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अलंकार की परिभाषा (Definition of Alankar) | Hindi Grammar | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 14 JULY 2026

काव्य-पाठ के दौरान मैंने एक पंक्ति सुनाई – "मुख चाँद है, नयन तारे हैं।" कक्षा ८ का एक छात्र उछलकर बोला – "सर, यह तो सच नहीं है – मुख चाँद नहीं होता!" मैंने मुस्कुराकर कहा – "बिल्कुल – यह सच नहीं है – पर यह कविता है – यहाँ कवि ने सौंदर्य बढ़ाने के लिए मुख को चाँद कहा है – यह कोई झूठ नहीं, बल्कि अलंकार है।" बच्चे हैरान रह गए – उन्हें पता चला कि कवि बात को सजाने के लिए अतिशयोक्ति, समानता, या विरोधाभास का सहारा लेता है – और इन सबको ही अलंकार कहते हैं। अलंकार (Figures of Speech) हिंदी साहित्य और व्याकरण का वह सौंदर्य-पक्ष है – जो भाषा को सरल, सुंदर, और प्रभावशाली बनाता है। इस पोस्ट में हम कक्षा 8-9 के स्तर पर अलंकार की परिभाषा, उसके प्रकार, और बुनियादी पहचान – को सरल उदाहरणों और अभ्यास के साथ समझेंगे – ताकि आप काव्य और साहित्य को गहराई से समझ सकें और अपनी भाषा को सजीव बना सकें।

✅ अनुशंसित: कक्षा 8-9 | CBSE एवं UP Board



1. अलंकार क्या है? – परिभाषा और बुनियादी समझ

अलंकार (Figure of Speech) – वह साधन जो भाषा या साहित्य को सुंदर, प्रभावशाली, और रोचक बनाता है – अलंकार कहलाता है। 'अलंकार' शब्द 'अलम्' + 'कार' से बना है – जिसका अर्थ है – "सजाने की क्रिया" – जैसे हम गहनों से अपने शरीर को सजाते हैं – वैसे ही अलंकार भाषा को सजाते हैं। कवि और लेखक अपनी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग करते हैं – ताकि पाठक पर गहरा प्रभाव पड़े और भाषा सरस, मधुर और रोचक लगे।

अलंकार की सरल परिभाषा – “भाषा को सुंदर, प्रभावशाली, और रोचक बनाने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले शब्द-विन्यास, अर्थ-विन्यास, या शैलीगत साधन अलंकार कहलाते हैं।”

उदाहरण –
  • “मुख चाँद है।” – यहाँ मुख को चाँद कहा गया – यह उपमा अलंकार है (समानता)।
  • “सागर-सी गहरी आँखें।” – आँखों की गहराई सागर से – उपमा
  • “वहाँ हजारों लोग थे।” – सामान्य बात – पर यदि कहें “वहाँ लाखों लोग थे” – तो अतिशयोक्ति अलंकार।

अलंकार क्यों सीखें? – अलंकार कविता, कहानी, निबंध, और भाषण – हर जगह काम आते हैं – ये आपकी भाषा को प्रभावशाली बनाते हैं – और साहित्य को गहराई से समझने में मदद करते हैं। कक्षा 8-9 में अलंकारों का परिचय बहुत ज़रूरी है – क्योंकि यहीं से साहित्य के सौंदर्य-पक्ष की समझ विकसित होती है।

2. अलंकार क्यों ज़रूरी हैं? – साहित्य में सौंदर्य और प्रभाव

अलंकार भाषा को साधारण से असाधारण बना देते हैं – आइए देखें कि ये क्यों ज़रूरी हैं:

  • भाषा को सुंदर बनाना – “राम बहुत तेज दौड़ता है” – साधारण – “राम हवा की तरह दौड़ता है” – अलंकार से सुंदर।
  • अर्थ को गहरा बनाना – “वह बहुत दुखी था” – साधारण – “उसका दिल पत्थर हो गया था” – अलंकार ने दुख को गहरा दिखाया।
  • पाठक पर प्रभाव डालना – “शेर दहाड़ता है” – साधारण – “शेर की दहाड़ से जंगल काँप उठा” – अतिशयोक्ति ने प्रभाव बढ़ाया।
  • कविता को यादगार बनाना – अलंकारों से भरी पंक्तियाँ लंबे समय तक याद रहती हैं – जैसे “मुख चाँद है” – यह आसानी से याद रहता है।
मज़ेदार बात – अलंकार केवल कविता में नहीं – बल्कि रोज़मर्रा की बातचीत में भी आते हैं – “तुम तो आसमान छू रहे हो!” – यह अतिशयोक्ति है – और हम रोज़ बोलते हैं – बस पता नहीं चलता!

3. अलंकारों के मुख्य प्रकार – शब्दालंकार और अर्थालंकार

अलंकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –

प्रकार परिभाषा उदाहरण
शब्दालंकार जहाँ शब्दों के माध्यम से सौंदर्य आता है – शब्दों की बनावट, ध्वनि, या पुनरावृत्ति से “मधुर-मधुर मुस्कान” – अनुप्रास (म की आवृत्ति)
अर्थालंकार जहाँ अर्थ के माध्यम से सौंदर्य आता है – अर्थ की गहराई, समानता, विरोध, या अतिशयोक्ति से “मुख चाँद है” – उपमा (समानता)

शब्दालंकार – इसमें शब्द-विन्यास महत्वपूर्ण है – जैसे एक ही वर्ण की पुनरावृत्ति, एक ही शब्द को बार-बार लाना, या शब्दों में तुक/लय। अर्थालंकार – इसमें अर्थ महत्वपूर्ण है – जैसे किसी को किसी से तुलना करना, विरोध दिखाना, या किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना।

कक्षा 8-9 के स्तर पर हम दोनों प्रकारों का परिचय लेंगे – और कुछ प्रमुख अलंकारों को पहचानना सीखेंगे।

4. कुछ प्रमुख अलंकारों का संक्षिप्त परिचय

नीचे कुछ प्रमुख अलंकार दिए गए हैं – जिनसे आपका परिचय होना चाहिए:

अलंकार प्रकार परिभाषा (एक पंक्ति में) उदाहरण
उपमा अर्थालंकार दो वस्तुओं की समानता दिखाना “मुख चाँद है”
रूपक अर्थालंकार उपमा से एक कदम आगे – एक को ही दूसरा मान लेना “मुख चाँद” (मुख ही चाँद है)
अनुप्रास शब्दालंकार एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति “मधुर-मधुर मुस्कान”
अतिशयोक्ति अर्थालंकार किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना “हजारों लोग आए” (थोड़े ही थे)
विरोधाभास अर्थालंकार विरोधी बातों को एक साथ दिखाना “अंधेरे में उजाला”

इन अलंकारों की गहरी समझ हम आगे की पोस्टों में करेंगे – इस पोस्ट में हमने इनका संक्षिप्त परिचय लिया है।

5. अलंकार पहचानने की ट्रिक्स और सामान्य गलतियाँ

अलंकारों को पहचानना शुरू में थोड़ा मुश्किल लगता है – पर कुछ ट्रिक्स से यह आसान हो जाता है:

  • ट्रिक 1 – 'जैसे', 'समान', 'सा' शब्द देखें: अगर वाक्य में 'मुख चाँद जैसा है' आए – तो उपमा – क्योंकि तुलना की जा रही है।
  • ट्रिक 2 – कोई वर्ण बार-बार आ रहा है? “मधुर-मधुर मुस्कान” – 'म' बार-बार – अनुप्रास (शब्दालंकार)।
  • ट्रिक 3 – क्या बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है? “हजारों लोग थे” – अतिशयोक्ति – अगर सच में हज़ार नहीं थे।
  • ट्रिक 4 – दो विरोधी बातें? “अंधेरे में उजाला” – विरोधाभास

सामान्य गलतियाँ –

  • गलती – उपमा और रूपक में भ्रम: “मुख चाँद जैसा है” = उपमा – “मुख चाँद है” = रूपक – ध्यान से देखें – 'जैसा' शब्द है या नहीं?
  • गलती – सभी अतिशयोक्ति को अतिशयोक्ति न समझें: “राम बहुत तेज़ दौड़ता है” – यह अतिशयोक्ति नहीं – जब तक कि “हवा से भी तेज़” न कहा जाए।
  • गलती – शब्दालंकार और अर्थालंकार का अंतर न समझना: शब्दालंकार में शब्द महत्वपूर्ण – अर्थालंकार में अर्थ – दोनों अलग हैं।
याद रखने की ट्रिक – अलंकार पहचानने का सबसे आसान तरीका – वाक्य को दो बार पढ़ें – पहली बार सामान्य – दूसरी बार सौंदर्य की दृष्टि से – अगर लगे कि बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, तुलना की गई है, या विरोध है – तो वहाँ अलंकार है।

6. काव्य रस और अलंकार – गहरा संबंध

रस और अलंकार – दोनों साहित्य के सौंदर्य-पक्ष हैं – पर इनमें अंतर है:

  • रस – पाठक या श्रोता के मन में उत्पन्न होने वाली अनुभूति – जैसे प्रेम, करुणा, हास्य, वीरता – यह भावना है।
  • अलंकार – रस को व्यक्त करने का साधन – जैसे रस = भावना – अलंकार = उसे व्यक्त करने का शब्द-जाल

उदाहरण –

  • भाव: “मुझे बहुत खुशी हुई।” – साधारण
  • रस + अलंकार: “मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा – मैं तो आसमान में उड़ रहा था!” – यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार ने हास्य रस को व्यक्त किया।

कविता, कहानी, और नाटक में रस और अलंकार दोनों साथ-साथ आते हैं – रस भावना है – अलंकार उसे सजाने का तरीका। कक्षा 8-9 में रस और अलंकार दोनों का परिचय दिया जाता है – पर इस पोस्ट में हमने अलंकार पर ध्यान दिया है।



हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “मुख चाँद है।” – इसमें कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: रूपक अलंकार – क्योंकि 'मुख' को ही 'चाँद' कहा गया है – 'जैसा' नहीं – इसलिए उपमा नहीं, रूपक है।
उदाहरण 2
प्रश्न: “मधुर-मधुर मुस्कान” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: अनुप्रास अलंकार – 'म' वर्ण की बार-बार आवृत्ति – यह शब्दालंकार है।
उदाहरण 3
प्रश्न: “मैंने हज़ारों लोगों को देखा।” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: अतिशयोक्ति अलंकार – 'हज़ारों' संख्या बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है – यह अर्थालंकार है।
उदाहरण 4
प्रश्न: “मुख चाँद जैसा है।” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: उपमा अलंकार – क्योंकि 'जैसा' शब्द से तुलना की गई है – यह अर्थालंकार है।
उदाहरण 5
प्रश्न: “अंधेरे में उजाला” – इसमें कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: विरोधाभास अलंकार – 'अंधेरा' और 'उजाला' दो विरोधी बातें एक साथ – यह अर्थालंकार है।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“वह शेर की तरह लड़ता है।” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: उपमा अलंकार – 'की तरह' से तुलना – अर्थालंकार।
प्रश्न 2
“चमक-चमक चाँदनी” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: अनुप्रास अलंकार – 'च' वर्ण की आवृत्ति – शब्दालंकार।
प्रश्न 3
“उसने लाखों सितारे गिन लिए।” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: अतिशयोक्ति अलंकार – 'लाखों' अतिशयोक्ति – अर्थालंकार।
प्रश्न 4
“राम सूरज है।” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: रूपक अलंकार – 'राम' को ही 'सूरज' कहा – 'जैसा' नहीं – अर्थालंकार।
प्रश्न 5
“मौन में शोर” – कौन-सा अलंकार है?
उत्तर देखें
उत्तर: विरोधाभास अलंकार – 'मौन' और 'शोर' विरोधी – अर्थालंकार।

अलंकार – भाषा को सजाने की कला

अलंकार हिंदी भाषा और साहित्य की आत्मा हैं – ये भाषा को सुंदर, प्रभावशाली और जीवंत बनाते हैं – 'राम बहुत तेज़ दौड़ता है' – साधारण – 'राम हवा की तरह दौड़ता है' – अलंकार से सजी भाषा। इस पोस्ट में हमने  अलंकार और  शब्दालंकार की बुनियाद पर अलंकारों की पूरी परिभाषा, प्रकार और पहचान को सरल उदाहरणों के साथ समझाया है – अब आप काव्य और साहित्य को गहराई से समझ सकते हैं और अपनी भाषा को सजीव, प्रभावशाली और रोचक बना सकते हैं।

याद रखें – जितना अधिक आप कविता, कहानी और निबंध पढ़ेंगे – उतनी ही अच्छी आपकी अलंकारों की समझ होगी। काव्य-पाठ करें – अलंकारों को पहचानें – और अपनी भाषा को सुंदर, प्रभावशाली और यादगार बनाएँ – यह कौशल आपको जीवन भर काम आएगा – चाहे साहित्य हो, परीक्षा हो, या दैनिक अभिव्यक्ति।

📝 अलंकार अभ्यास – कक्षा 8-9

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 काव्य-पंक्तियाँ दी गई हैं – जिनमें आपको विभिन्न अलंकारों (उपमा, रूपक, अनुप्रास, अतिशयोक्ति, विरोधाभास) को पहचानना है – साथ ही कुछ वाक्यों में अलंकार का नाम लिखना है और कुछ में अलंकार युक्त नए वाक्य बनाने हैं। अंत में उत्तर कुंजी से अपनी जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

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