कक्षा 11 अध्याय 8 – भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? – भारतेंदु हरिश्चंद्र (अंतरा भाग 1 – गद्य) | GPN
📘 पाठ – भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? | कक्षा 11 हिंदी (अंतरा भाग 1, गद्य खंड) | GPN
📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतरा भाग 1 (गद्य खंड) | ✍️ लेखक: भारतेंदु हरिश्चंद्र | 📝 प्रकार: निबंध | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: बहुत उच्च]
📌 अनुक्रमणिका
- 1. परिचय
- 2. सारांश
- 3. विस्तृत व्याख्या
- 4. पात्र चित्रण
- 5. शब्दार्थ
- 6. लघु प्रश्न (5)
- 7. दीर्घ प्रश्न (5)
- 8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
- 9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
- 10. हब लिंक
1. परिचय
📝 लेखक परिचय - भारतेंदु हरिश्चंद्र
जन्म: 9 सितंबर 1850, वाराणसी
मृत्यु: 6 जनवरी 1885
उपाधि: भारतेंदु (भारत का चाँद)
प्रमुख रचनाएँ: अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा, नीलदेवी, चन्द्रावली, सती प्रताप, प्रेम जोगिनी, वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति
भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है। उन्होंने न केवल साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन किया, बल्कि पत्रकारिता, रंगमंच और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मात्र 34 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने हिंदी साहित्य को ऐसी अमूल्य निधि दी कि उनका नाम सदा अमर रहेगा।
'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' उनका एक महत्वपूर्ण निबंध है। इसमें उन्होंने अपने समय के भारत की दयनीय स्थिति का चित्रण किया है और उन्नति के उपाय सुझाए हैं। यह निबंध केवल एक लेख नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना को जगाने वाला एक दस्तावेज है।
📖 निबंध की पृष्ठभूमि
उन्नीसवीं सदी का भारत अंग्रेजों के शासन में था। देश की हालत बहुत खराब थी। एक तरफ अंग्रेजों का शोषण, दूसरी तरफ सामाजिक बुराइयाँ - जाति-पाति, छुआछूत, बाल-विवाह, सती-प्रथा। देश गरीबी और अशिक्षा के गर्त में डूबा हुआ था। ऐसे समय में भारतेंदु जी ने यह सवाल उठाया - भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?
यह निबंध उन्होंने 1884 में लिखा था। इसमें उन्होंने देश की समस्याओं की गहरी पड़ताल की है और उनके समाधान सुझाए हैं। वे चाहते थे कि भारत एक बार फिर से विश्वगुरु बने। उनकी दृष्टि में उन्नति का अर्थ केवल आर्थिक उन्नति नहीं था, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, नैतिक और बौद्धिक उन्नति भी थी।
🎯 अध्याय का महत्व
कक्षा 11 की परीक्षा में यह निबंध अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतेंदु जी के विचार, उनकी राष्ट्रीय चेतना, उनके द्वारा सुझाए गए उपाय - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। निबंध की भाषा शैली, उसमें प्रयुक्त व्यंग्य, उनकी दूरदर्शिता भी परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है। यह निबंध आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।
2. सरल सारांश
भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह निबंध भारत की दुर्दशा का वर्णन करते हुए उसके उन्नति के उपाय सुझाता है। वे कहते हैं कि हमारा देश कई कारणों से पिछड़ गया है। सबसे बड़ा कारण है - पराधीनता। अंग्रेज हम पर राज करते हैं, हमारा शोषण करते हैं। दूसरा कारण है - सामाजिक बुराइयाँ। जाति-पाति, छुआछूत, ऊँच-नीच का भेदभाव समाज को कमजोर कर रहा है। तीसरा कारण है - अशिक्षा। लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए अपने अधिकारों को नहीं जानते।
भारतेंदु जी उन्नति के कई उपाय सुझाते हैं। सबसे पहले - शिक्षा का प्रचार। वे कहते हैं कि जब तक देश का हर व्यक्ति पढ़ा-लिखा नहीं होगा, तब तक उन्नति नहीं हो सकती। शिक्षा से लोग जागरूक होंगे, अपने अधिकारों को समझेंगे, व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाएँगे।
दूसरा उपाय - स्वदेशी अपनाना। वे कहते हैं कि हमें विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए और देशी वस्तुओं को अपनाना चाहिए। इससे देश का आर्थिक विकास होगा, रोजगार बढ़ेगा, गरीबी कम होगी।
तीसरा उपाय - सामाजिक समानता। वे कहते हैं कि जाति-पाति का भेदभाव मिटाना होगा। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए। छुआछूत जैसी कुप्रथा को समाप्त करना होगा।
चौथा उपाय - संगठन। वे कहते हैं कि हमें एकजुट होना होगा। बिखरे रहेंगे, तो कोई हमारी बात नहीं सुनेगा। संगठित होकर ही हम अंग्रेजों के सामने अपनी मांग रख सकते हैं।
पाँचवाँ उपाय - अपनी संस्कृति और भाषा को अपनाना। वे कहते हैं कि हमें अपनी भाषा हिंदी को अपनाना चाहिए, अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। अंग्रेजी की अंधी नकल नहीं करनी चाहिए।
अंत में वे कहते हैं कि उन्नति के ये सारे उपाय तभी सफल होंगे जब हममें देशभक्ति की भावना होगी, जब हम देश के लिए कुछ करने की इच्छा रखेंगे।
3. विस्तृत व्याख्या
📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण
- पराधीनता - सबसे बड़ी बाधा: भारतेंदु जी के अनुसार देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा पराधीनता है। अंग्रेज हम पर राज करते हैं, हमारा शोषण करते हैं। उनकी नीतियाँ देशहित में नहीं, अपने हित में होती हैं। इसलिए सबसे पहले स्वतंत्रता आवश्यक है।
- शिक्षा का महत्व: वे शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। शिक्षा के बिना लोग जागरूक नहीं हो सकते, अपने अधिकारों को नहीं जान सकते। इसलिए देश में शिक्षा का प्रचार होना चाहिए। वे विशेष रूप से स्त्री-शिक्षा पर भी जोर देते हैं।
- स्वदेशी का आह्वान: भारतेंदु जी स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हैं। वे कहते हैं कि हम विदेशी वस्तुओं का प्रयोग करके अपने देश का नुकसान कर रहे हैं। देशी वस्तुओं को अपनाने से देश का आर्थिक विकास होगा और रोजगार बढ़ेगा।
- सामाजिक समानता की आवश्यकता: वे जाति-पाति के भेदभाव को देश की उन्नति में बाधा मानते हैं। जब तक समाज में ऊँच-नीच का भेद रहेगा, तब तक देश एकजुट नहीं हो सकता। इसलिए सामाजिक समानता आवश्यक है।
- संगठन की शक्ति: वे कहते हैं कि बिखरे हुए लोग कुछ नहीं कर सकते। संगठित होकर ही हम अपनी बात रख सकते हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। संगठन में ही शक्ति है।
- सांस्कृतिक गौरव: भारतेंदु जी चाहते हैं कि हम अपनी संस्कृति और भाषा पर गर्व करें। अंग्रेजी की अंधी नकल न करें। हिंदी को अपनाएँ, अपने रीति-रिवाजों को सहेजें।
- देशभक्ति की भावना: उन्नति के सभी उपाय तभी सफल होंगे जब हममें देशभक्ति की भावना होगी। जब हम देश के लिए कुछ करने की इच्छा रखेंगे। देशभक्ति के बिना सब बेकार है।
📌 विषय / Theme
इस निबंध के कई विषय हैं। पहला विषय है - राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता की आवश्यकता। दूसरा विषय है - शिक्षा का महत्व। तीसरा विषय है - आर्थिक स्वावलंबन (स्वदेशी)। चौथा विषय है - सामाजिक समानता। पाँचवाँ विषय है - संगठन की शक्ति। छठा विषय है - सांस्कृतिक गौरव।
📌 सामाजिक संदेश
भारतेंदु जी समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्नति के लिए हमें सबसे पहले जागरूक होना होगा। हमें अपनी समस्याओं को पहचानना होगा और उनके समाधान के लिए प्रयास करने होंगे। शिक्षा, स्वदेशी, सामाजिक समानता, संगठन और सांस्कृतिक गौरव - ये पाँच स्तंभ हैं जिन पर देश की उन्नति टिकी है।
📌 नैतिक शिक्षा
- देशभक्त बनो: अपने देश से प्रेम करो, उसके लिए कुछ करने की इच्छा रखो।
- शिक्षित बनो: शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। पढ़ो और आगे बढ़ो।
- स्वदेशी अपनाओ: देशी वस्तुओं का प्रयोग करो, देश के विकास में योगदान दो।
- भेदभाव मिटाओ: जाति, धर्म, लिंग के आधार पर भेदभाव मत करो। सबको समान समझो।
- संगठित रहो: एकजुट रहो, संगठित रहो। संगठन में ही शक्ति है।
- अपनी संस्कृति पर गर्व करो: अपनी भाषा, अपने रीति-रिवाजों को अपनाओ, उन पर गर्व करो।
4. पात्र चित्रण
इस निबंध में कोई पात्र नहीं हैं। यह एक विचारात्मक निबंध है जिसमें लेखक अपने विचार रखता है। इसलिए पात्र चित्रण का कोई प्रश्न नहीं बनता।
नोट: चूँकि यह एक निबंध है, इसमें कोई पात्र नहीं हैं। इसलिए पात्र चित्रण का कोई प्रश्न परीक्षा में नहीं पूछा जाता। लेकिन छात्रों को लेखक के विचारों और उनके दृष्टिकोण को समझना चाहिए।
5. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| उन्नति | प्रगति, विकास, progress | देश की उन्नति के लिए सबको प्रयास करना चाहिए। |
| पराधीनता | गुलामी, dependence | पराधीनता में देश का विकास नहीं हो सकता। |
| स्वदेशी | अपने देश की वस्तुएँ, indigenous | स्वदेशी अपनाने से देश का विकास होता है। |
| बहिष्कार | त्यागना, boycott | विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए। |
| सामाजिक समानता | social equality | सामाजिक समानता के बिना देश आगे नहीं बढ़ सकता। |
| संगठन | organization | संगठन में ही शक्ति है। |
| जाति-पाति | caste system | जाति-पाति का भेदभाव मिटाना होगा। |
| छुआछूत | untouchability | छुआछूत एक अभिशाप है। |
| सांस्कृतिक गौरव | cultural pride | हमें अपने सांस्कृतिक गौरव को पहचानना चाहिए। |
| देशभक्ति | patriotism | देशभक्ति के बिना सब बेकार है। |
| शोषण | exploitation | अंग्रेज हमारा शोषण कर रहे थे। |
| राष्ट्रीय चेतना | national consciousness | राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए लिखा। |
| स्वावलंबन | self-reliance | आर्थिक स्वावलंबन आवश्यक है। |
| नकल | imitation | अंग्रेजों की अंधी नकल नहीं करनी चाहिए। |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)
प्रश्न 1: भारतेंदु हरिश्चंद्र के अनुसार देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा क्या है और क्यों? [CBSE 2023]
भारतेंदु जी के अनुसार देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा पराधीनता (गुलामी) है। जब तक देश परायों के अधीन रहेगा, तब तक उसका विकास नहीं हो सकता। अंग्रेज हम पर राज करते थे, हमारा शोषण करते थे। उनकी नीतियाँ देशहित में नहीं, अपने हित में होती थीं। वे हमारे संसाधनों को लूटकर अपने देश ले जाते थे। इसलिए सबसे पहले स्वतंत्रता आवश्यक है। पराधीनता में देश की उन्नति संभव नहीं।
प्रश्न 2: भारतेंदु जी ने शिक्षा को देश की उन्नति के लिए क्यों आवश्यक बताया है? [CBSE 2022]
भारतेंदु जी शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। उनके अनुसार शिक्षा के बिना लोग जागरूक नहीं हो सकते, अपने अधिकारों को नहीं जान सकते। शिक्षा से लोगों में चेतना आती है, वे व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने में सक्षम होते हैं। शिक्षित समाज ही उन्नति कर सकता है। वे विशेष रूप से स्त्री-शिक्षा पर भी जोर देते हैं क्योंकि स्त्रियाँ पढ़ेंगी तो परिवार पढ़ेगा, परिवार पढ़ेगा तो देश पढ़ेगा।
प्रश्न 3: 'स्वदेशी' से भारतेंदु जी का क्या तात्पर्य था? [CBSE 2021]
भारतेंदु जी के अनुसार स्वदेशी का अर्थ है - अपने देश की वस्तुओं को अपनाना, विदेशी वस्तुओं का त्याग करना। वे कहते थे कि हम विदेशी वस्तुओं का प्रयोग करके अपने देश का नुकसान कर रहे हैं। हमारा पैसा विदेश चला जाता है, हमारे देश के कारीगर बेरोजगार हो जाते हैं। स्वदेशी अपनाने से देश का आर्थिक विकास होगा, रोजगार बढ़ेगा, गरीबी कम होगी। इसलिए हमें स्वदेशी अपनाना चाहिए।
प्रश्न 4: भारतेंदु जी ने सामाजिक समानता पर क्यों जोर दिया? [CBSE 2023, 2020]
भारतेंदु जी सामाजिक समानता को देश की उन्नति के लिए आवश्यक मानते थे। उनके समय में जाति-पाति, छुआछूत, ऊँच-नीच का भेदभाव बहुत था। यह भेदभाव समाज को कमजोर कर रहा था। जब तक समाज में यह भेदभाव रहेगा, तब तक देश एकजुट नहीं हो सकता। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। तभी देश का सर्वांगीण विकास हो सकता है।
प्रश्न 5: भारतेंदु जी ने देश की उन्नति के लिए संगठन को क्यों आवश्यक बताया? [CBSE 2021]
भारतेंदु जी के अनुसार संगठन में ही शक्ति है। वे कहते हैं कि बिखरे हुए लोग कुछ नहीं कर सकते। अगर हम अलग-अलग रहेंगे, तो कोई हमारी बात नहीं सुनेगा। संगठित होकर ही हम अपनी बात रख सकते हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। संगठन से ही आवाज बुलंद होती है। इसलिए देश की उन्नति के लिए सभी को एकजुट होना होगा, संगठित होना होगा।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)
प्रश्न 1: 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' निबंध के आधार पर भारतेंदु जी के उन्नति के उपायों का विस्तार से वर्णन कीजिए। [CBSE 2023, 2021]
- शिक्षा का प्रचार: भारतेंदु जी शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानते थे। उनके अनुसार देश के हर व्यक्ति को शिक्षित होना चाहिए। शिक्षा से लोग जागरूक होंगे, अपने अधिकारों को समझेंगे, व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाएँगे। वे विशेष रूप से स्त्री-शिक्षा पर भी जोर देते हैं।
- स्वदेशी अपनाना: वे विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर देते हैं। इससे देश का आर्थिक विकास होगा, रोजगार बढ़ेगा, गरीबी कम होगी और देश आत्मनिर्भर बनेगा।
- सामाजिक समानता: वे जाति-पाति, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने पर जोर देते हैं। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- संगठन की शक्ति: वे कहते हैं कि सभी को एकजुट होना होगा, संगठित होना होगा। बिखरे रहेंगे तो कोई नहीं सुनेगा। संगठित होकर ही हम अपनी बात रख सकते हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं।
- सांस्कृतिक गौरव: वे अपनी भाषा हिंदी को अपनाने, अपनी संस्कृति पर गर्व करने की बात करते हैं। अंग्रेजी की अंधी नकल नहीं करनी चाहिए।
- देशभक्ति की भावना: उन्नति के सभी उपाय तभी सफल होंगे जब हममें देशभक्ति की भावना होगी, जब हम देश के लिए कुछ करने की इच्छा रखेंगे।
प्रश्न 2: भारतेंदु हरिश्चंद्र के इस निबंध को राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला निबंध क्यों कहा जाता है? [CBSE 2022]
- समस्याओं की पहचान: इस निबंध में भारतेंदु जी ने देश की समस्याओं की गहरी पड़ताल की है - पराधीनता, अशिक्षा, सामाजिक बुराइयाँ, आर्थिक शोषण। यह पहचान ही राष्ट्रीय चेतना की पहली सीढ़ी है।
- समाधान सुझाना: उन्होंने केवल समस्याएँ नहीं गिनाईं, बल्कि समाधान भी सुझाए - शिक्षा, स्वदेशी, सामाजिक समानता, संगठन। यह एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है।
- आत्मसम्मान का भाव: वे लोगों में आत्मसम्मान का भाव जगाते हैं। वे कहते हैं कि हम अपनी संस्कृति पर गर्व करें, अपनी भाषा अपनाएँ, अंग्रेजों की नकल न करें।
- एकजुटता का आह्वान: वे लोगों को एकजुट होने, संगठित होने का आह्वान करते हैं। यह राष्ट्रीय चेतना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
- स्वतंत्रता की आकांक्षा: हालाँकि उन्होंने सीधे तौर पर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का आह्वान नहीं किया, लेकिन उनकी पूरी बातों में स्वतंत्रता की आकांक्षा छिपी है।
- प्रेरणादायक शैली: उनकी लेखनी में जोश है, जुनून है, देशभक्ति है। वे पाठक को झकझोरते हैं, उसे सोचने पर मजबूर करते हैं। यही राष्ट्रीय चेतना जगाने का सबसे कारगर तरीका है।
प्रश्न 3: भारतेंदु जी के इस निबंध को आज के संदर्भ में कितना प्रासंगिक मानते हैं? [CBSE 2021]
- शिक्षा का महत्व आज भी: आज भी शिक्षा का महत्व कम नहीं हुआ है। साक्षरता बढ़ी है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी आज भी है। भारतेंदु जी के शिक्षा संबंधी विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
- स्वदेशी की अवधारणा: आज 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' की जो बात हो रही है, वह भारतेंदु जी के स्वदेशी के विचार का ही विस्तार है।
- सामाजिक समानता का संघर्ष: आज भी जाति-पाति, छुआछूत पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सामाजिक समानता का संघर्ष आज भी जारी है। इसलिए उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
- संगठन की आवश्यकता: आज भी संगठन में ही शक्ति है। चाहे राजनीति हो, सामाजिक आंदोलन हो या व्यवसाय - संगठित होकर ही सफलता मिलती है।
- सांस्कृतिक गौरव: आज जब वैश्वीकरण के दौर में अपनी संस्कृति के खोने का खतरा है, भारतेंदु जी का सांस्कृतिक गौरव पर जोर और भी प्रासंगिक हो जाता है।
- देशभक्ति की भावना: आज भी देशभक्ति की भावना उतनी ही आवश्यक है जितनी उस समय थी। देश के प्रति प्रेम और समर्पण के बिना देश का विकास संभव नहीं।
प्रश्न 4: 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' निबंध की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2020]
- प्रश्नात्मक शैली: निबंध का शीर्षक ही प्रश्नात्मक है - 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' यह प्रश्न पाठक के मन में जिज्ञासा पैदा करता है और उसे सोचने पर मजबूर करता है।
- सरल और सहज भाषा: भारतेंदु जी की भाषा सरल और सहज है। वे कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं करते। उनकी भाषा में प्रवाह है, जो पाठक को बाँधे रखता है।
- व्यंग्य और विनोद: वे व्यंग्य और विनोद का भी प्रयोग करते हैं। समाज की बुराइयों पर वे ऐसा व्यंग्य करते हैं कि हँसी भी आती है और सोचने पर भी मजबूर होना पड़ता है।
- उद्बोधन शैली: उनकी शैली में उद्बोधन है। वे सीधे पाठक से बात करते हैं, उससे प्रश्न पूछते हैं, उसे जवाब देने को कहते हैं।
- भावनात्मक अपील: वे केवल तर्क नहीं देते, बल्कि भावनात्मक अपील भी करते हैं। वे पाठक के दिल को छूते हैं, उसे देशभक्ति के लिए प्रेरित करते हैं।
- संस्कृतनिष्ठ शब्दावली: उनकी भाषा में संस्कृत के शब्दों का प्रयोग है, जो गंभीरता और प्रभावोत्पादकता लाता है।
प्रश्न 5: भारतेंदु हरिश्चंद्र के इस निबंध और प्रेमचंद की 'ईदगाह' कहानी में आए सामाजिक यथार्थ की तुलना कीजिए। [CBSE 2019]
- गरीबी का चित्रण: दोनों रचनाओं में गरीबी का यथार्थ चित्रण है। 'ईदगाह' में हामिद की गरीबी दिखाई गई है तो इस निबंध में भारतेंदु जी ने देश की आर्थिक दुर्दशा का वर्णन किया है।
- सामाजिक विषमता: 'ईदगाह' में गरीब और अमीर का अंतर दिखता है। इस निबंध में जाति-पाति, ऊँच-नीच का भेदभाव दिखता है। दोनों ही सामाजिक विषमता के उदाहरण हैं।
- शिक्षा का अभाव: 'ईदगाह' के बच्चे पढ़ने जाते हैं, लेकिन हामिद की स्थिति स्पष्ट नहीं। भारतेंदु जी सीधे तौर पर अशिक्षा को देश की समस्या बताते हैं।
- समाधान का दृष्टिकोण: प्रेमचंद कहानी के माध्यम से त्याग और संवेदना का संदेश देते हैं। भारतेंदु जी सीधे तौर पर उपाय सुझाते हैं - शिक्षा, स्वदेशी, संगठन, सामाजिक समानता।
- दोनों के उद्देश्य: दोनों ही रचनाएँ समाज सुधार के उद्देश्य से लिखी गई हैं। प्रेमचंद व्यक्ति के माध्यम से समाज बदलना चाहते हैं, भारतेंदु जी राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से।
- निष्कर्ष: दोनों ही रचनाएँ अपने-अपने ढंग से सामाजिक यथार्थ को उजागर करती हैं। दोनों ही पाठक को सोचने पर मजबूर करती हैं।
8. परीक्षा दृष्टि बिंदु
📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न
- उन्नति में बाधाएँ - 2023, 2022
- शिक्षा का महत्व - 2023, 2021
- स्वदेशी की अवधारणा - 2022, 2020
- सामाजिक समानता - 2023, 2021
- संगठन की आवश्यकता - 2022, 2021
- निबंध की प्रासंगिकता - 2021, 2020, 2019
- भाषा-शैली की विशेषताएँ - 2020, 2019
📈 बोर्ड ट्रेंड
पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस निबंध से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में उन्नति में बाधाएँ, शिक्षा का महत्व, स्वदेशी और सामाजिक समानता पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में उन्नति के उपाय, राष्ट्रीय चेतना, प्रासंगिकता और भाषा-शैली पर प्रश्न आते हैं।
💡 याद रखने योग्य तथ्य
- लेखक - भारतेंदु हरिश्चंद्र (आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक)
- पुस्तक - अंतरा भाग 1 (गद्य खंड)
- विधा - निबंध
- रचना काल - 1884 (लगभग)
- मुख्य विषय - देश की उन्नति के उपाय
- प्रमुख बिंदु - शिक्षा, स्वदेशी, सामाजिक समानता, संगठन, सांस्कृतिक गौरव, देशभक्ति
📌 महत्वपूर्ण उद्धरण
"जब तक देश पराधीन है, तब तक उन्नति संभव नहीं।"
"शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है।"
"स्वदेशी अपनाओ, विदेशी त्यागो।"
"संगठन में ही शक्ति है।"
"अपनी संस्कृति पर गर्व करो।"
9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन
📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)
एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - भारतेंदु जी के अनुसार उन्नति में सबसे बड़ी बाधा क्या है? उत्तर - पराधीनता।
📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)
परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को निबंध के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - भारतेंदु जी ने शिक्षा को देश की उन्नति के लिए क्यों आवश्यक बताया? उत्तर - परिचय में बताएँ कि शिक्षा को वे सबसे बड़ा हथियार मानते थे। फिर जागरूकता, अधिकारों का ज्ञान, स्त्री-शिक्षा, आत्मनिर्भरता - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि शिक्षा के बिना उन्नति संभव नहीं।
📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)
विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को निबंध के प्रसंगों से स्पष्ट करें) + निष्कर्ष। जैसे उन्नति के उपायों पर प्रश्न - पहले निबंध का परिचय, फिर शिक्षा, स्वदेशी, सामाजिक समानता, संगठन, सांस्कृतिक गौरव, देशभक्ति - इन बिंदुओं पर विस्तार से लिखें, अंत में निष्कर्ष।
प्रासंगिकता पर प्रश्न के लिए: निबंध का परिचय + उसके मुख्य विचार + आज के संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता + निष्कर्ष।
भाषा-शैली पर प्रश्न के लिए: लेखक का परिचय + उनकी शैली की विशेषताएँ + निबंध में इन विशेषताओं के उदाहरण + निष्कर्ष।
10. हब लिंक
संबंधित अध्ययन सामग्री के लिए नीचे दिए गए विषय हब देखें:
- हिंदी व्याकरण नोट्स, नियम और अभ्यास (कक्षा 3 से 12, सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड)– हिंदी ग्रामर हब
- हिंदी साहित्य पाठ, सारांश और व्याख्या – हिंदी लिटरेचर हब (कक्षा 9 से 12 की सभी पुस्तकें)
- English Literature Summaries, Explanations and Notes – इंग्लिश लिटरेचर हब (क्लास 9 तो 12 all books covered)
- English Grammar Hub, Class 3 to 12 Complete CBSE & UP Board Syllabus Covered – इंग्लिश ग्रामर हब
- सभी विषयों की प्रैक्टिस शीट और अभ्यास प्रश्न – मास्टर वर्कशीट हब