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संज्ञा के कारक (Case of Noun) | Hindi Grammar | GPN

क्या आप जानते हैं कि एक ही शब्द 'राम' वाक्य में अलग-अलग भूमिकाएँ निभा सकता है? "राम ने रावण को मारा" में 'राम' कर्ता है, "रावण ने राम को बंदी बनाया" में 'राम' कर्म बन गया। यह भूमिका परिवर्तन 'कारक चिह्नों' (ने, को, से आदि) के कारण होता है। कारक व्याकरण की वह प्रणाली है जो संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से संबंध और उसकी भूमिका स्पष्ट करती है। यह भाषा का वह ढाँचा है जो शब्दों को जोड़कर अर्थपूर्ण वाक्य बनाता है।

✅ उपयुक्त कक्षाएँ: कक्षा 6–7 (परिचय एवं मूलभूत कारक) | कक्षा 8–9 (सभी आठ कारक एवं प्रयोग) | कक्षा 10–12 (जटिल एवं साहित्यिक प्रयोग)


1. संज्ञा के कारक (Case of Noun) का परिचय

सोचिए, यदि वाक्य में हर संज्ञा अपनी मर्जी से घूमे और कोई उसकी भूमिका तय न करे, तो कैसा होगा? "माँ बच्चे दूध पिलाती है" – इसमें कौन किसे दूध पिला रहा है? यदि 'माँ' और 'बच्चे' की जगह बदल दें, तो अर्थ उल्टा हो जाएगा! कारक (Case) वह व्याकरणिक तंत्र है जो संज्ञा या सर्वनाम की वाक्य में भूमिका (कर्ता, कर्म, संबंध आदि) निश्चित करता है। यह भूमिका कारक चिह्नों (परसर्ग) जैसे 'ने', 'को', 'से', 'के लिए' आदि के द्वारा प्रकट होती है। हिंदी में आठ कारक माने गए हैं, और प्रत्येक का एक विशिष्ट कार्य है।

रोज़मर्रा की भाषा में हम इन कारक चिह्नों का अनजाने में ही सही प्रयोग करते हैं। जब आप कहते हैं "मैंने सेब खाया" तो 'ने' (कर्ता कारक) बता रहा है कि 'मैं' कर्ता है। "मैं बाज़ार से आया" में 'से' (अपादान कारक) बता रहा है कि आगमन का स्रोत क्या है। कारक चिह्नों के बिना वाक्य अधूरे और भ्रमित करने वाले हो जाते।

2. परिभाषा

परिभाषा: वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ, या दूसरे संज्ञा/सर्वनाम के साथ जो संबंध होता है, उसे व्यक्त करने वाले रूपान्तर या चिह्न को कारक (Case of Noun) कहते हैं। सरल शब्दों में, कारक वे रूप या चिह्न हैं जो बताते हैं कि संज्ञा वाक्य में क्या काम कर रही है।

3. कारक की पहचान के मुख्य बिंदु

किसी संज्ञा का कारक पहचानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें:

  • कारक चिह्न (परसर्ग): प्रत्येक कारक का एक या अधिक निश्चित चिह्न होता है। जैसे: कर्ता कारक → ने, कर्म कारक → को (विशेष स्थिति में), करण कारक → से, द्वारा
  • प्रश्न पूछकर: हर कारक के लिए एक विशेष प्रश्न होता है। उस प्रश्न का उत्तर देने वाला शब्द उसी कारक में होगा।
    • कर्ता कारक: किसने? (राम ने)
    • कर्म कारक: किसको / क्या? (सेब को / सेब)
    • संप्रदान कारक: किसके लिए? (बच्चे के लिए)
  • क्रिया के साथ संबंध: कारक का सीधा संबंध वाक्य की क्रिया से होता है। कर्ता कारक कर्ता की क्रिया बताता है, कर्म कारक क्रिया का लक्ष्य बताता है, अपादान कारक क्रिया के स्रोत या अलगाव को बताता है, आदि।
  • संज्ञा के रूप में परिवर्तन: कुछ कारकों में संज्ञा के रूप में भी बदलाव आता है (विशेषतः संबंध कारक और अधिकरण कारक में)। जैसे: राम → राम का (संबंध), घर → घर में (अधिकरण)।

4. कारक के आठ प्रकार एवं विवरण

हिंदी व्याकरण में संज्ञा के आठ कारक माने जाते हैं। नीचे दी गई तालिका में इन सभी कारकों का विस्तृत विवरण, चिह्न, प्रश्न और उदाहरण दिए गए हैं।

क्रम कारक परिभाषा / कार्य कारक चिह्न (परसर्ग) प्रश्न उदाहरण
1 कर्ता कारक (Nominative Case) क्रिया को करने वाले का बोध कराता है। ने (कर्तृवाच्य में भूतकाल की क्रिया के साथ) किसने? राम ने पुस्तक पढ़ी।
2 कर्म कारक (Accusative Case) क्रिया का फल या लक्ष्य बताता है। को (जानवार/मानवीकृत वस्तु के लिए), या चिह्नहीन किसको? क्या? राम ने रावण को मारा। मैं दूध पीता हूँ।
3 करण कारक (Instrumental Case) क्रिया के साधन या माध्यम का बोध कराता है। से, द्वारा किससे? किसके द्वारा? वह कलम से लिखता है। यह काम मजदूरों द्वारा हुआ।
4 संप्रदान कारक (Dative Case) क्रिया का प्रयोजन या लाभार्थी बताता है। को, के लिए किसके लिए? यह पुस्तक बच्चों के लिए है। मैंने उसे (उसको) किताब दी।
5 अपादान कारक (Ablative Case) क्रिया के स्रोत, अलगाव या तुलना का बोध कराता है। से किससे (अलग)? कहाँ से? वह दिल्ली से आया। वह पेड़ से गिरा। राम श्याम से बड़ा है।
6 संबंध कारक (Genitive Case) दो संज्ञाओं के बीच संबंध, स्वामित्व या अधिकार बताता है। का, की, के, रा, री, रे किसका? किसकी? यह राम की पुस्तक है। मेरा घर।
7 अधिकरण कारक (Locative Case) क्रिया के स्थान या काल का बोध कराता है। में, पर, ऊपर, नीचे, आदि कहाँ? कब? किताब मेज़ पर है। वह सोमवार को आएगा।
8 संबोधन कारक (Vocative Case) किसी को पुकारने, बुलाने या संबोधित करने का बोध कराता है। हे, अरे, ओ या विस्मयादिबोधक चिह्न (!) हे राम! मेरी सहायता करो। अरे सोहन! इधर आओ।

5. विस्तृत उदाहरण एवं विशेष स्थितियाँ

कारकों के प्रयोग में कुछ विशेष स्थितियाँ और उदाहरण:

  • कर्ता कारक (ने) का प्रयोग: 'ने' चिह्न केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल (पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत, हेतुहेतुमद् भूत) में लगता है।
    • सीता ने फल खाया। (पूर्ण भूत – 'ने' लगा)
    • सीता फल खाती है। (वर्तमान – 'ने' नहीं लगा)
    • सीता फल खाएगी। (भविष्यत् – 'ने' नहीं लगा)
  • कर्म कारक में 'को' चिह्न का प्रयोग: सजीव (विशेषकर मनुष्य) कर्म के साथ 'को' लगता है, निर्जीव के साथ प्रायः नहीं।
    • मैंने बच्चे को बुलाया। (सजीव – 'को' लगा)
    • मैंने दूध पिया। (निर्जीव – 'को' नहीं लगा)
    • अपवाद: भावात्मक प्रयोग में निर्जीव के साथ भी 'को' लग सकता है। जैसे: "मैं मातृभूमि को प्रणाम करता हूँ।"
  • 'से' चिह्न के तीनों प्रयोग (करण, अपादान, अपादान-तुलना):
    • करण: "वह गाड़ी से आया।" (साधन)
    • अपादान (स्रोत): "वह दिल्ली से आया।" (स्थान से आगमन)
    • अपादान (तुलना): "राम श्याम से लम्बा है।" (तुलना)
    • अपादान (अलगाव): "पत्ता पेड़ से गिरा।" (अलग होना)
  • संबंध कारक के रूप: 'का, की, के' लिंग और वचन के अनुसार बदलते हैं।
    • राम का भाई (पु. एक.)
    • राम की बहन (स्त्री. एक.)
    • राम के दोस्त (पु. बहु.)
    • राम की किताबें (स्त्री. बहु.)

6. वाक्य में प्रयोग की विधि एवं महत्व

कारकों का सही प्रयोग वाक्य को स्पष्ट और तार्किक बनाता है। कारक चिह्न गलत लगने पर अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

  • अर्थ में भिन्नता:
    • "राम को मारो।" (कर्म कारक – राम कर्म है, उसे मारने का आदेश)
    • "राम से मारो।" (करण कारक – राम साधन है, उसके द्वारा किसी और को मारने का आदेश)
  • वाक्य रचना में: एक वाक्य में अलग-अलग कारकों का संयोजन होता है।
    • "माँ ने (कर्ता) बच्चे के लिए (संप्रदान) दूध से (करण) खीर (कर्म) बर्तन में (अधिकरण) बनाई।"
  • क्रिया विशेषण का निर्माण: कारक चिह्न संज्ञा के साथ जुड़कर क्रिया विशेषण भी बना सकते हैं।
    • धीरे-धीरे (संज्ञा 'धीर' से), रात भर (अधिकरण कारक 'भर')
  • समास निर्माण में: कारक चिह्नों के लोप से समास बनता है।
    • राजा का पुत्र = राजपुत्र (संबंध कारक 'का' का लोप)
    • आँखों से देखा = आँखों देखा (करण कारक 'से' का लोप)

7. सामान्य भ्रम व सावधानियाँ

संज्ञा के कारक (Case of Noun) को लेकर छात्रों में आम भ्रम इस प्रकार हैं:

  • 'ने' का गलत प्रयोग: अकर्मक क्रिया या भूतकाल के अलावा अन्य काल में 'ने' का प्रयोग नहीं होता। "वह ने सोता है" गलत है। सही: "वह सोता है।" "उसने सोया" भी गलत है (सोना अकर्मक क्रिया है)। सही: "वह सोया।"
  • 'को' और 'से' में भ्रम:
    • "मैं तुमको प्यार करता हूँ।" (सही – कर्म कारक, लाभार्थी)
    • "मैं तुमसे प्यार करता हूँ।" (सही – अपादान कारक, प्यार का स्रोत/विषय)
    • दोनों ही सही हैं, पर अर्थ में बारीक अंतर है। 'तुमको' में प्रत्यक्ष सम्बोधन, 'तुमसे' में भाव की अभिव्यक्ति अधिक है।
  • 'का, की, के' का गलत प्रयोग: लिंग और वचन के अनुसार इनका रूप बदलना ज़रूरी है। "यह राम के किताब है" गलत है। सही: "यह राम की किताब है।" (स्त्रीलिंग 'किताब' के साथ 'की')।
  • करण और अपादान में 'से' का भेद न समझना: 'से' के सभी प्रयोग एक जैसे नहीं हैं। प्रश्न पूछकर पहचानें: 'किससे लिखा?' (कलम से – करण), 'कहाँ से आया?' (दिल्ली से – अपादान), 'किससे बड़ा?' (भाई से – अपादान-तुलना)।
  • संबोधन कारक को छोड़ देना: संबोधन कारक को 'सम्बन्ध कारक' का ही एक भेद मान लेना या उसे गिनती में भूल जाना आम गलती है। याद रखें: संबोधन कारक आठवाँ कारक है।

8. परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • MCQ हेतु: "हिंदी में संज्ञा के कितने कारक माने जाते हैं?" उत्तर: आठ
  • कारक चिह्न बताने हेतु: "कर्ता कारक का चिह्न लिखिए।" - ने
  • प्रश्न पूछकर कारक पहचानने हेतु: "वह मुझसे बात करता है।" – रेखांकित शब्द का कारक बताइए। (प्रश्न: किससे? → अपादान कारक)।
  • रिक्त स्थान हेतु (चिह्न भरना): "राम ____ श्याम बड़ा है।" (से – अपादान कारक, तुलना)
  • याद रखने योग्य क्रम (कविता): "कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान के; अपादान, संबंध, अधिकरण, संबोधन के।"
  • महत्वपूर्ण: कर्ता कारक में 'ने' चिह्न सिर्फ सकर्मक क्रिया के भूतकाल में लगता है। यह परीक्षा का बहुत पसंदीदा प्रश्न है।

🎯 संज्ञा के कारक पहचानो: चुनौती (10 प्रश्न)

नीचे दिए गए प्रश्नों में रेखांकित शब्दों का कारक पहचानिए या सही कारक चिह्न भरिए।

1. राम ने रावण को मारा।

2. बच्चा दूध पीता है।

3. मैं पेंसिल से लिख रहा हूँ।

4. यह उपहार मेरे मित्र के लिए है।

5. पत्ता पेड़ से गिरा।

6. यह सीता की साड़ी है।

7. किताब मेज़ पर रखी है।

8. हे ईश्वर! हमारी रक्षा करो।

9. रिक्त स्थान भरें: "वह ______ (मैं/मुझसे) दस वर्ष बड़ा है।"

10. निम्नलिखित वाक्य में गलत कारक चिह्न का प्रयोग हुआ है, सुधार कर लिखिए: "उसने कल खेला था।" (खेलना अकर्मक क्रिया है)

10. सारांश

संक्षेप में, संज्ञा के कारक (Case of Noun) हिंदी व्याकरण का वह जटिल परंतु सुंदर ताना-बाना है जो शब्दों को आपस में जोड़कर अर्थपूर्ण वाक्यों की रचना करता है। ये आठ कारक (कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन) संज्ञा या सर्वनाम की वाक्य में होने वाली हर संभव भूमिका को परिभाषित करते हैं। इनके चिह्नों का सही प्रयोग न केवल व्याकरणिक शुद्धता, बल्कि अभिव्यक्ति की स्पष्टता और सौंदर्य के लिए भी आवश्यक है। कारकों की समझ के बिना वाक्य-विश्लेषण, अनुवाद और उच्चस्तरीय लेखन संभव नहीं है। यह ज्ञान भाषा की संरचना को गहराई से समझने की कुंजी है।

11. संबंधित विषय संकेत

संज्ञा के कारक (Case of Noun) को समझने के बाद, अब यह जानना बाकी है कि इन सभी व्याकरणिक ज्ञान (संज्ञा, उसके भेद, लिंग, वचन, कारक) का प्रयोग वास्तविक वाक्य निर्माण में कैसे किया जाता है। यही अंतिम और सबसे व्यावहारिक चरण है। आगे पढ़ें: संज्ञा का वाक्यों में प्रयोग (Use of Noun in Sentences) - विस्तृत अध्ययन

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