजिए। [2020]
'हरिहर काका' कहानी का मूलभाव बहुआयामी है:
1. लालच का दुष्परिणाम: इस कहानी का प्रमुख भाव लालच के दुष्परिणाम को दिखाना है। लालच कैसे मनुष्य को पशु बना देता है, रिश्तेदारों को दुश्मन बना देता है - यही कहानी का केंद्रीय संदेश है।
2. पारिवारिक संबंधों का बिखराव: कहानी दिखाती है कि कैसे संपत्ति के लालच में पारिवारिक संबंध बिखर जाते हैं। भाई-भाई के दुश्मन बन जाते हैं।
3. धार्मिक पाखंड पर चोट: ठाकुरबारी और महंत के माध्यम से कहानी धार्मिक पाखंड पर गहरी चोट करती है।
4. बुजुर्गों की दुर्दशा: यह कहानी उन लाखों बुजुर्गों की दुर्दशा को उजागर करती है जो संपत्ति के कारण अपनों से ही प्रताड़ित होते हैं।
5. सामाजिक विसंगतियाँ: कहानी ग्रामीण समाज की अनेक विसंगतियों को उजागर करती है - कानून की विफलता, पंचायत की कमजोरी, समाज की चुप्पी।
6. मानवीय मूल्यों का ह्रास: यह कहानी मानवीय मूल्यों के ह्रास पर गहरी चिंता व्यक्त करती है।
7. अकेलेपन की पीड़ा: हरिहर काका का अकेलापन भी कहानी का एक महत्वपूर्ण भाव है।
इस प्रकार, यह कहानी अनेक गूढ़ भावों को व्यक्त करती है।
प्रश्न 10. 'हरिहर काका' कहानी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए। [2019]
'हरिहर काका' कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है:
1. संपत्ति विवाद आज भी: आज भी संपत्ति को लेकर परिवारों में झगड़े होते हैं। रिश्तेदारों के बीच संपत्ति के लिए खून-खराबा आम बात है। यह कहानी इसी यथार्थ को दर्शाती है।
2. बुजुर्गों की दुर्दशा: आज भी बुजुर्ग अपनी ही संपत्ति के कारण असुरक्षित हैं। वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है।
3. धार्मिक पाखंड: आज भी धर्म के नाम पर लोगों को ठगा जाता है। मंदिर-मस्जिदों के नाम पर जमीन हड़पने के मामले आते रहते हैं।
4. ग्रामीण समाज की समस्याएँ: ग्रामीण समाज की समस्याएँ आज भी वही हैं - कानून की पहुँच न होना, पंचायतों की कमजोरी, सामाजिक दबाव।
5. मानवीय मूल्यों का ह्रास: आज के भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों का और अधिक ह्रास हुआ है। यह कहानी उस ओर संकेत करती है।
6. अकेलेपन की समस्या: आज भी बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार हैं। बच्चे शहरों में चले जाते हैं, बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं।
7. सामाजिक चेतना जगाने में: यह कहानी सामाजिक चेतना जगाने में सहायक है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।
इस प्रकार, यह कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे जाने वाले विषय
- लेखक परिचय: मिथिलेश्वर का जीवन, रचनाएँ, भाषा शैली [2020]
- पात्र चित्रण: हरिहर काका, महंत, भाई [2020, 2019, 2021]
- शीर्षक की सार्थकता: 'हरिहर काका' शीर्षक का महत्व [2019]
- व्यंग्य: कहानी में निहित व्यंग्य के विभिन्न रूप [2020]
- ग्रामीण समाज का चित्रण: कहानी में ग्रामीण जीवन का यथार्थ [2018]
- हरिहर काका की दुर्दशा के कारण: जिम्मेदार कौन [2021]
- धार्मिक पाखंड पर व्यंग्य: महंत के चरित्र के माध्यम से [2019]
- मूलभाव: कहानी का केंद्रीय भाव [2020]
- प्रासंगिकता: आज के समय में कहानी की प्रासंगिकता [2019]
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक: मिथिलेश्वर (जन्म 1950), बिहार
- रचनाएँ: 'यहाँ से वहाँ', 'गिरते हुए लोग', 'हरिहर काका'
- पात्र: हरिहर काका (केंद्रीय), महंत, तीन भाई
- स्थान: कोई ग्रामीण अंचल
- विवाद: बीस बीघा जमीन को लेकर
- मुख्य विषय: लालच, पारिवारिक विघटन, धार्मिक पाखंड
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"हरिहर काका के पास बीस बीघा उपजाऊ जमीन थी।"
"भाई उन्हें बेटा बनाना चाहते थे।"
"महंत जी भी पीछे नहीं थे।"
"हरिहर काका कहीं गायब हो गए।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न
टिप्स: सीधा और सटीक उत्तर दें। केवल मुख्य बिंदु लिखें। 2-3 वाक्यों में उत्तर पूरा करें।
उदाहरण: प्रश्न: 'हरिहर काका' कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: 'हरिहर काका' कहानी के लेखक मिथिलेश्वर हैं, जो समकालीन हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।
📝 4-5 अंक प्रश्न
टिप्स: उत्तर को तीन भागों में बाँटें - परिचय, मुख्य भाग, निष्कर्ष। पात्र चित्रण में सभी विशेषताओं का उल्लेख करें। उदाहरण दें।
उदाहरण: प्रश्न: हरिहर काका के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: [जैसा ऊपर दीर्घ प्रश्न 1 में दिया गया है]
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें: