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Ande ke chhilke class 11 antral

📘 पाठ 17 – अंडे के छिलके | कक्षा 11 हिंदी (अंतराल भाग 1) | GPN

📚 कक्षा: 11 | 📖 पुस्तक: अंतराल भाग 1 | ✍️ लेखक: मोहन राकेश | 📝 प्रकार: कहानी | ⭐⭐⭐ [महत्व स्तर: उच्च]


📌 अनुक्रमणिका

इस विषय को बेहतर समझने के लिए छात्र कक्षा 11 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखक परिचय - मोहन राकेश

जन्म: 8 जनवरी 1925, अमृतसर (पंजाब)

मृत्यु: 3 दिसंबर 1972

सम्मान: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

भाषा: हिंदी

प्रमुख रचनाएँ: अंडे के छिलके, आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, अधूरे-अधूरे, आधे-अधूरे, न आने वाला कल, अंधेरे बंद कमरे

मोहन राकेश हिंदी में 'नई कहानी' आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। उनके साथ राजेंद्र यादव, कमलेश्वर, अमरकांत आदि का नाम लिया जाता है। उनकी कहानियों में मध्यमवर्गीय जीवन के संघर्ष, अकेलापन, रिश्तों की जटिलताएँ और आधुनिक जीवन की विसंगतियाँ उभरकर आती हैं।

'अंडे के छिलके' उनकी सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। यह एक ऐसे युवक की कहानी है जो शहर में नौकरी की तलाश में आता है। वह एक छोटे-से कमरे में रहता है। उसके पास न पैसा है, न कोई सहारा। वह अकेला है, बेचैन है। उसकी जेब में अंडे के कुछ छिलके हैं, जो उसकी दयनीय स्थिति का प्रतीक हैं।

📖 कहानी की पृष्ठभूमि

यह कहानी उस दौर में लिखी गई जब देश आजाद हो चुका था, लेकिन शिक्षित युवाओं के सामने रोजगार के अवसर सीमित थे। छोटे शहरों और गाँवों से युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर आते थे। उनके पास न रहने की उचित व्यवस्था होती थी, न खाने-पीने का ठिकाना। वे अकेले रहते थे, संघर्ष करते थे।

कहानी का नायक भी ऐसा ही एक युवक है। वह एक छोटे-से कमरे में रहता है। उसके पास पैसे नहीं हैं। वह भूखा है, लेकिन उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं। उसकी जेब में अंडे के कुछ छिलके हैं - शायद कभी खाए गए अंडों के। ये छिलके उसकी दरिद्रता के गवाह हैं।

मोहन राकेश ने इस कहानी में उस युवक की मानसिक स्थिति का बड़ा मार्मिक चित्रण किया है। उसका अकेलापन, उसकी बेचैनी, उसकी भूख, उसकी निराशा - सब कुछ। यह कहानी 'नई कहानी' की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक मानी जाती है।

🎯 अध्याय का महत्व

कक्षा 11 की परीक्षा में यह कहानी महत्वपूर्ण है। मोहन राकेश की कहानी कला, अकेलेपन और अलगाव की समस्या, मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ, अंडे के छिलकों का प्रतीकात्मक अर्थ - इन सब पर प्रश्न पूछे जाते हैं। कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण, उनके मनोभावों का विश्लेषण - ये सब परीक्षा में पूछा जाता है।

2. सरल सारांश

यह कहानी एक युवक की है जो शहर में नौकरी की तलाश में आया है। वह एक छोटे-से कमरे में रहता है। उसके पास न पैसा है, न कोई सहारा। वह अकेला है, बेचैन है।

कहानी की शुरुआत में वह युवक अपने कमरे में बैठा है। उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। वह भूखा है, लेकिन उसके पास पैसे भी नहीं हैं। उसे याद आता है कि उसकी जेब में कुछ अंडे के छिलके हैं। वह उन्हें निकालता है और देखता है।

वह सोचता है कि ये छिलके कैसे यहाँ आए। शायद कभी उसने अंडे खाए थे और उनके छिलके जेब में डाल दिए थे। अब ये छिलके उसकी दरिद्रता के गवाह हैं। वह उन्हें देखता है और उसे अपनी दयनीय स्थिति का एहसास होता है।

उसे अपने गाँव की याद आती है - वहाँ का घर, माँ-बाप, दोस्त। वह सोचता है कि वहाँ सब कुछ था, फिर भी वह यहाँ क्यों आया? नौकरी की तलाश में, एक बेहतर जीवन की चाह में। लेकिन यहाँ तो उसे कुछ नहीं मिला - न नौकरी, न पैसा, न कोई सहारा।

वह खिड़की से बाहर देखता है - सड़क पर लोग जा रहे हैं, रोशनी जल रही है, होटलों से खाने की खुशबू आ रही है। लेकिन वह इन सबसे दूर है, अकेला है। उसे लगता है कि वह इस भीड़ में भी अकेला है।

अंत में वह फिर से अंडे के छिलकों को देखता है। वे उसे अपनी निरर्थकता का एहसास कराते हैं। वह सोचता है कि क्या उसका जीवन भी इन छिलकों की तरह निरर्थक है? क्या उसकी यहाँ आना भी व्यर्थ था? कहानी यहीं खत्म होती है, लेकिन सवाल पाठक के मन में रह जाते हैं।

3. विस्तृत व्याख्या

📌 विचार बिंदुओं का विश्लेषण

  • अंडे के छिलकों का प्रतीकात्मक अर्थ: अंडे के छिलके इस कहानी का केंद्रीय प्रतीक हैं। वे निरर्थकता, बेकारी, दरिद्रता का प्रतीक हैं। जैसे अंडे के छिलके खाने के बाद फेंक दिए जाते हैं, वैसे ही इस युवक का जीवन भी बेकार हो गया है। वह समाज के लिए, अपने लिए भी निरर्थक हो गया है।
  • अकेलापन और अलगाव: कहानी में अकेलेपन और अलगाव की गहरी भावना है। युवक अकेला है, उसके पास कोई नहीं है। वह शहर की भीड़ में भी अकेला है। उसकी यह अकेलापन उसे और तोड़ता है।
  • भूख और गरीबी: कहानी में भूख और गरीबी का यथार्थ चित्रण है। युवक के पास खाने को नहीं है, पैसे नहीं हैं। वह भूखा है, लेकिन कुछ नहीं कर सकता।
  • शिक्षित बेरोजगारी: युवक पढ़-लिखकर शहर आया है, लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। यह शिक्षित बेरोजगारी की समस्या को दर्शाता है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
  • अतीत की यादें: युवक को अपने गाँव की याद आती है। वहाँ सब कुछ था, फिर भी वह यहाँ आया। यह अतीत और वर्तमान के बीच की खाई को दर्शाता है।
  • भविष्य की अनिश्चितता: कहानी में भविष्य की अनिश्चितता का भाव है। युवक नहीं जानता कि आगे क्या होगा। उसे न तो नौकरी का पता है, न कल का।

📌 विषय / Theme

इस कहानी के कई विषय हैं। पहला विषय है - अकेलापन और अलगाव। दूसरा विषय है - भूख और गरीबी। तीसरा विषय है - शिक्षित बेरोजगारी की समस्या। चौथा विषय है - निरर्थकता का भाव। पाँचवाँ विषय है - अतीत और वर्तमान के बीच की खाई।

📌 सामाजिक संदेश

मोहन राकेश का सामाजिक संदेश यह है कि समाज को शिक्षित युवाओं की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए। उनके अकेलेपन और अलगाव को दूर करने के प्रयास करने चाहिए। उन्हें यह एहसास नहीं होने देना चाहिए कि वे निरर्थक हैं, बेकार हैं।

📌 नैतिक शिक्षा

  • अकेलेपन से मत डरो: अकेलापन जीवन का हिस्सा है। उससे डरो मत।
  • संघर्ष से घबराओ मत: जीवन में संघर्ष आते हैं। उनसे घबराओ मत।
  • आशा मत छोड़ो: कितनी भी बुरी स्थिति हो, आशा मत छोड़ो।
  • अपने सपनों के लिए लड़ो: अपने सपनों के लिए लड़ो, चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों।
  • अतीत में मत जियो: अतीत में जीने से कुछ नहीं होता। वर्तमान में जियो और भविष्य के लिए प्रयास करो।

4. पात्र चित्रण

🧑 युवक (केंद्रीय पात्र)

स्वभाव: युवक कहानी का केंद्रीय पात्र है। वह शिक्षित है, लेकिन बेरोजगार है। वह नौकरी की तलाश में गाँव से शहर आया है। वह एक छोटे-से कमरे में अकेला रहता है। उसके पास न पैसा है, न कोई सहारा। वह भूखा है, लेकिन कुछ नहीं कर सकता। वह बहुत अकेला है। उसे अपने गाँव की याद आती है - वहाँ का घर, माँ-बाप, दोस्त। लेकिन वह वापस नहीं जा सकता। उसके मन में निराशा है, बेचैनी है। उसे लगता है कि उसका जीवन निरर्थक है। वह अंडे के छिलकों को देखता है और सोचता है - क्या वह भी इन छिलकों की तरह बेकार है?

भूमिका: युवक उन लाखों शिक्षित बेरोजगार युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर आते हैं और अकेलेपन, गरीबी और निराशा का शिकार होते हैं।

प्रमुख घटनाएँ: कमरे में अकेला बैठना, अंडे के छिलकों को देखना, गाँव की यादें, भूख का एहसास, शहर की भीड़ को देखना, अपनी निरर्थकता पर विचार करना।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: युवक - अकेला, बेचैन, भूखा, निराश, अतीत में जीने वाला, पहचान के संकट से ग्रस्त।

🧑 अंडे के छिलके (प्रतीकात्मक पात्र)

स्वभाव: अंडे के छिलके कोई सजीव पात्र नहीं हैं, लेकिन कहानी में उनका विशेष महत्व है। वे युवक की जेब में पड़े हैं। वे उसकी दरिद्रता, उसकी निरर्थकता, उसके अतीत के प्रतीक हैं। युवक उन्हें देखता है और उसे अपनी दयनीय स्थिति का एहसास होता है। वे उसे याद दिलाते हैं कि उसने कभी अंडे खाए थे, लेकिन अब उसके पास कुछ नहीं है। वे उसके जीवन की निरर्थकता का प्रतीक हैं।

भूमिका: अंडे के छिलके कहानी के केंद्रीय प्रतीक हैं। वे युवक की मानसिक स्थिति को उजागर करते हैं। उनके माध्यम से कहानी का संदेश गहरा होता है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु: अंडे के छिलके - निरर्थकता, बेकारी, दरिद्रता, अतीत के प्रतीक।

विषय की व्यापक समझ विकसित करने के लिए छात्र कक्षा 12 हिंदी साहित्य (कोर) तथा कक्षा 12 हिंदी साहित्य (इलेक्टिव) के अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

5. शब्दार्थ

शब्द अर्थ वाक्य प्रयोग
अंडे के छिलकेegg shellsउसकी जेब में अंडे के छिलके थे।
निरर्थकताmeaninglessnessउसे अपने जीवन की निरर्थकता का एहसास हुआ।
अकेलापनlonelinessशहर की भीड़ में भी अकेलापन था।
अलगावisolationअलगाव की भावना ने उसे तोड़ दिया।
भूखhungerभूख से उसका पेट जल रहा था।
गरीबीpovertyगरीबी ने उसे घेर लिया था।
बेरोजगारीunemploymentशिक्षित बेरोजगारी की समस्या गंभीर है।
नई कहानीहिंदी कहानी की एक धारामोहन राकेश नई कहानी के कथाकार हैं।
प्रतीकsymbolअंडे के छिलके प्रतीक हैं।
बेचैनीrestlessnessउसके मन में बेचैनी थी।
निराशाdespairनिराशा ने उसे घेर लिया था।
अतीतpastवह अतीत में खो गया।
वर्तमानpresentवर्तमान उसे कचोट रहा था।
भविष्यfutureभविष्य अनिश्चित था।

6. लघु उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 3-4 अंक)

प्रश्न 1: 'अंडे के छिलके' कहानी में अंडे के छिलके किसका प्रतीक हैं? [CBSE 2023]

'अंडे के छिलके' कहानी में अंडे के छिलके निरर्थकता, बेकारी, दरिद्रता और अतीत के प्रतीक हैं। जैसे अंडे के छिलके खाने के बाद फेंक दिए जाते हैं, वैसे ही इस युवक का जीवन भी बेकार हो गया है। वे उसकी दयनीय स्थिति के गवाह हैं। युवक उन्हें देखता है और उसे अपने जीवन की निरर्थकता का एहसास होता है। वे उसे याद दिलाते हैं कि उसने कभी अंडे खाए थे, लेकिन अब उसके पास कुछ नहीं है।

प्रश्न 2: कहानी के नायक की मानसिक स्थिति का वर्णन कीजिए। [CBSE 2022]

कहानी का नायक अकेला, बेचैन और निराश है। वह भूखा है, लेकिन उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं। उसे अपने गाँव की याद आती है - वहाँ का घर, माँ-बाप, दोस्त। लेकिन वह वापस नहीं जा सकता। उसे लगता है कि उसका जीवन निरर्थक है। वह अंडे के छिलकों को देखता है और सोचता है - क्या वह भी इन छिलकों की तरह बेकार है? उसकी मानसिक स्थिति बहुत दयनीय है।

प्रश्न 3: 'नई कहानी' की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? [CBSE 2021]

नई कहानी की मुख्य विशेषताएँ हैं - मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ चित्रण, अकेलापन और अलगाव की समस्या, रिश्तों की जटिलताएँ, आधुनिक जीवन की विसंगतियाँ, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, प्रतीकों का प्रयोग। नई कहानी पारंपरिक कहानी से हटकर नए विषयों और नई शैली में लिखी गई।

प्रश्न 4: कहानी में अकेलेपन और अलगाव की समस्या को कैसे चित्रित किया गया है? [CBSE 2023, 2020]

कहानी में अकेलेपन और अलगाव की समस्या को बहुत गहराई से चित्रित किया गया है। युवक अकेला है, उसके पास कोई नहीं है। वह एक छोटे-से कमरे में अकेला रहता है। शहर की भीड़ में भी वह अकेला है। उसे अपने गाँव की याद आती है, लेकिन वह वहाँ नहीं जा सकता। उसकी यह अकेलापन उसे और तोड़ता है। वह खुद को समाज से अलग-थलग महसूस करता है।

प्रश्न 5: मोहन राकेश की भाषा-शैली की मुख्य विशेषताएँ बताइए। [CBSE 2021]

मोहन राकेश की भाषा-शैली की मुख्य विशेषताएँ हैं - सरलता, सहजता, चित्रात्मकता, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, प्रतीकों का प्रयोग। उनकी भाषा में प्रवाह है, जो पाठक को बाँधे रखता है। वे पात्रों के मन की गहराइयों में उतरते हैं और उनके भावों को बड़ी बारीकी से व्यक्त करते हैं। उनकी शैली में संवेदनशीलता है।

7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 प्रश्न, 5-6 अंक)

प्रश्न 1: 'अंडे के छिलके' कहानी के आधार पर मोहन राकेश की कहानी कला की विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। [CBSE 2023, 2021]

  • प्रतीकों का प्रयोग: मोहन राकेश की कहानी कला की सबसे बड़ी विशेषता है - प्रतीकों का प्रयोग। 'अंडे के छिलके' स्वयं एक सशक्त प्रतीक हैं, जो युवक की निरर्थकता और बेकारी को दर्शाते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: वे पात्रों के मन की गहराइयों में उतरते हैं। इस कहानी में युवक के अकेलेपन, बेचैनी, निराशा का गहरा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण है।
  • यथार्थवादिता: उनकी कहानियों में यथार्थवादिता है। वे जीवन को वैसा ही दिखाते हैं जैसा वह है - उसमें अलंकरण नहीं करते।
  • संवेदनशीलता: उनकी कहानियों में गहरी संवेदनशीलता है। वे अपने पात्रों के दर्द को महसूस करते हैं और उसे शब्द देते हैं।
  • सरल और प्रभावी भाषा: उनकी भाषा सरल है, लेकिन बहुत प्रभावी है। वे कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाते हैं।
  • खुला अंत: उनकी कहानियों का अंत खुला होता है। यह कहानी भी एक सवाल के साथ खत्म होती है, जिसका जवाब पाठक को खुद देना होता है।

प्रश्न 2: 'अंडे के छिलके' कहानी में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या को कैसे उजागर किया गया है? [CBSE 2022]

  • युवक का परिचय: कहानी का युवक शिक्षित है। वह पढ़-लिखकर नौकरी की तलाश में शहर आया है। लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली।
  • गाँव से शहर का पलायन: वह गाँव से शहर आया है, क्योंकि गाँव में उसे रोजगार के अवसर नहीं मिले। यह ग्रामीण पलायन की समस्या को दर्शाता है।
  • दयनीय स्थिति: शहर में उसकी स्थिति दयनीय है। उसके पास न पैसा है, न खाने को। वह भूखा है, लेकिन कुछ नहीं कर सकता।
  • अकेलापन और अलगाव: वह अकेला है, उसके पास कोई नहीं है। यह अकेलापन उसकी बेरोजगारी की पीड़ा को और बढ़ाता है।
  • निरर्थकता का भाव: उसे लगता है कि उसकी पढ़ाई-लिखाई व्यर्थ है, उसका जीवन निरर्थक है। यह शिक्षित बेरोजगारी की सबसे गहरी चोट है।
  • भविष्य की अनिश्चितता: उसे नहीं पता कि आगे क्या होगा। यह अनिश्चितता उसे और तोड़ती है।

प्रश्न 3: 'अंडे के छिलके' और 'दोपहर का भोजन' कहानियों में आए मुख्य पात्रों की स्थिति की तुलना कीजिए। [CBSE 2021]

  • समानताएँ: दोनों ही पात्र गरीबी का शिकार हैं। दोनों के पास खाने को नहीं है। दोनों अकेले हैं - एक शहर में अकेला, दूसरा अपने परिवार में भी अकेला।
  • भूख की समस्या: दोनों ही कहानियों में भूख की समस्या है। 'अंडे के छिलके' में युवक भूखा है। 'दोपहर का भोजन' में मालती भूखी है।
  • संवेदनहीनता: 'दोपहर का भोजन' में पंडित जी संवेदनहीन हैं। 'अंडे के छिलके' में समाज संवेदनहीन है - कोई युवक की मदद नहीं करता।
  • अंतर: 'दोपहर का भोजन' में पारिवारिक संबंधों की समस्या है। 'अंडे के छिलके' में व्यक्तिगत अकेलेपन की समस्या है।
  • प्रतीक: 'दोपहर का भोजन' में भोजन प्रतीक है। 'अंडे के छिलके' में अंडे के छिलके प्रतीक हैं।
  • निष्कर्ष: दोनों ही कहानियाँ गरीबी और अकेलेपन की त्रासदी को उजागर करती हैं, लेकिन अलग-अलग संदर्भों में।

प्रश्न 4: 'अंडे के छिलके' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2020]

  • केंद्रीय प्रतीक: अंडे के छिलके इस कहानी के केंद्रीय प्रतीक हैं। पूरी कहानी इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है।
  • निरर्थकता का प्रतीक: अंडे के छिलके निरर्थकता के प्रतीक हैं। जैसे अंडे के छिलके खाने के बाद फेंक दिए जाते हैं, वैसे ही युवक का जीवन भी बेकार हो गया है।
  • दरिद्रता का प्रतीक: ये छिलके युवक की दरिद्रता के गवाह हैं। उसके पास कुछ नहीं है, सिर्फ ये छिलके हैं।
  • अतीत का प्रतीक: ये छिलके उसके अतीत का प्रतीक हैं - जब उसने अंडे खाए थे, जब उसकी स्थिति कुछ बेहतर थी।
  • युवक की मानसिक स्थिति का प्रतीक: ये छिलके युवक की मानसिक स्थिति को दर्शाते हैं - टूटा हुआ, बिखरा हुआ, बेकार।
  • शीर्षक की सार्थकता: इस प्रकार अंडे के छिलके कहानी के केंद्रीय भाव - निरर्थकता, दरिद्रता, अकेलापन - को बखूबी व्यक्त करते हैं। इसलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।

प्रश्न 5: 'अंडे के छिलके' कहानी में निहित आधुनिक जीवन की विसंगतियों पर प्रकाश डालिए। [CBSE 2019]

  • अकेलापन: आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी विसंगति है - अकेलापन। भीड़ में भी लोग अकेले हैं। कहानी का युवक भी शहर की भीड़ में अकेला है।
  • अलगाव: रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, लोग एक-दूसरे से कट रहे हैं। युवक का किसी से कोई संबंध नहीं है।
  • शिक्षित बेरोजगारी: शिक्षा के बावजूद रोजगार न मिलना एक गंभीर समस्या है। युवक इसी का शिकार है।
  • गाँव-शहर का अंतर: गाँव और शहर के बीच गहरी खाई है। गाँव से शहर आने वाले न तो शहर के हो पाते हैं, न गाँव के।
  • संवेदनहीनता: आधुनिक समाज में संवेदनहीनता बढ़ रही है। कोई किसी की मदद नहीं करता, किसी को किसी की परवाह नहीं।
  • निरर्थकता का भाव: आधुनिक जीवन में लोग अक्सर निरर्थकता महसूस करते हैं। कहानी का युवक भी यही महसूस करता है।

8. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे गए प्रश्न

  • अंडे के छिलकों का प्रतीकात्मक अर्थ - 2023, 2022
  • युवक की मानसिक स्थिति - 2023, 2021
  • अकेलापन और अलगाव - 2022, 2020
  • शिक्षित बेरोजगारी की समस्या - 2021, 2020
  • मोहन राकेश की कहानी कला - 2023, 2021, 2020
  • शीर्षक की सार्थकता - 2022, 2021
  • दोपहर का भोजन से तुलना - 2020, 2019

📈 बोर्ड ट्रेंड

पिछले 5 वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस कहानी से प्रतिवर्ष 6-8 अंकों के प्रश्न आते हैं। लघु उत्तरीय प्रश्न में अंडे के छिलकों के प्रतीकात्मक अर्थ, युवक की मानसिक स्थिति, अकेलापन, नई कहानी की विशेषताओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में मोहन राकेश की कहानी कला, शिक्षित बेरोजगारी की समस्या, दोपहर का भोजन से तुलना, शीर्षक की सार्थकता और आधुनिक जीवन की विसंगतियों पर प्रश्न आते हैं।

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखक - मोहन राकेश (1925-1972)
  • कहानी - अंडे के छिलके
  • पुस्तक - अंतराल भाग 1
  • काव्यधारा - नई कहानी
  • प्रमुख रचनाएँ - अंडे के छिलके, आषाढ़ का एक दिन, आधे-अधूरे
  • मुख्य विषय - अकेलापन, अलगाव, शिक्षित बेरोजगारी, निरर्थकता
  • केंद्रीय प्रतीक - अंडे के छिलके

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"जेब में अंडे के कुछ छिलके थे।"

"अकेलापन, बस अकेलापन।"

"भूख से पेट जल रहा था।"

"क्या मैं भी इन छिलकों की तरह बेकार हूँ?"

9. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 2 अंक प्रश्न (अति लघु उत्तरीय)

एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दें। तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित प्रश्न होते हैं। उदाहरण: प्रश्न - 'अंडे के छिलके' कहानी के लेखक कौन हैं? उत्तर - मोहन राकेश।

📝 3-4 अंक प्रश्न (लघु उत्तरीय)

परिचय (1-2 वाक्य) + मुख्य भाग (3-4 बिंदु) + निष्कर्ष (1 वाक्य)। प्रत्येक बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें। उदाहरण: प्रश्न - कहानी में अंडे के छिलके किसका प्रतीक हैं? उत्तर - परिचय में बताएँ कि अंडे के छिलके प्रतीक हैं। फिर निरर्थकता का प्रतीक, दरिद्रता का प्रतीक, अतीत का प्रतीक - इन बिंदुओं पर व्याख्या करें। निष्कर्ष में कहें कि वे युवक की मानसिक स्थिति के प्रतीक हैं।

📝 5-6 अंक प्रश्न (दीर्घ उत्तरीय)

चरित्र-चित्रण के लिए: प्रस्तावना (पात्र का परिचय) + मुख्य भाग (चरित्र की विशेषताएँ उदाहरण सहित) + कहानी में भूमिका + निष्कर्ष।

विचारात्मक प्रश्नों के लिए: प्रस्तावना + विषय की व्याख्या (कम से कम 4-5 बिंदु, हर बिंदु को कहानी के प्रसंगों से स्पष्ट करें) + निष्कर्ष।

तुलनात्मक प्रश्नों के लिए: दोनों का संक्षिप्त परिचय + समानताएँ + असमानताएँ + निष्कर्ष।

10. हब लिंक



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