सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 28 JUNE 2026
क्या आप जानते हैं कि 'सूर्य' और 'उदय' – दो अलग-अलग शब्द – आपस में मिलकर 'सूर्योदय' बन जाते हैं, और उच्चारण में आसानी आ जाती है? यह 'अ' और 'उ' का मेल है – 'अ' + 'उ' = 'ओ' – यही तो स्वर संधि का जादू है! हिंदी व्याकरण में स्वर संधि (Vowel Sandhi) संधि का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक प्रकार है – क्योंकि इसमें स्वरों (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) का मेल होता है। छात्रों को अक्सर स्वर संधि में सबसे अधिक कठिनाई होती है – क्योंकि इसमें कई नियम और अपवाद हैं – 'अ' + 'अ' = 'आ' (दीर्घ), 'अ' + 'इ' = 'ए' (गुण), 'अ' + 'उ' = 'ओ' (गुण), 'अ' + 'ऋ' = 'अर्' (यण) – और भी बहुत कुछ। इस पोस्ट में हम स्वर संधि को चार मुख्य भागों – दीर्घ, गुण, वृद्धि, और यण – में विस्तार से समझेंगे – प्रत्येक के नियम, उदाहरण, अपवाद, और वाक्यों में प्रयोग के साथ। यह पोस्ट विशेष रूप से कक्षा 7‑8 के छात्रों के लिए बनाई गई है – ताकि स्वर संधि का हर पहलू स्पष्ट हो जाए।
✅ अनुशंसित: कक्षा 7-8 | CBSE एवं UP Board
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1. स्वर संधि – परिभाषा एवं परिचय
स्वर संधि (Vowel Sandhi) वह संधि है जिसमें स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) का मेल स्वर से होता है और उनके परस्पर मेल से एक नया स्वर बनता है। स्वर संधि को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है – दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, और यण संधि।
स्वर संधि के चार भेद:
- दीर्घ संधि: समान स्वरों का मेल – 'अ' + 'अ' = 'आ', 'इ' + 'इ' = 'ई', 'उ' + 'उ' = 'ऊ'
- गुण संधि: 'अ' + 'इ/ई' = 'ए', 'अ' + 'उ/ऊ' = 'ओ', 'अ' + 'ऋ' = 'अर्' (कुछ नियमों में)
- वृद्धि संधि: 'अ' + 'ए/ऐ' = 'ऐ', 'अ' + 'ओ/औ' = 'औ'
- यण संधि: 'इ/ई' + 'अ' = 'य' + 'अ', 'उ/ऊ' + 'अ' = 'व' + 'अ', 'ऋ' + 'अ' = 'र' + 'अ'
स्वर संधि को समझने के लिए स्वरों के तीन मुख्य समूह याद रखें – ह्रस्व (अ, इ, उ, ऋ), दीर्घ (आ, ई, ऊ, ॠ), और संयुक्त (ए, ऐ, ओ, औ)। इनके मेल से ही विभिन्न प्रकार की स्वर संधियाँ बनती हैं।
2. दीर्घ स्वर संधि – नियम और उदाहरण
दीर्घ स्वर संधि (Dirgha Sandhi) – जब समान स्वरों (ह्रस्व या दीर्घ) का मेल होता है, तो उनके स्थान पर दीर्घ स्वर बन जाता है।
- अ + अ = आ – “विद्या” + “अर्थ” = “विद्यार्थ” (पर 'विद्यार्थी' – विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)
- अ + आ = आ – “राम” + “आलय” = “रामालय” (पर 'रामायण' में 'अ' + 'अ' = 'आ' – यह भी दीर्घ)
- आ + अ = आ – “गंगा” + “अवतरण” = “गंगावतरण” (यहाँ 'आ' + 'अ' = 'आ' – दीर्घ)
- आ + आ = आ – “विद्या” + “आलय” = “विद्यालय” ('आ' + 'आ' = 'आ')
- इ + इ = ई – “अभि” + “इष्ट” = “अभीष्ट” ('इ' + 'इ' = 'ई')
- ई + ई = ई – “नदी” + “ईश” = “नदीश” ('ई' + 'ई' = 'ई')
- उ + उ = ऊ – “गुरु” + “उपदेश” = “गुरूपदेश” ('उ' + 'उ' = 'ऊ')
- ऊ + ऊ = ऊ – “भानु” + “उदय” = “भानूदय” ('ऊ' + 'उ' = 'ऊ') – पर 'भानूदय' प्रचलित नहीं – 'भानु' + 'उदय' = 'भानूदय'
| नियम | पहला शब्द | दूसरा शब्द | संधि युक्त शब्द |
|---|---|---|---|
| अ + अ = आ | विद्या | अर्थी | विद्यार्थी |
| अ + आ = आ | राम | आलय | रामालय |
| आ + आ = आ | विद्या | आलय | विद्यालय |
| इ + इ = ई | अभि | इष्ट | अभीष्ट |
| उ + उ = ऊ | गुरु | उपदेश | गुरूपदेश |
3. गुण स्वर संधि – नियम और उदाहरण
गुण स्वर संधि (Guna Sandhi) – जब 'अ' (या 'आ') का मेल 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ', या 'ऋ' से होता है, तो क्रमशः 'ए', 'ओ', या 'अर्' बन जाता है।
- अ/आ + इ/ई = ए – “सिंह” + “इव” = “सिंहेव” – (पर प्रचलित नहीं – 'सिंह' + 'इव' = 'सिंहेव' – पर 'सिंहासन' में 'अ' + 'आ' = 'आ' – दीर्घ)
- अ/आ + उ/ऊ = ओ – “सूर्य” + “उदय” = “सूर्योदय” ('अ' + 'उ' = 'ओ')
- अ/आ + ऋ = अर् – “देव” + “ऋषि” = “देवर्षि” ('अ' + 'ऋ' = 'अर्' – 'देवर्षि')
- नोट: 'अ' + 'ए' = 'ए' (गुण नहीं – वृद्धि है – पर कुछ नियमों में)
| नियम | पहला शब्द | दूसरा शब्द | संधि युक्त शब्द |
|---|---|---|---|
| अ + उ = ओ | सूर्य | उदय | सूर्योदय |
| अ + ऋ = अर् | देव | ऋषि | देवर्षि |
| आ + ई = ए | महा | ईश | महेश (महा + ईश = महेश – 'आ' + 'ई' = 'ए') |
| अ + ई = ए | राम | ईश | रमेश (राम + ईश = रमेश – 'अ' + 'ई' = 'ए') |
| आ + उ = ओ | महा | उत्सव | महोत्सव ('आ' + 'उ' = 'ओ') |
4. वृद्धि स्वर संधि – नियम और उदाहरण
वृद्धि स्वर संधि (Vriddhi Sandhi) – जब 'अ' (या 'आ') का मेल 'ए', 'ऐ', 'ओ', या 'औ' से होता है, तो क्रमशः 'ऐ' या 'औ' बन जाता है।
- अ/आ + ए/ऐ = ऐ – “एक” + “एक” = “एकैक” ('अ' + 'ए' = 'ऐ') – पर 'एकैक' में 'अ' + 'ए' = 'ऐ' – यह वृद्धि है।
- अ/आ + ओ/औ = औ – “गंगा” + “ओघ” = “गंगौघ” ('आ' + 'ओ' = 'औ') – पर प्रचलित नहीं – “विद्या” + “औत्सुक्य” = “विद्यौत्सुक्य” ('आ' + 'औ' = 'औ')
- नोट: वृद्धि संधि अपेक्षाकृत कम प्रचलित है – पर परीक्षा में आ सकती है।
| नियम | पहला शब्द | दूसरा शब्द | संधि युक्त शब्द |
|---|---|---|---|
| अ + ए = ऐ | एक | एक | एकैक |
| आ + ओ = औ | गंगा | ओघ | गंगौघ |
| अ + ऐ = ऐ | रमा | ऐश्वर्य | रमैश्वर्य (प्रचलित नहीं) |
| आ + औ = औ | विद्या | औत्सुक्य | विद्यौत्सुक्य |
5. यण स्वर संधि – नियम और उदाहरण
यण स्वर संधि (Yan Sandhi) – जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ', या 'ऋ' के बाद कोई भिन्न स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) आता है, तो 'इ/ई' → 'य', 'उ/ऊ' → 'व', और 'ऋ' → 'र' बन जाता है।
- इ/ई + स्वर = य + स्वर – “अति” + “अंत” = “अत्यंत” ('इ' + 'अ' = 'य' + 'अ')
- उ/ऊ + स्वर = व + स्वर – “अनु” + “आगत” = “अन्वागत” ('उ' + 'आ' = 'व' + 'आ') – पर 'अनु' + 'आगत' = 'अन्वागत' – यह 'उ' + 'आ' = 'वा' – यण संधि है।
- ऋ + स्वर = र + स्वर – “पितृ” + “आज्ञा” = “पित्राज्ञा” ('ऋ' + 'आ' = 'र' + 'आ') – पर प्रचलित नहीं – 'पितृ' + 'आज्ञा' = 'पित्राज्ञा'
| नियम | पहला शब्द | दूसरा शब्द | संधि युक्त शब्द |
|---|---|---|---|
| इ + अ = य + अ | अति | अंत | अत्यंत |
| उ + आ = व + आ | अनु | आगत | अन्वागत |
| उ + अ = व + अ | सु | आगत | स्वागत (सु + आगत = स्वागत – 'उ' + 'आ' = 'वा') |
| ई + अ = य + अ | प्रीति | आत्म | प्रीत्यात्म |
| ऋ + आ = र + आ | पितृ | आज्ञा | पित्राज्ञा |
6. स्वर संधि – सारांश तालिका
स्वर संधि के चारों प्रकारों का त्वरित सारांश नीचे दी गई तालिका में दिया गया है –
| संधि का प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ संधि | समान स्वर → दीर्घ | विद्या + आलय = विद्यालय |
| गुण संधि | अ + इ/ई = ए; अ + उ/ऊ = ओ; अ + ऋ = अर् | सूर्य + उदय = सूर्योदय |
| वृद्धि संधि | अ + ए/ऐ = ऐ; अ + ओ/औ = औ | एक + एक = एकैक |
| यण संधि | इ/ई → य; उ/ऊ → व; ऋ → र | अति + अंत = अत्यंत |
7. सामान्य त्रुटियाँ और शुद्ध रूप
स्वर संधि में छात्रों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ –
| अशुद्ध प्रयोग | शुद्ध प्रयोग | त्रुटि का प्रकार |
|---|---|---|
| विद्या + आलय = विद्यालय | विद्या + आलय = विद्यालय | सही है – 'आ' + 'आ' = 'आ' – दीर्घ |
| सूर्य + उदय = सूर्योदय | सूर्य + उदय = सूर्योदय | सही है – 'अ' + 'उ' = 'ओ' – गुण |
| अति + अंत = अतयंत | अति + अंत = अत्यंत | 'य' की स्थिति – 'अति' + 'अंत' = 'अत्यंत' – 'त्' + 'य' = 'त्य' – यण संधि |
| सु + आगत = सुवागत | सु + आगत = स्वागत | 'उ' + 'आ' = 'वा' – 'स्वागत' – 'सुवागत' गलत |
| गुरु + उपदेश = गुरूपदेश | गुरु + उपदेश = गुरूपदेश | सही है – 'उ' + 'उ' = 'ऊ' – दीर्घ |
हल सहित उदाहरण (5)
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व्याख्या: ‘विद्या’ + ‘आलय’ – ‘आ’ + ‘आ’ = ‘आ’ – दीर्घ स्वर संधि है – ‘विद्यालय’ में ‘आ’ एक ही है – दो ‘आ’ मिलकर एक ‘आ’ बने।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘सूर्य’ + ‘उदय’ – ‘अ’ + ‘उ’ = ‘ओ’ – गुण स्वर संधि है – ‘सूर्योदय’ में ‘ओ’ बन गया।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘अति’ + ‘अंत’ – ‘इ’ + ‘अ’ = ‘य’ + ‘अ’ – यण स्वर संधि है – ‘अत्यंत’ में ‘य’ आ गया।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘गुरु’ + ‘उपदेश’ – ‘उ’ + ‘उ’ = ‘ऊ’ – दीर्घ स्वर संधि है – ‘गुरूपदेश’ में ‘ऊ’ बन गया।
उत्तर देखें
व्याख्या: ‘सु’ + ‘आगत’ – ‘उ’ + ‘आ’ = ‘वा’ – यण स्वर संधि है – ‘स्वागत’ में ‘वा’ बन गया – 'सुवागत' गलत है।
अभ्यास प्रश्न (5)
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स्वर संधि – संधि का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय
स्वर संधि हिंदी व्याकरण का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक अध्याय है – क्योंकि हिंदी के अधिकांश संधि युक्त शब्द स्वर संधि के ही उदाहरण हैं। 'सूर्योदय', 'विद्यालय', 'स्वागत', 'अत्यंत', 'गुरूपदेश' – ये सभी स्वर संधि के उदाहरण हैं। इस पोस्ट में हमने संधि परिभाषा और संधि विच्छेद के साथ स्वर संधि के चारों प्रकारों – दीर्घ, गुण, वृद्धि, और यण – को उनके नियमों, उदाहरणों, और अपवादों के साथ विस्तार से समझाया है – अब आप किसी भी स्वर संधि युक्त शब्द का संधि-विच्छेद कर सकते हैं और उसका प्रकार बता सकते हैं।
अभ्यास से ही स्वर संधि की पहचान मज़बूत होती है। अपनी दैनिक भाषा में स्वर संधि युक्त शब्दों पर ध्यान दें – 'सूर्योदय', 'विद्यालय', 'स्वागत', 'अत्यंत', 'गुरूपदेश', 'महोत्सव', 'रमेश' – इनका संधि-विच्छेद करें और देखें कि कौन-से स्वर मिले हैं और कौन-सा नया स्वर बना है। नियमित अभ्यास से आप स्वर संधि में निपुण हो जाएंगे – और आपकी हिंदी शुद्ध, प्रभावी और प्रवाहपूर्ण होगी।
📝 स्वर संधि अभ्यास – कक्षा 7-8
इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 30 शब्द दिए गए हैं – आपको प्रत्येक शब्द का संधि-विच्छेद करना है और बताना है कि संधि दीर्घ है, गुण है, वृद्धि है, या यण। साथ ही, कुछ शब्दों में संधि-विच्छेद करके मूल शब्दों को अलग-अलग लिखना है और गलत संधि वाले शब्दों को शुद्ध करना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।
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