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अपठित गद्यांश – प्रश्नोत्तर, अभ्यास और उदाहरण सहित (Unseen Passage – Prose) | Hindi Grammar | GPN

क्या आप जानते हैं कि जब आप नया समाचार पढ़ते हैं या कोई अनजान लेख समझते हैं, तो आप वास्तव में अपठित बोध का अभ्यास कर रहे होते हैं? अपठित गद्यांश परीक्षा में आपकी समझदारी की असली कसौटी है, जो बताती है कि आप नई जानकारी को कितनी तेजी से और कितनी गहराई से समझ सकते हैं। यह कौशल सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जीवन में काम आने वाली महत्वपूर्ण योग्यता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 5 (आधारभूत) | कक्षा 6 (मध्यम) | कक्षा 7 (उन्नत)


1️. अपठित गद्यांश का परिचय और महत्व

अपठित गद्यांश का सीधा अर्थ है - ऐसा लिखित माध्यम जिसे आपने पहले कभी नहीं पढ़ा है। यह कोई कहानी का अंश, किसी घटना का विवरण, किसी महापुरुष का जीवन चरित्र, या किसी वैज्ञानिक तथ्य की व्याख्या हो सकती है। हमारे दैनिक जीवन में भी हम लगातार नई सूचनाओं का सामना करते हैं - अखबार का संपादकीय, किसी नई तकनीक का विवरण, या फिर कोई सामाजिक मुद्दे पर लेख। अपठित बोध हमें सिखाता है कि इन नई जानकारियों को कैसे समझें, विश्लेषण करें और उनसे सही निष्कर्ष निकालें।

विचार कीजिए कि आपके सामने 'मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाएँ' विषय पर एक लेख है। आपने इस विषय पर पहले विस्तृत अध्ययन नहीं किया है, लेकिन लेख को पढ़कर आप जान जाएंगे कि वैज्ञानिक किन तथ्यों के आधार पर मंगल पर जीवन की संभावना तलाश रहे हैं, वहाँ की परिस्थितियाँ कैसी हैं, और भविष्य में क्या संभावनाएँ हैं। फिर आपसे उसी जानकारी पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में आपकी पढ़कर समझने की क्षमता, शब्द भंडार और तार्किक सोच - तीनों की परीक्षा होती है।

2. अपठित गद्यांश की परिभाषा

परिभाषा: अपठित गद्यांश वह गद्य रचना (साधारण भाषा में लिखित अनुच्छेद) है जो विद्यार्थी के निर्धारित पाठ्यक्रम की पुस्तकों में शामिल नहीं होती और जिसके माध्यम से उसकी पठन कौशल, विषय की समझ, तार्किक चिंतन और उचित निष्कर्ष निकालने की क्षमता का आकलन किया जाता है।

3. अपठित गद्यांश की विशिष्टताएँ और पहचान के बिंदु

एक अच्छा अपठित गद्यांश कैसा होता है और इसे हल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, यह समझना आवश्यक है:

  • विषय की नवीनता: गद्यांश का विषय विद्यार्थियों के लिए नया हो सकता है, लेकिन उनकी बौद्धिक क्षमता के दायरे में होता है।
  • भाषा की स्पष्टता: भाषा विद्यार्थियों के कक्षा स्तर के अनुरूप सरल, प्रवाहमय और बोधगम्य होती है। कठिन शब्दों की संख्या सीमित होती है।
  • संतुलित लंबाई: कक्षा 5-7 के लिए आमतौर पर 100-150 शब्दों का गद्यांश होता है जो एक बार में पढ़कर समझा जा सके।
  • तार्किक संरचना: गद्यांश में विचारों या घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उनके बीच के संबंध समझ में आएँ।
  • विविध प्रश्न प्रारूप: गद्यांश के बाद पूछे गए प्रश्न सिर्फ सूचना ढूँढने तक सीमित नहीं, बल्कि विश्लेषण, अनुमान और मूल्यांकन करने को प्रेरित करते हैं।

4. अपठित गद्यांश के प्रमुख प्रकार

कक्षा 5 से 7 के स्तर पर पाठ्यक्रम में शामिल अपठित गद्यांशों को मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

क्रम प्रकार विशेषताएँ एवं उद्देश्य
1 कथा-वर्णनात्मक छोटी कहानी, व्यक्तिगत अनुभव या ऐतिहासिक घटना का रोचक विवरण
2 ज्ञानवर्धक / सूचनात्मक वैज्ञानिक तथ्य, प्राकृतिक घटना, तकनीकी जानकारी या सामाजिक मुद्दे
3 जीवनी-परक महान व्यक्तियों के जीवन संघर्ष, उपलब्धियों और विशेषताओं का वर्णन
4 नैतिक-शिक्षाप्रद ऐसा आख्यान जिसमें जीवन मूल्यों, सद्गुणों या आदर्श व्यवहार का संदेश निहित हो
5 वर्णनात्मक किसी स्थान, वस्तु, प्राकृतिक दृश्य या मौसम का सजीव चित्रण

5. अपठित गद्यांश का पूर्ण उदाहरण

निम्नलिखित उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि कक्षा 6 के स्तर का एक अपठित गद्यांश कैसा होता है और उस पर किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं:

गद्यांश: "लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक थे। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण शास्त्री जी को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वे प्रतिदिन नदी तैरकर पार करके स्कूल जाते थे क्योंकि पैसे की कमी के कारण नाव का किराया नहीं दे सकते थे। उनकी शिक्षा और संघर्ष ने उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति वाला व्यक्ति बनाया। बाद में वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया।"

संभावित प्रश्न:
1. लाल बहादुर शास्त्री का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
2. बचपन में उन्हें किस कठिनाई का सामना करना पड़ा?
3. वे प्रतिदिन स्कूल कैसे जाते थे और क्यों?
4. उन्होंने कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया?
5. इस गद्यांश से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

6. अपठित गद्यांश हल करने की व्यावहारिक विधि

अपठित गद्यांश के प्रश्नों को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। यह रहा क्रमबद्ध तरीका जो परीक्षा में समय बचाता है और शुद्धता बढ़ाता है:

  1. प्रारंभिक स्कैनिंग (30 सेकंड): सबसे पहले गद्यांश को तेजी से देखें - शीर्षक (यदि है), पैराग्राफ की संख्या, और कुछ मुख्य शब्दों को नोट करें। इससे विषय का सामान्य ज्ञान हो जाएगा।
  2. पहली बार गहन पठन (2-3 मिनट): अब गद्यांश को धीरे-धीरे और ध्यान से पढ़ें। प्रमुख तथ्यों, नामों, तिथियों, कारणों और परिणामों पर मानसिक निशान लगाएँ।
  3. प्रश्नों का अध्ययन (1 मिनट): सभी प्रश्नों को पढ़ें और समझें कि कौन-सा प्रश्न किस प्रकार का है - सीधा तथ्यात्मक, कारण पूछने वाला, अर्थ समझने वाला, या निष्कर्ष निकालने वाला।
  4. द्वितीयक लक्षित पठन (2 मिनट): प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए गद्यांश को फिर से पढ़ें। इस बार वाक्यों को रेखांकित करें या हाशिए पर नोट्स लिखें जहाँ उत्तर मिल रहे हों।
  5. उत्तर लेखन की रणनीति:
    • सीधे उत्तर वाले प्रश्न: गद्यांश से शब्दशः या थोड़े परिवर्तन के साथ उत्तर लिखें।
    • कारण पूछने वाले प्रश्न: "क्योंकि..." से प्रारंभ करें और गद्यांश में दिए गए कारण को स्पष्ट करें।
    • अनुमान या निष्कर्ष वाले प्रश्न: गद्यांश में दी गई जानकारी को अपने शब्दों में व्यक्त करते हुए तार्किक निष्कर्ष निकालें।
  6. समीक्षा और संशोधन (1 मिनट): उत्तर लिखने के बाद एक बार फिर से प्रश्न और उत्तर दोनों को गद्यांश से मिला लें। वर्तनी और व्याकरण की गलतियाँ सुधारें।

7. सामान्य त्रुटियाँ और परीक्षा में सावधानियाँ

अपठित गद्यांश खंड में विद्यार्थी अक्सर सरल प्रतीत होने वाली गलतियाँ कर बैठते हैं जिससे उनके अंक कट जाते हैं। इनसे बचने के लिए इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें:

  • अधूरा पठन: गद्यांश को जल्दबाजी में आधा-अधूरा पढ़कर उत्तर लिखना सबसे बड़ी भूल है। कई बार उत्तर अगले वाक्य या पैराग्राफ में छिपा होता है।
  • प्रश्न की माँग को न समझ पाना: यदि प्रश्न पूछता है "दो कारण बताइए" तो केवल एक कारण लिखने से आधे अंक कटेंगे। प्रश्न के निर्देशों (जैसे - नाम लिखिए, कारण बताइए, विवरण दीजिए) को ध्यान से पढ़ें।
  • गद्यांश के बाहर के तथ्यों का प्रयोग: अपठित गद्यांश में सभी उत्तर गद्यांश में ही होने चाहिए। बाहरी ज्ञान का प्रयोग न करें, भले ही आप विषय के विशेषज्ञ हों।
  • अनावश्यक विस्तार: "एक वाक्य में उत्तर दीजिए" वाले प्रश्न में पूरा पैराग्राफ लिख देने से समय की बर्बादी होती है और अंक नहीं मिलते।
  • प्रसंग से बाहर का उत्तर: कुछ प्रश्न गद्यांश के विशिष्ट संदर्भ में पूछे जाते हैं। सामान्य ज्ञान के आधार पर उत्तर न दें, बल्कि गद्यांश के संदर्भ में ही उत्तर दें।
  • व्याकरण और वर्तनी की उपेक्षा: उत्तर लिखते समय वाक्य पूर्ण होने चाहिए और वर्तनी शुद्ध होनी चाहिए। 'हाँ' या 'नहीं' में उत्तर न दें जब पूरा वाक्य लिखने को कहा गया हो।

8. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य और टिप्स

  • अपठित गद्यांश आमतौर पर 10 अंकों का होता है जिसमें 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं, प्रत्येक 1-2 अंक का।
  • प्रश्नों के प्रकार: वस्तुनिष्ठ (सही/गलत, रिक्त स्थान), लघुउत्तरीय (एक वाक्य/शब्द), विस्तृत उत्तर (कारण/विवरण), और निष्कर्षात्मक (शीर्षक/शिक्षा)।
  • अंतिम प्रश्न अक्सर "इस गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए" या "लेखक ने यह गद्यांश क्यों लिखा होगा?" प्रकार का होता है जो उच्चतर चिंतन क्षमता की माँग करता है।
  • शीर्षक देते समय ध्यान रखें: यह संक्षिप्त (3-5 शब्द), विषय के अनुरूप, और आकर्षक होना चाहिए। गद्यांश का मुख्य विचार शीर्षक में झलकना चाहिए।
  • समय प्रबंधन: कक्षा 6-7 के लिए 15-20 मिनट में अपठित गद्यांश पूरा कर लेना चाहिए। पहले 5 मिनट पढ़ने और समझने में, 10 मिनट उत्तर लिखने में, और अंतिम 2-3 मिनट जाँच में लगाएँ।
  • कठिन शब्दों से न घबराएँ: यदि कोई शब्द समझ में न आए तो उसके संदर्भ से अर्थ समझने का प्रयास करें। कई बार पूरे वाक्य को पढ़ने से अर्थ स्पष्ट हो जाता है।

9. 🎯 अपठित गद्यांश चुनौती - वास्तविक परीक्षा शैली

नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और निर्देशानुसार सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रयास करने के बाद उत्तर देखकर अपने उत्तरों का मिलान कीजिए।

गद्यांश: "हिमालय पर्वत श्रृंखला को धरती का मुकुट कहा जाता है। यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और कई देशों में फैला हुआ है। हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह एक जीवनदायी प्रणाली है। इसकी बर्फीली चोटियों से निकलने वाली नदियाँ - गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र आदि - उत्तरी भारत की जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हैं। हिमालय की ऊँचाई के कारण यह मानसूनी हवाओं को रोककर भारत में वर्षा लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी घाटियों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं। हिमालय न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और धर्म में भी विशेष स्थान रखता है।"

प्रश्न 1: हिमालय पर्वत श्रृंखला को क्या कहा जाता है और यह कहाँ स्थित है? (2 अंक)

प्रश्न 2: हिमालय से निकलने वाली तीन नदियों के नाम लिखिए। (1.5 अंक)

प्रश्न 3: हिमालय भारत में वर्षा लाने में कैसे सहायक है? कारण स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)

प्रश्न 4: "हिमालय केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह एक जीवनदायी प्रणाली है।" - इस कथन की पुष्टि में दो तर्क दीजिए। (2 अंक)

प्रश्न 5: इस गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक सुझाइए। (1.5 अंक)

उत्तर 1: हिमालय पर्वत श्रृंखला को 'धरती का मुकुट' कहा जाता है। यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है और कई देशों में फैला हुआ है।

उत्तर 2: हिमालय से निकलने वाली तीन नदियाँ हैं - (1) गंगा, (2) यमुना, (3) ब्रह्मपुत्र।

उत्तर 3: हिमालय भारत में वर्षा लाने में इस प्रकार सहायक है क्योंकि इसकी ऊँचाई के कारण यह मानसूनी हवाओं को रोकता है। जब मानसूनी हवाएँ हिमालय से टकराती हैं तो वे ऊपर उठती हैं, ठंडी होती हैं और वर्षा के रूप में नमी छोड़ती हैं।

उत्तर 4: हिमालय को जीवनदायी प्रणाली कहने के दो तर्क हैं:
(1) हिमालय की बर्फीली चोटियों से निकलने वाली नदियाँ उत्तरी भारत की जल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हैं, जिससे कृषि और पेयजल की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
(2) हिमालय की घाटियों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं और जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।

उत्तर 5: इस गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक हो सकता है - "हिमालय: प्रकृति का अद्भुत वरदान" या "हिमालय पर्वत का महत्व एवं विशेषताएँ"।

गद्यांश: "सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उनका जन्म 21 फरवरी, 1896 को बंगाल में हुआ था। निराला जी ने अपना अधिकांश जीवन संघर्षों में बिताया। पत्नी और पुत्री की अकाल मृत्यु ने उन्हें गहरा सदमा पहुँचाया, किंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी कविताओं में विद्रोह की भावना स्पष्ट झलकती है। 'सरोज स्मृति' उनकी शोकगीतात्मक रचना है जो उनकी पुत्री की स्मृति में लिखी गई। निराला जी ने गद्य और पद्य दोनों में लेखन कार्य किया। उन्हें 'महाप्राण' की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। वे छायावादी युग के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।"

प्रश्न 1: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म कब और कहाँ हुआ था? (1 अंक)

प्रश्न 2: निराला जी के जीवन के दो संघर्ष बताइए। (2 अंक)

प्रश्न 3: 'सरोज स्मृति' क्या है और यह किसकी स्मृति में लिखी गई? (1.5 अंक)

प्रश्न 4: निराला जी को किस उपाधि से सम्मानित किया गया और वे किस साहित्यिक युग के कवि थे? (1.5 अंक)

प्रश्न 5: इस गद्यांश से हमें निराला जी के चरित्र के बारे में क्या शिक्षा मिलती है? (2 अंक)

उत्तर 1: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म 21 फरवरी, 1896 को बंगाल में हुआ था।

उत्तर 2: निराला जी के जीवन के दो संघर्ष थे:
(1) उन्होंने अपना अधिकांश जीवन आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों में बिताया।
(2) उनकी पत्नी और पुत्री की अकाल मृत्यु ने उन्हें गहरा सदमा पहुँचाया, जिससे वे भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए।

उत्तर 3: 'सरोज स्मृति' निराला जी की एक शोकगीतात्मक रचना (कविता) है। यह उनकी पुत्री सरोज की स्मृति में लिखी गई थी, जिसकी अकाल मृत्यु हो गई थी।

उत्तर 4: निराला जी को 'महाप्राण' की उपाधि से सम्मानित किया गया। वे छायावादी युग के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं।

उत्तर 5: इस गद्यांश से हमें निराला जी के चरित्र के बारे में यह शिक्षा मिलती है कि जीवन के कठिनतम संघर्षों और व्यक्तिगत दुःखों के बावजूद मनुष्य को हार नहीं माननी चाहिए। निराला जी ने अपने दुःखों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया और उनसे उबरकर महान साहित्यिक योगदान दिया, जो हमें जीवन में सदैव आशावादी और संघर्षशील बने रहने की प्रेरणा देता है।

10. सारांश

अपठित गद्यांश विद्यार्थियों की पठन-समझ क्षमता का मूल्यांकन करने वाला एक महत्वपूर्ण अभ्यास है जिसमें किसी अपरिचित गद्य खंड को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसमें सफलता के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है: पहले गद्यांश का सामान्य अध्ययन, फिर प्रश्नों को समझना, और तत्पश्चात लक्षित पठन के साथ उत्तर खोजना। कथा-वर्णनात्मक, ज्ञानवर्धक, जीवनी-परक, नैतिक-शिक्षाप्रद और वर्णनात्मक - ये अपठित गद्यांश के प्रमुख प्रकार हैं। प्रश्नों के प्रकार के अनुसार उत्तर देने, गद्यांश के संदर्भ में ही उत्तर सीमित रखने, और समय प्रबंधन का ध्यान रखने से इस खंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।

11. संबंधित विषय संकेत

अपठित गद्यांश में निपुणता प्राप्त करने के बाद अगला चरण है काव्य को समझना। अगला विषय पढ़ें: कक्षा 7-10 – अपठित पद्यांश (Unseen Passage – Poetry)

📝 अपठित गद्यांश Worksheet

विभिन्न विषयों और कठिनाई स्तरों पर आधारित गद्यांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर देना सीखें।

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