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कक्षा 11 अध्याय 13 – बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन (आरोह – पद्य) | GPN

📘 पाठ – बादल को घिरते देखा है | कक्षा 11 हिंदी (आरोह) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: आरोह भाग 1 | ✍️ कवि: नागार्जुन | 📝 प्रकार: कविता (जनवादी कविता) | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 कवि परिचय - नागार्जुन

जन्म: 30 जून 1911, सतलखा (मधुबनी, बिहार)

मृत्यु: 5 नवंबर 1998

असली नाम: वैद्यनाथ मिश्र

प्रमुख रचनाएँ: युगधारा, प्यासी आँखें, पुरानी वाणी, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, भस्मांकुर, पत्रहीन नग्न गाछ, आदि

सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार

नागार्जुन हिंदी साहित्य के जनवादी कवियों में अग्रणी हैं। वे मैथिली, संस्कृत, बांग्ला और हिंदी - सभी भाषाओं में समान अधिकार रखते थे। उनकी कविताओं में ग्रामीण जीवन, शोषित वर्ग की पीड़ा, सामाजिक विसंगतियाँ और क्रांति का स्वर मुखर रूप से सुनाई देता है। उनकी भाषा सरल, सहज और जन-जन की भाषा है। वे किसी भी विषय पर बेबाकी से लिखते थे। 'बादल को घिरते देखा है' उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जिसमें उन्होंने बादलों के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन का संदेश दिया है।

📖 कविता पृष्ठभूमि

'बादल को घिरते देखा है' नागार्जुन की एक प्रसिद्ध कविता है। इस कविता में बादल केवल प्रकृति का एक रूप नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है - परिवर्तन का प्रतीक, क्रांति का प्रतीक, नई चेतना का प्रतीक।

कवि कहते हैं कि उन्होंने बादल को घिरते देखा है। यह घिरना सिर्फ आकाश में नहीं है, बल्कि समाज में भी है। जैसे बादल घिरते हैं और फिर बरसते हैं, वैसे ही समाज में भी असंतोष घिरता है और फिर क्रांति के रूप में बरसता है।

यह कविता उस समय की पृष्ठभूमि में लिखी गई जब देश में सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल थी। कवि ने बादल के माध्यम से उस परिवर्तन की आशा व्यक्त की है जो समाज में आना चाहिए।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की बोर्ड परीक्षा में यह कविता अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष इससे 5-8 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। नागार्जुन के जनवादी दृष्टिकोण, बादल के प्रतीकात्मक महत्व, कविता के सामाजिक संदेश, भाषा-शैली आदि पर प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि नागार्जुन ने बादल को किसका प्रतीक बनाया है? कविता का मुख्य संदेश क्या है? 'बादल को घिरते देखा है' का क्या आशय है?

2. सरल सारांश

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में बादल एक प्रतीक है - परिवर्तन और क्रांति का प्रतीक।

कवि कहते हैं कि उन्होंने बादल को घिरते देखा है। यह घिरना सिर्फ आकाश में नहीं है, बल्कि समाज में भी है। जैसे बादल घिरते हैं, वैसे ही समाज में असंतोष घिरता है।

बादल जब घिरते हैं, तो अंधेरा छा जाता है। लेकिन यह अंधेरा स्थायी नहीं है। इसके बाद बारिश आती है, जो धरती को हरा-भरा कर देती है। इसी तरह, समाज में जब असंतोष घिरता है, तो वह क्रांति के रूप में बरसता है और समाज को नया जीवन देता है।

कवि ने बादल के घिरने को देखा है - यानी उन्होंने समाज में हो रहे परिवर्तनों को महसूस किया है। उन्हें विश्वास है कि यह बादल बरसेगा और समाज में एक नए युग की शुरुआत होगी।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 कविता की पंक्तियाँ और व्याख्या

पंक्ति 1: बादल को घिरते देखा है

कवि कहते हैं कि उन्होंने बादल को घिरते देखा है। यहाँ बादल केवल प्राकृतिक बादल नहीं है, बल्कि यह क्रांति और परिवर्तन का प्रतीक है। 'घिरते देखा है' का अर्थ है - उन्होंने समाज में हो रहे परिवर्तनों को महसूस किया है।

पंक्ति 2: बादल को घिरते देखा है

इस पंक्ति की पुनरावृत्ति से कवि अपनी बात पर जोर देते हैं। वे बार-बार कहते हैं कि उन्होंने बादल को घिरते देखा है - यानी वे इस परिवर्तन के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं।

पंक्ति 3: बूँदों को सरसराते देखा है

बादल घिरने के बाद बूँदें सरसराती हैं। यह बारिश की शुरुआत है। इसी तरह, क्रांति की शुरुआत छोटे-छोटे बदलावों से होती है।

पंक्ति 4: पत्तों को कँपकँपाते देखा है

बारिश की पहली बूँदें जब पत्तों पर गिरती हैं, तो पत्ते काँपते हैं। यह नए बदलाव के प्रति सहज प्रतिक्रिया है। समाज में भी जब नए विचार आते हैं, तो लोग पहले सहमते हैं, फिर स्वीकार करते हैं।

पंक्ति 5: बादल को घिरते देखा है

फिर से पुनरावृत्ति - कवि अपनी बात पर जोर देते हैं कि उन्होंने यह सब देखा है, अनुभव किया है।

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • बादल - क्रांति का प्रतीक: इस कविता में बादल क्रांति और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। जैसे बादल घिरते हैं और बरसते हैं, वैसे ही समाज में असंतोष घिरता है और क्रांति के रूप में बरसता है।
  • परिवर्तन की अनिवार्यता: कवि के अनुसार, परिवर्तन अनिवार्य है। जैसे बादल घिरते हैं, वैसे ही समाज में भी परिवर्तन आता है। इसे रोका नहीं जा सकता।
  • प्रकृति और समाज का साम्य: कवि ने प्रकृति और समाज के बीच एक साम्य स्थापित किया है। जो प्रक्रियाएँ प्रकृति में होती हैं, वही समाज में भी होती हैं।
  • आशा और विश्वास: इस कविता में आशा और विश्वास का स्वर है। कवि को विश्वास है कि बादल बरसेगा और समाज में नया जीवन आएगा।
  • अनुभव की प्रामाणिकता: 'देखा है' की पुनरावृत्ति से कवि अपने अनुभव की प्रामाणिकता पर जोर देते हैं। वे किताबी ज्ञान की बात नहीं कर रहे, बल्कि अपने अनुभव की बात कर रहे हैं।

📌 विषय / Theme

इस कविता का मुख्य विषय सामाजिक परिवर्तन और क्रांति की अनिवार्यता है। यह दर्शाती है कि जिस प्रकार बादल घिरना और बरसना प्रकृति का नियम है, उसी प्रकार समाज में परिवर्तन और क्रांति भी अपरिहार्य है।

📌 सामाजिक संदेश

नागार्जुन इस कविता के माध्यम से समाज को यह संदेश देते हैं कि परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए। जैसे बादल घिरने के बाद बारिश होती है और धरती हरी-भरी हो जाती है, वैसे ही सामाजिक परिवर्तन के बाद समाज में नई चेतना आती है। यह कविता शोषित वर्ग को संघर्ष का संदेश देती है।

📌 नैतिक शिक्षा

  • परिवर्तन को पहचानो: समाज में हो रहे परिवर्तनों को पहचानो और उनका स्वागत करो।
  • आशा मत छोड़ो: चाहे कितना भी अंधेरा हो, आशा मत छोड़ो। बादल जरूर बरसेगा।
  • अनुभव से सीखो: किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है अनुभव का ज्ञान।
  • संघर्ष करो: परिवर्तन के लिए संघर्ष करना जरूरी है।

4. काव्य सौंदर्य

📌 भाषा-शैली

  • सरल और सहज भाषा: नागार्जुन की भाषा बहुत सरल और सहज है। वे जन-साधारण की भाषा में कविता रचते हैं। 'घिरते', 'सरसराते', 'कँपकँपाते' जैसे शब्द सरल और प्रभावी हैं।
  • पुनरावृत्ति शैली: इस कविता में 'बादल को घिरते देखा है' की पुनरावृत्ति हुई है। यह पुनरावृत्ति कवि के संदेश को और प्रभावी बनाती है।
  • प्रवाहपूर्णता: उनकी भाषा में प्रवाह है। कविता पढ़ते समय एक लय का अनुभव होता है।

📌 अलंकार

  • अनुप्रास अलंकार: 'बादल को', 'बूँदों को', 'पत्तों को' में अनुप्रास अलंकार है। 'सरसराते', 'कँपकँपाते' में ध्वन्यात्मक अनुप्रास है।
  • पुनरुक्ति प्रकाश: 'बादल को घिरते देखा है' की बार-बार पुनरावृत्ति से पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  • रूपक अलंकार: बादल को क्रांति के रूप में देखना एक प्रकार का रूपक अलंकार है।

📌 छंद

यह कविता मुक्त छंद में रचित है। इसमें किसी नियमबद्ध छंद का पालन नहीं किया गया है। यह नागार्जुन की जनवादी कविता की विशेषता है - वे छंद के बंधन में नहीं बँधते।

📌 रस

इस कविता में 'वीर रस' और 'अद्भुत रस' का मिश्रण है। परिवर्तन और क्रांति की बात से वीर रस का संचार होता है। बादल के घिरने के दृश्य में अद्भुत रस है।

📌 काव्यगत विशेषताएँ

  • जनवादी दृष्टिकोण: नागार्जुन की कविता में जनवादी दृष्टिकोण स्पष्ट दिखता है। वे आम जनता की बात करते हैं।
  • प्रतीक योजना: इस कविता की सबसे बड़ी काव्यगत विशेषता है इसकी प्रतीक योजना। बादल, बूँदें, पत्ते - सभी प्रतीक हैं।
  • संक्षिप्तता: यह कविता बहुत संक्षिप्त है, लेकिन इसमें गहरा अर्थ भरा है।
  • प्रभावशाली पुनरावृत्ति: पुनरावृत्ति के माध्यम से कवि अपनी बात को और प्रभावी बनाते हैं।
विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
घिरतेचारों ओर से आना, छा जानाबादल को घिरते देखा है।
बादलमेघ, cloudबादल घिरे तो बारिश होगी।
बूँदेंपानी की बूँदें, dropsबूँदों को सरसराते देखा है।
सरसरातेसरसराहट की आवाज करते हुएबारिश की बूँदें सरसराती हैं।
पत्तेपेड़ के पत्ते, leavesपत्तों को कँपकँपाते देखा है।
कँपकँपातेकाँपते हुए, tremblingबारिश में पत्ते कँपकँपाते हैं।
जनवादीआम जनता से जुड़ा हुआनागार्जुन जनवादी कवि हैं।
क्रांतिrevolution, आमूल परिवर्तनकवि ने बादल को क्रांति का प्रतीक बनाया है।
प्रतीकsymbolबादल परिवर्तन का प्रतीक है।
अनुभवexperience'देखा है' से अनुभव की प्रामाणिकता झलकती है।
पुनरावृत्तिrepetitionपुनरावृत्ति से कविता प्रभावशाली बनी है।
आशाhopeकविता में आशा का स्वर है।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में 'बादल' किसका प्रतीक है? [CBSE 2023, 2021]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में 'बादल' सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन और क्रांति का प्रतीक है। जैसे बादल घिरते हैं और फिर बरसते हैं, वैसे ही समाज में असंतोष घिरता है और फिर क्रांति के रूप में बरसता है। बादल का घिरना उस परिवर्तन की आहट है जो समाज में होने वाला है। कवि ने बादल के माध्यम से यह दिखाया है कि परिवर्तन अनिवार्य है और उसे रोका नहीं जा सकता। यह बादल केवल प्राकृतिक बादल नहीं है, बल्कि एक प्रतीक है - नई चेतना का, नए युग का, नए समाज का प्रतीक।

प्रश्न 2: 'बादल को घिरते देखा है' कविता में 'देखा है' की पुनरावृत्ति का क्या महत्व है? [CBSE 2022, 2020]

'बादल को घिरते देखा है' कविता में 'देखा है' की पुनरावृत्ति का बहुत महत्व है। पहला, यह कवि के अनुभव की प्रामाणिकता को दर्शाता है। कवि किताबी ज्ञान की बात नहीं कर रहे, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभव की बात कर रहे हैं। दूसरा, यह पुनरावृत्ति कवि के विश्वास को दर्शाती है। वे बार-बार कहते हैं कि उन्होंने यह देखा है - यानी वे इस बात के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं। तीसरा, यह पुनरावृत्ति कविता को एक लय और संगीतात्मकता प्रदान करती है। चौथा, यह पाठक के मन में बात को गहराई से बिठाने का काम करती है।

प्रश्न 3: नागार्जुन ने 'बूँदों को सरसराते' और 'पत्तों को कँपकँपाते' क्यों कहा है? इनमें क्या संकेत है? [CBSE 2023, 2019]

नागार्जुन ने 'बूँदों को सरसराते' और 'पत्तों को कँपकँपाते' कहकर क्रांति के आरंभिक चरण का संकेत दिया है। 'बूँदों का सरसराना' क्रांति की शुरुआत का प्रतीक है। जैसे बारिश की पहली बूँदें सरसराती हैं, वैसे ही क्रांति के पहले संकेत समाज में फैलते हैं। 'पत्तों का कँपकँपाना' उस सहमी प्रतिक्रिया का प्रतीक है जो नए बदलाव के प्रति लोगों में होती है। लोग पहले सहमते हैं, फिर धीरे-धीरे स्वीकार करते हैं। ये दोनों पंक्तियाँ क्रांति के आरंभिक चरण का बड़ा ही सजीव और प्रभावी चित्रण करती हैं।

प्रश्न 4: नागार्जुन की कविता में जनवादी दृष्टिकोण कैसे दिखाई देता है? [CBSE 2021, 2020]

नागार्जुन की कविता में जनवादी दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है। पहला, उनकी भाषा जन-साधारण की भाषा है - सरल, सहज, बोलचाल की। दूसरा, उनके विषय आम जनता से जुड़े हैं - वे शोषित वर्ग, गरीबों, मजदूरों की बात करते हैं। तीसरा, उनका दृष्टिकोण क्रांतिकारी है - वे सामाजिक परिवर्तन और समानता की बात करते हैं। चौथा, उनकी कविता में आशा और विश्वास का स्वर है - उन्हें भरोसा है कि बदलाव आएगा। 'बादल को घिरते देखा है' कविता में ये सभी तत्व मौजूद हैं - सरल भाषा, सामाजिक परिवर्तन की बात, आशा का स्वर।

प्रश्न 5: 'बादल को घिरते देखा है' कविता का मुख्य संदेश क्या है? [CBSE 2022]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' का मुख्य संदेश है - सामाजिक परिवर्तन अनिवार्य है और उसे रोका नहीं जा सकता। जैसे बादल घिरना और बरसना प्रकृति का नियम है, वैसे ही समाज में परिवर्तन और क्रांति भी अपरिहार्य है। कवि ने बादल के माध्यम से यह दिखाया है कि जिस तरह बादल घिरने के बाद बारिश होती है और धरती हरी-भरी हो जाती है, उसी तरह सामाजिक परिवर्तन के बाद समाज में नई चेतना आती है। यह कविता शोषित वर्ग को संघर्ष का संदेश देती है और उनमें आशा का संचार करती है कि बदलाव जरूर आएगा।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में प्रकृति के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक संदेश कैसे दिया गया है? विस्तार से विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2023, 2021, 2019]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में प्रकृति के माध्यम से गहरा सामाजिक-राजनीतिक संदेश दिया गया है।

  • बादल - क्रांति का प्रतीक: इस कविता में बादल क्रांति और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। जैसे बादल घिरते हैं, वैसे ही समाज में असंतोष घिरता है। जैसे बादल घने होते हैं, वैसे ही असंतोष गहरा होता है। और जैसे बादल बरसते हैं, वैसे ही क्रांति होती है।
  • बूँदें - क्रांति के प्रारंभिक संकेत: बूँदों का सरसराना क्रांति के प्रारंभिक संकेतों का प्रतीक है। जैसे बारिश की पहली बूँदें सरसराती हैं, वैसे ही क्रांति के पहले संकेत समाज में फैलते हैं।
  • पत्ते - समाज की प्रतिक्रिया: पत्तों का कँपकँपाना समाज की प्रतिक्रिया का प्रतीक है। नए बदलाव के प्रति लोग पहले सहमते हैं, फिर धीरे-धीरे स्वीकार करते हैं।
  • प्रकृति का नियम - सामाजिक नियम: कवि ने प्रकृति और समाज के बीच एक साम्य स्थापित किया है। जो प्रक्रियाएँ प्रकृति में अनिवार्य हैं, वही समाज में भी अनिवार्य हैं। जैसे बादल का घिरना और बरसना प्रकृति का नियम है, वैसे ही समाज में परिवर्तन और क्रांति भी सामाजिक नियम है।
  • आशा का संचार: बादल के घिरने के बाद बारिश आती है और धरती हरी-भरी हो जाती है। इसी तरह, क्रांति के बाद समाज में नई चेतना आती है, नया जीवन आता है। यह कविता शोषित वर्ग में आशा का संचार करती है।

इस प्रकार, नागार्जुन ने प्रकृति के एक साधारण दृश्य - बादल के घिरने - के माध्यम से बहुत गहरा सामाजिक-राजनीतिक संदेश दिया है। यह उनकी कविता की सबसे बड़ी विशेषता है - साधारण में असाधारण देखना, प्रकृति में समाज को देखना।

प्रश्न 2: 'बादल को घिरते देखा है' कविता में नागार्जुन की भाषा-शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2022, 2020]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में उनकी भाषा-शैली की अनेक विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

  • सरलता और सहजता: नागार्जुन की भाषा की सबसे बड़ी विशेषता है उसकी सरलता और सहजता। वे जन-साधारण की भाषा में कविता रचते हैं। 'घिरते', 'सरसराते', 'कँपकँपाते' जैसे शब्द आम बोलचाल के हैं।
  • पुनरावृत्ति शैली: इस कविता में 'बादल को घिरते देखा है' की बार-बार पुनरावृत्ति हुई है। यह पुनरावृत्ति कवि के संदेश को और प्रभावी बनाती है और कविता को एक लय प्रदान करती है।
  • ध्वन्यात्मक शब्द: नागार्जुन ने 'सरसराते' और 'कँपकँपाते' जैसे ध्वन्यात्मक शब्दों का प्रयोग किया है। ये शब्द न केवल अर्थ बल्कि ध्वनि के माध्यम से भी प्रभाव पैदा करते हैं।
  • संक्षिप्तता: यह कविता बहुत संक्षिप्त है, लेकिन इसमें गहरा अर्थ भरा है। नागार्जुन ने कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है।
  • प्रतीकात्मकता: उनकी भाषा प्रतीकात्मक है। बादल, बूँदें, पत्ते - ये सब के सब प्रतीक हैं, जिनके माध्यम से वे गहरी बातें कहते हैं।
  • प्रवाहपूर्णता: उनकी भाषा में प्रवाह है। कविता पढ़ते समय एक निरंतरता का अनुभव होता है।
  • अनुभव की प्रामाणिकता: 'देखा है' का प्रयोग उनके अनुभव की प्रामाणिकता को दर्शाता है। वे किताबी ज्ञान की बात नहीं कर रहे, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभव की बात कर रहे हैं।

इस प्रकार, नागार्जुन की भाषा-शैली सरल, प्रभावशाली और प्रतीकात्मक है। वे जन-कवि हैं और उनकी भाषा भी जन-भाषा है।

प्रश्न 3: 'बादल को घिरते देखा है' कविता की काव्यगत विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2021, 2019]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' काव्यगत दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है।

  • प्रतीक योजना: इस कविता की सबसे बड़ी काव्यगत विशेषता है इसकी प्रतीक योजना। बादल क्रांति का, बूँदें क्रांति के प्रारंभिक संकेतों का और पत्ते समाज की प्रतिक्रिया का प्रतीक हैं।
  • ध्वनि-चित्र: 'सरसराते' और 'कँपकँपाते' शब्द ध्वनि के माध्यम से चित्र खड़े करते हैं। इन शब्दों को सुनते ही बारिश और काँपते पत्तों का चित्र मानस-पटल पर उभर आता है।
  • पुनरावृत्ति: 'बादल को घिरते देखा है' की पुनरावृत्ति कविता को एक लय और संगीतात्मकता प्रदान करती है। यह पुनरावृत्ति कवि के संदेश को और प्रभावी बनाती है।
  • संक्षिप्तता और गहराई: यह कविता बहुत संक्षिप्त है, लेकिन इसमें गहरा दार्शनिक और सामाजिक अर्थ भरा है। यह संक्षिप्तता और गहराई का अद्भुत संतुलन है।
  • लयात्मकता: कविता में एक आंतरिक लय है। पंक्तियों की पुनरावृत्ति और शब्दों की ध्वनि इस लय को और सशक्त बनाती है।
  • भाव-पक्ष: भाव-पक्ष की दृष्टि से यह कविता अत्यंत समृद्ध है। इसमें आशा, विश्वास, संघर्ष और परिवर्तन के भाव मुखर हैं।
  • बिंब योजना: कवि ने सजीव बिंबों का प्रयोग किया है - घिरते बादल, सरसराती बूँदें, कँपकँपाते पत्ते। ये बिंब कविता को और प्रभावशाली बनाते हैं।

इस प्रकार, 'बादल को घिरते देखा है' कविता काव्यगत दृष्टि से एक उत्कृष्ट रचना है। इसमें प्रतीक, बिंब, ध्वनि, लय और भाव - सभी का सुंदर समन्वय है।

प्रश्न 4: नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' की आज के समाज में क्या प्रासंगिकता है? [CBSE 2020]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।

  • सामाजिक असमानता के विरुद्ध: आज भी समाज में असमानता, गरीबी और शोषण व्याप्त है। यह कविता उन तमाम शोषित वर्गों को संघर्ष का संदेश देती है कि बदलाव आएगा।
  • राजनीतिक परिवर्तन की आशा: आज की राजनीति में भ्रष्टाचार और जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ जनता में असंतोष है। यह कविता उस असंतोष को क्रांति में बदलने की आशा देती है।
  • युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा: आज की युवा पीढ़ी बदलाव चाहती है। यह कविता उन्हें प्रेरित करती है कि वे समाज में हो रहे परिवर्तनों को पहचानें और उनमें सक्रिय भूमिका निभाएँ।
  • आशा और विश्वास का संचार: आज के निराशावादी माहौल में यह कविता आशा और विश्वास का संचार करती है। यह बताती है कि अंधेरे के बाद उजाला जरूर आता है।
  • प्रकृति और समाज का संबंध: आज जब पर्यावरण संकट गहरा रहा है, यह कविता हमें प्रकृति और समाज के गहरे संबंध की याद दिलाती है।

इस प्रकार, 20वीं सदी के मध्य में लिखी गई यह कविता 21वीं सदी में भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह हमें संघर्ष, आशा और परिवर्तन का संदेश देती है।

प्रश्न 5: 'बादल को घिरते देखा है' कविता की तुलना किसी अन्य कवि के बादल संबंधी चित्रण से करते हुए नागार्जुन के दृष्टिकोण की विशिष्टता स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2021]

नागार्जुन की कविता 'बादल को घिरते देखा है' में बादल का चित्रण अन्य कवियों से बिल्कुल अलग और विशिष्ट है।

अन्य कवियों में बादल का चित्रण:

  • संस्कृत कवि कालिदास ने बादलों को 'दूत' के रूप में चित्रित किया - जो प्रेमियों के संदेश ले जाते हैं।
  • सूरदास ने बादलों को कृष्ण के रूप में देखा - जो गोपियों के लिए आकर्षण का केंद्र थे।
  • छायावादी कवियों (निराला, पंत) ने बादलों को प्रकृति के सौंदर्य के रूप में देखा।

नागार्जुन का विशिष्ट दृष्टिकोण:

  • सामाजिक दृष्टिकोण: नागार्जुन ने बादलों को सौंदर्य या प्रेम के संदर्भ में न देखकर सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में देखा। उनके लिए बादल क्रांति का प्रतीक है।
  • जनवादी दृष्टिकोण: वे बादलों को आम जनता से जोड़कर देखते हैं। उनका बादल शोषित वर्ग के लिए आशा लेकर आता है।
  • क्रांतिकारी दृष्टिकोण: उनके बादल में कोमलता नहीं, क्रांति का जोश है। वह बरसेगा, सब कुछ बदल देगा।
  • अनुभव-आधारित दृष्टिकोण: वे बादलों को कल्पना में नहीं, बल्कि अनुभव में देखते हैं। 'देखा है' का प्रयोग इसी का प्रतीक है।

इस प्रकार, नागार्जुन का बादल-चित्रण अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने बादल को एक नया अर्थ दिया है - क्रांति का अर्थ, परिवर्तन का अर्थ, आशा का अर्थ। यह उनकी जनवादी दृष्टि का परिणाम है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • बादल के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रश्न - 2023, 2021, 2019
  • 'देखा है' की पुनरावृत्ति का महत्व - 2022, 2020, 2018
  • बूँदों और पत्तों के चित्रण का अर्थ - 2023, 2021, 2019
  • नागार्जुन की भाषा-शैली की विशेषताएँ - 2022, 2020
  • कविता का मुख्य संदेश - 2021, 2019
  • जनवादी दृष्टिकोण का विश्लेषण - 2020, 2018

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कविता से प्रतिवर्ष 5-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में बादल के प्रतीकात्मक महत्व, पुनरावृत्ति के महत्व और प्रमुख पंक्तियों के अर्थ पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में प्रकृति के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक संदेश, काव्यगत विशेषताएँ और कविता की प्रासंगिकता पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • कवि - नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र)
  • जन्म - 1911, मृत्यु - 1998
  • प्रमुख रचनाएँ - युगधारा, प्यासी आँखें, पुरानी वाणी, तालाब की मछलियाँ
  • सम्मान - साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • भाषा - सरल, सहज, बोलचाल की
  • विचारधारा - जनवादी, क्रांतिकारी
  • पुस्तक - आरोह भाग 1
  • कविता का नाम - बादल को घिरते देखा है
  • मुख्य विषय - सामाजिक परिवर्तन और क्रांति की अनिवार्यता

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"बादल को घिरते देखा है।"

"बूँदों को सरसराते देखा है।"

"पत्तों को कँपकँपाते देखा है।"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। संक्षिप्त और सटीक होना चाहिए।

उदाहरण: प्रश्न - 'बादल को घिरते देखा है' कविता के कवि कौन हैं? उत्तर - नागार्जुन।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु का उदाहरण सहित वर्णन।

उदाहरण: प्रश्न - नागार्जुन ने 'बादल' को किसका प्रतीक बनाया है? उत्तर - परिचय में बताएँ कि नागार्जुन ने बादल को एक प्रतीक के रूप में प्रयोग किया है। फिर क्रांति का प्रतीक, परिवर्तन का प्रतीक, आशा का प्रतीक, नई चेतना का प्रतीक - चार बिंदुओं में समझाएँ। निष्कर्ष में कहें कि इस प्रकार बादल के माध्यम से कवि ने गहरा सामाजिक संदेश दिया है।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

प्रतीकात्मक विश्लेषण के लिए: प्रस्तावना + कवि का परिचय + कविता का मूलभाव + प्रतीकों का विश्लेषण + निष्कर्ष। जैसे कविता के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रश्न - पहले नागार्जुन का परिचय दें, फिर कविता का मूलभाव समझाएँ, फिर बादल, बूँदें, पत्ते के प्रतीकात्मक अर्थों का विस्तार से विश्लेषण करें, अंत में निष्कर्ष दें।

10. हब लिंक



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