Skip to main content

View in English
हिंदी में देखें


this padding is for avoiding search bar cut

सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग (Correct Use of Pronoun) | Hindi Grammar | GPN

अब तक आपने सर्वनाम के सभी प्रकारों के बारे में विस्तार से पढ़ लिया है। लेकिन क्या जानने भर से ही काम चल जाएगा? ज़रूरी नहीं! असली चुनौती तो तब आती है जब इन सर्वनामों का व्यवहार में शुद्ध प्रयोग करना होता है। "मैं और मेरा भाई हम सिनेमा देखने गए" जैसे वाक्य सुनकर कान खड़े हो जाते हैं, है ना? सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग वह कला है जो भाषा को अशुद्धियों और भद्देपन से बचाती है, और आपकी हिंदी को परिष्कृत व प्रभावशाली बनाती है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 8–9 (आरंभ) | कक्षा 10–12 (विस्तार) | प्रतियोगी परीक्षाएँ (अति महत्वपूर्ण)


1. शुद्ध प्रयोग का महत्व एवं परिचय

एक बार की बात है, एक विद्यार्थी ने अपने शिक्षक को पत्र लिखा: "आप कल हमारे घर पधारिए। तुम्हारा आशीर्वाद चाहिए।" शिक्षक ने पत्र पढ़ा और नाराज़ हो गए। क्यों? क्योंकि एक ही पत्र में विद्यार्थी ने शिक्षक के लिए पहले 'आप' (आदरसूचक) और फिर 'तुम्हारा' (अनौपचारिक) का प्रयोग कर दिया। यह सर्वनाम का अशुद्ध प्रयोग था। सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग केवल व्याकरण का नियम नहीं, बल्कि भाषा की शिष्टता, स्पष्टता और संप्रेषणीयता का आधार है। एक गलत सर्वनाम पूरे वाक्य का अर्थ बदल सकता है या वक्ता/लेखक की छवि खराब कर सकता है।

आपने अखबारों में छपे समाचार, किताबों में लिखे गए प्रसंग या फिल्मों के संवाद सुने होंगे। उनमें सर्वनामों का चयन और प्रयोग बहुत सोच-समझकर किया जाता है। एक नेता भीड़ से कहता है "आप सब देश के नागरिक हैं," न कि "तुम सब..."। यह 'आप' सम्मान और समावेशन दिखाता है। दूसरी ओर, एक दोस्त दूसरे से कहता है, "तुम कहाँ थे?" न कि "आप कहाँ थे?"। यह 'तुम' अपनापन दिखाता है। सही स्थान पर सही सर्वनाम का प्रयोग ही भाषा को सार्थक बनाता है।

2. शुद्ध प्रयोग: परिभाषा एवं उद्देश्य

परिभाषा: व्याकरण के नियमों, लोक-व्यवहार और संदर्भ के अनुसार सर्वनामों का सटीक एवं उचित प्रयोग करना ही सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग कहलाता है। इसमें न केवल सर्वनाम के प्रकार का ध्यान रखा जाता है, बल्कि उसके लिंग, वचन, पुरुष, कारक और वाक्य में स्थान का भी ख्याल रखा जाता है ताकि वाक्य अशुद्धि-रहित, स्पष्ट और प्रभावी बन सके।

शुद्ध प्रयोग के उद्देश्य:

  1. अर्थ की स्पष्टता: गलत सर्वनाम से भ्रम पैदा हो सकता है। शुद्ध प्रयोग से यह स्पष्ट रहता है कि बात किसकी हो रही है।
  2. भाषा की शुद्धता: अशुद्ध सर्वनाम प्रयोग भाषा को भद्दा और अशिष्ट बना देता है।
  3. संप्रेषण की प्रभावशीलता: सही सर्वनाम वाक्य को प्रवाहमय और प्रभावशाली बनाता है।
  4. परीक्षा में सफलता: प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में 'वाक्य-शुद्धि' के प्रश्न अक्सर सर्वनाम की अशुद्धियों पर ही आधारित होते हैं।

3. सर्वनाम की सामान्य अशुद्धियाँ एवं सुधार

सर्वनाम के प्रयोग में होने वाली अशुद्धियाँ कुछ खास पैटर्न में ही होती हैं। यदि आप इन पैटर्नों को पहचान लें और सुधार के नियम जान लें, तो आपकी हिंदी स्वतः ही शुद्ध होने लगेगी। यहाँ कुछ बहुत ही सामान्य और गंभीर अशुद्धियाँ दी जा रही हैं:

क्रम अशुद्ध प्रयोग (गलत वाक्य) शुद्ध प्रयोग (सही वाक्य) सुधार का नियम / कारण
1 मैं और रवि हम पार्क गए। मैं और रवि पार्क गए। या हम दोनों पार्क गए। अनावश्यक पुनरुक्ति: 'मैं' (उत्तम पुरुष) और 'हम' (उत्तम पुरुष बहुवचन) एक ही कर्ता के लिए नहीं आ सकते। एक को हटाएँ।
2 तुम श्रीमान जी, कहाँ जा रहे हैं? आप श्रीमान जी, कहाँ जा रहे हैं? 'आप' और 'तुम' का भ्रम: बड़ों, आदरपात्रों या औपचारिक संदर्भ में हमेशा 'आप' का प्रयोग करें। 'तुम' केवल अपनेपन या छोटों के लिए।
3 यह मेरा और तेरा घर है। यह मेरा और तुम्हारा घर है। 'तेरा' का अनुचित प्रयोग: 'तेरा' का प्रयोग अति घनिष्ठता, छोटों के लिए या कभी-कभी गुस्से में होता है। सामान्य बोलचाल में 'तुम्हारा' या 'आपका' प्रयोग करें।
4 उसको यह पसंद नहीं आया। (दूर की लड़की के लिए) उसे यह पसंद नहीं आया। 'उसको' vs 'उसे': आधुनिक मानक हिंदी में कर्म कारक में 'को' प्रत्यय लगाने की बजाय संक्षिप्त रूप 'उसे', 'मुझे', 'तुम्हें' आदि का प्रयोग शुद्ध माना जाता है। 'उसको' बोलचाल की भाषा है।
5 राम ने कहा कि उसका भाई आएगा। (अगर भाई राम का ही है) राम ने कहा कि अपना भाई आएगा। निजवाचक 'अपना' का नियम: यदि वाक्य के मुख्य कर्ता (यहाँ 'राम') से संबंध दर्शाना हो, तो 'उसका/उसकी' की जगह 'अपना/अपनी' का प्रयोग करें।
6 कोई तो बताओ जो इसका उत्तर जानता हो। कोई ऐसा बताओ जो इसका उत्तर जानता हो। संबंधवाचक 'जो' का लोप: 'कोई' के बाद आने वाले विशेषण उपवाक्य के लिए संबंधवाचक सर्वनाम 'जो' का प्रयोग ज़रूरी है।
7 हम लोग कल आएँगे। हम कल आएँगे। अतिरिक्त शब्द: 'हम' में ही बहुवचन का भाव है। 'हम लोग' या 'हम सब' कहने की आवश्यकता नहीं है, यह बोलचाल की भाषा है। शुद्ध लिखित भाषा में सिर्फ 'हम'।

4. शुद्ध प्रयोग के सुनहरे नियम (Golden Rules)

नीचे दिए गए ये सात नियम याद रखेंगे, तो 90% अशुद्धियाँ स्वतः दूर हो जाएँगी:

  1. कर्ता की एकरूपता: एक वाक्य या वाक्यखंड में कर्ता के लिए केवल एक ही पुरुष का सर्वनाम प्रयोग करें। 'मैं' और 'हम' या 'तुम' और 'आप' साथ-साथ नहीं आ सकते।
  2. आदर का नियम: जिसे आदर देना है, उसके लिए हमेशा 'आप' और उससे बने रूप (आपका, आपको, आपने) का प्रयोग करें। 'तू'/'तेरा' का प्रयोग बहुत सोच-समझकर करें।
  3. 'अपना' का नियम: यदि क्रिया का फल या संबंध वाक्य के मुख्य कर्ता पर ही पड़ रहा है, तो सम्बन्ध या कर्म दर्शाने के लिए 'अपना' (निजवाचक सर्वनाम) का प्रयोग करें, 'उसका/मेरा' का नहीं।
  4. विभक्ति चयन का नियम: कारक के अनुसार सर्वनाम का सही रूप प्रयोग करें। जैसे: मैंने (कर्ता), मुझको/मुझसे (कर्म/करण), मेरा (संबंध)। 'मैंको', 'मैंने' जैसे गलत जोड़ न बनाएँ।
  5. लिंग-वचन सामंजस्य: सर्वनाम का लिंग-वचन उसके पूर्ववर्ती संज्ञा (Antecedent) के अनुसार हो। जैसे: 'लड़की ने कहा कि वह जाएगी।' (स्त्रीलिंग क्रिया)
  6. संदर्भ स्पष्टता: सर्वनाम का प्रयोग करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह किस संज्ञा के लिए प्रयुक्त हो रहा है। बिना संदर्भ के 'वह', 'यह', 'उसने' जैसे शब्द भ्रम पैदा करते हैं।
  7. सादगी का नियम: अनावश्यक रूप से लंबे या दोहराए गए सर्वनामों से बचें। 'वह व्यक्ति जो...' की जगह सीधे 'जो व्यक्ति...' कहना बेहतर है।

5. विशेष स्थितियों में सर्वनाम प्रयोग

कुछ ऐसी स्थितियाँ हैं जहाँ सर्वनाम के प्रयोग में विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है:

  • समान कर्ता के एक से अधिक क्रिया: जब एक ही कर्ता एक से अधिक क्रियाएँ करता है, तो कर्ता को दोबारा सर्वनाम से व्यक्त न करें।
    अशुद्ध: मैं उठा और मैं नहा लिया।
    शुद्ध: मैं उठा और नहा लिया।
  • शिष्टाचारपूर्ण अनुरोध: अनुरोध करते समय 'तुम' की जगह 'आप' का प्रयोग करें और क्रिया आज्ञार्थक रखें।
    अशुद्ध (अशिष्ट): तुम यहाँ आओ।
    शुद्ध (शिष्ट): आप यहाँ आइए। कृपया आप यहाँ आएँ।
  • लिखित vs मौखिक भाषा: लिखित भाषा में अधिक शुद्धता की अपेक्षा होती है। बोलचाल में 'हम लोग', 'उसको', 'मैंने कर दिया' जैसे प्रयोग चलते हैं, लेकिन लिखते समय 'हम', 'उसे', 'मैंने किया' जैसे शुद्ध रूप प्रयोग करने चाहिए।

6. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (वाक्य-शुद्धि)

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, Bank, Railway, CTET) और बोर्ड परीक्षाओं में 'वाक्य-शुद्धि' या 'Spot the Error' के प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं, और इनमें सर्वनाम की अशुद्धियाँ प्रमुख होती हैं। नीचे दिए गए पैटर्न को याद रखें:

  • पैटर्न 1: आप/तुम/तू का मिश्रण: एक वाक्य में दो अलग-अलग पुरुष के सर्वनामों का प्रयोग। जैसे: "आप कल आना, तुम्हारा काम हो जाएगा।" (यहाँ 'आप' और 'तुम्हारा' का मिश्रण गलत है।)
  • पैटर्न 2: कर्ता की पुनरावृत्ति: 'मैं और वह हम...', 'तुम और सीता तुम...'। यहाँ 'हम' या 'तुम' अनावश्यक है।
  • पैटर्न 3: निजवाचक 'अपना' का लोप: "सीता ने कहा कि उसकी बहन आएगी।" (अगर बहन सीता की ही है, तो 'अपनी' होना चाहिए।)
  • पैटर्न 4: क्रिया का असंगत लिंग-वचन: "कोई लोग आए हैं।" ('कोई' एकवचन है, 'लोग' बहुवचन - यह असंगति है।)
  • पैटर्न 5: 'किसी' और 'कोई' का गलत प्रयोग: नकारात्मक वाक्य में 'कोई' का प्रयोग। जैसे: "मैंने कोई नहीं देखा।" (सही: "मैंने किसी को नहीं देखा।")

7. अभ्यास हेतु सरल उदाहरण (शुद्धिकरण)

निम्नलिखित वाक्यों को पढ़िए और मन ही मन सुधारिए। फिर नीचे दिए गए सुधारे हुए रूप से मिलाइए:

  1. वह कौन है जो बोल रहा है? (यह वाक्य पहले से शुद्ध है। संबंधवाचक 'जो' का सही प्रयोग।)
  2. अशुद्ध: तुम्हारे पिताजी ने तुम्हें बुलाया है।
    शुद्ध: आपके पिताजी ने आपको बुलाया है। (यदि सुनने वाला आदर का पात्र है।)
  3. अशुद्ध: मैंने अपने आप से वादा किया है।
    शुद्ध: मैंने स्वयं से वादा किया है। ('अपने आप' का अक्सर 'अचानक' हो जाता है, इसलिए 'स्वयं' बेहतर है।)

8. परीक्षा उपयोगी संक्षिप्त तथ्य (Quick Revision)

  • शुद्ध प्रयोग = सही सर्वनाम + सही रूप + सही स्थान।
  • 'मैं' और 'हम' साथ नहीं आते। एक चुनें।
  • आदर के लिए हमेशा 'आप'।
  • मुख्य कर्ता से संबंध दिखाना हो तो 'अपना'।
  • नकारात्मक वाक्य में व्यक्ति के लिए 'किसी' और वस्तु के लिए 'कुछ नहीं'।
  • लिंग-वचन का मेल ज़रूरी है। 'कोई आए हैं' ❌, 'कोई आया है' ✅।
  • संदर्भ स्पष्ट होना चाहिए, नहीं तो 'वह', 'यह' अशुद्ध हो जाता है।

9. 🎯 सर्वनाम शुद्धिकरण - 10 चुनौतीपूर्ण प्रश्न

नीचे दिए गए प्रश्नों में आपको अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करना है, शुद्ध वाक्य पहचानना है या अशुद्धि का कारण बताना है। यह आपकी समझ की अंतिम परीक्षा है!

1. "मैं और मेरा मित्र हम सिनेमा देखने जाएँगे।" इस वाक्य को शुद्ध कीजिए।

उत्तर: "मैं और मेरा मित्र सिनेमा देखने जाएँगे।" या "हम दोनों सिनेमा देखने जाएँगे।" (अनावश्यक 'हम' हटाएँ।)

2. कौन-सा वाक्य सर्वनाम के शुद्ध प्रयोग का उदाहरण नहीं है?
(क) आपकी इच्छा ही शीघ्र पूर्ण हो।
(ख) राम ने श्याम से कहा कि उसका भाई आएगा।
(ग) जो परिश्रमी होता है, वह सफल होता है।

उत्तर: (ख) राम ने श्याम से कहा कि उसका भाई आएगा। (अगर भाई राम का है, तो 'उसका' की जगह 'अपना' होना चाहिए। यह निजवाचक सर्वनाम का नियम है।)

3. "श्रीमान जी, क्या ______ यह फॉर्म भर सकते हैं?" रिक्त स्थान के लिए 'तुम' या 'आप' में से कौन-सा शब्द शुद्ध है?

उत्तर: आप। ('श्रीमान जी' संबोधन आदरसूचक है, इसलिए 'आप'।)

4. "यहाँ ______ का आना मना है।" (नकारात्मक वाक्य, व्यक्ति के लिए)। रिक्त स्थान के लिए 'कोई' या 'किसी' में से सही शब्द चुनें।

उत्तर: किसी। (नकारात्मक वाक्यों में व्यक्ति के लिए 'किसी' का प्रयोग होता है।)

5. कौन-सा सुधार सही है?
अशुद्ध: उसको मैंने यह किताब दी थी।
(क) उसे मैंने यह किताब दी थी।
(ख) मैंने उसको यह किताब दी थी।
(ग) दोनों (क) और (ख) शुद्ध हैं।

उत्तर: (ग) दोनों (क) और (ख) शुद्ध हैं। वास्तव में, (क) 'उसे' अधिक शुद्ध माना जाता है। (ख) 'उसको' बोलचाल में चलता है। परीक्षा की दृष्टि से (क) बेहतर विकल्प है। वाक्य संरचना (क) में भी ठीक है और (ख) में भी।

6. "तुम और तुम्हारा भाई तुम दोनों यहाँ आओ।" इस अशुद्ध वाक्य में कौन-सी अशुद्धि है?

उत्तर: कर्ता की अनावश्यक पुनरावृत्ति। 'तुम और तुम्हारा भाई' में ही 'तुम' (बहुवचन का भाव) आ गया है, फिर 'तुम दोनों' कहना दोहराव है। शुद्ध वाक्य: "तुम और तुम्हारा भाई यहाँ आओ।" या "तुम दोनों यहाँ आओ।"

7. "मैंने ______ से कहा था कि वह जल्दी आए।" (मुख्य कर्ता 'मैं' है, और जिससे कहा वह स्वयं 'मैं' ही हूँ)। रिक्त स्थान के लिए 'अपने-आप' या 'खुद' में से कौन-सा शुद्ध है?

उत्तर: खुद या अपने-आप दोनों सही हैं, पर 'खुद' अधिक सटीक और स्पष्ट है। ("मैंने खुद से कहा था...")

8. सर्वनाम के शुद्ध प्रयोग का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य क्या है? (क) वाक्य छोटा करना (ख) अर्थ की स्पष्टता (ग) नए शब्द सीखना

उत्तर: (ख) अर्थ की स्पष्टता

9. वाक्य शुद्ध कीजिए: "कोई लोग दरवाज़े पर खड़े हैं।"

उत्तर: "कोई दरवाज़े पर खड़ा है।" या "कुछ लोग दरवाज़े पर खड़े हैं।" ('कोई' एकवचन है, 'लोग' बहुवचन - यह असंगति है।)

10. कौन-सा कथन सर्वनाम के शुद्ध प्रयोग के बारे में सही है?
(क) बोलचाल में कुछ भी प्रयोग किया जा सकता है।
(ख) लिखित भाषा में व्याकरणिक नियमों का पालन ज़रूरी है।
(ग) सर्वनाम का प्रयोग केवल कविता में महत्वपूर्ण है।

उत्तर: (ख) लिखित भाषा में व्याकरणिक नियमों का पालन ज़रूरी है। (यह पूर्णतः सही है। बोलचाल में ढील हो सकती है, पर शुद्ध प्रयोग का लक्ष्य लिखित भाषा को निर्दोष बनाना है।)

10. सारांश

सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग हिंदी भाषा की सुंदरता और शक्ति को बरकरार रखने की कुंजी है। यह केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि एक भाषाई संस्कार है। इसके लिए आपको 'मैं-हम' की पुनरुक्ति से बचना, 'आप-तुम' का सही संदर्भ में प्रयोग, 'अपना' के नियम का पालन, लिंग-वचन का सामंजस्य और संदर्भ की स्पष्टता जैसे मूलभूत सिद्धांतों को आत्मसात करना होगा। जब आप सर्वनामों का शुद्ध प्रयोग करने लगेंगे, तो न केवल आपकी लिखित हिंदी प्रभावशाली बनेगी, बल्कि आपकी वाणी में भी एक नया प्रभाव और स्पष्टता आ जाएगी। याद रखें, शुद्ध भाषा ही सुसंस्कृत मन की पहचान है।

11. संबंधित विषय संकेत

सर्वनाम का शुद्ध प्रयोग सीख लेने के बाद, आप हिंदी व्याकरण के एक अन्य महत्वपूर्ण खंड की ओर बढ़ सकते हैं जो भाषा को और समृद्ध करता है - क्रिया और उसके भेद। क्रिया के बिना सर्वनाम अधूरे हैं। आगे पढ़ें: विशेषण (Adjective) - परिभाषा एवं भेद

📝 सर्वनाम शुद्ध प्रयोग अभ्यास वर्कशीट

वाक्य शुद्धिकरण, अशुद्धि पहचान और सुधार पर आधारित उन्नत स्तर के अभ्यास प्रश्न।

वर्कशीट खोलें


© 2025 Guided Path Noida | All Rights Reserved