भाषा का वह सहज और अनियंत्रित उद्गार जो हृदय के भावों को सीधे प्रकट कर देता है। जब आप किसी अप्रत्याशित दृश्य को देखकर "वाह!" कहते हैं, या दर्द से "ओह!" चिल्लाते हैं, या किसी को बुलाने के लिए "अरे!" कहते हैं - ये सभी विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) हैं। ये शब्द नहीं, मन की तत्काल प्रतिक्रियाएँ हैं जो भाषा को जीवंत और भावपूर्ण बनाती हैं।
✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 7–8 (परिचय) | कक्षा 9–10 (विस्तार) | कक्षा 11–12 (साहित्यिक प्रयोग)
1️. विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) का परिचय
कल्पना कीजिए: आप अचानक एक सुंदर बगीचे में पहुँच जाते हैं। आपकी ज़ुबान से बिना सोचे-समझे निकलता है - "क्या बात है!" या "अद्भुत!"। यह प्रतिक्रिया आपके मन के भावों का सीधा और तत्काल प्रकटीकरण है। यही विस्मयादिबोधक अव्यय है। व्याकरण में यह एक ऐसा अव्यय है जो अचानक उठने वाले मनोभावों को प्रकट करता है - चाहे वह आश्चर्य हो, हर्ष हो, शोक हो, घृणा हो, स्वीकृति हो या संबोधन। ये शब्द अक्सर वाक्य से स्वतंत्र होते हैं और इनके बाद प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।
दैनिक जीवन में ये हमारी भावनाओं के सबसे विश्वसनीय साथी हैं। किसी की सफलता पर "शाबाश!", किसी दुखद खबर पर "हाय!", किसी को रोकने के लिए "रुको!", या फिर किसी बात पर सहमति में "हाँ-हाँ!"। ये सभी विस्मयादिबोधक हैं। ये भाषा को मशीनी न रहने देकर उसे मानवीय और संवेदनशील बनाए रखते हैं।
2. परिभाषा
परिभाषा: वे अव्यय शब्द या शब्द-समूह जो अचानक उत्पन्न हुए मनोभावों (जैसे- हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, स्वीकृति, संबोधन आदि) को प्रकट करते हैं, विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं। ये प्रायः वाक्य से पृथक रहते हैं और इनके अंत में विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
3. मुख्य बिंदु / पहचान
विस्मयादिबोधक अव्यय को पहचानने के लिए इन विशेषताओं को जानें:
- भाव प्रधान: ये मुख्यतः भावनाओं या मनोवेगों की अभिव्यक्ति हैं, तथ्य या विवरण नहीं।
- वाक्य से स्वतंत्रता: ये प्रायः पूरे वाक्य का हिस्सा नहीं होते, बल्कि स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होते हैं। जैसे: ओह! दर्द हो रहा है।
- विस्मयादिबोधक चिह्न: इनके अंत में प्रायः विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।
- संरचना में सरलता: ये अक्सर छोटे, एक या दो अक्षर के शब्द होते हैं (जैसे: हाँ, नहीं, अरे, वाह)।
- पहचान का तरीका: वाक्य में ऐसा शब्द जो किसी तीव्र भावना की सहज अभिव्यक्ति हो और जिसे हटाने पर वाक्य का मूल अर्थ बना रहे, वह विस्मयादिबोधक है।
4. भेद / प्रकार
विस्मयादिबोधक अव्यय को उनके द्वारा प्रकट किए जाने वाले भाव के आधार पर कई भागों में बाँटा जाता है। यहाँ मुख्य प्रकार दिए गए हैं:
| क्रम | भेद / प्रकार | भाव व उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | हर्षबोधक | खुशी, प्रशंसा का भाव। जैसे: वाह! शाबाश! अहा! धन्य! |
| 2 | शोकबोधक | दुःख, पीड़ा, करुणा का भाव। जैसे: हाय! ओह! हा! त्राहि-त्राहि! उफ़! |
| 3 | आश्चर्यबोधक | अचरज, हैरानी का भाव। जैसे: अरे! ओह! हैं! क्या! सचमुच! |
| 4 | संबोधनबोधक | किसी को पुकारने या संबोधित करने का भाव। जैसे: अरे! ओ! ऐ! सुनो! रुको! |
| 5 | घृणाबोधक | घृणा, तिरस्कार का भाव। जैसे: छि:! धत्! थू! हट! |
| 6 | स्वीकृतिबोधक | हाँ, सहमति, अनुमति का भाव। जैसे: हाँ! जी हाँ! ठीक! अच्छा! |
| 7 | विसर्जनबोधक | विदा, राहत, थकान का भाव। जैसे: चलो! अब छुट्टी! आख़िरकार! ऊह! |
| 8 | प्रतिज्ञाबोधक | शपथ, प्रतिज्ञा, दृढ़ संकल्प का भाव। जैसे: ख़ुदा की कसम! सच कहता हूँ! कसम से! |
5. उदाहरण
विभिन्न प्रकार के विस्मयादिबोधक अव्ययों को वाक्यों के संदर्भ में देखिए:
- हर्षबोधक: वाह! कितना सुंदर नज़ारा है!
- शोकबोधक: हाय! मेरा फोन टूट गया।
- आश्चर्यबोधक: अरे! तुम यहाँ कब आ गए?
- संबोधनबोधक: ऐ लड़के! यहाँ आओ।
- घृणाबोधक: छि:! यह कितना गंदा है।
- स्वीकृतिबोधक: हाँ! मैं कल ज़रूर आऊँगा।
- विसर्जनबोधक: चलो! अब घर चलते हैं।
- प्रतिज्ञाबोधक: सच कहता हूँ! मैंने यह नहीं किया।
6. वाक्य में प्रयोग / प्रयोग की विधि
विस्मयादिबोधक अव्यय का प्रयोग करते समय याद रखें कि ये अक्सर वाक्य से पृथक होते हैं। इन्हें वाक्य के आरंभ में, मध्य में या अंत में रखा जा सकता है, लेकिन इनके बाद या पहले अल्पविराम (,) या विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है। जैसे: "वाह! तुमने तो कमाल कर दिया।" या "तुमने तो कमाल कर दिया, वाह!"। इनका प्रयोग संदर्भ के अनुरूप होना चाहिए - एक गंभीर स्थिति में 'वाह!' का प्रयोग अनुचित होगा। कभी-कभी ये पूरे वाक्य के रूप में भी आते हैं, जैसे: "क्या! मैं नहीं मानता।"
7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ
विस्मयादिबोधक अव्यय को अक्सर अन्य अव्ययों से भ्रमित किया जाता है, खासकर जब वही शब्द भिन्न संदर्भ में भिन्न भूमिका निभाए।
- क्रियाविशेषण vs विस्मयादिबोधक: क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है, जबकि विस्मयादिबोधक भाव प्रकट करता है। जैसे: वह अच्छा गाता है (क्रियाविशेषण)। अच्छा! तो तुम आ गए (विस्मयादिबोधक - स्वीकृति/आश्चर्य)।
- संबोधन कारक vs संबोधनबोधक: संबोधन कारक में संज्ञा के साथ 'हे', 'अरे' आदि लगते हैं (जैसे: हे राम!), जो विस्मयादिबोधक नहीं बल्कि संबोधन कारक की विभक्ति है। जबकि 'अरे!' या 'ओ!' अकेले संबोधनबोधक विस्मयादिबोधक हैं।
- वाक्यांश की समझ: 'अरे यार!' या 'हे भगवान!' जैसे वाक्यांश पूरे के पूरे विस्मयादिबोधक माने जाते हैं, न कि केवल पहला शब्द।
- विस्मयादिबोधक चिह्न का अभाव: कभी-कभी विस्मयादिबोधक शब्द के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न नहीं लगाया जाता, लेकिन वह विस्मयादिबोधक ही होता है। जैसे: हाँ, मैं तैयार हूँ। (यहाँ 'हाँ' विस्मयादिबोधक है लेकिन चिह्न नहीं है)।
8. परीक्षा उपयोगी तथ्य
- विस्मयादिबोधक अव्यय अचानक उत्पन्न हुए मनोभावों को प्रकट करते हैं। (मूल परिभाषा)
- हर्षबोधक, शोकबोधक, आश्चर्यबोधक, संबोधनबोधक - विस्मयादिबोधक के मुख्य प्रकार। (MCQ हेतु)
- 'वाह!', 'हाय!', 'अरे!', 'छि:!', 'हाँ!', 'शाबाश!' प्रमुख विस्मयादिबोधक हैं। (उदाहरण)
- विस्मयादिबोधक प्रायः वाक्य से स्वतंत्र होते हैं और इनके अंत में (!) चिह्न लगता है। (विशेषता)
- कभी-कभी पूरा वाक्य या वाक्यांश भी विस्मयादिबोधक का काम करता है: 'हे भगवान!', 'क्या बात है!' (विशेष तथ्य)
9. 🎯 विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) आधारित चुनौती
विस्मयादिबोधक अव्यय की बारीकियों को समझने के लिए इन प्रश्नों का उत्तर दें।
1. 'अच्छा! तो तुम यहीं थे।' और 'तुमने अच्छा काम किया।' इन दोनों वाक्यों में 'अच्छा' शब्द की क्या भूमिका है? क्या दोनों में यह विस्मयादिबोधक है?
दूसरे वाक्य में: 'अच्छा' एक विशेषण है जो संज्ञा 'काम' की विशेषता बता रहा है। यहाँ कोई विशेष भाव प्रकट नहीं हो रहा।
2. 'हाँ, मैं तैयार हूँ।' इस वाक्य में 'हाँ' क्या है? क्या इसे विस्मयादिबोधक माना जाएगा यदि इसके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) नहीं है?
3. 'हे राम! मेरी मदद करो।' इस वाक्य में 'हे राम!' क्या है? क्या यह विस्मयादिबोधक है? समझाइए।
4. 'छि:! यह तो बहुत गंदी बात है।' और 'उसने मुझ पर छि: किया।' इनमें 'छि:' की क्या भूमिका है?
दूसरे वाक्य में: 'छि: किया' में 'छि:' विस्मयादिबोधक नहीं है। यहाँ 'छि:' एक क्रिया ('करना' के साथ यौगिक क्रिया) का हिस्सा बन गया है जिसका अर्थ है 'तिरस्कार प्रकट करना'। यह एक भाववाचक संज्ञा या क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुआ है।
5. क्या 'रुको!' शब्द हमेशा विस्मयादिबोधक है? 'रुको, वहाँ मत जाओ।' - इस वाक्य में इसकी भूमिका बताइए।
6. 'वाह! क्या खूबसूरत तस्वीर है।' इस वाक्य में यदि 'वाह!' हटा दिया जाए, तो क्या वाक्य का मूल अर्थ बदल जाएगा? इससे विस्मयादिबोधक की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है?
क्या बदलेगा: वाक्य से भाव (हर्ष, प्रशंसा की तीव्रता) समाप्त हो जाएगा। वाक्य एक साधारण कथन बन जाएगा, एक उत्साहपूर्ण प्रशंसा नहीं रहेगा।
यह विस्मयादिबोधक की यह विशेषता स्पष्ट करता है कि ये वाक्य के तथ्यात्मक अर्थ को नहीं, बल्कि भावात्मक पक्ष या मनोवेग को प्रकट करते हैं और वाक्य से स्वतंत्र होते हैं।
7. 'हैं! यह कैसे हो गया?' और 'वे दोनों हैं।' इन वाक्यों में 'हैं' शब्द के भिन्न प्रयोग को समझाइए।
दूसरे वाक्य में: 'हैं' एक सहायक क्रिया है जो वर्तमान काल और बहुवचन का बोध करा रही है। यहाँ कोई विशेष भाव नहीं है, बल्कि यह वाक्य की क्रिया का हिस्सा है।
8. कभी-कभी पूरा वाक्य ही विस्मयादिबोधक का काम करता है। ऐसे दो उदाहरण दीजिए और बताइए कि वे किस भाव को प्रकट करते हैं।
1. 'क्या मैं सपना देख रहा हूँ!' - यह पूरा वाक्य आश्चर्यबोधक विस्मयादिबोधक का काम कर रहा है। अविश्वास या चकित होने का भाव।
2. 'भगवान आपका भला करे!' - यह पूरा वाक्य हर्षबोधक/आशीर्वादबोधक विस्मयादिबोधक का काम कर रहा है। आभार या शुभकामना का भाव।
ऐसे वाक्यों में पूरी संरचना एक तीव्र भाव की अभिव्यक्ति के लिए प्रयुक्त होती है, न कि केवल सूचना देने के लिए।
9. 'चुप!' और 'शांत!' जैसे शब्दों को विस्मयादिबोधक माना जाएगा? कारण सहित उत्तर दीजिए।
कारण: ये शब्द सहज रूप से एक भाव (आदेश, निवेदन, क्रोध) को प्रकट करते हैं। ये वाक्य का हिस्सा नहीं बनते बल्कि स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होते हैं और इनके बाद विस्मयादिबोधक चिह्न लगता है। इनका उद्देश्य सूचना देना नहीं, बल्कि तत्काल प्रतिक्रिया या निर्देश देना है।
10. विस्मयादिबोधक अव्यय और भाववाचक संज्ञा में क्या अंतर है? 'उसकी हँसी संक्रामक थी।' और 'हा-हा-हा! यह तो बहुत मज़ाकिया था।' - इन वाक्यों के आधार पर समझाइए।
भाववाचक संज्ञा: किसी भाव, गुण या अवस्था का नाम होती है। यह वाक्य में संज्ञा की तरह काम करती है (कर्ता, कर्म आदि)।
उदाहरण वाक्य में: 'हँसी' एक भाववाचक संज्ञा है। यह 'हँसने' के भाव का नाम है और वाक्य में कर्ता की भूमिका में है।
विस्मयादिबोधक अव्यय: किसी भाव की सीधी और तात्कालिक अभिव्यक्ति है। यह वाक्य में किसी व्याकरणिक भूमिका (कर्ता, कर्म आदि) में नहीं होता।
उदाहरण वाक्य में: 'हा-हा-हा!' एक विस्मयादिबोधक अव्यय (हर्षबोधक) है। यह हँसी के भाव को सीधे प्रकट कर रहा है, उसका नाम नहीं ले रहा। यह वाक्य से स्वतंत्र है।
10. सारांश
विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) भाषा के वे सहज और मर्मस्पर्शी तत्व हैं जो हमारे अंतर्मन के तीव्र भावों को बिना किसी व्याकरणिक बंधन के प्रकट करते हैं। हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, संबोधन, स्वीकृति आदि अनेक भाव इनके माध्यम से फूट पड़ते हैं। ये प्रायः वाक्य से स्वतंत्र होते हैं और इनके साथ विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग होता है। 'वाह!', 'हाय!', 'अरे!', 'छि:!', 'शाबाश!' जैसे ये छोटे-छोटे शब्द भाषा को यांत्रिक न रहने देकर उसे संवेदनशील, जीवंत और मानवीय बनाए रखते हैं।
11. संबंधित विषय संकेत
अव्यय के सभी भेदों का समेकित प्रयोग समझने के लिए आगे पढ़ें: अव्यय का प्रयोग (Usage of Adverb)
📝 विस्मयादिबोधक अव्यय - अभ्यास वर्कशीट
विस्मयादिबोधक के प्रकार, भाव पहचान और उचित प्रयोग पर आधारित रोचक अभ्यास सेट।
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