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कक्षा 11 अध्याय 5 – गलता लोहा – शेखर जोशी (आरोह – गद्य) | GPN

📘 पाठ – गलता लोहा | कक्षा 11 हिंदी (आरोह) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: आरोह भाग 1 | ✍️ लेखक: शेखर जोशी | 📝 प्रकार: कहानी (मनोवैज्ञानिक) | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखक परिचय - शेखर जोशी

जन्म: 1932, उत्तराखंड

मृत्यु: 2021

प्रमुख रचनाएँ: कोसी का घटवार, प्रस्थान, दाज्यू, सियाराम, गलता लोहा, नदी बहती रही, मेरा दुख मेरे साथी, आदि

सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार

शेखर जोशी हिंदी साहित्य के प्रमुख कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक विसंगतियाँ और मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व का गहरा चित्रण मिलता है। वे विशेष रूप से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र के जीवन को अपनी कहानियों में उतारने के लिए जाने जाते हैं। उनकी भाषा सरल, सजीव और क्षेत्रीय बोलियों से भरपूर है। उनके पात्र साधारण लोग होते हैं, लेकिन उनके मनोभावों का विश्लेषण बहुत गहराई से करते हैं। 'गलता लोहा' उनकी प्रसिद्ध कहानियों में से एक है, जिसमें उन्होंने एक कारीगर के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व को बड़ी संवेदनशीलता से चित्रित किया है।

📖 अध्याय पृष्ठभूमि

'गलता लोहा' शेखर जोशी की एक प्रसिद्ध कहानी है। यह कहानी एक लोहार के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व पर आधारित है। कहानी का नायक एक लोहार है जो अपने पुश्तैनी पेशे से जुड़ा है। वह अपने काम में माहिर है और उसे अपने पेशे पर गर्व है। लेकिन समय बदल रहा है। मशीनों ने हाथ के औजारों की जगह ले ली है। लोग अब लोहार के पास नहीं आते। उसकी दुकान सूनी पड़ी है।

एक दिन एक युवक उसके पास आता है और अपनी बंदूक की नाल ठीक करने को कहता है। लोहार बहुत दिनों बाद काम पर हाथ लगाता है। वह पूरी मेहनत और लगन से काम करता है। लेकिन जब वह नाल को ठीक कर रहा होता है, तो उसके मन में विचार आता है - कहीं यह बंदूक किसी निर्दोष की जान न ले ले? कहीं वह किसी हत्या में सहायक तो नहीं बन रहा? यह विचार उसे बेचैन कर देता है। वह काम अधूरा छोड़ देता है और युवक को वापस जाने को कहता है।

यह कहानी सिर्फ एक लोहार की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की कहानी है जो अपने पेशे और नैतिकता के बीच फँस जाता है। यह कहानी मानवीय संवेदनाओं, जिम्मेदारी और अंतरात्मा के सवालों को उठाती है।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की बोर्ड परीक्षा में यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष इससे 5-8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। लोहार के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व, उसके पेशे के प्रति लगाव, नैतिकता के सवाल, बदलते समय के साथ पेशों का ह्रास आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि लोहार ने बंदूक की नाल ठीक करने से मना क्यों कर दिया? उसके मन में क्या द्वंद्व चल रहा था? कहानी का शीर्षक 'गलता लोहा' क्यों रखा गया?

2. सरल सारांश

शेखर जोशी की कहानी 'गलता लोहा' एक लोहार के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व पर आधारित है। कहानी का नायक एक बुजुर्ग लोहार है, जो अपने पुश्तैनी पेशे से जुड़ा है। उसके पूर्वज लोहार थे, वह लोहार है, और उसकी इच्छा है कि उसका बेटा भी यही काम करे। लेकिन समय बदल गया है। मशीनों ने हाथ के औजारों की जगह ले ली है। लोग अब लोहार के पास नहीं आते। उसकी दुकान सूनी पड़ी है। उसका बेटा भी यह काम नहीं करना चाहता।

एक दिन एक युवक उसके पास आता है और अपनी बंदूक की नाल ठीक करने को कहता है। लोहार बहुत दिनों बाद काम पर हाथ लगाता है। वह पूरी मेहनत और लगन से काम करता है। उसे अपने काम पर गर्व है। वह लोहे को आग में तपाता है, हथौड़े से पीटता है, उसे सही शक्ल देता है। काम करते हुए उसे लगता है जैसे वह फिर से जीवित हो गया हो।

लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता है, उसके मन में विचार आने लगते हैं। यह बंदूक कहाँ इस्तेमाल होगी? क्या इससे किसी की जान जाएगी? कहीं वह किसी हत्या में सहायक तो नहीं बन रहा? अगर इस बंदूक से किसी निर्दोष की हत्या हुई, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या वह भी उस हत्या का भागीदार नहीं होगा?

ये विचार उसे बेचैन कर देते हैं। वह काम रोक देता है। वह सोचता है कि वह एक कारीगर है, उसका काम औजार बनाना है, हथियार नहीं। वह युवक को बुलाता है और कहता है कि वह यह काम नहीं कर सकता। युवक हैरान हो जाता है। वह लोहार को समझाने की कोशिश करता है, पैसे देने की बात करता है। लेकिन लोहार अपनी बात पर अड़ा रहता है।

युवक के जाने के बाद लोहार अकेला बैठा सोचता है। उसे अपने फैसले पर गर्व है, लेकिन दुख भी है। उसका पेशा खत्म हो रहा है। उसकी दुकान फिर से सूनी हो जाएगी। लेकिन उसने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी, अपने नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं किया।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • पेशे के प्रति लगाव: लोहार अपने पेशे से गहराई से जुड़ा है। यह उसके पूर्वजों का पेशा है। उसे अपने काम पर गर्व है। वह लोहे के साथ काम करते हुए खुद को जीवित महसूस करता है। यह लगाव ही उसे मशीनों के इस युग में भी अपनी दुकान चलाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
  • नैतिकता का सवाल: कहानी का केंद्रीय सवाल है - एक कारीगर की अपने उत्पाद के इस्तेमाल के प्रति क्या जिम्मेदारी है? क्या उसे सिर्फ अपना काम करना चाहिए, या उसे यह भी सोचना चाहिए कि उसका बनाया हुआ सामान कहाँ इस्तेमाल होगा? लोहार के मन में यही सवाल उठता है और वह काम करने से मना कर देता है।
  • मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व: लोहार के मन में गहरा अंतर्द्वंद्व चलता है। एक तरफ वह काम करना चाहता है, अपने पेशे को जीवित रखना चाहता है। दूसरी तरफ उसकी अंतरात्मा उसे रोकती है। यह द्वंद्व उसे बेचैन कर देता है।
  • बदलता समय और पेशों का ह्रास: कहानी बदलते समय के साथ पारंपरिक पेशों के ह्रास को भी दर्शाती है। मशीनों ने हाथ के औजारों की जगह ले ली है। लोहार जैसे कारीगर बेरोजगार हो रहे हैं। उनकी कला और कौशल अब बेकार हो रहे हैं।
  • पीढ़ी का अंतर: लोहार का बेटा उसका पेशा नहीं अपनाना चाहता। यह पीढ़ी के अंतर को दर्शाता है। नई पीढ़ी पुराने पेशों से कट रही है, नए अवसरों की तलाश में है।
  • गलते लोहे का प्रतीक: 'गलता लोहा' सिर्फ शीर्षक नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है। यह उस लोहे का प्रतीक है जो आग में तप रहा है, बदल रहा है। यह लोहार के मन के द्वंद्व का भी प्रतीक है। यह बदलते समय का भी प्रतीक है जिसमें पुराने मूल्य और पेशे गल रहे हैं, बदल रहे हैं।

📌 विषय / Theme

इस कहानी का मुख्य विषय है नैतिकता और जिम्मेदारी का सवाल। यह दिखाती है कि एक व्यक्ति को सिर्फ अपने पेशे के प्रति ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति भी जिम्मेदार होना चाहिए। दूसरा महत्वपूर्ण विषय है पारंपरिक पेशों का ह्रास और बदलता समय। तीसरा विषय है मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व - कैसे एक व्यक्ति अपनी इच्छाओं और अपनी अंतरात्मा के बीच फँस जाता है।

📌 सामाजिक संदेश

शेखर जोशी इस कहानी के माध्यम से समाज को यह संदेश देते हैं कि हमें अपने काम के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। सिर्फ पैसे कमाना ही मकसद नहीं होना चाहिए। हमें यह भी सोचना चाहिए कि हमारा काम समाज पर क्या प्रभाव डाल रहा है। यह कहानी यह भी संदेश देती है कि पारंपरिक पेशों और कलाओं को संरक्षित करना चाहिए। वे हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।

📌 नैतिक शिक्षा

  • अंतरात्मा की आवाज सुनो: हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनो। वही सही रास्ता दिखाती है।
  • जिम्मेदारी लो: अपने काम के प्रति जिम्मेदार बनो। सोचो कि तुम्हारा काम दूसरों को कैसे प्रभावित कर रहा है।
  • नैतिक मूल्यों पर समझौता मत करो: चाहे कितनी भी मुश्किल हो, नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं करना चाहिए।
  • अपने पेशे पर गर्व करो: हर पेशा महत्वपूर्ण है। अपने पेशे पर गर्व करो, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो।
  • बदलाव को स्वीकार करो: समय बदलता है। बदलाव को स्वीकार करना सीखो, लेकिन अपने मूल्यों को मत छोड़ो।

4. पात्र चित्रण

🧑 लोहार (केंद्रीय पात्र)

स्वभाव: लोहार एक बुजुर्ग, अनुभवी और संवेदनशील व्यक्ति है। वह अपने पेशे से गहराई से जुड़ा है। उसे अपने काम पर गर्व है। वह लोहे के साथ काम करते हुए खुद को जीवित महसूस करता है। वह सीधा-सादा और ईमानदार है। उसके अंदर गहरी संवेदनशीलता है - वह सिर्फ एक कारीगर नहीं, बल्कि एक विचारशील व्यक्ति भी है। उसकी अंतरात्मा बहुत मजबूत है। वह पैसे के लालच में अपने नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं करता। वह अकेला है - उसकी दुकान सूनी है, उसका बेटा उसका पेशा नहीं अपनाना चाहता।

भूमिका: वह कहानी का केंद्रीय पात्र है। उसके माध्यम से लेखक ने नैतिकता, जिम्मेदारी और मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व के सवाल उठाए हैं। वह उन पारंपरिक कारीगरों का प्रतिनिधित्व करता है जो बदलते समय में अपनी पहचान खो रहे हैं।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: लोहार ईमानदार, संवेदनशील, नैतिक, विचारशील, अकेला, अपने पेशे के प्रति समर्पित है। उसका अंतर्द्वंद्व कहानी का मुख्य बिंदु है।

🧑 युवक (ग्राहक)

स्वभाव: युवक एक आधुनिक युवा है। वह शहर से आया है। उसके पास बंदूक है, जो दर्शाता है कि वह संभवतः शिकारी है या किसी और काम से जुड़ा है। वह व्यावहारिक है - उसे सिर्फ अपना काम चाहिए। उसे लोहार के नैतिक सवालों से कोई मतलब नहीं। वह पैसे देने को तैयार है, लेकिन लोहार की बात नहीं समझ पाता। वह हैरान है कि कोई पैसे ठुकरा सकता है। वह आधुनिकता का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ नैतिकता से ज्यादा व्यवहारिकता महत्वपूर्ण है।

भूमिका: वह कहानी में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है। उसके आने से लोहार के मन में द्वंद्व शुरू होता है। वह आधुनिक समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है जो नैतिक सवालों से परे है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: युवक व्यावहारिक, आधुनिक, पैसे में विश्वास रखने वाला, लोहार के द्वंद्व को न समझ पाने वाला है। वह आधुनिकता का प्रतिनिधित्व करता है।

🧑 लोहार का बेटा (अनुपस्थित पात्र)

स्वभाव: लोहार का बेटा कहानी में उपस्थित नहीं है, लेकिन उसका जिक्र है। वह अपने पिता का पेशा नहीं अपनाना चाहता। वह शहर जाना चाहता है, नौकरी करना चाहता है। वह नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो पुराने पेशों से कट रही है। वह व्यावहारिक है - उसे लगता है कि लोहार का काम अब बेकार है, उसमें भविष्य नहीं है।

भूमिका: वह पीढ़ी के अंतर और पारंपरिक पेशों के ह्रास को दर्शाता है। उसके माध्यम से लेखक ने दिखाया है कि कैसे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से कट रही है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: लोहार का बेटा नई पीढ़ी का प्रतिनिधि है, जो पुराने पेशों को नहीं अपनाना चाहता। वह पीढ़ी के अंतर को दर्शाता है।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
गलता लोहाआग में तपता हुआ लोहा, पिघलता हुआ लोहागलता लोहा देखकर लोहार की आँखें चमक उठीं।
अंतर्द्वंद्वआंतरिक संघर्ष, inner conflictलोहार के मन में गहरा अंतर्द्वंद्व चल रहा था।
नैतिकताmorality, ethicsउसने नैतिकता पर समझौता नहीं किया।
अंतरात्माconscienceउसकी अंतरात्मा ने उसे रोक दिया।
जिम्मेदारीresponsibilityअपने काम के प्रति जिम्मेदारी जरूरी है।
पुश्तैनी पेशापैतृक व्यवसाय, ancestral professionलोहार का पुश्तैनी पेशा था लोहारगिरी।
कारीगरcraftsmanवह एक कुशल कारीगर था।
हथौड़ाhammerउसने हथौड़ा उठाकर लोहे पर चोट की।
नालबंदूक की नली, barrel of gunयुवक बंदूक की नाल ठीक कराने आया था।
भट्ठीfurnaceलोहार ने भट्ठी में आग जलाई।
संवेदनशीलताsensitivityउसकी संवेदनशीलता ने उसे रोक दिया।
व्यवहारिकताpracticalityयुवक की व्यवहारिकता उसे समझ नहीं आई।
पीढ़ी का अंतरgeneration gapपिता और पुत्र में पीढ़ी का अंतर था।
ह्रासdecline, degradationपारंपरिक पेशों का ह्रास हो रहा है।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: लोहार ने बंदूक की नाल ठीक करने से मना क्यों कर दिया? उसके मन में क्या द्वंद्व चल रहा था? [CBSE 2023, 2021]

लोहार ने बंदूक की नाल ठीक करने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसकी अंतरात्मा ने उसे रोक दिया। काम करते हुए उसके मन में विचार आया कि यह बंदूक कहाँ इस्तेमाल होगी? क्या इससे किसी की जान जाएगी? अगर इस बंदूक से किसी निर्दोष की हत्या हुई, तो वह भी उस हत्या का भागीदार होगा। उसके मन में गहरा द्वंद्व चल रहा था - एक तरफ वह काम करना चाहता था, अपने पेशे को जीवित रखना चाहता था, दूसरी तरफ उसकी अंतरात्मा उसे रोक रही थी। वह एक कारीगर था, उसका काम औजार बनाना था, हथियार नहीं। इस नैतिक दुविधा के कारण उसने काम करने से मना कर दिया।

प्रश्न 2: 'गलता लोहा' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2022, 2020]

'गलता लोहा' शीर्षक अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है। पहले स्तर पर, यह लोहार की भट्ठी में तपते हुए लोहे को दर्शाता है, जो कहानी का केंद्रीय बिंदु है। दूसरे स्तर पर, यह लोहार के मन के अंतर्द्वंद्व का प्रतीक है - जैसे लोहा आग में तपकर गल रहा है, बदल रहा है, वैसे ही लोहार का मन भी सवालों की आग में तप रहा है, गल रहा है। तीसरे स्तर पर, यह बदलते समय का प्रतीक है - पुराने मूल्य, पुराने पेशे, पुरानी सोच सब कुछ गल रहा है, बदल रहा है। इस प्रकार, यह शीर्षक कहानी के हर पहलू को समेटे हुए है।

प्रश्न 3: लोहार के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? [CBSE 2023, 2019]

लोहार के चरित्र की अनेक विशेषताएँ हैं। पहली विशेषता है उसका अपने पेशे के प्रति गहरा लगाव और समर्पण। वह अपने काम से प्यार करता है और उसे उस पर गर्व है। दूसरी विशेषता है उसकी संवेदनशीलता - वह सिर्फ एक कारीगर नहीं, बल्कि एक विचारशील व्यक्ति है। तीसरी विशेषता है उसकी नैतिकता - वह पैसे के लालच में अपने नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं करता। चौथी विशेषता है उसकी ईमानदारी - वह सीधा-सादा और ईमानदार है। पाँचवीं विशेषता है उसकी अंतरात्मा की मजबूती - वह अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनता है और उसका पालन करता है।

प्रश्न 4: कहानी में युवक किसका प्रतिनिधित्व करता है? लोहार और युवक के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2021, 2020]

युवक कहानी में आधुनिकता और व्यवहारिकता का प्रतिनिधित्व करता है। वह शहर से आया है, उसके पास बंदूक है, वह पैसे देने को तैयार है। उसे नैतिक सवालों से कोई मतलब नहीं, उसे सिर्फ अपना काम चाहिए। लोहार और युवक के बीच मुख्य अंतर है - लोहार नैतिकता और अंतरात्मा की आवाज सुनता है, जबकि युवक व्यवहारिकता और पैसे में विश्वास रखता है। लोहार पारंपरिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि युवक आधुनिक सोच का। लोहार सवाल पूछता है, युवक सिर्फ काम निपटाना चाहता है। यह अंतर ही कहानी के केंद्र में है।

प्रश्न 5: कहानी में लोहार के बेटे का क्या महत्व है, हालाँकि वह कहानी में उपस्थित नहीं है? [CBSE 2022]

लोहार का बेटा कहानी में उपस्थित नहीं है, फिर भी उसका बहुत महत्व है। वह पीढ़ी के अंतर और पारंपरिक पेशों के ह्रास का प्रतीक है। वह नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो पुराने पेशों से कट रही है, नए अवसरों की तलाश में है। उसके माध्यम से लेखक ने दिखाया है कि कैसे पारंपरिक कला और कौशल धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं क्योंकि नई पीढ़ी उन्हें अपनाना नहीं चाहती। लोहार का अकेलापन और उसकी दुकान की सूनापन इसी बात को और गहराई देता है कि उसके बाद यह पेशा खत्म हो जाएगा।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'गलता लोहा' कहानी में शेखर जोशी ने एक कारीगर के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व को किस प्रकार चित्रित किया है? विस्तार से विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2023, 2021, 2019]

शेखर जोशी ने 'गलता लोहा' कहानी में लोहार के मनोवैज्ञानिक अंतर्द्वंद्व को बहुत ही संवेदनशीलता और गहराई से चित्रित किया है।

  • पेशे के प्रति लगाव बनाम नैतिकता: लोहार के मन में सबसे बड़ा द्वंद्व उसके पेशे के प्रति लगाव और उसकी नैतिकता के बीच है। एक तरफ वह बहुत दिनों बाद काम पर हाथ लगाया है, वह खुद को जीवित महसूस कर रहा है। दूसरी तरफ उसे डर है कि कहीं उसका बनाया हथियार किसी निर्दोष की जान न ले ले।
  • आर्थिक आवश्यकता बनाम नैतिक मूल्य: लोहार को पैसे की जरूरत है। उसकी दुकान सूनी है, काम नहीं है। युवक पैसे देने को तैयार है। लेकिन वह पैसे के लालच में अपने नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं करना चाहता।
  • कलाकार की संतुष्टि बनाम सामाजिक जिम्मेदारी: लोहार को अपने काम से संतुष्टि मिलती है। वह लोहे को सही शक्ल देकर खुश होता है। लेकिन उसे यह भी एहसास है कि एक कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी होती है।
  • परंपरा बनाम आधुनिकता: लोहार पुरानी परंपरा का प्रतिनिधि है, जबकि युवक आधुनिकता का। लोहार के मन में यह द्वंद्व भी है कि क्या उसे बदलते समय के साथ ढलना चाहिए या अपनी परंपरा पर अड़ा रहना चाहिए।
  • अकेलापन और अस्तित्व का सवाल: काम न करने पर उसकी दुकान सूनी रहेगी, वह अकेला रहेगा। उसका पेशा खत्म हो जाएगा। लेकिन काम करने पर उसकी अंतरात्मा को ठेस पहुँचेगी। यह द्वंद्व उसे और गहरा कर देता है।

शेखर जोशी ने इस अंतर्द्वंद्व को बहुत ही मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। लोहार का मौन, उसके विचार, उसके संकोच, उसका अंतिम निर्णय - सब कुछ इस द्वंद्व को गहराई देता है। यह द्वंद्व सिर्फ लोहार का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो अपने पेशे और अपनी नैतिकता के बीच फँस जाता है।

प्रश्न 2: 'गलता लोहा' कहानी के माध्यम से शेखर जोशी ने पारंपरिक पेशों के ह्रास और बदलते समय के प्रभाव को किस प्रकार उजागर किया है? [CBSE 2022, 2020]

शेखर जोशी ने 'गलता लोहा' कहानी के माध्यम से पारंपरिक पेशों के ह्रास और बदलते समय के प्रभाव को बहुत ही मार्मिक ढंग से उजागर किया है।

  • सूनी दुकान: लोहार की दुकान सूनी पड़ी है। लोग अब उसके पास नहीं आते। यह दर्शाता है कि पारंपरिक पेशों की माँग खत्म हो रही है। मशीनों ने हाथ के औजारों की जगह ले ली है।
  • बेटे का पेशा न अपनाना: लोहार का बेटा उसका पेशा नहीं अपनाना चाहता। वह शहर जाना चाहता है, नौकरी करना चाहता है। यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी पुराने पेशों से कट रही है। उन्हें लगता है कि इन पेशों में भविष्य नहीं है।
  • युवक का आना: युवक बंदूक की नाल ठीक कराने आता है। यह दर्शाता है कि बदलते समय में भी कभी-कभार पुराने कारीगरों की जरूरत पड़ती है, लेकिन यह जरूरत स्थायी नहीं है।
  • लोहार की कला का अप्रासंगिक होना: लोहार की कला, उसका कौशल, उसकी विरासत - सब कुछ अब अप्रासंगिक हो रहा है। कोई उसकी कद्र नहीं करता।
  • लोहार का अकेलापन: कहानी के अंत में लोहार अकेला रह जाता है। उसकी दुकान फिर से सूनी हो जाती है। यह अकेलापन उन सभी कारीगरों का अकेलापन है जो बदलते समय में अपनी पहचान खो रहे हैं।
  • गलते लोहे का प्रतीक: 'गलता लोहा' सिर्फ लोहार की भट्ठी का लोहा नहीं है, बल्कि उन पारंपरिक मूल्यों और पेशों का भी प्रतीक है जो समय की आग में गल रहे हैं, बदल रहे हैं, खत्म हो रहे हैं।

इस प्रकार, शेखर जोशी ने इस कहानी के माध्यम से एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे आधुनिकता और मशीनीकरण के इस युग में पारंपरिक पेशे और कलाएँ खत्म हो रही हैं, और उनसे जुड़े लोग बेरोजगार और अकेले हो रहे हैं।

प्रश्न 3: 'गलता लोहा' कहानी में प्रयुक्त प्रतीकों और बिंबों की व्याख्या कीजिए। [CBSE 2021, 2019]

शेखर जोशी ने 'गलता लोहा' कहानी में अनेक प्रतीकों और बिंबों का सफल प्रयोग किया है, जो कहानी को गहराई और विस्तार प्रदान करते हैं।

  • गलता लोहा (केंद्रीय प्रतीक): यह कहानी का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह एक साथ कई चीजों का प्रतीक है - लोहार की भट्ठी में तपता लोहा, लोहार के मन का अंतर्द्वंद्व, बदलते समय में पिघलते-गलते पारंपरिक मूल्य और पेशे, और मनुष्य की अंतरात्मा जो सवालों की आग में तप रही है।
  • भट्ठी और आग: भट्ठी और आग परिवर्तन और परीक्षा के प्रतीक हैं। जैसे लोहा आग में तपकर बदलता है, वैसे ही लोहार का मन भी सवालों की आग में तपकर बदल रहा है।
  • हथौड़ा और औजार: हथौड़ा और औजार लोहार के पेशे, उसकी पहचान और उसके कौशल के प्रतीक हैं। ये उसकी विरासत हैं, उसके पूर्वजों की देन हैं।
  • बंदूक की नाल: बंदूक की नाल हिंसा और विनाश का प्रतीक है। यह लोहार के सामने नैतिक सवाल खड़ा करती है - क्या उसे विनाश का साधन बनाना चाहिए?
  • सूनी दुकान: सूनी दुकान अकेलेपन, बेरोजगारी और पारंपरिक पेशों के ह्रास का प्रतीक है। यह लोहार के अस्तित्व के संकट को दर्शाती है।
  • लोहार के हाथ: लोहार के हाथ उसके कौशल, उसकी कला और उसकी पहचान के प्रतीक हैं। ये हाथ ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी हैं।
  • शहर और गाँव का अंतर: शहर आधुनिकता, बदलाव और नए अवसरों का प्रतीक है, जबकि गाँव परंपरा, ठहराव और पुराने मूल्यों का। युवक शहर से आता है, लोहार का बेटा शहर जाना चाहता है - यह इसी अंतर को दर्शाता है।

इन प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से शेखर जोशी ने कहानी को केवल एक घटना से ऊपर उठाकर एक सार्वभौमिक कृति बना दिया है। ये प्रतीक कहानी को कई स्तरों पर पढ़ने और समझने का अवसर देते हैं।

प्रश्न 4: लोहार के चरित्र की तुलना आज के युवाओं से करते हुए बताइए कि उनके मूल्यों में क्या अंतर है? 'गलता लोहा' कहानी के आधार पर विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2020]

लोहार का चरित्र और आज के युवाओं के मूल्यों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं, जो 'गलता लोहा' कहानी के आधार पर स्पष्ट होते हैं।

  • नैतिकता बनाम व्यवहारिकता: लोहार के लिए नैतिकता सबसे ऊपर है। वह पैसे के लालच में अपने नैतिक मूल्यों पर समझौता नहीं करता। आज के युवाओं में अक्सर व्यवहारिकता हावी होती है - जो काम से काम रखो, जैसे भी काम बन जाए, बस पैसा मिल जाए।
  • अंतरात्मा की आवाज बनाम सफलता की दौड़: लोहार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनता है और उसका पालन करता है। आज के युवा सफलता की दौड़ में इतने भागदौड़ में हैं कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनना ही भूल गए हैं।
  • पेशे के प्रति लगाव बनाम करियरिज्म: लोहार अपने पेशे से प्यार करता है, उसे उस पर गर्व है। आज के युवा सिर्फ पैसे वाली नौकरी चाहते हैं, पेशे के प्रति उनमें कोई लगाव नहीं है। वे करियर बनाना चाहते हैं, पेशा नहीं अपनाना चाहते।
  • जिम्मेदारी का एहसास बनाम लापरवाही: लोहार अपने काम के प्रति जिम्मेदार है। वह सोचता है कि उसका बनाया हुआ सामान कहाँ इस्तेमाल होगा। आज के युवा अक्सर लापरवाह होते हैं - उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके काम का क्या असर होगा।
  • परंपरा से जुड़ाव बनाम आधुनिकता की दौड़: लोहार अपनी परंपरा से जुड़ा है, उसे उस पर गर्व है। आज के युवा परंपरा से कट रहे हैं, उसे पुराना और बेकार समझते हैं। वे आधुनिकता की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं।
  • संतोष बनाम असंतोष: लोहार थोड़े में संतोष कर लेता है। आज के युवा हमेशा असंतुष्ट रहते हैं - उन्हें और चाहिए, और बड़ा चाहिए, और जल्दी चाहिए।

यह अंतर दर्शाता है कि समय के साथ मूल्यों में कितना बड़ा बदलाव आया है। लोहार जैसे लोग आज भी हैं, लेकिन उनकी संख्या कम होती जा रही है। शेखर जोशी ने इस कहानी के माध्यम से हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? क्या हम अपने मूल्यों को खोकर कुछ पा भी रहे हैं?

प्रश्न 5: 'एक कारीगर की असली पहचान उसके बनाए हुए सामान से नहीं, उसके मूल्यों से होती है' - 'गलता लोहा' कहानी के आधार पर इस कथन की व्याख्या कीजिए। [CBSE 2021]

'एक कारीगर की असली पहचान उसके बनाए हुए सामान से नहीं, उसके मूल्यों से होती है' - यह कथन 'गलता लोहा' कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

  • लोहार की कुशलता: लोहार एक कुशल कारीगर है। वह लोहे को सही शक्ल दे सकता है। लेकिन उसकी असली पहचान उसकी इस कुशलता से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों से है।
  • नैतिक मूल्यों पर अड़े रहना: जब उसे एहसास होता है कि उसका बनाया हुआ हथियार किसी निर्दोष की जान ले सकता है, तो वह काम करने से मना कर देता है। वह जानता है कि इससे उसे पैसे मिलेंगे, उसकी दुकान में रौनक आएगी, लेकिन फिर भी वह मना कर देता है। यह उसके मूल्यों की ताकत दिखाता है।
  • अंतरात्मा की आवाज: लोहार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनता है। वह उसकी उपेक्षा नहीं करता। यह उसके मूल्यों की गहराई को दर्शाता है।
  • जिम्मेदारी का एहसास: लोहार सिर्फ एक कारीगर नहीं है, वह एक जिम्मेदार नागरिक भी है। वह समझता है कि उसके काम का समाज पर असर पड़ता है। यह जिम्मेदारी का एहसास उसके मूल्यों से ही आता है।
  • पैसे से ऊपर मूल्य: लोहार पैसे के लालच में अपने मूल्यों पर समझौता नहीं करता। वह दिखाता है कि कुछ चीजें पैसे से बढ़कर होती हैं - नैतिकता, अंतरात्मा, जिम्मेदारी।
  • अकेलापन स्वीकार करना: लोहार जानता है कि काम न करने पर वह फिर से अकेला हो जाएगा, उसकी दुकान सूनी रहेगी। फिर भी वह अपने फैसले पर अड़ा रहता है। यह उसके मूल्यों की कीमत है जो वह चुकाने को तैयार है।

इस प्रकार, लोहार की असली पहचान उसके बनाए हुए सामान से नहीं, बल्कि उसके मूल्यों से है। वह एक ऐसा कारीगर है जो अपनी कला से बढ़कर अपनी नैतिकता को महत्व देता है। यही उसे एक साधारण कारीगर से ऊपर उठाकर एक आदर्श बना देता है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • लोहार के मन का अंतर्द्वंद्व - 2023, 2021, 2019
  • बंदूक की नाल ठीक करने से मना करने का कारण - 2022, 2020, 2018
  • शीर्षक की सार्थकता - 2022, 2020, 2019
  • लोहार के चरित्र की विशेषताएँ - 2021, 2019
  • पारंपरिक पेशों के ह्रास का चित्रण - 2020, 2018
  • प्रतीकों और बिंबों का प्रयोग - 2021, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस पाठ से प्रतिवर्ष 5-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में लोहार के अंतर्द्वंद्व, शीर्षक की सार्थकता और पात्रों के चरित्र-चित्रण पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, पारंपरिक पेशों के ह्रास और प्रतीक-बिंब विधान पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखक - शेखर जोशी
  • जन्म - 1932, मृत्यु - 2021
  • प्रमुख रचनाएँ - कोसी का घटवार, प्रस्थान, दाज्यू
  • सम्मान - साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान
  • पुस्तक - आरोह भाग 1
  • पाठ का नाम - गलता लोहा
  • मुख्य पात्र - लोहार, युवक, लोहार का बेटा (अनुपस्थित)
  • मुख्य विषय - नैतिकता, अंतर्द्वंद्व, पारंपरिक पेशों का ह्रास
  • विधा - कहानी (मनोवैज्ञानिक)

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"मैं हथियार नहीं बनाता, औजार बनाता हूँ।"

"अंतरात्मा की आवाज सबसे बड़ी आवाज है।"

"गलता लोहा सिर्फ लोहा नहीं, मन भी गलता है।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।

उदाहरण: प्रश्न - 'गलता लोहा' कहानी के लेखक कौन हैं? उत्तर - शेखर जोशी।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु का उदाहरण सहित वर्णन।

उदाहरण: प्रश्न - लोहार के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? उत्तर - परिचय में बताएँ कि लोहार कहानी का केंद्रीय पात्र है। फिर उसके पेशे के प्रति लगाव, संवेदनशीलता, नैतिकता, अंतरात्मा की मजबूती - चार बिंदुओं में समझाएँ। निष्कर्ष में कहें कि ये विशेषताएँ उसे एक आदर्श कारीगर बनाती हैं।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के लिए: प्रस्तावना + अंतर्द्वंद्व के कारण + अंतर्द्वंद्व की अभिव्यक्ति + अंतर्द्वंद्व का समाधान + निष्कर्ष। जैसे लोहार के अंतर्द्वंद्व पर प्रश्न - पहले अंतर्द्वंद्व की परिभाषा दें, फिर उसके कारण बताएँ (पेशे के प्रति लगाव बनाम नैतिकता), फिर कहानी में उसकी अभिव्यक्ति का विश्लेषण करें, अंत में निष्कर्ष दें।

10. हब लिंक



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