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कक्षा 11 अध्याय 4 – गूँगे – रांगेय राघव (अंतरा भाग 1 – गद्य) | GPN

📘 पाठ – गूँगे | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, गद्य खंड) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (गद्य खंड) | ✍️ लेखक: रांगेय राघव | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखक परिचय - रांगेय राघव

जन्म: 17 जनवरी 1923, आगरा (उत्तर प्रदेश)

मृत्यु: 12 सितंबर 1962

प्रमुख रचनाएँ: कब तक पुकारूँ, मुर्दों का टीला, गीता-पंचमी, महाभोज, घोड़े और सवार, गूँगे, अधूरे चेहरे

रांगेय राघव हिंदी साहित्य के उन लेखकों में हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में बहुत कुछ लिखा। मात्र 39 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन किया - उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, यात्रा वृत्तांत, इतिहास, पुरातत्व। उनकी लेखनी में एक अलग तरह की ऊर्जा है, एक अलग तरह का जुनून।

'गूँगे' कहानी रांगेय राघव की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो जन्म से गूँगा है। वह बोल नहीं सकता, लेकिन उसकी आँखें बहुत कुछ कह जाती हैं। कहानी में उसके मनोभावों, उसक पीड़ा, उसके प्रेम, उसके विद्रोह को बड़े मार्मिक ढंग से चित्रित किया गया है। यह कहानी उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी कोई सुनवाई नहीं।

📖 कहानी की पृष्ठभूमि

यह कहानी एक गाँव की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है। गाँव में एक गूँगा रहता है। उसका कोई नाम नहीं, पहचान नहीं। लोग उसे 'गूँगा' कहकर बुलाते हैं। वह खेतों में काम करता है, मज़दूरी करता है। उसके साथ हर कोई अच्छा व्यवहार नहीं करता। कुछ लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं, कुछ उस पर दया करते हैं, कुछ उसका शोषण करते हैं। लेकिन गूँगा चुप रहता है। बोल नहीं सकता, तो चुप ही रहता है।

गाँव में एक लड़की है - रमिया। वह गूँगे पर दया करती है, उससे प्यार करती है। गूँगा भी उससे प्यार करता है, लेकिन बोल नहीं सकता। वह अपनी आँखों से अपना प्यार ज़ाहिर करता है। लेकिन समाज उनके प्यार को स्वीकार नहीं करता। रमिया के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर देते हैं। गूँगा टूट जाता है। वह विद्रोह करता है, लेकिन उसका विद्रोह भी गूँगा है। कोई उसे समझ नहीं पाता।

रांगेय राघव ने इस कहानी में दिखाया है कि समाज में सबसे ज़्यादा शोषित वे लोग होते हैं जो अपनी बात कहने में असमर्थ होते हैं। गूँगा सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक है - उन सबका प्रतीक जिनकी आवाज़ को दबा दिया जाता है, जिनकी बातें सुनी नहीं जातीं।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की परीक्षा में यह कहानी बहुत महत्वपूर्ण है। गूँगे के चरित्र, उसकी पीड़ा, रमिया के प्रति उसका प्रेम, समाज की क्रूरता, अंत में उसका विद्रोह - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। कहानी का शीर्षक, उसका प्रतीकात्मक अर्थ, लेखक का संदेश - ये भी परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी हैं। बोर्ड परीक्षाओं में इस कहानी से नियमित रूप से प्रश्न आते रहे हैं।

2. सरल सारांश

यह कहानी एक गूँगे व्यक्ति की है। वह किसी गाँव में रहता है। उसका कोई नाम नहीं। लोग उसे 'गूँगा' कहते हैं। वह खेतों में मज़दूरी करता है। उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता। लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं, उस पर दया करते हैं, उसका शोषण करते हैं। वह सब सहन करता है। बोल नहीं सकता, तो चुप रहता है।

गाँव में रमिया नाम की एक लड़की है। वह गूँगे पर दया करती है। धीरे-धीरे यह दया प्रेम में बदल जाती है। गूँगा भी रमिया से प्यार करता है। वह अपनी आँखों से अपना प्यार ज़ाहिर करता है। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक होती है जब वह रमिया को देखता है। रमिया समझ जाती है। दोनों के बीच एक अटूट बंधन बन जाता है।

लेकिन समाज ऐसे रिश्ते को स्वीकार नहीं करता। रमिया के घरवालों को पता चलता है। वे बहुत नाराज़ होते हैं। वे रमिया को डाँटते-डपटते हैं। उसे समझाते हैं कि गूँगे के साथ उसका कोई भविष्य नहीं। रमिया रोती है, विरोध करती है, लेकिन उसकी एक नहीं सुनता। घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर देते हैं।

गूँगे को पता चलता है। वह टूट जाता है। उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं। वह रमिया से मिलना चाहता है, लेकिन मिल नहीं पाता। शादी का दिन आता है। बारात आती है। रमिया को दुल्हन बनाया जाता है। गूँगा यह सब देखता है। वह पागल-सा हो जाता है। वह दौड़ता हुआ आगे बढ़ता है, कुछ कहना चाहता है, लेकिन कह नहीं सकता। उसके गले से सिर्फ कुछ अजीब-सी आवाज़ निकलती है। वह बीच-बचाव करने की कोशिश करता है, लेकिन लोग उसे धक्का देकर हटा देते हैं।

अंत में गूँगा वहीं गिर जाता है। उसकी आँखों में आँसू हैं, चेहरे पर पीड़ा है। वह फिर से गूँगा है, मूक है। लेकिन उसकी चुप्पी में एक पूरा आक्रोश है, एक पूरा विद्रोह है। कहानी यहीं खत्म होती है, लेकिन सवाल पाठक के मन में रह जाते हैं।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • गूँगे का प्रतीकात्मक अर्थ: गूँगा सिर्फ एक शारीरिक अक्षमता नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। वह उन सभी लोगों का प्रतीक है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती। वह शोषितों, दलितों, वंचितों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • आँखों की भाषा: गूँगा बोल नहीं सकता, लेकिन उसकी आँखें बहुत कुछ कह जाती हैं। उसकी आँखों में पीड़ा है, प्रेम है, विद्रोह है। यह दिखाता है कि इंसान सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि आँखों से भी संवाद कर सकता है।
  • समाज की क्रूरता: समाज गूँगे के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता। वह उसका मज़ाक उड़ाता है, उसका शोषण करता है। उसे एक इंसान की जगह एक वस्तु की तरह देखा जाता है। यह समाज की क्रूरता को दर्शाता है।
  • प्रेम की विडंबना: गूँगा और रमिया एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन यह प्रेम समाज की वर्जनाओं के आगे असफल हो जाता है। समाज उनके प्रेम को स्वीकार नहीं करता। यह प्रेम की विडंबना है।
  • विद्रोह की असमर्थता: गूँगा विद्रोह करना चाहता है, लेकिन वह असमर्थ है। वह बोल नहीं सकता, इसलिए वह अपना विद्रोह जता नहीं सकता। उसका विद्रोह भी गूँगा है। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जो विद्रोह करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास कोई आवाज़ नहीं।
  • मूक चीख: कहानी के अंत में गूँगा चीखना चाहता है, लेकिन उसके गले से सिर्फ अजीब-सी आवाज़ निकलती है। यह मूक चीख उसकी पीड़ा का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह चीख पाठक के दिल में गड़ जाती है।

📌 विषय / Theme

इस कहानी के कई विषय हैं। पहला विषय है - शोषण और वंचना। गूँगा शोषित है, वंचित है। दूसरा विषय है - प्रेम और उसकी विफलता। गूँगे का रमिया से प्रेम विफल हो जाता है। तीसरा विषय है - समाज की क्रूरता। समाज गूँगे को स्वीकार नहीं करता। चौथा विषय है - मूक विद्रोह। गूँगा विद्रोह करना चाहता है, लेकिन नहीं कर पाता। पाँचवाँ विषय है - पहचान का संकट। गूँगे की कोई पहचान नहीं, उसका कोई नाम नहीं।

📌 सामाजिक संदेश

रांगेय राघव समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि जो लोग बोल नहीं सकते, उनकी बातें सुनो। उनकी पीड़ा को समझो। उनके साथ इंसानियत का व्यवहार करो। समाज में हाशिए पर पड़े लोगों को मुख्यधारा में लाओ। उनके प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाओ। यह कहानी हमें सिखाती है कि हर इंसान में भावनाएँ होती हैं, चाहे वह बोल सके या नहीं।

📌 नैतिक शिक्षा

  • संवेदनशीलता जरूरी: दूसरों की पीड़ा को समझना चाहिए, खासकर उनकी जो अपनी पीड़ा बयान नहीं कर सकते।
  • समाज की वर्जनाओं पर सवाल उठाओ: गूँगा और रमिया का प्रेम स्वाभाविक था, लेकिन समाज ने उसे स्वीकार नहीं किया। ऐसी वर्जनाओं पर सवाल उठाना चाहिए।
  • हर इंसान का सम्मान करो: चाहे वह गूँगा हो, अपंग हो, कमज़ोर हो - हर इंसान का सम्मान करना चाहिए।
  • आवाज़हीनों की आवाज़ बनो: जो लोग अपनी बात नहीं कह सकते, उनकी आवाज़ बनना चाहिए।
  • प्रेम को समझो: प्रेम का कोई रूप नहीं होता। गूँगा भी प्यार कर सकता है, और उसका प्यार सच्चा हो सकता है।

4. पात्र चित्रण

🧑 गूँगा

स्वभाव: गूँगा कहानी का केंद्रीय पात्र है। वह जन्म से गूँगा है। बोल नहीं सकता। उसका कोई नाम नहीं, कोई पहचान नहीं। लोग उसे 'गूँगा' कहकर बुलाते हैं। वह खेतों में मज़दूरी करता है। वह बहुत संवेदनशील है। उसकी आँखों में गहरी पीड़ा है, लेकिन वह कुछ कह नहीं सकता। रमिया से उसे प्यार हो जाता है। वह उससे अपना प्यार आँखों से ज़ाहिर करता है। रमिया के जाने के बाद वह टूट जाता है। वह विद्रोह करना चाहता है, लेकिन नहीं कर पाता। उसकी चुप्पी में एक गहरा आक्रोश है।

भूमिका: गूँगा उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती। वह शोषण, वंचना और पीड़ा का प्रतीक है।

प्रमुख घटनाएँ: खेतों में मज़दूरी करना, रमिया से मिलना, उससे प्यार करना, उसके जाने पर टूट जाना, अंत में मूक विद्रोह करना।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: गूँगा संवेदनशील, पीड़ित, प्रेम करने वाला, विद्रोही लेकिन असमर्थ, हाशिए के समाज का प्रतिनिधि।

🧑 रमिया

स्वभाव: रमिया गाँव की एक लड़की है। वह साधारण है, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा है। वह गूँगे पर दया करती है। धीरे-धीरे यह दया प्रेम में बदल जाती है। वह गूँगे की आँखों को पढ़ सकती है। वह उसकी पीड़ा समझती है, उसका प्रेम समझती है। वह भी उससे प्यार करने लगती है। लेकिन वह समाज के सामने कमज़ोर है। वह अपने घरवालों के सामने टिक नहीं पाती। वह रोती है, विरोध करती है, लेकिन हार जाती है। उसकी शादी कहीं और तय हो जाती है। वह जाती है, लेकिन उसके मन में गूँगे के लिए प्रेम हमेशा रहता है।

भूमिका: रमिया उन लड़कियों का प्रतिनिधित्व करती है जो समाज की बंदिशों में जकड़ी होती हैं, जो अपने प्रेम के लिए लड़ना चाहती हैं लेकिन लड़ नहीं पातीं।

प्रमुख घटनाएँ: गूँगे से मिलना, उससे प्रेम करना, घरवालों का विरोध, शादी तय होना, गूँगे से बिछुड़ना।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: रमिया संवेदनशील, प्रेम करने वाली, समाज के सामने विवश, दयनीय किंतु सच्ची।

🧑 ग्रामीण समाज

स्वभाव: गाँव के लोग अलग-अलग प्रकार के हैं। कुछ गूँगे का मज़ाक उड़ाते हैं। कुछ उस पर दया करते हैं। कुछ उसका शोषण करते हैं। वे उसे एक इंसान की जगह एक वस्तु की तरह देखते हैं। उनके लिए गूँगा एक समस्या है, एक मज़ाक है, एक दया का पात्र है। वे उसके अंदर के इंसान को नहीं देखते। जब उन्हें गूँगे और रमिया के प्रेम के बारे में पता चलता है, तो वे बिफर उठते हैं। उनकी सोच संकुचित है। वे गूँगे को इस काबिल नहीं समझते कि कोई लड़की उससे प्यार कर सके। वे रमिया के घरवालों का साथ देते हैं। वे इस रिश्ते को तोड़ने में मदद करते हैं।

भूमिका: ग्रामीण समाज उस व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है जो हाशिए के लोगों को स्वीकार नहीं करती, जो उनके साथ न्याय नहीं करती।

प्रमुख घटनाएँ: गूँगे का मज़ाक उड़ाना, उसका शोषण करना, रमिया के विवाह में सहयोग करना।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: ग्रामीण समाज क्रूर, संवेदनहीन, संकुचित मानसिकता वाला, व्यवस्था का प्रतिनिधि।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
गूँगाजो बोल न सकता हो, मूकगाँव में एक गूँगा रहता था।
मूकचुप, शांत, गूँगाउसकी मूक पीड़ा को कौन समझ सकता था।
हाशियाकिनारा, समाज की मुख्यधारा से अलगगूँगा समाज के हाशिए पर जी रहा था।
शोषणexploitationगरीबों का शोषण हो रहा था।
वंचनावंचित होने की अवस्था, deprivationउसकी वंचना देखते ही बनती थी।
आक्रोशगुस्सा, क्रोध, रोषउसकी आँखों में गहरा आक्रोश था।
विद्रोहबगावत, rebellionवह विद्रोह करना चाहता था।
संवेदनशीलsensitiveगूँगा बहुत संवेदनशील था।
दयनीयpatheticउसकी स्थिति दयनीय थी।
वर्जनानिषेध, tabooसमाज की वर्जनाओं के आगे उसका प्रेम हार गया।
प्रतीकसंकेत, symbolगूँगा शोषितों का प्रतीक है।
मर्मस्पर्शीहृदय को छूने वाला, touchingकहानी का अंत बहुत मर्मस्पर्शी है।
विवशतामजबूरी, helplessnessरमिया की विवशता देखते ही बनती थी।
चीख़चिल्लाने की आवाज़, screamउसकी चीख़ गूँगी थी।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: 'गूँगे' कहानी का शीर्षक कितना सार्थक है? [CBSE 2023]

'गूँगे' शीर्षक बहुत सार्थक है। यह सिर्फ एक शारीरिक अक्षमता की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि एक प्रतीक है। गूँगा उन सभी लोगों का प्रतीक है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती। वह शोषितों, दलितों, वंचितों का प्रतिनिधित्व करता है। कहानी में गूँगा बोल नहीं सकता, लेकिन उसकी पीड़ा, उसका प्रेम, उसका विद्रोह सब उसकी आँखों में झलकता है। शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को बखूबी व्यक्त करता है।

प्रश्न 2: गूँगे के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2022]

गूँगा कहानी का केंद्रीय पात्र है। वह जन्म से गूँगा है, बोल नहीं सकता। उसका कोई नाम नहीं, कोई पहचान नहीं। वह बहुत संवेदनशील है। उसकी आँखों में गहरी पीड़ा है। वह रमिया से सच्चा प्रेम करता है, और अपना प्रेम आँखों से ज़ाहिर करता है। वह शोषित है, लेकिन उसमें विद्रोह की भावना है। वह विद्रोह करना चाहता है, लेकिन असमर्थ है। उसकी चुप्पी में एक गहरा आक्रोश है। वह हाशिए के समाज का प्रतिनिधि है।

प्रश्न 3: रमिया का चरित्र-चित्रण कीजिए। [CBSE 2021]

रमिया गाँव की एक साधारण लड़की है। वह गूँगे पर दया करती है, और यह दया धीरे-धीरे प्रेम में बदल जाती है। वह गूँगे की आँखों को पढ़ सकती है, उसकी पीड़ा समझ सकती है। वह भी उससे प्यार करने लगती है। लेकिन वह समाज के सामने कमज़ोर है। वह अपने घरवालों का विरोध नहीं कर पाती। उसकी शादी कहीं और तय हो जाती है। वह जाती है, लेकिन उसके मन में गूँगे के लिए प्रेम हमेशा रहता है। वह संवेदनशील है, प्रेम करने वाली है, लेकिन समाज की बंदिशों में जकड़ी हुई है।

प्रश्न 4: कहानी में गूँगे की आँखों का क्या महत्व है? [CBSE 2023, 2020]

गूँगा बोल नहीं सकता, इसलिए उसकी आँखें ही उसकी आवाज़ हैं। उसकी आँखों में उसकी पूरी कहानी झलकती है। उनमें पीड़ा है, प्रेम है, आक्रोश है, विद्रोह है। रमिया उसकी आँखों को पढ़ सकती है, इसलिए वह उसके प्रेम को समझ पाती है। कहानी के अंत में उसकी आँखों में आँसू हैं, जो उसकी असफलता और पीड़ा को दर्शाते हैं। आँखें उसके मूक संवाद का माध्यम हैं।

प्रश्न 5: कहानी के अंत में गूँगे की मूक चीख का क्या अर्थ है? [CBSE 2021]

कहानी के अंत में गूँगा चीखना चाहता है, लेकिन उसके गले से सिर्फ अजीब-सी आवाज़ निकलती है। यह मूक चीख उसकी पीड़ा का सबसे बड़ा प्रमाण है। वह रमिया को जाते देख रहा है, उसे रोकना चाहता है, लेकिन कह नहीं सकता। यह चीख उसके आक्रोश, उसकी निराशा, उसके विद्रोह का प्रतीक है। यह चीख पाठक के दिल में गड़ जाती है और उसे सोचने पर मजबूर कर देती है।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'गूँगे' कहानी के माध्यम से रांगेय राघव ने समाज के हाशिए पर पड़े लोगों की पीड़ा को किस प्रकार उजागर किया है? [CBSE 2023, 2021]

  • गूँगा - हाशिए का प्रतीक: गूँगा सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। वह उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो समाज में हाशिए पर हैं - दलित, शोषित, वंचित, अक्षम। उसकी पीड़ा उन सबकी पीड़ा है।
  • नामहीन पहचान: गूँगे का कोई नाम नहीं। लोग उसे 'गूँगा' कहकर बुलाते हैं। यह उसकी पहचान के संकट को दर्शाता है। हाशिए के लोगों की कोई पहचान नहीं होती, उनका कोई नाम नहीं होता।
  • शोषण का चित्रण: गूँगे का शोषण होता है। लोग उसका मज़ाक उड़ाते हैं, उस पर दया करते हैं, उसका इस्तेमाल करते हैं। यह हाशिए के लोगों के साथ होने वाले व्यवहार को दर्शाता है।
  • प्रेम में असफलता: गूँगा रमिया से प्रेम करता है, लेकिन यह प्रेम समाज की वर्जनाओं के आगे असफल हो जाता है। हाशिए के लोगों को प्रेम का भी अधिकार नहीं, यह संदेश छिपा है।
  • आवाज़हीन होना: गूँगा अपनी पीड़ा कह नहीं सकता। वह चीखना चाहता है, लेकिन चीख भी नहीं निकलती। यह उन लाखों लोगों की स्थिति है जो अपनी पीड़ा कहने में असमर्थ हैं।
  • समाज की क्रूरता: समाज गूँगे के प्रति क्रूर है। वह उसे एक इंसान की जगह एक वस्तु की तरह देखता है। यह क्रूरता हाशिए के लोगों के प्रति समाज के रवैये को दर्शाती है।

प्रश्न 2: 'गूँगे' कहानी में प्रतीकों और संकेतों का क्या महत्व है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2022]

  • गूँगा एक प्रतीक: गूँगा सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। वह उन सभी लोगों का प्रतीक है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
  • आँखों का प्रतीक: गूँगे की आँखें उसकी आवाज़ हैं। उनमें उसकी पीड़ा, उसका प्रेम, उसका आक्रोश झलकता है। यह प्रतीक दिखाता है कि संवाद के लिए शब्द जरूरी नहीं, आँखें भी बहुत कुछ कह सकती हैं।
  • चुप्पी का प्रतीक: गूँगे की चुप्पी उसकी विवशता का प्रतीक है। वह चुप है, लेकिन उसकी चुप्पी में एक गहरा अर्थ छिपा है। यह चुप्पी उन लाखों लोगों की चुप्पी है जो विरोध करना चाहते हैं लेकिन नहीं कर पाते।
  • मूक चीख का प्रतीक: कहानी के अंत में गूँगे की मूक चीख उसके विद्रोह और उसकी पीड़ा का प्रतीक है। यह चीख सुनाई नहीं देती, लेकिन महसूस की जा सकती है।
  • गाँव का प्रतीक: गाँव उस समाज का प्रतीक है जो हाशिए के लोगों को स्वीकार नहीं करता, जो उनके साथ न्याय नहीं करता।
  • रमिया का प्रतीक: रमिया उन लोगों का प्रतीक है जो हाशिए के लोगों के प्रति संवेदना रखते हैं, लेकिन समाज के दबाव में उनका साथ नहीं दे पाते।

प्रश्न 3: गूँगा और रमिया के प्रेम की विडंबना पर प्रकाश डालिए। यह प्रेम विफल क्यों हो जाता है? [CBSE 2021]

  • स्वाभाविक प्रेम: गूँगा और रमिया का प्रेम बिल्कुल स्वाभाविक है। गूँगा रमिया को देखकर प्रसन्न होता है, उसकी आँखों में चमक आ जाती है। रमिया उसकी इस चमक को समझती है, उसकी पीड़ा को समझती है। दोनों के बीच एक आत्मीय संबंध बन जाता है।
  • समाज की वर्जनाएँ: समाज इस प्रेम को स्वीकार नहीं करता। गूँगा एक अक्षम व्यक्ति है, उसकी कोई पहचान नहीं, कोई सामाजिक स्थिति नहीं। समाज उसे रमिया के योग्य नहीं समझता। यह सामाजिक वर्जना ही इस प्रेम की विडंबना है।
  • रमिया की विवशता: रमिया प्रेम करती है, लेकिन वह समाज के सामने कमज़ोर है। वह अपने घरवालों का विरोध नहीं कर पाती। उसकी यह विवशता प्रेम की विफलता का कारण बनती है।
  • गूँगे की असमर्थता: गूँगा अपने प्रेम के लिए लड़ना चाहता है, लेकिन वह असमर्थ है। वह बोल नहीं सकता, वह विरोध नहीं कर सकता। उसकी यह असमर्थता भी प्रेम की विफलता का कारण है।
  • व्यवस्था का दबाव: पूरी सामाजिक व्यवस्था इस प्रेम के खिलाफ है। परिवार, गाँव, रिश्तेदार - सब इस रिश्ते को तोड़ने में लगे हैं। एक अकेला गूँगा इस व्यवस्था के आगे क्या कर सकता है?
  • प्रेम की त्रासदी: यह प्रेम की त्रासदी है कि दो लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन समाज की वजह से वे एक नहीं हो पाते। गूँगा और रमिया की कहानी इसी त्रासदी को दर्शाती है।

प्रश्न 4: 'गूँगे' कहानी के आधार पर रांगेय राघव की कहानी कला की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2020]

  • प्रतीकों का प्रयोग: रांगेय राघव प्रतीकों का बहुत सटीक प्रयोग करते हैं। 'गूँगा' सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। आँखें, चुप्पी, मूक चीख - सब प्रतीक हैं जो कहानी को गहराई देते हैं।
  • मार्मिकता: उनकी कहानियाँ बहुत मार्मिक होती हैं। गूँगे की पीड़ा, उसका प्रेम, उसकी विफलता - सब पाठक के हृदय को छू जाता है। अंत में उसकी मूक चीख किसी को भी भावुक कर दे।
  • सहज भाषा: उनकी भाषा सहज और प्रवाहपूर्ण है। वे कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं करते। उनकी भाषा में एक अलग तरह की लय है, एक अलग तरह का जादू है।
  • पात्रों का मनोवैज्ञानिक चित्रण: वे पात्रों के मन की गहराई में उतरते हैं। गूँगा क्या सोचता है, क्या महसूस करता है - इसका बहुत बारीकी से चित्रण किया गया है।
  • सामाजिक सरोकार: उनकी कहानियों में सामाजिक सरोकार होता है। वे समाज की विसंगतियों को उजागर करते हैं। 'गूँगे' में हाशिए के लोगों की पीड़ा को दिखाया गया है।
  • संक्षिप्तता: उनकी कहानियाँ आकार में छोटी होती हैं, लेकिन उनमें बड़े विषय समा जाते हैं। 'गूँगे' एक छोटी-सी कहानी है, लेकिन इसमें शोषण, प्रेम, विद्रोह, हाशियाकरण जैसे बड़े विषय हैं।

प्रश्न 5: 'गूँगे' और 'दोपहर का भोजन' कहानियों के शीर्षकों की तुलना कीजिए। दोनों शीर्षक कहानी के केंद्रीय भाव को कैसे व्यक्त करते हैं? [CBSE 2019]

  • दोनों शीर्षक सार्थक: दोनों कहानियों के शीर्षक बहुत सार्थक हैं। 'गूँगा' और 'दोपहर का भोजन' - दोनों अपने-अपने संदर्भ में कहानी के केंद्रीय भाव को व्यक्त करते हैं।
  • गूँगा - एक प्रतीक: 'गूँगा' शीर्षक सिर्फ एक शारीरिक अक्षमता की ओर संकेत नहीं करता, बल्कि एक प्रतीक है। यह उन सभी लोगों का प्रतीक है जो समाज में हाशिए पर हैं, जिनकी आवाज़ नहीं सुनी जाती।
  • दोपहर का भोजन - एक विडंबना: 'दोपहर का भोजन' शीर्षक एक विडंबना को दर्शाता है। पंडित जी के लिए दोपहर का भोजन बड़े आयोजन की तरह है, लेकिन उसकी बेटी के लिए यह सिर्फ एक सपना है।
  • केंद्रीय भाव की अभिव्यक्ति: 'गूँगे' शीर्षक कहानी के केंद्रीय पात्र और उसकी स्थिति को दर्शाता है। 'दोपहर का भोजन' शीर्षक कहानी की केंद्रीय घटना और उसकी विडंबना को दर्शाता है।
  • प्रतीकात्मकता: दोनों शीर्षक प्रतीकात्मक हैं। गूँगा हाशियाकरण का प्रतीक है, दोपहर का भोजन असमानता का प्रतीक है।
  • पाठक पर प्रभाव: दोनों शीर्षक पाठक पर गहरा प्रभाव डालते हैं। 'गूँगा' सुनते ही एक पीड़ित चेहरा आँखों के सामने आ जाता है। 'दोपहर का भोजन' सुनते ही भूख और अभाव की याद आती है। दोनों शीर्षक अपने-अपने ढंग से सफल हैं।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • गूँगे का चरित्र-चित्रण - 2023, 2022
  • रमिया का चरित्र - 2022, 2021
  • गूँगे की आँखों का महत्व - 2023, 2021
  • कहानी के अंत का महत्व - 2023, 2020
  • प्रेम की विडंबना - 2022, 2021
  • शीर्षक की सार्थकता - 2021, 2020
  • हाशिए के लोगों की पीड़ा - 2023, 2020

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कहानी से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में गूँगे के चरित्र, रमिया के चरित्र, आँखों के महत्व और कहानी के अंत पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में हाशिए के लोगों की पीड़ा, प्रतीकों का महत्व, प्रेम की विडंबना और रांगेय राघव की कहानी कला पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखक - रांगेय राघव (1923-1962)
  • पुस्तक - अंतरा भाग 1 (गद्य खंड)
  • केंद्रीय पात्र - गूँगा (नामहीन, मूक)
  • अन्य पात्र - रमिया, ग्रामीण समाज
  • मुख्य विषय - हाशियाकरण, प्रेम की विफलता, समाज की क्रूरता
  • महत्वपूर्ण प्रतीक - गूँगा, आँखें, चुप्पी, मूक चीख

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"गूँगे का कोई नाम नहीं, कोई पहचान नहीं।"

"उसकी आँखों में गहरी पीड़ा थी।"

"वह चीखना चाहता था, लेकिन चीख भी गूँगी थी।"

"प्रेम का कोई रूप नहीं होता। गूँगा भी प्यार कर सकता है।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - गूँगे का क्या नाम है? उत्तर - गूँगे का कोई नाम नहीं है, लोग उसे 'गूँगा' कहकर बुलाते हैं।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - गूँगे के चरित्र की विशेषताएँ बताइए। उत्तर - परिचय में बताएँ कि गूँगा कहानी का केंद्रीय पात्र है। फिर उसकी संवेदनशीलता, उसकी पीड़ा, उसका प्रेम, उसका मूक विद्रोह - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि वह हाशिए के समाज का प्रतिनिधि है।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना (पात्र का परिचय) + मुख्य भाग (चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित) + कहानी में भूमिका + निष्कर्ष।

विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें) + निष्कर्ष। जैसे हाशिए के लोगों की पीड़ा पर प्रश्न - पहले हाशियाकरण की अवधारणा, फिर गूँगे के माध्यम से उसका चित्रण, फिर निष्कर्ष।

लेखक की कला पर प्रश्न के लिए: लेखक का परिचय + उनकी कहानी कला की विशेषताएँ + कहानी में इन विशेषताओं के उदाहरण + निष्कर्ष।

10. हब लिंक



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