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अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले – निदा फ़ाज़ली (स्पर्श) – पर्यावरण, सहअस्तित्व और मानवीय संवेदनशीलता का चिंतन | कक्षा 10 | GPN

📌 अनुक्रमणिका

इस पाठ को गहराई से समझने के लिए छात्र कक्षा 10 हिंदी साहित्य (कोर) के अन्य अध्यायों का अध्ययन भी कर सकते हैं।

1. परिचय

📝 लेखक परिचय

निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था। उनका बचपन ग्वालियर में बीता। वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में सरलता से किसी के भी दिलोदिमाग में घर कर सकने वाली कविता करने में उन्हें महारत हासिल थी। वही निदा फ़ाज़ली अपनी गद्य रचनाओं में शेर-ओ-शायरी पिरोकर बहुत कुछ को थोड़े में कह देने के मामले में अपने किस्म के अकेले गद्यकार हैं।

उनकी कविता की पहली पुस्तक 'लफ़्जों का पुल' है। शायरी की किताब 'खोया हुआ सा कुछ' के लिए 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी आत्मकथा का पहला भाग 'दीवारों के बीच' और दूसरा 'दीवारों के पार' शीर्षक से प्रकाशित हो चुका है। 8 फरवरी 2016 को उनका निधन हो गया।

2. पाठ प्रवेश

कुदरत ने यह धरती उन तमाम जीवधारियों के लिए अता फरमाई थी जिन्हें खुद उसी ने जन्म दिया था। लेकिन हुआ यह कि आदमी नाम के कुदरत के सबसे अजीम करिश्मे ने धीरे-धीरे पूरी धरती को ही अपनी जागीर बना लिया और अन्य तमाम जीवधारियों को दरबदर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अन्य जीवधारियों की या तो नस्लें खत्म होती गई या उन्हें अपना ठौर-ठिकाना छोड़कर कहीं और जाना पड़ा या फिर आज भी वे एक आशियाने की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं।

इतना भर हुआ रहा होता तब भी गनीमत होती, लेकिन आदमी नाम के इस जीव की सब कुछ समेट लेने की भूख यहीं पूरी नहीं हुई। अब वह अन्य प्राणियों को ही नहीं, खुद अपनी जात को भी बेदखल करने से ज़रा भी परहेज नहीं करता। आलम यह है कि उसे न तो किसी के सुख-दुख की चिंता है, न किसी को सहारा या सहयोग देने की मंशा ही।

3. सारांश

लेखक निदा फ़ाज़ली इस पाठ के माध्यम से मानव के स्वार्थी स्वभाव और उसके कारण पर्यावरण में आए असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हैं। पाठ की शुरुआत में वे धार्मिक ग्रंथों की तीन घटनाओं का उल्लेख करते हैं – सुलैमान नबी द्वारा चींटियों को रास्ता देना, शेख अयाज़ के पिता द्वारा भोजन छोड़कर एक च्योंटे को उसके घर तक पहुँचाना, और नूह नबी द्वारा एक घायल कुत्ते को दुत्कारने पर जीवनभर पश्चाताप करना। ये तीनों घटनाएँ बताती हैं कि कैसे पहले के लोग छोटे-से-छोटे जीव के प्रति भी संवेदनशील थे।

इसके बाद लेखक वर्तमान परिस्थितियों की ओर मुड़ते हैं। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण ने प्रकृति को नुकसान पहुँचाया है। समुद्र को पीछे धकेलकर इमारतें खड़ी की गईं, पेड़ काटे गए, पक्षी अपने घरों से बेघर हो गए। लेखक अपनी माँ की याद करते हैं जो सूरज ढलने के बाद पेड़ों से पत्ते तोड़ने से मना करती थीं, और कबूतर के अंडे टूटने पर प्रायश्चित के लिए रोज़ा रखती थीं।

अंत में लेखक की पत्नी द्वारा कबूतरों को घर से निकालने की घटना आती है – जो दर्शाती है कि आज के समय में दूसरों के दुख से दुखी होने वाले लोग कितने कम हो गए हैं।

4. पात्र परिचय

👤 लेखक की माँ

स्वभाव: अत्यंत संवेदनशील, दयालु, प्रकृति और जीव-जंतुओं से प्रेम करने वाली, धार्मिक प्रवृत्ति की, अपराधबोध से ग्रसित होने वाली।

भूमिका: लेखक को बचपन से ही प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता सिखाने वाली।

प्रमुख विशेषताएँ: सूरज ढलने के बाद पत्ते तोड़ने से मना करती थीं, नदी को सलाम करने की सीख देती थीं, कबूतर के अंडे टूटने पर रोज़ा रखकर प्रायश्चित किया।

👤 लेखक की पत्नी

स्वभाव: व्यावहारिक, अपने घर की सुविधा को प्राथमिकता देने वाली, पक्षियों से परेशान होने वाली।

भूमिका: वर्तमान युग की उस मानसिकता का प्रतीक जहाँ सुविधा के लिए दूसरों के दुख को अनदेखा कर दिया जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ: कबूतरों के आने-जाने से परेशान होकर खिड़की में जाली लगवा दी।

🐜 सुलैमान (बाइबिल/कुरआन का पात्र)

स्वभाव: दयालु, न्यायप्रिय, सभी प्राणियों की भाषा समझने वाला, उनके दुख को समझने वाला।

भूमिका: चींटियों को डरते देख उन्हें आश्वस्त करते हैं – "मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबके लिए मुहब्बत हूँ।"

🐜 शेख अयाज़ के पिता

स्वभाव: अत्यंत संवेदनशील, छोटे से जीव के प्रति भी सहानुभूति रखने वाले।

भूमिका: भोजन करते समय अपनी बाजू पर च्योंटा देखकर भोजन छोड़ देते हैं और उसे उसके घर (कुएँ) तक पहुँचाते हैं।

🐕 नूह (पैगंबर)

स्वभाव: शुरू में कुत्ते को 'गंदा' कहकर दुत्कार देते हैं, लेकिन कुत्ते के जवाब से दुखी होकर जीवनभर रोते रहते हैं।

भूमिका: यह दर्शाते हैं कि सच्चा इंसान अपनी गलती का एहसास होने पर उसका प्रायश्चित करता है।

5. शब्दार्थ

शब्दअर्थवाक्य प्रयोग
अता फरमानादेना, प्रदान करनाकुदरत ने धरती सबको अता फरमाई थी।
जागीरसंपत्ति, अधिकार क्षेत्रमनुष्य ने धरती को अपनी जागीर बना लिया।
दरबदरभटकता हुआ, बेघरपशु-पक्षी दरबदर हो गए।
गनीमतअच्छा सौभाग्य, लाभइतना होता तो गनीमत थी।
बेदखलनिकाल देना, घर से बाहर करनामनुष्य दूसरों को बेदखल करने से नहीं हिचकता।
लश्करसेना, फौजसुलैमान अपने लश्कर के साथ जा रहे थे।
लकबउपनाम, पद सूचक नामलशकर को नूह के लकब से याद किया जाता है।
दुत्कारनाअपमानजनक ढंग से हटानानूह ने कुत्ते को दुत्कारा।
प्रतीकात्मकप्रतीक के रूप मेंमहाभारत में कुत्ता प्रतीकात्मक रूप में था।
दालानबरामदापहले बड़े-बड़े दालानों में सब रहते थे।
सिमटनासिकुड़ना, संकुचित होनाजीवन डिब्बे जैसे घरों में सिमट गया है।
जलजलेभूकंपप्रकृति के असंतुलन से जलजले आ रहे हैं।
सैलाबबाढ़बेवक्त की बारिश से सैलाब आ रहे हैं।
अजीजप्रिय, प्यारासमुद्र भी उनका अजीज था।
मजारदरगाह, कब्रउनकी मजार पर लोग आते हैं।
अज़ाननमाज़ के समय की सूचनामाँ अज़ान के समय नमाज़ पढ़ती थीं।
डेराअस्थायी पड़ाव, ठिकानापक्षियों ने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।
अपने इंग्लिश एवं हिंदी व्याकरण (Grammar) को मजबूत बनाने हेतु छात्र हिंदी व्याकरण - रचना कौशल वर्कशीट्स (Writing Skills) तथा Class 10 Advanced English Grammar Worksheets का अध्ययन भी कर सकते हैं।

6. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के लेखक कौन हैं?

✅ (A) निदा फ़ाज़ली

⚫ (B) प्रह्लाद अग्रवाल

⚫ (C) लीलाधर मंडलोई

⚫ (D) सीताराम सेकसरिया

2. निदा फ़ाज़ली का जन्म कहाँ हुआ था?

✅ (A) दिल्ली में

⚫ (B) ग्वालियर में

⚫ (C) जबलपुर में

⚫ (D) कोलकाता में

3. सुलैमान अपने लश्कर के साथ कहाँ से गुज़र रहे थे?

✅ (A) एक रास्ते से

⚫ (B) समुद्र के किनारे से

⚫ (C) जंगल से

⚫ (D) नदी के पास से

4. घोड़ों की टापों की आवाज़ किसने सुनी?

✅ (A) चींटियों ने

⚫ (B) सुलैमान ने

⚫ (C) घोड़ों ने

⚫ (D) सैनिकों ने

5. सुलैमान ने चींटियों से क्या कहा?

✅ (A) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबके लिए मुहब्बत हूँ

⚫ (B) डरो मत, मैं तुम्हारा रखवाला हूँ

⚫ (C) अपने-अपने बिलों में चले जाओ

⚫ (D) मैं तुम सबको बचाऊँगा

6. शेख अयाज़ किस भाषा के महाकवि थे?

✅ (A) सिंधी

⚫ (B) उर्दू

⚫ (C) हिंदी

⚫ (D) फ़ारसी

7. शेख अयाज़ के पिता की बाजू पर क्या रेंग रहा था?

✅ (A) काला च्योंटा

⚫ (B) छिपकली

⚫ (C) बिच्छू

⚫ (D) मकड़ी

8. शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर कहाँ गए?

✅ (A) कुएँ पर

⚫ (B) नदी पर

⚫ (C) जंगल में

⚫ (D) घर में

9. नूह का असली नाम क्या था?

✅ (A) लशकर

⚫ (B) सुलैमान

⚫ (C) इब्राहीम

⚫ (D) मूसा

10. लेखक की माँ सूरज ढलने के बाद क्या करने से मना करती थीं?

✅ (A) पेड़ों के पत्ते तोड़ने से

⚫ (B) घर से बाहर जाने से

⚫ (C) नदी में नहाने से

⚫ (D) पक्षियों को दाना डालने से

7. लघु उत्तरीय प्रश्न (25-30 शब्द)

प्रश्न 1: अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद करते हैं क्योंकि 'नूह' नामक पैगंबर का असली नाम लशकर ही था। वे दूसरों के दुख में दुखी रहते थे। एक घायल कुत्ते को दुत्कारने पर उन्होंने जीवनभर पश्चाताप किया।

प्रश्न 2: लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

लेखक की माँ सूरज ढलने के बाद पेड़ों से पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका कहना था कि उस समय पेड़ रोते हैं और उन्हें दुख पहुँचाना ठीक नहीं है।

प्रश्न 3: प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

प्रकृति के असंतुलन के कारण गर्मी में अत्यधिक गर्मी, बेवक्त की बारिश, भूकंप, बाढ़, तूफान और नित नए रोग उत्पन्न हो गए हैं। मानव जीवन बहुत कठिन हो गया है।

प्रश्न 4: लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?

लेखक के घर में कबूतर के दो अंडे थे। एक बिल्ली ने तोड़ दिया, दूसरा बचाने के चक्कर में माँ के हाथ से गिरकर टूट गया। इस अपराध के प्रायश्चित के लिए उन्होंने पूरे दिन का रोज़ा रखा।

प्रश्न 5: लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया?

ग्वालियर में बड़े-बड़े घर, दालान और आँगन होते थे। बंबई में डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमट गया है। जंगल कट गए, पशु-पक्षी बेघर हो गए। पहले सब मिलकर रहते थे, अब अलग-अलग रहने लगे हैं।

प्रश्न 6: 'डेरा डालने' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

'डेरा डालने' का अर्थ है अस्थायी रूप से कहीं रहना। पेड़ कट जाने के कारण पक्षी अपना घोंसला नहीं बना पाते, इसलिए वे इमारतों के छज्जों, रोशनदानों में डेरा डाल लेते हैं।

प्रश्न 7: शेख अयाज़ के पिता अपनी बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए?

उन्होंने सोचा कि उन्होंने एक घर वाले (च्योंटे) को बेघर कर दिया है। वह च्योंटा कुएँ पर रहता था। वे उसे वापस उसके घर तक पहुँचाने के लिए भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए।

8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (50-60 शब्द)

प्रश्न 1: बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा है?

बढ़ती जनसंख्या के कारण समुद्र को पीछे धकेलकर इमारतें खड़ी की गईं। पेड़ काटकर रास्ते बनाए गए। प्रदूषण फैलने से पंछी बस्तियाँ छोड़कर भाग गए। इस असंतुलन के कारण मौसम अनिश्चित हो गया, बाढ़, भूकंप, तूफान जैसी आपदाएँ बढ़ गईं और नई-नई बीमारियाँ उत्पन्न हो गईं।

प्रश्न 2: लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?

लेखक के घर में कबूतरों के जोड़े ने घोंसला बना लिया था। वे अपने बच्चों को दाना खिलाने आते-जाते थे, जिससे घर का सामान गिर जाता था। कभी पुस्तकालय में घुसकर किताबें खराब कर देते थे। इस परेशानी से तंग आकर लेखक की पत्नी ने खिड़की में जाली लगवा दी।

प्रश्न 3: समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

बिल्डरों ने कई सालों तक समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी ज़मीन हथिया ली। समुद्र सिमटता गया, फिर उसने पहले टाँगें समेटीं, फिर उकडू बैठा, फिर खड़ा हो गया। फिर भी जगह कम पड़ने लगी तो वह गुस्सा हो गया। उसने अपना गुस्सा निकालने के लिए तीन जहाजों को बाहर फेंक दिया – एक वर्ली में, दूसरा बांद्रा के कार्टर रोड के सामने और तीसरा गेटवे ऑफ इंडिया के पास।

प्रश्न 4: 'मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान' – इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

ये पंक्तियाँ कुत्ते के मुँह से कही गई हैं। कुत्ता नूह से कहता है कि न तो मैं अपनी मर्जी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी मर्जी से इंसान हो। बनाने वाला सबका एक है। जब सब एक ही मिट्टी से बने हैं, तो किसी को किसी से ऊँचा-नीचा समझना गलत है। सभी इंसान और जीव-जंतु समान हैं।

प्रश्न 5: 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' पाठ के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है?

लेखक ने यह संदेश दिया है कि आज के मनुष्य में दूसरों के दुख-दर्द को समझने की क्षमता समाप्त हो गई है। वह अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति और दूसरे प्राणियों को नष्ट कर रहा है। हमें सुलैमान, शेख अयाज़ के पिता और नूह की तरह सभी प्राणियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम भयावह होता है।

9. आशय स्पष्ट कीजिए

1. "नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।"

प्रकृति भी मनुष्य के अत्याचारों को सहन करती है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होती है। जब मनुष्य उस सीमा को पार कर देता है, तो प्रकृति प्रचंड रूप धारण कर लेती है। बंबई में समुद्र द्वारा जहाजों को बाहर फेंकना इसी का उदाहरण है।

2. "जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।"

महान व्यक्ति कभी जल्दी नहीं क्रोधित होते। उनमें धैर्य और सहनशीलता होती है। जैसे-जैसे व्यक्ति का व्यक्तित्व बड़ा होता है, वैसे-वैसे वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना छोड़ देता है।

3. "इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चिरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।"

मनुष्य ने शहरीकरण के नाम पर जंगल काट डाले, पेड़ों को हटा दिया। इससे पक्षी और जानवर बेघर हो गए। कुछ ने दूसरी जगह शरण ली, तो कुछ ने इमारतों के छज्जों, रोशनदानों में ही डेरा डाल लिया।

4. "शेख अयाज़ के पिता बोले, 'नहीं, यह बात नहीं है। मैंने एक घरबाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।'"

शेख अयाज़ के पिता ने अपनी बाजू पर रेंगते च्योंटे को देखा तो उन्हें लगा कि वह च्योंटा अपने घर (कुएँ) से दूर आ गया है, इसलिए उन्होंने भोजन छोड़कर पहले उसे वापस उसके घर पहुँचाने का निश्चय किया। यह छोटे से जीव के प्रति उनकी अथाह संवेदनशीलता को दर्शाता है।

10. परीक्षा दृष्टि बिंदु

📊 बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न

  • सुलैमान और चींटियों की घटना
  • शेख अयाज़ के पिता का च्योंटे के प्रति व्यवहार
  • नूह नबी का कुत्ते से संवाद और पश्चाताप
  • लेखक की माँ की प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदनशीलता
  • लेखक की पत्नी द्वारा कबूतरों को घर से निकालना
  • बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव
  • समुद्र का गुस्सा और प्रकृति का असंतुलन
  • पाठ का केंद्रीय संदेश – दूसरों के दुख से दुखी होने वालों का अभाव

💡 याद रखने योग्य तथ्य

  • लेखक: निदा फ़ाज़ली (जन्म 1938, दिल्ली – निधन 2016)
  • प्रमुख रचनाएँ: 'लफ़्जों का पुल', 'खोया हुआ सा कुछ', 'दीवारों के बीच', 'दीवारों के पार'
  • पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार (1999)
  • पाठ में तीन प्रमुख घटनाएँ: सुलैमान-चींटियाँ, शेख अयाज़ के पिता-च्योंटा, नूह-कुत्ता
  • लेखक की माँ: सूरज ढलने के बाद पत्ते तोड़ने से मना, कबूतर के अंडे टूटने पर रोज़ा
  • लेखक की पत्नी: कबूतरों को घर से निकालने के लिए जाली लगवाना

📌 महत्वपूर्ण उद्धरण

"मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं, सबके लिए मुहब्बत हूँ।" – सुलैमान

"मैंने एक घरबाले को बेघर कर दिया है।" – शेख अयाज़ के पिता

"न मैं अपनी मर्जी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इंसान हो। बनाने वाला सबका तो वही एक है।" – कुत्ता

"मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान। किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान।"

"अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले।"

11. उत्तर लेखन मार्गदर्शन

📝 इस अध्याय के लिए विशेष टिप्स

तीन प्रमुख घटनाओं की व्याख्या: पाठ में तीन धार्मिक/ऐतिहासिक घटनाएँ हैं – सुलैमान-चींटियाँ (दयालुता), शेख अयाज़ के पिता-च्योंटा (छोटे जीव के प्रति संवेदनशीलता), नूह-कुत्ता (गलती का पश्चाताप)। उत्तर में इनका उल्लेख करें।

लेखक की माँ और पत्नी का विरोधाभास: माँ प्रकृति और जीवों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं, जबकि पत्नी व्यावहारिक हैं। यह विरोधाभास वर्तमान समय में दयालुता के घटते स्तर को दर्शाता है।

पर्यावरण असंतुलन पर प्रश्न: उत्तर में शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि, वनों की कटाई, प्रदूषण और उनके परिणाम (बाढ़, भूकंप, मौसम अनिश्चितता) का उल्लेख करें।

केंद्रीय संदेश: आज दूसरों के दुख से दुखी होने वाले लोग नहीं रहे। हमें सुलैमान, शेख अयाज़ के पिता, नूह और लेखक की माँ की तरह सभी प्राणियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

12. हब लिंक



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