सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 22 JUNE 2026
क्या आपको पता है कि एक छोटा-सा शब्द 'अरे!' या 'वाह!' पूरे वाक्य का मूड बदल सकता है – बिना किसी संज्ञा, सर्वनाम, या क्रिया के? जैसे – “वाह! क्या सुंदर दृश्य है!” – यहाँ 'वाह' ने बिना किसी क्रिया के प्रशंसा व्यक्त कर दी। या “अरे! तुम यहाँ!” – 'अरे' ने आश्चर्य दिखा दिया। हिंदी व्याकरण में ऐसे शब्द जो आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, या किसी भावना को व्यक्त करते हैं – बिना किसी विकार के – विस्मयादिबोधक (Interjection) कहलाते हैं। ये अव्यय हैं – इसलिए कभी नहीं बदलते – चाहे वाक्य कैसा भी हो। इस पोस्ट में हम विस्मयादिबोधक की परिभाषा, उसके प्रकार, उदाहरण, पहचान के नियम, और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 7‑8 के छात्रों के लिए बनाई गई है, लेकिन कोई भी इसे आसानी से समझ सकता है।
✅ अनुशंसित: कक्षा 7-8 | CBSE एवं UP Board
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1. विस्मयादिबोधक – परिभाषा एवं परिचय
विस्मयादिबोधक (Interjection) वे शब्द हैं जो आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, भय, या किसी अन्य भावना को अचानक व्यक्त करते हैं। ये शब्द वाक्य के अन्य शब्दों से स्वतंत्र होते हैं – इनका वाक्य के अन्य भागों से कोई व्याकरणिक संबंध नहीं होता। विस्मयादिबोधक अव्यय हैं – इसलिए कभी नहीं बदलते।
उदाहरण –
- आश्चर्य: “अरे! तुम यहाँ!” – 'अरे' ने आश्चर्य दिखाया।
- हर्ष/प्रशंसा: “वाह! क्या सुंदर दृश्य है!” – 'वाह' ने प्रशंसा/हर्ष दिखाया।
- शोक/दुख: “हाय! मेरा बच्चा!” – 'हाय' ने शोक दिखाया।
- घृणा: “छिः! यह कितना गंदा है!” – 'छिः' ने घृणा दिखाई।
- भय: “हैं! वह आ गया!” – 'हैं' ने भय/चौंकना दिखाया।
विस्मयादिबोधक वाक्य को भावनात्मक, जीवंत और प्रभावी बनाता है – यह पाठक/श्रोता का ध्यान तुरंत खींचता है।
2. विस्मयादिबोधक के प्रकार – भावनाओं के अनुसार
विस्मयादिबोधक भावना के आधार पर 5 मुख्य प्रकार के होते हैं –
उदाहरण: “अरे! तुम आ गए!”
2. हर्ष/प्रशंसा सूचक: जब खुशी, उत्साह, या प्रशंसा व्यक्त करनी हो – वाह! शाबाश! बहुत अच्छा! जय हो!
उदाहरण: “वाह! तुमने तो कमाल कर दिया!”
3. शोक/दुख सूचक: जब दुख, पीड़ा, या अफसोस व्यक्त करना हो – हाय! अफसोस! ओह! हे राम!
उदाहरण: “हाय! यह क्या हो गया!”
4. घृणा सूचक: जब किसी चीज़ से घृणा या नफरत हो – छिः! धिक्कार! हट!
उदाहरण: “छिः! यह कितना खराब है!”
5. भय/चौंकना सूचक: जब डर, चौंकना, या सावधानी बतानी हो – हैं! बचाओ! खबरदार!
उदाहरण: “हैं! वहाँ क्या है!”
ट्रिक – याद रखें: “आश्चर्य – 'अरे!', हर्ष – 'वाह!', शोक – 'हाय!', घृणा – 'छिः!', भय – 'हैं!' – ये पाँच विस्मयादिबोधक के मुख्य भेद।”
3. विस्मयादिबोधक – उदाहरण तालिका
नीचे दी गई तालिका में विस्मयादिबोधक को भावनाओं के अनुसार वर्गीकृत किया गया है –
| भावना | विस्मयादिबोधक शब्द | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| आश्चर्य | अरे, क्या, अहा, सच | "अरे! तुम यहाँ!" |
| हर्ष/प्रशंसा | वाह, शाबाश, बहुत अच्छा, जय | "वाह! कमाल है!" |
| शोक/दुख | हाय, अफसोस, ओह, हे राम | "हाय! मेरा बच्चा!" |
| घृणा | छिः, धिक्कार, हट, उफ़ | "छिः! कितना गंदा!" |
| भय/चौंकना | हैं, बचाओ, खबरदार, अरे (भय में) | "हैं! वहाँ क्या है?" |
- विस्मयादिबोधक के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) लगता है – “वाह!”, “अरे!”, “हाय!”
- ये शब्द वाक्य के शुरू में आते हैं – पर कभी-कभी बीच या अंत में भी आ सकते हैं – “तुम आ गए, अरे!”
- विस्मयादिबोधक वाक्य के अन्य शब्दों से स्वतंत्र होते हैं – इनका कोई व्याकरणिक संबंध नहीं होता।
4. विस्मयादिबोधक और अन्य अव्ययों में अंतर
विस्मयादिबोधक और अन्य अव्ययों (क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक) में मुख्य अंतर कार्य और संबंध का है –
| विस्मयादिबोधक | अन्य अव्यय (क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक) |
|---|---|
| भावना व्यक्त करता है – “अरे!” (आश्चर्य) | विशेषता/संबंध/जोड़ बताता है – “धीरे” (क्रियाविशेषण), “के साथ” (संबंधबोधक), “और” (समुच्चयबोधक) |
| वाक्य के अन्य शब्दों से स्वतंत्र – कोई संबंध नहीं। | वाक्य के अन्य शब्दों से संबंध रखता है – क्रिया की विशेषता, संज्ञा का संबंध, या वाक्यों को जोड़ता है। |
| वाक्य में कहीं भी आ सकता है – “अरे! राम आया” या “राम अरे! आया” | अपनी निश्चित स्थिति होती है – “धीरे चलता” (क्रिया से पहले), “के साथ” (संज्ञा के बाद) |
| उदाहरण – “अरे, वाह, हाय, छिः, हैं” | उदाहरण – “धीरे, पर, में, से, और, इसलिए” |
5. वाक्यों में विस्मयादिबोधक का सही प्रयोग
विस्मयादिबोधक का प्रयोग वाक्यों में भावना के अनुसार होता है –
- आश्चर्य:
“अरे! तुम आ गए!”
“क्या! तुमने यह किया?” - हर्ष/प्रशंसा:
“वाह! तुमने तो कमाल कर दिया!”
“शाबाश! बेटा!” - शोक/दुख:
“हाय! यह क्या हो गया!”
“अफसोस! वह नहीं आया।” - घृणा:
“छिः! यह कितना खराब है!”
“हट! यहाँ से!” - भय/चौंकना:
“हैं! वहाँ क्या है?”
“बचाओ! मुझे बचाओ!”
महत्वपूर्ण: विस्मयादिबोधक के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग अनिवार्य है – यह भावना को और अधिक स्पष्ट करता है। विस्मयादिबोधक अव्यय है – यह कभी नहीं बदलता – चाहे वाक्य में कोई भी कर्ता, काल, लिंग, या वचन हो।
हल सहित उदाहरण (5)
उत्तर देखें
व्याख्या: 'अरे!' ने किसी के अचानक आने पर आश्चर्य व्यक्त किया है – यह आश्चर्य सूचक विस्मयादिबोधक है।
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व्याख्या: 'वाह!' ने किसी सुंदर दृश्य पर प्रशंसा/हर्ष व्यक्त किया है – यह हर्ष/प्रशंसा सूचक विस्मयादिबोधक है।
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व्याख्या: 'हाय!' ने किसी दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया है – यह शोक/दुख सूचक विस्मयादिबोधक है।
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व्याख्या: 'छिः!' ने किसी गंदी चीज़ पर घृणा/नफरत व्यक्त की है – यह घृणा सूचक विस्मयादिबोधक है।
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व्याख्या: 'हैं!' ने किसी अज्ञात या भयानक चीज़ पर भय/चौंकना व्यक्त किया है – यह भय/चौंकना सूचक विस्मयादिबोधक है।
अभ्यास प्रश्न (5)
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विस्मयादिबोधक की समझ क्यों ज़रूरी है?
विस्मयादिबोधक हिंदी भाषा को भावनात्मक, जीवंत और प्रभावी बनाता है – यह बिना किसी अतिरिक्त शब्द के आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, या भय को व्यक्त कर देता है। यह वाक्य का वह अंग है जो पाठक/श्रोता का ध्यान तुरंत खींचता है और उसे भावना में शामिल कर लेता है। बिना विस्मयादिबोधक के संवाद सूखे और भावनाहीन लगते हैं – “तुम आ गए” बनाम “अरे! तुम आ गए!” – दूसरा अधिक जीवंत है। इस पोस्ट में हमने अव्यय और क्रियाविशेषण के साथ विस्मयादिबोधक के अंतर को स्पष्ट किया है – अब आप किसी भी वाक्य में विस्मयादिबोधक को आसानी से पहचान सकते हैं और उसकी भावना बता सकते हैं।
अभ्यास से ही विस्मयादिबोधक की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक बातचीत और लेखन में ध्यान दें – 'अरे!', 'वाह!', 'हाय!', 'छिः!', 'हैं!' – ये कब और किस भावना में प्रयुक्त होते हैं। और याद रखें – औपचारिक लेखन में विस्मयादिबोधक का प्रयोग सीमित होता है – इसका सही स्थान भी जानना ज़रूरी है! यही आपकी हिंदी को शुद्ध, सटीक और प्रभावी बनाएगा।
📝 विस्मयादिबोधक अभ्यास – कक्षा 7-8
इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको प्रत्येक वाक्य में विस्मयादिबोधक को पहचानना है और बताना है कि वह किस भावना (आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, या भय) को व्यक्त कर रहा है। साथ ही, कुछ वाक्यों में दिए गए संदर्भ के अनुसार उचित विस्मयादिबोधक का चयन करना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।
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