📘 पाठ – ईदगाह | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, गद्य खंड) | GPN
📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (गद्य खंड) | ✍️ लेखक: प्रेमचंद | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: बहुत उच्च]
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु प्रश्न (5)
- 7. दीर्घ प्रश्न (5)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय - प्रेमचंद
जन्म: 31 जुलाई 1880, लमही गाँव (वाराणसी)
मृत्यु: 8 अक्टूबर 1936
मूल नाम: धनपत राय श्रीवास्तव
प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, कर्मभूमि, सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कफन, पूस की रात, ईदगाह, बड़े भाई साहब, पंच परमेश्वर
प्रेमचंद हिंदी और उर्दू के सबसे महान लेखक माने जाते हैं। उन्हें उपन्यास सम्राट कहा जाता है। उन्होंने ग्रामीण परिवेश, किसानों की समस्याएँ, सामाजिक विषमताएँ, मध्यवर्गीय संघर्ष को बड़ी गहराई से चित्रित किया। उनकी भाषा सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण है। पात्रों के माध्यम से वे समाज का यथार्थ उकेरते हैं।
'ईदगाह' कहानी प्रेमचंद की अप्रतिम कृति है। इस कहानी में उन्होंने एक चार-पाँच वर्ष के बालक हामिद की मार्मिक कहानी लिखी है जो अनाथ है लेकिन उसकी समझ और त्याग किसी बड़े को भी शर्मसार कर दे। ग्रामीण जीवन, ईद का त्योहार, बच्चों की दुनिया और गरीबी में भी मानवीय संवेदना का अद्भुत चित्रण है।
📖 कहानी की पृष्ठभूमि
ईदगाह कहानी का प्रकाशन सन् 1933 में हुआ था। यह उस दौर की रचना है जब भारत में गरीबी चरम पर थी। आम आदमी दो वक्त की रोटी के लिए तरसता था। ऐसे में ईद का त्योहार आता था। प्रेमचंद ने इस कहानी में गरीबी और त्योहार के बीच के संघर्ष को दिखाया है।
कहानी का केंद्रबिंदु एक छोटा-सा गाँव है। वहाँ के लोग ईद की नमाज अदा करने के लिए शहर की ईदगाह जाते हैं। बच्चे भी साथ जाते हैं। मेले में तरह-तरह की चीज़ें बिकती हैं। खिलौने, मिठाइयाँ, चाट-पकौड़ी। बच्चों के मन तो वहाँ लग ही जाते हैं। हामिद भी जाता है, लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं। तीन पैसे उसकी जेब में हैं जो उसकी दादी अमीना ने दिए थे।
इस कहानी की सबसे बड़ी खासियत है हामिद का चरित्र। चार साल का बच्चा, जिसके माता-पिता नहीं हैं, दादी के पास रहता है। गरीबी ऐसी कि खाने के लाले पड़े हैं। लेकिन उसके मन में त्याग है, संवेदना है, परिवार के प्रति प्रेम है। वह अपने लिए खिलौना नहीं खरीदता, बल्कि दादी के लिए चिमटा खरीद लाता है। यह त्याग किसी को भी भावुक कर दे।
🎯 अध्याय का महत्व
कक्षा 11 की परीक्षा में इस कहानी का बहुत महत्व है। प्रश्न अक्सर हामिद के चरित्र पर, उसके त्याग पर, दादी-पोते के संबंधों पर, और ग्रामीण परिवेश के चित्रण पर पूछे जाते हैं। त्याग और आत्मीयता का भाव इस कहानी की आत्मा है। बोर्ड परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न नियमित रूप से आते रहे हैं।
2. सरल सारांश
यह कहानी एक छोटे से गाँव के बालक हामिद की है। हामिद अनाथ है। उसके माता-पिता नहीं हैं। वह अपनी बूढ़ी दादी अमीना के साथ रहता है। दोनों बड़ी मुश्किल से गुजर-बसर करते हैं। ईद का दिन आता है। गाँव के सभी बच्चे ईदगाह जाने की तैयारी करते हैं। महमूद, मोहसिन, नूरे, सम्मी सभी के पास नए कपड़े हैं या कम से कम साफ-सुथरे कपड़े तो हैं। हामिद के पास कोई अच्छे कपड़े नहीं। लेकिन दादी ने किसी तरह उसकी मलिन धोती धो दी है। टोपी भी पुरानी है, लेकिन साफ है।
सुबह-सुबह सब लोग ईदगाह के लिए निकल पड़ते हैं। रास्ते में बच्चे तरह-तरह की बातें करते हैं। किसके पास कितने पैसे हैं, क्या खरीदेंगे, यही चर्चा है। महमूद के पास बारह आने हैं, मोहसिन के पास पंद्रह आने। हामिद से पूछा जाता है तो वह बताता है - तीन पैसे। बच्चे हँसते हैं कि तीन पैसे में क्या खरीदेगा? हामिद चुप रहता है।
नमाज के बाद सब मेले में घूमते हैं। खिलौनों की दुकानें हैं, मिठाई की, चाट-पकौड़ी की। बच्चे मिट्टी के घोड़े, गुड़िया, खिलौने खरीदते हैं। हामिद सब देखता है, लेकिन उसे कुछ नहीं भाता। उसका मन खिलौनों में नहीं लगता। उसे लगता है, ये सब तो कुछ दिन में टूट जाएँगे। फिर वह एक लोहे की दुकान पर जाता है। वहाँ उसे एक चिमटा दिखता है। उसे याद आता है कि दादी के हाथ जल जाते हैं तवे से रोटी उतारते समय। वह सोचता है, अगर चिमटा होगा तो दादी के हाथ नहीं जलेंगे। वह तीन पैसे में वह चिमटा खरीद लेता है।
लौटते समय दूसरे बच्चों के पास खिलौने हैं, मिठाइयाँ हैं। हामिद के पास चिमटा है। बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते हैं। हामिद पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वह खुश है कि दादी के लिए कुछ लाया है। घर पहुँचकर जब दादी को पता चलता है कि हामिद ने उसके लिए चिमटा खरीदा है, तो उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं। वह हामिद को गले से लगा लेती है। कहानी के अंत में दादी की यह भावुकता और हामिद का बाल-सुलभ त्याग बड़ा मार्मिक बन पड़ता है।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण
- गरीबी और अभाव: कहानी की पृष्ठभूमि में गरीबी है। हामिद के पास नए कपड़े नहीं, अच्छे जूते नहीं, पैसे भी सिर्फ तीन पैसे। दादी रोटी पका कर खिलाती है, बस। लेकिन प्रेमचंद ने गरीबी को करुणा का विषय नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष और त्याग की जमीन बनाई है।
- बाल मनोविज्ञान: हामिद का चरित्र बाल मनोविज्ञान पर गहरी पकड़ दिखाता है। चार साल का बच्चा खिलौनों के प्रति आकर्षित होता ही है। लेकिन हामिद के भीतर की परिपक्वता, उसकी सोच कि ये खिलौने टूट जाएँगे, यह उसके अभावग्रस्त जीवन ने उसे सिखाया है। वह बच्चा है, लेकिन हालात ने उसे बड़ा बना दिया है।
- त्याग की भावना: कहानी का केन्द्रीय भाव त्याग है। हामिद अपने लिए कुछ नहीं खरीदता। उसकी जेब में तीन पैसे हैं। वह जानता है कि इन तीन पैसों से कुछ भी अच्छा नहीं खरीदा जा सकता। लेकिन वह दादी के लिए चिमटा खरीदता है। यह सोचकर कि दादी के हाथ नहीं जलेंगे। इतने छोटे बच्चे की यह सोच अद्भुत है।
- दादी-पोते का संबंध: अमीना और हामिद का संबंध बहुत गहरा है। अमीना हामिद से बहुत प्यार करती है। उसकी चिंता करती है। हामिद भी दादी से बेहद प्रेम करता है। वह दादी की तकलीफ समझता है। यह रिश्ता कहानी की भावनात्मक गहराई को बढ़ाता है।
- ग्रामीण जीवन का चित्रण: प्रेमचंद ने गाँव के माहौल को बड़े यथार्थ के साथ उतारा है। ईद की सुबह, लोगों का उत्साह, बच्चों की चहल-पहल, ईदगाह का दृश्य, मेले का शोर-शराबा, सब कुछ जीवंत हो उठा है।
- उपहास और उसकी अनदेखी: मेले से लौटते समय दूसरे बच्चे हामिद का मज़ाक उड़ाते हैं कि वह चिमटा ले आया। हामिद उनकी बातों को अनसुना कर देता है। वह जानता है कि उसने सही किया। यह आत्मविश्वास उसे अलग बनाता है।
📌 विषय / Theme
इस कहानी के कई विषय हैं। पहला विषय है - बाल त्याग। एक बच्चा अपनी सीमित समझ में भी दूसरों के लिए सोच सकता है। दूसरा विषय है - गरीबी और संवेदना। गरीबी में भी इंसान संवेदनशील बना रह सकता है। तीसरा विषय है - पारिवारिक प्रेम। दादी-पोते के रिश्ते की मिठास। चौथा विषय है - भौतिक वस्तुओं से परे मूल्य। खिलौने और मिठाइयाँ क्षणिक सुख देते हैं, लेकिन अपनों के लिए किया गया त्याग स्थायी संतोष देता है।
📌 सामाजिक संदेश
प्रेमचंद समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि सच्चा सुख भोग में नहीं, त्याग में है। बच्चे भी बड़ों से सीख सकते हैं, और बड़े बच्चों से। हामिद जैसा बच्चा हमें सिखाता है कि अपनों की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही सबसे बड़ा धर्म है। आज के उपभोक्तावादी युग में यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।
📌 नैतिक शिक्षा
- त्याग सबसे बड़ा सुख: हामिद ने साबित किया कि दूसरों के लिए सोचना और त्याग करना ही असली खुशी देता है।
- अपनों की कद्र करो: हामिद अपनी दादी की तकलीफ समझता है। हमें भी अपनों की परवाह करनी चाहिए।
- उपहास की परवाह मत करो: बच्चों ने हामिद का मज़ाक उड़ाया, लेकिन वह डिगा नहीं। सही काम करो, दुनिया कुछ भी कहे।
- आवश्यकता और विलासिता में अंतर: हामिद ने जरूरत की चीज़ खरीदी, विलासिता की नहीं। यह समझ बड़ों को भी नहीं होती।
4. पात्र चित्रण
🧑 हामिद
उम्र: लगभग 4-5 वर्ष। स्वभाव: हामिद कहानी का केन्द्रीय पात्र है। वह अनाथ है, दादी के पास रहता है। गरीबी में पला-बढ़ा है, इसलिए उम्र से ज़्यादा समझदार है। बाहर से बच्चा, भीतर से बड़ा। उसकी आँखों में त्याग है, मन में संवेदना है। वह खिलौनों से खेलने की उम्र में दादी के हाथ जलने की चिंता करता है। चार साल का बच्चा चिमटा खरीद लाता है - यह उसकी समझदारी दिखाता है। मेले में दूसरे बच्चे मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन वह विचलित नहीं होता। उसे पता है कि उसने सही किया। अंत में दादी की आँखों में आँसू देखकर वह भी भावुक हो जाता है, लेकिन अपनी खुशी पर कायम रहता है।
भूमिका: हामिद बाल त्याग और संवेदना का प्रतिनिधित्व करता है। वह सिखाता है कि उम्र बड़ी नहीं, सोच बड़ी होती है।
प्रमुख घटनाएँ: ईदगाह जाना, मेले में घूमना, दादी के लिए चिमटा खरीदना, बच्चों के मज़ाक को अनदेखा करना, दादी को चिमटा देना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: हामिद का चरित्र त्याग, संवेदना, परिपक्वता, दादी के प्रति प्रेम, बाल मनोविज्ञान का अद्भुत उदाहरण।
🧑 अमीना (दादी)
उम्र: वृद्ध। स्वभाव: अमीना हामिद की दादी हैं। बूढ़ी हैं, कमज़ोर हैं, लेकिन हामिद के लिए सब कुछ करती हैं। हामिद के माता-पिता नहीं हैं, इसलिए उसकी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है। वे बड़ी मुश्किल से गुजर-बसर करती हैं। हामिद से बेहद प्यार करती हैं। ईद के दिन उसे खाली हाथ नहीं भेजना चाहतीं, इसलिए तीन पैसे जुटा कर देती हैं। हामिद के लौटने का बेसब्री से इंतज़ार करती हैं। सोचती हैं, काश हामिद के पास भी दूसरे बच्चों की तरह खिलौने होते। लेकिन जब हामिद उनके लिए चिमटा लाता है, तो उनकी आँखें भर आती हैं। यह दृश्य बहुत मार्मिक है।
भूमिका: अमीना गरीबी में भी संघर्षशील और प्रेममयी दादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे पीढ़ीगत स्नेह और ममता की मूर्ति हैं।
प्रमुख घटनाएँ: हामिद को तीन पैसे देना, उसकी चिंता करना, उसके लौटने का इंतज़ार करना, हामिद का चिमटा देखकर भावुक हो जाना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: अमीना ममतामयी, संघर्षशील, गरीब लेकिन दिल से अमीर, पोते के प्रति असीम प्रेम।
🧑 महमूद, मोहसिन, नूरे, सम्मी (सहयोगी बाल पात्र)
स्वभाव: ये सब गाँव के दूसरे बच्चे हैं। हामिद के साथ ईदगाह जाते हैं। इनके पास हामिद से ज़्यादा पैसे हैं। महमूद के पास बारह आने, मोहसिन के पास पंद्रह आने। ये सब मेले में खिलौने, मिठाइयाँ खरीदते हैं। हामिद के तीन पैसे पर हँसते हैं। वापसी पर हामिद के चिमटे का मज़ाक उड़ाते हैं। लेकिन ये बुरे नहीं हैं। ये बच्चे हैं, बच्चों जैसी हरकतें करते हैं। इनके माध्यम से प्रेमचंद ने आम बच्चों की दुनिया दिखाई है - जहाँ खिलौने, मिठाइयाँ, पैसों का महत्व होता है।
भूमिका: ये पात्र हामिद के त्याग और समझदारी को उजागर करते हैं। इनके ठीक विपरीत है हामिद। इनके पास पैसे हैं, खिलौने हैं, लेकिन त्याग नहीं। हामिद के पास पैसे नहीं, लेकिन त्याग है। यह तुलना कहानी के संदेश को गहरा करती है।
प्रमुख घटनाएँ: ईदगाह जाना, खिलौने खरीदना, हामिद के तीन पैसे पर हँसना, चिमटे का मज़ाक उड़ाना।
परीक्षा उपयोगी बिंदु: विपरीत चरित्र, हामिद के चरित्र को निखारने वाले, बाल सुलभ नादानी के प्रतीक।
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| ईदगाह | वह स्थान जहाँ ईद की नमाज पढ़ी जाती है | गाँव के सभी लोग ईदगाह की ओर चल पड़े। |
| अनाथ | जिसके माता-पिता न हों | हामिद अनाथ है, दादी के पास रहता है। |
| त्याग | अपनी इच्छा का बलिदान | हामिद का त्याग देखकर सब हैरान रह गए। |
| मलिन | गंदा, मैला | उसकी धोती मलिन थी, लेकिन साफ थी। |
| चिमटा | लोहे का एक उपकरण, रोटी सेंकने के काम आता है | हामिद ने दादी के लिए चिमटा खरीदा। |
| खिलौना | बच्चों के खेलने की वस्तु | बच्चों ने मेले से तरह-तरह के खिलौने खरीदे। |
| उपहास | मज़ाक, हँसी | बच्चों ने हामिद का उपहास किया। |
| भावुक | भावनाओं से भरा हुआ | दादी का हृदय भावुक हो गया। |
| नमाज | मुसलमानों की प्रार्थना | ईद के दिन सब नमाज पढ़ते हैं। |
| मेला | त्योहार पर लगने वाला बाज़ार | ईद के मेले में बहुत भीड़ थी। |
| आत्मीयता | अपनापन, निकटता | दादी और पोते में गहरी आत्मीयता है। |
| संवेदना | दूसरों के दर्द को समझना | हामिद में गहरी संवेदना है। |
| गरीबी | अभाव की स्थिति | गरीबी में भी हामिद ने त्याग सीखा। |
| बाल मनोविज्ञान | बच्चों के मन की समझ | प्रेमचंद को बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ थी। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)
प्रश्न 1: हामिद ने खिलौने खरीदने के बजाय चिमटा क्यों खरीदा? [CBSE 2023, 2022]
हामिद ने खिलौने खरीदने के बजाय चिमटा इसलिए खरीदा क्योंकि वह अपनी दादी की तकलीफ समझता था। दादी रोटियाँ सेंकते समय तवे से रोटी उतारते हुए हाथ जला लेती थीं। हामिद को यह बात हमेशा दुखी करती थी। मेले में जब उसने चिमटा देखा, तो उसे लगा कि अगर दादी के पास चिमटा होगा, तो उनके हाथ नहीं जलेंगे। अपनी जेब के तीन पैसों से उसने यह चिमटा खरीदा। यह उसकी संवेदनशीलता और त्याग को दर्शाता है। वह अपने लिए खिलौना नहीं, दादी की सुविधा के लिए चिमटा लाया।
प्रश्न 2: हामिद के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2023, 2021, 2020]
हामिद के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ हैं - त्याग: वह अपने लिए कुछ नहीं खरीदता, दादी के लिए चिमटा खरीदता है। संवेदनशीलता: वह दादी की तकलीफ समझता है। परिपक्वता: चार साल की उम्र में उसकी सोच बड़ों से बेहतर है। आत्मविश्वास: दूसरे बच्चों के उपहास के बावजूद वह अपने फैसले पर अडिग रहता है। दादी के प्रति प्रेम: उसके हर काम में दादी के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। वह अनाथ है, लेकिन उसके मन में किसी प्रकार की हीन भावना नहीं है।
प्रश्न 3: अमीना का चरित्र-चित्रण कीजिए। [CBSE 2022]
अमीना हामिद की दादी हैं। वह एक वृद्ध, गरीब और संघर्षशील महिला हैं। हामिद के माता-पिता नहीं हैं, इसलिए उसकी सारी ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी वह हामिद का साथ नहीं छोड़तीं। ईद के दिन वह हामिद को खाली हाथ नहीं भेजना चाहतीं, इसलिए किसी तरह तीन पैसे जुटा कर देती हैं। हामिद के लौटने तक बेचैन रहती हैं। अंत में हामिद का चिमटा देखकर भावुक हो जाती हैं। उनके चरित्र में ममता, संघर्षशीलता, त्याग और पोते के प्रति असीम प्रेम है। गरीबी में भी उनका दिल बहुत अमीर है।
प्रश्न 4: ईदगाह कहानी के माध्यम से प्रेमचंद ने ग्रामीण जीवन का कैसा चित्र प्रस्तुत किया है? [CBSE 2021]
प्रेमचंद ने ईदगाह कहानी में ग्रामीण जीवन का बहुत ही जीवंत और यथार्थपरक चित्र प्रस्तुत किया है। गाँव की गरीबी, सादगी, लोगों की मिल-जुलकर रहने की आदत, त्योहारों के प्रति उनका उत्साह, बच्चों की दुनिया - सब कुछ सहजता से उभर कर आया है। ईद की सुबह का दृश्य हो, लोगों का एकत्र होना हो, ईदगाह की ओर जाती भीड़ हो, मेले की रौनक हो - सब कुछ ऐसा लगता है मानो पाठक खुद वहाँ मौजूद हो। ग्रामीण अंचल की बोली, वहाँ के रीति-रिवाज, आपसी संबंध - सब प्रेमचंद की लेखनी में जीवंत हो उठे हैं।
प्रश्न 5: कहानी के अंत में अमीना के भावुक होने का क्या कारण था? [CBSE 2020]
कहानी के अंत में जब हामिद लौटता है, तो उसके पास दूसरे बच्चों की तरह खिलौने या मिठाइयाँ नहीं होतीं। उसके पास एक चिमटा होता है। अमीना पहले तो दुखी होती है कि उसके पोते के पास कुछ नहीं है। लेकिन जब हामिद बताता है कि उसने यह चिमटा उनके लिए खरीदा है ताकि रोटियाँ सेंकते समय उनके हाथ न जलें, तो अमीना की आँखों से आँसू बह निकलते हैं। यह आँसू दुख के नहीं, बल्कि हामिद के त्याग, उसकी समझदारी और उसके प्रेम को देखकर आए हैं। उसे लगता है कि इतना छोटा बच्चा उनकी इतनी परवाह करता है, यह सोचकर वह भावुक हो जाती हैं।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)
प्रश्न 1: 'ईदगाह' कहानी में त्याग और संवेदना के भाव को स्पष्ट कीजिए। हामिद का चरित्र इन भावों को कैसे उजागर करता है? [CBSE 2023, 2021]
- त्याग का भाव: कहानी में त्याग का भाव हामिद के माध्यम से उभरता है। चार साल का बच्चा, जिसके पास सिर्फ तीन पैसे हैं। वह इन पैसों से अपने लिए खिलौना या मिठाई खरीद सकता था। लेकिन वह ऐसा नहीं करता। वह दादी की ज़रूरत को देखता है और उनके लिए चिमटा खरीद लाता है। यह त्याग का सबसे बड़ा रूप है - अपनी इच्छाओं को मार कर दूसरों की ज़रूरत सोचना।
- संवेदना का भाव: हामिद में गहरी संवेदना है। वह देखता है कि दादी रोटियाँ सेंकते समय हाथ जला लेती हैं। इससे उसे कष्ट होता है। वह इस तकलीफ को दूर करने का उपाय सोचता है। मेले में चिमटा देखते ही उसे दादी की याद आती है। यह संवेदना ही है जो उसे चिमटा खरीदने के लिए प्रेरित करती है।
- त्याग और संवेदना का समन्वय: हामिद के चरित्र में त्याग और संवेदना का अद्भुत समन्वय है। त्याग के बिना संवेदना अधूरी है, और संवेदना के बिना त्याग निष्प्राण। हामिद दादी के प्रति संवेदना रखता है, इसलिए त्याग कर पाता है।
- दूसरे बच्चों से तुलना: महमूद, मोहसिन जैसे बच्चों के पास खिलौने हैं, मिठाइयाँ हैं, लेकिन त्याग नहीं। हामिद के पास कुछ नहीं, लेकिन त्याग है। यह तुलना त्याग और संवेदना के महत्व को और रेखांकित करती है।
- निष्कर्ष: 'ईदगाह' केवल एक कहानी नहीं, बल्कि त्याग और संवेदना का महाकाव्य है। हामिद जैसा पात्र हिंदी साहित्य में अमर है। वह सिखाता है कि त्याग और संवेदना ही इंसान को इंसान बनाते हैं।
प्रश्न 2: प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' बाल मनोविज्ञान का सशक्त उदाहरण है। कैसे? [CBSE 2022, 2020]
- बच्चों की दुनिया: कहानी की शुरुआत में ही बच्चों की दुनिया खुलती है। वे ईदगाह जाने को लेकर कितने उत्साहित हैं। उनकी बातचीत, उनकी मस्ती, पैसों की चर्चा - सब कुछ बच्चों जैसा है।
- खिलौनों के प्रति आकर्षण: बच्चों का खिलौनों के प्रति स्वाभाविक आकर्षण है। महमूद, मोहसिन, नूरे सब मेले में खिलौने खरीदते हैं। यह बाल मनोविज्ञान के अनुरूप है।
- हामिद का अपवाद स्वरूप व्यवहार: हामिद भी बच्चा है, लेकिन वह खिलौनों की ओर आकर्षित नहीं होता। ऐसा नहीं कि उसे खिलौने पसंद नहीं, बल्कि उसकी परिस्थितियों ने उसे परिपक्व बना दिया है। वह सोचता है कि ये खिलौने टूट जाएँगे। यह सोच अभाव में पले बच्चे की है।
- उपहास और उसकी प्रतिक्रिया: बच्चे हामिद का चिमटे पर उपहास करते हैं। यह बच्चों का स्वाभाविक व्यवहार है। हामिद उनकी बातों को अनदेखा करता है - यह भी उसकी मानसिक परिपक्वता दिखाता है।
- दादी के प्रति लगाव: हामिद का दादी के प्रति जो लगाव है, वह भी बाल मनोविज्ञान के अनुरूप है। अनाथ बच्चे का अपने एकमात्र सहारे से गहरा जुड़ाव होना स्वाभाविक है।
- प्रेमचंद की समझ: प्रेमचंद ने बाल मनोविज्ञान को गहराई से समझा है। उन्होंने हामिद के माध्यम से दिखाया है कि बच्चे भी परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार ढाल लेते हैं। यह कहानी बाल मनोविज्ञान का एक सशक्त दस्तावेज़ है।
प्रश्न 3: 'ईदगाह' कहानी के माध्यम से प्रेमचंद ने गरीबी और अभाव में भी मानवीय मूल्यों की रक्षा पर बल दिया है। स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2021, 2019]
- गरीबी का यथार्थ: कहानी में गरीबी का यथार्थ चित्र है। हामिद के पास नए कपड़े नहीं। दादी मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुटा पाती हैं। लेकिन इस गरीबी में भी मानवीय मूल्य जीवित हैं।
- प्रेम और ममता: अमीना हामिद से असीम प्रेम करती है। वह उसकी हर ज़रूरत पूरी करने की कोशिश करती है। गरीबी में भी उसका प्रेम कम नहीं होता।
- त्याग: हामिद का त्याग सबसे बड़ा मानवीय मूल्य है। वह अपने सुख से बढ़कर दादी के सुख को महत्व देता है। यह त्याग किसी भी बड़े इंसान को शर्मसार कर सकता है।
- संवेदना: हामिद में गहरी संवेदना है। वह दादी की तकलीफ समझता है और उसे दूर करने का प्रयास करता है। यह संवेदना ही मानवीय मूल्यों की जड़ है।
- आत्मीयता: दादी और पोते के रिश्ते में गहरी आत्मीयता है। यह आत्मीयता ही उन्हें गरीबी में भी खुश रखती है।
- संदेश: प्रेमचंद का संदेश स्पष्ट है - गरीबी में भी इंसान अपने मूल्यों को बचाए रख सकता है। भौतिक सुखों से बढ़कर मानवीय रिश्ते और मूल्य हैं। हामिद इसका जीता-जागता प्रमाण है।
प्रश्न 4: 'ईदगाह' कहानी में आए विभिन्न बाल पात्रों की तुलना हामिद से कीजिए। यह तुलना कहानी के संदेश को कैसे गहरा करती है? [CBSE 2020]
- बाल पात्रों का परिचय: महमूद, मोहसिन, नूरे, सम्मी - ये सब हामिद के साथी हैं। इनके पास हामिद से अधिक पैसे हैं, नए कपड़े हैं, खिलौने हैं।
- भौतिकता और हामिद का त्याग: ये बच्चे भौतिक सुखों में लीन हैं। उन्हें खिलौने चाहिए, मिठाइयाँ चाहिए। हामिद इन सबसे अलग है। वह भौतिक सुखों से परे सोचता है।
- उपहास और आत्मविश्वास: ये बच्चे हामिद के तीन पैसे पर हँसते हैं, चिमटे पर मज़ाक उड़ाते हैं। लेकिन हामिद विचलित नहीं होता। उसका आत्मविश्वास इन बच्चों से कहीं अधिक है।
- स्वार्थ और परमार्थ: महमूद और मोहसिन अपने लिए खरीदते हैं। हामिद दादी के लिए। यह स्वार्थ और परमार्थ का अंतर है। प्रेमचंद यह दिखाना चाहते हैं कि सच्चा सुख परमार्थ में है।
- तुलना से संदेश गहराना: इन बाल पात्रों के माध्यम से हामिद का चरित्र और निखर कर आता है। अगर ये पात्र न होते, तो हामिद की विशिष्टता इतनी उभरकर नहीं आती। तुलना से पाठक पर प्रभाव गहरा होता है कि त्याग और संवेदना कितनी बड़ी चीज़ है।
प्रश्न 5: 'ईदगाह' के आधार पर बताइए कि प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' ही नहीं, एक सफल कहानीकार भी क्यों माना जाता है? [CBSE 2019]
- सरल और प्रभावी भाषा: प्रेमचंद की भाषा सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण है। वे कठिन से कठिन विषय को भी सरल भाषा में व्यक्त कर देते हैं। 'ईदगाह' में यह स्पष्ट दिखता है।
- जीवंत पात्र: उनके पात्र जीवंत होते हैं। हामिद, अमीना, महमूद - सब ऐसे लगते हैं मानो हम उन्हें जानते हों। पात्रों के माध्यम से वे समाज का यथार्थ उकेरते हैं।
- मार्मिक कथानक: 'ईदगाह' का कथानक बहुत सीधा-सादा है, लेकिन अत्यंत मार्मिक। एक छोटे से बच्चे के त्याग की कहानी पाठक के हृदय को छू लेती है।
- ग्रामीण परिवेश का चित्रण: प्रेमचंद ग्रामीण परिवेश के अप्रतिम चितेरे हैं। 'ईदगाह' में गाँव का माहौल, ईद का उत्सव, मेले की रौनक - सब कुछ जीवंत हो उठा है।
- सामाजिक संदेश: उनकी हर कहानी में कोई न कोई सामाजिक संदेश होता है। 'ईदगाह' त्याग, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संदेश देती है।
- बाल मनोविज्ञान की समझ: 'ईदगाह' में बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ दिखती है। प्रेमचंद बच्चों के मन की बात जानते थे। यही उन्हें एक सफल कहानीकार बनाता है।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न
- हामिद का चरित्र-चित्रण - 2023, 2022, 2021
- चिमटा खरीदने का कारण - 2023, 2022
- अमीना का चरित्र - 2022, 2020
- त्याग और संवेदना का भाव - 2023, 2021
- ग्रामीण जीवन का चित्रण - 2021, 2019
- बाल मनोविज्ञान - 2022, 2020
📈 बोर्ड ट्रेंड
पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कहानी से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में हामिद के चरित्र, चिमटा खरीदने के कारण और दादी की भावुकता पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में त्याग और संवेदना, बाल मनोविज्ञान और प्रेमचंद की कहानी कला पर प्रश्न आते हैं। यह कहानी परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक - प्रेमचंद (धनपत राय श्रीवास्तव)
- पुस्तक - अंतरा भाग 1 (गद्य खंड)
- प्रकाशन वर्ष - 1933 (लगभग)
- केंद्रीय पात्र - हामिद (चार-पाँच वर्ष का अनाथ बालक)
- अन्य पात्र - अमीना (दादी), महमूद, मोहसिन, नूरे, सम्मी
- मुख्य घटना - हामिद द्वारा दादी के लिए चिमटा खरीदना
- कहानी का मूल भाव - त्याग और संवेदना
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"हामिद की आँखों में त्याग था, मन में संवेदना थी।"
"तीन पैसे में चिमटा - दादी के हाथ नहीं जलेंगे।"
"बच्चों के उपहास के बीच हामिद की दृढ़ता।"
"अमीना के आँसू - हामिद के प्रेम का प्रमाण।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)
एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं।
उदाहरण: प्रश्न - हामिद ने क्या खरीदा? उत्तर - हामिद ने दादी के लिए चिमटा खरीदा।
📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)
परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को उदाहरण सहित समझाएँ। कहानी के संदर्भ में उत्तर लिखें।
उदाहरण: प्रश्न - हामिद के चरित्र की विशेषताएँ बताइए। उत्तर - परिचय में कहें कि हामिद कहानी का केंद्रीय पात्र है। फिर त्याग, संवेदना, परिपक्वता, आत्मविश्वास, दादी के प्रति प्रेम - इन बिंदुओं पर उदाहरण सहित व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि हामिद हिंदी साहित्य का अमर पात्र है।
📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)
चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना (पात्र का परिचय) + मुख्य भाग (चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित) + कहानी में भूमिका + निष्कर्ष। हामिद का चरित्र-चित्रण इसी प्रकार करें।
विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें) + निष्कर्ष। जैसे त्याग और संवेदना पर प्रश्न - पहले त्याग और संवेदना का अर्थ, फिर कहानी में इनके उदाहरण, फिर हामिद के चरित्र में इनकी अभिव्यक्ति, अंत में निष्कर्ष।
लेखक की कला पर प्रश्न के लिए: लेखक का संक्षिप्त परिचय + उनकी लेखन शैली की विशेषताएँ + कहानी में इन विशेषताओं के उदाहरण + निष्कर्ष।
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें:
- हिंदी व्याकरण नोट्स, नियम और अभ्यास (कक्षा 3 से 12, सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड)– हिंदी ग्रामर हब
- हिंदी साहित्य पाठ, सारांश और व्याख्या – हिंदी लिटरेचर हब (कक्षा 9 से 12 की सभी पुस्तकें)
- English Literature Summaries, Explanations and Notes – इंग्लिश लिटरेचर हब (क्लास 9 तो 12 all books covered)
- English Grammar Hub, Class 3 to 12 Complete CBSE & UP Board Syllabus Covered – इंग्लिश ग्रामर हब
- सभी विषयों की प्रैक्टिस शीट और अभ्यास प्रश्न – मास्टर वर्कशीट हब