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संज्ञा के कारक – परिभाषा, भेद और प्रयोग (Case in Noun) | Hindi Grammar | GPN

सामग्री अंतिम बार अपडेट की गई: 17 JUNE 2026

क्या आपने कभी सोचा है कि “राम ने खाना खाया” और “राम को खाना मिला” – इन दोनों वाक्यों में ‘राम’ का रूप अलग-अलग क्यों है? पहले वाक्य में ‘राम’ ने काम किया, दूसरे में ‘राम’ को काम का फल मिला। हिंदी व्याकरण में संज्ञा के इस बदलते रूप को कारक (Case) कहते हैं। कारक संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है जो वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध को दर्शाता है। इस पोस्ट में हम संज्ञा के कारक (Case of Noun) – परिभाषा, कारक के 8 भेद, कारक चिह्न, पहचान के नियम और वाक्यों में प्रयोग को विस्तार से समझेंगे। यह पोस्ट कक्षा 6‑7 के छात्रों के लिए बनाई गई है।

✅ अनुशंसित: कक्षा 6-7 | CBSE एवं UP Board



1. कारक की परिभाषा – संज्ञा का रूप

कारक (Case) संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है जो वाक्य में क्रिया के साथ उसके संबंध को दर्शाता है। संज्ञा के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य में उसका क्या काम है – कर्ता है, कर्म है, या कोई अन्य संबंध – उसे कारक कहते हैं।

कारक की सरल परिभाषा: “संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य की क्रिया के साथ उसके संबंध का पता चले, उसे कारक कहते हैं।”

महत्वपूर्ण बात:
  • हिंदी में 8 कारक होते हैं – प्रत्येक का अपना कारक चिह्न होता है।
  • संज्ञा के अंत में लगने वाले ‘ने’, ‘को’, ‘से’, ‘का’ आदि कारक चिह्न कहलाते हैं।
  • कारक चिह्न ही बताते हैं कि संज्ञा किस कारक में है।

हिंदी में कारक का ज्ञान बहुत आवश्यक है क्योंकि इससे हम सही वाक्य बना सकते हैं – “राम ने खाना खाया” (ने = कर्ता कारक), “राम को खाना मिला” (को = कर्म कारक)।

2. कारक के 8 भेद – विस्तार से

हिंदी व्याकरण में मुख्यतः 8 कारक होते हैं। प्रत्येक का अपना कारक चिह्न और कार्य होता है।

1. कर्ता कारक (Nominative Case): वाक्य में जो काम करता है।
चिह्न: ने (कभी-कभी बिना चिह्न)
उदाहरण:राम खाना खाता है।” (कर्ता)

2. कर्म कारक (Accusative Case): जिस पर काम का प्रभाव पड़ता है।
चिह्न: को
उदाहरण: “राम खाना खाता है।” (कर्म)

3. करण कारक (Instrumental Case): जिसके द्वारा काम किया जाए।
चिह्न: से, के द्वारा
उदाहरण: “राम ने चाकू से फल काटा।” (करण)

4. संप्रदान कारक (Dative Case): जिसके लिए काम किया जाए।
चिह्न: को, के लिए
उदाहरण: “राम ने गाय को घास दी।” (संप्रदान)

5. अपादान कारक (Ablative Case): जिससे अलग होने का भाव हो।
चिह्न: से
उदाहरण: “राम पेड़ से गिरा।” (अपादान)

6. संबंध कारक (Genitive Case): जो संबंध दर्शाता है।
चिह्न: का, की, के
उदाहरण:राम की किताब।” (संबंध)

7. अधिकरण कारक (Locative Case): आधार या स्थान दर्शाता है।
चिह्न: में, पर
उदाहरण: “राम मंदिर में है।” (अधिकरण)

8. संबोधन कारक (Vocative Case): पुकारने या बुलाने के लिए।
चिह्न: हे, अरे, ओ
उदाहरण:हे राम, मेरी रक्षा करो।” (संबोधन)

इन 8 कारकों को याद रखने के लिए एक मददगार श्लोक है – “कर्ता कर्म करण संप्रदान, अपादान संबंध अधिकरण, संबोधन आठ कारक जान।”

3. कारक चिह्न – पहचान के लिए तालिका

प्रत्येक कारक का एक विशेष चिह्न होता है। इन चिह्नों को पहचानना सबसे आसान तरीका है कारक को पहचानने का।

कारककारक चिह्नउदाहरण वाक्य
कर्ताने (विशेष), कोई चिह्न नहीं“राम ने खाना खाया।”
कर्मको“राम खाना खाता है।” (कोई चिह्न नहीं)
करणसे, के द्वारा“राम ने चाकू से फल काटा।”
संप्रदानको, के लिए“राम ने गाय को घास दी।”
अपादानसे“राम पेड़ से गिरा।”
संबंधका, की, केराम की किताब।”
अधिकरणमें, पर“राम मंदिर में है।”
संबोधनहे, अरे, ओहे राम, मेरी रक्षा करो।”
ट्रिक – कारक चिह्न याद रखने का आसान तरीका: “ने, को, से, के, का, में, हे” – ये सात चिह्न 7 कारकों को दर्शाते हैं। बिना चिह्न वाला शब्द प्रायः कर्ता या कर्म होता है (जिसे पहचानने के लिए वाक्य को ध्यान से देखना पड़ता है)।

4. कारक और विभक्ति में अंतर

कारक और विभक्ति – दोनों को अक्सर एक समझ लिया जाता है, लेकिन इनमें मूल अंतर है –

  • कारक – वाक्य में संज्ञा का क्रिया के साथ संबंध है।
    जैसे – “राम ने खाना खाया” – यहाँ ‘ने’ कारक चिह्न है।
  • विभक्ति – संज्ञा के अंत में आने वाला प्रत्यय (जैसे – ‘राम’ + ‘ने’ = ‘राम’ की विभक्ति)।
    जैसे – “राम” (मूल रूप) में ‘ने’ जोड़कर “राम ने” बनाया – यह विभक्ति है।

सरल शब्दों में – कारक वाक्य-स्तर पर संबंध है, विभक्ति शब्द-स्तर पर प्रत्यय है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं – हर कारक का अपना विभक्ति-चिह्न होता है, जिसे हम कारक-चिह्न कहते हैं।

5. वाक्यों में कारक का प्रभाव

कारक का प्रभाव वाक्य में संज्ञा के रूप और क्रिया दोनों पर पड़ता है –

  • कारक के अनुसार संज्ञा का रूप बदलता है:राम खाता है।” (कर्ता – बिना चिह्न)
    राम ने खाना खाया।” (कर्ता – ‘ने’ चिह्न)
    राम को किताब चाहिए।” (कर्म/संप्रदान – ‘को’ चिह्न)
  • क्रिया पर प्रभाव: “राम खाता है।” (कर्ता के साथ क्रिया पुल्लिंग में)
    “सीता खाती है।” (कर्ता के साथ क्रिया स्त्रीलिंग में)
    (ध्यान दें: ‘ने’ के साथ क्रिया का लिंग कर्ता के अनुसार नहीं बदलता – “राम ने खाना खाया” और “सीता ने खाना खाया” दोनों में क्रिया ‘खाया’ समान रहती है।)
  • कारक की पहचान – प्रश्नवाचक शब्द: कौन? (कर्ता), किसे? (कर्म), किससे? (करण), किसके लिए? (संप्रदान), कहाँ? (अधिकरण) – ये प्रश्न कारक पहचानने में सहायक हैं।

सही कारक का प्रयोग वाक्य को शुद्ध, स्पष्ट और अर्थपूर्ण बनाता है।



हल सहित उदाहरण (5)

उदाहरण 1
प्रश्न: “राम ने खाना खाया।” – इस वाक्य में ‘राम’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: कर्ता कारक
व्याख्या: ‘राम’ ने काम किया है – ‘ने’ चिह्न है, इसलिए कर्ता कारक।
उदाहरण 2
प्रश्न: “राम ने सीता को किताब दी।” – इस वाक्य में ‘सीता’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: संप्रदान कारक
व्याख्या: ‘सीता को’ किताब दी गई – ‘को’ चिह्न, किसी के लिए किया गया काम – संप्रदान कारक।
उदाहरण 3
प्रश्न: “राम मंदिर में है।” – इस वाक्य में ‘मंदिर’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: अधिकरण कारक
व्याख्या: ‘मंदिर में’ – स्थान बताता है, ‘में’ चिह्न – अधिकरण कारक।
उदाहरण 4
प्रश्न: “राम ने चाकू से फल काटा।” – इस वाक्य में ‘चाकू’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: करण कारक
व्याख्या: ‘चाकू से’ – जिसके द्वारा काम किया गया – करण कारक (से चिह्न)।
उदाहरण 5
प्रश्न: “हे राम, मेरी रक्षा करो।” – इस वाक्य में ‘राम’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: संबोधन कारक
व्याख्या: ‘हे राम’ – पुकारने के लिए – संबोधन कारक (हे चिह्न)।

अभ्यास प्रश्न (5)

प्रश्न 1
“गाय चर रही है।” – इस वाक्य में ‘गाय’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: कर्ता कारक (गाय ने काम किया – बिना चिह्न)
प्रश्न 2
“सीता ने भोजन पकाया।” – इस वाक्य में ‘सीता’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: कर्ता कारक (ने चिह्न – काम करने वाला)
प्रश्न 3
“राम के पास किताब है।” – इस वाक्य में ‘राम’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: संबंध कारक (के – संबंध दर्शाता है)
प्रश्न 4
“राम पेड़ से गिरा।” – इस वाक्य में ‘पेड़’ किस कारक में है?
उत्तर देखें
उत्तर: अपादान कारक (से – अलग होने का भाव)
प्रश्न 5
निम्न में से किस वाक्य में संबोधन कारक है? (क) राम जाओ, (ख) हे राम, (ग) राम का घर
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) हे राम – यह संबोधन कारक है (पुकारने के लिए)

संज्ञा के कारक की समझ क्यों ज़रूरी है?

कारक हिंदी व्याकरण का वह अंग है जो वाक्य के प्रत्येक शब्द को उसके सही स्थान और सही संबंध में रखता है। कारक के ज्ञान के बिना हम न तो सही वाक्य बना सकते हैं और न ही किसी वाक्य का सही अर्थ निकाल सकते हैं। इस पोस्ट में हमने  वाक्य शुद्धि और  वर्तनी के साथ कारक के नियमों को भी जोड़कर समझाया है।

अभ्यास से ही कारक की पहचान मज़बूत होती है। अपने आस-पास की बातचीत में कारक चिह्नों को पहचानें – ‘ने’, ‘को’, ‘से’, ‘का’ आदि – और उनके सही प्रयोग का अभ्यास करें। कारक ही आपकी हिंदी को शुद्ध, प्रवाहपूर्ण और सटीक बनाते हैं।

📝 संज्ञा के कारक अभ्यास – कक्षा 6-7

इस इंटरैक्टिव वर्कशीट में 25 वाक्य दिए गए हैं – आपको बताना है कि प्रत्येक वाक्य में रेखांकित शब्द किस कारक में है। साथ ही, गलत कारक चिह्न वाले वाक्यों को शुद्ध करना है। उत्तर कुंजी से स्वयं जाँच कर सकते हैं। यह पूरी तरह ऑनलाइन अभ्यास पत्रिका है – इसे खोलें और अपनी समझ को परखें।

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